‘ई4एम स्ट्रीमिंग समिट 2022’ के मौके पर बुधवार को ‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह के फाउंडर व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा के साथ बातचीत कर रहे थे ‘तारक मेहता’
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
जाने-माने कवि, लेखक, अभिनेता और ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ धारावाहिक में तारक मेहता का किरदार निभा रहे शैलेश लोढ़ा का कहना है कि ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म का कंटेंट हमारे समाज से जुड़ा होना चाहिए, तभी लोग इस तरह के कंटेंट को पसंद करेंगे।
‘ई4एम स्ट्रीमिंग समिट 2022’ (e4m Streaming Summit 2022) के मौके पर बुधवार को ‘बिजनेसवर्ल्ड’ समूह के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह के फाउंडर व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा के साथ एक बातचीत में शैलेश लोढ़ा ने कंटेंट तैयार कर रहे लोगों से ऐसी वेब सीरीज का निर्माण करने के लिए कहा, जिसे लोग अपने परिवार के साथ देख सकें।
शैलेश लोढ़ा के अनुसार, ‘अगर कंटेंट समाज से जुड़ा होगा तो अधिक से अधिक भारतीय ओटीटी प्लेटफॉर्म्स से जुड़ेंगे। कंटेंट ऐसा होना चाहिए कि इसे परिवार के साथ देखा जा सके।’
‘तारक मेहता’ के नाम से घर-घर में मशहूर शैलेश लोढ़ा ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के लिए बहुत कम कंटेंट है। उन्होंने कहा, ‘ओटीटी प्लेटफार्म्स पर बच्चों के लिए शायद ही कोई कंटेंट हो। ऐसे में देश की अधिकांश आबादी इससे वंचित रहती है। प्रड्यूसर्स को बच्चों के लिए भी कंटेंट तैयार करना चाहिए।’ उन्होंने माता-पिता को यह भी सलाह दी कि वह इस बात पर नजर रखें कि उनके बच्चे टीवी और डिजिटल मीडिया पर क्या देखते हैं?
इससे साथ ही लोढ़ा ने इस तरह की आशंकाओं को भी खारिज कर दिया कि ओटीटी और अन्य डिजिटल फॉर्मेट्स के आने के साथ टीवी माध्यम का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। लोढ़ा के अनुसार, ‘जब टीवी आया तो तमाम लोगों को लगा कि प्रिंट का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अखबार, खासकर स्थानीय भाषा वाले अखबारों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसी तरह टीवी भी बना रहेगा।’
इस बातचीत के दौरान यह पूछे जाने पर कि अगर टीवी में गिरावट आती है तो एडवर्टाइजिंग सेक्टर का क्या होगा? लोढ़ा ने कहा, ‘विज्ञापन वाले लोग बहुत क्रिएटिव होते हैं। वे विज्ञापन देने के नए-नए तरीके तलाश लेंगे।’
रिषिराज श्रीवास्तव इससे पहले ‘टाइम्स इंटरनेट’ (Times Internet) में सीनियर रीजन हेड के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, जहां से उन्होंने कुछ समय पूर्व इस्तीफा दे दिया था।
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Samachar4media Bureau
रिषिराज श्रीवास्तव ने ‘जियोस्टार’ (JioStar) से अपनी नई पारी का आगाज किया है। यहां उन्होंने अकाउंट डायरेक्टर (Large Client Solutions) के पद पर जॉइन किया है।
‘जियोस्टार’ में अपनी नई भूमिका में वह प्रमुख एंटरप्राइज क्लाइंट्स के लिए रणनीतिक साझेदारियों (Strategic Partnerships) का नेतृत्व करेंगे। उनका फोकस इनोवेशन, डेटा-आधारित मार्केटिंग और क्रॉस-प्लैटफॉर्म ब्रैंड एक्सपीरियंस पर रहेगा।
बता दें कि रिषिराज श्रीवास्तव इससे पहले ‘टाइम्स इंटरनेट’ (Times Internet) में सीनियर रीजन हेड के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, जहां से उन्होंने कुछ समय पूर्व इस्तीफा दे दिया था।
‘टाइम्स इंटरनेट’ में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने डिस्प्ले, प्रोग्रामेटिक, वीडियो, बड़े IPs और नैटिव बिजनेस जैसे क्षेत्रों में बिजनेस को आगे बढ़ाया। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को पारंपरिक मीडिया से जोड़ने का काम भी उन्होंने बखूबी निभाया।
रिषिराज श्रीवास्तव को डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 15 साल से अधिक का अनुभव है। पूर्व में वह ‘एनडीटीवी’, ‘दैनिक भास्कर’ और ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में प्रमुख भूमिकाएं संभाल चुके हैं।
‘जियोस्टार’ में अपनी नई भूमिका के बारे में रिषिराज का कहना है, ‘इस नई यात्रा की शुरुआत को लेकर मैं काफी उत्साहित हूं। यह कंपनी इनसाइट-ड्रिवन स्ट्रैटेजी और क्रिएटिव इनोवेशन के ज़रिए क्लाइंट पार्टनरशिप को नई परिभाषा दे रही है। मैं जियोस्टार के उस विजन में योगदान देने की उम्मीद करता हूं, जो ब्रैंड्स को उद्देश्य, तेजी और प्रभाव के साथ आगे बढ़ने में मदद करता है।’
यूट्यूब (YouTube) ने एक पायलट प्रोग्राम की घोषणा की है, जो सभी क्रिएटर्स को दूसरा मौका देगा जिन्हें प्लेटफॉर्म से बैन किया गया था।
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Samachar4media Bureau
यूट्यूब (YouTube) ने एक पायलट प्रोग्राम की घोषणा की है, जो सभी क्रिएटर्स को दूसरा मौका देगा जिन्हें प्लेटफॉर्म से बैन किया गया था। जबकि किसी समाप्त किए गए चैनल को वापस नहीं लाया जा सकता, यह नया प्रोग्राम प्रतिभाशाली क्रिएटर्स को नए चैनल के साथ नई शुरुआत करने का अवसर देता है।
जब उनका नया चैनल YouTube पार्टनर प्रोग्राम की शर्तों को पूरा करेगा, तो वे अपने कंटेंट को चैनल पर प्रकाशित कर सकेंगे और उससे कमाई भी कर सकेंगे। बैन किए गए क्रिएटर्स को YouTube के कम्युनिटी गाइडलाइंस का पालन करना होगा और यदि उल्लंघन करते हुए पाए गए तो उनका चैनल भी समाप्त किया जा सकता है।
नया YouTube चैनल मांगने की पात्रता
YouTube नए चैनल के लिए किए गए अनुरोधों का मूल्यांकन करते समय कई पहलुओं पर विचार करेगा। प्लेटफॉर्म यह देखेगा कि क्या बैन किए गए चैनल ने किसी गंभीर या लगातार उल्लंघन किए हैं, या क्रिएटर की ऑन-या ऑफ-प्लेटफॉर्म गतिविधि ने YouTube कम्युनिटी को नुकसान पहुंचाया या भविष्य में पहुंचा सकती है।
ऐसे मामलों में, बैन किए गए क्रिएटर्स नए चैनल के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। यह पायलट प्रोग्राम उन क्रिएटर्स के लिए उपलब्ध नहीं होगा जिनके चैनल कॉपीराइट उल्लंघन या क्रिएटर रिस्पॉन्सिबिलिटी नीतियों के उल्लंघन के कारण समाप्त किए गए थे।
YouTube के अनुसार, योग्य क्रिएटर्स को एक विकल्प दिखाई देगा जिससे वे YouTube Studio में अपने पहले समाप्त किए गए चैनल से लॉगिन करके नया चैनल मांग सकते हैं। एक बार अनुरोध स्वीकार हो जाने पर वे नया चैनल बना पाएंगे। हालांकि, जिन क्रिएटर्स ने अपना YouTube चैनल या Google अकाउंट हटा दिया है, उन्हें अभी ‘नया चैनल मांगें’ का विकल्प दिखाई नहीं देगा।
Today is the day we're launching our pilot program to give some previously terminated creators a chance to rejoin YouTube.
— TeamYouTube (@TeamYouTube) October 9, 2025
We know there's a lot of interest and questions – key points below:
* What’s happening? Starting today, some previously terminated creators will have the…
नए चैनल के लिए आवेदन कब कर सकते हैं
YouTube का कहना है कि योग्य बैन किए गए क्रिएटर्स को नया चैनल बनाने के लिए अपने चैनल के समाप्त होने के एक साल इंतजार करना होगा। इस अवधि में, क्रिएटर्स चैनल समाप्ति के खिलाफ अपील कर सकते हैं।
एक बार क्रिएटर्स को नया चैनल मिल जाने के बाद, वे अपने पुराने वीडियो जो कम्युनिटी गाइडलाइंस के अंदर हैं, उन्हें फिर से अपलोड करके अपनी कम्युनिटी को फिर से बना सकते हैं। YouTube ने यह भी कहा कि यदि चैनल शर्तें पूरी करता है तो क्रिएटर्स YouTube पार्टनर प्रोग्राम के लिए फिर से आवेदन कर सकते हैं।
दस अक्टूबर इस संस्थान में उनका आखिरी कार्यदिवस है। हाल ही में संस्थान में सहयोगियों ने उन्हें भावपूर्ण फेयरवेल दी।
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वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष झा ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) समूह में अपनी पारी को विराम दे दिया है। वह करीब छह साल से बतौर एडिटर ‘हिन्दुस्तान’ की न्यूज वेबसाइट livehindustan.com समेत इस समूह की अन्य भाषाओं की वेबसाइट में अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। हाल ही में संस्थान में सहयोगियों ने उन्हें भावपूर्ण फेयरवेल दी।

समाचार4मीडिया से बातचीत में प्रभाष झा ने अपने इस्तीफे की पुष्टि की है। प्रभाष झा के अनुसार, दस अक्टूबर इस संस्थान में उनका आखिरी कार्यदिवस है। हालांकि, अपनी नई पारी के बारे में उन्होंने अभी खुलासा नहीं किया है।
बता दें कि प्रभाष झा को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब 25 साल का अनुभव है। मूलरूप से मधुबनी (बिहार) के रहने वाले प्रभाष झा ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2000 में बतौर इंटर्न ‘जैन टीवी’ (Jain TV) से की थी।
करीब एक साल तक काम करने के बाद उन्होंने यहां से बाय बोलकर ‘नवभारत’ (Navbharat), भोपाल का दामन थाम लिया। यहां बतौर करेसपॉन्डेंट उन्होंने करीब 11 महीने तक अपनी जिम्मेदारी निभाई और फिर यहां से अलविदा कह दिया।
इसके बाद प्रभाष झा ने ‘दैनिक जागरण’ (Dainik Jagran), मेरठ में जूनियर सब एडिटर के तौर पर अपनी नई शुरुआत की। करीब सवा साल यहां काम करने के बाद अक्टूबर 2003 में वह ‘अमर उजाला’ (Amar Ujala), देहरादून चले गए। करीब 10 महीने तक इस अखबार से जुड़े रहने के बाद उन्होंने ‘दैनिक जागरण’ में वापसी की। इस बार उन्होंने नोएडा में सीनियर सब एडिटर के तौर पर यहां जॉइन किया। लगभग तीन साल तक ‘दैनिक जागरण’ में अपने सेवाएं देने के बाद उन्होंने यहां से फिर अलविदा बोल दिया और ‘बीबीसी न्यूज’ (BBC News), हिंदी में कॉन्ट्रीब्यूटिंग एडिटर के तौर पर जुड़ गए।
करीब सवा साल तक यह जिम्मेदारी निभाने के बाद प्रभाष झा ने वर्ष 2007 में ‘नवभारत टाइम्स’ (Navbharat Times) का रुख किया। उस समय उन्होंने चीफ सब एडिटर के तौर पर यहां जॉइन किया और फिर करीब साढ़े 12 साल तक इस संस्थान में विभिन्न पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए एडिटर के पद पर पहुंच गए। इसके बाद यहां से अलविदा कहकर वर्ष 2019 में उन्होंने अपनी नई पारी ‘हिन्दुस्तान’ की डिजिटल विंग के साथ शुरू की थी, जहां से अब उन्होंने बाय बोल दिया है।
पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो प्रभाष झा ने नागपुर के एसएफएस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने मेघालय की महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन, एडवर्टाइजिंग और जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। कम्युनिकेशन और मीडिया स्टडीड में ‘नेट’ (NET) क्वालीफाइड प्रभाष झा ने दिल्ली के ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से रेडियो और टीवी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा भी किया है।
समाचार4मीडिया की ओर से प्रभाष झा को उनके नए सफर के लिए अग्रिम रूप से ढेरों शुभकामनाएं।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में मीडिया से बातचीत की।
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केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने नई दिल्ली के यशोभूमि में आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में मीडिया से बातचीत की। इस दौरान उनके साथ संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी और दूरसंचार सचिव डॉ. नीरज मित्तल भी मौजूद थे।
ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि IMC 2025 भारत की डिजिटल यात्रा में एक ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कार्यक्रम का उद्घाटन कर इस आयोजन को और विशेष बना दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री के नेतृत्व में दूरसंचार और डिजिटल क्षेत्र ने जबरदस्त प्रगति की है, जिससे ये दोनों अब देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गए हैं।
डिजिटल अर्थव्यवस्था का बढ़ता योगदान
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि आज भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था देश के GDP का 12 से 14 प्रतिशत हिस्सा है और आने वाले दशक में यह 20 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे साफ है कि दूरसंचार और डिजिटल सेक्टर देश के विकास के मुख्य चालक बनते जा रहे हैं।
पिछले 10 वर्षों में जबरदस्त बदलाव
केंद्रीय मंत्री ने ने बताया कि बीते दस सालों में इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आज भारत के पास 1.2 बिलियन मोबाइल यूजर्स हैं, जो दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। इंटरनेट यूजर्स 25 करोड़ से बढ़कर 97.4 करोड़ हो गए हैं और ब्रॉडबैंड कनेक्शन 6 करोड़ से बढ़कर 93.4 करोड़ तक पहुंच गए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने अपनी भूमिका बदल दी है। अब सरकार सिर्फ नियामक (regulator) नहीं, बल्कि सुविधाकर्ता (facilitator) के रूप में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि IMC 2025 की सफलता में 30 से अधिक मंत्रालयों का सहयोग शामिल है, जो "टीम इंडिया" की भावना को दर्शाता है।
स्वदेशी तकनीक में भारत की बड़ी छलांग
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गर्व से बताया कि भारत अब दुनिया का पांचवां देश बन गया है, जिसने अपना खुद का 4G स्टैक तैयार किया है। इसका अनावरण प्रधानमंत्री मोदी ने 27 सितंबर 2025 को किया था। मात्र 20 महीनों की छोटी सी अवधि में, भारत ने पूर्णतः स्वदेशी 4G प्रणाली विकसित कर ली है। यह प्रणाली अब 1 लाख BSNL टावरों पर चालू है। उन्होंने कहा कि इस स्टैक को जल्द ही 5G में अपग्रेड किया जाएगा, जो "भारत में निर्माण, विश्व के लिए निर्माण" के आदर्श वाक्य को रेखांकित करता है।
PLI योजना से बढ़ा उत्पादन और रोजगार
दूरसंचार विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना ने बड़ी सफलता हासिल की है। इससे ₹91,000 करोड़ की बिक्री, ₹17,800 करोड़ का निर्यात और 20,000 से अधिक नए रोजगार सृजित हुए हैं। मंत्री ने कहा कि अब यह क्षेत्र “स्वतंत्र” नहीं बल्कि “एकीकृत” रूप में काम कर रहा है, यानी निर्माण से लेकर डिजिटल सेवाओं तक पूरा तंत्र एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है।
भारत 6G गठबंधन – भविष्य की दिशा
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि भारत अब 6G तकनीक की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। भारत 6G एलायंस (B6GA) के 80 से अधिक सदस्य हैं और लक्ष्य है कि आने वाले समय में भारत वैश्विक बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) में कम से कम 10% हिस्सेदारी हासिल करे। इसके साथ ही दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास कोष (TTDF) जैसी पहलें रिसर्च और नवाचार को बढ़ावा दे रही हैं।
साइबर सुरक्षा पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने साइबर सुरक्षा प्रयोगशाला और वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक जैसे टूल्स विकसित किए हैं। इनसे नागरिकों की डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा में बड़ा सुधार हुआ है।
IMC 2025 के छह प्रमुख आकर्षण
केंद्रीय मंत्री ने IMC 2025 के छह बड़े घटकों के बारे में भी बात की, जिनमें अंतरराष्ट्रीय 6जी संगोष्ठी, अंतरराष्ट्रीय AI शिखर सम्मेलन, साइबर सुरक्षा शिखर सम्मेलन और सैटकॉम शिखर सम्मेलन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि IMC एस्पायर प्रतियोगिता एक वैश्विक स्टार्टअप चुनौती है, जिसमें 550 कंपनियां और 300 निवेशक भाग ले रहे हैं। इनमें शीर्ष 15 स्टार्टअप सैन फ्रांसिस्को में 10 मिलियन डॉलर के पुरस्कार के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। वहीं, OpenAI API Hackathon में देश भर के डेवलपर्स शामिल होंगे ये दोनों सम्मेलनों के पूरक हैं।
अंत में केंद्रीय मंत्री ने उद्योग, स्टार्टअप्स और प्रतिभागियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि IMC 2025 यह साबित करता है कि भारत अब वैश्विक डिजिटल नवाचार केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
सरकार ने बुधवार को ड्राफ्ट कंटेंट एक्सेसिबिलिटी गाइडलाइन जारी की। इसके तहत OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपनी नई प्रोग्रामिंग में कम से कम एक सुविधा शामिल करें
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सरकार ने बुधवार को ड्राफ्ट कंटेंट एक्सेसिबिलिटी गाइडलाइन जारी की। इसके तहत OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपनी नई प्रोग्रामिंग में कम से कम एक सुविधा शामिल करें, जिसमें इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL) इंटरप्रिटेशन भी शामिल है।
सभी के लिए ऑनलाइन कंटेंट पहुंच योग्य बनाने का प्रयास
सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने इस गाइडलाइन पर स्टेकहोल्डर्स और आम जनता से सुझाव मांगे हैं। गाइडलाइन का उद्देश्य है कि सुनने और देखने में असमर्थ लोग ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट का लाभ ले सकें। इसके लिए सुविधाओं में क्लोज्ड और ओपन कैप्शन, ऑडियो डिस्क्रिप्शन, और ISL इंटरप्रिटेशन जैसी चीजें शामिल हैं। सुझाव 22 अक्टूबर तक भेजने होंगे।
दो चरणों में लागू होगी गाइडलाइन
एक बार यह गाइडलाइन लागू होने के बाद, OTT प्लेटफॉर्म्स इसे दो साल में दो चरणों में लागू करेंगे।
फेज I: गाइडलाइन के नोटिफिकेशन के छह महीने बाद सभी नए कंटेंट में कम से कम एक एक्सेसिबिलिटी फीचर शामिल करना होगा। यह फीचर क्लोज्ड या ओपन कैप्शनिंग, ऑडियो डिस्क्रिप्शन, या ISL इंटरप्रिटेशन में से कोई एक हो सकता है।
गाइडलाइन यह भी सुनिश्चित करती है कि प्लेटफॉर्म्स एक्सेसिबिलिटी इंडिकेटर दिखाएं और सभी यूजर इंटरफेस में एक्सेसिबिलिटी फीचर्स शामिल हों।
फेज II: इस चरण में प्रकाशकों को प्रेरित किया जाएगा कि वे अपने संपूर्ण कंटेंट लाइब्रेरी को धीरे-धीरे एक्सेसिबल बनाएं। इसके तहत पहले 12 महीनों में कम से कम 30 प्रतिशत, 18 महीनों में 60 प्रतिशत और 24 महीनों में पूरी लाइब्रेरी एक्सेसिबल हो जाएगी।
कुछ कंटेंट श्रेणियों को छूट
ड्राफ्ट में कुछ कंटेंट श्रेणियों को इन नियमों से छूट दी गई है। इनमें शामिल हैं:
निगरानी और पालन सुनिश्चित करने के लिए समिति
MIB इस गाइडलाइन के पालन पर निगरानी के लिए एक समिति बनाएगा, जिसकी अध्यक्षता जॉइंट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी करेंगे।
यह समिति तीन महीने में एक बार मिलेगी और लागू होने की प्रगति की समीक्षा करेगी। साथ ही शिकायतों का निवारण करेगी और निर्देश जारी करेगी ताकि पूरे OTT इकोसिस्टम में सुसंगत अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पिछले 18 महीनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 1 लाख से अधिक अवैध या भ्रामक कंटेंट की पहचान की है।
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पिछले 18 महीनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 1 लाख से अधिक अवैध या भ्रामक कंटेंट की पहचान की है और उन पर रोक लगाई है। यह जानकारी सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोमवार को दी।
सेबी प्रमुख नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में आयोजित वर्ल्ड इन्वेस्टर वीक 2025 के शुभारंभ समारोह में बोल रहे थे।
निवेशक जागरूकता बढ़ाने और धोखाधड़ी पर रोक लगाने के अपने अभियान के तहत सेबी ने कई नए कदम उठाए हैं। इनमें पंजीकृत बिचौलियों को भुगतान के लिए सत्यापित UPI हैंडल्स की सुविधा और एक नया ‘Sebi Check’ वेरिफिकेशन टूल शामिल है।
इसके अलावा, सेबी अब राज्य की राजधानियों और बड़े शहरों में स्थानीय कार्यालय भी स्थापित कर रहा है, ताकि निवेशकों तक पहुंच मजबूत की जा सके और अनियमित बाजार गतिविधियों की निगरानी की जा सके।
तुहिन कांत पांडे ने निवेशकों को चेतावनी दी कि ठग अब सतर्क बचतकर्ताओं को भी उच्च जोखिम वाले निवेशों को सुरक्षित बताकर गुमराह कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ने जहां बाजार को हमारी उंगलियों तक पहुंचा दिया है, वहीं इसने ठगों को भी नए औज़ार दे दिए हैं। मैसेजिंग ऐप्स पर आने वाले अवांछित संदेश, संदिग्ध ‘फिनफ्लुएंसर्स’ और फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स या वेबसाइट्स एक ऐसी चीज़ का वादा करते हैं जो बाजार कभी नहीं दे सकता- गारंटीड रिटर्न।”
सेबी प्रमुख ने यह भी बताया कि भारत में बाजार में भागीदारी दर अभी भी बहुत कम है। शहरी आबादी का लगभग 15 प्रतिशत और ग्रामीण आबादी का केवल 6 प्रतिशत हिस्सा ही निवेश बाजारों से जुड़ा है।
उन्होंने निवेशकों से कहा कि उन्हें अपने वित्तीय लक्ष्यों को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वे दीर्घकालिक संपत्ति बनाना चाहते हैं या अल्पकालिक सट्टेबाजी में शामिल होना चाहते हैं, क्योंकि अध्ययनों में बार-बार यह साबित हुआ है कि डेरिवेटिव्स सेगमेंट में खुदरा निवेशकों को अक्सर नुकसान होता है।
सेबी प्रमुख ने कहा, “डेरिवेटिव्स हेजिंग और रिस्क मैनेजमेंट के लिए होते हैं, त्वरित मुनाफे के लिए नहीं। खुदरा निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना चाहिए, यह समझना चाहिए कि ये कॉन्ट्रैक्ट कैसे काम करते हैं और सट्टेबाजी से बचना चाहिए।”
इस मौके पर NSE ने भी कई निवेशक जागरूकता पहलें शुरू करने की घोषणा की, जिनमें क्विज, 40 स्थानों पर शैक्षणिक सत्र और निवेश धोखाधड़ी को पहचानने में मदद करने वाले इंटरैक्टिव फाइनेंस गेम्स शामिल हैं।
NSE के चेयरमैन श्रीनिवास इन्जेटी, जिन्होंने हाल ही में यह पद संभाला है, ने कहा कि एक्सचेंज का लंबे समय से प्रतीक्षित IPO तय समय पर है।
उन्होंने कहा, “हम पूरी तरह सही राह पर हैं। NSE के पब्लिक होने के पीछे एक प्रमुख कारण यह है कि वह खुद वही उदाहरण पेश करना चाहता है जो वह अन्य सूचीबद्ध कंपनियों से अपेक्षा करता है। यह एक उदाहरण के तौर पर आगे बढ़ेगा। भले ही यह अभी सूचीबद्ध नहीं है, लेकिन इसके लगभग 1.8 लाख शेयरधारक हैं, जिससे यह एक व्यापक रूप से होल्ड की गई कंपनी है।”
पारुल बत्रा ने एक्सचेंज4मीडिया में सीनियर डायरेक्टर व कॉरपोरेट कम्युनिकेशन एवं PR कम्युनिटी की बिजनेस हेड के रूप में शामिल होकर इस कम्युनिटी को नए स्तर तक ले जाने की जिम्मेदारी संभाली है।
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पारुल बत्रा (Parul Batra) ने एक्सचेंज4मीडिया में सीनियर डायरेक्टर व कॉरपोरेट कम्युनिकेशन एवं PR कम्युनिटी की बिजनेस हेड के रूप में शामिल होकर इस कम्युनिटी को नए स्तर तक ले जाने की जिम्मेदारी संभाली है। वह e4m में मौजूद लीडर्स की टीम का नेतृत्व करेंगी।
बता दें कि exchange4media.com की शुरुआत 25 साल पहले हुई थी और Corporate एवं PR कम्युनिटी का एडिटोरियल कवरेज 24 साल पहले शुरू हुआ था।
पिछले 8 सालों में करण भाटिया ने इस कम्युनिटी को संजोया और उच्च स्तर तक विकसित किया। अब पारुल बत्रा अपनी टीम के साथ इसे आगे ले जाएंगी। अपने उद्यमिता कौशल और इस डोमेन की गहरी समझ के साथ, पारुल बत्रा इस कम्युनिटी को अगले स्तर तक ले जाने की योजना बना रही हैं।
पारुल बत्रा का पब्लिक रिलेशंस और मार्केटिंग में 21 साल से अधिक का शानदार करियर है, जिसमें उन्होंने Corporate Reputation, Crisis Communication, Product Communication और Event Management में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है।
उन्होंने Technology, Ecommerce और F&B जैसी इंडस्ट्रीज में प्रभावशाली कम्युनिकेशन और मार्केटिंग रणनीतियों का नेतृत्व किया है।
उनके प्रोफेशनल सफर में Google India & SEA, Snapdeal, NDTV, और उनके अपने वेंचर शामिल हैं, जहां उन्होंने प्रतिष्ठित ब्रैंड्स और सरकारी इनीशिएटिव्स के साथ साझेदारी की। उन्होंने Google, YouTube, Amazon, Facebook और अन्य वैश्विक ब्रैंड्स के लिए कैंपेन चलाए।
भारत में Google की फाउंडिंग टीम का हिस्सा रह चुकी पारुल ने कंपनी में कई नेतृत्व पद संभाले। उन्होंने Google के Search, Maps, Android और Apps जैसे प्रोडक्ट्स के लिए Consumer PR का नेतृत्व किया। Google में लगभग दस साल काम करने से पहले, पारुल ने NDTV में सात साल पत्रकार और Senior Content Manager के रूप में काम किया। वह NDTV Convergence की फाउंडिंग टीम का हिस्सा भी रही, जिसने NDTV.com की स्थापना की।
अपनी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बनाने, ब्रैंड नैरेटिव चलाने और जटिल कम्युनिकेशन परिदृश्य में काम करने की क्षमता के साथ, पारुल बत्रा e4m Corporate Communications कम्युनिटी को मजबूत बनाने और इसे अगले स्तर तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएंगी।
One Take Media ने डिजिटल एंटरटेनमेंट में अपनी नई पहल VertiGo TV लॉन्च की है।
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One Take Media ने डिजिटल एंटरटेनमेंट में अपनी नई पहल VertiGo TV लॉन्च की है। यह एक स्ट्रीमिंग ऐप है जो चीनी और कोरियाई माइक्रो-ड्रामा को भारतीय दर्शकों तक लाता है।
हर एपिसोड लगभग एक मिनट लंबा होता है और पूरी सीरीज छोटे-छोटे एपिसोड्स में जल्दी पूरी हो जाती है, जिससे कहानियों को देखने और समझने का तरीका पूरी तरह बदल जाता है।
VertiGo TV सीधे Gen Z और मिलेनियल दर्शकों की बदलती आदतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह प्लेटफॉर्म वर्टिकल शॉर्ट-फॉर्म ड्रामाज प्रदान करता है।
One Take Media के फाउंडर और CEO अनिल खेड़ा ने कहा, ‘VertiGo TV सिर्फ एक प्लेटफॉर्म नहीं है, यह कहानी कहने के तरीके को बदलने का एक आंदोलन है। आज के दर्शक अच्छी कहानी चाहते हैं और जल्दी चाहते हैं। हम रोचक कोरियाई और चीनी माइक्रो-ड्रामा भारत में ऐसे पेश कर रहे हैं जो ताजा, आकर्षक और मोबाइल-फ्रेंडली लगें।’
OpenAI ने ChatGPT पर नए पेरेंटल कंट्रोल्स लॉन्च करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य परिवारों को यह कंट्रोल देने का है कि बच्चे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कैसे करते हैं।
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OpenAI ने ChatGPT पर नए पेरेंटल कंट्रोल्स लॉन्च करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य परिवारों को यह कंट्रोल देने का है कि बच्चे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कैसे करते हैं। OpenAI ने अपने ब्लॉग पोस्ट में बताया कि इसमें ‘linked teen accounts’ नाम की सुविधा लाई जा रही है।
जैसे ही कोई माता-पिता अपने ChatGPT अकाउंट को अपने बच्चे के अकाउंट से जोड़ते हैं, सिस्टम किशोर अकाउंट के लिए कंटेंट सुरक्षा बढ़ा देता है। इसमें शामिल हैं: ग्राफिक कंटेंट, वायरल चैलेंजेस, यौन, रोमांटिक या हिंसक रोलप्ले, और अत्यधिक सुंदरता मानदंड पर सीमा। माता-पिता इन सेटिंग्स को बदल सकते हैं, लेकिन किशोर इन्हें स्वतंत्र रूप से संशोधित नहीं कर सकते।
अतिरिक्त कंट्रोल्स माता-पिता को यह सुविधा देते हैं कि वे सेटिंग्स को कस्टमाइज कर सकें, जैसे:
‘Quiet Hours’ सेट करना
वॉइस मोड बंद करना
मेमोरी बंद करना
इमेज जेनरेशन हटाना
मॉडल ट्रेनिंग से ऑप्ट आउट करना
OpenAI ने एक नया ‘Parent Resource Page’ भी लॉन्च किया है, जो परिवारों को यह समझने में मदद करेगा कि ChatGPT कैसे काम करता है और नए पेरेंटल कंट्रोल फीचर्स का सही इस्तेमाल कैसे करें।
इसके अलावा, OpenAI एक एज प्रेडिक्शन सिस्टम पर भी काम कर रहा है, जो 18 वर्ष से कम उम्र वाले यूजर्स के अकाउंट्स पर ऑटोमेटिकली किशोर-विशिष्ट सेटिंग्स लागू करेगा।
HT मीडिया ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स HT डिजिटल स्ट्रीम्स पर कंटेंट-टू-कॉमर्स मॉडल को बड़े पैमाने पर शुरू कर नया राजस्व स्रोत जोड़ा है।
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Samachar4media Bureau
HT मीडिया ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स HT डिजिटल स्ट्रीम्स पर कंटेंट-टू-कॉमर्स मॉडल को बड़े पैमाने पर शुरू कर नया राजस्व स्रोत जोड़ा है। इसके जरिए कंपनी इंटेंट ट्रैफिक से कमाई करने के साथ-साथ पारंपरिक डिस्प्ले विज्ञापनों से आगे अपना दायरा बढ़ा रही है।
यह पहल एफिलिएट पार्टनरशिप, शॉपेबल कंटेंट और क्रिएटर-आधारित रिकमेंडेशन पर आधारित है। यह ऐसे समय में आ रही है जब वैश्विक और भारतीय पब्लिशर्स तेजी से कॉमर्स, कूपन और रिव्यू पर ध्यान दे रहे हैं ताकि कमजोर और अस्थिर विज्ञापन बाजार व थर्ड-पार्टी डेटा की चुनौतियों का सामना किया जा सके।
HT के लिए यह कदम उसके बड़े लॉग्ड-इन और दोबारा आने वाले ऑडियंस को HT टेक, HT ऑटो, हेल्थशॉट्स और हाल ही में लॉन्च किए गए HT शॉप नाउ जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बेहतर तरीके से कैश कराने में मदद करेगा और एक ऐसा परफॉर्मेंस लेयर तैयार करेगा जो मौसमी विज्ञापन उतार-चढ़ाव को झेल सके।
HT डिजिटल स्ट्रीम्स के सीईओ पुनीत जैन ने कहा, “HT मीडिया में हम लगातार कंटेंट-टू-कॉमर्स इकोसिस्टम को बना रहे हैं, एफिलिएट मार्केटिंग में एक कदम आगे बढ़कर और कंटेंट, टेक्नोलॉजी और स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप में बड़े निवेश कर रहे हैं। एक डेडिकेटेड यूनिट बिजनेस, प्रोडक्ट और कंटेंट टीम्स को साथ लाती है। हम अपने 250 मिलियन से ज्यादा मासिक यूजर्स की ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं और HT शॉप नाउ, HT टेक, HT ऑटो और हेल्थशॉट्स जैसे प्लेटफॉर्म्स को आगे बढ़ाकर यूजर इंगेजमेंट और कॉमर्स-वैल्यू पर फोकस कर रहे हैं।”
एमेजॉन, फ्लिपकार्ट और मिंत्रा जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेयर्स के साथ सहयोग और डी2सी ब्रैंड्स व ओईएम के नेटवर्क से जुड़ाव के जरिए यूजर्स को रिसर्च-आधारित प्रोडक्ट रिकमेंडेशन दिए जा रहे हैं, ताकि वे बेहतर खरीदारी निर्णय ले सकें। साथ ही, सोशल-कॉमर्स में क्रिएटर्स की भागीदारी को एफिलिएट-आधारित कमाई के जरिए इन्फ्लुएंसर प्लेटफॉर्म Affluencr पर सक्षम बनाया जा रहा है।
जैन ने आगे कहा, “यह पहल HT मीडिया को उपभोक्ताओं और ब्रैंड्स के बीच एक भरोसेमंद पुल की तरह स्थापित करती है, जो कंटेंट, क्रेडिबिलिटी और कॉमर्स को एक साथ जोड़कर फुल-फनल सॉल्यूशंस देती है। हम जो मजबूत रिस्पॉन्स देख रहे हैं उससे उत्साहित हैं और हमें भरोसा है कि अगले दो सालों में इस बिजनेस को बड़े पैमाने पर ले जाएंगे। हमारा लक्ष्य है भारत का सबसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बनना, जहां लोग ऑनलाइन या ऑफलाइन खरीदारी से पहले मार्गदर्शन पा सकें।”
एफिलिएट और कॉमर्स से होने वाली आय, नेटवर्क डिस्प्ले की तुलना में ज्यादा इंटेंट कैप्चर और स्पष्ट एट्रिब्यूशन देती है। यह ऐसे साल में और अहम हो जाता है जब ब्रैंड बजट असमान रहे और परफॉर्मेंस मार्केटर्स नापने योग्य नतीजे चाहते हैं।
एडिटोरियल भरोसे को क्यूरेटेड बाइंग जर्नी और क्रिएटर-चुने प्रोडक्ट्स से जोड़कर, पब्लिशर्स उपभोक्ताओं की विचार-प्रक्रिया को ट्रैक करने योग्य राजस्व में बदल पाते हैं। वहीं पार्टनर्स को कैटेगरी-विशेष ऑडियंस तक पहुंच मिलती है, बिना खुद कंटेंट बनाने में निवेश किए।
यह बदलाव ऐसे समय आया है जब HT मीडिया के FY25 प्रदर्शन में तेज सुधार हुआ है। कंपनी ने 14 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया (FY24 के 92 करोड़ रुपये के घाटे की तुलना में), जबकि कुल आय 7.3% बढ़कर 2,025 करोड़ रुपये हो गई (FY24 में 1,886 करोड़ रुपये)। ऑपरेटिंग रेवेन्यू 6.5% बढ़कर 1,806 करोड़ रुपये रहा। विज्ञापन आय लगभग स्थिर रही 1,070.7 करोड़ रुपये (FY24 में 1,070.04 करोड़ रुपये), जबकि नॉन-कोर इनकम बढ़कर 19.13 करोड़ रुपये रही (FY24 में 17.36 करोड़ रुपये)।
सेगमेंट के हिसाब से, प्रिंट सबसे बड़ा स्तंभ बना रहा 1,393 करोड़ रुपये (FY24 में 1,386 करोड़ रुपये), रेडियो बढ़कर 204 करोड़ रुपये (FY24 में 157 करोड़ रुपये) और डिजिटल ने सबसे ज्यादा ग्रोथ दिखाई, 37% बढ़कर 212 करोड़ रुपये (FY24 में 154 करोड़ रुपये)। ऑपरेटिंग लेवरेज बेहतर हुआ: EBITDA 58% बढ़कर 187 करोड़ रुपये रहा (FY24 में 118 करोड़ रुपये), D&A 17% घटकर 98 करोड़ रुपये रहा और कुल खर्च हल्के से बढ़कर 2,003 करोड़ रुपये (FY24 में 1,964 करोड़ रुपये) हो गए, भले ही विज्ञापन और सेल्स खर्च दोगुने से ज्यादा होकर 233 करोड़ रुपये (FY24 में 124.5 करोड़ रुपये) हो गए।
वैश्विक स्तर पर यह मॉडल न्यूज पब्लिशर्स के लिए सफल साबित हुआ है। न्यूयॉर्क टाइम्स का Wirecutter प्रोडक्ट टेस्टिंग और बाइंग गाइड्स को स्थायी एफिलिएट रेवेन्यू में बदलता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल का Buy Side फाइनेंस, टेक और होम जैसे क्षेत्रों में कड़ाई से सर्विस जर्नलिज्म लागू करता है। द टेलीग्राफ का Recommended Desk लैब-टेस्टेड रिव्यू और सीजनल गिफ्ट हब्स को हाई-इंटेंट रीडर्स तक पहुंचाता है। वहीं द इंडिपेंडेंट का IndyBest यूके में ‘बेस्ट टू बाय’ लिस्ट्स के लिए जाना जाता है, जो लगातार रैंक करती हैं और कॉमर्स को बढ़ाती हैं। इन सभी में एडिटोरियल भरोसे को शॉपेबल जर्नीज के साथ जोड़कर एक स्थायी और विविध आय मॉडल बनाया गया है।