जयंती विशेष: जब कई संपादकों का मजाक उड़ाया करते थे राजेन्द्र यादव

अनंत विजय राजेन्द्र यादव के ना होने का मतलब और उनके ना होने की कमी इस वक्त हिंदी साहित्य जगत के अलावा हिंदी समाज को भी समझ में आ रही है। इस वक्त देश में जो हालात हैं या साहित्य में जिस तरह की गति व्याप्त है, उस पर कोई भी बड़ा लेखक हस्तक्षेप करने से कतरा रहा है। जो एक-दो लेखक अपनी राय सार्वजनिक रूप से व्यक्त करते भी हैं, उनकी साख

Last Modified:
Sunday, 28 August, 2016
Rajendra-Yadav1


अनंत विजय राजेन्द्र यादव के ना होने का मतलब और उनके ना होने की कमी इस वक्त हिंदी साहित्य जगत के अलावा हिंदी समाज को भी समझ में आ रही है। इस वक्त दे...
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