पत्रकारों की छिनी 'आजादी', अब इन प्रतिबंधों के साथ करनी होगी रिपोर्टिंग

फैसले के विरोध में पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जताया विरोध

नीरज नैयर by
Published - Thursday, 27 June, 2019
Last Modified:
Thursday, 27 June, 2019
Media

राजस्थान विधानसभा में गुरुवार से शुरू हुए बजट सत्र के दौरान मीडिया पर कई प्रतिबंध लगाये गए हैं। नए नियमों के अनुसार, मीडियाकर्मियों को राज्य के किसी भी मंत्री या विपक्ष के नेता से मिलने की अनुमति नहीं है। स्पीकर सीपी जोशी के निर्देश के अनुसार, पत्रकार विधानसभा की मीडिया लॉबी तक सीमित रहेंगे।

स्पीकर के इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी का कहना है कि मीडिया पर प्रतिबंध आपातकाल के दौर में लगाये गए थे। अब यदि पत्रकारों पर इस तरह के प्रतिबंध राजस्थान में लगाये जा रहे हैं तो यह अच्छे संकेत नहीं हैं।

वासुदेव देवनानी ने स्पीकर से मीडियाकर्मियों को पहले की तरह स्वतंत्रता देने की अपील की है। उनका कहना है कि लोगों तक जानकारी पहुंचाना पत्रकारों का काम है और हमें उनके अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। यह व्यवस्था सभी राज्यों में है, लिहाजा राजस्थान को अपवाद नहीं बनना चाहिए।

वहीं, स्पीकर के इस फैसले से पत्रकारों में भी नाराजगी है। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात कर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को भरोसा दिलाया है कि वो इस मसले पर स्पीकर से बात करेंगे।

नई व्यवस्था से पहले मीडियाकर्मियों को मंत्रियों, नेता प्रतिपक्ष, विपक्षी विधायकों, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर के चैम्बर और डीआईपीआर अधिकारियों के कार्यालयों में जाने की छूट थी। इसके अलावा अब सचिवालय के लिए पास की संख्या भी कम कर दी गई है।

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ब्रॉडकास्टर्स की इस मांग को सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने ठुकराया, कहा- नहीं कर सकते भेदभाव

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि मंत्रालय टीवी चैनलों और अखबारों के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म को नए आइटी नियमों के दायरे से बाहर नहीं करेगा।

Last Modified:
Saturday, 12 June, 2021
MIB

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि मंत्रालय टीवी चैनलों और अखबारों के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म को नए आइटी नियमों के दायरे से बाहर नहीं करेगा। साथ ही मंत्रालय ने इनसे आइटी नियम, 2021 के प्रावधानों के अनुपालन के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा है।

सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि संगठनों की वेबसाइट को कानून के दायरे में लाने का औचित्य तर्कपूर्ण है। मंत्रालय ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर, पब्लिशर ऑफ ऑनलाइन क्यूरेटट कंटेंट या ओटीटी प्लेटफॉर्म और एसोसिएशन ऑफ डिजिटल मीडिया पब्लिशर को दिए स्पष्टीकरण में यह बात कही।

मंत्रालय ने कहा कि कानून में किसी तरह के अपवाद को शामिल करने का मतलब उन डिजिटल न्यूज पब्लिशर के साथ भेदभाव करना है, जो पारंपरिक टीवी या प्रिंट मीडिया से नहीं जुड़े हैं।

जब से नए आईटी नियम अस्तित्व में आए हैं, तभी से अधिकांश मीडिया संगठनों ने, फिर चाहे वह टेलीविजन हो या प्रिंट सभी ने इन नए नियमों के तहत आने का विरोध किया है। परंपरागत मीडिया ने तर्क दिया कि वे पहले से ही विभिन्न नियमों और कानूनों के तहत बंधे हुए है।

वहीं, इसी कवायद के तहत नेशनल ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) ने हाल ही में मंत्रालय को पत्र भी लिखा, जिसमें पारंपरिक टेलीविजन न्यूज मीडिया और उनके डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमों, 2021 के दायरे से बाहर रखने और छूट प्रदान करने का अनुरोध किया था। एनबीए ने कहा था कि ये पहले से ही विभिन्न नियमों, कानूनों, दिशानिर्देशों और संहिताओं से बंधे हुए हैं।

वहीं, अब मंत्रालय ने एनबीए के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए कहा कि 'चूंकि, आचार संहिता यह कहती है कि ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पारंपरिक प्रिंट और टीवी मीडिया के लिए मौजूदा मानदंडों/ सामग्री नियमों का पालन करेंगे, इसलिए ऐसी संस्थाओं के लिए कोई अतिरिक्त नियामक बोझ नहीं हैं। इसलिए डिजिटल मीडिया नियमों से बाहर रखने के उनके अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।'

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वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता को सूचना प्रसारण मंत्रालय में मिली बड़ी जिम्मेदारी

केंद्र सरकार ने वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इस बारे में सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं।

Last Modified:
Friday, 11 June, 2021
Kanchan Gupta

केंद्र सरकार ने वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इसके तहत कंचन गुप्ता को ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) में सीनियर एडवाइजर के तौर पर नियुक्त किया गया है। इस बारे में मंत्रालय की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। इन आदेशों के अनुसार इस पद पर कंचन गुप्ता की नियुक्ति एक साल अथवा अगले आदेश तक (जो भी पहले हो) प्रभावी होगी।  

भारत सरकार के डिप्टी सेक्रेट्री राजेंद्र सिंह द्वारा जारी इस आदेश के अनुसार, इस पद के लिए नियम व शर्तें अलग से जारी की जाएंगी। कंचन गुप्ता को ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ में सीनियर एडवाइजर के तौर पर नियुक्त किए जाने के आदेश की प्रति आप यहां पढ़ सकते हैं।

बता दें कि बंगाली पत्रकार कंचन गुप्ता जमशेदपुर और पटना में पले-बढ़े हैं। कोलकाता के सेंट जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने 'द टेलिग्राफ' अखबार से पत्रकारिता की पारी की शुरुआत की। वे एमजे अकबर और विनोद मेहता जैसे पत्रकारों के साथ काम कर चुके हैं।

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सवालों के घेरे में आने वाली रेटिंग से बेहतर है कि कोई रेटिंग न आए: अविनाश पाण्डेय

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में एबीपी नेटवर्क के सीईओ अविनाश पाण्डेय ने तमाम मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।

Last Modified:
Friday, 11 June, 2021
Governance Now

कुछ न्यूज चैनल्स द्वारा टेलिविजन रेटिंग पॉइंट्स (टीआरपी) में हेराफेरी के आरोपों के बाद अक्टूबर 2020 के मध्य से न्यूज चैनल्स की रेटिंग जारी नहीं हो रही है। वीकली व्युअरशिप रेटिंग न होने के बावजूद लॉकडाउन के दौरान दुनियाभर में न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप में काफी इजाफा हुआ है। इन सबके बीच ‘एबीपी नेटवर्क’ (ABP Network) के सीईओ अविनाश पाण्डेय का कहना है कि खराब या गलत रेटिंग मिलने से अच्छा है कि रेटिंग न मिले।

‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) के एमडी कैलाशनाथ अधिकारी के साथ एक बातचीत में अविनाश पाण्डेय का कहना है कि यदि रेटिंग सिस्टम से छेड़छाड़ की गई हो और वास्तविक सच्चाई सामने न आए तो सवालों के घेरे में आने वाली रेटिंग से बेहतर है कि कोई रेटिंग न आए।

पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म पर ‘विजिनरी टॉक सीरीज’ (Visionary Talk series) के तहत होने वाले इस वेबिनार के दौरान अविनाश पाण्डेय का कहना था कि विभिन्न टीवी चैनल्स पर होने वाला शोरगुल लगभग खत्म हो गया है और चैनल्स प्रधानमंत्री के भाषणों को कवर कर रहे हैं।  

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय तक डाटा की अनुपलब्धता इंडस्ट्री के लिए अच्छा नहीं है और इंडस्ट्री के दिग्गजों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को दिया जाने वाला डाटा त्रुटि रहित हो और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स की मांग पूरी करता हो। ऐसा होने पर न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फिर से रेटिंग्स पर वापस आ जाएंगे और हर कोई खुश होगा। अभी यह कंटेंट और एडवर्टाइजर के लिए अच्छा लगता है।   

इस बातचीत के दौरान अविनाश पाण्डेय का यह भी कहना था कि न्यूज का काम सूचना देना, शिक्षित करना और मनोरंजन करना है, लेकिन यहां आखिरी को अन्य दो पर प्राथमिकता मिलती है, यही समस्या है।

उनका कहना था, ‘इस तथ्य के बावजूद कि पिछले दो वर्षों में भारत में शिक्षा क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है, किसी भी टीवी चैनल ने इस पर बहस नहीं की है या न्यूज चैनल्स पर कोई चर्चा नहीं हुई है। शिक्षा सुधारों को लेकर कोई भी खबर नहीं आई है। आज न्यूज इस बात पर फोकस गई है कि उनकी कवरेज ज्यादा अच्छी है। उन्होंने कहा कि इसका कारण बार्क (BARC) का डाटा है जो बताता है कि जब भी आप कोई ऐसा कार्यक्रम चलाते हैं जो सनसनीखेज हो, तो रेटिंग बढ़ने लगती है, क्योंकि बार्क सिस्टम को मनोरंजन को मापने के लिए डिज़ाइन किया गया लगता है, जो यह बहुत अच्छा करता है, लेकिन न्यूज जैसे गंभीर जॉनर को मापने के लिए पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि ब्रॉडकास्ट न्यूज का वर्तमान मॉडल काफी त्रुटिपूर्ण है, क्योंकि यह पूरी तरह से एडवर्टाइजिंग पर निर्भर है। यह रेवेन्यू के लिए एडवर्टाइजिंग पर निर्भर होता है। अभी या बाद में न्यूज ब्रॉडकास्टर्स को पे मॉडल (pay model) की ओर बढ़ना चाहिए जो इस सिस्टम की खामियों को दूर कर देगा।  

अविनाश पाण्डेय के अनुसार, ‘उन्हें ऐसा कंटेंट तैयार करना चाहिए, जिसे लोग सबस्क्राइब करना चाहते हों वे इस पर जाएं और इसे देखें। इसके लिए लोग भुगतान करेंगे और रेवेन्यू मिलेगा। अभी यह फ्री टू एयर (FTA) है और रेटिंग पर निर्भर है।’

उन्होंने कहा, ’जब आपका पूरा रेवेन्यू एडवर्टाइजिंग पर निर्भर होता है तो तमाम एडिटर्स उन स्टोरीज को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं जो  मनोरंजक अथवा सनसनीखेज हों और इसने समय के साथ भारतीय टेलिविजन न्यूज की समग्र गुणवत्ता को कम कर दिया है।’

इसके साथ ही पाण्डेय का यह भी कहना था, ’हालांकि, न्यूज की गुणवत्ता पूरी तरह से कम नहीं हुई है। न्यूज चैनल को सफल होने के लिए रोचक तरीके से न्यूज प्रदान करना एक महत्वपूर्ण घटक है। इन सबके बावजूद तमाम न्यूज एडिटर्स हमेशा ये मानते हैं कि बेशक न्यूज का कुछ हिस्सा रेटिंग के लिए किया जाता है, अधिकांश न्यूज ने बेहतरीन कंटेट प्रदान किया है। दुनिया में कोई भी अन्य चैनल भारत के साथ तुलना नहीं कर सकता है, क्योंकि यह विविध और अलग है, जहां हर दिन कुछ न कुछ हो रहा है।’

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Viacom 18 से जुड़े विवेक मोहन शर्मा, मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

पूर्व में ‘मिर्ची’ के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे विवेक मोहन

Last Modified:
Thursday, 10 June, 2021
Vivek Mohan

‘वायकॉम18’ (Viacom18) ने विवेक मोहन शर्मा को कंपनी में ब्रैंडेड कंटेंट हेड के पद पर नियुक्त करने की घोषणा की है। उनकी नियुक्ति तुरंत प्रभाव से मान्य होगी। इस भूमिका में विवेक मोहन पर नेटवर्क स्तर पर ब्रैंडेड कंटेंट और सॉल्यूशंस की जिम्मेदार होगी और वह ‘वायकॉम18’ के हेड (नेटवर्क सेल्स) महेश शेट्टी को रिपोर्ट करेंगे।

टीम में विवेक का स्वागत करते हुए ‘वायकॉम18’ के हेड (नेटवर्क सेल्स) महेश शेट्टी का कहना है, ‘हम बहुत सारे विकल्पों से भरी दुनिया में रह रहे हैं, हालांकि उनके बीच काफी कम अंतर है।  ब्रैंडेड कंटेंट में इस अंतर को सामने लाने और ऑडियंस के साथ अधिक आकर्षक और भावनात्मक क्षमता से जुड़ने की क्षमता है। कंपनी को आगे ले जाने में हमें विवेक के अनुभवों का काफी लाभ मिलेगा।‘

वहीं, अपनी इस भूमिका के बारे में विवेक मोहन शर्मा का कहना है, ‘आज के समय में ब्रैंड्स इस तरह खुद को स्थापित करना चाह रहे हैं कि वे ऑडियंस के साथ लंबे समय तक जुड़े रहें। इस काम में ब्रैंडेड कंटेंट एक पुल का काम करते हैं। वायकॉम18 में अपनी इस भूमिका में मैं वैल्यू, इनोवेशन और समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह तैयार हूं।‘

विवेक मोहन शर्मा को मीडिया, टेलिकॉम और बैंकिंग सेक्टर्स में बिजनेस मैनेजमेंट, रेवेन्यू और मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करने का करीब दो दशक का अनुभव है। पूर्व में वह मिर्ची, आइडिया सेल्युलर और आईसीआईसीआई बैंक में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट विवेक मोहन शर्मा ने मणिपाल की T.A. Pai Management Institute से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

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सन टीवी नेटवर्क से जुड़े प्रशांत भट्ट, मिली यह जिम्मेदारी

इससे पहले हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल ‘दंगल टीवी’ के प्रोग्रामिंग हेड की भूमिका निभा रहे थे प्रशांत भट्ट

Last Modified:
Wednesday, 09 June, 2021
Prashant Bhatt

‘एंटर10 टेलीविजन' (Enterr10 Television) के फ्री-टू-एयर (FTA) हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल ‘दंगल टीवी’ (Dangal TV) के पूर्व प्रोग्रामिंग हेड प्रशांत भट्ट ने अपनी नई पारी शुरू की है। उन्होंने अपना नया सफर ‘सन टीवी नेटवर्क‘ (Sun TV Network) में बतौर कंसल्टेंट शुरू किया है।  

प्रशांत भट्ट पिछले साल अक्टूबर में चैनल से जुड़े थे और पिछले सात महीने से चैनल की प्रोग्रामिंग की कमान संभाल रहे थे। उन्होंने इस साल अप्रैल में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले वह ‘जी पंजाबी’ (Zee Punjabi) के साथ जुड़े थे।

वह चैनल के फिक्शन व नॉन-फिक्शन शोज दोनों को हेड कर रहे थे। ‘जी पंजाबी‘ में भी फिक्शन व नॉन-फिक्शन शोज के कंटेंट का कॉन्सेप्ट बनाना और उसे निर्मित करने की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। नेटवर्क के लिए कुछ नए तरीके से मार्केटिंग और प्रमोशन करने की रणनीति तैयार करने की भी जिम्मेदारी उन पर थी, ताकि मार्केट में ‘जी नेटवर्क‘ और मजबूत छाप छोड़ सके। 

प्रशांत भट्ट ‘स्टूडियो बी&एम‘ (Studio B&M) के फाउंडर व क्रिएटिव डायरेक्टर भी रहे हैं। यहां उन्होंने ‘चैनल वी’ (Channel V) के लिए ‘मस्तांगी’ (Mastaangi) और ‘एंडटीवी’ (AndTV) के लिए ‘सिद्धि विनायक’ (Siddhi Vinayak) शो को प्रड्यूस किया। उन्होंने ‘कलर्स टीवी’ (Colors TV) के लिए फिक्शन प्रोग्रामिंग का भी नेतृत्व किया।

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फर्जी पत्रकारों का इस तरह फूटा भांडा, पुलिस ने चार को किया गिरफ्तार

कथित पत्रकारों से अलग-अलग मीडिया संस्थानों के आठ परिचय पत्र और 6900 रुपये नकद, चार मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद हुआ है।

Last Modified:
Tuesday, 08 June, 2021
Crime

लॉकडाउन के दौरान दुकान खोलने पर कार्रवाई का भय दिखाकर दुकानदारों से अवैध वसूली करने के आरोप में पुलिस ने चार कथित पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया है। मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले का है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिले के उरगा थाना क्षेत्र के तहत फरसवानी गांव में दुकानदारों से जबरन वसूली करने के आरोप में जिन कथित पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें सुखसागर माथुर (40), राजेन्द्र प्रसाद जायसवाल (36), पवन कुमार नामदेव (34) और कीर्तन पटेल (29) शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट में पुलिस अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि जिले में कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए लॉकडाउन लगाया गया है। इस दौरान दुकानदारों को शाम छह बजे तक ही दुकान खोलने की छूट दी गई है, वहीं रविवार को जिले में संपूर्ण लॉकडाउन लगाने के आदेश दिए गए हैं।

पुलिस को जानकारी मिली कि रविवार को चारों कथित पत्रकार फरसवानी गांव पहुंचे और वहां दुकानदारों को दुकान बंद नहीं करने के कारण कार्रवाई करवाने की धमकी देने लगे। आरोपियों ने गांव के दुकानदारों से इसके एवज में कथित रूप से पैसों की मांग की, लेकिन ग्रामीणों ने पुलिस को जानकारी दे दी। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को पकड़ लिया।

उन्होंने बताया कि कथित पत्रकारों से अलग-अलग मीडिया संस्थानों के आठ परिचय पत्र और 6900 रुपये नकद, चार मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद हुआ है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।  

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इन आरोपों में पत्रकार गिरफ्तार, कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा

बाजार से सामान लेने के लिए निकले थे पत्रकार। विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार के इस कदम की आलोचना की है।

Last Modified:
Friday, 04 June, 2021
Arrest

तेलंगाना के एक पत्रकार को गुरुवार को हैदराबाद में उस समय गिरफ्तार कर लिया गया, जब वह लॉकडाउन के दौरान किराने का सामान खरीदने के लिए निकले थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पत्रकार रघु रामाकृष्ण (Raghu Ramakrishna) 'Tolivelugu' के लिए काम करते हैं और कथित तौर पर सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के आलोचक माने जाते हैं।

काफी देर बाद भी बाजार से नहीं लौटने पर शुरू में तो रघु रामाकृष्णा के परिजनों को लगा कि उन्हें किसी ने अगवा कर लिया है, लेकिन बाद में पुलिस ने बयान जारी कर बताया कि रघु को गिरफ्तार कर लिया गया है। 

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस का कहना है कि रघु को  दंगा करने, एक लोक सेवक को अपने कर्तव्य पालन से रोकने और गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। बताया जाता है कि रघु को फरवरी में आदिवासियों-भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुई झड़प में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद रघु को कोर्ट के समक्ष पेश किया गया,जहां से उन्हें14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं, पत्रकार यूनियनों और विपक्षी दलों ने रघु की गिरफ्तारी की निंदा की है।

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18 दिवंगत पत्रकारों के आश्रितों की उत्तराखंड सरकार यूं करेगी मदद

सभी जिला सूचना अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जो आवेदन पत्र पूर्ण नहीं हैं, उन्हें पूर्ण करते हुए 15 दिनों में मुख्यालय को भेजें

Last Modified:
Friday, 04 June, 2021
Journalist4578

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पत्रकार हित में बड़ा निर्णय लिया है। दरअसल, उन्होंने 18 दिवंगत पत्रकारों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता मंजूरी दी है।

मुख्यमंत्री ने यह निर्णय पत्रकार कल्याण कोष के अन्तर्गत आपदाग्रस्त पत्रकारों व उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता दिये जाने हेतु गठित समिति की सिफारिश पर लिया है। बता दें कि मुख्यमंत्री ही इस समिति के अध्यक्ष हैं।

पत्रकार कल्याण कोष के गठन के उपरांत यह एकमुश्त सबसे बड़ी सहायता राशि 90 लाख रुपए है। उन्होंने 18 दिवंगत पत्रकारगणों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है। इनमें से कुछ पत्रकारों की मृत्यु कोविड संक्रमण से हुई है।  

अपने इस निर्णय को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकार कल्याण कोष से 18 दिवंगत पत्रकारों के आश्रितों को पांच-पांच लाख रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई है। महानिदेशक सूचना को निर्देश दिए गए हैं कि जिन मामलों में  आवेदन प्राप्त नहीं है या अभिलेख पूर्ण नहीं है, उनको भी आर्थिक सहायता दिए जाने के लिए सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर ली जाएं।

महानिदेशक सूचना रणबीर सिंह चौहान ने कहा कि पत्रकार कल्याण कोष के लिए गठित समिति की बैठक एक जून को हुई थी। समिति के समक्ष राज्यभर से 18 प्रस्ताव आए थे, जिन्हें आर्थिक सहायता दिए जाने की संस्तुति समिति द्वारा की गई। समिति के समक्ष आठ प्रस्ताव ऐसे भी आए थे, जिनके अभिलेख पूर्ण नहीं पाए गए।

इसके लिए सभी जिला सूचना अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जो आवेदन पत्र पूर्ण नहीं हैं, उन्हें पूर्ण करते हुए 15 दिनों में मुख्यालय को भेजें, ताकि अगली बैठक में आर्थिक सहायता दिए जाने पर विचार किया जा सके।

 

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सरकार ने कोविड-19 को लेकर निजी टीवी चैनल्स के लिए जारी की ये एडवाइजरी

'सूचना प्रसारण मंत्रालय' (MIB) ने सभी प्राइवेट जनरल एंटरटेनमेंट टीवी चैनल्स (नॉन न्यूज) के लिए कोविड-19 को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है।

Last Modified:
Friday, 04 June, 2021
MIB

'सूचना प्रसारण मंत्रालय' (MIB) ने सभी प्राइवेट जनरल एंटरटेनमेंट टीवी चैनल्स (नॉन न्यूज) के लिए कोविड-19 को लेकर एक एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में टीवी चैनल्स से कहा गया है कि वे समय-समय पर टिकर अथवा अन्य माध्यमों से कोविड-19 के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए जारी छह राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर्स को प्रमोट करें। 

इनमें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का हेल्पलाइन नंबर,  महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर,  सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन 14567  (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड), मनोवैज्ञानिक सहायता के लिए निमहंस (National Institute of Mental Health and Neurosciences ) का हेल्पलाइन नंबर, आयुष कोविड-19 काउंसिलिंग हेल्पलाइन और MyGov वॉट्सऐप हेल्पडेस्क का नंबर शामिल है।

इस एडवाइजरी में कहा गया है, 'जैसा कि आप इस बात से भली-भांति अवगत हैं कि कोविड-19 के केसों में गिरावट के बावजूद देश में अभी भी यह काफी ज्यादा हैं। सरकार ने विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स (प्रिंट, टीवी, रेडियो, सोशल मीडिया आदि) समेत कई तरीकों से कोविड-19 के बारे में जागरूकता पैदा की है। लोगों के लिए सरकार द्वारा राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर भी तैयार किए गए हैं और उनका प्रचार किया जा रहा है।'

एडवाइजरी के अनुसार, 'निजी टीवी चैनलों ने इस बारे में जागरूकता पैदा करके और लोगों को सूचित करके महामारी से लड़ने में सरकार के प्रयासों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए, प्राइवेट जनरल एंटरटेनमेंट (नॉन-न्यूज) टीवी चैनल्स को सलाह दी जाती है कि वे टिकर व अन्य माध्यमों से इन छह राष्ट्रीय स्तर के हेल्पलाइन नंबर्स के बारे में जागरूकता को बढ़ावा दें।'

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एशियानेट से जुड़े रुचिर खन्ना, मिली यह बड़ी जिम्मेदारी

रुचिर खन्ना इससे पहले टाइम्स इंटरनेट में बतौर हेड (प्रॉडक्ट एंड ग्रोथ) अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे

Last Modified:
Friday, 04 June, 2021
Ruchir Khanna

‘एशियानेट न्यूज मीडिया एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ (AMEL) ने  रुचिर खन्ना को अपने डिजिटल बिजनेस का चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) नियुक्त किया है।  बता दें कि ‘AMEL’ के पोर्टफोलियो में ‘एशियानेटन्यूज.कॉम’ (asianetnews.com) और ‘इंडिगोम्यूजिक.कॉम’ (indigomusic.com) आदि कई डिजिटल ब्रैंड्स शामिल हैं और यह विभिन्न भाषाओं में कंज्यूमर्स को सर्विस प्रदान करता है।

इससे पहले रुचिर ‘टाइम्स इंटरनेट‘ में बतौर हेड (प्रॉडक्ट एंड ग्रोथ) अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। ‘टाइम्स इंटरनेट‘ में अपनी पारी के दौरान वह ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया‘, ‘न्यूजपॉइंट‘ और  ‘गैजेट्स नाउ‘ समेत ग्रुप की तमाम प्रॉपर्टीज की डिजिटल ग्रोथ का नेतृत्व कर चुके हैं। 

उन्हें प्रॉडक्ट डेवलपमेंट, ग्रोथ और मार्केटिंग का करीब दो दशक का अनुभव है। ‘टाइम्स इंटरनेट‘ से पहले रुचिर ‘हाइक मैसेंजर‘, ‘इंडिया टुडे ग्रुप‘ और ‘याहू इंडिया‘ में प्रमुख पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। 

इस बारे में ‘एशियानेट न्यूज मीडिया एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन राजेश कालरा का कहना है, ‘AMEL परिवार में रुचिर खन्ना के शामिल होने पर मुझे काफी खुशी है। हम भविष्य को देखते हुए मीडिया/टेक्नोलॉजी कंपनी तैयार कर रहे हैं और उसी के अनुरूप अपने मजबूत ब्रैंड्स ‘एशियानेटन्यूज.कॉम’ व ‘इंडिगोम्यूजिक.कॉम को तैयार कर रहे हैं। इनोवेशन, कंटेंट और सर्विसेज के द्वारा हमारा उद्देश्य इन ब्रैंड्स के ऑडियंस को बढ़ाना है। रुचिर हमारे इस मिशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मैं अपनी लीडरशिप टीम को लेकर बहुत उत्साहित हूं। नचिकेत पंतवैद्य के एमडी के रूप में कार्यभार संभालने के बाद अब रुचिर खन्ना हमसे जुड़े हैं। अब AMEL को देश का अग्रणी मीडिया-एंटरटेनमेंट टेक्नोलॉजी एंटरप्राइज बनाने का हमारा मिशन  पूरी तरह से तैयार है।'

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