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अजीत अंजुम के सवालों की तपिश नहीं झेल पा रहे नेता

अंजुम शाम सात बजे प्रसारित होने वाले शो ‘राष्ट्रीय बहस’ होस्ट करते हैं। इस शो में वो अतिथियों से तीखे सवाल पूछते हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago

टीवी चैनलों पर होने वाली बहस में शरीक होने के लिए नेता सहर्ष तैयार हो जाते हैं। क्योंकि इसके दो फायदे हैं, एक तो उन्हें अपने विचारों से लोगों को रूबरू कराने का मौका मिल जाता है और दूसरा पार्टी को भी यह संदेश पहुँच जाता है कि मीडिया में उनकी पूछपरख कायम है। लेकिन जब हॉट सीट पर बैठकर उनका सामना सुलगते सवालों से होता है, तो कुछ मर्यादाओं को तार-तार कर बैठते हैं और कुछ बीच में ही उठकर चले जाते हैं। ऐसा ही कुछ भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के साथ भी हुआ। प्रज्ञा से ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ के कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने ऐसे सवाल पूछे कि उन्हें बहस अधूरी छोड़कर जाने के अलावा कुछ नहीं सूझा। हाल ही में लॉन्च हुए टीवी9 समूह के हिंदी न्यूज़ चैनल ‘भारतवर्ष’ ने अच्छी शुरुआत की है। चैनल ने बीते दिनों अपने एक स्टिंग ऑपरेशन से भी सबको हिला दिया था और अब उसके संपादक अजीत अंजुम अपने सवालों से राजनेताओं को हिलाने में लगे हैं।

अंजुम शाम सात बजे प्रसारित होने वाले शो ‘राष्ट्रीय बहस’ होस्ट करते हैं। इस शो में वो अतिथियों से तीखे सवाल पूछते हैं, कई बखूबी उनका जवाब दे जाते हैं, जबकि कई बीच में जाना ही बेहतर समझते हैं। प्रज्ञा ठाकुर ने मुंबई हमले के दौरान शहीद हुए मुंबई एटीएस चीफ हेमंत करकरे पर आपत्तिजनक बयान दिया था। जिसके बाद से उनकी आलोचना हो रही है। जब प्रज्ञा ‘राष्ट्रीय बहस’ का हिस्सा बनीं, तो अजीत अंजुम ने इसी विषय पर उनसे प्रश्न किए। प्रश्न के साथ ही साध्वी के हावभाव बदलना शुरू हो गए थे और एक मोड़ पर आकर उन्होंने माइक निकालकर किनारे रखा और शो बीच में छोड़कर चली गईं। दरअसल, अजीत अंजुम ने प्रज्ञा ठाकुर ने तीन सवाल किये। पहले दो सवाल का तो जवाब प्रज्ञा ने दिया लेकिन तीसरे सवाल पर वो वहां से चली गईं। पहला सवाल था “हेमंत करकरे को पूरा देश शहीद के तौर पर जानता है। उन्हें अशोक चक्र मिला, उन हेमंत करकरे के लिए आपने जिस तरह के शब्द का इस्तेमाल किया, ये सब एक शहीद के लिए कहना लगता नहीं कि शर्मिंदगी वाला बयान है?” इस पर साध्वी ने कहा, “ऐसा है कि किसी को भी द्विपक्षीय बातें नहीं करनी चाहिए। मैं एक ही बात कहूंगी कि जिस व्यक्ति को मैंने प्रत्यक्ष झेला है, उसके बारे यदि मैंने कहा है, तो उसकी सत्यता पता करनी चाहिए. दूसरी बात मेरा ये कहना है कि जो भी देशभक्ति का दमन करेगा, आतंकवाद से मरेगा।”

दूसरा सवाल था  “वो देशभक्त थे। उन्होंने देश के लिए गोलियां खायीं। जिस शख्स को देश ने एक जांबाज के तौर पर देखा, उसे आप देशद्रोही कहती हैं, उन्हें हिंदू विरोधी कहती हैं और साथ में खुद को देशभक्त कहती हैं। आपने ऐसा क्या किया कि आप देशभक्त हो गईं और जो देश के लिए शहीद हुआ, वो हिंदू विरोधी हो गया? देशद्रोही हो गया और उसका सर्वनाश हो गया?” जिस पर भाजपा उम्मीदवार ने कहा “आप मुझसे ये प्रश्न न करें। मैंने जो कहा है, वह मैंने झेला है। जो व्यक्ति झेलता है, उससे अच्छा कोई नहीं जानता है। कानून के अंतर्गत गैरकानूनी काम करने वाला वो था, ये मैंने स्वंय झेला है। इससे ज्यादा मैं और क्या कहूं। इतनी गंदी गालियां देता था वो मुझे, मैं कैमरे के सामने नहीं बोल सकती। क्या कहोगे आप इसको? ये क्या कानून था कि मुझे 13 दिनों तक गैरकानूनी तरीके से रखा गया। ये कानून का रक्षक है क्या? किस प्रकार की बात करते हैं? हमारी संवेदना, संवेदना नहीं होती? कौन सी संवेदना, संवेदना होती है? ऑम्ले जब शहीद हुआ तो क्यों उसे पुरस्कार नहीं दिया गया? अगर ऑम्ले नहीं नहीं होता तो कसाब पकड़ा नहीं गया होता और दिग्विजय सिंह जैसे लोग हमें आतंकी सिद्ध कर देते। इसलिए प्रश्न समाज से करिए। प्रश्न कांग्रेसियों से करिए। ये समाज, ये देश उनको उत्तर देगा।”

इसके बाद अंजुम ने तीसरा सवाल दागा, उन्होंने पूछा ‘यदि आपके साथ टार्चर हुआ तो आपको अदालत में जाना चाहिए था। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र सरकार आपकी शुभचिंतक है, आप इन तमाम दरवाज़ों को खटखटातीं, लेकिन आज चुनाव के वक़्त यदि आप ऐसी कहानियां सुना रही हैं और करकरे को देशद्रोही कह रहीं हैं। आपको यदि कांग्रेस से शिकायत थी तो आप कहिये, आपको हक़ है। लेकिन इसके आधार पर आप यदि हेमंत करकरे के लिए कुछ कह रहीं हैं तो आपको सोचना चाहिए। आप अपने चुनावी फायदे के लिए देश की जनता की भावनाओं का भी इस्तेमाल कर रही हैं।’ इतना सुनते ही प्रज्ञा ठाकुर ने अपना माइक निकाला और उठकर वहां से चली गईं।


वैसे ये कोई पहला मौका नहीं है जब अजित अंजुम के तीखे सवालों ने किसी नेता को विचलित किया है, कुछ वक़्त पहले केन्द्रीय मंत्री रविशंकर भी ऐसे ही बीच में उठकर चले गए थे। दरअसल, भाजपा के घोषणापत्र को लेकर अजीत अंजुम ने रविशंकर प्रसाद से एक सवाल पूछा था, जिससे वो इतने नाराज़ हुए कि उठकर चले गए। जाने से पहले उन्होंने कहा था ‘हमारे इतने बड़े घोषणापत्र से अब तक आपने भारत की बुनियाद का एक सवाल भी नहीं पूछा। मैं आपके कार्यक्रम में आया हूँ और खाली आप एक बात पर ही अड़े हुए हैं। मैं क्यों रहूँ आपके कार्यक्रम में, नहीं रहूँगा।’ केन्द्रीय मंत्री इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा ‘यदि आप मुझसे तरीके से सवाल करेंगे, तो मैं सभी का जवाब दूंगा। आप सीनियर संपादक हैं तो मैं भी देश का सीनियर नेता हूँ। आप हल्की बात करेंगे तो मुझे आपसे नमस्ते करना पड़ेगा। धन्यवाद’। इतना कहते ही रविशंकर प्रसाद कुर्सी से उठे और शो बीच में छोड़कर चले गए। अजीत अंजुम ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने उसे अनदेखा कर दिया।

आप ये शो नीचे विडियो पर क्लिक कर भी देख सकते हैं...


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