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कश्मीर के हालात पर वरिष्ठ पत्रकार के.जी.सुरेश ने लिखा केंद्रीय मंत्री को पत्र
फ़ेसर और वरिष्ठ पत्रकार के. जी. सुरेश ने सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखा है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
370 से आज़ाद हुए कश्मीर में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं, लेकिन स्कूलों में पसरा सन्नाटा चिंता का विषय है। इसी चिंता को रेखांकित करते हुए प्रोफ़ेसर और वरिष्ठ पत्रकार के. जी. सुरेश ने सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिखा है। हालांकि, उन्होंने अपने पत्र में सरकार को कठघरे में खड़ा नहीं किया है, जैसा कि पहले होता आया है। उन्होंने इस चिंता से निपटने का नायब सुझाव सरकार को दिया है।
सुरेश ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखा है ‘यह बहुत संतोष की बात है कि कश्मीर की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और इस बारे में आवाम को सूचित करने के लिए आकाशवाणी और दूरदर्शन दोनों कई कश्मीर केंद्रित कार्यक्रम पेश कर रहे हैं, जैसे कि ‘कश्मीर का सच’। लेकिन विरोध या हिंसा के डर से स्कूलों में छात्रों की अनुपस्थिति चिंता का विषय रही है। इससे लाखों युवाओं की शिक्षा प्रभावित हो रही है, जो इस क्षेत्र और देश का भविष्य हैं’।
2014 में इबोला के खौफ के चलते सिएरा लियोन के स्कूलों से गायब हुए बच्चों की पढ़ाई को लेकर वहां की सरकार द्वारा उठाये गए क़दमों का जिक्र करते हुए के. जी. सुरेश ने आगे लिखा है ‘यह काबिले गौर है कि 2014 में पश्चिम अफ्रीकी देश सिएरा लियोन में इबोला के प्रकोप के कारण एक मिलियन से अधिक बच्चों ने कई महीनों तक स्कूल से दूरी बना ली थी। इसके बाद, सिएरा लियोन सरकार ने यूनिसेफ और कई संगठनों के साथ मिलकर रेडियो शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम का प्रसारण 41 सरकारी रेडियो स्टेशनों के साथ ही राज्य के स्वामित्व वाले टीवी चैनलों पर भी किया गया। प्रशिक्षकों ने बच्चों के लिए एक घंटे का शिक्षण सत्र तैयार किया। कुछ ही समय में ये सेशन इतने लोकप्रिय हो गए कि शुरुआत में महज 20 की भागीदारी बढ़कर 70 प्रतिशत हो गई।
इसी तरह, हरियाणा के मेवात जिले से संचालित होने वाले सामुदायिक रेडियो स्टेशन ‘रेडियो मेवात’ भी चुनिंदा विषयों पर बच्चों को शिक्षित करने में लगा है और इसके सकरात्मक परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं। उपरोक्त के मद्देनजर, रेडियो कश्मीर और डीडी कश्मीर भी राज्य में शैक्षणिक संस्थान, केंद्रीय संगठन जैसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग एंड कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन (दोनों मानव संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं) के साथ मिलकर इसी तरह के कार्यक्रम तैयार कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो ये निश्चित रूप से कश्मीर के छात्रों के लाभकारी होगा’।
अपने पत्र को आगे बढ़ाते हुए सुरेश ने लिखा है ‘आप इस उद्देश्य के लिए केंद्र शासित प्रदेश में मौजूद सामुदायिक रेडियो स्टेशनों का उपयोग करने की संभावना का पता लगा सकते हैं, साथ ही शैक्षणिक संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा अधिक स्टेशनों की स्थापना पर भी विचार कर सकते हैं। आईआईएमसी में महानिदेशक के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान सामुदायिक रेडियो सशक्तिकरण और संसाधन केंद्र की स्थापना की गई थी, जो बच्चों को प्रौद्योगिकी, विषय-वस्तु और संसाधन उत्पादन में प्रशिक्षित करने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर सकता है।
हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने रेडियो की शक्ति का उपयोग करते हुए अपने लोकप्रिय कार्यक्रम 'मन की बात' के माध्यम से बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुँच बनाई है। मुझे विश्वास है कि आपके गतिशील नेतृत्व में, रेडियो कश्मीर और डीडी कश्मीर छात्रों का भविष्य संवारने के लिए इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं’।
के. जी. सुरेश एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन के प्रोफेसर रहे हैं, एससीडीआर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के वह विजिटिंग प्रोफेसर हैं। इसके अलावा, भारतीय जनसंचार संस्थान में उन्होंने महानिदेशक पद की ज़िम्मेदारी संभाली है। साथ ही वह हील(Heal) फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक और मुख्य संपादक हैं।
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