जागरण समूह को बाय बोलकर नए सफर पर निकले पत्रकार राहुल सोनी

मूलरूप से इंदौर के रहने वाले राहुल सोनी को मीडिया में काम करने का लगभग 11 साल का अनुभव है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 03 September, 2019
Last Modified:
Tuesday, 03 September, 2019
Rahul Soni

पत्रकार राहुल सोनी अपने नए सफर की शुरुआत करने जा रहे हैं। उन्होंने यूसी न्यूज ब्राउजर जॉइन किया है, जहां वे असिस्टेंट मैनेजर के पद पर काम करेंगे। यहां से अपनी पारी शुरू करने से पहले राहुल सोनी दैनिक जागरण (Dainik Jagran) समूह, दिल्ली में कार्यरत थे। इससे पहले वे जागरण, मुंबई में पिछले दो साल से एंटरटेनमेंट टीम में कार्यरत थे।

मूलरूप से इंदौर (मध्यप्रदेश) के रहने वाले राहुल सोनी ने इंदौर से स्कूली पढ़ाई की है। इंदौर से ही उन्होंने बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की पढ़ाई की है। पढ़ाई के दौरान उन्होंने आजतक न्यूज चैनल (मुंबई और नई दिल्ली) और सहारा समय न्यूज चैनल (नोएडा) से इंटर्नशिप की। इसके बाद पढ़ाई के दौरान ही राहुल सोनी ने लगभग एक साल तक ज्ञानवाणी एफएफ स्टेशन में बतौर अनाउंसर काम किया। इसके बाद उन्होंने अक्षरधाम मंदिर, नई दिल्ली के पब्लिक रिलेशन डिपार्टमेंट में भी काम किया।

पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने दैनिक भास्कर, इंदौर जॉइन कर लिया। यहां पर अखबार में क्राइम, एजुकेशन, मेडिकल बीट पर लगभग 6 महीने काम करने के बाद वे सिटी भास्कर में कार्यरत रहे। सिटी भास्कर में रहते हुए उन्होंने बड़े सेलेब्स के इंटरव्यू किए और खास तौर पर एंटरटेनमेंट बीट पर काम किया। दैनिक भास्कर में लगभग ढाई साल का सफर तय करने के बाद उन्होंने राजस्थान पत्रिका, इंदौर अखबार से नई पारी शुरू की।

यहां पर लगभग एक साल तक अखबार में क्राइम, नगर निगम, एजुकेशन, मेडिकल और स्पोर्ट्स बीट पर काम किया। यहां उन्हें पत्रिका प्लस को संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद उन्होंने जागरण.कॉम मुंबई जॉइन कर लिया और एंटरटेनमेंट टीम में रहते हुए बॉलिवुड कवर किया। इसके बाद जागरण द्वारा उन्हें नई दिल्ली भेज दिया गया, जहां पर वह लगभग चार महीनों तक कार्यरत रहे।

बता दें कि राहुल सोनी को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक के साथ ही डिजिटल मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। वे पिछले तीन सालों से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं और अब डिजिटल में ही नई पारी शुरू करने जा रहे हैं|

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टीवी जर्नलिस्ट प्रवीण साहनी ने हासिल किया खास मुकाम

करीब तीन साल पहले शुरु किया था ‘द राजनीति’ नाम से शो, फेसबुक पर शेयर कीं अपनी भावनाएं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 16 September, 2019
Last Modified:
Monday, 16 September, 2019
Praveen Sahni

‘समाचार प्लस’ चैनल में एग्जिक्यूटिव एडिटर रहे प्रवीण साहनी के ‘द राजनीति’ (The Rajneeti) शो को लोगों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। यही कारण है कि इस शो के यूट्यूब सबस्क्राइबर्स की संख्या पांच लाख से ऊपर पहुंच गई है। इस उपलब्धि को प्रवीण साहनी ने अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया है।

प्रवीण साहनी ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है, ‘जब तक जीवन है, तब तक संघर्ष है...जीवन हमेशा सरलता से नहीं गुजरता... रोजाना कोई न कोई चुनौती, कोई न कोई, संघर्ष जीवन में आता है और आता रहेगा...शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिसके जीवन में चुनौतियां न हों, दुख न हों, कठिनाई न हों, रुकावटें न हों लेकिन आपकी मेहनत और लगन से चुनौतियों भरी हर मुश्किल राह आसान हो जाती है। इसी लगन और जज्बे के साथ 18 नवंबर 2016 को मैंने द राजनीति शो की शुरुआत की... मेरे इस शो को पहले दिन से ही जनता का भरपूर साथ मिला... मेरा मनोबल तब और बढ़ गया, जब बहुत ही कम अवधि सितंबर 2018 में मुझे यूट्यूब से सिल्वर प्लेट मिल गई...ये आपके प्यार और भरोसे का ही नतीजा है कि आज The Rajneeti के यूट्यूब सब्सक्राईबर्स की संख्या 5 लाख के पार पहुंच गई है... मेरी मेहनत अनवरत जारी रहेगी, आप भी अपना प्यार और स्नेह यूं ही बनाए रखिएगा।’

प्रवीण साहनी के 'द राजनीति' शो देखने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं। 

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पत्रकार पंकज कुमार ने तलाशी नई मंजिल, अब पहुंचे यहां

पूर्व में कई मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं पत्रकार पंकज कुमार

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 14 September, 2019
Last Modified:
Saturday, 14 September, 2019
Pankaj Kumar

पत्रकार पंकज कुमार ने अब नई दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने अब सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म ‘शेयरचैट’ (Sharechat) के साथ अपनी पारी शुरू की है। यहां उन्हें Key Alliance Manager (News & TV) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बता दें कि पूर्व में पंकज कुमार ‘एबीपी न्यूज’ और आईबीएन7 (अब न्यूज18इंडिया) जैसे कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इससे पहले वह ग्रामीण अखबार ‘गांव कनेक्शन’ में भी बतौर रिपोर्टर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश में बलिया जिले के रहने वाले पंकज कुमार देश के प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षण संस्थान ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (आईआईएमसी) के छात्र भी रह चुके हैं। उन्होंने अपने कॉलेज की पढ़ाई कानपुर के क्राइस्ट चर्च कॉलेज से की है।

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‘जी’ समूह को अलविदा कह पत्रकार श्रमित चौधरी ने थामा इस मीडिया ग्रुप का दामन

मीडिया के श्रेत्र में करीब 12 साल की पारी के दौरान कई संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं श्रमित चौधरी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 05 September, 2019
Last Modified:
Thursday, 05 September, 2019
Shramit Chaudhary

पत्रकार श्रमित चौधरी ने ‘जी’ समूह में करीब साढ़े पांच साल की पारी खेलने के बाद यहां से बाय बोल दिया है। यहां वह एंकर/प्रड्यूसर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। श्रमित चौधरी ने अब पंजाब केसरी ग्रुप की डिजिटल विंग के साथ सीनियर पोजीशन पर नई शुरुआत की है।

श्रमित चौधरी को विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करने का करीब 12 साल का अनुभव है। उन्होंने बतौर एंकर अपने करियर की शुरुआत PBC TV (P7 News), पटियाला के साथ फरवरी 2007 में की थी। हालांकि यहां उन्होंने एक साल से भी कम समय तक काम किया और सितंबर 2007 में यहां से बाय बोलकर गुरुग्राम में बतौर एंकर/असिस्टेंट प्रड्यूसर ‘स्टैंडर्ड वर्ल्ड चैनल’ का दामन थाम लिया और जुलाई 2008 तक अपनी जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद यहां से अलविदा कहकर श्रमित चौधरी ने बतौर एंकर/रिपोर्टर कई संस्थानों के साथ फ्रीलॉन्सिंग की।

बाद में श्रमित चौधरी ने News Time 24x7 (JANSANDESH UP/UK), नोएडा के साथ एंकर/एसोसिएट प्रड्यूसर के तौर पर नई पारी शुरू की और दिसंबर 2011 से अक्टूबर 2012 तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली। अक्टूबर 2012 में यहां से अपनी पारी को विराम देकर वह बतौर एंकर/एसोसिएट प्रड्यूसर ‘इंडिया न्यूज’ (मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़) से जुड़ गए और करीब दो साल तक यहां काम किया।

श्रमित चौधरी ने फरवरी 2014 में ‘जी’(पंजाब, हरियाणा, हिमाचल) के साथ अपना नया सफर शुरू किया। यहां उन्हें एंकर/प्रड्यूसर की जिम्मेदारी सौंपी गई। अब यहां से वह पंजाब केसरी समूह पहुंचे हैं। बता दें कि श्रमित चौधरी ने हरियाणा के हिसार में स्थित गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है।

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कैसा है डिजिटल मीडिया में FDI का सरकारी फैसला, जानें एक्सपर्ट्स की राय

सरकार को बड़ी संख्या में नए साक्षर ग्रामीणों के लिए प्रिंट कंटेंट के दरवाजे खोलने चाहिए, जो आने वाले 20 सालों में पंचायत स्तर पर एक बड़ा मार्केट बनेगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 29 August, 2019
Last Modified:
Thursday, 29 August, 2019
Digital Media

सरकार द्वारा डिजिटल मीडिया में 26 प्रतिशत ‘प्रत्यक्ष विदेश निवेश’ (FDI) के फैसले का इंडस्ट्री से जुड़े कई दिग्गजों ने स्वागत किया है। इस बारे में ‘डेंट्सू एजिस नेटवर्क’ के सीईओ (ग्रेटर साउथ) और चेयरमैन व सीईओ (इंडिया) आशीष भसीन का कहना है,‘मेरे विचार से यह काफी अच्छी बात है, क्योंकि डिजिटल काफी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। सरकार का यह कदम इस सेक्टर के विकास में काफी मददगार होगा। इससे उद्यमियों को आगे बढ़ने के अच्छे अवसर मिलेंगे।’   

वहीं,‘टाइम्स इंटरनेट’ के सीईओ गौतम सिन्हा ने देश में डिजिटल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ‘मीडिया सेक्टर में वर्तमान में हो रही ग्रोथ का बड़ा हिस्सा डिजिटल कंटेंट के इस्तेमाल से आ रहा है। करीब 25 प्रतिशत युवा इस मीडियम से जुड़े हुए हैं। यह काफी अच्छी बात है कि डिजिटल की क्षमता को पहचाना जा रहा है। मुझे विश्वास है कि इस कदम से ऑनलाइन मीडिया इंडस्ट्री को निश्चित रूप से फायदा होगा और इससे कंपनियों को विदेशी निवेशकों से अतिरिक्त पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी।’ सिन्हा ने कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है और आने वाले समय में इसमें और वृद्धि होगी।

द टाइम्स ऑफ इंडिया समूह, हिन्दुस्तान टाइम्स समूह और ‘आउटलुक’ जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुके वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता  ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए प्रिंट मीडिया को सपोर्ट करने की मांग भी उठाई है। आलोक मेहता का कहना है, ‘मुझे लगता है कि डिजिटल मीडिया में एफडीआई का फैसला आने वाली पीढ़ी के लिए काफी अच्छा है। दूसरी तरफ, मुझे लगता है कि सरकार को बड़ी संख्या में नए साक्षर ग्रामीणों के लिए प्रिंट कंटेंट के दरवाजे खोलने चाहिए, जो आने वाले 20 सालों में पंचायत स्तर पर एक बड़ा मार्केट बनेगा। सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर जागरूकता के लिए ग्रामीण प्रिंट और टैबलॉयड आकार के साप्ताहिक अखबार पढ़ना चाहते हैं। देश में करीब 80 प्रतिशत ग्रामीण इलाके हैं और इन गांवों और वहां के किसानों पर केंद्रित कोई भी अखबार नहीं है।

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डिजिटल मीडिया में FDI को लेकर सरकार ने लिया बड़ा फैसला

प्रिंट मीडिया क्षेत्र में इस समय 26 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है। इसके लिये सरकार की अनुमति लेनी होती है।

पंकज शर्मा by पंकज शर्मा
Published - Wednesday, 28 August, 2019
Last Modified:
Wednesday, 28 August, 2019
Digital Media

देश के आर्थिक विकास को पटरी पर वापस लाने के लिए बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में कई निर्णय लिए गए। बैठक में चार सेक्टरों में प्रत्यक्ष विदेश निवेश (FDI) के नियमों में छूट देने संबंधी फैसले लिए गए। इसके तहत अब डिजिटल मीडिया में सरकारी की अनुमति के साथ 26 प्रतिशत एफडीआई की मंजूरी होगी। बता दें कि अभी तक समाचार और करेंट अफेयर्स से जुड़े अखबारों के प्रकाशन के लिए सरकार की मंजूरी के साथ 26 प्रतिशत एफडीआई की मंजूरी है।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, ‘दुनिया भर में एफडीआई की गति थोड़ी धीमी है, इसलिए हमने कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। कोयला खनन के लिए सौ प्रतिशत एफडीआई और सभी संबंधित प्रसंस्करण गतिविधियों को स्वचालित मार्ग (automatic route) के तहत अनुमति दी जाएगी।’ बता दें कि अभी तक कैप्टिव कोल माइनिंग (captive coal mining) में सौ प्रतिशत एफडीआई की अनुमति थी। कैबिनेट ने कांट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में भी 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा सिंगल ब्रैंड रिटेल के तहत ऑनलाइन रिटेलिंग को भी मंजूरी दी गई है।

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वरिष्ठ पत्रकार पाणिनी आनंद का बढ़ा कद, मिला ये पद

पाणिनी आनंद डॉक्यूमेंट्री मेकिंग से भी जुड़े रहे हैं। वे एक कवि, ब्लॉगर और थिएटर आर्टिस्ट के तौर पर भी समय-समय पर उपस्थिति दर्ज कराते रहते हैं

Last Modified:
Monday, 26 August, 2019
Panini Anand

करीब तीन साल पहले ‘इंडिया टुडे’ ग्रुप के साथ अपनी नई पारी शुरू करने वाले पत्रकार पाणिनी आनंद के बारे में खबर है कि उन्हें प्रमोशन देकर अब 'आजतक' (डिजिटल) में एग्जिक्यूटिव एडिटर बनाया गया है। बता दें कि ‘आजतक’ (डिजिटल) में बतौर एडिटर जॉइन करने से पहले आनंद ‘कैच न्यूज’ के साथ बतौर सीनियर असिसटेंट एडिटर जुड़े हुए थे। यहां वह राज्यसभा टीवी से पहुंचे थे। राज्यसभा टीवी में वह न्यू मीडिया डिपार्टमेंट के हेड थे।

तमाम विषयों पर लिखने में माहिर पाणिनी आनंद मूल तौर पर रायबरेली के हैं। डेढ़ दशक से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे पाणिनी के अपने करियर की पारी बीबीसी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से शुरू की थी। दिल्ली स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेश (IIMC) से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के दौरान भी वे नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान और जनसत्ता समेत कई अखबारों के लिए लिखते थे।

बीबीसी से जुड़ने से पहले 2002-2004 तक उन्होंने दो टैब्लॉयड के संपादन का कार्य भी किया और 2004-2006 तक वे बीबीसी में बतौर कंट्रीब्यूटर जुड़े और उसके बाद 2006-2010 तक वे बीबीसी हिंदी में बतौर कॉरेस्पॉन्डेंट/प्रड्यूसर के तौर पर कार्यरत रहे थे।

करीब 6 साल काम करने के बाद वे तत्कालीन बीबीसी हेड संजीव श्रीवास्तव के साथ 2010 में सहारा मीडिया से जुड़े। यहां वे सहारा की वेब डिवीजन के एडिटोरियल हेड रहे। यहां एक साल काम करने के बाद वे 2011 में यहां से रुखसत हुए। 2011 में उन्हें सीएसडीएस की फेलोशिप मिली। उसके बाद 2012 में उन्होंने बतौर प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट आउटलुक (अंग्रेजी) मैगजीन के साथ अपनी पारी आगे बढ़ाई।

वैसे पाणिनी आनंद डॉक्यूमेंट्री मेकिंग से भी जुड़े रहे हैं। साथ ही वे एक कवि, ब्लॉगर और थिएटर आर्टिस्ट के तौर पर भी समय-समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहते हैं।

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डिजिटल मीडिया के लिए कैसा होगा आने वाला समय, पढ़ें ये रिपोर्ट

इस रिपोर्ट में वर्ष 2030 तक देश में डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में होने वाली ग्रोथ के बारे में लगाया गया है अनुमान

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 21 August, 2019
Last Modified:
Wednesday, 21 August, 2019
Digital media

ऑडिट एवं परामर्श देने वाली कंपनी केपीएमजी (KPMG) ने मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री (M&E) से जुड़ी रिपोर्ट का 11वां एडिशन लॉन्च कर दिया है। ‘India’s Digital Future: Mass of Niches’ टाइटल से लॉन्च की गई इस रिपोर्ट में वर्ष 2030 तक देश में डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में ग्रोथ के बारे में अनुमान लगाया गया है। इस रिपोर्ट में विभिन्न सेगमेंट्स में इंडस्ट्री के प्रदर्शन के साथ ही प्रमुख थीम्स और ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तत्वों को शामिल किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2019 (FY19) के दौरान देश की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में 13 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है और वर्ष 2015 के मुकाबले 11.5 प्रतिशत सीएजीआर (CAGR)  के साथ यह 1,63,100 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के सभी सेगमेंट्स को देखें तो डिजिटल में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इससे टीवी और प्रिंट में व्यवधान आने के साथ ही डिजिटल एडवर्टाइजिंग और गेमिंग को रफ्तार मिली है। टीवी के बाद देश में डिजिटल मार्केट दूसरा सबसे बड़ा सेगमेंट बनकर उभर रहा है और यह बड़ी संख्या में एडवर्टाइजर्स को भी आकर्षित कर रहा है। देश में डिजिटल को रफ्तार मिलने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। एक तो स्मार्टफोन की बढ़ती संख्या के साथ इंटरनेट डाटा की कीमतों में कमी होना है, दूसरा डिजिटल में कंटेंट की सप्लाई भी हो रही है यानी ऑरिजनल और प्रादेशिक डिजिटल कंटेंट में निवेश भी बढ़ रहा है।

दरअसल, देश में प्रादेशिक भाषा के मार्केट का महत्व लगातार बढ़ रहा है, इससे प्रादेशिक कंटेंट में निवेश भी बढ़ रहा है। इस वर्ष की रिपोर्ट में इसे भी एक प्रमुख विषय के रूप में शामिल किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अंग्रेजी भाषा के ऑडियंस का डिजिटल की तरफ मुड़ना लगभग पूरा हो चुका है। इसके साथ ही अब अधिकतर नए यूजर्स ऑनलाइन में आ रहे हैं। माना जा रहा है कि वर्ष 2030 तक यह संख्या 500 मिलियन तक पहुंच जाएगी और लोग इंटरनेट का इस्तेमाल स्थानीय भाषा में करेंगे।

डिजिटल के उभरते बिजनेस मॉडल से कमाई होने और इसके लिए सही माहौल उपलब्ध होने के कारण देश में मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की ग्रोथ को लगातार सपोर्ट मिलता रहेगा। माना जा रहा है कि 13.5 प्रतिशत ‘सीएजीआर’ (CAGR) के साथ वित्तीय वर्ष 2019 से वित्तीय वर्ष 2024 के बीच यह 307000 करोड़ रुपए की हो जाएगी।

इस बारे में केपीएमजी, इंडिया के पार्टनर और हेड (मीडिया और एंटरटेनमेंट) गिरीश मेनन का कहना है, ‘इस साल इस रिपोर्ट की थीम देश में डिजिटल के भविष्य को लेकर रखी गई है। डिजिटल की राह में कोई बड़ी बाधा न होने के कारण इसमें काफी बढ़ोतरी होने और वित्तीय वर्ष 2023 तक टीवी के बाद इसके दूसरा सबसे बड़ा सेगमेंट बनने की उम्मीद है। उम्मीद है कि लगभग सभी मीडिया फॉर्मेट्स में इसमें सबसे ज्यादा मार्केटिंग खर्च होगा।’

उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में डिजिटल के प्रदर्शन को देखते हुए लगता है कि भविष्य में यह आगे बढ़ेगा और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कमाई के मामले में सबस्क्रिप्शन मॉडल एक बड़ी भूमिका निभाएगा।  इसके अलावा टेक्नोलॉजी बढ़ने से मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की कंपनियों को अपने कार्यों को और प्रभावी तरीके से करने के लिए तमाम अवसर मिल रहे हैं।’

गिरीश मेनन का कहना है, ‘आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं से निकलने वाले निराशावादी संकेतों को नजरअंदाज करना मुश्किल होगा, लेकिन वे उद्योग पर दीर्घकालिक प्रभाव नहीं डालेंगे। मीडिया-एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की खपत में खासकर डिजिटल पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा।’

केपीएमजी इंडिया में पार्टनर और टेक्नोलॉजी हेड (मीडिया और टेलिकॉम) सत्या ईश्वरन (Satya Easwaran) का कहना है, ‘अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत में एक बिलियन लोग इंटरनेट से जुड़े होंगे। अभी हमारा मानना है कि ये यूजर्स मुख्य रूप से अंग्रेजी न बोलने वाले, मोबाइल फोन यूजर्स और विकसित ग्रामीण क्षेत्रों से होंगे जो ऑनलाइन कंटेंट के लिए भुगतान करने को तैयार हैं।’

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आमोद राय ने की टीवी मीडिया में वापसी, बने एडिटर (पॉलिटिकल अफेयर्स)

आमोद राय को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का 17 साल से ज्यादा का अनुभव है और वह कई मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 21 August, 2019
Last Modified:
Wednesday, 21 August, 2019
AMOD RAI

देश के प्रमुख मीडिया समूह 'जागरण प्रकाशन लिमिटेड' की डिजिटल विंग ‘जागरण न्यू मीडिया’ में सीनियर एडिटर आमोद राय ने करीब सवा साल की पारी खेलने के बाद यहां से अलविदा कह दिया है। वह मई 2018 में इस संस्थान से जुड़े थे। आमोद राय अब टीवी9 भारतवर्ष से अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। यहां पर वह एडिटर (पॉलिटिकल अफेयर्स) की जिम्मेदारी संभालेंगे।

आमोद राय को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का 17 साल से ज्यादा का अनुभव है। जागरण न्यू मीडिया से पूर्व वे पॉलिटिकल एडिटर और नेशनल ब्यूरो चीफ के तौर पर लाइव इंडिया न्यूज (BIL) में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

आमोद राय ने वर्ष 2002 में जैन टीवी से बतौर रिपोर्टर अपने करियर की शुरुआत की थी। यहां करीब दो साल बिताने के बाद वह बीएजी फिल्म्स के साथ बतौर सीनियर रिपोर्टर जुड़ गए और करीब एक साल तक इस भूमिका को निभाया। इसके बाद उन्होंने इंडिया टीवी (Independent News Service Pvt Ltd) से करेसपॉन्डेंट के तौर पर अपना नया सफर शुरू किया और यहां करीब सवा साल तक अपनी सेवाएं दीं।

इसके बाद यहां से अलविदा कहकर आमोद राय जी न्यूज से जुड़ गए और बतौर सीनियर करेसपॉन्डेंट करीब एक साल तक काम किया। जी न्यूज के बाद उन्होंने लाइव इंडिया न्यूज का दामन थामा और यहां करीब 11 साल लंबी पारी खेलने के बाद जागरण न्यू मीडिया होते हुए अब टीवी9 भारतवर्ष पहुंचे हैं। आमोद राय ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।    

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प्रसार भारती के कंटेंट को कुछ यूं ‘धार’ देगी Google

पार्टनरशिप के तहत राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों की यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग भी की जाएगी

Last Modified:
Friday, 16 August, 2019
Google

दिग्गज टेक कंपनी ‘गूगल’ ने देश की पब्लिक ब्रॉडकास्ट कंपनी ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) के साथ दीर्घकालिक सहयोग बनाए रखने की घोषणा की है। इसके तहत गूगल अब 12 भाषाओं में ‘ऑल इंडिया रोडियो’ (AIR) और ‘दूरदर्शन’ (DD) के दो दशक के कंटेंट का गूगल आर्ट्स एंड कल्चर पर डिटिलीकरण करने की दिशा में काम करेगी।

इसके अलावा, राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों जैसे-स्वतंत्रता दिवस अथवा गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री द्वारा दिए जाने वाले भाषणों आदि की यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग भी की जाएगी। इसी के तहत स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण की लाइव स्ट्रीमिंग यूट्यूब पर की गई।

इस बारे में गूगल इंडिया और साउथ एशिया के डायरेक्टर (पब्लिक पॉलिसी) चेतन कृष्णास्वामी ने कहा, ‘प्रसार भारती के साथ इस तरह का गठबंधन करने को लेकर हम काफी खुश है, जिनमें शानदार कंटेंट से भरी लाइब्रेरी को डिजिटल रूप देने के साथ ही देश के राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों को इंटरनेट के जरिये दुनिया भर में बढ़ावा दिया जाएगा। हमें उम्मीद है कि इस गठबंधन से विभिन्न उम्र के डिजिटल यूजर्स को विभिन्न भाषाओं में प्रसार भारती की बेहतरीन प्रोग्रामिंग देखने का मौका मिलेगा।’

वहीं, प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर वेम्पती का कहना है, ‘प्रसार भारती और गूगल की इस पार्टनरशिप से दुनिया भर के दर्शकों के लिए राष्ट्रीय हित से जुड़े कंटेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही आज के ऐसे युवा वर्ग को भी प्रसार भारती से जोड़ने में और ज्यादा मदद मिलेगी, जो डिजिटल को पसंद करते हैं और उस पर ज्यादा समय देते हैं।’

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शर्मनाक: टाइम्स समूह की वेबसाइट पर गलतियों के अंबार वाला इंटरव्यू

पिछले 10 सालों से ये वेबसाइट पुरुषों की लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर अंग्रेजी में काम कर रही है। हाल ही में हिंदी में इस वेबसाइट को शुरू किया गया है

Last Modified:
Friday, 09 August, 2019
Saif Ali

बॉलिवुड एक्टर सैफ अली खान का इंटरव्यू हाल ही में एक वेबसाइट पर छपा है। बताया जाता है कि इस इंटरव्यू को अंग्रेजी वेबासइट से ट्रांसलेट करके लगाया गया है। यहां तक तो ठीक है, लेकिन हिंदी में छपे इस इंटरव्यू में भाषा और व्याकरण की तमाम गलतियां हैं। ऐसे ही एक पाठक ने इन गलतियों के बारे में बताते हुए अपने विचार शेयर किए हैं। इन्हें आप यहां पढ़ सकते हैं।

‘आज के दौर की हिंदी पत्रकारिता में भाषाई शुद्धता की उम्मीद न के बराबर ही हो चली है। लेकिन पत्रकारिता के कुछ नामी ब्रैंड से अभी भी ये उम्मीद की जाती है कि वे भाषाई शुद्धता के स्तर का ध्यान जरूर रखेंगे। रोजमर्रा के कामों में हिंदी की गलतियां छूट जाना इतनी चिंताजनक बात अब नहीं रह गई है। लेकिन जब आपके सामने एक बड़ी सेलेब्रिटी का इंटरव्यू हो, तब ध्यान देना जरूरी हो जाता है।

ऐसा ही कुछ हुआ टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ। टाइम्स समूह के टाइम्स इंटरनेट का प्रोडक्ट है Mensxp। पिछले 10 सालों से यह वेबसाइट पुरुषों की लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर अंग्रेजी में काम कर रही है। हाल ही में हिंदी में इस वेबसाइट को शुरू किया गया है। मैं पिछले कई वर्षों से अंग्रेजी की इस वेबसाइट का पाठक रहा हूं। जब इसे हिंदी में शुरू करने की जानकारी मिली तो मन बहुत खुश हुआ। आखिर अपनी भाषा में कुछ पढ़ने का सुख अलग ही होता है।

Mensxp हर महीने किसी सेलिब्रिटी का इंटरव्यू डिजिटल कवर के तौर पर छापती है। इन सितारों में कई बड़े नाम शामिल हैं। मैं खुद इन डिजिटल कवर्स का फैन रहा हूं। हाल ही में आदित्य रॉय कपूर का इंटरव्यू मुझे इस वेबसाइट पर बहुत अच्छा लगा। पहले मैं इन इंटरव्यू को अंग्रेज़ी में पढ़ता था, लेकिन हिंदी की वेबसाइट शुरू होने के बाद कुछ कवर इंटरव्यू हिंदी में भी प्रकाशित किये गए।

अगस्त में वेबसाइट ने सैफ अली खान के ऊपर डिजिटल कवर निकाला है। वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार इसे अलशार ने लिखा है। हिंदी वेबसाइट में लेख के अंत में दी गई जानकारी के अनुसार अंग्रेजी के इसआर्टिकल का हिंदी अनुवाद किया है मृदुल राजपूत ने। लेकिन Mensxp की हिंदी वेबसाइट पर इस कवर को देखने के बाद यह अनुवाद असल में ट्रांसलेशन के नाम पर भाषाई आतंकवाद और हिंदी पट्टी में ही हिंदी की दुर्दशा का जीता-जागता प्रमाण दिखता है।

एक बड़े सुपरस्टार पर लिखे गए इस लेख में हिंदी की इतनी अनगिनत अशुद्धियां हैं कि पढ़ने वाला भी अपना माथा पीट ले। कई जगह सैफ अली खान को शैफ अली खान तक लिख दिया गया है। यहां तक कि अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद करते वक़्त अर्थ का अनर्थ भी कर दिया गया है। कई शब्द ऐसे हैं, जिनका कोई मतलब ही नहीं। लगता है अनुवाद करने वाले व्यक्ति ने गूगल ट्रांसलेट का उपयोग कम दुरुपयोग ज्यादा किया है। बेसिरपैर के हिंदी में अनुवाद किये गए इंटरव्यू को पता नहीं सैफ अली खान ने देखा होगा या नहीं। शायद नहीं ही देखा होगा, क्योंकि अगर देखेंगे तो शायद अपने इंटरव्यू की इस दुर्दशा को देखकर वो अंग्रेज़ी में भी कभी दोबारा Mensxp को इंटरव्यू नहीं देना चाहेंगे।

असल मे टाइम्स जैसे संस्थान जो मुख्यतः अंग्रेजी में काम करते हैं, उन्हें हिंदी के लेखकों के बारे में शायद ये जानकारी नहीं होगी कि हिंदी पट्टी के अधिकांश लेखक ढंग की हिंदी तक नहीं लिख पाते और अनुवाद तो खैर छोड़ ही दीजिये। हालांकि कई अखबार और कई वेबसाइट अपने लेख में हिंदी की कुछ गलतियां कर जाते हैं, लेकिन जिस तरह से इस इंटरव्यू को लिखा गया, वो बताता है कि कैसे हिंदी के लोग ही हिंदी की हत्या करने पर तुले हुए हैं। कम से कम टाइम्स जैसे संस्थानों से भाषाई शुद्धता की उम्मीद  होनी चाहिए।’

नोट: Menxp ने समाचार4मीडिया डॉट कॉम पर स्टोरी प्रकाशित होने के बाद उसे सुधार लिया है। उन्होंने हमें बताया है कि गलती से संपादित कॉपी की बजाए असंपादित कॉपी लाइव हो गई थी। हालांकि वे स्टोरीज के लाइव होने की प्रक्रिया में पूरी सतर्कता बरतते हैं।  Mensxp पर संपादित स्टोरी को आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

 इससे पहले वेबसाइट पर प्रकाशित इंटरव्यू में किस तरह की गलतियां थीं, इसे आप नीचे स्क्रीनशॉट के जरिए देख सकते हैं। 


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