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लंबी फेहरिस्त है ऐसे खबरनवीसों की, 'कारनामे' सुनकर आप भी रह जाएंगे दंग
एक साल में 16 हुए गिरफ्तार, कई पत्रकारों के खिलाफ अभी भी चल रही है जांच
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
कर्नाटक में पिछले एक साल में 16 पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है। गौर करने वाली बात ये है कि इन पत्रकारों पर जबरन वसूली और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप हैं। सबसे ताजा मामला पांच मई का है, जब केंद्रीय अपराध शाखा पुलिस द्वारा ‘फोकस टीवी’ के प्रबंध निदेशक हेमंत कम्मर को जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोपों के मुताबिक, कम्मर ने कथित तौर पर महादेवपुर के भाजपा विधायक अरविंद लिंबावली को फर्जी विडियो क्लिप का हवाला देकर 50 लाख रुपये कि मांग की थी।
इस संबंध में शिकायत विधायक के सहयोगी गिरीश द्वारा दर्ज कराई गई थी। गिरीश ने पुलिस को बताया कि कम्मर ने पैसा न मिलने की सूरत में क्लिप वायरल करने के लिए फेसबुक और वॉट्सऐप पर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाए थे। पुलिस को आशंका है कि हेमंत कम्मर ने विधायक की तरह और भी कई लोगों को ब्लैकमेल किया होगा। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।
थोड़ा पीछे चलें तो 24 अप्रैल को नेलमंगला पुलिस ने पूर्व टीवी पत्रकार किरण शानबाग को गिरफ्तार किया था। शानबाग प्रसिद्ध कन्नड़ न्यूज चैनल ‘TV9’ में काम कर चुके हैं। आरोप है कि शानबाग ने आयुर्वेदिक कॉलेज और अस्पताल चलाने वाले नेलमंगला के एक डॉक्टर से 25 लाख की मांग की थी। पुलिस के मुताबिक, शानबाग और उसका सहयोगी जगन्नाथ गौड़ा कथित रूप से डॉक्टर को धमका रहे थे। आरोपितों ने डॉक्टर से कहा था कि उनके पास पीड़ित की आपत्तिजनक सामग्री है, यदि पैसे नहीं मिले तो वो उसे वायरल कर देंगे। बदनामी के डर से डॉक्टर ने आरोपितों को भुगतान भी किया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने फिर पैसे की मांग करना शुरू कर दिया। इसके बाद डॉक्टर ने पुलिस में शिकायत की और आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इसी तरह, 27 अप्रैल को बेंगलुरु पुलिस ने पत्रकार, एस.ए हेमंत कुमार को गिरफ्तार किया था। कुमार पर वीरशैव लिंगायत धर्म को लेकर गृहमंत्री एमबी पाटिल की ओर से कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी को लिखे फर्जी पत्र को सोशल मीडिया पर वायरल करने का आरोप है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गृहमंत्री ने 13 अप्रैल को स्वयं विजयपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। साइबर सेल के महानिरीक्षक हेमंत निंबालकर ने बताया कि कुमार की गिरफ्तारी सबूतों और अन्य आरोपितों के बयान के आधार पर की गई थी। गौरतलब है कि पाटिल ने पत्र को 'फर्जी' करार देते हुए इसे प्रतिद्वंद्वियों द्वारा उन्हें बदनाम करने की साजिश करार दिया था। जबकि भाजपा ने कुमार की गिरफ्तारी की निंदा की थी, बाद में कुमार को जमानत पर रिहा कर दिया गया।
27 मार्च को भी कुछ पत्रकारों पर उगाही के आरोप में विजयापुर पुलिस ने कार्रवाई की थी। आरोपितों में कन्नड़ न्यूज चैनल ‘सुवर्णा न्यूज’ के जिला संवाददाता प्रसन्ना देशपांडे, उनके कैमरामैन संगमेश काम्बर और कन्नड़ साप्ताहिक ‘संग्राम’ के रवि बिसनलारा शामिल हैं। विजयपुरा पुलिस के मुताबिक, आरोपितों ने लिंग परिक्षण करने वाले एक डॉक्टर का विडियो बनाया था। इसके एवज में 50 लाख की मांग की गई थी, जिसे बाद में घटाकर 10 लाख कर दिया गया। इतना ही नहीं, तीनों ने पैसे देते हुए डॉक्टर को इस तरह कैमरे में कैद किया, जैसे वह उन्हें रिश्वत की पेशकश कर रहा है।
इसी तरह कन्नड़ न्यूज चैनल ‘पब्लिक टीवी’ से जुड़े पत्रकार हेमंत कश्यप पर भी उगाही का आरोप है। उन्हें बेंगलुरु की सदाशिवनगर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तार किया था। कश्यप ‘समया टीवी’ चैनल के अपने पत्रकार साथी के साथ मिलकर प्रसिद्ध चिकित्सक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. रमन राव को ब्लैकमेल कर रहा था। पुलिस ने बताया कि आरोपितों ने कथित तौर पर पीड़ित के अवैध संबंधों को उजागर करने वाली एक विडियो क्लिप तैयार की, जिसके ऐवज में 50 लाख रुपए की मांग की जा रही थी। आरोपी धमकाने के लिए कई बार पीड़ित की क्लिनिक भी गए थे।
मामला सामने आने के बाद ‘पब्लिक टीवी’ के प्रमुख एच.आर. रंगनाथ को एक विडियो संदेश जारी करके अपना रुख स्पष्ट करना पड़ा। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। हालांकि, कश्यप को बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया।
फेक न्यूज फैलाने में कई पत्रकार भी पीछे नहीं हैं। ऐसा ही एक मामला पिछले साल मार्च में सामने आया, जब पुलिस ने ‘पोस्टकार्ड न्यूज’ के संस्थापक महेश विक्रम हेगड़े को गिरफ्तार किया। महेश ने जैन मुनि पर मुस्लिमों के हमले की फर्जी खबर फैलाई थी। वैसे ये कोई पहला मौका नहीं था। इससे पूर्व उन पर जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक को गिरफ्तार किए जाने के सम्बन्ध में भड़काऊ ट्वीट को लेकर मामला दर्ज किया गया था। साथ ही उन पर सोनिया गांधी को लिखे फर्जी पत्र को वायरल करने का भी आरोप था, पुलिस ने महेश को गिरफ्तार किया था, लेकिन सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया गया।
कलम के सिपाहियों द्वारा अपराधियों जैसे कारनामों की फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। न्यूज चैनल ‘जनश्री’ के सीईओ लक्ष्मीप्रसाद वाजपेयी पर भी व्यवसायी को कथित तौर पर धमकाने और 10 करोड़ की मांग करने के आरोप लगे थे। इसी तरह जब कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त जस्टिस भास्कर राव के बेटे अश्विन को जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, तो उनके साथ दो पत्रकारों को भी गिरफ्तार किया गया था।
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