विशेषज्ञों ने बताया, कोरोना के बाद कैसी रहेगी मीडिया इंडस्ट्री की 'रफ्तार'

इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के अनुसार, अर्थव्यस्था पटरी पर वापस लौटने के बाद विज्ञापन मिलने शुरू हो जाएंगे और डिजिटल व टीवी को इसका लाभ सबसे पहले मिलेगा

Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2020
Media

कोरोनावायरस (कोविड-19) के कारण देश में लॉकडाउन चल रहा है। ऐसे में लोग घरों पर ही हैं। तमाम लोग घरों से ही काम (work-from-home) कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मीडिया का इस्तेमाल अथवा खपत (Consumption) काफी बढ़ी है। हालांकि, टीवी पर व्युअरशिप में तो काफी इजाफा हुआ है, लेकिन विज्ञापन राजस्व (ad revenues) के मामले में यह उतना बेहतर नहीं कर पाया है। वहीं, इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि लॉकडाउन के बाद किसी भी अन्य सेक्टर की तुलना में टेलिविजन और डिजिटल काफी तेजी से आगे बढ़ेगा।

‘टैम एडेक्स’ (TAM AdEx) की रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी की तुलना में डिजिटल को मिलने वाले विज्ञापनों में मार्च और अप्रैल 2020 में 11 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है, वहीं टीवी में चार प्रतिशत और रेडियो में पांच प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है, लेकिन प्रिंट के विज्ञापनों में 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यदि सिर्फ अप्रैल के डाटा पर ही नजर डालें तो पता चलता है कि विभिन्न माध्यमों को मिलने वाले विज्ञापनों में कमी आई है, लेकिन यह कमी अन्य के मुकाबले सबसे कम 26.13 प्रतिशत है। टीवी में यह गिरावट 46.15 प्रतिशत, रेडियो में 71.43 और प्रिंट में सबसे ज्यादा 84 प्रतिशत देखी गई है।   

ऐड रेवेन्यू में आई गिरावट के बारे में ‘डेलॉइट इंडिया’ (Deloitte India) के पार्टनर और हेड (मीडिया एंड इंटरटेनमेंट) जेहिल ठक्कर का कहना है कि प्रिंट को छोड़कर रेडियो, डिजिटल और टीवी का इस्तेमाल (Consumption) बढ़ा है लेकिन मुद्दा यह है कि व्युअरशिप का मुद्रीकरण (monetisation) पर कितना असर पड़ा है। ठक्कर का कहना है, ‘व्युअर्स और रेटिंग के आंकड़ों में काफी इजाफा हुआ है, लेकिन मुद्दा यह है कि आप इसका विमुद्रीकरण कैसे करते हैं, यानी रेवेन्यू कैसे जुटाते हैं। अभी हम एडवर्टाइजिंग में कमी देख रहे हैं। यह ग्रोथ अर्थव्यवस्था से जुड़ी रहती है। जब अर्थव्यवस्था ठीक होनी शुरू होगी तो हमें कुछ विज्ञापन वापस मिलने शुरू हो जाएंगे। जब भी यह होगा तो मेरा मानना है कि डिजिटल और टीवी सबसे पहले रिकवर करेंगे। डिजिटल की खपत में तो पहले ही उछाल देखा जा रहा है और टीवी की बात करें तो वहां एडवर्टाइजिंग का पैसा बड़ी कंपनियों से आता है और इसका उसे लाभ मिलेगा। जो सेक्टर्स सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) और स्थानीय विज्ञापनों पर निर्भर हैं, वे जल्दी अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ेंगे।’  

वहीं, ‘ईवाई इंडिया’ (EY India) के पार्टनर और मीडिया व एंटरटेनमेंट लीडर आशीष फेरवानी ने उन फैक्टर्स के बारे में बताया जो चुनिंदा सेक्टर्स को तेजी से अपनी पहले वाली स्थिति में लाने में मदद करेंगे। फेरवानी के अनुसार, ‘जिन माध्यमों की पहुंच ज्यादा होगी वे तेजी से रिकवर करेंगे। लॉकडाउन खत्म होने के बाद विज्ञापन मिलने शुरू हो जाएंगे। उन छोटे शहरों में जहां मेट्रो शहरों की तुलना में कोविड-19 का प्रभाव कम है, वहां से ज्यादा विज्ञापन मिलने की उम्मीद है।’ फेरवानी के अनुसार, सप्लाई चेन सामान्य होने पर जहां लाइव एंटरटेनमेंट, ट्रैवल और रेस्टोरेंट्स जैसे सेक्टर्स को पटरी पर वापस आने में थोड़ा समय लगेगा, अन्य सेक्टर्स तेजी से वापस अपने ढर्रे पर लौट आएंगे।  

रिकवरी की जहां तक बात है, तमाम माध्यमों ने अपने पुराने बिजनेस मॉडल का रिव्यू शुरू कर दिया है और नए रेवेन्यू ऑप्शंस दिए हैं। जैसे-प्रिंट इंडस्ट्री में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने अपने ई-पेपर के लिए सबस्क्रिप्शन शुल्क लेना शुरू कर दिया है। इस बारे में ‘मैडिसन मीडिया ओमेगा’ (Madison Media Omega) के सीईओ दिनेश सिंह राठौड़ का कहना है, ‘कंपनियां पहले से ही कई कदम उठा रही हैं। मेरा मानना है कि उन्हें कुछ नए उपाय तलाशने होंगे और मीडिया में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।’ कोविड-19 के बाद की दुनिया में चीजें किस प्रकार बदल जाएंगी, इस बारे में राठौड़ का कहना है कि पहले की तुलना में आउट ऑफ होम(Out Of Home), सिनेमा, रेडियो और प्रिंट के मुकाबले टीवी और डिजिटल ज्यादा बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

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The Pioneer ग्रुप ने नरेंद्र कुमार व नवीन उपाध्याय को सौंपी ये जिम्मेदारी

‘द पायनियर’ (The Pioneer) ग्रुप ने हर-आनंद पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड के नरेंद्र कुमार को बतौर पब्लिशर नियुक्त किया है।

Last Modified:
Friday, 23 April, 2021
ThePoineer54

‘द पायनियर’ (The Pioneer) ग्रुप ने हर-आनंद पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड (Har-anand Publications Private Limited) के नरेंद्र कुमार को बतौर पब्लिशर नियुक्त किया है। इसके साथ ही, नवीन उपाध्याय को एग्जिक्यूटिव एडिटर की जिम्मेदारी सौंपी है।

उपाध्याय इस मीडिया हाउस से 25 साल से ज्यादा समय से जुड़े हुए हैं। इससे पहले वह नई दिल्ली में ब्यूरो चीफ थे। उपाध्याय ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (Times of India) में पांच साल की पारी के बाद वर्ष 1993 में पायनियर के साथ नई शुरुआत की थी।

सूत्रों का यह भी कहना है कि मार्केट के वर्तमान हालात को देखते हुए यह मीडिया हाउस अपने विभिन्न डिपार्टमेंट्स में 40 प्रतिशत तक सैलरी कटौती की तैयारी में है।

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CPM नेता सीताराम येचुरी के पत्रकार बेटे का कोरोना से निधन

कोरोना की दूसरी लहर में मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। मौत के इस तांडव का शिकार इस बार सबसे अधिक युवा हो रहे हैं।

Last Modified:
Thursday, 22 April, 2021
ashish454

कोरोना की दूसरी लहर में मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। मौत के इस तांडव का शिकार इस बार सबसे अधिक युवा हो रहे हैं। इस बीच सीपीएम (CPM) महासचिव और वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी के बड़े बेटे आशीष येचुरी का निधन हो गया है। वह कोरोना वायरस से संक्रमित थे। सीताराम येचुरी ने खुद अपने ट्विटर अकाउंट से यह दुखद जानकारी दी। येचुरी के बेटे का गुरुग्राम के अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां आज सुबह ही उन्होंने आखिरी सांस ली। आशीष 9 जून को 35 साल के होने वाले थे।

करीब दो हफ्तों से उनका कोरोना का इलाज चल रहा था। स्थिति गंभीर होने के बाद उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी सेहत में सुधार भी हो रहा था। कोरोना से दो हफ्ते की जंग के बाद आज सुबह साढ़े 5 बजे अचानक उनका निधन हो गया जिससे पूरा परिवार सदमे में है। आशीष के अलावा सीताराम येचुरी के परिवार में उनकी पत्नी और बेटी है। 

आशीष येचुरी, एक अखबार में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में काम कर रहे थे. दो हफ्ते तक कोरोना से जंग लड़कर जीत की दहलीज पर पहुंचने से पहले ही आशीष की सांसें थमने से उनके परिवार के साथ दोस्तों में गम का माहौल है। उनके पिता सीताराम येचुरी ने गुरुवार सुबह ट्वीट करके अपने बड़े बेटे के निधन की खबर दुनिया को दी।

सीताराम येचुरी ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘भारी दुख के साथ बताना पड़ रहा है कि कोविड-19 से आज सुबह मैंने अपने बड़े बेटे आशीष येचुरी को खो दिया। मैं उन सभी का, डॉक्टरों, नर्सों, अग्रिम मोर्चे के कर्मियों, सफाईकर्मियों का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने हमें हिम्मत दी और उनका उपचार किया तथा संकट के समय में हमारे साथ खड़े रहे।’ फिलहाल सीताराम येचुरी भी क्वारनटीन हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सीताराम येचुरी के परिवार के प्रति शोक व्यक्त किया। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, 'सीताराम येचुरी जी और उनके परिवार को पुत्र आशीष के दुखद और असामयिक निधन पर संवेदना व्यक्त करता हूं। ओम शांति।'

आशीष ने एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म, चेन्नई से पढ़ाई की थी और उन्होंने दिल्ली में 'टाइम्स ऑफ इंडिया' समेत कई मीडिया संस्थानों में काम किया। इसके बाद वह पुणे चले गए। वर्तमान में वह 'न्यूजलॉन्ड्री' (Newslaundry) वेबसाइट में असिसटेंट एडिटर की भूमिका निभा रहे थे।

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‘नवोदय टाइम्स’ के डिजिटल एडिटर की जिंदगी पर भारी पड़ी महामारी, गई जान

कोरोना वायरस ने एक बार फिर तेजी से अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है।

Last Modified:
Thursday, 22 April, 2021
ChandanJaiswal545

कोरोना वायरस ने एक बार फिर तेजी से अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। हर दिन देशभर में वायरस के रिकॉर्ड मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इस बीच कई पत्रकार भी कोरोना की चपेट में आए हैं, जिनमें से तो कई पत्रकारों की जान तक चली गई है। इन्हीं में अब एक और नाम जुड़ गया है पंजाब केसरी ग्रुप के ‘नवोदय टाइम्स’ के डिजिटल हेड चंदन जायसवाल का। चंदन जायसवाल को भी कोरोना ने अपने चपेट में ले लिया, जिसके बाद उनके शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा का लेवल बहुत ही कम रह गया और उन्हें मंगलवार को नोएडा के भारद्वाज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने गुरुवार दोपहर करीब डेढ़ बजे अंतिम सांस ली। वे करीब 40 वर्ष के थे।

चंदन जायसवाल बिहार के सिवान जिले के रहने वाले थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा है। उनका बेटा चौथी कक्षा में पढ़ रहा है।

चंदन जायसवाल पंजाब केसरी ग्रुप के साथ अक्टूबर, 2014 में जुड़े थे, जिसके बाद उनके नेतृत्व में ही ‘नवोदय टाइम्स’ डिजिटल की नींव रखी गई। इसके पहले वे ‘अमर उजाला’ डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने मार्च, 2012 में 'अमर उजाला' जॉइन किया था। इसके पहले अगस्त, 2007 से फरवरी 2012 तक 'दैनिक जागरण' में विभिन्न पदों पर रहते हुए सीनियर सब एडिटर तक की अपनी पारी खेली।

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जानिए, कैसे पत्रकारों के लिए खतरनाक देश है भारत

अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता गैर लाभ संगठन की ओर से प्रकाशित विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 में भारत की रैंकिंग नीचे नहीं गिरी है

Last Modified:
Thursday, 22 April, 2021
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भारत पत्रकारिता के लिहाज से दुनिया के सुरक्षित देशों में शुमार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय पत्रकारिता गैर लाभ संगठन की ओर से प्रकाशित विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 में भारत की रैंकिंग नीचे नहीं गिरी है, लेकिन भारत को अब भी पत्रकारिता के लिहाज से सुरक्षित देश नहीं माना गया है। इसमें कहा गया है कि भारत विश्व के सबसे अधिक खतरनाक देशों में है, जहां पत्रकारों को अपना काम सुविधाजनक तरीके से करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

 मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, ब्राजील, मैक्सिको और रूस के साथ 'खराब' श्रेणी में है। गैर लाभकारी संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) की ओर से जारी विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 में भारत की रैंकिंग पिछले वर्ष की तरह 142 ही है। मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, ब्राजील, मैक्सिको और रूस के साथ 'खराब' श्रेणी में है। 2004 में यूपीए सरकार ने सत्ता संभाली तो भारत की रैंकिंग 120 थी, जो 2005 में 106 तक आ गई थी। वहीं, 2014 में यूपीए की सत्ता जाने तक रैंकिंग गिरकर 140 तक पहुंच गई थी। हालांकि, यूपीए शासनकाल के दौरान 2006 व 2009 में 105 तक भी आ गई थी।

नवीनतम रिपोर्ट में भारत के किसी भी आलोचना करने वाले पत्रकार के लिए भाजपा समर्थकों द्वारा बनाए गए डराने-धमकाने के माहौल को जिम्मेदार ठहराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे रिपोर्टर को ‘राज्य-विरोधी’ या ‘राष्ट्र-विरोधी’ के रूप में चिह्नित किया जाता है। इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘मीडिया पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।’ 

रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘2020 में अपने काम के दौरान चार पत्रकार मारे गए। ऐसे में भारत पत्रकारों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से बन गया है, जहां अपना काम ठीक से कर पाना बहुत कठिन है।’ पत्रकारों को हर तरह के हमले का सामना करना पड़ता है, जिसमें पुलिस हिंसा, राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा घात लगाना, और आपराधिक समूहों या भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों द्वारा उकसाए गए विद्रोह शामिल हैं। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत के बाद मीडिया पर हिंदू राष्ट्रवादी सरकारों की लाइन पर चलने के लिए दबाव बढ़ गया है।’

रिपोर्ट कहती है, ‘हिंदुत्व की विचारधारा का समर्थन करने वाले भारतीय सार्वजनिक बहस को राष्ट्रविरोधी विचार साबित करने पर जुटे हैं। भारत में हिंदुत्व का समर्थन करने वालों के खिलाफ लिखने वाले या बोलने वाले पत्रकारों को निशाना बनाया जाता है, उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर नफरत भरा अभियान चलाया जाता है। पत्रकारों के खिलाफ हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया जाता है, विशेष रूप से जब निशाना महिला हो।’

रिपोर्ट कहती है कि सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को चुप कराने के लिए उन पर राजद्रोह जैसे मुकदमे चलाए जाते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘भारत सरकार ने किस प्रकार देश में कोरोना महामारी का लाभ उठाकर प्रेस की स्वतंत्रता को कुचलने का काम किया। कश्मीर में स्थिति अभी भी चिंताजनक है। वहां पर पत्रकारों को अभी भी पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। वहां ऑरवेलियन कंटेट रेगुलेशन का सामना किया जा रहा है, जो मीडिया आउटलेट के बंद होने के लिए जिम्मेदार है, जैसा कि कश्मीर टाइम्स के साथ हुआ।’

रिपोर्ट कहती है, ‘सरकार समर्थित मीडिया ने दुष्प्रचार शुरू किया है। ऐसे पत्रकार जो सरकार की आलोचना करने की हिम्मत रखते हैं, उन्हें भाजपा के समर्थकों द्वारा राष्ट्रविरोधी या यहां तक कि आतंकवादी समर्थक तक कहा जा रहा है।’

जारी की गई विश्व प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 में 180 देशों में सबसे ऊपर नॉर्वे है। इसके बाद फिनलैंड और डेनमार्क हैं। जबकि सबसे नीचे इरिट्रिया है। चीन 177 वें स्थान पर है, और उत्तरी कोरिया के ऊपर 179 और तुर्कमेनिस्तान में 178 वें स्थान पर है। भारत पिछले साल की तरह ही 142 वें स्थान पर है। 2016 में 133 के बाद से यह लगातार नीचे खिसक रहा है। दक्षिण एशियाई देशों में पड़ोसी नेपाल 106, श्रीलंका 127, म्यांमार (तख्तापलट से पहले) 140, पाकिस्तान 145 और बांग्लादेश 152वें स्थान पर हैं।

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दंगल टीवी से अलग हुए प्रशांत भट्ट, निभा रहे थे ये जिम्मेदारी

'एंटर10 टेलीविजन' (Enterr10 Television) के फ्री-टू-एयर (FTA) हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल ‘दंगल टीवी’ के प्रोग्रामिंग हेड प्रशांत भट्ट ने पद छोड़ने का फैसला किया है।

Last Modified:
Thursday, 22 April, 2021
Prashant545

'एंटर10 टेलीविजन' (Enterr10 Television) के फ्री-टू-एयर (FTA) हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट चैनल ‘दंगल टीवी’ के प्रोग्रामिंग हेड प्रशांत भट्ट ने पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्सचेंज4मीडिया से इस खबर की पुष्टि की है।

भट्ट पिछले साल अक्टूबर में चैनल से जुड़े थे और पिछले सात महीने से चैनल की प्रोग्रामिंग की कमान संभाल रहे थे। इससे पहले, वे ‘जी पंजाबी’ (Zee Punjabi) के साथ जुड़े थे।

वे चैनल के फिक्शन व नॉन-फिक्शन शोज दोनों को हेड कर रहे थे। जी पंजाबी में भी वे फिक्शन व नॉन-फिक्शन शोज के कंटेंट को कॉन्सेप्ट बनाना और उसे निर्मित करने की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। नेटवर्क के लिए कुछ नए तरीके से मार्केटिंग और प्रमोशन करने की रणनीति तैयार करने की भी जिम्मेदारी उन पर थी, ताकि मार्केट में जी बिजनेस और मजबूत छाप छोड़ सके।  

वे स्टूडियो बी&एम (Studio B&M) के फाउंडर व क्रिएटिव डायरेक्टर भी थे। यहां उन्होंने ‘चैनल वी’ (Channel V) के लिए ‘मस्तांगी’ (Mastaangi) और ‘एंडटीवी’ (AndTV) के लिए ‘सिद्धि विनायक’ (Siddhi Vinayak) शो को प्रड्यूस किया। उन्होंने ‘कलर्स टीवी’ (Colors TV) के लिए फिक्शन प्रोग्रामिंग का भी नेतृत्व किया। 

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ZEEL को अलविदा कह एमेजॉन प्राइम वीडियो से जुड़ीं विभा चोपड़ा, मिली यह जिम्मेदारी

‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ की हेड (Global Syndication & International Film Distribution) विभा चोपड़ा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

Last Modified:
Monday, 19 April, 2021
Vibha Chopra

‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEE ENTERTAINMENT ENTERPRISES LTD) की हेड (Global Syndication & International Film Distribution) विभा चोपड़ा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने ‘एमेजॉन प्राइम वीडियो’ (Amazon Prime Video) इंडिया में बतौर कंटेंट अधिग्रहण (content acquisition) जॉइन किया है। ZEEL में अपनी पारी के दौरान विभा कंपनी के ओवरसीज फिल्म और कंटेंट सिंडीकेशन को आगे बढ़ाने का काम कर चुकी हैं।

इस बारे में अपनी लिंक्डइन पोस्ट में विभा चोपड़ा का कहना है, ‘ZEE में मेरा सफर काफी रोमांचक रहा है, जहां मैंने विभिन्न प्रोजेक्ट्स और बेहतरीन लोगों के साथ काम करना और आगे बढ़ना सीखा है। मैं अपने सीनियर्स अमित गोयनका और पुनीत गोयनका को धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने मुझ पर भरोसा जताया और विभिन्न जिम्मेदारियां दीं।’

इसके साथ ही विभा चोपड़ा का कहना है, ‘यह घोषणा करते हुए मैं काफी रोमांचित हूं कि मैंने एमेजॉन प्राइम वीडियो, इंडिया जॉइन कर लिया है। अपने जीवन के इस सफर को लेकर मैं काफी उत्साहित हूं और इस ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन के साथ काम करने को लेकर काफी उत्सुक हूं।’

बता दें कि वर्ष 2016 में विभा चोपड़ा को ZEEL में हेड (film acquisition and distribution business) की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वर्ष 2019 में उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी के तहत ग्लोबल कंटेंट लाइसेंसिंग बिजनेस की कमान सौंपी गई थी। ZEEL के अलावा वह ‘टैम मीडिया’ (TAM Media) और ‘इंडिया टीवी’ (India TV) के साथ भी काम कर चुकी हैं।

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स्टार इंडिया के VP विशाल सोमानी पहुंचे ZEEL, संभालेंगे ये जिम्मेदारी

स्टार इंडिया के वाइस प्रेजिडेंट व सीआईओ विशाल सोमानी ने यहां से विदाई लेकर जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की है

Last Modified:
Monday, 19 April, 2021
Vishal54

स्टार इंडिया के वाइस प्रेजिडेंट व सीआईओ विशाल सोमानी ने यहां से विदाई लेकर जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की है। उन्हें यहां एंटरप्राइज आईटी का हेड नियुक्त किया गया है। सात वर्षों तक स्टार इंडिया में रहते हुए सोमानी ने कई वरिष्ठ पदों पर काम किया। फरवरी 2014 में वे स्टार इंडिया के साथ बिजनेस सिस्टम्स के वाइस प्रेजिडेंट के तौर पर शामिल हुए थे।

सोमानी को मीडिया व ब्रॉडकास्टिंग और बीएफएसआई डोमेन में दो दशकों का अनुभव है। उन्होंने टीसीएस और टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस में लंबे समय तक काम किया।

ZEEL ने आधिकारिक लिंक्डइन पोस्ट के जरिए सोमानी का स्वागत करते हुए कहा, ‘एंटरप्राइज आईटी के हेड के तौर पर विशाल सोमानी का स्वागत है। उन्हें मीडिया-ब्रॉडकास्टिंग और बीएफएसआई डोमेन में 2 दशकों के अनुभव है। उन्होंने विभिन्न टेक्नोलॉजी का नेतृत्व किया है। हम उनका स्वागत करते हैं और उन्हें नई भूमिका के लिए बधाई देते हैं।’

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वरिष्ठ पत्रकार कृष्णा प्रसाद को The Hindu ग्रुप में मिली बड़ी जिम्मेदारी

पूर्व में प्रसाद आउटलुक मैगजीन के एडिटर-इन-चीफ और टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के विजय टाइम्स अखबार के एडिटर रह चुके हैं।

Last Modified:
Saturday, 17 April, 2021
Krishna Prasad

‘द हिंदू’ (THE HINDU), ‘द हिंदू बिजनेसलाइन’ (The Hindu BusinessLine), ‘फ्रंटलाइन’ (Frontline) और ‘स्पोर्टस्टार’ (Sportstar) के पब्लिशर ‘द हिन्‍दू ग्रुप पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड’ (The Hindu Group Publishing Private Limited) ने कृष्णा प्रसाद को ग्रुप एडिटोरियल ऑफिसर के पद पर नियुक्त किया है। उनकी यह नियुक्ति 16 अप्रैल 2021 से प्रभावी है। अपनी इस भूमिका में वह ‘द हिंदू समूह’ के सभी प्रकाशनों में समन्वित प्रयासों से, विभिन्न प्रिंट प्रकाशनों और डिजिटल सामग्री में अधिक से अधिक तालमेल बैठाते हुए नेतृत्व करेंगे।

प्रसाद को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का काफी लंबा अनुभव है। पूर्व में प्रसाद ‘आउटलुक’ (Outlook) मैगजीन के एडिटर-इन-चीफ और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (Times of India group) ग्रुप के अखबार ‘विजय टाइम्स’ (Vijay Times) के एडिटर रह चुके हैं। वह ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (Press Council of India) के सदस्य रह चुके हैं। वह डिजिटल शैली को अपनाने वाले शुरुआती मुख्यधारा के पत्रकारों में से एक हैं।  

कृष्णा प्रसाद की नियुक्ति के बारे में ‘द हिन्‍दू ग्रुप पब्लिशिंग प्राइवेट लिमिटेड’ की चेयरपर्सन मालिनी पार्थसारथी का कहना है, ‘ग्रुप एडिटोरियल ऑफिसर के रूप में प्रसाद, सभी पब्लिकेशंस के कंटेंट मैनेजमेंट और स्ट्रैटेजी को लेकर मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे।’ वहीं, कृष्णा प्रसाद का कहना है, ‘मैं समूह के संपादकों, पत्रकारों के साथ-साथ बिजनेस और टेक्निकल टीमों संग मिलकर काम करने को लेकर उत्सुक हूं।’

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एडिटर्स गिल्ड ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर किया ये आग्रह

देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार से पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने का आग्रह किया है।

Last Modified:
Friday, 16 April, 2021
Editors Guild

देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार से पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर घोषित करने का आग्रह किया है। यही नहीं गिल्ड ने सरकार से पत्रकारों का टीकाकरण सुनिश्चित कराने की मांग भी की है।

एडिटर्स गिल्ड की ओर से गुरुवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि पाठकों तक खबरें और सूचनाएं पहुंचाने के लिए समाचार संगठन लगातार महामारी, चुनाव और अन्य समसामयिक मामलों को कवर कर रहे हैं। इसलिए पत्रकारों को संरक्षण के दायरे में लाया जाए।'

बयान के मुताबिक अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स की तर्ज पर पत्रकारों को टीकाकरण में प्राथमिकता दी जाए। टीकाकरण का संरक्षण मिले बगैर मीडिया कर्मियों के लिए अपनी पेशेवर जवाबदेही का निर्वाह करना अत्यंत कठिन है।

बता दें कि इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स मानते हुए कोरोना वैक्सीन लगाने की वकालत की थी। दिल्ली सरकार ने इस बाबत एक पत्र भी केंद्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को लिखा है और पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर्स मानते हुए प्राथमिकता के आधार पर उनके टीकाकरण के लिये विचार करने की अपील की है।

दिल्ली सरकार द्वारा भेजे गये पत्र में कहा गया है कि पत्रकारिता सरकार और जनता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करती है। सबसे मुश्किल हालात में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ-साथ मीडियाकर्मी भी सबसे आगे रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान मीडिया ने सक्रिय रूप से लोगों को बीमारी के बारे में जानकारी देने और इसकी रोकथाम के लिए जागरूक करने का काम किया है।

गौरतलब है कि पत्रकारों को कोरोना वैक्सीन लगाने की अनुमति देने के लिए कई अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी केंद्र सरकार से मांग की है। पिछले 10 दिनों में भारत में कोरोना के मामले दोगुने हो गए हैं। इसके साथ ही पूरे विश्व में कोरोना के मामलों में भारत में ब्राजील को पीछे छोड़ दिया। अब भारत विश्व में सबसे ज्यादा कोरोना केस वाला देश बन गया है।

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कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच 'आजतक' ने उठाया यह ऐहतियाती कदम

कोरोना वायरस ने एक बार फिर तेजी से अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है।

Last Modified:
Friday, 16 April, 2021
Aajtak

कोरोना वायरस ने एक बार फिर तेजी से अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। हर दिन देशभर में वायरस के रिकॉर्ड मामले दर्ज किए जा रहे हैं। इस बीच कई पत्रकार भी कोरोना की चपेट में आए हैं, जिनमें से तो कई पत्रकारों की जान तक चली गई है। तेजी से बढ़ती कोरोना महामारी को देखते हुए हिंदी न्यूज चैनल आजतक ने अपने खास पॉलिटिकल प्रोग्राम, जोकि ग्राउण्ड जीरो से प्रसारित किया जाता है, फिलहाल के लिए उसे बंद कर दिया है। इस प्रोग्राम का नाम है- बुलेट रिपोर्टर।

बता दें कि चुनावों पर केंद्रित इस शो को ‘आजतक’ तक की डिप्टी एडिटर व सीनियर एंकर चित्रा त्रिपाठी होस्ट करती थीं।  उन्होंने इस बात की जानकारी अपने ट्विटर हैंडल के जरिए दी। दरअसल तेजी से फैलते कोरोना संक्रमण को देखते हुए ही इस शो को फिलहाल के लिए बंद करने का फैसला लिया गया है। फिलहाल इस शो को कब तक के लिए बंद किया जा रहा है और दोबारा कब इसे शुरू किया जाएगा, इसकी जानकारी उन्होंने नहीं दी है।

‘बुलेट रिपोर्टर’ की खास बात थी इसका अंदाज, जो लोगों को सबसे ज्यादा पसंद आ रहा था। चित्रा त्रिपाठी चैनल की ओबी वैनं में नहीं बल्कि बुलेट पर सवार होकर जगह-जगह घूम-घूमकर मतदाताओं का मन टटोलती थीं। उनसे बात करती थीं, प्रत्याशियों का हाल जानती थीं और उन समस्याओं पर भी प्रकाश डालती थीं, जो अब तक अनसुलझी थीं।

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