‘भारत के कई हिंदू और आदिवासी लोग पशुबलि के साथ-साथ नरबलि भी देते हैं। इतना घिनौना काम धर्म के नाम पर किया जाता है। असम और नेपाल के हिंदू मंदिरों को रक्त से सना देखकर मैं सोचता हूं कि ये मंदिर हैं या कत्लखाने हैं? ’ हिंदी दैनिक अखबार नया इंडिया में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहना है वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक क
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समाचार4मीडिया ब्यूरो