<p style="text-align: justify;"><strong>व्यंग्य राही की कलम से</strong></p> <p style="text-align: justify;">इन दिनों हिंदी पखवाड़ा और श्राद्ध पक्ष का अजीब संयोग है। सरकारी महकमे हिंदी का 'तर्पण' करने में जुटे हैं। हिंदी के कथित विद्वान भी नए कुर्ते-पायजामे सिलवाकर विभिन्न कार्यालयों में हिंदी दिवस मनाने के लिए वैसे ही तत्पर हो रहे हैँ जैसे कनागतों
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समाचार4मीडिया ब्यूरो