मोदी के राज में अखबारों पर कैसे कसा शिकंजा, बताया वरिष्ठ पत्रकार हरिशंकर व्यास ने

‘देश के हर प्रकाशक-संपादक को हर महीने सरकारी दफ्तर में टोकन लेकर अखबार की फाइल सम्मिट करनी पड़ रही है। यदि वह वहां पटाकर चला या रिश्वत दी तो ठीक, नहीं तो भारत सरकार के दिल्ली के डीएवीपी दफ्तर में रिपोर्ट पहुंचेगी कि पिछले महीने अखबार पूरे नहीं थे या सही नहीं छपे। इस रिपोर्ट से फिर तय होगा कि इस अखबार को आगे विज्ञापन

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 08 November, 2016
Last Modified:
Tuesday, 08 November, 2016
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‘देश के हर प्रकाशक-संपादक को हर महीने सरकारी दफ्तर में टोकन लेकर अखबार की फाइल सम्मिट करनी पड़ रही है। यदि वह वहां पटाकर चला या रिश्वत दी तो ठीक, नहीं...
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