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चर्चा में आया ET व TOI में छपा ये विज्ञापन, ABP न्यूज ने की पड़ताल  

देश के दो बड़े अखबार ‘इकनॉमिक टाइम्स’ और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के फ्रंट पेज पर सोमवार को छपा एक विज्ञापन चर्चा का विषय बना हुआ है।

Last Modified:
Monday, 24 May, 2021
Modiji54

देश के दो बड़े अखबार ‘इकनॉमिक टाइम्स’ (ET) और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) के फ्रंट पेज पर सोमवार को छपा एक विज्ञापन चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, इस विज्ञापन में लैंडोमस रियल्टी वेंचर्स Inc नाम की कंपनी ने इन दोनों अखबारों में विज्ञापन देते हुए पीएम मोदी से अपील की है कि वह भारत सरकार की महत्वाकांक्षी नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP) और नॉन एनआईपी में 500 बिलियन डॉलर का निवेश करना चाहती है। लिहाजा वे इसके लिए उन्हें अनुमति दें। 

दरअसल, इस विज्ञापन के जरिए, नरेंद्र मोदी से जो अपील की गई है और जिस प्रकार से कंपनी ने अपनी इच्छा व्यक्त की है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है। इस ऐड के आने के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर सवाल उठाए जाने लगे कि अगर किसी कंपनी को निवेश करना है तो वह सीधे पीएम मोदी से मिलकर या या वाणिज्य मंत्रालय के किसी अन्य उचित प्लेटफॉर्म से इसके लिए संपर्क कर सकती है। इसके लिए अखबार में ऐड देने की जरूरत क्या थी? 

बता दें कि विज्ञापन के जरिए प्रकाशित हुई इस अपील पर लैंडोमस ग्रुप के चेयरमैन के तौर पर प्रदीप कुमार एस का नाम लिखा हुआ है। साथ ही कंपनी का कहना है कि भारत को महामारी मुक्त बनाने के लिए एक ठोस योजना है और वो सरकार के समक्ष योजना पेश करने का अवसर चाहती है।

वहीं, एबीपी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब उसने इस कंपनी के बारे में अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश की तो, एबीपी न्यूज को इसका पता बेंगलुरु का मिला।

रिपोर्ट के मुताबकि, अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर भारत में 500 बिलियन डॉलर का निवेश करने की इच्छुक कंपनी लैंडोमस रियल्टी वेंचर के बेंगलुरु का जो एड्रेस दिया गया है, वहां एबीपी न्यूज को एचआईवी टेस्टिंग लैब मिली है। यानी कंपनी वहां मौजूद ही नहीं है। कंपनी का पता एमजी रोड के पास डिकेंसन रोड में मणिपाल सेंटर का दिया गया है।

एबीपी न्यूज ने जब वहां जाकर इस कंपनी के बारे में पूछताछ की तो जवाब मिला कि यहां पूरे सेंटर में ऐसी कोई कंपनी है ही नहीं है, जिसके बाद एबीपी न्यूज S-415 पहुंचा, जहां किसी और कंपनी का ऑफिस मिला।

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कई बड़ी कंपनियों ने ट्विटर पर विज्ञापन नहीं देने का लिया फैसला, जानें दो बड़ी वजह

ट्विटर से बड़ी संख्या में एंप्लॉयीज को नौकरी से निकाले जाने की आलोचना दुनियाभर में हो रही है। खुद ट्विटर के मालिक अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रोल हो रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 05 November, 2022
Last Modified:
Saturday, 05 November, 2022
ElonMusk784477

ट्विटर की कमान संभालते ही एलन मस्क ने ताबड़तोड़ कई बड़े फैसले लिए, जिसमें बड़ी संख्या में एम्प्लॉयीज की छंटनी भी शामिल है। ग्लोबल स्तर पर बड़ी संख्या में एंप्लॉयीज को नौकरी से हटाए जाने की आलोचना दुनियाभर में हो रही है। खुद ट्विटर के मालिक अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रोल हो रहे हैं। वहीं इस बीच कई बड़ी कंपनियों ने ट्विटर पर विज्ञापन नहीं देने का फैसला लिया है।

बता दें कि बीते गुरुवार को जनरल मिल्स और ऑडी जैसी दिग्गज कंपनियों ने ट्विटर पर विज्ञापन नहीं करने का फैसला किया था। यहां तक कि विज्ञापन खरीदने वाले दिग्गज इंटरपब्लिक ग्रुप और हवास मीडिया ग्रुप की विवेंडी की ऐडवर्टाइजिंग यूनिट ने भी अपने ग्राहकों से मंच पर विज्ञापन रोकने की सिफारिश की थी, लेकिन अब यूनाइटेड एयरलाइंस होल्डिंग्स भी इस कतार में शामिल हो गई है।

कंपनी ने कहा है कि वह अब सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर अपना विज्ञापन नहीं देगी।  

वहीं, कुछ कॉर्पोरेट विज्ञापनदाताओं के समूह ने करीब एक महीने के लिए ट्विटर से दूरी बनाई हुई है, यानि वे भी अब ट्विटर को विज्ञापन नहीं देंगे। इसमें दिग्गज अमेरिकी कंपनियां जनरल मोटर्स, ओरियो निर्माता मोंडेलेज इंटरनेशनल, फाइजर इंक और फोर्ड जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

दरअसल, मस्क के पिछले हफ्ते कंपनी संभालने और कंटेंट मॉडरेशन सहित व्यापक बदलावों की शुरुआत करने के बाद विज्ञापन कंपनियों पर यह तय करने का दबाव बढ़ रहा है कि क्या ट्विटर पर खर्च करना जारी रखा जाए।

दरअसल, इसकी दो बड़ी वजह हैं, पहला यह कि ट्विटर को टेकओवर करने से पहले ट्विटर के नए मालिक एलन मस्क ने विज्ञापन देने वाली कंपनियों से वादा किया था कि वह ट्विटर को ‘फ्री-फॉर-ऑल हेलस्केप’ में बदलने से रोकेंगे। अब ये वादा मस्क के गले का कांटा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा था कि ट्विटर खरीदने का मकसद सिर्फ विज्ञापन से पैसा कमाना नहीं है, बल्कि यह सौदा मानवता की मदद के लिए किया गया है, जिससे उन्हें प्यार है और  वह नहीं चाहते कि यह ‘सभी के लिए मुक्त नरक’ बन जाए, जहां कुछ भी बिना किसी परिणाम के कहा जा सके। उनका मकसद आने वाली सभ्यता को एक कॉमन डिजिटल स्पेस देना है, जहां विभिन्न विचारधारा और विश्वास के लोग किसी भी तरह की हिंसा के बिना स्वस्थ चर्चा कर सकें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि ट्विटर सबसे सम्मानित एडवर्टाइजिंग प्लेटफॉर्म बनना चाहता है।

वहीं दूसरी वजह उनका एक बेहद ही पुराना ट्वीट है, जोकि उन्होंने विज्ञापनों के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए अक्टूबर, 2019 में किया था। ‘I hate advertising.’ मतलब मुझे विज्ञापन से नफरत है।  लिहाजा, मस्क पर अब उन विज्ञापन एजेंसियों को अलग-थलग होने से बचाने का दबाव है, जो ट्विटर के 90% से अधिक रेवेन्यू में योगदान करती हैं

माना जा रहा है कि विज्ञापनदाता ट्विटर से तब तक दूरी बनाए रखना चाहते हैं, जब तक एलन मस्क ट्विटर के लिए एक दिशा स्पष्ट नहीं करते या ट्विटर विज्ञापन एजेंसियों के मामले में क्या फैसले लेंगे इसकी घोषणा नहीं करते हैं, क्योंकि हर तरफ अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।  

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‘IAA’ के इंडिया चैप्टर में यह बड़ी भूमिका निभाएंगे एबीपी नेटवर्क के CEO अविनाश पांडेय

फ्री प्रेस जर्नल ग्रुप के डायरेक्टर अभिषेक करनानी ने उपाध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 September, 2022
Last Modified:
Thursday, 29 September, 2022
Avinash Pandey IAA

‘एबीपी नेटवर्क’ (ABP Network) के सीईओ अविनाश पांडेय को ‘इंटरनेशनल एडवर्टाइजिंग एसोसिएशन’ (IAA) के इंडिया चैप्टर का प्रेजिडेंट चुना गया है। उनका यह चुनाव वर्ष 2022-23 के लिए किया गया है। इसके साथ ही फ्री प्रेस जर्नल ग्रुप के डायरेक्टर अभिषेक करनानी ने उपाध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया है। मीडिया दिग्गज नंदिनी डायस को मानद सचिव जबकि ‘Another Idea’ के जयदीप गांधी को मानद कोषाध्यक्ष के पद पर चुना गया है।

बता दें कि अविनाश पांडेय को मीडिया सेक्टर में काम करने का 26 साल से ज्यादा का अनुभव है। वर्ष 2005 से एबीपी ग्रुप में तमाम भूमिकाएं निभाने के बाद अविनाश पांडेय ने जनवरी 2019 में एबीपी नेटवर्क के सीईओ का पदभार संभाला है। 

‘इंटरनेशनल एडवर्टाइजिंग एसोसिएशन’ (IAA) के इंडिया चैप्टर की मैनेजिंग कमेटी में जिन सदस्यों को चुना गया है, उनमें ‘Hansa Group’ के चेयरमैन श्रीनिवासन स्वामी, ‘मातृभूमि‘ समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर श्रेयम्स कुमार, ‘ग्रुप एम‘ के सीईओ प्रशांत कुमार, ‘इंडियन एक्सप्रेस‘ समूह के डायरेक्टर अनंत गोयनका और ‘देशदूत‘ समूह के डायरेक्टर जनक सारदा शामिल हैं। 

मैनेजिंग कमेटी की पहली बैठक में जिन सदस्यों का सह चुनाव किया गया है, उनमें ‘वायकॉम18’ की हेड (Language content and Kids channels) नीना इलाविया जयपुरिया, ‘हंगामा‘ ग्रुप के चेयरमैन नीरज रॉय, ‘Eros International‘ के सीईओ प्रदीप द्विवेदी, ‘शेमारू एंटरटेनमेंट’ के डायरेक्टर (न्यू प्रोजेक्ट्स) क्रांति गडा और ‘इनाडु’ ग्रुप के डायरेक्टर आई वेंकट का नाम शामिल है। 

प्रबंध समिति में आमंत्रित लोगों में ये नाम शामिल हैं:

: Ramesh Narayan, Founder, Canco Advertising Pvt. Ltd.
: Neena Dasgupta, CEO & Director, Zirca Digital Solutions Pvt. Ltd.
: Rana Barua, Chief Executive Officer, Havas Group India
: Partha Sinha, President, The Times of India Group
: Bhaskar Das
: Mitrajit Bhattacharya, Founder & President, The Horologists
: Sam Balsara, Chairman & Managing Director, Madison Communications Pvt. Ltd.
: Alok Jalan, Managing Director, Laqshya Media Group
: Rahul Johri, President -Business South Asia, ZEE Entertainment Enterprises Ltd.
: Rajeev Beotra, Executive Director, HT Media Ltd.
: Kevin Vaz, Head, Network Entertainment Channels, Disney Star
: Kunal Lalani, Managing Director, Crayons Advertising Pvt Ltd.
: Ashok Venkatramani, Founder, Intelligent Insights Pvt Ltd.
: Rani Reddy, Director, Indira Television Ltd.
: Monica Nayyar Patnaik, Managing Director, Sambad Group

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लोकप्रिय कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव ने विज्ञापनों की दुनिया में कुछ यूं बिखेरा था जलवा

कॉमेडी स्टार राजू श्रीवास्तव ने कुछ विज्ञापनों में अपनी आवाज दी है और कुछ विज्ञापनों में वे खुद सामने आए हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 21 September, 2022
rajusrivastav5215

एक महीने की लंबी लड़ाई के बाद, 21 सितंबर बुधवार को लोकप्रिय कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव का निधन हो गया। वह 58 वर्ष के थे। बता दें कि 10 अगस्त को जिम में वर्कआउट दौरान राजू को दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें एम्स में भर्ती करवाया गया था। यहां उनकी एंजियोप्लास्टी हुई, लेकिन उन्हें कभी होश नहीं आया और बीते 41 दिनों से वेंटिलेटर पर मौत से जंग लड़ते रहे, लेकिन अंत में वह यह जंग हार गए।

राजू श्रीवास्तव के मौत की खबर सामने आने के बाद से ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। हर कोई नम आंखों से राजू को श्रद्धांजलि दे रहा है। 

राजू श्रीवास्तव देश के सबसे लोकप्रिय स्टैंड-अप कॉमेडियन में से एक थे। वह अपेक्षाकृत जल्दी ही स्टैंड-अप दृश्य में आ गए और ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ पर अपनी दिनचर्या को लेकर वह काफी लोकप्रिय होगए। कॉमेडी की दुनिया में शोहरत हासिल करने वाले राजू श्रीवास्तव बॉलीवुड की कई फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। उन्होंने ‘बाजीगर’, ‘मैंने प्यार किया’ और ‘आमदानी अठ्ठनी खर्चा रुपइया’ जैसी बॉलीवुड की कई अन्य फिल्मों में अपनी भूमिका निभाई।

राजू का हर अंदाज, बिल्कुल आम लोगों का था और आम लोग राजू के लतीफ़ों पर तालियां बजाने लगे। यूपी के भैया वाले अंदाज में राजू ने कॉमेडी में कभी अश्लीलता नहीं आने दी और ये हर घर में उनकी पहचान बनाने में सबसे कारगर साबित हुआ।

कॉमेडी स्टार ने कुछ विज्ञापनों में अपनी आवाज दी है और खुद भी सामने आए हैं। हालांकि उनके द्वारा किए विज्ञापन बहुत ही कम थे, लेकिन काफी यादगार और क्रिएटिविटी से भरे हुए थे, जिनमें से कुछ को यहां देख सकते हैं-

स्वच्छ भारत अभियान

राजू अपने सभी किरदारों में डूबकर अदाकारी करते थे और उस किरदार को एक अलग आवाज देते थे। 2014 में प्रचंड जीत के बाद जब केंद्र में भाजपा की अगुवाई में एनडीए की सरकार बनी तो स्वच्छ भारत अभियान के लिए राजू श्रीवास्तव को पीएम मोदी ने नॉमिनेट किया। इसके बाद राजू की लोकप्रियता और जन-अपील की वजह से वह भारत सरकार के स्वच्छता कार्यक्रम ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के एक बेहतरीन एंबेस्डर बन गए।

पेट सफ़ा

राजू श्रीवास्तव के सबसे हालिया विज्ञापनों में से एक आयुर्वेदिक ब्रैंड ‘पेट सफ़ा’ भी था। अपनी विशिष्ट हास्य शैली से वह इस विज्ञापन में कब्ज को दूर करने का प्रयास करते हैं। वह सभी से इसे एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखने और इसे हंसी में न उड़ाने की अपील करते हैं।

हिमरत्न ऑयल

राजू श्रीवास्तव ने आयुर्वेदिक ब्रैंड ‘हिमरत्न ऑयल’ के एक विज्ञापन में अभिनय किया। वह ‘सर जो तेरा चकराए...’ की धुन में तनाव-मुक्त मालिश वाले तेल का प्रचार एक क्रिएटिव जिंगल बजाते हुए करते हैं।

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसी प्रमुख हस्तियों ने राजू श्रीवास्तव के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की और इस दुख की घड़ी में प्रिय कॉमेडियन के परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की।

58 साल के रहे राजू श्रीवास्तव के परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं।

 

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Netflix अब इस तरह के विज्ञापनों पर लगाएगा रोक

इस साल के अंत तक नेटफ्लिक्स का यह सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च किया जाएगा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 07 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 07 September, 2022
netflix

स्ट्रीमिंग सर्विस प्लेटफॉर्म ‘नेटफ्लिक्स’ (Netflix) ने कम प्राइस वाले अपने सब्सक्रिप्शन पर क्रिप्टोकरेंसी और गैंबलिंग के विज्ञापनों पर रोक लगाने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल के अंत तक यह सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च किया जाएगा।

रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘नेटफ्लिक्स’ के इस स्ट्रीमिंग सर्विस का प्राइस केवल सात डॉलर होगा। माना जा रहा है कि इस साल नवंबर की शुरुआत से अमेरिका और कुछ अन्य देशों में लॉन्च किया जाएगा। नेटफ्लिक्स ने विज्ञापनों के लिए सपोर्ट को डेवेलप करने के लिए माइकोसॉफ्ट के साथ टाई-अप किया है।

बता दें कि इससे पहले TikTok के इंफ्लुएंसर्स पर भी क्रिप्टोकरेंसीज का प्रचार करने को लेकर बैन लग चुका है। फेसबुक ने भी क्रिप्टो से जुड़े विज्ञापनों पर कुछ वर्ष पहले रोक लगाई थी, लेकिन बाद में इसे हटा लिया गया था।
  

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‘Walk The Talk Communications’ ने विस्तार की दिशा में कुछ इस तरह बढ़ाए कदम

इस एजेंसी की लीडरशिप टीम में शामिल सभी लोगों को पूर्व में तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने का दशकों का अनुभव है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 25 August, 2022
Last Modified:
Thursday, 25 August, 2022
OOH

कुछ महीनों पहले ही अस्तित्व में आई ‘आउट ऑफ होम’ (OOH) एडवर्टाइजिंग एजेंसी ‘वॉक द टॉक कम्युनिकेशंस प्राइवेट लिमिटेड’ (Walk The Talk Communications Pvt Ltd) ने अपने विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके तहत इस एजेंसी ने पांच बड़े शहरों मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता से अपना परिचालन शुरू किया है। 20 अनुभवी ओओएच प्रोफेशनल्स की टीम इन शहरों में काम कर रही है।

इस नई ओओएच कंपनी के विचार को अमल में लाने वाले निखिल वर्मा का कहना है, ‘जब आप विभिन्न संस्थानों में बहुत लंबे समय तक काम करते हैं, तो आप अनजाने में उन चीजों की लिस्ट बनाते रहते हैं जो आपको सही लगती हैं। समय के साथ आप और बेहतर बनाने के लिए इस लिस्ट को लगातार देखते रहते हैं और अपडेट करते रहते हैं। एक दिन आपको पता चलता है कि आपके पास जो लिस्ट है, वह एक नई यात्रा के लिए शुरुआती बिंदु हो सकती है और आप पूरे दिल और जुनून के साथ उस दिशा में चलना शुरू कर देते हैं।’

इसके साथ ही निखिल वर्मा का कहना है, ’हम सभी ने पिछले कई वर्षों में तमाम संस्थानों की सेवा की है, अब मालिक बनने का समय है। इस एजेंसी का विचार ऐसे संगठन का निर्माण करना है, जहां हर व्यक्ति इसका मालिक हो।’

नई एजेंसी की प्रारंभिक योजना को क्रियान्वित करने में अग्रणी भूमिका निभाने वाले रजत सिकदर का कहना है, ’ हमारा मानना है कि एक खुश व्यक्ति सकारात्मकता फैलाता है और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता है। हम एक ऐसी टीम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो खुश हो।’

एजेंसी की लीडरशिप टीम में शामिल विपुल मेहता का कहना है, ’हमारा फोकस बिजनेस के हर पहलू में हमेशा बुनियादी सिद्धांतों और पारदर्शिता पर रहेगा। यही एक स्वस्थ रिश्ते और आपसी विश्वास की कुंजी है।’ वहीं, लीडरशिप टीम में शामिल हरदीप सिंह का कहना है, ’हमारे सम्मानित क्लाइंट्स की अपेक्षाओं को पूरा करना ही हमारा एकमात्र लक्ष्य नहीं होगा, मैं उम्मीद करता हूं कि हमारी टीम का प्रत्येक सदस्य उन अपेक्षाओं से आगे बढ़कर उन्हें बेहतर अनुभव प्रदान करेगा।’

बता दें कि इस एजेंसी की लीडरशिप टीम में शामिल सभी लोगों को पूर्व में तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने का दशकों का अनुभव है। इस बारे में निखिल वर्मा का कहना है, ’अपनी योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए आपको वित्तीय सहायता की आवश्यकता होती है। मैं भाग्यशाली हूं कि मेरे बहुत प्रिय मित्र मनोज बाजपेयी को बोर्ड में शामिल किया गया, जिन्होंने हमारी परियोजना में विश्वास किया और इसे सपोर्ट देने के लिए सहमत हुए।’

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निजी कंपनियों पर आकाशवाणी व दूरदर्शन का करोड़ों का विज्ञापन शुल्क बकाया

लोकसभा में सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि प्रसार भारती ने बकाया राशि की वसूली की निगरानी के लिए एक तंत्र स्थापित किया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 03 August, 2022
Last Modified:
Wednesday, 03 August, 2022
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इस साल 31 मार्च तक निजी कंपनियों पर आकाशवाणी और दूरदर्शन का 214.24 करोड़ रुपए का विज्ञापन शुल्क बकाया है। यह जानकारी केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में पूछे गए सवालों के जवाब में दी।

लोकसभा में एक लिखित उत्तर में, अनुराग ठाकुर ने बताया कि प्रसार भारती ने बकाया राशि की वसूली की निगरानी के लिए एक तंत्र स्थापित किया है। बकाया देय राशि की वसूली के लिए प्रसार भारती निजी कंपनियों के साथ संपर्क में है और अनुवर्ती कार्रवाई भी करता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए बैंक गारंटी के नकदीकरण और मध्यस्थता जैसे उपायों का भी सहारा लिया जाता है।

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पिछले 3 वर्षों में सरकार ने मीडिया में विज्ञापनों पर कितना किया खर्च, जानें यहां

केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों में मीडिया में विज्ञापनों पर 911.17 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

Last Modified:
Tuesday, 26 July, 2022
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केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों में मीडिया में विज्ञापनों पर 911.17 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्य सभा में गुरुवार को यह जानकारी दी है।

सूचना-प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि सरकार ने पिछले तीन वर्षों में अखबारों, टेलीविजन चैनलों और वेबसाइटों में विज्ञापनों पर 911.17 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। उन्होंने एक प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 से जून 2022 तक केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा विज्ञापनों का भुगतान किया गया था।

अखबारों में विज्ञापन पर खर्च:

अनुराग ठाकुर ने बताया कि सरकार ने 2019-20 में 5,326 अखबारों में विज्ञापनों पर 295.05 करोड़ रुपए, 2020-21 में 5,210 अखबारों में विज्ञापनों पर 197.49 करोड़ रुपए, 2021-22 में 6,224 अखबारों में विज्ञापनों पर 179.04 करोड़ रुपए और 2022-23 में जून तक 1,529 अखबारों में विज्ञापनों पर 19.25 करोड़ रुपए खर्च किए।

टीवी चैनलों पर विज्ञापन खर्च:

सूचना-प्रसारण मंत्री के मुताबिक, इसी अवधि के दौरान, सरकार ने 2019-20 में 270 टेलीविजन (टीवी) चैनलों में विज्ञापनों पर 98.69 करोड़ रुपए, 2020-21 में 318 टीवी चैनलों में विज्ञापनों पर 69.81 करोड़ रुपए, 2021-22 में 265  न्यूज चैनलों में विज्ञापनों पर 29.3 करोड़ रुपए और 2022-23 में जून तक 99 टीवी चैनलों में विज्ञापनों पर 1.96 करोड़ रुपए खर्च किए।

इंटरनेट वेबसाइटों पर खर्च किया गया विज्ञापन:  

मंत्री ने कांग्रेस सदस्य दिग्विजय सिंह के एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि वेब पोर्टल पर विज्ञापनों पर सरकार का खर्च 2019-20 में 54 वेबसाइटों पर 9.35 करोड़ रुपए, 2020-21 में 72 वेबसाइटों पर विज्ञापनों पर 7.43 करोड़ रुपए, 2021-22 में 18 वेबसाइटों में विज्ञापनों पर 1.83 करोड़ रुपए और 2022-23 में जून तक 30 वेबसाइटों पर 1.97 करोड़ रुपए था।

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ASCI की रिपोर्ट में खुलासा, इस तरह के विज्ञापनों में मिली सबसे अधिक शिकायतें

विज्ञापनों पर निगरानी रखने वाली संस्था एडवर्टाइजिंग एंड स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने साल 2021-22 की रिपोर्ट जारी की है।

Last Modified:
Thursday, 30 June, 2022
ASCI

विज्ञापनों पर निगरानी रखने वाली संस्था एडवर्टाइजिंग एंड स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने साल 2021-22 की रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे बड़ी समस्या विज्ञापन में सही तस्वीर न देने की रही है। ‘आपत्तिजनक या भ्रामक’ विज्ञापनों में से सबसे ज्यादा यानी 33 प्रतिशत शिक्षा क्षेत्र से जुड़े पाए गए, जो मुख्य रूप से एडटेक उद्यमों से संबंधित थे।

बाकी आपत्ति वाले विज्ञापनों में हेल्थकेयर की 16% और पर्सनल केयर की 11% हिस्सेदारी रही। क्रिप्टो का 8-8% हिस्सा वर्चुअल डिजिटल असेट कंपनियों, ऑनलाइन रियल मनी गेमिंग और फूड एंड बेवरेज कंपनियों के आपत्तिजनक विज्ञापनों का रहा।

इस तरह के विज्ञापन तीन श्रेणियों से संबंधित थे- वे जिनके बारें में दर्शकों से शिकायतें प्राप्त हुईं, वे जिन्हें उद्योग द्वारा चिन्हित किया गया और वे जिनके बारे में ASCI ने स्वत: संज्ञान लिया।

रिपोर्ट के अनुसार, ASCI ने प्रिंट, डिजिटल और टेलीविजन में 5,532 विज्ञापनों की निगरानी की और और उसी आधार पर ये निष्कर्ष निकाला है। 2020-2021 की तुलना में 62 प्रतिशत अधिक विज्ञापनों की निगरानी की गई, जिसके बाद शिकायतों में 25 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

ASCI के मुताबिक 39% विज्ञापनों को एडवर्टाइजर ने कंटेस्ट नहीं किया, यानि आपत्तियों पर कोई एतराज नहीं किया। जबकि 55% विज्ञापनों पर उठाए गए सवाल जायज पाए गए। 4% विज्ञापनों के खिलाफ आई शिकायतों में कोई दम नहीं मिला।

ASCI के मुताबिक उसके नियमों पर खरा उतरने के लिए 5532 विज्ञापनों में से 94% ऐसे पाए गए, जिनमें सुधार की जरूरत पायी गई।

ASCI ने डिजिटल परिदृश्य में विज्ञापन को लगातार निगरानी में रखकर अपने दायरे को व्यापक बनाया। निगरानी किए गए विज्ञापनों में से लगभग 48 फीसदी डिजिटल माध्यम से संबंधित थे। पिछले वर्ष प्रभावशाली दिशा-निर्देशों के लागू होने के साथ ही साथ, प्रभावशाली लोगों के खिलाफ शिकायतें, कुल शिकायतों की 29 फीसदी थी।

वहीं, मशहूर हस्तियों वाले विज्ञापनों में भ्रामक दावों की शिकायतों में 41 फीसदी की वृद्धि देखी गई, जिनमें से 92 फीसदी को ASCI के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए पाया गया।

शिक्षा क्षेत्र में नियमों के उल्लंघन में हुई वृद्धि को देखते हुए, ASCI ने एडटेक कंपनियों के सभी विज्ञापनों पर एक अलग अध्ययन की योजना बनाई है।

इसके बारे में बताते हुए ASCI की सीईओ मनीषा कपूर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ‘शिक्षा हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र रहा है और एक चीज जिसे हमें इस संदर्भ में देखने की जरूरत है, वह यह है कि कुछ अन्य श्रेणियों या ब्रैंड्स के विपरीत शिक्षा इस देश में हर एक उपभोक्ता के संपर्क में आती है।’

उन्होने कहा, ‘यह विशेष रूप से एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें काफी अधिक चिंताएं शामिल हैं और अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण है।’ उन्होंने बताया कि एडटेक कंपनियों के पास बड़े-बड़े बजट हैं, वे कई प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद हैं और ये नई कंपनियां स्थानीय और क्षेत्रीय दर्शकों की सेवा कर रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘नौकरी की गारंटी और कुछ खास अंक या टेस्ट्स जैसा वादा करने वाली चीजें ठीक नहीं हैं। हां, हम एडटेक के साथ जुड़ी एक चिंता को देखते हैं और इसलिए हम एक ऐसे अध्ययन पर काम कर रहे हैं, जो सभी एडटेक विज्ञापनों का ऑडिट करेगा। यह अध्ययन इनकी थीम (विषय वस्तु) और भ्रामक दावों का विश्लेषण करेगा।’

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ASCI ने इस तकनीक के जरिए की डिजिटल पर भ्रामक कंटेंट वाले ऐड की निगरानी

ASCI ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और व्यक्तिगत देखभाल जैसे क्षेत्रों को डिजिटल श्रेणी में शीर्ष तीन उल्लंघनकारी श्रेणियों के रूप में पाया गया है।

Last Modified:
Wednesday, 29 June, 2022
ASCI

भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ASCI) ने डिजिटल मंचों पर भ्रामक सामग्री संबंधी विज्ञापनों की निगरानी के लिए ‘डिजिटल निगरानी’ प्रणाली स्थापित की है। ASCI इसके लिए कृत्रिम मेधा (AI) आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग कर रहा है। ASCI ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अपनी वार्षिक शिकायत रिपोर्ट में यह जानकारी दी।

नियामक ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और व्यक्तिगत देखभाल जैसे क्षेत्रों को डिजिटल श्रेणी में शीर्ष तीन उल्लंघनकारी श्रेणियों के रूप में पाया गया है।

ASCI ने कहा कि विज्ञापन अब मोबाइल जैसी व्यक्तिगत स्क्रीन पर तेजी से दर्शाये जा रहे हैं, जिसके कारण नियामकों के लिए विज्ञापनों के पैमाने और प्रभाव को समझना मुश्किल हो गया है।

नियामक ने कहा कि विज्ञापन बनाने वाली इकाइयों की संख्या में जोरदार वृद्धि हुई है और एक अनुमान के अनुसार, एक व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 6,000 से 10,000 विज्ञापनों के संपर्क में आता है।

ASCI की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं महासचिव मनीषा कपूर ने कहा, ‘डिजिटल दुनिया में बहुत कुछ हो रहा है। हम निगरानी करने के लिए AI तकनीक की मदद ले रहे हैं।’

रिपोर्ट के अनुसार, ASCI को बीते वित्त वर्ष के दौरान प्रिंट, डिजिटल और टेलीविजन समेत सभी माध्यमों से 7,631 शिकायतें मिलीं और इनमे से 5,532 का निपटान किया गया। डिजिटल क्षेत्र पर सबसे अधिक ध्यान देने के साथ ASCI की अनुपालन दर 94 प्रतिशत रही।

ASCI ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान लगभग 75 प्रतिशत शिकायतों को खुद संज्ञान लिया, जबकि 21 प्रतिशत उपभोक्ता और शेष उद्योग जगत तथा सरकार की तरफ से मिलीं।

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’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ ने BARC की इस प्रणाली का किया समर्थन, दिया ये बयान

यह स्टेटमेंट इंडस्ट्री के कुछ स्टेक होल्डर्स की उन मांगों के मद्देनजर आया है, जिनमें वास्तविक व्युअरशिप से लैंडिंग पृष्ठ डेटा को अलग करने की आवश्यकता बताई गई है।

Last Modified:
Tuesday, 21 June, 2022
ISA

एडवर्टाइजर्स की प्रमुख संस्था ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ (ISA) ने देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्टर्स ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) के लैंडिंग पेज की ‘एल्गोरिथम’   (algorithm) का समर्थन किया है। बता दें कि बार्क इंडिया के स्टेक होल्डर्स (stakeholders) में ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ भी शामिल है।

इस बारे में ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ की ओर से जारी स्टेटमेंट में कहा गया है,  ‘बार्क ने माप विज्ञान (measurement science) में सुधार लाने और बाहरी कारकों के दर्शकों की संख्या पर प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से एक डेटा सत्यापन गुणवत्ता पहल (Data Validation Quality Initiative) शुरू की है।’

इस स्टेटमेंट में कहा गया है कि बार्क इंडिया ने अपने डेटा सत्यापन पद्धति में एक एल्गोरिथम पेश किया है, ताकि सभी चैनल्स पर जबरन व्युअरशिप डेटा को लेकर लैंडिंग पृष्ठ के प्रभाव को दूर किया जा सके।

’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ के अनुसार, यह तरीका सभी शैलियों में बेहतर परिणाम देने के लिए सीधे अनुमानित आंकड़ों (inferential statistics) का उपयोग करता है। इसे बार्क की टेक्निकल कमेटी द्वारा सत्यापित और प्रमाणित किया गया है।

इस बारे में ’इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवर्टाइजर्स’ के चेयरमैन सुनील कटारिया का कहना है, ’ बार्क की एल्गोरिथम बहुत उच्च सफलता दर वाले लैंडिंग पृष्ठों का पता लगाती है और एक बार पता चलने के बाद, यह एल्गोरिथम जबर्दस्ती थोपी गई व्युअरशिप (forced viewership) को हटाने का प्रयास करती है और स्वैच्छिक व्युअरशिप (voluntary viewership) उस चैनल के लिए वास्तविक व्युअरशिप के रूप में गिनी जाती है। यह एक सही तरीका है और लैंडिंग पेज व्युअरशिप के मुद्दे पर बार्क द्वारा अपनाए जा रहे इस तरीके पर तमाम एडवर्टाइजर्स एकमत हैं।’

बता दें कि यह स्टेटमेंट इंडस्ट्री के कुछ स्टेक होल्डर्स की उन मांगों के मद्देनजर आया है, जिनमें वास्तविक व्युअरशिप से लैंडिंग पृष्ठ डेटा को अलग करने की आवश्यकता बताई गई है। इन स्टेक होल्डर्स का मानना ​​है कि लैंडिंग पेज टीवी चैनल्स की लोकप्रियता की गलत तस्वीर प्रस्तुत करता है।

लैंडिंग पृष्ठ के मुद्दे पर टीवी न्यूज इंडस्ट्री की अलग-अलग राय है। कुछ प्लेयर्स ने दावा किया है कि यह सिर्फ उन मीडिया कंपनियों के पक्ष में है, जिनके पास काफी पैसा है, जबकि कुछ का दावा है कि लैंडिंग पृष्ठ पूरी तरह से कानूनी है।

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