यहां ईरान से जुड़ीं कई न्यूज वेबसाइट्स पर लगी रोक

अमेरिका में मंगलवार को ईरान से जुड़ीं कई न्यूज वेबसाइट्स पर रोक लगा दी गई है

Last Modified:
Wednesday, 23 June, 2021
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अमेरिका में मंगलवार को ईरान से जुड़ीं कई न्यूज वेबसाइट्स पर रोक लगा दी गई है। बात दें कि इन पर दुष्प्रचार फैलाने के आरोप में के न्‍याय विभाग और वाणिज्‍य विभाग ने कार्रवाई की है।  

इन वेबसाइट्स में ईरान की सरकारी मीडिया प्रेस टीवी की अंग्रेजी वेबसाइट, यमन के हूती विद्रोहियों का अल मसीराह सैटलाइट न्‍यूज चैनल और ईरान का सरकारी अरबी भाषा का टीवी चैनल अल-अलम शामिल है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब तीन दर्जन वेबसाइट बंद की हैं, जिनमें से अधिकतर ईरान द्वारा किए जाने वाले दुष्प्रचार प्रयासों से जुड़ी थीं।

इन वेबसाइट्स पर जाने पर अमेरिका सरकार की ओर से अलर्ट आ रहा है। इस नोटिस में कहा गया कि अमेरिकी ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी, ऑफिस ऑफ एक्सपोर्ट इंफोर्समेंट और फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन द्वारा वेबसाइट्स को कानून प्रवर्तन कार्रवाई के हिस्से के रूप में सीज किया गया है। अमेरिकी सरकार ने समाचार वेबसाइट फिलिस्तीन टुडे का डोमेन नाम भी अपने कब्जे में ले लिया है। यह वेबसाइट गाजा में सक्रिय हमास और इस्‍लामिक जिहाद की विचारधारा को पेश करती थी। इस वेबसाइट पर भी वही नोटिस आ रहा है।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह एक ऐसा कदम है, जिसे ईरानी मीडिया पर एक दूरगामी कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है।

अमेरिकी सरकार ने हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘IRNA’ ने अमेरिकी सरकार द्वारा वेबसाइट बंद करने की घोषणा की, लेकिन इस मामले पर कोई विस्तृत जानकारी मुहैया नहीं कराई।

पिछले साल अमेरिका के न्‍याय विभाग ने ऐलान किया था कि उसने ईरान के शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड की करीब 100 वेबसाइट्स को बंद कर दिया है। तब अमेरिका ने कहा था कि ये वेबसाइट्स खुद को असली न्‍यूज वेबसाइट बताती हैं लेकिन असल में वे 'वैश्विक दुष्‍प्रचार अभियान' को चलाती हैं। इनका मकसद अमेरिका की नीतियों को प्रभावित करना और ईरानी प्रोपेगैंडा का दुनियाभर में प्रसार करना है।

अमेरिका ने यह कदम ईरान के राष्‍ट्रपति इब्राहिम रईसी के पदभार संभालने के कुछ ही दिन बाद उठाया है।

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Disney+ Hotstar में इस बड़े पद से अलग हुए गौरव कंवल

.यहां करीब ढाई साल से कार्यरत थे। इससे पूर्व वह सात साल से अधिक समय तक ‘एडोब’ (Adobe) में बतौर हेड (SMB & Channel Sales, South Asia) अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे

Last Modified:
Tuesday, 27 July, 2021
Gaurav Kanwal

‘ओवर द टॉप’ (OTT) प्लेटफॉर्म ‘डिज्नी+हॉटस्टार’ (Disney+ Hotstar) के एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट (Ad Sales) गौरव कंवल ने इस्तीफा दे दिया है। यहां वह करीब ढाई साल से कार्यरत थे। अपनी इस भूमिका में बतौर न्यू बिजनेस हेड वह ‘डिज्नी+हॉटस्टार’ के लिए विज्ञापन राजस्व बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

इसके तहत मार्केट के लिए नए रास्ते तलाशना, एडवर्टाइजर बेस बढ़ाना, ऐड फॉर्मेट और टेक्नोलॉजी इंफ्रॉस्ट्रक्चर जैसे तमाम उपाय शामिल थे। ‘डिज्नी+हॉटस्टार’ में आने से पहले उन्होंने ‘एडोब’ (Adobe) में बतौर हेड (SMB & Channel Sales, South Asia) सात साल से ज्यादा समय तक अपनी जिम्मेदारी निभाई थी।

इसके अलावा वह चार साल से अधिक समय तक ’Symantec Corporation’ में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। दो दशक से ज्यादा के अपने करियर में उन्होंने ‘Feedback Ventures’, ‘Corning International’ और ‘International SOS Services’ के साथ भी काम किया है।

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भारत के बाहर इस देश में सबसे ज्यादा देखा गया DD व AIR का यूट्यूब चैनल

दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो के यूट्यूब चैनल भारत के बाहर भी कई देशों में खूब पसंद किए जा रहे हैं

Last Modified:
Tuesday, 27 July, 2021
Doordarshan

दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो के यूट्यूब चैनल भारत के बाहर भी कई देशों में खूब पसंद किए जा रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा जिस देश में देखा गया वह है पाकिस्तान। सूचना-प्रसारण मंत्रालय ने बताया कि प्रसार भारती के एआईआर और डीडी नेटवर्क के करीब 170 से ज्यादा यूट्यूब चैनल मौजूद हैं। प्रसार भारती के डिजिटल चैनल देश ही नहीं विदेशों में भी काफी चर्चित हैं।

राज्‍यसभा में प्रश्‍न के उत्‍तर में सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि यूट्यूब चैनलों के दर्शकों के हिसाब से पांच अव्वल देशों के जो आंकड़े प्राप्त हुए हैं, उसके मुताबिक पाकिस्तान 2018 से सबसे ऊपर है। भारत के सरकारी चैनलों को भारत के बाद सबसे ज्यादा वहीं देखा गया है।

इसके अतिरिक्त शीर्ष देशों में यूएसए, सऊदी अरब, यूके, यूनाइटेड अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और बांग्लादेश है। ये वो देश है जहां भारतीयों की अच्छी खासी आबादी मौजूद है।

सरकार ने बताया कि 2020 में पाकिस्तान में दर्शकों की संख्या 1.33 करोड़, वहीं यूएसए में 1.28 करोड़, यूएई में 82.7 लाख, बांग्लादेश में 81 लाख और सऊदी अरब में संख्या 65 लाख थी। इस साल अब तक पाकिस्तान में 70 लाख और यूएसए में 56 लाख दर्शकों का आंकड़ा दर्ज किया गया है।

सरकार का कहना है साल भर के दर्शकों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो डीडी और एआईआर के यूट्यूब चैनल पर दर्शकों की संख्या 2019 के 68 करोड़ के मुकाबले साल 2020 में दोगुना होकर 130 करोड़ रही है।

उन्होंने बताया कि प्रसार भारती विभिन्‍न ऑडियो और वीडियो डिजिटल चैनलों को लोकप्रिय बनाने के लिए निरंतर विभिन्‍न कदम उठा रही है। इसके लिए समर्पित डिजिटल प्‍लेटफॉर्म प्रकोष्‍ठ बनाया गया है। यह प्रकोष्‍ठ विभिन्‍न डिजिटल प्‍लेटफॉर्म पर कार्यक्रमों और डिजिटल चैनलों की गतिविधियों का कार्यान्‍वयन और निगरानी करता है। न्‍यूज ऑन एआईआर ऐप का विभिन्‍न चैनलों पर निरंतर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।  

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'द वायर' के कार्यालय पहुंची दिल्ली पुलिस, बताई वजह

दिल्ली के गोल मार्केट इलाके में स्थित न्यूज वेबसाइट ‘द वायर’ के कार्यालय में 23 जुलाई को दिल्ली पुलिस पहुंची और इसके संस्थापक व संपादक सिद्धार्थ वरदराजन से पूछताछ की।

Last Modified:
Saturday, 24 July, 2021
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दिल्ली के गोल मार्केट इलाके में स्थित न्यूज वेबसाइट ‘द वायर’ के कार्यालय में 23 जुलाई को दिल्ली पुलिस पहुंची और इसके संस्थापक व संपादक सिद्धार्थ वरदराजन से पूछताछ की। इसकी जानकारी वरदराजन ने ट्विटर पर दी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने अभिनेत्री स्वरा भास्कर, विनोद दुआ और आरफा खानम शेरवानी के संबंध में उनसे सवाल पूछे। 

सिद्धार्थ वरदराजन से उनके कार्यालय पहुंचे पुलिसकर्मी ने उनसे पूछा कि विनोद दुआ कौन हैं? स्वरा भास्कर कौन हैं? क्या मैं आपका रेंट अग्रीमेंट देख सकता हूं? क्या मैं आरफा से बात कर सकता हूं?

सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जाने के घंटों बाद दिल्ली पुलिस की तरफ से इस मामले में स्पष्टीकरण आया, जिसमें नई दिल्ली जिले के डीसीपी दीपक यादव ने कहा कि यह 15 अगस्त से संबंधित रूटीन चेकिंग का हिस्सा था। डीसीपी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा को लेकर कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के संबंध में ‘द वायर’ के कार्यालय इलाके के पुलिसकर्मी गए थे। 

उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी उपाय, जैसे किरायेदार सत्यापन, गेस्ट हाउस की जांच पूरी दिल्ली में किए जा रहे हैं। स्थानीय पुलिस अधिकारी जिन कार्यालय का सत्यापन करने गए थे, उसके प्रवेश द्वार पर कोई साइनबोर्ड नहीं था।

अपने ट्वीट के साथ डीसीपी ने कार्यालय का फोटो भी भेजा है, जिस पर किसी कार्यालय का बोर्ड नहीं लगा था।

बता दें कि ‘द वायर’ दुनियाभर के उन 16 मीडिया संस्थानों में से एक है, जो पेगासस प्रोजेक्ट में शामिल थे। इसी वेबसाइट ने फ्रांस स्थित गैर-लाभकारी फॉरबिडन स्टोरीज और मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल के साथ मिलकर पेगासस की मदद से सबसे पहले जासूसी की खबर का खुलासा किया था।

 

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पत्रकार प्रियम सिन्हा ने इस मीडिया समूह से किया नए सफर का आगाज

पत्रकार प्रियम सिन्हा ने न्यूज ऐप ‘इनशॉर्ट्स’ (Inshorts) में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह यहां करीब आठ महीने से कार्यरत थे।

Last Modified:
Tuesday, 20 July, 2021
Priyam Sinha

पत्रकार प्रियम सिन्हा ने न्यूज ऐप ‘इनशॉर्ट्स’ (Inshorts) में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह यहां करीब आठ महीने से कार्यरत थे और हिंदी कंटेंट स्पेशलिस्ट के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

प्रियम सिन्हा ने अपना नया सफर अब ‘इंडियन एक्सप्रेस’ समूह के हिंदी न्यूज पोर्टल ‘जनसत्ता .कॉम’(jansatta.com) के साथ शुरू किया है। उन्होंने बतौर कंटेंट एडिटर यहां जॉइन किया है। बता दें कि ‘इनशॉर्ट्स’ से पहले प्रियम सिन्हा ‘टोटल टीवी’ (Total TV) में अपनी भूमिका निभा रहे थे। वह यहां करीब एक साल से कार्यरत थे और टीम लीडर (डिजिटल) की कमान संभाल रहे थे।

‘टोटल टीवी’ में उनकी यह दूसरी पारी थी। वर्ष 2017 में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भी इसी चैनल से ही की थी। साढ़े चार साल से ज्यादा समय से मीडिया में कार्यरत प्रियम सिन्हा ने जी न्यूज’ से इंटर्नशिप की है।

पूर्व में वह ‘न्यूज1इंडिया’ में रिपोर्टर के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों को अंजाम दे चुके हैं। वह हैदराबाद में रामोजी राव वाले इनाडु ग्रुप के डिजिटल नेटवर्क ‘ईटीवी भारत’ (ETV Bharat) में कंटेंट एडिटर (स्पोर्ट्स) के तौर पर भी काम कर चुके हैं। इससे अलावा वह ‘इंडिया न्यूज’ में मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ डेस्क पर बतौर असिस्टेंट प्रड्यूसर भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।

उत्तर प्रदेश में हरदोई के मूल निवासी प्रियम सिन्हा ने महाराणा प्रताप पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद गाजियाबाद के राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज से भी पढ़ाई की है। समाचार4मीडिया की ओर से प्रियम सिन्हा को उनकी नई पारी के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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Disney+ Hotstar में इस बड़े पद से गुलशन वर्मा ने दिया इस्तीफा

गुलशन वर्मा ने इस ‘ओवर द टॉप’ प्लेटफॉर्म को जुलाई 2018 में जॉइन किया था।

Last Modified:
Monday, 19 July, 2021
Gulshan Verma

‘ओवर द टॉप’ (OTT) प्लेटफॉर्म ‘डिज्नी+हॉटस्टार’ (Disney+ Hotstar) के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (SVP) और हेड (एडवर्टाइजिंग) गुलशन वर्मा ने यहां से बाय बोल दिया है। ‘डिज्नी+हॉटस्टार’  में अपनी इस भूमिका में वह ‘हॉटस्टार‘ के विज्ञापन बिजनेस के लिए सेल्स, सेल्स स्ट्रैटेजी, ऑपरेशंस, डाटा पार्टनरशिप, ब्रैंडेड कंटेंट, स्टूडियोज और कस्टमर मार्केटिंग के लिए जिम्मेदार थे।

हालांकि, वर्मा के इस्तीफे के बारे में अभी ‘स्टार इंडिया’ की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बता दें कि वर्मा ने ‘स्टार इंडिया’ के स्वामित्व वाले इस ओटीटी प्लेटफॉर्म को जुलाई 2018 मे बतौर सीनियर वाइस प्रेजिडेंट और हेड (क्लाइंट व एजेंसी) जॉइन किया था। इस भूमिका में वह बी3बी मार्केटिंग के अलावा बड़े क्लाइंट और एजेंसी रेवेन्यू के लिए जिम्मेदार थे। उन्हें ‘हॉटस्टार ब्रैंड लैब्स’ की स्थापना का श्रेय भी दिया जाता है।

‘डिज्नी+हॉटस्टार’ से पहले गुलशन वर्मा ‘टाइम्स इंटरनेट’ (Times Internet) में बतौर चीफ रेवेन्यू ऑफिसर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। वर्मा ने पिछले सालों में यूरोप, दक्षिण अमेरिका और एशिया में मीडिया और कई विशेष डिजिटल मीडिया कंपनियों के लिए काम किया है। ‘टाइम्स इंटरनेट‘ के साथ जुड़ने से पहले वह ‘आउटब्रेन‘ (Outbrain) के साथ थे, जहां उन पर भारत और दक्षिण एशिया में ‘आउटब्रेन‘ को मैनेज करने की जिम्मेदारी थी।

‘आउटब्रेन‘ से पहले वह ‘कोम्ली मीडिया‘ (Komli Media) के चीफ रेवेन्यू ऑफिसर थे। वर्मा ने ‘याहू‘के साथ भी काम किया है। उन्होंने यहां भारत और अमेरिका में ‘याहू‘ के लिए प्रोडक्ट मार्केटिंग के डायरेक्टर और सेल्स स्ट्रैटजी के डायरेक्टर के तौर पर काम किया है। उन्होंने ‘McKinsey & Co‘ के लॉस एजेंलेस स्थित ऑफिस में भी बतौर कंसल्टेंट काम किया है।

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एबीपी न्यूज को बाय बोलकर टीवी पत्रकार कुमकुम बिनवाल ने नई दिशा में बढ़ाए कदम

वह करीब तीन साल से हिंदी न्यूज चैनल ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) में अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

Last Modified:
Thursday, 15 July, 2021
Kumkum Binwal

टीवी जर्नलिस्ट कुमकुम बिनवाल ने हिंदी न्यूज चैनल ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) को अलविदा कह दिया है। वह करीब तीन साल से इस चैनल का हिस्सा थीं और बतौर एंकर चैनल का प्राइम टाइम मॉर्निंग शो ‘नमस्ते भारत’ (Namaste Bharat) होस्ट करती थीं। कुमकुम बिनवाल ने अब टीवी की दुनिया को बाय बोलकर अपनी नई पारी की शुरुआत डिजिटल के साथ की है। उन्होंने यूट्यूब चैनल हिंदुस्तान लाइव ‘Hindustan Live’ में बतौर कंसल्टिंग एडिटर जॉइन किया है।

मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली कुमकुम बिनवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब 14 साल का अनुभव है। पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने ‘न्यूज24’ में बतौर इंटर्न की थी। इसके बाद वह ‘टीवी टुडे नेटवर्क’, ‘इंडिया न्यूज’, ‘टोटल टीवी’ और ‘फोकस टीवी’ में अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने दिल्ली के ‘एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (AIMC) से  मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। कुमकुम बिनवाल एंकरिंग के साथ-साथ बड़े इवेंट्स में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी कर चुकी हैं। बिहार रिपोर्टिंग और नमस्ते भारत के लिए उन्हें दो बार प्रतिष्ठित एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड (enba) मिल चुका है।

समाचार4मीडिया की ओर से कुमकुम बिनवाल को उनके नए सफर के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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नहीं थम रहीं गूगल की मुश्किलें, लगा करोड़ों डॉलर का जुर्माना

फ्रांस के प्रतिस्पर्धा नियामक ने फ्रांसीसी पब्लिशर के साथ विवाद में गूगल पर 59.2 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया है

Last Modified:
Wednesday, 14 July, 2021
Google

फ्रांस के प्रतिस्पर्धा नियामक ने फ्रांसीसी पब्लिशर के साथ विवाद में गूगल पर 59.2 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया है। दरअसल, फ्रांसीसी पब्लिशर चाहते थे कि गूगल उनके खबरों के बदले उन्हें भुगतान करे।

नियामक ने चेतावनी दी कि अगर गूगल न्यूज पब्लिशर को मुआवजे का भुगतान करने के तौर तरीकों के बारे में दो महीने के अंदर प्रस्ताव नहीं पेश करता है तो उस पर प्रतिदिन करीब 10 लाख डॉलर के हिसाब से और जुर्माना लगाया जाएगा।

गूगल फ्रांस ने एक बयान में कहा कि इस फैसले से वह बेहद निराश है और यह जुर्माना ‘हमारे प्लेटफॉर्म पर किए गए प्रयासों या न्यूज कंटेंट के उपयोग की वास्तविकता को नहीं दर्शाता है।’

कंपनी ने कहा कि वह इसके समाधान की दिशा में सद्भावपूर्ण बातचीत कर रही है और कुछ पब्लिशर्स के साथ एक समझौते पर पहुंचने की कगार पर है। यह विवाद यूरोपीय संघ के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसमें गूगल और अन्य आईटी कंपनियों को कंटेंट के बदले में पब्लिशर्स को क्षतिपूर्ति करने को कहा गया है।

फ्रांसीसी जांच एजेंसी ने इस साल की शुरुआत में न्यूज पब्लिशर्स के साथ तीन महीने के भीतर बातचीत करने के लिए गूगल को अस्थायी आदेश जारी किया था और इन्हीं आदेशों के उल्लंघन को लेकर कंपनी पर मंगलवार को जुर्माना लगाया। गूगल को बार-बार फ्रांसीसी और यूरोपीय संघ के अधिकारियों द्वारा विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों के लिए निशाना बनाया गया है, जिन्हें बाजार में उसके प्रभुत्व का दुरुपयोग करने के रूप में देखा जाता है।

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SC का विभिन्न हाई कोर्ट में नए IT नियमों के खिलाफ दर्ज मामलों में हस्तक्षेप करने से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को विभिन्न हाई कोर्ट में नए आईटी नियम, 2021 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के संबंध में कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

Last Modified:
Saturday, 10 July, 2021
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को विभिन्न हाई कोर्ट में नए आईटी नियम, 2021 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के संबंध में कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

कार्यवाही की बहुलता का हवाला देते हुए केंद्र ने सभी याचिकाओं को स्थानांतरित करने की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं दिल्ली, बॉम्बे, मद्रास और केरल हाई कोर्ट में दायर की गई हैं, जिस पर सुनवाई चल रही है।

केंद्र ने अपनी याचिका में कहा, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को विनियमित करने का मुद्दा शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित है।

बता दें उच्च न्यायालयों में लंबित याचिकाओं में फेसबुक, ट्विटर जैसी सोशल मीडिया फर्मों के साथ ही ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने के उद्देश्य से लाए गए नए आईटी नियमों को चुनौती दी गई है

न्यायमूर्ति ए। एम। खानविलकर और संजीव खन्ना ने इस तरह के सभी मामलों को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग करने वाली केंद्र सरकार की याचिका को जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन द्वारा दायर एक अपील के साथ टैग किया, जो अदालत के समक्ष लंबित है।

पीठ ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए विभिन्न उच्च न्यायालयों के समक्ष कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने का निर्देश देने से भी इनकार कर दिया।

केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि शीर्ष अदालत के समक्ष आईटी नियमों को चुनौती देने वाले मामले लंबित हैं। पीठ ने जवाब दिया, हम एक लंबित एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) के साथ टैग करेंगे। पीठ ने कार्यवाही पर रोक लगाने के केंद्र के अनुरोध पर ध्यान नहीं दिया।

पीठ ने कहा, हम आज उस आदेश को पारित नहीं करेंगे। हम सिर्फ 16 जुलाई को उपयुक्त पीठ के समक्ष टैगिंग और सूची कर रहे हैं। इसके बाद बेंच ने स्थानांतरण याचिका को स्पेशल लीव पिटीशन के साथ टैग किया और 16 जुलाई के लिए उपयुक्त बेंच के सामने भेजा है।

केंद्र ने अपनी याचिका में कहा कि सभी याचिकाओं को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने से नए आईटी नियमों की वैधता पर व्यापकता, कार्यवाही की बहुलता और अलग-अलग न्यायिक विचारों से बचा जा सकेगा।

केंद्र ने तर्क दिया कि यदि व्यक्तिगत याचिकाओं पर उच्च न्यायालयों द्वारा स्वतंत्र रूप से निर्णय लिया जाता है, तो इसका परिणाम उच्च न्यायालय और इस अदालत के निर्णयों के बीच संघर्ष की संभावना में हो सकता है।

केंद्र ने प्रस्तुत किया, याचिकाकर्ता द्वारा उक्त नियमों को पहले ही इस अदालत के रिकॉर्ड में रखा जा चुका है और उनकी पर्याप्तता, वैधता और अन्य संबंधित मुद्दे इस अदालत के समक्ष विचाराधीन हैं।

आईटी नियमों को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यह सरकार को डिजिटल न्यूज पोर्टल्स पर सामग्री को वर्चुअली निर्देशित करने में सक्षम बनाता है।

नए आईटी नियमों (New IT Rules) के तहत भारतीय यूजर्स की शिकायतों पर कार्रवाई के लिए प्रमुख सोशल मीडिया (Social Media) कंपनियों में शिकायत अधिकारी की नियुक्ति जरूरी है। नए नियमों के तहत इस माइक्रोब्लॉगिंग मंच को मध्यस्थ के तौर पर मिली कानूनी राहत समाप्त हो गई है और ऐसे में वह यूजर द्वारा डाली गई किसी भी गैरकानूनी पोस्ट के लिये उत्तरदायी होगा। नए नियम 26 मई से प्रभावी हो गए हैं और ट्विटर ने दिए गए अतिरिक्त समय के बीत जाने के बाद भी, उन अधिकारियों की नियुक्ति नहीं की है जिससे उसे मिली प्रतिरक्षा खत्म होती है।

नए सोशल मीडिया नियमों को लेकर डिजिटल क्षेत्र की दिग्गज अमेरिकी कंपनी ट्विटर का भारत सरकार के साथ टकराव चल रहा है। भारत सरकार ने देश के नए आईटी नियमों की जानबूझ कर अनदेखी और कई बार कहे जाने के बावजूद नियमों के अनुपालन में नाकामी को लेकर उसकी आलोचना की है।

बता दें नवनियुक्त सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों को लेकर कहा है कि जो कोई भारत में रहता है और काम करता है, उसे देश के नियमों का अनुपालन करना होगा

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नए IT नियमों के खिलाफ न्यूज एजेंसी PTI भी पहुंची कोर्ट, केंद्र को नोटिस

न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) ने बुधवार को संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 की संवैधानिक वैधता को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

Last Modified:
Friday, 09 July, 2021
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न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) ने बुधवार को संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 की संवैधानिक वैधता को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट इस याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया है।

इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि IT नियम, 2021 (New IT Rules) ‘निगरानी और भय के युग’ की शुरुआत करता है, जिसकी वजह से सेल्फ-सेंसरशिप होगी।

नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए न्यूज एजेंसी ने तर्क दिया कि नियम केवल न्यूज व करंट अफेयर्स कंटेंट के प्रकाशकों को टारगेट करने में मदद करेंगे।

इंडियन एक्सप्रेस के एक मुताबिक, चीफ जस्टिस डी.एन. पटेल और जस्टिस जे.आर. मिधा की डिविजनल बेंच ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस जारी किया और इस मामले को 20 अगस्त को सुनवाई के लिए लिस्टेड किया। डिजिटल मीडिया पर IT नियमों को लागू करने को लेकर चुनौती देने वाली इसी तरह की याचिकाएं भी हाई कोर्ट में पेंडिंग हैं।

वकील वसीम बेग और स्वर्णेंदु चटर्जी के जरिए दायर याचिका में तर्क दिया गया कि नियमों का भाग III डिजिटल न्यूज पोर्टल्स पर सरकार की निगरानी को लागू करता है।

इसमें कहा गया, ‘केंद्र सरकार (कार्यकारी) लगाए गए नियमों के जरिए डिजिटल न्यूज पोर्टल्स की कंटेंट को निर्देशित करेगी और नियम केवल एक विशिष्ट वर्ग के साथ-साथ न्यूज और करंट अफेयर्स कंटेंट के पब्लिशर्स को टारगेट करने में भी मदद करेंगे। ये साफ तौर पर संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(ए) का उल्लंघन होगा।’

याचिका में आगे कहा, 'ये नियम केवल कार्यकारी या सरकार के लिए ऑनलाइन डिजिटल न्यूज पोर्टल के कंटेंट में एंट्री करने और उसे सीधे कंट्रोल करने के लिए एक हथियार की तरह काम आएंगे।'

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विदेशों से चंदा लेने के मामले में इस न्यूज पोर्टल के संस्थापक को मिला अंतरिम संरक्षण

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को डिजिटल मीडिया पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’ के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ को विदेशी फंडिंग के संबंध में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है।

Last Modified:
Thursday, 08 July, 2021
NewsClick454

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को डिजिटल मीडिया पोर्टल ‘न्यूजक्लिक’ के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ को विदेशी फंडिंग के संबंध में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। दिल्ली पुलिस ने वर्ष 2020 में मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुरकायस्थ द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने नोटिस जारी कर दिल्ली पुलिस से स्थिति रिपोर्ट मांगी है।

अदालत ने प्राथमिकी के सिलसिले में न्यूजक्लिक के निदेशक प्रांजल पांडेय की अग्रिम जमानत की याचिका पर उन्हें भी गिरफ्तारी से अंतरिक्ष संरक्षण प्रदान किया।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दायर प्राथमिकी में आरोप है कि पीपीके न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड ने कानून का उल्लंघन करते हुए वित्त वर्ष 2018-19 में वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी यूएसए से 9.59 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त किया।

पुरकायस्थ की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अमेरिका स्थित कंपनी से न्यूजक्लिक ने उस साल निधि प्राप्त की थी जब एफडीआई पर कोई सीमा नहीं थी। सिब्बल ने तर्क दिया, ‘वह लोकप्रिय पत्रकार हैं और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाते हैं। डिजिटल मीडिया मंचों को विदेशो से पैसा लेने की अनुमति है। इस पर सीमा अगले साल से प्रभावी हुई थी।’

इसके अलावा उन्होंने दलील दी कि पैसों के हेर-फेर का कोई सवाल नहीं उठता है क्योंकि इसका इस्तेमाल कर्मचारियों को वेतन देने में किया गया और इस प्रक्रिया में कोई राजकोषीय घाटा नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच किए जा रहे धनशोधन के मामले में दंडात्मक कार्रवाई से उन्हें पहले ही संरक्षण दे चुका है।

सिब्बल ने अदालत को बताया कि जांच एजेंसी ने पुरकायस्थ को 30 जून को तलब कर आठ जुलाई,  गुरुवार को अपने समक्ष पेश होने का निर्देश दिया है।

सरकार की तरफ से पेश वकील मंजीत एएस ओबरॉय ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि पुरकायस्थ ‘सीधे उच्च न्यायालय आए हैं।’

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि डिजिटल न्यूज वेबसाइट में एफडीआई की 26 प्रतिशत की कथित सीमा से बचने के लिए कंपनी के शेयरों का बहुत अधिक मूल्य निर्धारण करके निवेश किया गया था।

इसमें यह भी आरोप लगाया कि इस निवेश की 45 प्रतिशत से अधिक राशि में वेतन, किराया और अन्य खर्चों के भुगतान के लिए हेर-फेर की गई जो भुगतान कथित तौर पर गुप्त कार्यों के लिए किए गए।

इसने आरोप लगाया कि कंपनी ने ऐसा कर एफडीआई और देश के अन्य कानूनों का उल्लंघन किया और सरकारी राजकोष को घाटा पहुंचाया।

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