दैनिक भास्कर डिजिटल को मिला नया CEO

नए सीईओ को स्टार्टअप्स के लिए विभिन्न डिजिटल कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स तैयार करने और संचालित करने के साथ ही उन्हें आगे बढ़ाने का लगभग दस साल का अनुभव है

Last Modified:
Friday, 04 October, 2019
DB DIGITAL

'दैनिक भास्‍कर', ‘दिव्य भास्कर’ और ‘दिव्य मराठी’ जैसे प्रमुख अखबारों का संचालन करने वाली कंपनी 'डीबी कॉर्प लिमिटेड' (DBCL) ने अपने डिजिटल बिजनेस की कमान पथिक शाह को सौंप दी है। उन्हें डीबी डिजिटल का चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर बनाया गया है। पथिक शाह को स्टार्टअप्स के लिए विभिन्न डिजिटल कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स तैयार करने और संचालित करने के साथ ही उन्हें आगे बढ़ाने का लगभग दस साल का अनुभव है। बता दें कि दैनिक भास्कर डिजिटल के सीईओ ज्ञान गुप्ता ने कुछ माह पूर्व अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

दैनिक भास्कर समूह जॉइन करने से पहले पथिक शाह ‘हाइक मैसेंजर’ (Hike Messenger) से लगभग सात साल से जुड़े हुए थे। यहां वह वाइस प्रेजिडेंट (प्रॉडक्ट्स) के पद पर काम कर रहे थे। इसके अलावा वह ‘विलय और अधिग्रहण’ (M&A) जैसे कार्यों का नेतृत्व भी कर रहे थे।   

इस बारे में दैनिक भास्कर समूह के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल का कहना है, ‘समूह में पथिक शाह के शामिल होने पर हम बहुत खुश हैं। हमें पूरा विश्वास है कि दैनिक भास्कर समूह को डिजिटल कंज्युमर प्रॉडक्ट के क्षेत्र में पथिक शाह के अनुभव का काफी फायदा मिलेगा और उनके नेतृत्व में ग्रुप को और मजबूत ब्रैंड बनाने में काफी मदद मिलेगी।’  

वहीं, अपनी नई भूमिका के बारे में पथिक शाह का कहना है, ‘देश की सबसे बड़ी मीडिया कंपनी में शुमार दैनिक भास्कर समूह की डिजिटल टीम का हिस्सा बनने पर मैं काफी खुश हूं। प्रिंट मीडियम में लीडरशिप पोजीशन हासिल करने के बाद अब हम डिजिटल न्यूज और कंटेंट पर विशेष फोकस कर रहे हैं।’

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शिकायत के बाद भी कार्रवाई न करने का गूगल इंडिया को यूं भुगतना पड़ेगा खामियाजा

कार्यवाही से बचने के लिए ‘गूगल इंडिया’ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन यहां भी उसे कोई राहत नहीं मिली है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 16 December, 2019
Last Modified:
Monday, 16 December, 2019
Google

कथित मानहानि के मामले में ‘गूगल इंडिया’ को आपराधिक मुकदमे का सामना करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को राहत देने से इनकार करते हुए कहा है कि वह इस संबंध में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 में 2009 के संशोधन से पहले के मानहानि मामले में सुरक्षा कवर का दावा नहीं कर सकती।

गौरतलब है कि इस कानून के पास होने के बाद किसी भी प्रकाशित कंटेंट के मामले में थर्ड पार्टी इंटरमीडियरी की लायबिलिटी घट गई थी। पूरा मामला ‘गूगल’ की ब्लॉग प्रकाशन सेवा से संबंधित है। दरअसल, ‘गूगल ग्रुप्स’ में ‘विशाखा इंडस्ट्रीज’ के उत्पादों पर सवाल उठाते हुए ब्लॉग पोस्ट किये गए थे।

कंपनी ने नोटिस भेजकर ‘गूगल इंडिया’ से पोस्ट हटाने के लिए कहा, लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद ‘विशाखा इंडस्ट्रीज’ द्वारा ‘गूगल इंडिया’ पर केस चलाने के लिए अदालत में अपील की गई, जिस पर कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला सुनाया। इस पर ‘गूगल इंडिया’ ने कार्यवाही से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन यहां भी उसे कोई राहत नहीं मिली है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून की धारा 79 (बदलाव से पहले), आईपीसी की धारा 499/500 के तहत दर्ज अपराध के संबंध में किसी इंटरमीडियरी की रक्षा नहीं करती। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब ‘गूगल इंडिया’ को आपराधिक मुकदमे का सामना करना होगा। इस पूरे मामले में वरिष्ठ वकील श्रीधर पोटाराजू की भूमिका बेहद अहम् रही। जिन्होंने ‘विशाखा इंडस्ट्रीज’ का पक्ष अदालत के समक्ष रखा और ‘गूगल इंडिया’ को अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का कोई मौका नहीं दिया।

बता दें कि शिकायतकर्ता ‘विशाखा इंडस्ट्रीज’ एक लिस्टेड कंपनी है, जो एसबेस्टस सीमेंट की शीट बनाती है। उसने अपनी याचिका में कहा था कि उसके सभी प्लांट में एसबेस्टस सीमेंट की शीटों का उत्पादन पर्यावरण के अनुकूल तरीके से होता है, मगर बैन एसबेस्टस नेटवर्क इंडिया के को-ऑर्डिनेटर गोपाल कृष्ण द्वारा उसके बारे में गलत बातें प्रचारित की जा रही हैं। गोपाल ने उसके खिलाफ ब्लॉग पोस्ट लिखा था, जिसकी वजह से उसकी मानहानि हुई।

चूंकि ‘गूगल इंडिया’ के विरुद्ध मानहानि का मामला 2009 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 में हुए संशोधन से पहले दर्ज किया गया था, इसलिए कंपनी की इस दलील को अस्वीकार कर दिया गया कि साइट का संचालन उसकी मूल कंपनी गूगल द्वारा किया जा रहा था और साइट से सामग्री को हटाने के अधिकार उसके पास नहीं थे।

समाचार4मीडिया से बातचीत में वरिष्ठ वकील श्रीधर पोटाराजू ने कहा, ‘सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर लगाम लगाना संबंधित कंपनी की जिम्मेदारी है और वह इससे मुकर नहीं सकती। इस मामले में ‘गूगल इंडिया’ सबकुछ जानते हुए भी खामोश रही, यही उसकी सबसे बड़ी गलती है। ‘विशाखा इंडस्ट्री’ द्वारा ‘गूगल इंडिया’ को यह बताया गया था कि उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनी बैन एसबेस्टस इंडिया द्वारा उसे बदनाम करने के लिए गूगल ब्लॉग प्रकाशन सेवा का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसने कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे पोस्ट नहीं हटाये गए, जो विशाखा इंडस्ट्री की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते थे। तो फिर किस आधार पर गूगल इंडिया को खुद को निर्दोष करार दे सकती है?’

पोटाराजू का यह भी कहना था, ‘हमने शीर्ष अदालत में इन्हीं बातों को मजबूती के साथ रखा, जिस पर सहमति जताते हुए कोर्ट ने ‘गूगल इंडिया’ के खिलाफ क्रिमिनल ट्रायल चलाने का आदेश दिया। अब साक्ष्य-सबूतों के आधार पर यह तय होगा कि ‘गूगल इंडिया’ दोषी है या नहीं, लेकिन इतना साफ हो गया है कि ‘थर्ड पार्टी’ की आड़ में कोई कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।’ 

श्रीधर पोटाराजू ने आगे कहा, ‘गूगल इंडिया ने अपनी दलील में कहा कि वह थर्ड पार्टी है और केवल लोगों को अपने विचार व्यक्त करने के लिए एक प्लेटफार्म प्रदान करती है। जो कुछ हुआ, उसमें उसकी कोई गलती नहीं है, क्योंकि लोग क्या लिखते हैं, इस पर उसका कोई नियंत्रण नहीं। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जब कोई कंपनी आपको यह बता रही है कि उसके साथ कुछ गलत हो रहा है, तो आप थर्ड पार्टी का हवाला देकर खामोश नहीं बैठा सकते। जानकारी मिलने के बाद भी कोई करवाई नहीं करने का खामियाजा तो ‘गूगल इंडिया’ को उठाना होगा।’ 

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पत्रकार नमित शुक्ला की मेनस्ट्रीम मीडिया में वापसी

एक दशक से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय नमित शुक्ला को प्रिंट व ऑनलाइन मीडिया दोनों में कार्य करने का अनुभव है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 09 December, 2019
Last Modified:
Monday, 09 December, 2019
Namit Shukla

पत्रकार नमित शुक्ला ने मेन स्ट्रीम मीडिया में वापसी की है। उन्होंने हैदराबाद में 'इनाडु’ समूह के हिंदी न्यूज पोर्टल 'ईटीवी भारत’ (ETV Bharat) में बतौर सीनियर कटेंट एडिटर जॉइन किया है। एक दशक से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय नमित शुक्ला को प्रिंट व ऑनलाइन मीडिया दोनों में कार्य करने का अनुभव है। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जनपद फतेहपुर के बिंदकी तहसील निवासी नमित ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।

उन्होंने वर्ष 2007 में छत्तीसगढ़ में ‘दैनिक भास्कर’ के बिलासपुर संस्करण के साथ बतौर ट्रेनी जर्नलिस्ट अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद टीवी मीडिया में कदम रखते हुए ‘जी न्यूज’ (एमपी/सीजी) चैनल का साथ बतौर रिपोर्टर थामा। इसके बाद वह फिर से प्रिंट मीडिया में वापसी करते हुए ‘दैनिक भास्कर’ समूह के भिलाई संस्करण के साथ बतौर सीनियर रिपोर्टर जुड़ गए।

वर्ष 2011 में रायपुर में ‘राजस्थान पत्रिका’ के साथ सिटी चीफ के तौर पर अपनी सेवाएं देने के बाद वर्ष 2016 में उन्होंने यूपी की ओर रुख करते हुए 'जागरण समूह' के बाईलिंगुअल अखबार ‘आईनेक्स्ट’ के आगरा एडिशन के साथ डिप्टी चीफ रिपोर्टर के रूप में अपनी नई पारी शुरू की। यहां से वर्ष 2018 में अपनी पारी को विराम देकर आगरा में ही ‘अमर उजाला’ वेब को नया ठिकाना बनाकर सीनियर कटेंट राइटर के रूप में फरवरी 2019 तक जुड़े रहे। नमित शुक्ला निजी कारणों के चलते करीब आठ महीने से मेन स्ट्रीम मीडिया से दूर थे। अब उन्होंने ‘ईटीवी भारत’ के साथ नई शुरुआत की है।

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डिजिटल मीडिया के लिए सरकार बनाने जा रही है ये नियम

सूचना प्रसारण मंत्रालय ने प्रस्तावित विधेयक जारी कर इस पर एक महीने के अंदर संबंधित पक्षों से प्रतिक्रियाएं मांगी हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 28 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 28 November, 2019
Digital Media

सरकार ने ई-पेपर्स और डिजिटल न्यूज को रेगुलराइज करने की कवायद शुरू कर दी है। इस कवायद के तहत आने वाले समय में ये प्लेटफॉर्म सूचना प्रसारण मंत्रालय (MIB) के अधीन काम करेंगे। इसके लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय द्वारा ब्रिटिश शासनकाल के ‘प्रेस और रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स’ (PRB) अधिनियम 1867 की जगह नए ‘प्रेस एवं पत्रिका पंजीकरण विधेयक, 2019’ (Registration of Press and Periodicals Bill 2019) का विधेयक प्रस्तावित किया है।

इस प्रस्तावित विधेयक की प्रमुख बात यह है कि डिजिटल न्यूज को भी सूचना प्रसारण मंत्रालय के दायरे में लाए जाने की योजना है। इसके तहत न्यूज वेबसाइट्स के लिए भी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। इस प्रस्तावित विधेयक में ई-पेपर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए काफी सरल सिस्टम तैयार करने की बात भी शामिल है। बता दें कि वर्तमान में डिजिटल मीडिया देश की किसी भी संस्था के अंतर्गत पंजीकृत नहीं है।

बुक्स के रजिस्ट्रेशन के साथ ही इससे जुड़े मामलों के वर्तमान नियमों को हटाने का प्रस्ताव भी इस विधेयक में शामिल किया गया है। इस विधेयक के मसौदे में पब्लिशर्स/प्रिंटर्स द्वारा जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष घोषणा करने एवं इसके प्रमाणीकरण की वर्तमान प्रक्रिया को हटाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, अखबारों और पत्रिकाओं के टाइटल अथवा रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया प्रेस रजिस्ट्रार ऑफ जनरल के माध्यम से करनी होगी। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि इस बदलाव से केंद्र और राज्य सरकारें अखबारों में सरकारी विज्ञापन देने, अखबारों को मान्यता देने और उन्हें मिलने वाली इस तरह की सुविधाओं से संबंधित आवश्यक नियम-कानून तय करने में सक्षम हो सकेंगी। बताया जाता है कि मंत्रालय ने यह प्रस्तावित विधेयक जारी कर इस पर एक महीने के अंदर संबंधित पक्षों से प्रतिक्रियाएं मांगी हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार मधु त्रेहान ने लिया ये बड़ा फैसला

मधु त्रेहान ‘इंडिया टुडे’ के एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी की बहन हैं और मैगजीन की संस्थापक संपादक भी रही हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 19 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 19 November, 2019
Madhu

वरिष्ठ पत्रकार मधु त्रेहान ने ‘न्यूजलॉन्ड्री डॉटकॉम’ के साथ अपना सात साल पुराना सफर खत्म करने का फैसला लिया है। अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी जानकारी देते हुए उन्होंने लिखा है कि अब वह अपने परिवार के साथ समय बिताना और कुछ नया करना चाहती हैं। ‘न्यूजलॉन्ड्री’ की सर्वेसर्वा मधु ने अपने जीवन के 50 साल पत्रकारिता को दिए हैं। उल्लेखनीय है कि वह ‘इंडिया टुडे’ के एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी की बहन हैं और मैगजीन की संस्थापक संपादक भी रही हैं।

अपने विदाई संदेश में मधु ने लिखा है, ‘लगभग 50 साल की पत्रकारिता के बाद अब कुछ नया करने का समय है। मैं फ्रीलांसर के तौर पर लिखती रहूंगी, लेकिन फिलहाल मैं अपने परिवार के साथ कुछ वक्त बिताना चाहती हूं। मैं ‘न्यूजलॉन्ड्री’ के एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी मैनेजिंग एडिटर रमन किरपाल को सौंपती हूं।’

गौरतलब है कि मधु त्रेहान ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। न्यूयॉर्क में रहने के दौरान वह संयुक्त राष्ट्र के प्रेस विभाग से जुड़ीं और फिर साप्ताहिक अखबार ‘इंडिया अब्रॉड’ के संपादक की भूमिका निभाई। 1975 में भारत लौटने पर उन्होंने अपने पिता वीवी पुरी के साथ मिलकर ‘इंडिया टुडे’ मैगजीन की शुरुआत की। हालांकि, 1977 में वह अपने भाई अरुण पुरी को मैगजीन की जिम्मेदारी सौंपकर वापस न्यूयॉर्क चली गईं। 1986 में अपनी वापसी पर उन्होंने भारत की पहली विडियो मैगज़ीन ‘न्यूजट्रैक’ लॉन्च करके तहलका मचा दिया।

मधु त्रेहान ही एकमात्र ऐसी पत्रकार हैं, जिन्होंने 1994 में मुंबई बम धमाके के दोषी याकूब मेनन का इंटरव्यू लिया था। मधु कई किताबें भी लिख चुकी हैं। फरवरी 2012 में उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर डिजिटल मीडिया में कदम रखा और ‘न्यूजलॉन्ड्री डॉटकॉम’ की स्थापना की। तभी से वह इसके एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं।

मधु त्रेहान के पूरे विदाई संदेश को आप यहां पढ़ सकते हैं-

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क्या आप जानते हैं सूचना-प्रसारण मंत्रालय के नए FACT मॉड्यूल के बारे में?

अभी इसका फोकस ऑनलाइन और डिजिटल कंटेंट पर होगा, बाद में इसका विस्तार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक किया जाएगा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 18 November, 2019
Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
Fake News

सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ‘फेक न्यूज’ (Fake News) के बढ़ते मामलों को लेकर सरकार ने काफी चिंता जताई है। भारत सरकार ने अब निर्णय लिया है कि फेक न्यूज से निपटने के लिए सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के तहत अब फैक्ट चेकिंग मॉड्यूल का गठन किया जाएगा। इस मॉड्यूल का काम ऐसे मामलों की पहचान कर आवश्यक कदम उठाना होगा।

दरअसल, पिछले दिनों बांग्लादेशी मीडिया के एक हिस्से में इस तरह की खबर चली थी कि अयोध्या में आए फैसले के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को बधाई दी थी। भारत ने इस तरह की खबरों पर आपत्ति जताते हुए इसे फर्जी और दुर्भावनापूर्ण बताया है। सूत्रों के अनुसार, इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यायल और सूचना प्रसारण मंत्रालनय ने निर्णय लिया कि इस तरह की फर्जी खबरों से निपटने के लिए कोई मैकेनिज्म तत्काल बनाए जाने की जरूरत है।

बताया जाता है कि सरकार द्वारा गठित किए जा रहे फैक्ट चेक मॉड्यूल को शुरुआत में भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों द्वारा संचालित किए जाएगा। इस मॉड्यूल में चार मुख्य सिद्धांतो खोज (find), आकलन (assess), क्रिएट (create) और टारगेट (target) यानी (FACT) पर काम किया जाएगा। यह मॉड्यूल चौबीसों घंटे काम करेगा और ऑनलाइन न्यूज सोर्स के साथ ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सभी सोशल मीडिया पोस्ट की निगरानी करेगा।

पारंपरिक मीडिया संस्थानों पर लागू होने वाले कायदे-कानून ऑनलाइन मीडिया पर लागू नहीं हैं। ऐसे में ऑनलाइन माध्यमों में भ्रामक सूचनाएं ज्यादा फैलने की आशंका रहती है। इसके लिए टीम उन स्टोरीज की भी पहचान कर आवश्यक कदम उठाएगी, जिनमें सरकार अथवा उसकी एजेसिंयों से संबंधित फर्जी सूचनाओं को बढ़ावा दिया गया हो। बताया जाता है कि यह टीम जल्द ही अपना काम शुरू कर देगी। अभी इस फैक्ट चेक मैकेनिज्म का फोकस ऑनलाइन और डिजिटल कंटेंट पर होगा, बाद में इसका विस्तार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी किया जाएगा।

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पत्रकार हेमराज चौहान ने इस वेब पोर्टल संग अपनी पारी को दिया विराम

इस साल की शुरुआत में ही इस पोर्टल के साथ शुरू किया था अपना सफर, पूर्व में कई मीडिया संस्थानों में निभा चुके हैं जिम्मेदारी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
Hemraj Chauhan

पत्रकार हेमराज सिंह ने न्यूज पोर्टल ‘वन इंडिया’ (Oneindia) से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस साल की शुरुआत में ही यहां जॉइन किया था। यहां वह बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। हेमराज सिंह का अगला कदम क्या होगा, इस बारे में फिलहाल पता नहीं चल सका है।  

हेमराज ने माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय से वर्ष 2009 में मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने वर्ष 2013 में ‘इंडिया टीवी’ जॉइन किया और बतौर असिस्टेंट प्रड्यूसर वहां करीब सवा तीन साल काम किया। इसके बाद वे ‘न्यूज़ 24’ से एसोसिएट प्रड्यूसर के तौर पर जुड़ गए।

दो साल पहले टीवी छोड़कर उन्होंने डिजिटल मीडिया में कदम रखा और ‘नेशनल दस्तक’ वेब पोर्टल में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। अप्रैल 2017 में उन्होंने ‘राजस्थान पत्रिका’ के डिजिटल सेगमेंट ‘कैच हिंदी’ में सब एडिटर के तौर पर नई पारी शुरू की। यहां के बाद उन्होंने ‘वनइंडिया’ का दामन थाम लिया था।

दिल्ली के प्रतिष्ठित संस्थान जामिया मिलिया इस्लामिया में टीवी जर्नलिज्म में वर्ष 2012 में गोल्ड मेडल हासिल करने वाले हेमराज चौहान सोशल मीडिया में काफी एक्टिव हैं। हेमराज ने ‘इंडिया टीवी’ से पहले न्यूज एजेंसी ‘साउथ एशिया इंटरनेशनल’ के साथ भी काम किया है।

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रेगुलेशन के बजाय आचार संहिता (Code of Conduct) की कोशिश में है सरकार

इस मुद्दे पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली में जल्द ही तीसरी बैठक होगी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 15 November, 2019
Last Modified:
Friday, 15 November, 2019
OTT

‘ओवर द टॉप’ (ओटीटी) प्लेटफॉर्म्स के रेगुलेशन का मुद्दा इन दिनों जोर-शोर से उठ रहा है। समाज के कई वर्गों से इसके कंटेंट को लेकर चिंता जताई जा रही है। रेगुलेशंस के बारे में सरकार के अगले कदम को लेकर ओटीटी इंडस्ट्री में भी चिंता के बादल छाये हुए हैं। इस बीच ‘सूचना-प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने कहा है कि किसी भी तरह की ‘संवैधानिक इकाई’ (statutory body) गठित करने के बजाय वह ‘आत्म नियमन’ यानी सेल्फ रेगुलेशन के पक्ष में है।

इस बारे में सूचना-प्रसारण मंत्रालय के सचिव अमित खरे का कहना है, ‘हम एक ऐसे पड़ाव पर आने की कोशिश कर रहे हैं, जहां पर सभी ओटीटी प्लेयर्स बिना सरकारी हस्तक्षेप के एक सेल्फ रेगुलेटरी मॉडल तैयार कर सकते हैं।’ दिल्ली में गुरुवार को ‘सीआईआई बिग पिक्चर समिट’ (CII Big Picture Summit) में अमित खरे ने दिल्ली और मुंबई में ओटीटी प्लेयर्स और अन्य शेयरधारकों के साथ हुई बैठकों की सफलता के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि सेल्फ रेगुलेशन मॉडल पर काम हो रहा है। इस मुद्दे पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली में जल्द ही तीसरी बैठक होगी।

यह भी  पढ़ें: OTT प्लेटफॉर्म्स को लेकर फिर उठा ये बड़ा मुद्दा

सूचना-प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव विक्रम सहाय का कहना था,‘सरकार रेगुलेशन के स्थान पर ऐसी आचार संहिता (Code of Conduct) के बारे में प्रयासरत है, जिसका ओटीटी इंडस्ट्री पालन कर सके।’ इसके साथ ही उनका यह भी कहना था, ‘इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) इस क्षेत्र से जुड़े प्लेयर्स के लिए बेहतर नियम-कायदों के बारे में पहले से ही काम कर रही है और अधिकांश प्लेयर्स के बीच इन्हें लेकर सहमति बनने की उम्मीद है।’   

बता दें कि ‘IAMAI’ ने इस साल की शुरुआत में आचार संहिता को लेकर एक मसौदा तैयार किया था, जिसमें ऑनलाइन कंटेंट प्रोवाइडर्स के लिए गाइडलाइंस शामिल की गई थीं। इन गाइडलाइंस को पहले से उपलब्ध कानूनी सलाहों के साथ ही भविष्य को लेकर शेयरधारकों की चिंताओं को भी शामिल करते हुए तैयार किया गया था।

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TOP STORY ने बताया, CM के लिए इस नाम पर राजी होगी शिवसेना!

महाराष्ट्र में चुनाव परिणाम घोषित होने के 13 दिन बाद भी सरकार का गठन नहीं हो पाया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 06 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 06 November, 2019
Shivsena Election

महाराष्ट्र में सियासी घमासान मचा हुआ है। एक ओर शिवसेना अपना सीएम बनाने और 50-50 फॉर्मूले (कार्यकाल का आधा-आधा बंटवारा) की मांग पर अड़ी है, वहीं भाजपा इसके लिए तैयार नहीं है। ऐसे में न्यूज वेबसाइट ‘टॉप स्टोरी’ (TOP STORY) ने एक स्टोरी में बताया है कि शिवसेना सीएम पद के लिए किस राजनेता के नाम पर राजी हो सकती है।  

TOP STORY के संपादक प्रवीण आत्रे ने अपनी इस स्टोरी में सूत्रों के हवाले से बताया है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को सीएम बनाने पर शिवसेना भी नरम रुख अपनाने को तैयार हो सकती है।

बता दें कि महाराष्ट्र में पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव का परिणाम 24 अक्टूबर को आया था। 288 सीटों में भाजपा को सबसे अधिक 105 सीटें मिली थी, लेकिन, वह बहुमत से काफी पीछे रह गई थी। एनडीए की सहयोगी शिवसेना को 56 सीटें मिली थीं और यह राज्य में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। दोनों पार्टियों के बीच चुनाव से पहले ही गठबंधन हो गया था, ऐसे में सरकार के गठन में तब कोई बाधा नजर नहीं आ रही थी। लेकिन मुख्यमंत्री किस पार्टी का होगा, इसे लेकर दोनों ही पार्टियों के बीच ठनी हुई है और चुनाव परिणाम घोषित होने के 13 दिन बाद भी सरकार गठित नहीं हो पाई है।

ऐसे में प्रवीण आत्रे ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि भाजपा और संघ के बीच भी सीएम पद के लिए गडकरी के नाम पर गंभीर चर्चा हो रही है। गडकरी महाराष्ट्र के ऐसे नेता हैं, जिनकी सभी राजनीतिक दलों में अच्छी पैठ है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद के लिए गडकरी के नाम पर शिवसेना को भी कोई एतराज नहीं है। ऐसे में नितिन गडकरी को मुख्यमंत्री बनाकर सरकार के गठन का रास्ता निकल सकता है।

‘TOP STORY’ में छपी इस पूरी स्टोरी को पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं।

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इंडिया न्यूज डिजिटल के संपादक रीतेश वर्मा की नई पारी जल्द

बीस साल लंबे पत्रकारिता करियर में अखबार के साथ ही टीवी और डिजिटल में भी कर चुके हैं काम

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 06 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 06 November, 2019
Ritesh Verma

'आईटीवी' (ITV) नेटवर्क के हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ की वेबसाइट ‘इनखबर’ (Inkhabar) के संपादक रीतेश वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। वे जल्द ही हिन्दुस्तान टाइम्स  डिजिटल स्ट्रीम्स के साथ अपनी नई पारी शुरू करेंगे। यहां वे बतौर एडिटर (न्यू इनिशिएटिव) अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। रीतेश वर्मा को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब दो दशक का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने अखबार के साथ ही टीवी और डिजिटल में भी काम किया है

'आईटीवी' (डिजिटल) के सीईओ संदीप अमर ने कंपनी के ग्रुप में रीतेश वर्मा के इस्तीफे की खबर साझा करते हुए लिखा है- Dear All, It is important to have direct communication, to avoid any rumours. I just wanted to share that Ritesh Verma, our inkhabar editor, has decided to move on to take up a new challenge in Life. We all know that he is superstar and a phenomenal person, he has taken inkhabar from almost zero to 16 million users in GA and 14.7 million users in comScore. Obviously we will have a farewell party for him, he will leave in a few days, thanks

बिहार में बेगूसराय के मूल निवासी रीतेश वर्मा ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान ही स्थानीय अखबार ‘बेगूसराय टाइम्स’ के साथ फ्रीलॉन्सर के तौर पर काम शुरू कर दिया था। वर्ष 1999 में बिहार में दैनिक जागरण की लॉन्चिंग के बाद वह इस अखबार से जुड़ गए। यहां करीब छह साल काम करने के बाद वर्ष 2005 में वह पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गए और ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (आईआईएमसी) में दाखिला ले लिया।   

'आईआईएमसी' से पढ़ाई पूरी करने के बाद रीतेश करीब एक महीने के लिए ‘विराट वैभव’ अखबार से जुड़े और फिर वहां से छोड़कर ‘दैनिक भास्कर’ जॉइन कर लिया। इसके बाद ‘आज समाज’,‘बीबीसी हिंदी’,‘स्टार न्यूज’,‘सहारा समय’ होते हुए वर्ष 2013 में उन्होंने ‘इंडिया न्यूज’ के साथ अपनी नई पारी शुरू की। ‘इंडिया न्यूज’ में डिजिटल की शुरुआत हुई तो इसकी वेबसाइट ‘इनखबर’ (inkhabar.com) के संपादक के तौर पर उन्हें नई जिम्मेदारी दी गई।  

रीतेश वर्मा पत्रकारिता के अलावा 'आईआईएमसी' की एलुमनी एसोसिएशन (आईआईएमसीएए) से भी सक्रिय रूप से जुड़े हैं और उसके संस्थापक सदस्यों में एक हैं। 2012 में शुरू हुई 'आईआईएमसीएए' की सफलता और वैश्विक विस्तार में केंद्रीय संगठन सचिव के तौर पर रीतेश का योगदान अहम माना जाता है। 'आईआईएमसीएए अवॉर्ड्स','आईआईएमसीएए मेडिकल असिस्टेंट फंड' और 'आईआईएमसीएए स्कॉलरशिप' जैसी पहल के पीछे जो कोर टीम है, उसमें रीतेश भी शामिल हैं। पत्रकारिता के बाहर रीतेश को जबर्दस्त फंडरेजर और शानदार इवेंट मैनेजर के तौर पर भी जाना जाता है।

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इस सर्वे में हुआ खुलासा, दिल्ली छोड़ना चाहते हैं आधे से ज्यादा लोग

ऑनलाइन सर्वे में दिल्ली के निवासियों ने ही हिस्सा लिया था, पूछा गया था एक सवाल, कुछ लोगों ने शुरू कर दी है विकल्प की तलाश

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 06 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 06 November, 2019
Survey

प्रदूषण का खराब स्तर देखते हुए दिल्ली को लोग अब रहने के लिए अलग स्थान का विकल्प तलाश रहे हैं। इस बात का खुलासा यूसी ब्राउजर के सर्वेक्षण में हुआ है। दरअसल, यूसी ब्राउजर ने अपने यूजर्स से इस संदर्भ में एक सवाल पूछा था, जिसमें 67 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि वे प्रदूषण से परेशान होकर यह शहर छोड़ना चाहते हैं। सर्वे के अनुसार, 33 प्रतिशत लोग अभी भी दिल्ली छोड़कर जाने को तैयार नहीं हैं। यूसी ब्राउजर के ऑनलाइन सर्वे में दिल्ली के निवासियों ने ही हिस्सा लिया था। इस सर्वे में कुल 16 हजार 416 लोगों ने वोट दिया, जिसमें से 11 हजार एक ने दिल्ली छोड़ने की मंशा की बात स्वीकारी।

इस सर्वे में सिर्फ यूसी ब्राउजर के यूजर्स ने हिस्सा लिया था। ज्यादातर यूजर्स का कहना था कि उन्होंने विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है और शायद ही अगले साल वे फिर से इस त्रासदी को देखने के लिए दिल्ली में मौजूद होंगे। कुछ लोगों का कहना था कि उन्होंने ट्रांसफर के लिए अर्जी भी डाल दी है।

इसके साथ ही 5 हजार 415 लोगों का कहना था कि वे दिल्ली छोड़कर नहीं जाना चाहते हैं। जो लोग छोड़कर नहीं जाना चाहते, उन्होंने कमेंट भी किए हैं। उनका कहना है कि रोजी-रोटी के चलते वे दिल्ली छोड़ नहीं सकते।

एक यूजर ने कहा कि वह अपने गांव से शहर में पैसे कमाने के लिए आया था और वापस जाकर वह बेरोजगार ही हो जाएगा। अगर कहीं अच्छे रोजगार का अवसर मिले तो वह जरूर सोच सकता है कि प्रदूषण से दूर निकला जाए। गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर के लोग प्रदूषण की मार सह रहे हैं। बढ़ते प्रदूषण के कारण कुछ दिनों पूर्व यहां के स्कूलों में छुट्टी भी कर दी गई थी।

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