उतरने लगा लेखक संघों के मुखौटे का रंग: अनंत विजय

बचे-खुचे कम्युनिस्ट लेखक संघों के चेहरे पर लगा प्रगतिशीलता के मुखौटे का रंग बदरंग हो गया है। फासीवाद फासीवाद चिल्लानेवाले स्वयं फासीवादी मानसिकता की जकड़न में हैं।

Last Modified:
Monday, 02 February, 2026
anantvijay


अनंत विजय, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक। हमारे देश में कम्युनिस्ट पार्टियों ने अपने बौद्धिक प्रकोष्ठ बनाए थे। उनका नाम लेखक संगठन रखा था। इन लेखक संगठनों को...
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