अनंत विजय राजेन्द्र यादव के ना होने का मतलब और उनके ना होने की कमी इस वक्त हिंदी साहित्य जगत के अलावा हिंदी समाज को भी समझ में आ रही है। इस वक्त देश में जो हालात हैं या साहित्य में जिस तरह की गति व्याप्त है, उस पर कोई भी बड़ा लेखक हस्तक्षेप करने से कतरा रहा है। जो एक-दो लेखक अपनी राय सार्वजनिक रूप से व्यक्त करते भी हैं, उनकी साख
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समाचार4मीडिया ब्यूरो