‘यदि पर्रिकर-जैसे लोग चार साल पहले ही (सत्तारुढ़ होते ही) अपने घोषणा-पत्र पर ईमानदारी से काम शुरु कर देते तो आज उन्हें यह दिन देखना नहीं पड़ता। अब गोआ के चुनाव सिर पर हैं, इसलिए अमित शाह और पर्रिकर अपने सिद्धांत की दुम दबाकर रखें, यह जरुरी है।’ हिंदी दैनिक अखबार नया इंडिया में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहना है वरिष्ठ पत
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो