मीडिया-एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए मुख्यमंत्री ने दिया खास ऑफर

अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ मुंबई आए थे अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू

Last Modified:
Thursday, 13 June, 2019
Pema Khandu

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हाल ही में मुंबई में मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (M&E industry) के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ खांडू की इस यात्रा का उद्देश्य मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को अरुणाचल प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित करना था। उनका कहना था कि विदेश में फिल्मों की शूटिंग में जितना खर्च होता है, उससे कम खर्च में अरुणाचल प्रदेश में शूंटिंग की जा सकती है और यहां की लोकेशंस भी विदेश की तुलना में किसी तरह कम नहीं हैं। इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से इंडस्ट्री को टैक्स में विशेष छूट भी दी जाएगी।

अपने इस दौरे के बारे में खांडू का कहना था, ‘मुझे लगता है कि बहुत कम लोग पूर्वोत्तर के बारे में जानते हैं और दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों में रहने वाले लोगों को लगता है कि पूर्वोत्तर एक अलग राज्य है, लेकिन ये सच्चाई नहीं है। पूर्वोत्तर की अपनी खूबियां हैं और यहां की अपनी उप-संस्कृति है, जो हमें बड़े शहरों में रहने वाले लोगों को दिखाने की जरूरत है।’

खांडू का कहना था कि बॉलिवुड फिल्म निर्माताओं को शूटिंग के लिए अरुणाचल प्रदेश में आने का न्योता देना उनकी इस यात्रा की प्राथमिकता में शामिल है, क्योंकि वहां पर एक से एक शानदार लोकेशंस हैं, जिनकी फिल्म निर्माताओं को तलाश रहती है। खांडू का यह भी कहना था, ‘समय के साथ देश के अन्य राज्यों से पूर्वोत्तर की कनेक्टिविट फिर चाहे वो रोड हो, एयर हो अथवा कम्युनिकेशन, में सुधार हुआ है और अब मैं इसका लाभ लेते हुए राज्य में निवेश को आकर्षित करना चाहता हूं। उदाहरण के लिए-यदि बॉलिवुड की बात करें तो यहां पर ऐसी-ऐसी लोकेशंस हैं तो किसी भी यूरोपीय देशों से किसी मायने में कम नहीं हैं। मैं चाहता हूं कि बॉलिवुड निर्माता हमारे यहां आकर अपनी फिल्मों की शूटिंग करें।’

खांडू का कहना था, ‘वर्ष 1997 में यहां पर ‘कोयला’ मूवी की शूटिंग हुई थी और दो साल पहले यहां ‘रंगून’ फिल्म की शूटिंग हुई थी। अब मैं बॉलिवुड और अरुणाचल के बीच इन संबंधों को और मजबूत करना चाहता हूं और इसके लिए तमाम कवायद करने को तैयार हूं।’

खांडू ने यह भी उम्मीद जताई कि वह प्राइवेट सेक्टर को अरुणाचल प्रदेश में निवेश करने के लिए तैयार कर लेंगे। राज्य में आर्थिक सुधारों को लेकर अपने विजन के बारे में खांडू का कहना था, ‘अरुणाचल प्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है। हाइड्रो पॉवर के रूप में हमारे पास बहुत क्षमता है। हमारे यहां लगभग 25 लाख हेक्टेयर उपजाऊ जमीन है, जिसमें से हम सिर्फ 3-5 लाख हेक्टेयर जमीन का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए हमारे यहां कृषि आधारित इंड्स्ट्रीज के लिए बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं।’

खांडू ने कहा, ‘मैंने इंडस्ट्रीज डिपार्टमेंट को ऐसी पॉलिसी बनाने को कहा है, जिससे राज्य में बिजनेस करना आसान हो और इसके लिए हम जल्द ही एक पॉलिसी जारी करेंगे। हम ज्यादा से ज्यादा इंडस्ट्रीज को प्रोत्साहित करना चाहते हैं कि वे अरुणाचल प्रदेश आएं और यहां निवेश करें। इसके लिए राज्य सरकार उन्हें तमाम तरह के अवसर मुहैया करवाएगी।’ इसके अलावा उनका यह भी कहना था कि राज्य की ओर से मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (M&E industry) को टैक्स में विशेष छूट का लाभ भी दिया जाएगा।

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50 दिनों से घरवालों से दूर है ये पत्रकार, ऑफिस को ही बना रखा है ‘आशियाना’

कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ ‘जंग’ में तमाम पत्रकार भी अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं और अपनी भूमिका मुस्तैदी से निभा रहे हैं।

Last Modified:
Saturday, 06 June, 2020
Anurag Amitabh

कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ ‘जंग’ में तमाम पत्रकार अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं और अपनी भूमिका मुस्तैदी से निभा रहे हैं। विभिन्न मीडिया संस्थानों में कार्यरत ये पत्रकार लोगों तक अपडेट पहुंचाने और उन्हें जागरूक करने के लिए लगातार अपने काम में जुटे हुए हैं। हालांकि, अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए उनकी राह में तमाम चुनौतियां भी आ रही हैं, लेकिन उनका हौसला अभी भी बना हुआ है। ये पत्रकार जब भी अपने काम से लौटते हैं, तो वे इस महामारी के खतरे को देखते हुए अपने परिवार को खुद से तब तक दूर रखने की कोशिश करते हैं, जब तक वे खुद को सैनिटाइज नहीं कर लेते।

लेकिन यहां हम आपको एक ऐसे पत्रकार के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने परिवार की सुरक्षा को देखते हुए पिछले 50 दिनों से अपने घर ही नहीं गए। ये पत्रकार हैं ‘इंडिया टीवी’ (India TV) भोपाल के ब्यूरो चीफ (मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़) अनुराग अमिताभ। समाचार4मीडिया के साथ एक बातचीत में अनुराग अमिताभ ने बताया कि इस दौरान वह घर से अपना बिस्तर ऑफिस ही ले आए हैं और 16 अप्रैल से ऑफिस में ही रह रहे हैं, ताकि उनका परिवार सुरक्षित रह सके।

अनुराग अमिताभ ने बताया कि इसके पीछे भी बड़ा कारण है। दरअसल, खबरों के लिए ये कई बार रेड जोन इंदौर और उज्जैन सहित कई जिलों में गए। भोपाल में भी कोरोना के हॉट स्पॉट्स से इन्होंने कवरेज की। अस्पतालों के साथ घनी बस्तियों से भी लाइव किया। इस दौरान वह इंदौर में कोरोना पॉजिटिव एक थाना प्रभारी के संपर्क में भी आ गए थे। हालांकि, उनका खुद का कोरोना टेस्ट निगेटिव आया था। लेकिन इसके बाद से ही अनुराग अमिताभ ने यह तय कर लिया कि वह घर नहीं जाएंगे और दफ्तर में रहकर ही स्टोरी करेंगे। फिलहाल, वे ऑफिस में ही रह रहे हैं और यहीं से स्टोरी कर रहे हैं। वे दिन भर खबरों और स्पेशल स्टोरीज में जुटे रहते हैं और देर शाम को ऑफिस लौट आते हैं।

खाने-पीने की व्यवस्था कैसे होती है? इस बारे में अनुराग अमिताभ का कहना है कि वह अपने घर तो जाते हैं, लेकिन घर की दहलीज पार नहीं करते हैं और दोपहर और रात का खाना घर के बाहर से लेकर आ जाते हैं। सुबह के नाश्ते की जिम्मेदारी इनके पत्रकार मित्र ‘आजतक’ के रवीश पाल सिंह और ‘न्यूज 24’ के विपिन श्रीवास्तव ने उठा रखी है।

अनुराग अमिताभ ने यह भी बताया कि इस बीच उनके पांच वर्षीय बेटे का जन्मदिन भी पड़ा था। इसके बावजूद दिल पर पत्थर रखकर वह घर नहीं गए और विडियो कॉल के माध्यम से ही बेटे को उसके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। अपनी घर वापसी के बारे में अनुराग अमिताभ का कहना है, ‘मैंने जब घर छोड़ा था तब कोरोना के चलते सिर्फ मौत दिख रही थी, अब तकरीबन डेढ़ महीने बाद उतना डर नहीं है, इसलिए अब वह रविवार को घर वापसी करेंगे।’

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गृह मंत्रालय में मीडिया से जुड़े कामकाज करने वाली टीम में किए गए ये बदलाव

केंद्रीय गृह मंत्रालय में मीडिया से जुड़े कामकाज करने वाली लगभग पूरी टीम को बदल दिया गया है

Last Modified:
Saturday, 06 June, 2020
MHI45

केंद्रीय गृह मंत्रालय में मीडिया से जुड़े कामकाज करने वाली लगभग पूरी टीम को बदल दिया गया है। शुक्रवार को भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) के वरिष्ठ अधिकारी नितिन डी वाकणकर के नेतृत्व में एक नई टीम की नियुक्त की गई।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नितिन डी वाकणकर ने वसुधा गुप्ता की जगह ली है, जिन्हें तथ्य जांच इकाई में महानिदेशक बनाया गया है। यह इकाई प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के तहत काम करती है।

वाकणकर, महानिदेशक (डीजी) स्तर के अधिकारी हैं। उन्हें पीआईबी के ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशंस’ से गृह मंत्रालय में भेजा गया है। वह वहां महानिदेशक के रूप में सेवा दे रहे थे। हालांकि, तबादले के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।

वाकणकर, 1989 बैच के आईआईएस अधिकारी हैं। वह सीबीआई के प्रवक्ता के तौर पर सेवा दे चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल के राष्ट्रपति रहने के दौरान उनके उप प्रेस सचिव के तौर पर भी सेवा दी थी।

वह रक्षा मंत्रालय के भी प्रवक्ता रह चुके हैं और अपने करियर के दौरान उन्होंने मुंबई क्षेत्र में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है। सूचना-प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश के मुताबिक एक अन्य आईआईएस अधिकारी राजकुमार को गृह मंत्रालय की मीडिया विंग में अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) के रूप में नियुक्त किया गया है।

उप निदेशक प्रवीण कवि को गृह मंत्रालय की मीडिया विंग में नियुक्त किया गया है। वह पहले भी इस मंत्रालय में सेवा दे चुके हैं। आदेश में कहा गया है कि सहायक निदेशक अमनदीप यादव को भी मंत्रालय की मीडिया विंग में नियुक्त किया गया है। उप निदेशक रैंक के दो अधिकारियों, विराट मजबूर और हरित शेलाट को मंत्रालय की मीडिया विंग से क्रमश: ऑल इंडिया रेडियो और प्रकाशन विभाग निदेशालय भेजा गया है। आदेश में कहा गया है कि सहायक निदेशक अंकुर लाहोटी को दूरदर्शन (न्यूज) में नियुक्त किया गया है।

 

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वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ FIR दर्ज, लगे ये आरोप

विनोद दुआ के खिलाफ बीजेपी प्रवक्ता नवीन कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने यह रिपोर्ट दर्ज की है।

Last Modified:
Saturday, 06 June, 2020
Vinod Dua

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ शुक्रवार को भ्रामक सूचना फैलाकर दो संप्रदायों में तनाव फैलाने का मामला दर्ज किया है। यह मामला दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता नवीन कुमार की शिकायत पर दर्ज किया गया है।

क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल को दी गई शिकायत में नवीन कुमार ने विनोद दुआ पर आरोप लगाया कि वह यू-ट्यूब पर ‘द विनोद दुआ शो’ के माध्यम से ‘फर्जी सूचनाएं फैला’ रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से विनोद दुआ लगातार पूरे विश्व में भारत की छवि को खराब कर रहे हैं, साथ ही असामाजिक तत्वों को राजनीतिक आश्रय उपलब्ध कराने का कार्य कर रहे हैं।

नवीन कुमार ने विनोद दुआ पर दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान ‘गलत रिपोर्टिंग’ करने के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि दुआ ने कहा था, ‘केंद्र सरकार ने हिंसा को रोकने के लिए कुछ नहीं किया।’  कुमार ने यह भी आरोप लगाए कि दुआ ने प्रधानमंत्री को ‘कागजी शेर’ बताया था।

नवीन कुमार ने शिकायत पत्र में कहा कि विनोद दुआ के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, सांसद प्रवेश वर्मा और पूर्व विधायक कपिल मिश्रा आतंकवादी हैं, जबकि दिल्ली में हुए दंगे की साजिश रचने के मामलों में गिरफ्तार किए गए आरोपित मुस्लिम नेता हीरो हैं।

वहीं अपनी शिकायत पत्र में नवीन कुमार ने यह आरोप लगाया कि विनोद दुआ कई महीने से समुदाय विशेष के लोगों के बीच भारतीय जनता पार्टी और पार्टी की नीतियों को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। फर्जी खबर और गलत तथ्यों के आधार पर वह समाज में अशांति फैलाने का कार्य कर रहे हैं। नवीन कुमार की शिकायत पर क्राइम ब्रांच ने आईपीसी की धारा 290, 505 और 505 (2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

 

 

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पंजाब सरकार ने मीडिया दिग्गज डॉ. संदीप गोयल को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

डॉ. संदीप गोयल को पंजाब के भीतर और राज्य के बाहर से इंडस्ट्री से सीएसआर फंडों को आकर्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह पंजाब के सेक्रेट्री (Industries & Commerce) को रिपोर्ट करेंगे।

Last Modified:
Saturday, 06 June, 2020
Sandeep-Goyal

पंजाब सरकार ने मीडिया दिग्गज डॉ. संदीप गोयल को हाल ही में गठित की गई ‘कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी’ (CSR) अथॉरिटी का पहला सीईओ नियुक्त किया है। उन्हें पंजाब के भीतर और राज्य के बाहर से इंडस्ट्री से सीएसआर फंडों को आकर्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अपनी इस भूमिका में वह पंजाब के सेक्रेट्री (Industries & Commerce) को रिपोर्ट करेंगे।

डॉ. गोयल की नियुक्ति के बारे में पंजाब सरकार की एडिशनल चीफ सेक्रेट्री (Industries & Commerce) विनी महाजन ने कहा, ‘डॉ. संदीप गोयल को पंजाब की सीएसआर अथॉरिटी का पहला सीईओ बनाए जाने पर हम काफी खुश हैं। डॉ. गोयल को बतौर प्रोफेशनल और एंटरप्रिन्योर कॉरपोरेट वर्ल्ड में काम करने का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। अथॉरिटी को उनके अनुभव का काफी फायदा मिलेगा।’

डॉ. संदीप गोयल ने स्थानीय सेंट जॉन्स स्कूल से अपनी पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में बीए (Honours) किया। उन्हें ग्रेजुएशन में पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से गोल्ड मेडल मिला है। इसके बाद डॉ. गोयल ने एमबीए की पढ़ाई की और फिर FMS-Delhi से पीएचडी की है। वह हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के छात्र भी रह चुके हैं। डॉ. गोयल वर्ष 1990 के दशक के अंत में प्रतिष्ठित विज्ञापन एजेंसी ‘Rediffusion’ के प्रेजिडेंट थे। वर्ष 2003 में दुनिया की जानी-मानी एडवर्टाइजिंग एजेंसी ‘Dentsu Inc’ के साथ मिलकर जॉइंट वेंचर शुरू कर एंटरप्रिन्योरशिप की दुनिया में कदम रखने से पहले वह ‘Zee Telefilms’ के ग्रुप सीईओ थे।   

डॉ. गोयल वर्तमान में अमेरिकन कैमरा और सोशल मीडिया कंपनी ’Snap Inc’ के इंडिया एडवाइजरी बोर्ड में चेयरमैन हैं। वह ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन ब्रैंड्स’ (IIHB) के चीफ मेंटर (Mentor) भी हैं।  

अपनी नियुक्ति पर डॉ. गोयल का कहना है, ‘पंजाब सरकार द्वारा CSR Authority का सीईओ नियुक्त किए जाने पर मैं काफी खुश हूं। यह आसान काम नहीं है। सीएसआर फंड गंभीर दबाव में हैं, क्योंकि कॉरपोरेट के मुनाफे पर वर्तमान महामारी और तालाबंदी का गंभीर असर होने की आशंका है। फिर भी जब निराशा के बादल कुछ हल्के होंगे, हम इंडस्ट्री के साथ टिकाऊ और दीर्घकालिक पार्टनरशिप्स का निर्माण करेंगे जो राज्य को लाभान्वित करने वाली परियोजनाओं का सपोर्ट करेंगे।’

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जानिए, संकट के इस दौर का ABP न्यूज किस तरह से कर रहा है सामना

देश में कोरोनावायरस (COVID-19) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन ने देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है

Last Modified:
Friday, 05 June, 2020
abp

देश में कोरोनावायरस (COVID-19) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन ने देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। ऐसे में तमाम इंडस्ट्री पर आर्थिक संकट मंडराने लगा है। मीडिया इंडस्ट्री भी लॉकडाउन के असर से अछूती नहीं रही। लॉकडाउन के दौरान टीवी की व्युअरशिप बढ़ने के बावजूद विज्ञापनों की संख्या घट रही है। प्रिंट का सर्कुलेशन भी काफी प्रभावित हुआ है। इस दौरान तमाम प्रिंट मीडिया संस्थानों ने डिजिटल पर अपना फोकस बढ़ाया है। समाचार4मीडिया ने एबीपी न्यूज नेटवर्क से कुछ सवालों के जरिए ये जानने की कोशिश की है कि उनका हिंदी डिजिटल ऐसी मुश्किल घड़ी में अपने आपको कहां देखता है। एबीपी न्यूज नेटवर्क के स्पोक्सपर्सन की ओर से जो जवाब मिले हैं, वे आप नीचे पढ़ सकते हैं-

कोरोनावायरस (कोविड-19) के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान टीवी की व्युअरशिप काफी बढ़ी है, ऐसे में डिजिटल में एबीपी न्यूज अपने आपको कहां देखता है?

इसमें कोई संदेह नहीं कि घर में बंद भारतीयों का रुझान अब डिजिटल स्पैक्ट्रम की ओर बढ़ रहा है, जो अब पहले से कहीं अधिक कंटेंट देख रहे हैं। टीवी व्युअरशिप की बात करें, तो इसमें जबरदस्त उछाल आया है। वास्तव में हमारे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है। एबीपी लाइव, इस अवधि के दौरान सबसे ज्यादा विजिट किया जाने वाला न्यूज प्लेटफॉर्म बन चुका है, जिसे करोड़ों इम्प्रैशन्स मिल रहे हैं। मार्च 2020 में +46% यूजर्स और +138% कुल वीडियो व्यूज के साथ जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इसी माह में एएनएन के फेसबुक एंगेजमेन्ट में भी 6.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

इसके अलावा हमारे रीजनल चैनल्स भी दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ रहे हैं, एबीपी आनंदा के यूट्यूब चैनल को एक दिन में 6.2 मिलियन व्यूज मिले हैं (20 मई 2020) (स्रोतः यूट्यूब एनालिटिक्स)

इस मुश्किल समय के बीच उपभोक्ताओं तक सर्वश्रेष्ठ कंटेंट उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता के साथ हम अग्रणी स्थिति पर आ गए हैं, हमें गर्व है कि हम दर्शकों के लिए न्यूज का सबसे पसंदीदा गंतव्य बन चुके हैं, फिर चाहे माध्यम कोई भी हो।

टीवी और प्रिंट में विज्ञापन लगातार घटता जा रहा है, सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की मांग हो रही है, डिजिटल पर विज्ञापन की क्या स्थिति है, इस बारे में कुछ बताएं?

टेलीविजन हमेशा से उपभोक्ताओं की पहली पसंद रहा है और विज्ञापनदाताओं के निवेश के लिए प्रमुख माध्यम बना रहेगा, क्योंकि इसका स्केल और ब्रैंड-बिल्डिंग क्षमता हमेशा अधिक होते हैं। टीवी के दर्शकों की संख्या हमेशा सबसे ज्यादा होती है। हालांकि कोविड-19 के चलते आर्थिक दबाव के बीच, कई ब्रैंड्स अपनी विज्ञापन योजनाओं में बदलाव ला रहे हैं। भविष्य को लेकर अनिश्चितता और मंदी के डर से वे अपने खर्च को कम कर रहे हैं। इन ब्रैंड्स को हम यही सुझाव देंगे कि पूरी रणनीति के साथ निवेश करें और उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करते हुए सही संदेशों के साथ इस मुश्किल समय में अपने ब्रैंड के मूल्यों को बनाए रखें।

वहीं दूसरी ओर, लॉकडाउन की मुश्किलों के चलते अभी प्रिंट की गति धीमी है, इसे फिर से सामान्य अवस्था में आने में समय लगेगा, क्योंकि इसे ब्रॉडकास्ट मीडिया का सबसे विश्वसनीय स्रोत माना जाता है और डिजिटल की बात करें तो यह विज्ञापनदाताओं के लिए निवेश का मुख्य क्षेत्र बन गया है, क्योंकि इस माध्यम की पहुंच उल्लेखनीय है। 

इस संकटकाल में एबीपी न्यूज नेटवर्क की टीम किस तरह की स्ट्रैटेजी बनाकर काम कर रही है, इस बारे में कुछ बताएं?

महामारी के चलते कई चुनौतियों के बावजूद, एबीपी न्यूज नेटवर्क ने कारोबार की निरंतरता बनाए रखने के लिए कुछ व्यापक प्रोटोकॉल्स तय किए हैं, जो अपने पूरे पैमाने के साथ सभी कंटेंट सर्विसेज के सुगम संचालन को सुनिश्चित कर रहे हैं। हमारे कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सभी ज़रूरी ऐहतियात बरते जा रहे हैं, जैसे ऑफिस को नियमित रूप से सैनिटाइज करना, व्यक्तिगत बैठकों के बजाय वीडियो कॉन्फ्रैंन्सिंग, ई-इनवॉयसिंग, पीओ एवं इनवॉयस का समय पर क्लोजर तथा वर्क फ्रॉम होम आदि। सभी रिपोर्टर्स को पीपीई किट्स दिए गए हैं और उनके आने-जाने के लिए इस्तेमाल होने वाली वैन्स को भी नियमित रूप से सैनिटाइज किया जाता है।

इसके अलावा, ‘लाइव बुलेटिन फ्रॉम होम’ जैसे प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि एंकर सुरक्षित स्पेस में रहकर अपना काम सुचारू रूप से कर सकें। शुरुआत से ही, हमारी आकस्मिक योजनाएं बेहद मजबूत रहीं हैं, जिससे हम अपने काम को बिना किसी मुश्किलों के पूरा करते आए हैं। हम इसी प्रतिबद्धता के साथ देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाते रहेंगे।

फेक न्यूज का मुद्दा इन दिनों काफी गरमा रहा है। खासकर विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फेक न्यूज की ज्यादा आशंका रहती है, एबीपी न्यूज नेटवर्क फेक न्यूज को रोकने में किस प्रकार की भूमिका निभा रहा है?

मीडिया से जुड़े अधिकांश लोग जानकारी की मात्रा को लेकर कभी सतर्क नहीं रहे हैं, जिसके चलते ऑनलाइन स्पेस सक्रंमित होता रहा है। कोरोना महामारी के बीच चारों ओर गलत जानकारी और अफवाहों की भरमार रही है। हालांकि इसी वजह से लोग प्राथमिक स्रोतों और खबरों के पारम्परिक माध्यमों की ओर रुख कर रहे हैं, जो सोशल मीडिया के इस दौर में अधिक भरोसेमंद माध्यम हैं।

पारम्परिक माध्यम, खासतौर पर टीवी पर आने वाली खबरें, इस संकट के दौर में जानकारी का सबसे भरोसेमंद एवं अधिकृत स्रोत रही हैं। इस दौर में लोगों को स्वास्थ्य एवं हाइजीन के बारे में सतर्क करना, हमारा उल्लेखनीय प्रयास रहा है। एबीपी न्यूज नेटवर्क में, हम विशेष अभियानों जैसे ‘कोरोना को धोना’ और प्रोग्राम जैसे ‘सच्चाई का सेंसेक्स’ के माध्यम से लोगों को जागरुक बनाते रहे हैं, इन अभियानों के जरिए हमने दर्शकों को डर से बचने और जिम्मेदारानापूर्ण व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया। अनूठी डिजिटल पहल ‘एबीपी अनकट’ के माध्यम से हमारे एंकर्स ने संकट के इस दौर में जागरुकता, स्वास्थ्य एवं इम्युनिटी से जुड़े कई वीडियो बनाए हैं। 

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इस मुश्किल घड़ी में महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकारों को यूं दी सुरक्षा

देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कोरोना की कवरेज के दौरान पत्रकारों में स्वास्थ्य जोखिम का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है

Last Modified:
Friday, 05 June, 2020
Covid-19

देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कोरोना की कवरेज के दौरान पत्रकारों में स्वास्थ्य जोखिम का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस महामारी ने तो देश के कई अलग-अलग शहरों में पत्रकारों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। लिहाजा इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकारों को 50 लाख एक्सीडेंट कवर देने का फैसला किया है। राज्य के पब्लिक हेल्थ मिनिस्टर राजेश टोपे ने इसकी घोषणा की है।

राज्य में इससे पहले पुलिस, डॉक्टर, होम गार्ड्स, और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य सरकार द्वारा 50 लाख के एक्सीडेंट कवर में शामिल किया गया था, लेकिन अब इसमें कोरोना संकट के दौरान जो भी कर्मचारी सर्वे, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, टेस्टिंग और बचाव कार्यों में लगे हुए हैं उन्हें भी शामिल किया गया है।

राजेश टोपे ने कहा है कि कोरोना संकट के दौरान प्रिंट और टीवी मीडिया के पत्रकार, फोटोग्राफर, वीडियोग्राफर बेहद रिस्क में अपना काम पूरा कर रहे हैं। सरकार इन्हें भी अपनी व्यापक एक्सीडेंट कवर योजना का हिस्सा बनाएगी। फ्री प्रेस जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह की स्कीम से उन पत्रकारों या सरकारी कर्मचारियों के परिवारों के मदद मिल सकेगी, जो कोरोना संकट के वक्त अपनी जिंदगी जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि मुंबई में कोविड-19 की जांच के लिए 16 और 17 अप्रैल को आजाद मैदान में विशेष शिविर लगाया गया था और इस दौरान 171 मीडियाकर्मियों के लार के नमूने लिए गए थे। इनमें इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकार, फोटोग्राफर और कैमरामैन शामिल थे। कुल 171 नमूनों में से 53 कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। इनमें से अधिकतर में कोई लक्षण नहीं थे। सभी संक्रमितों को क्वारंटाइन में रखा गया था।

 

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प्रेस काउंसिल के सदस्य बी.आर. गुप्ता ने दिया इस्तीफा, बताई ये वजह

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के सदस्य बी.आर. गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने मीडिया में गंभीर संकट का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है

Last Modified:
Thursday, 04 June, 2020
BR-GUPTA

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के सदस्य बी.आर. गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने मीडिया में गंभीर संकट का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया है कि वह मीडिया के लिए व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से काम करने में असमर्थ थे, जो कि ‘गहरे संकट’ में है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बी.आर. गुप्ता ने कहा कि पीसीआई पर लगातार मीडिया और मीडिया पेशेवरों को प्रोत्साहित करने की जिम्मेदारी थी। गुप्ता ने कहा, ‘लेकिन अब सभी का मानना है कि मीडिया गहरे संकट में है। परिषद का लक्ष्य अब पूरा नहीं हो पा रहा है और मुझे लगता है कि मैं मीडिया की स्वतंत्रता के लिए कुछ भी उल्लेखनीय नहीं कर पा रहा हूं।’

उन्होंने दावा किया कि प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया मीडिया का प्रतिनिधित्व करने वाली संपूर्ण इकाई नहीं है। लिहाजा उन्होंने कहा, ‘ऐसे में फिर हम मीडिया और मीडियाकर्मियों के समक्ष पेश आ रहे संकट से कैसे बाहर निकल सकते हैं? यह हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है। मैंने इस्तीफा दे दिया है क्योंकि मैं पीसीआई के सदस्य के रूप में व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से काम कर पाने में सक्षम नहीं हूं।’

वेतन कटौती और नौकरियां जाने का जिक्र करते हुए गुप्ता ने कहा कि मीडिया और मीडियाकर्मी सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

बता दें कि बी.आर. गुप्ता 30 दिसम्बर 2018 को पीसीआई के सदस्य बने थे। उनका कार्यकाल तीन वर्ष का था। पीसीआई के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सी. के. प्रसाद ने बताया कि गुप्ता का इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं किया गया है।

वहीं न्यायमूर्ति सी. के. प्रसाद ने कहा, ‘मुझे उनका इस्तीफा मिल गया है। मैंने अभी तक उसे देखा नहीं है। उसे अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है।’

बी.आर. गुप्ता ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में स्वतंत्रता एक मूलभूत विशेषता है जो लोगों और मीडिया को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि मेरे लिए यह तटस्थ भूमिका निभा पाना और लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों और मीडिया की मदद करने की जिम्मेदारी निभाना मुश्किल है।

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DD के फ्रीडिश प्लेटफॉर्म पर फिर हुई इन बड़े ब्रॉडकास्टर्स की वापसी

प्रसार भारती के ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) प्लेटफॉर्म ‘डीडी फ्रीडिश’ (DD Free Dish) से फरवरी में हटने के बाद लगभग सभी बड़े ब्रॉडकास्टर्स फिर इस पर वापस आ गए हैं।

Last Modified:
Thursday, 04 June, 2020
Free Dish

प्रसार भारती के ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) प्लेटफॉर्म ‘डीडी फ्रीडिश’ (DD Free Dish) से फरवरी में हटने के बाद लगभग सभी बड़े ब्रॉडकास्टर्स फिर इस पर वापस आ गए हैं। इनमें ‘जी एंटरटेनमेंट’, ‘स्टार इंडिया’, ‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ और ‘वायकॉम18’ जैसे बड़े ब्रॉडकास्टर्स शामिल हैं।

चारों प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स ने पिछले दिनों ‘डीडी फ्रीडिश’ के खाली पड़े MPEG-2 स्लॉट्स के आवंटन के लिए आयोजित ई-नीलामी प्रक्रिया में भाग लिया था। इसमें ‘Star Utsav’, ‘Sony Pal’, ‘Zee Anmol’, ‘Colors Rishtey’ और ‘Zee Anmol Cinem’ सफल रहे। ‘डीडी फ्रीडिश’ के MPEG-2 स्लॉट्स 10 जून 2020 से 31 मार्च 2021 की अवधि के लिए दिए गए हैं।

बताया जाता है कि वर्तमान में चल रही महामारी और कमजोर पड़ती अर्थव्यवस्था के कारण एडवर्टाइजर्स पहले ही विज्ञापन देने से दूरी बनाए हुए हैं। ऐसे में एडवर्टाइजर्स को लुभाने के लिए ब्रॉडकास्टर्स को अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए ‘फ्री टू एयर’ (FTA) प्लेटफॉर्म की आवश्यकता थी।

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मोदी सरकार (2.0) के एक साल पर MIB के कामकाज की रूपरेखा

पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा कर लिया है। पिछले 12 महीनों पर नजर डालें तो केंद्र में प्रशासन के लिए पूरे साल घटनाक्रम की स्थिति बनी रही

Last Modified:
Wednesday, 03 June, 2020
Prakash Javadekar

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल (2.0) का एक साल पूरा कर लिया है। पिछले 12 महीनों पर नजर डालें तो केंद्र में प्रशासन के लिए पूरे साल घटनाक्रम की स्थिति बनी रही और तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य को देखते हुए सूचना प्रसारण मंत्रालय कुछ नई घोषणाओं और कुछ अन्य आवश्यक कदम उठाने में व्यस्त रहा।

प्रकाश जावड़ेकर के नेतृत्व में, एमआईबी ने न केवल विभाग के संचालन को गति दी है, बल्कि कुछ महत्वपूर्ण अनुसमर्थन भी सौंपे हैं, जो आने वाले समय में मीडिया और मनोरंजन उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेंगे।

हालांकि मंत्रालय द्वारा शुरू की गई नई पहल, जैसे फैक्ट चेक सेल अधिक विश्वसनीयता के साथ शुरू किया गया है। वहीं जैसे ही ओटीटी क्षेत्र के सेल्फ रेगुलेशन के लिए सुझाव दिए गए, इस क्षेत्र में इसे लेकर एक हलचल शुरू हो गई।

पिछले साल जुलाई में, प्रकाश जावड़ेकर ने सरकार के पहले 50 दिनों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया, तो कहा था कि सभी के लिए 'सुधार, कल्याण और न्याय के लिए संकल्प' सरकार की प्रेरणा शक्ति रहा है। इसके साथ ही उन्होंने स्टार्ट-अप के लिए एक अलग टीवी चैनल लाने का विशेष उल्लेख किया था।

इस साल फरवरी में, सूचना प्रसारण मंत्री ने लोकसभा को बताया कि उनका मंत्रालय ब्रॉडकास्ट सिस्टम को मजबूती प्रदान करने के लिए तमाम उपायों पर काम कर रहा था। इसके लिए नीतियों और कार्यक्रमों की लगातार समीक्षा की जा रही थी। साथ ही बिजनेस को और आसान बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे थे।

आइए बीते वर्ष में एमआईबी द्वारा जारी की गई प्रमुख घोषणाओं और प्रस्तावों पर एक नजर डालें-

सरकारी हस्तक्षेप के बिना सेल्फ रेगुलेशन मॉडल

साल के शुरुआत में ही सूचना-प्रसारण मंत्रालय ओटीटी इंडस्ट्री के लिए एक स्पष्ट जनादेश लेकर आया था, जिसमें बताया गया था कि ओटीटी महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। मंत्रालय की हर बैठक में ओटीटी इंडस्ट्री को लेकर चर्चा भी की गई, जिसमें हर बार जावड़ेकर ने जोर देकर कहा कि सरकार वैधानिक निकाय (statutory body) स्थापित करने के बजाय सेल्फ रेगुलेशन के पक्ष में है।

समय गुजरता रहा और मंत्रालय हर बार स्टेकहोल्डर्स को यह आश्वासन देती रही कि सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि सभी ओटीटी प्लेयर्स सरकार के हस्तक्षेप के बिना ही सेल्फ रेगुलेशन मॉडल लागू कर एक साथ आगे आएं।

इस वर्ष, केंद्रीय मंत्री के साथ-साथ अन्य मंत्रालय के अधिकारियों ने स्टेकहोल्डर्स से मुलाकात की, जिसमें नेटफ्लिक्स (Netflix),  अमेजॉन प्राइम (Amazon Prime),  जी5 (Zee5), एमएक्स प्लेयर (MX Player), एएलटीबालाजी (ALTBalaji), हॉटस्टार (Hotstar), वूट (Voot) और जियो (Jio) शामिल थे। यह चर्चा इस बात पर केंद्रित थी कि ओटीटी प्लेटफार्म्स पर कंटेंट के लिए सेल्फ रेगुलेशन कैसे लागू की जाए, ताकि यह व्यापक रूप से स्वीकार्य हो सके और आसानी से लागू की जा सके।  

इस साल मार्च में, ‘सूचना-प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने ‘ओवर द टॉप’ कंटेंट प्लेयर्स से किसी निर्णायक इकाई का गठन करने और अगले सौ दिनों के अंदर आचार संहिता को अंतिम रूप देने के लिए कहा था।

जावड़ेकर द्वारा जारी किए किसी वैधानिक इकाई की जबरन न थोपे जाने और आपस में मिलकर सेल्फ रेगुलेशन के नियमों का मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। ऐसे में अधिकतर ओटीटी प्लेयर्स इस मामले में एमआईबी के साथ खड़े हुए हैं।

 फेक न्यूज से मुकाबला

फेक न्यूज के खतरे से लड़ने के लिए, प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) ने नवंबर 2019 में एक फैक्ट-चेकिंग यूनिट की स्थापना की, जहां पाठक अपने द्वारा पढ़ी, देखी या सुनी गई खबरों के सत्यापन के लिए विभाग से सीधे संपर्क कर सकते हैं।

इसी तरह की तर्ज पर, अप्रैल 2020 में, MIB ने COVID-19 से संबंधित सभी अपडेट शेयर करने के लिए एक ट्विटर हैंडल लॉन्च किया। #IndiaFightsCorona को @CovidnewsbyMIB हैंडल के तहत लॉन्च किया गया है। इस ट्विटर हैंडल को लॉन्च किए जाने के पीछे का उद्देश्य सरकार और आमजन के बीच उचित संचार सुनिश्चित करना और गलत सूचना के प्रसार को रोकना था। महामारी से जुड़ी सरकार द्वारा जारी की गई सभी प्रामाणिक सूचनाएं इसी ट्विटर हैंडल से साझा किया जा रही हैं।

कंटें रेगुलेशन, गाइडलाइंस, एडवाइजरीज और नई पॉलिसीज

पिछले एक साल के दौरान मंत्रालय ने एडवाइजरी और गाइडलाइंस के रूप में तमाम कंटेंट रेगुलेशंस जारी किए हैं। भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए, जून 2019 में, MIB ने सभी निजी टेलीविजन चैनलों को भाषा के कार्यक्रमों के नीचे क्रेडिट जारी करने के लिए एक एडवाइजरी जारी की, जिसके मुताबिक चैनलों को क्रेडिट और टाइटल्स जैसी बातें हिंदी के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं में भी प्रदर्शित करने की बात कही गई थी, ताकि दर्शकों के बीच भारतीय भाषाओं का प्रचार-प्रसार को बढ़ सके। साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि टीवी चैनल चाहें तो भारतीय भाषाओं के साथ अंग्रेजी में भी क्रेडिट और टाइटल्स दे सकते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं।

सितंबर 2019 में, सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने बधिर लोगों तक टीवी कार्यक्रमों की पहुंच बढ़ाने   लिए निजी टीवी चैनलों के लिए एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें मंत्रालय ने सभी निजी न्यूज चैनलों के लिए दिन में कम से कम एक कार्यक्रम को सांकेतिक भाषा (sign-language) में प्रसारित करने को कहा था साइन लैंग्वेज ब्रॉडकास्ट और सबटाइटल के साथ करना अनिवार्य कर दिया, जबकि अन्य चैनलों को इसी तरह की विशेषताओं के साथ कम से कम एक शो एक हफ्ते में करने को कहा गया था। इस योजना को पांच साल के चरणों में किया जाना था। अब इसकी समीक्षा 2021 में होगी।

विभिन्न अवसरों पर, सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के प्रसारण सामग्री के संबंध में केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 तहत निर्धारित कार्यक्रम और विज्ञापन संहिताओं में निहित प्रावधानों एवं नियमों का पालन करने की बात कही। फिर चाहे दिल्ली के दंगों के दौरान हो या फिर चल रहे कोरोनावायरस महामारी के कवरेज के दौरान हो।

सूचना प्रसारण मंत्रालय ने हाल ही में ‘ब्यूरो ऑफ आउटरीच एंड कम्युनिकेशन’ (BOC) के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन देने के लिए पॉलिसी गाइडलाइंस का ड्राफ्ट जारी किया था, जिसमें बताया गया था कि जिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के महीने में 25 मिलियन यूनिक यूजर्स होंगे, वे सरकारी विज्ञापन प्राप्त करने के पात्र होंगे।

नई पॉलिसी के अनुसार, ब्यूरो ऑफ आउटरीच भी नीलामी प्रक्रिया का हिस्सा होगा जो सरकारी संदेशों के लिए इन्वेंट्री अथवा स्पेस को खरीदने को कवर करेगा।  

मई 2020 में, जावड़ेकर ने टीवी चैनलों के साथ उन्हें लाने के लिए सामुदायिक रेडियो पर 7 मिनट से 12 मिनट तक विज्ञापनों के लिए हवा का समय बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।

केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सामुदायिक रेडियो को टीवी चैनलों के बराबर लाने के लिए विज्ञापनों हेतु एयर टाइम मौजूदा 7 मिनट प्रति घंटा से बढ़ाकर 12 मिनट प्रति घंटा करने का प्रस्ताव रखा था।

लाइसेंसिंग ऑपरेशन में आसानी

2019 में, MIB ने 151 MSO (मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर) को लाइसेंस प्रदान किया और 31 दिसंबर 2019 तक रजिस्टर्ड MSO की कुल संख्या 1,616 थी। 26 नवंबर से 31 दिसंबर, 2019 के बीच इस लिस्ट में 10 MSO जोड़े गए थे। 31 जनवरी 2020 तक इस सूची में और इजाफा हो गया और मंत्रालय के पास जनवरी तक 1,630 MSO रजिस्टर्ड हैं।  

हालांकि इस साल फरवरी में, सूचना-प्रसारण मंत्री ने कहा कि ब्रॉडकास्टर्स और केबल ऑपरेटर्स से   10 प्रतिशत लाइसेंस शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं मिला था।

कुछ घोषणाएं की जा चुकी हैं और अगले कुछ महीनों में MIB की ओर से कई और किए जाने की उम्मीद है। अगले 12 महीनों में एमआईबी क्या कुछ नया करता है, अब देखना होगा।

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जम्मू-कश्मीर सरकार ने पहली मीडिया नीति पर लगाई अपनी मुहर

मीडियाकर्मियों के कल्याण के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर सरकार ने मंगलवार को पहली मीडिया नीति को अपनी मंजूरी दे दी है।

Last Modified:
Wednesday, 03 June, 2020
Media

मीडियाकर्मियों के कल्याण के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर सरकार ने मंगलवार को पहली मीडिया नीति पर अपनी मुहर लगा दी है। मीडिया नीति को मंजूरी मिलने के बाद सरकार अब मीडियाकर्मियों के कल्याण, विकास और प्रगति के संदेश को प्रभावी तरीके से पूरा करने में बेहतर स्थिति में होगी।

यह नीति देश की एकता, अखंडता और सार्वभौमिकता को बनाए रखने के साथ मीडिया के दुरुपयोग व फर्जी खबरों पर भी रोक लगाएगी। यही नहीं, प्रदेश में मौजूदा विज्ञापन आवंटन नीति में विसंगतियों को दूर कर विज्ञापन आवंटन प्रक्रिया को युक्तिसंगत बनाएगी।

इसके साथ ही प्रदेश का सूचना और जनसंपर्क विभाग अब मीडियाकर्मियों की मांग के साथ गति बनाए रखने और खुद को एक पेशेवर संगठन के रूप में स्थापित करने में सक्षम हो सकेगा। यही नहीं, इस मंजूरी के बाद मीडिया द्वारा उठाए गए जनशिकायतों के मुद्दों पर ध्यान दिया जा सकेगा और विभिन्न हितधारकों के बीच संबंधों को मजबूत किया जा सकेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक आधिकारिक प्रवक्ता का कहना, ‘पहली बार मीडिया नीति एफएम रेडियो, सैटेलाइट और केबल टीवी चैनलों समेत ऑडियो-विज़ुअल तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सशक्तिकरण के लिए दिशानिर्देशों को जारी करती है, ताकि DIPR के साथ उनके इंटरफेस को कारगर बनाया जा सके। यह पूर्ववर्ती विज्ञापन नीति में अस्पष्टताओं पर ध्यान देती है और यह सुनिश्चित करती है कि वर्तमान समय की बदलती मांगों के साथ तालमेल रखने के लिए विभिन्न प्रकार के मीडिया पर उचित ध्यान दिया जाए।’

बताया जाता है कि इस नीति के तहत प्रतिष्ठित संस्थानों आईआईएमसी व आईआईएम में मीडिया एकेडमी, इंस्टीट्यूट व चेयर की स्थापना की जाएगी। सूचना विभाग को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। इसके साथ ही एसओपी भी तैयार की जाएगी ताकि स्वास्थ्य एवं प्राकृतिक आपदा के दौरान लोगों तक पहुंचा जा सके। सूचना विभाग में सोशल मीडिया सेल स्थापित किया जाएगा जिससे जनता से ऑनलाइन संवाद किया जा सके। पॉलिसी का उद्देश्य गलत खबरों का प्रसारण रोकना है। पॉलिसी के तहत साल में दो मीडिया हाउस को पुरस्कृत किया जाएगा।

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