Vsure के फाउंडर अनीश महेश्वरी व आशा महेश्वरी, को-फाउंडर अमित राठी और सृजन नवल के साथ मिलकर OTT प्लेटफॉर्म EORTV के विकास में 200 करोड़ रुपये का निवेश करने की इच्छा जाहिर की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
EORTV, जो कि एक उभरता हुआ OTT प्लेटफॉर्म है और विभिन्न प्रकार के कंटेंट प्रड्यूस, अधिग्रहित, डिस्ट्रीब्यूट और सिंडिकेट करता है, ने Vsure Investment Affairs Private Limited के साथ एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इस साझेदारी के तहत, Vsure के फाउंडर अनीश महेश्वरी और आशा महेश्वरी, को-फाउंडर अमित राठी और सृजन नवल के साथ मिलकर EORTV के विकास में अगले कुछ वर्षों में 200 करोड़ रुपये का निवेश करने की इच्छा जाहिर की है।
इस निवेश का नेतृत्व अजय ठाकुर करेंगे, जो TGI SME Capital Advisor LLP के CEO और मैनेजिंग पार्टनर हैं और पहले BSE SME & Startup के प्रमुख रह चुके हैं। यह निवेश EORTV के कंटेंट अधिग्रहण, मार्केटिंग और तकनीकी ढांचे को और मजबूत करेगा। इसके साथ ही, EORTV का लक्ष्य एक साल में 5 मिलियन सब्सक्राइबर्स का माइलस्टोन हासिल करना है। फिलहाल, EORTV के 1.5 मिलियन से ज्यादा डाउनलोड्स हो चुके हैं, जो इसे भारत के तेजी से बढ़ते OTT मार्केट में एक मजबूत खिलाड़ी बनाता है।
EORTV के सीईओ दीपक पांडे ने इस साझेदारी को लेकर अपनी खुशी जताते हुए कहा, 'यह निवेश EORTV की भारत के OTT बाजार में गेम-चेंजर बनने की क्षमता को दर्शाता है। Vsure के वित्तीय समर्थन और रणनीतिक मार्गदर्शन से हम उच्च गुणवत्ता वाला कंटेंट एक व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में सक्षम होंगे।'
Vsure Investment Affairs के फाउंडर अनीश महेश्वरी ने भी इस साझेदारी पर उत्साह जताया और कहा, 'हम EORTV के साथ जुड़कर उत्साहित हैं, जो डिजिटल एंटरटेनमेंट में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य न केवल पूंजी निवेश करना है, बल्कि EORTV को उनकी दीर्घकालिक दृष्टि के साथ जोड़ने में भी मदद करना है।'
मुंबई के अंधेरी में हुए इस खास इवेंट में EORTV और Vsure के बीच की इस बड़ी साझेदारी की आधिकारिक घोषणा की गई। इस अवसर पर दीपक पांडे, फाल्गुनी शाह, शोभित अत्रेय, अनीश महेश्वरी, आशा महेश्वरी और अजय ठाकुर ने मंच संभाला। इवेंट में कई सितारों ने शिरकत की, जिनमें हिमांशु मल्होत्रा, नमन शॉ, राजीव ठाकुर, सिद्धार्थ निगम, विशाल आदित्य सिंह, अजय चौधरी, मोहित डागा, साहिल आनंद, पारस अरोड़ा और अमर शर्मा जैसे जाने-माने अभिनेता शामिल थे। इसके अलावा, नेहा मिश्रा, ईशा अग्रवाल, साक्षी शर्मा, वंदना सिंह, अंकिता साहू, परिधि शर्मा और रुचि गुज्जर जैसी अदाकाराओं ने रेड कारपेट पर जलवा बिखेरा।
इस निवेश के साथ, EORTV भारत के OTT स्पेस में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है और विभिन्न जॉनर में नए और विविध कंटेंट का निर्माण करने की योजना बना रहा है। साथ ही, यह साझेदारी EORTV को अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने और अपने दर्शक वर्ग का विस्तार करने में मदद करेगी।
EORTV का ध्यान हमेशा भारत के विविध दर्शक वर्ग के लिए प्रासंगिक और आकर्षक कंटेंट प्रदान करने पर रहा है, और यह साझेदारी इसे डिजिटल एंटरटेनमेंट की दुनिया में अग्रणी बनाने में मदद करेगी।
वॉट्सऐप जल्द यूजरनेम फीचर लाने जा रहा है, जिससे यूजर्स फोन नंबर साझा किए बिना एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे। कंपनी ने फीचर की लॉन्च टाइमलाइन (Timeline) का खुलासा नहीं किया है।
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Samachar4media Bureau
वॉट्सऐप (WhatsApp) ने अपने यूजर्स के लिए एक नए प्राइवेसी (Privacy) फीचर की घोषणा की है। कंपनी जल्द ऐसा फीचर लॉन्च करेगी, जिसके तहत यूजर्स फोन नंबर (Phone Number) की जगह यूजरनेम (Username) के जरिए एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे। फीचर लॉन्च होने से पहले कंपनी ने यूजर्स को अपने पसंदीदा यूजरनेम रिजर्व (Reserve) करने की सुविधा भी शुरू कर दी है।
मेटा प्लेटफॉर्म्स (Meta Platforms) के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप ने अपने ब्लॉग पोस्ट में बताया कि आने वाले महीनों में यूजर्स यह विकल्प चुन सकेंगे कि दूसरे लोग उन्हें केवल उनके यूजरनेम (Username) के जरिए खोजें और संपर्क करें, न कि उनके फोन नंबर से। हालांकि कंपनी ने फीचर की लॉन्च टाइमलाइन (Timeline) का खुलासा नहीं किया है।
वॉट्सऐप की वाइस प्रेजिडेंट – प्रोडक्ट (Vice President – Product) एलिस न्यूटन-रेक्स (Alice Newton-Rex) ने कहा कि इस फीचर को प्राइवेसी को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। उन्होंने बताया कि ऐप पर किसी तरह की यूजरनेम डायरेक्टरी (Username Directory) नहीं होगी और न ही टाइप करते समय यूजरनेम के सुझाव दिए जाएंगे। किसी यूजर से पहली बार संपर्क करने के लिए सामने वाले को उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा।
फिलहाल वॉट्सऐप पर किसी व्यक्ति से संपर्क करने के लिए उसका फोन नंबर होना आवश्यक है। वर्तमान में ऐप केवल व्यक्तिगत यूजर्स को ब्लॉक (Block) करने और अनजान कॉलर्स (Unknown Callers) को साइलेंस (Silence) करने जैसे सीमित प्राइवेसी विकल्प देता है। प्रोफाइल नेम (Profile Name) जोड़ने की सुविधा भी है, लेकिन वह केवल ग्रुप चैट (Group Chat) में उन लोगों को दिखाई देता है जिनके पास संबंधित यूजर का नंबर सेव नहीं होता।
कंपनी के अनुसार, जिन कंपनियों, संगठनों और कंटेंट क्रिएटर्स (Creators) के इंस्टाग्राम (Instagram) और फेसबुक (Facebook) पर पहले से अकाउंट हैं, उन्हें वॉट्सऐप पर भी अपना यूजरनेम सुरक्षित करने का अवसर मिलेगा।
वॉट्सऐप ने बताया कि यूजरनेम (Username) की लंबाई 3 से 35 कैरेक्टर (Characters) के बीच होगी। साथ ही किसी तरह की फर्जी पहचान (Impersonation) रोकने के लिए कंपनी सेलिब्रिटी (Celebrities), सार्वजनिक हस्तियों (Public Figures) और सरकारी संस्थाओं (Government Entities) जैसे हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स के यूजरनेम अपने नियंत्रण में रखेगी।
वॉट्सऐप का दावा है कि दुनिया भर में उसके 3 अरब (3 Billion) से अधिक यूजर्स हैं। ऐसे में नया यूजरनेम फीचर प्लेटफॉर्म पर प्राइवेसी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी Jio Platforms Limited के बहुप्रतीक्षित IPO को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन इसी बीच एक अहम अपडेट सामने आया है।
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Vikas Saxena
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल कंपनी 'जियो प्लेटफॉर्म' (Jio Platforms Limited) के बहुप्रतीक्षित IPO को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन इसी बीच एक अहम अपडेट सामने आया है। बाजार नियामक संस्था SEBI ने कंपनी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) पर कुछ अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण (clarification) मांगे हैं।
यह जानकारी ऐसे समय आई है जब Jio Platforms ने हाल ही में 19 जून 2026 को अपना DRHP SEBI के पास दाखिल किया था। सूत्रों के मुताबिक, यह कदम रेगुलेटर की सामान्य समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका मतलब यह नहीं है कि IPO को खारिज कर दिया गया है।
क्या है IPO प्लान?
कंपनी की योजना है कि वह इस IPO के जरिए 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करेगी। इन शेयरों का फेस वैल्यू ₹10 प्रति शेयर होगा। यह पूरा इश्यू फ्रेश इश्यू होगा, यानी इसमें किसी पुराने शेयरधारक की हिस्सेदारी नहीं बिकेगी, बल्कि कंपनी सीधे नई पूंजी जुटाएगी।
शेयरों की कीमत और इश्यू का साइज बुक बिल्डिंग प्रोसेस के जरिए तय किया जाएगा।
SEBI की भूमिका क्या है?
SEBI IPO दस्तावेजों की जांच करता है ताकि निवेशकों को सही और पूरी जानकारी मिले। इसी प्रक्रिया के तहत उसने Jio Platforms से कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है और अक्सर बड़े IPO में रेगुलेटर इस तरह के सवाल पूछता है ताकि दस्तावेजों में कोई कमी या अस्पष्टता न रहे।
आगे क्या होगा?
अब कंपनी को SEBI द्वारा मांगी गई जानकारी या स्पष्टीकरण देना होगा। इसके बाद ही IPO को आगे मंजूरी मिल सकती है। साथ ही, BSE और NSE से भी जरूरी मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी के बाद कंपनी IPO का फाइनल प्राइस बैंड, तारीख और लिस्टिंग डिटेल्स जारी करेगी।
निखिल दुबे इससे पहले ‘एनडीटीवी’ में एग्जिक्यूटिव शो प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत थे, जहां से कुछ दिनों पूर्व उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
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Samachar4media Bureau
वरिष्ठ टीवी पत्रकार निखिल दुबे ने अब नई दिशा में कदम बढ़ाते हुए डिजिटल का रुख किया है। उन्होंने हाल ही में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (हिंदी) की डिजिटल टीम में बतौर मल्टीमीडिया एडिटर जॉइन किया है।
निखिल दुबे इससे पहले ‘एनडीटीवी’ (NDTV) में कार्यरत थे। उन्होंने पिछले साल जून में यहां जॉइन किया था और एग्जिक्यूटिव शो प्रड्यूसर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, जहां से पिछले दिनों उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
निखिल दुबे को तमाम चैनल्स के साथ काम करने का 22 साल से ज्यादा का अनुभव है। ‘एनडीटीवी’ से पहले निखिल दुबे हिंदी न्यूज चैनल ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) में बतौर सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर रात नौ बजे के प्राइम टाइम शो ‘Public Interest’ को लीड कर चुके हैं। निखिल दुबे की ‘एबीपी न्यूज’ के साथ यह चौथी पारी थी।
‘एबीपी न्यूज’ के साथ अपनी चौथी पारी शुरू करने से पहले निखिल दुबे ‘टीवी9’ में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। वह इस नेटवर्क के हिंदी न्यूज चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ (TV9 Bharatvarsh) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। इस चैनल के साथ भी उनका संक्षिप्त कार्यकाल रहा था। वहीं, इससे पहले वह ‘इंडिया टीवी’ (India TV) में सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत थे।
‘इंडिया टीवी’ से पहले निखिल दुबे ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ में कार्यरत थे। इससे पहले वह ‘जी न्यूज’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। ‘जी न्यूज’ से पहले वह ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) में एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर कार्यरत थे।
अन्य मीडिया संस्थानों की बात करें तो उन्होंने फरवरी 2019 में ‘न्यूज नेशन’ जॉइन किया था और मई में उसे अलविदा कह दिया था। वहीं ‘इंडिया न्यूज’ में वह नवंबर 2018 से जनवरी 2019 तक कार्यरत रहे।
‘इंडिया न्यूज’ से पहले निखिल दुबे ‘एबीपी न्यूज’ में एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने वहां 9 जुलाई 2016 को पदभार संभाला था। जब वहां के मैनेजिंग एडिटर मिलिंद खांडेकर ने अचानक चैनल से इस्तीफा दिया था तो निखिल ने भी वहां से अपना इस्तीफा दे दिया था। इससे पहले वह अप्रैल 2006 से अक्टूबर 2009 में एसोसिएट एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के तौर पर भी इस चैनल के साथ काम कर चुके हैं। तब इस चैनल का नाम ‘एबीपी न्यूज’ की जगह ‘स्टार न्यूज’ था।
निखिल दुबे ने 1995 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से एलएलबी करने के बाद 2002 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से मॉसकॉम किया और इसके बाद पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। मई 2003 में उन्होंने ‘सहारा समय’ से अपने करियर की शुरुआत की और नवंबर 2005 तक वह यहां रहे। ‘सहारा समय’ में अपने सफर में वह विशेष संवाददाता की भूमिका में थे। इसके बाद उन्होंने अप्रैल 2006 में ‘स्टार न्यूज’ के साथ अपने सफर को आगे बढ़ाया। वहां तीन साल सात महीने रहने के बाद उनके सफर का अगला पड़ाव ‘आजतक’ बना। नवंबर 2010 से नवंबर 2012 तक वह सीनियर प्रड्यूसर के तौर पर ‘आजतक’ को अपना योगदान देते रहे। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक फ्रीलांस के तौर पर काम किया।
इसके बाद वह जुलाई 2013 में मुंबई में एंडेमॉल प्रॉडक्शन हाउस (Endemol production house) के साथ जुड़ गए और सितंबर 2013 तक बतौर स्क्रिप्ट राइटर काम किया। फिर वह एसोसिएट एडिटर बनकर ‘इंडिया टीवी’ आ गए। सितंबर 2013 से जनवरी 2014 तक वे यहां रहे। ‘इंडिया टीवी’ के बाद उन्होंने ‘न्यूज एक्सप्रेस’ में बतौर डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर काम किया और जनवरी से अगस्त 2014 तक रहे।
इसके बाद करीब तीन महीने तक वह ‘न्यूज24’ से जुड़े रहे और डिप्टी एग्जिक्यूटिव प्रड्यूसर के तौर पर नवंबर 2014 तक का सफर तय किया। इसके बाद वह एसोसिएट एडिटर बनकर ‘जी न्यूज’ आ गए और जुलाई 2016 तक रहे। इसके बाद वह ‘टीवी टुडे नेटवर्क’, ‘इंडिया टीवी’ और ‘टीवी9’ होते हुए ‘एबीपी न्यूज’ पहुंचे थे और वहां अपनी पारी को विराम देने के बाद पिछले साल ‘एनडीटीवी’ के साथ नई पारी का आगाज किया था, जहां से पिछले दिनों इस्तीफा देने के बाद अब ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (हिंदी) की डिजिटल टीम में जॉइन किया है।
आपको यह भी बता दें कि निखिल दुबे ने इंडिया टीवी में ‘तलाश’ नाम से शो बनाया था। वह एबीपी में ‘घंटी बजाओ’ और ‘वायरल सच’ शो में काम कर चुके हैं। इसके अलावा चार घंटे का मॉर्निंग शो ‘नमस्ते भारत’ प्रोड्यूस किया। जी न्यूज में रहते हुए उन्होंने क्रिकेट विश्वकप पर सात करोड़ रुपये की प्रॉडक्शन कास्ट का शो ‘World War’ प्रड्यूस किया। इसके अलावा भी वह तमाम जाने-माने शो प्रड्यूस कर चुके हैं।
समाचार4मीडिया की ओर से निखिल दुबे को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
'मेटा' की भारत एवं दक्षिण-पूर्व एशिया प्रमुख संध्या देवनाथन (Sandhya Devanathan) ने 'व्हाट्सऐप' के नए प्रमुख कुणाल शाह (Kunal Shah) का स्वागत करते हुए उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया।
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Samachar4media Bureau
'मेटा' (Meta) की भारत एवं दक्षिण-पूर्व एशिया प्रमुख (Vice President & Head – India and South East Asia) संध्या देवनाथन (Sandhya Devanathan) ने 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) के नए प्रमुख कुणाल शाह (Kunal Shah) का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कुणाल शाह ऐसे नेता हैं, जो लोगों का भरोसा जीतने वाले प्रोडक्ट तैयार करना अच्छी तरह जानते हैं।
हाल ही में कुणाल शाह (Kunal Shah) को 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। वह विल कैथकार्ट (Will Cathcart) की जगह लेंगे, जिन्होंने सात वर्षों तक इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का नेतृत्व करने के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है।
लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा किए गए एक पोस्ट में संध्या देवनाथन (Sandhya Devanathan) ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में संस्थापक (Founder) और निवेशक (Investor) के रूप में कुणाल शाह (Kunal Shah) का लंबा अनुभव उन्हें इस भूमिका के लिए उपयुक्त बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों से व्हाट्सऐप (WhatsApp) को बेहतर बनाने को लेकर कुणाल के सुझावों को करीब से देखने का अवसर उन्हें मिला है।
संध्या देवनाथन (Sandhya Devanathan) ने कहा कि 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) आज दुनिया भर में 3 अरब से अधिक लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है और भारत में यह करोड़ों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संचार माध्यम बन चुका है। उनके अनुसार, यह प्लेटफॉर्म परिवारों को जोड़ने, छोटे कारोबारों को ग्राहकों तक पहुंचाने और समुदायों को एक-दूसरे से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत में तकनीक के प्रभाव और डिजिटल इकोसिस्टम की गहरी समझ रखने वाले कुणाल शाह (Kunal Shah) के नेतृत्व में 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) की अगली विकास यात्रा को लेकर कंपनी उत्साहित है।
अपने पोस्ट में संध्या देवनाथन (Sandhya Devanathan) ने निवर्तमान प्रमुख विल कैथकार्ट (Will Cathcart) का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विल ने 'व्हाट्सऐप' (WhatsApp) को दुनिया के अरबों लोगों का भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (I4C) ने 'सीपैनल' और 'डब्ल्यूएचएम' में गंभीर सुरक्षा खामी को लेकर एडवाइजरी जारी की है। एजेंसी ने संगठनों को तुरंत सिस्टम अपडेट करने की सलाह दी है।
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Samachar4media Bureau
गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के तहत कार्यरत 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (Indian Cyber Crime Coordination Centre-I4C) ने 'सीपैनल' (cPanel) और 'वेब होस्ट मैनेजर' (Web Host Manager-WHM) से जुड़ी गंभीर सुरक्षा खामी को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि इस कमजोरी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी बिना पासवर्ड के सर्वर के एडमिन पैनल तक पहुंच सकते हैं।
'आई4सी' (I4C) के अनुसार, इस खामी का इस्तेमाल रैनसमवेयर (Ransomware), मालवेयर (Malware) हमलों और डेटा चोरी जैसी गंभीर साइबर घटनाओं के लिए किया जा सकता है। इससे बड़ी संख्या में वेबसाइट्स, ईमेल सेवाएं और सर्वर प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।
'इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम' (Indian Computer Emergency Response Team-CERT-In) ने भी इस सुरक्षा खामी को लेकर चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने प्रभावित 'सीपैनल' (cPanel) और 'डब्ल्यूएचएम' (WHM) वर्जन को तुरंत अपडेट करने की सलाह दी है, ताकि संभावित साइबर हमलों से बचा जा सके।
'आई4सी' (I4C) ने सभी संगठनों को मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (Multi-Factor Authentication-MFA) लागू करने, नियमित बैकअप रखने और एडमिन एक्सेस को सीमित करने की सलाह दी है। एजेंसी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था साइबर धोखाधड़ी या हमले का शिकार होती है, तो तुरंत हेल्पलाइन 1930 या 'साइबरक्राइम डॉट जीओवी डॉट इन' (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज कराएं।
'सीपैनल' (cPanel) एक लोकप्रिय कंट्रोल पैनल सॉफ्टवेयर है, जिसकी मदद से वेबसाइट मालिक अपनी वेबसाइट, ईमेल, डेटाबेस, फाइल्स और डोमेन का प्रबंधन करते हैं। वहीं 'डब्ल्यूएचएम' (WHM) इसका एडमिन संस्करण है, जिसका उपयोग होस्टिंग कंपनियां और सर्वर एडमिन एक साथ कई वेबसाइटों और cPanel अकाउंट्स को मैनेज करने के लिए करते हैं।
‘अमृत उजाला’ के प्रधान संपादक एवं सीईओ डॉ. अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि प्रथम चरण में प्लेटफार्म की शुरुआत उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से सेंट्रल एवं ईस्टर्न यूपी पर केंद्रित रहेगी।
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बहुप्रतीक्षित डिजिटल न्यूज प्लेटफार्म ‘अमृत उजाला’ की न्यूज वेबसाइट, न्यूज ऐप एवं यूट्यूब न्यूज चैनल का शुभारंभ 24 जून को कानपुर में देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित के. ए. दुबे पद्मेश के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ।
इस अवसर पर पंडित पद्मेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मीडिया क्षेत्र के अनुभवी एवं प्रतिष्ठित लोगों द्वारा प्रारंभ किया गया यह अभिनव प्रयास निश्चित रूप से सफलता के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘अमृत उजाला’ प्रदेश के दूरस्थ गांवों एवं छोटे कस्बों तक की महत्वपूर्ण खबरों को आम जनमानस तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर ‘अमृत उजाला’ के प्रधान संपादक एवं सीईओ डॉ. अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य देश के सभी हिंदी भाषी राज्यों के प्रत्येक जिले, कस्बे एवं गांव की खबरों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में प्लेटफार्म की शुरुआत उत्तर प्रदेश, विशेष रूप से सेंट्रल एवं ईस्टर्न यूपी पर केंद्रित रहेगी। उन्होंने बताया कि ‘अमृत उजाला’ का ध्येय वाक्य है-‘अब सच की रोशनी, हर जिले में।’
डॉ. सिंह ने बताया कि ‘अमृत उजाला’ के न्यूज ऐप को और अधिक उन्नत बनाया जा रहा है, जिसे पाठक गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि ‘अमृत उजाला’ का यूट्यूब न्यूज चैनल भी एक जुलाई से शुरू हो जाएगा।
वरिष्ठ पत्रकार पद्मजा जोशी (Padmaja Joshi) की पहली पुस्तक 'पीपल्स पद्मा विनर्स' (People's Padma Winners) का प्रकाशन 'ग्रिन बुक्स' (Grin Books) करेगा।
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Samachar4media Bureau
'ग्रिन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड' (Grin Media Private Limited) की प्रकाशन इकाई 'ग्रिन बुक्स' (Grin Books) ने वरिष्ठ पत्रकार पद्मजा जोशी (Padmaja Joshi) की पहली पुस्तक 'पीपल्स पद्मा विनर्स' (People's Padma Winners) के प्रकाशन की घोषणा की है। यह एक नैरेटिव नॉन-फिक्शन (Narrative Non-Fiction) पुस्तक होगी, जिसमें भारत के पद्म पुरस्कार विजेताओं की प्रेरणादायक और कम चर्चित कहानियों को शामिल किया जाएगा।
पुस्तक का हार्डकवर संस्करण 'ग्रिन बुक्स' (Grin Books) के बैनर तले प्रकाशित किया जाएगा। दक्षिण एशिया में इसके वितरण की जिम्मेदारी 'पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया' (Penguin Random House India) संभालेगा, जिसने प्रकाशक के साथ साझेदारी की है।
प्रकाशक के अनुसार, 'पीपल्स पद्मा विनर्स' (People's Padma Winners) उन व्यक्तियों की जीवन यात्राओं को सामने लाने का प्रयास है, जिनका योगदान समाज के लिए महत्वपूर्ण रहा, लेकिन जो अक्सर सार्वजनिक चर्चा से दूर रहे। पुस्तक में 1954 में शुरू हुए पद्म पुरस्कारों (Padma Awards) के इतिहास और विकास को भी रेखांकित किया जाएगा।
इसमें पर्यावरणविदों, शिक्षकों, कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पैरा-एथलीट्स सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पद्म सम्मान प्राप्त व्यक्तित्वों की कहानियां शामिल होंगी। पुस्तक में 'वॉटर मैन ऑफ इंडिया' (Water Man of India) राजेंद्र सिंह (Rajendra Singh), किसान एवं पर्यावरणविद जादव "मोलाई" पायेंग (Jadav "Molai" Payeng), पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर (Murlikant Petkar) और ट्रांसजेंडर लोक कलाकार मंजम्मा जोगती (Manjamma Jogati) जैसे नामों को भी स्थान दिया गया है।
'ग्रिन बुक्स' (Grin Books) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी लक्ष्मी कौल (Lakshmi Kaul) ने कहा कि पद्मजा जोशी (Padmaja Joshi) में एक पत्रकार की शोधपरक दृष्टि, साहित्यकार की संवेदनशीलता और आम भारतीयों की असाधारण उपलब्धियों को सामने लाने का जुनून है। प्रकाशक ने बताया कि इसे दक्षिण एशिया के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी उपलब्ध कराया जाएगा।
हाल के दो बड़े विवाद- जर्मनी की मीडिया घटना और साहित्यिक जगत में उठा AI विवाद, ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या AI न्यूज़रूम और क्रिएटिव लेखन का भविष्य है या उसकी सीमाएं तय करना जरूरी हो गया है।
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Vikas Saxena
दुनिया भर में मीडिया और साहित्यिक संस्थान अब एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ एक सहायक तकनीक नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा मुद्दा बन गया है जो भरोसे, संपादकीय जिम्मेदारी और पत्रकारिता की मूल पहचान तक को चुनौती दे रहा है। हाल के दो बड़े विवाद- जर्मनी की मीडिया घटना और साहित्यिक जगत में उठा AI विवाद, ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या AI न्यूज़रूम और क्रिएटिव लेखन का भविष्य है या उसकी सीमाएं तय करना जरूरी हो गया है।
जर्मनी के बर्लिन स्थित प्रतिष्ठित अखबार Tagesspiegel में हाल ही में एक बड़ा विवाद सामने आया, जब यह खुलासा हुआ कि अखबार के पूर्व प्रकाशक और एडिटर-इन-चीफ Stephan-Andreas Casdorff ने अपने कुछ ओपिनियन लेख AI की मदद से तैयार किए थे। इस घटना ने मीडिया जगत में हलचल मचा दी और अखबार को मजबूर होना पड़ा कि वह संबंधित लेखों को वेबसाइट से हटा दे और मामले की जांच शुरू करे। अखबार ने साफ किया कि AI का इस्तेमाल सिर्फ कुछ प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन पत्रकारिता के मूल हिस्से यानी सोच, विश्लेषण और लेखन का नियंत्रण पूरी तरह इंसानों के पास ही रहना चाहिए।
इस घटना के बाद जर्मन मीडिया में AI के इस्तेमाल को लेकर बहस और तेज हो गई। इससे पहले भी एक और मामला सामने आया था, जब Frankfurter Allgemeine Zeitung में प्रकाशित एक गेस्ट ओपिनियन में AI के इस्तेमाल के संकेत मिले थे। यह मामला तब और गंभीर हो गया क्योंकि यह जानकारी प्रकाशन के बाद सामने आई, यानी संपादकीय जांच प्रक्रिया में इसे पकड़ा नहीं जा सका।
इस पूरे विवाद ने पत्रकारिता की बुनियादी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया शोधकर्ता Vera Katzenberger के अनुसार, समस्या सिर्फ AI के इस्तेमाल की नहीं है, बल्कि तब होती है जब AI से तैयार कंटेंट को बिना बताए प्रकाशित किया जाता है। उनका कहना है कि पाठक अखबार इसलिए खरीदते हैं क्योंकि उन्हें लेखकों के विचार और विशेषज्ञता पर भरोसा होता है। यदि वही विचार मशीन द्वारा तैयार किए जाएं और उसका खुलासा न हो, तो यह सीधे तौर पर धोखा माना जा सकता है।
किए गए खुलासों के बाद Tagesspiegel ने अपनी एडिटोरियल पॉलिसी को दोहराया और कहा कि AI केवल सहायक भूमिका निभा सकता है, लेकिन किसी भी हालत में यह न्यूज़रूम के “core editorial work” की जगह नहीं ले सकता। इसका मतलब है कि खबरों का विश्लेषण, तथ्यों की जांच और अंतिम निर्णय हमेशा पत्रकारों के हाथ में रहेगा।
लेकिन यहां सबसे बड़ी चुनौती यह है कि AI धीरे-धीरे पत्रकारों के काम करने के तरीके में गहराई से शामिल होता जा रहा है। पहले जहां AI को सिर्फ स्पेलिंग सुधारने या डेटा प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था, अब यह ड्राफ्ट तैयार करने, हेडलाइन सुझाने और कभी-कभी पूरे लेख लिखने तक में इस्तेमाल होने लगा है। यही वह जगह है जहां “सहायक टूल” और “लेखक” के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।
जर्मनी के मीडिया रेगुलेटरी ढांचे में German Press Council ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कंटेंट की जिम्मेदारी अंततः न्यूज़रूम की ही होगी, चाहे वह कैसे भी तैयार किया गया हो। लेकिन यह संस्था यह भी मानती है कि AI-जनरेटेड कंटेंट के लिए अलग से लेबलिंग जरूरी नहीं है, क्योंकि असली मुद्दा तकनीक नहीं बल्कि सत्यता और संपादकीय जिम्मेदारी है।
इसी बीच, मीडिया इंडस्ट्री के भीतर एक अलग दृष्टिकोण भी देखने को मिल रहा है। कुछ बड़े मीडिया ग्रुप्स के CEO और एडिटर्स का मानना है कि AI को अपनाना ही भविष्य है। उनका तर्क है कि यदि AI को सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह रिपोर्टिंग की गति बढ़ा सकता है, लागत कम कर सकता है और डेटा विश्लेषण को बेहतर बना सकता है। लेकिन साथ ही यह भी माना जा रहा है कि बिना नियंत्रण के AI का इस्तेमाल पत्रकारिता की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।
इसी तरह का तनाव साहित्यिक जगत में भी देखा गया, जब प्रतिष्ठित पत्रिका Granta ने कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज की विजेता कहानियों को प्रकाशित करना बंद कर दिया। यह फैसला तब आया जब एक विजेता कहानी पर AI के इस्तेमाल का आरोप लगा। हालांकि लेखक ने इन आरोपों को खारिज किया और बताया कि उन्होंने कहानी अपने मोबाइल पर स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक की मदद से लिखी थी, क्योंकि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं।
इसके बावजूद, इस विवाद ने साहित्यिक दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या रचनात्मक लेखन में तकनीक का इस्तेमाल स्वीकार्य है, और यदि हां, तो इसकी सीमा क्या होनी चाहिए? प्रकाशकों का कहना है कि जहां उनके पास संपादकीय नियंत्रण नहीं होता, वहां वे अब साझेदारी से पीछे हट रहे हैं, ताकि कंटेंट की शुद्धता और पारदर्शिता बनी रहे।
AI को लेकर यह बहस सिर्फ तकनीकी नहीं है, बल्कि यह भरोसे और जिम्मेदारी का सवाल बन चुकी है। पत्रकारिता और साहित्य दोनों ही क्षेत्रों में यह चिंता बढ़ रही है कि यदि AI बिना पारदर्शिता के इस्तेमाल किया गया, तो पाठकों और लेखकों के बीच का भरोसा कमजोर हो सकता है। दूसरी ओर, यह भी सच है कि AI को पूरी तरह नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में न्यूज़रूम्स को एक संतुलन बनाना होगा- जहां AI को एक टूल की तरह इस्तेमाल किया जाए, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा इंसान के पास ही रहे। इसके लिए साफ नियम, प्रशिक्षण और पारदर्शिता बेहद जरूरी होगी।
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा संदेश यही है कि AI पत्रकारिता और रचनात्मक लेखन को बदल रहा है, लेकिन यह बदलाव तभी स्वीकार्य होगा जब यह स्पष्ट हो कि इंसान और मशीन की भूमिका कहां खत्म होती है और कहां शुरू होती है।
अमेरिकी टेक कंपनी 'ओरेकल' (Oracle) ने वित्त वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर करीब 21,000 कर्मचारियों की छंटनी की है। भविष्य में भी वर्कफोर्स में कटौती जारी रह सकती है।
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Samachar4media Bureau
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के बीच अमेरिकी टेक दिग्गज 'ओरेकल' (Oracle) ने वित्त वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर करीब 21,000 नौकरियों में कटौती की है। कंपनी की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मई 2026 तक उसकी कुल वर्कफोर्स घटकर 1.41 लाख रह गई, जो एक वर्ष पहले लगभग 1.62 लाख थी। यानी कंपनी के कर्मचारियों की संख्या में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
सोमवार को जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में 'ओरेकल' (Oracle) ने कहा कि उसके विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में एआई (AI) तकनीकों के इस्तेमाल से कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है और भविष्य में भी ऐसी कटौती जारी रह सकती है। कंपनी के अनुसार, प्रबंधन और उत्पाद संबंधी बदलाव, प्रदर्शन मूल्यांकन, रणनीतिक पुनर्गठन और अधिग्रहण जैसी वजहों ने भी वर्कफोर्स में बदलाव को प्रभावित किया है।
इस वर्ष मार्च में भी 'ओरेकल' (Oracle) ने संकेत दिया था कि वह बड़े पैमाने पर नौकरी कटौती करने जा रही है। कंपनी उस समय एआई (AI) डेटा सेंटर विस्तार योजनाओं पर भारी निवेश के कारण नकदी दबाव का सामना कर रही थी।
'लैरी एलिसन' (Larry Ellison) के नेतृत्व में 'ओरेकल' (Oracle) अब पारंपरिक डेटाबेस सॉफ्टवेयर कंपनी से आगे बढ़कर एआई (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग क्षेत्र की बड़ी खिलाड़ी बनने की कोशिश कर रही है। कंपनी 'ओपनएआई' (OpenAI) जैसे ग्राहकों के लिए विशाल एआई डेटा सेंटर विकसित कर रही है, जिससे उसका मुकाबला 'अमेजन' (Amazon) और 'माइक्रोसॉफ्ट' (Microsoft) जैसे दिग्गजों से हो रहा है।
हालांकि इस बदलाव की कीमत भी कंपनी को चुकानी पड़ रही है। वित्त वर्ष 2026 में पुनर्गठन गतिविधियों के तहत 'ओरेकल' (Oracle) ने कर्मचारियों को सेवरेंस और अन्य एग्जिट लागत के रूप में 1.84 अरब डॉलर खर्च किए। यह पिछले वित्त वर्ष के 374 मिलियन डॉलर के मुकाबले कई गुना अधिक है।
दार्जिलिंग जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने गलत कैमरा डिलीवर करने और रिफंड से इनकार करने के मामले में 'एमेजॉन' को ग्राहक को 4.68 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
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Samachar4media Bureau
दार्जिलिंग जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) ने ई-कॉमर्स कंपनी 'एमेजॉन' (Amazon) और उसके एक विक्रेता को एक ग्राहक को 4.68 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। मामला ग्राहक को ऑर्डर किए गए कैमरे की जगह दूसरा मॉडल भेजे जाने और बाद में रिफंड देने से इनकार करने से जुड़ा है।
आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष तिकेंद्र नारायण प्रधान (Tikendra Narayan Pradhan) और सदस्य भावना ठाकुरी (Bhawana Thakuri) शामिल थीं, ने 'एमेजॉन' (Amazon) और विक्रेता को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना।
मामले के अनुसार, ग्राहक ने 'एमेजॉन' (Amazon) के माध्यम से 1.43 लाख रुपये कीमत का 'फुजीफिल्म एक्स-टी5' (Fujifilm X-T5) डिजिटल कैमरा खरीदा था। फरवरी 2025 में डिलीवरी मिलने पर ग्राहक ने पाया कि उसे 'फुजीफिल्म एक्स-टी50' (Fujifilm X-T50) मॉडल भेजा गया है, जो ऑर्डर किए गए उत्पाद से अलग था।
ग्राहक ने इसकी शिकायत की, जिसके बाद उसे कैमरा वापस भेजने और रिफंड मिलने का आश्वासन दिया गया। हालांकि उत्पाद वापस लेने के बाद रिफंड अनुरोध यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि लौटाया गया उत्पाद मूल ऑर्डर से मेल नहीं खाता। बाद में ग्राहक को यह भी बताया गया कि मामला गलत डिलीवरी का नहीं, बल्कि इस्तेमाल या क्षतिग्रस्त उत्पाद का है।
ग्राहक ने ईमेल और तस्वीरों के माध्यम से अपने दावे के समर्थन में सबूत भी प्रस्तुत किए, लेकिन न तो रिफंड दिया गया और न ही कैमरा वापस लौटाया गया। कानूनी नोटिस का भी कोई समाधान नहीं निकला, जिसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा।
आयोग ने 1.43 लाख रुपये की रिफंड राशि के अलावा 2 लाख रुपये मानसिक उत्पीड़न, 1 लाख रुपये सेवा में लापरवाही और 25 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने का आदेश दिया है। साथ ही शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।