पत्रकारों से मांगे गए आवेदन, सरकार के लिए करना होगा ये काम

कुल आवेदनों में से समिति द्वारा तीस पत्रकारों का चयन किया जाएगा, चुने गए पत्रकारों को दी जाएगी सम्मान राशि

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 11 September, 2019
Last Modified:
Wednesday, 11 September, 2019
Scribes

झारखंड सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा सरकार की विभिन्न योजनाओं से संबंधित आर्टिकल पब्लिश करने के लिए पत्रकारों से आवेदन मांगे गए हैं। इसके तहत 16 सितंबर 2019 की अपराह्न तीन बजे तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। प्राप्त आवेदनों का चयन 17 सितंबर 2019 की अपराह्न चार बजे एक समिति द्वारा किया जाएगा।

बताया जाता है कि यह समिति कुल आवेदनों में से तीस पत्रकारों का चयन करेगी। इन पत्रकारों को आर्टिकल पब्लिश होने के बाद समिति की सिफारिश पर अधिकतम 15 हजार रुपए दिए जाएंगे। चयन होने के बाद ये पत्रकार 30 दिनों के भीतर चयनित विषयों पर आर्टिकल तैयार कर उसे अपने या किसी अन्य मीडिया संस्थान में पब्लिश कराएंगे और उसकी कटिंग को 18 अक्टूबर तक जमा करेंगे। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार इनके प्रसारण के विडियो की क्लिप बनाकर 18 अक्टूबर तक डीवीडी विभाग में जमा करेंगे।

विभाग द्वारा विमोचित पुस्तिका में प्रकाशन के लिए 25 आर्टिकल्स का चयन समिति द्वारा किया जाएगा और इन आर्टिकल्स को तैयार करने वाले पत्रकारों को विभाग की ओर से सम्मान राशि के रूप में पांच-पांच हजार रुपए दिए जाएंगे।

विभाग की ओर से दी गई सूचना में कहा गया है कि तय तारीख और समय के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा किसी भी समय विभाग की ओर से आवेदन को बिना कारण बताए रद्द किया जा सकेगा।   

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अब चिदंबरम के पक्ष में आए The Hindu ग्रुप के चेयरमैन एन.राम

आईएनएक्स मीडिया मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी की निंदा के लिए तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी की ओर से बुलाई गई थी बैठक

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 16 September, 2019
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Monday, 16 September, 2019
chidambaram

‘द हिन्दू ग्रुप (THG) पब्लिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन एन.राम आईएनएक्स मीडिया (INX Media) मनी लॉन्ड्रिंग केस में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम व कांग्रेसी नेता पी. चिदंबरम के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। चेन्नई में रविवार को एन.राम ने कहा कि इस मामले में हत्यारोपित इंद्राणी मुखर्जी और पीटर मुखर्जी के बयान के अलावा कोई सबूत न होने के बावजूद पी चिदंबरम को जेल भेज दिया गया। ऐसे में चिदंबरम के साथ घोर अन्याय हुआ है।

चिदंबरम की गिरफ्तारी की निंदा के लिए तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) की ओर से बुलाई गई बैठक में एन. राम ने कहा, चिदंबरम को जेल भेजने में कुछ लोगों ने साजिश रची है, ऐसे लोग चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा समय तक उन्हें जेल में रखा जाए।’

उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्च न्यायपालिका खासकर दिल्ली हाई कोर्ट के रिस्पॉंस की कड़ी आलोचना हुई। एन. राम के अनुसार, ‘सात महीने तक इस मामले में फैसला रिजर्व रखा गया, जज के रिटायर होने से तुरंत पहले इस मामले में फैसला आ गया, जबकि चिदंबरम को अपील करने के अधिकार से भी वंचित कर दिया गया।‘

एन. राम के अनुसार, ‘पी चिदंबरम की जमानत खारिज करने के जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस एएस बोपन्ना के आदेश में कई तथ्यात्मक गलतियां हैं, जैसे- आदेश में कहा गया है कि चिदंबरम की संपत्ति को जब्त कर लिया गया है, यह पूरी तरह गलत है।‘   

इसके साथ ही एन. राम ने यह भी कहा कि इस मामले में शीघ्रता से उसी बेंच के समक्ष रिव्यू पिटीशन दायर करने अथवा क्यूरेटिव पिटीशन (curative petition) दायर करने की जरूरत है, जो पांच जजों के सामने जाएगी। एन. राम के अनुसार, ‘इस मामले में दो हत्यारोपितों के बयान के सिवाय चिदंबरम के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई करने का कोई आधार नहीं है। इस मामले में दस्तावेजों से छेड़छाड़ किए जाने का भी कोई खतरा नहीं था। किसी गवाह को भी कोई धमकाए जाने का खतरा नहीं था। यह बहुत ही शर्मनाक है कि इस मामले में न्याय नहीं हुआ है।’

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मीडिया की स्वतंत्रता मामले में क्या बोले सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, पढ़ें यहां

कश्मीर टाइम्स की संपादक अनुराधा भसीन की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से रखा गया अपना पक्ष

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Published - Monday, 16 September, 2019
Last Modified:
Monday, 16 September, 2019
Media

जम्मू कश्मीर में मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर सुप्रीम सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सरकार से राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए इस बारे में फैसला लेने को कहा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में जनजीवन सामान्य करने, कल्याणकारी सुविधाओं तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित करने, स्कूल और कॉलेज खोले जाने को भी कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कश्मीर में अगर तथाकथित बंद है तो उससे जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट निपट सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से इन हलफनामों का विवरण मांगा है। इसके साथ ही कहा है कि सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए प्रयास किए जाएं।

इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि कश्मीर के 88 प्रतिशत से अधिक थाना क्षेत्रों से प्रतिबंध हटा दिए गए हैं। एक गोली भी नहीं चलाई गई और कुछ स्थानीय प्रतिबंध लगाए गए हैं। वहां, दूरदर्शन जैसे टीवी चैनल और अन्य निजी चैनल, एफएम नेटवर्क काम कर रहे हैं। प्रतिबंधित इलाकों में आने-जाने के लिए मीडिया को ‘पास’ दिए गए हैं। इसके अलावा पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा भी उपलबध कराई गई है।

यह भी पढ़ें: मीडिया से जुड़े इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं महिला संपादक

इसके अलावा केंद्र सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि कश्मीर में सभी अखबार सुचारु रूप से चल रहे हैं और सरकार हरसंभव मदद मुहैया करा रही है। बता दें कि ‘कश्मीर टाइम्स’ की संपादक अनुराधा भसीन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि घाटी में अभी न इंटरनेट है और  न ही संचार की अन्य कोई सुविधा है। इसी मामले में कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई थी।

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मारपीट कर दूरदर्शन के पत्रकार को बना लिया बंधक, फिर किया ये काम

देर रात घर जाने के लिए कैब में बैठे थे पीड़ित पत्रकार, शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच में जुटी पुलिस

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 16 September, 2019
Last Modified:
Monday, 16 September, 2019
Crime

पुलिस के तमाम दावों के बाद भी अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। अब दिल्ली से सटे नोएडा में दूरदर्शन के पत्रकार के साथ लूट की एक बड़ी वारदात सामने आई है। बताया जाता है कि बदमाशों ने पत्रकार को बंधक बनाकर न सिर्फ मोबाइल, पर्स और बैग लूट लिया, बल्कि डेबिट कार्ड का पिन नंबर पूछकर उनके खाते से 61 हजार रुपए निकाल लिए।

यही नहीं, बदमाशों ने उनके क्रेडिट कार्ड से कई स्थानों से करीब 2,66,314 रुपये की खरीदारी भी कर ली। इस दौरान पीड़ित पत्रकार को बदमाश अपने साथ गाड़ी में लेकर घूमते रहे और बाद में रात करीब 11 बजे सेक्टर-49 की रेड लाइट के पास फेंककर फरार हो गए। पीड़ित की शिकायत पर थाना सेक्टर-39 की पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

ग्रेटर नोएडा के जीटा स्थित एटीएस डोल्स सोसायटी में रहने वाले प्रेम शंकर श्रीवास्तव दिल्ली स्थित दूरदर्शन में कार्यरत हैं। शुक्रवार शाम करीब 8 बजे प्रेम शंकर श्रीवास्तव को उनके मित्र महामाया फ्लाईओवर के पास छोड़कर गए थे। यहां से घर जाने के लिए वह कैब का इंतजार कर रहे थे।

इसी बीच एक कैब वहां आकर रुकी, जिसमें पहले से तीन लोग बैठे हुए थे। लिफ्ट लेकर प्रेम शंकर भी उनके साथ बैठ गए। कुछ दूर जाते ही कार में पीछे बैठे दो युवकों ने चाकू दिखाकर प्रेम शंकर से मोबाइल, पर्स और बैग लूट लिया। फिर उनसे मारपीट कर उनका डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड का पिन नंबर उगलवा लिया और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।

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PCI ने इस मसले पर रिपोर्टिंग को लेकर तय कीं गाइडलाइंस

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट को देखते हुए अपनाईं ये गाइडलाइंस, एक्ट का दिया हवाला

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 14 September, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 September, 2019
PCI

‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (PCI) ने सुसाइड केसों व मानसिक बीमारी संबंधी मामलों की रिपोर्टिंग के संबंध में मीडिया के लिए गाइडलाइंस तय की हैं। इन गाइडलाइंस में मीडिया से गुजारिश की गई है कि संबंधित व्यक्ति की सहमति के बिना मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में उपचार करा रहे किसी व्यक्ति की तस्वीरें या कोई अन्य जानकारी पब्लिश न करें। काउंसिल ने एक बयान में यह भी कहा है कि आत्महत्या के मामलों को रोकने के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट को देखते हुए इन गाइडलाइंस को अपनाया गया है।

इन गाइडलाइंस के अनुसार, मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के सेक्शन 24 (1) के अनुसार, इस तरह के मामलों की रिपोर्टिंग करते समय किसी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में इलाज करा रहे व्यक्ति के बारे में संबंधित व्यक्ति की सहमति के बिना मीडिया किसी भी तरह की जानकारी अथवा फोटो को पब्लिश नहीं करेगा। इसके साथ ही इसी एक्ट के सेक्शन 30 (a) के तहत प्रिंट मीडिया द्वारा समय-समय पर इस एक्ट का व्यापक प्रचार किया जाएगा।

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इस सदमे ने लील ली पत्रकार कौशलेंद्र प्रपन्न की जिंदगी

हार्ट अटैक आने पर शिक्षक और पत्रकार कौशलेंद्र प्रपन्न को दिल्ली के एक अस्पताल में कराया गया था भर्ती

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 14 September, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 September, 2019
Kaushlendra

पेशे से शिक्षक, पत्रकार, शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग करने वाले व्यक्ति और चिंतक कौशैलेंद्र प्रपन्न का आज दिल्ली में निधन हो गया। 45 वर्षीय प्रपन्न ने दिल्ली के रोहिणी स्थित सरोज अस्पताल में आखिरी सांस ली। गंभीर हालत में उन्हें पांच सितंबर को इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह करीब छह साल से टेक महिंद्रा फाउंडेशन में वाइस प्रेजिडेंट (एजुकेशन) के तौर पर काम कर रहे थे। कौशलेंद्र प्रपन्न के परिवार में उनकी पत्नी विशाखा अग्रवाल और 11 महीने का बेटा है।

बताया जाता है कि 25 अगस्त को उन्होंने दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था पर एक लेख लिखा था। ‘शिक्षा: न पढ़ा पाने की कसक’ शीर्षक से यह लेख एक प्रतिष्ठित अखबार में छपा था। इस लेख में उन्होंने नगर निगम के स्कूलों के काबिल और उत्साही शिक्षकों की पीड़ा की चर्चा की थी। उनका कहना था कि आजकल शिक्षक चाह कर भी स्कूलों में पढ़ा नहीं पा रहे हैं। पठन-पाठन के अलावा, शिक्षकों के पास ऐसे कई दूसरे सरकारी काम होते है, जिससे उनकी शिक्षा में कुछ नए प्रयोग करने की प्रक्रिया थम सी जाती है।

इस लेख के बाद कंपनी ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया था। आरोप है कि संस्थान के ही कुछ ​​अधिकारियों ने उन्हें उन्हें बेइज्जत किया था। इसी सदमे में हार्ट अटैक आने के कारण उन्हें पांच सितंबर को आईसीयू में भर्ती कराया गया था।

प्रपन्न टेक महिंद्रा से पहले पत्रकार के रूप में भी काम कर चुके थे। उन्होंने वर्ष 2008-09 के दौरान टाइम्स ग्रुप के हिंदी बिजनेस डेली इकोनॉमिक टाइम्स में भी अपनी सेवाएं दी थीं। इससे पहले वह दिल्ली सरकार के स्कूल में बतौर शिक्षक नौकरी कर चुके थे। शिक्षा सुधार और उन्नति पर प्रपन्न ने कई किताबें लिखी हैं। देश की शिक्षा पद्धति को कैसे बेहतर बनाया जाये, इसके लिए वह जापान, इंडोनेशिया और चीन की यात्रा भी कर चुके थे। ्इसके अलावा वह समय-समय पर लेख भी लिखते रहते थे।

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अमर उजाला के पत्रकार पर टूटा पुलिस का 'कहर', दर्ज की FIR

पत्रकारों के खिलाफ पुलिसिया उत्पीड़न के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन इस तरह के मामले सामने आते रहते हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 14 September, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 September, 2019
Police

पत्रकारों के खिलाफ पुलिसिया उत्पीड़न के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन इस तरह के मामले सामने आते रहते हैं। अब इन मामलों में नोएडा का भी एक मामला जुड़ गया है, जहां पर अमर उजाला की डिजिटल विंग में कार्यरत फोटो जर्नलिस्ट दिनेश कुमार (27) को न सिर्फ देर रात तक पुलिस स्टेशन में बिठाए रखा, बल्कि मारपीट कर उनके नाम एफआईआर तक दर्ज कर ली गई।

उप्र के जिला बलिया निवासी दिनेश कुमार का कसूर सिर्फ इतना था कि वह अपने मोबाइल से पुलिस व पब्लिक के बीच हो रहे किसी विवाद को शूट कर रहे थे। हालांकि, बाद में संस्थान ने आगे आकर जब दिनेश कुमार की पैरवी की, तब उन्हें जाने तो दिया गया, लेकिन एफआईआर में से उनका नाम नहीं हटाया। इस मामले में एसपी सिटी विनीत जायसवाल का कहना था कि दिनेश कुमार का नाम इसलिए एफआईआर से नहीं हटाया गया, क्योंकि उन्होंने भीड़ को भड़काने का काम किया था।  

वहीं, दिनेश कुमार का कहना है कि शाम करीब साढ़े सात बज वह अपनी ड्यूटी कर घर लौट रहे थे, तभी उन्होंने कुछ लोगों को पुलिस से विवाद करते हुए देखा, इस पर वह अपने मोबाइल से घटना की विडियो बनाने लगे। इसी दौरान एक कांस्टेबल ने उनका मोबाइल छीन लिया। दिनेश कुमार के अनुसार, ‘पुलिस ने मुझसे पूछा कि मैं कहां काम करता हूं और जब मैंने अपने संस्थान का नाम बताया तो उन्होंने मुझसे आइडेंटिटी कार्ड दिखाने को कहा। उस समय आइडेंटिटी कार्ड मेरे पास नहीं था। इस पर पुलिस ने मुझे वैन में बिठा लिया और पुलिस स्टेशन ले गए। इसके बाद पुलिस ने कई अन्य लोगों के साथ मेरा नाम भी एफआईआर में दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। एफआईआर में पुलिस पर हमला, धमकी देना और गालीगलौज जैसे आरोप लगाए गए।

वहीं, पुलिस का कहना है कि कुमार के साथ जिन चार अन्य लोगों के नाम एफआईआर में दर्ज थे, वे बाइक चेकिंग के दौरान पुलिस से झगड़ा कर रहे थे। उनके पास बाइक के कागज भी नहीं थे। यहां तक कि बाइक पर नंबर प्लेट भी नहीं थी। पुलिस का कहना है कि चारों लोग खुद को पत्रकार बताते हुए पुलिस के साथ झगड़ा कर रहे थे और इसमें दिनेश कुमार ने भी उनका साथ दिया। हालांकि, बाद में पुलिस ने बताया कि जांच में पुलिस से झगड़ा करने के मामले में दिनेश कुमार की संलिप्तता न मिलने पर उन्हें जमानत दे दी गई।

बता दें कि पत्रकार के खिलाफ यह अकेला ऐसा मामला नहीं है। कुछ दिन पूर्व ही उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में एक स्कूल में मिड-डे-मील के नाम पर बच्चों को रोटी-नमक दिए जाने का खुलासा करने पर ‘जनसंदेश’ अखबार के पत्रकार पवन जायसवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इससे पहले यूपी के ही बिजनौर में आशीष तोमर और शकील अहमद नामक पत्रकार के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज की गई थी, दोनों ने वाल्मीकि परिवार के गांव से पलायन के मामले का खुलासा किया था।

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IIMC DG की दौड़ में पत्रकार-प्रोफेसर के बीच टक्कर, शॉर्टलिस्ट हुए नाम

देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) को जल्द ही नया महानिदेशक (DG) मिलने वाला है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 13 September, 2019
Last Modified:
Friday, 13 September, 2019
IIMC

देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) को जल्द ही नया महानिदेशक (DG) मिलने वाला है। जुलाई में इस पद के लिए आवेदन मांगे गए थे। 

मिली जानकारी के मुताबिक कुल 43 आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से तीन निरस्त हो गए थे। उसके बाद 40 आवेदनों में से 22 को चुना गया था। उसके बाद हुई प्रकिया के बाद फाइनिल लिस्ट बनाई गई है। अब इंटरव्यू के आधार पर फैसला होगा। 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक फिलहाल राज्यसभा टीवी के एडिटर-इन-चीफ राहुल महाजन इस दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। इस पद के लिए उनके प्रतिद्वंदी माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में  कार्यरत प्रो. संजय द्विवेदी माने जा रहे हैं। 

पर्दे के पीछे से बताया जा रहै हैकि इस पद पर होने वाली नियुक्ति में सरकार के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अहम भूमिका अदा कर रहा है।ऐसे में माना जा रहा है कि संघ का आशीर्वाद पाने वाला ही इस पद पर आसीन होगा।

अभी फिलहाल भारतीय सूचना सेवा (IIS) के वरिष्ठ अधिकारी कुलदीप सिंह धतवालिया महानिदेशक के तौर पर अतिरिक्त कार्यरभार संभाल रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार के.जी.सुरेश को हटने के बाद से ही एक परमानेंट महानिदेशक की तलाश शुरू हुई थी, जो संभवत: इस महीने के अंत तक पूरी हो जाएगी। 

इंटरव्यू के लिए जारी की गई शॉर्टलिस्ट पर नीचे देख सकते हैं...

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Tweet पड़ गया महंगा, पत्रकार को देना पड़ा इस्तीफा

हिंदुओं के बारे में दिया था आपत्तिजनक बयान, सोशल मीडिया पर करना पड़ रहा था आलोचनाओं का सामना

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 12 September, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 September, 2019
Female Journalist

हिंदुओं के बारे में आपत्तिजनक ट्वीट कर सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आईं अमेरिकी मीडिया संस्थान नेशनल पब्लिक रेडियो (NPR) की प्रड्यूसर फुरकान खान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह दिल्ली में बतौर प्रड्यूसर अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं। अपने ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा था।

अपने ट्वीट में उन्होंने कहा था कि यदि भारतीय अपना हिंदुत्व छोड़ दें तो उनकी परेशानियों का समाधान हो सकता है। उन्होंने हिंदुओं को गौमूत्र पीने वाला और गोबर की पूजा करने वाला बताया था।

हालांकि विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने वह ट्वीट डिलीट कर दिया है और दूसरा ट्वीट कर माफी मांगी है। इसके साथ ही उन्होंने ‘एनपीआर’ से इस्तीफा दे दिया है।

वहीं ‘एनपीआर’ ने फुरकान खान के बयान से पल्ला झाड़ लिया है। एनपीआर का कहना है कि फुरकान का बयान स्वीकार्य नहीं है और इस बयान से कंपनी का कोई लेना-देना नहीं है। इस बारे में ‘एनपीआर’ की ओर से एक बयान भी जारी किया गया है। इस बयान में ‘एनपीआर’ ने कहा है कि फुरकान का ट्वीट कंपनी के नैतिक आदर्शों के ख़िलाफ़ था। कंपनी ने बताया कि फुरकान ने इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांग ली है और अपना इस्तीफा दे दिया है।

बता दें कि फुरकान खान ने पहली बार इस तरह की विवादित पोस्ट नहीं की है। पहले भी अपने बयानों को लेकर वह सुर्खियों में रह चुकी हैं।

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अब इस यूनिवर्सिटी से जुड़े प्रोफेसर अरुण कुमार भगत, मिली बड़ी जिम्मेदारी

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में बतौर प्रोफेसर तैनात अरुण कुमार भगत ने कुछ दिनों पूर्व विश्वविद्यालय प्रशासन को भेज दिया था अपना इस्तीफा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 12 September, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 September, 2019
Arun Bhagat

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्विद्यालय, भोपाल से पिछले दिनों इस्तीफा देने वाले प्रोफेसर अरुण कुमार भगत के बारे में एक बड़ी खबर सामने आई है। खबर है कि मोतिहारी (बिहार) स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में वे अब डीन के रूप में काम करेंगे। 

डॉ. भगत की केविवि में निर्धारित चयन प्रक्रिया के तहत 9 सितंबर, 2019 को बतौर प्रोफेसर नियुक्ति हुई और उन्हें मीडिया स्टडीज विभाग का अध्यक्ष बनाया गया है। इसके साथ ही प्रो. भगत स्कूल ऑफ कंप्यूटेशनल साइंस, इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में डीन का पद संभालेंगे। प्रोफेसर भगत करीब दो दर्जन पुस्तकों का लेखन-संपादन कर चुके हैं। वे राष्ट्रपति और भारत सरकार की ओर से कईं समितियों के मनोनीत सदस्य हैं।

प्रो.भगत के करीबी छात्र रहे पत्रकार देवेश कुमार शर्मा ने इस बारे में अपने फेसबुक पेज पर जानकारी दी है। शर्मा का कहना है कि केविवि, बिहार में प्रो. भगत की नियुक्ति एक स्वागत योग्य कदम है। उनके अनुभव का लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा। अब निश्चित तौर पर बिहार नई पीढ़ी के पत्रकारों को तैयार करने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है

गौरतलब है कि बिहार के मोतिहारी में महात्मा गांधी के नाम पर केंद्रीय विश्वविद्यालय (केविवि) की स्थापना को कैबिनेट से 6 जुलाई, 2014 को मंजूरी मिली थी। अक्टूबर 2016 से ही इसमें शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुई थी। अब यूनिवर्सिटी में प्राध्यापकों के सभी पद भर गए हैं।

प्रोफेसर भगत ने बताया कि मोतिहारी के केंद्रीय विश्वविद्यायल में पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक, स्नातकोत्तर, एमफिल और पीएचडी पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इससे न सिर्फ चंपारण बल्कि आसपास के जिलों जैसे गोपालगंज, बेतिया, शिवहर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी आदि के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे प्रदेश का रुख नहीं करना पड़ेगा।

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एस्सेल ग्रुप के बाद राजेश सेठी ने पकड़ी नई राह, मिली बड़ी जिम्मेदारी

पूर्व में सिटी नेटवर्क्स, जी एंटरटेनमेंट और टेन स्पोर्ट्स में बड़ी जिम्मेदारी निभा चुके हैं राजेश सेठी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 12 September, 2019
Last Modified:
Thursday, 12 September, 2019
Rajesh Sethi

नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन (NBA) ने दिग्गज मीडिया एग्जिक्यूटिव राजेश सेठी को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें ‘एनबीए इंडिया’ का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया है। सेठी को लीडरशिप रोल में काम करने का 20 साल से ज्यादा का अनुभव है। ‘एनबीए’ के साथ वह अपनी पारी 12 सितंबर यानी आज से शुरू करेंगे। अपनी इस भूमिका में वह एनबीए के डिप्टी कमिश्नर और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर मार्क टेटम को रिपोर्ट करेंगे। एनबीए इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में सेठी भारत में एसोसिएशन के बास्केटबॉल और बिजनेस संबंधी कार्यों की देखरेख करेंगे। इस कार्य में रीजन की सीनियर लीडरशिप टीम उन्हें सपोर्ट करेगी। 

बता दें कि इससे पहले सेठी ‘एस्सेल’ समूह के साथ जुड़े हुए थे। यहां रहते हुए उन्होंने ‘सिटी नेटवर्क्स’, ‘जी एंटरटेनमेंट’ और ‘टेन स्पोर्ट्स’ में कई बड़ी भूमिकाओं को निभाया। वर्ष 2017 से वह सिटी नेवर्क्स में चीफ बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन ऑफिसर की भूमिका निभा रहे थे। ‘सिटी नेटवर्क्स’ से पहले वह ‘जी एंटरटेनमेंट’ में सीईओ (डिस्ट्रीब्यूशन और स्पोर्ट्स बिजनेस) के पद पर काम कर रहे थे। इसके अलावा वह स्पोर्ट्स चैनल ‘टेन स्पोर्ट्स’ में भी सीईओ की भूमिका निभा चुके हैं। पूर्व में राजेश सेठी ‘Allianz Global’  में साउथ ईस्ट एशिया के सीईओ और रीजन डायरेक्टर भी रह चुके हैं। इसके अलावा वह ‘जनरल इलेक्ट्रिक’ और ‘टाटा मोटर्स’ में भी अहम पद पर रह चुके हैं।

इस बारे में टेटम का कहना है, ‘राजेश को मीडिया और ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री में काम करने का काफी अनुभव है। उनकी लीडरशिप और मैनेजमेंट संबंधी काबिलियत को देखते हुए ही उन्हें यह कमान सौपी गई है। राजेश सेठी के हमारे साथ जुड़ने से नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन को काफी मदद मिलेगी और वह इंडिया में इसे काफी ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।’

अपनी नई भूमिका के बारे में सेठी का कहना है, ‘एनबीए से जुड़कर मैं काफी रोमांचित हूं। इसने काफी बेहतर तरीके से भारत में अपनी मौजूदगी को विस्तार देने का काम किया है। अपने सभी पार्टनर्स और साथियों के साथ मिलकर हम इसे और नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।’ राजेश सेठी ने बेंगलूर यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली में भारतीय विद्या भवन से मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा करने के साथ ही ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन से प्रोफेशनल डिप्लोमा भी लिया है।  

राजेश सेठी के बारे में ‘ट्रस्ट लीगल’ (Trust Legal) के मैनेजिंग पार्टनर सुधीर मिश्रा का कहना है, ‘राजेश में कमाल की नेतृत्व क्षमता है। वह काफी अच्छे बिजनेस लीडर हैं। मैंने उनके साथ काम किया है। एबीए को भारत में विस्तार देने के लिए उनके पास विजन है और मुझे पूरा विश्वास है कि वह अपनी इस मुहिम में सफल होंगे।’

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