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‘पिछले तीन वर्षों में सबसे अच्छा माना जाएगा 2022, मीडिया के लिए हलचल भरा रहेगा नया साल’

समय का समकाल अगर कुछ है तो वह अनिश्चितता है। उसी अनिश्चितता के गर्भ में उम्मीद, संभावना और आशंका होती हैं। जो बीता हुआ समय है, वह संदर्भ, संदेश और सबक के काम आता है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago

राणा यशवंत।।

समय का समकाल अगर कुछ है तो वह अनिश्चितता है। उसी अनिश्चितता के गर्भ में उम्मीद, संभावना और आशंका होती हैं। जो बीता हुआ समय है, वह संदर्भ, संदेश और सबक के काम आता है। उसके पास घटित चीजें होती हैं-अच्छी या बुरी। 2022 पिछले तीन वर्षों में सबसे अच्छा माना जाएगा। 2020 और 2021 में कोरोना का कहर देश और दुनिया पर जिस तरह से टूटा, उसने सब कुछ उलट-पलटकर रख दिया। लेकिन उन्हीं दो वर्षों के महासंकट के भीतर दुनिया ने अपने लिए कुछ नए उपाय-उपकरण खोजे, जिनका 2022 ने भरपूर इस्तेमाल किया।

सोशल डिस्टेंसिंग के कारण डिस्टेंट सोशलाइजेशन शुरू हुआ। बंद सिनेमाघरों की जगह ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने ले ली और वेब सीरीज बड़ी तादाद में बनने लगीं। आज मोशन पिक्चर्स से कहीं अधिक पैसा वेब सीरीज में खर्च हो रहा है। उस कंटेंट का कंजम्पशन बढ़ा है। न्यूज चैनल्स की ओबी वैन और लाइव यू की जगह जूम और स्काइप जैसे ऐप से काम चलने लगा। लोग जहां थे, वहीं से वे टीवी स्क्रीन पर जुड़ने लगे सिर्फ अपने मोबाइल के जरिये।

अखबारों ने सब्स्क्रिप्शन बेस्ड पोर्टल और ऐप के जरिये खुद को नए तरीके से बाजार में बनाए रखने और बेहतरी की गुंजाइश निकालने के प्रयोग शुरू किए। सोनी लाइव, जी-5, शेयरचैट, डेलीहंट जैसे कंटेंट एग्रीगेटर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने नई ऊंचाई हासिल की। जो सबसे महत्वपूर्ण बात है वो ये कि यूटूयबर्स और सोशल मीडिया एंफ्लुएंसर्स की एक नई जमात सामने आई है। आम लोगों को स्टारडम मिलने लगा और इसके लिए किसी इंडस्ट्री या ब्रेक की जरूरत नहीं थी। वे अपना कंटेंट बनाने और सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर डालने लगे। लोग उनको पसंद करते गए और धीरे-धीरे वे लोकप्रियता हासिल करते चले गए। 2022 इन सब के लिहाज से अब तक का बेहतरीन साल रहा।

देश की राजनीति पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक सक्रिय रही। जाहिर है कि मीडिया भी रहा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी ने लगातार दो बार सरकार बनाकर न सिर्फ रिवाज तोड़ा, बल्कि उसका चुनाव प्रबंधन और नेतृत्व पारंपरिक चुनावी रणनीति पर चलने वाले दलों को रौंदता दिखने लगा। गुजरात की जीत भी उसी की ताजा कड़ी रही। मगर आम आदमी पार्टी ने पंजाब में सरकार बनाकर और गुजरात के चुनावों में 13 फीसद वोट लेकर अपने लिए 2024 की संभावनाएं काफी मजबूत कर लीं। यह भी साफ हो गया कि केजरीवाल कांग्रेस के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।

बहुत संभव है कि अगले आम चुनावों में कांग्रेस की हालत आम आदमी पार्टी के चलते और लचर हो जाए। मीडिया के लिए यही नए साल का प्रस्थान बिंदु होगा। अगले साल आधा दर्जन से अधिक राज्यों में चुनाव हैं और उनमें राजस्थान, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे बड़े राज्य भी हैं, जो 2024 की पूर्वपीठिका तैयार करेंगे। भारत जी-20 की मेजबानी करेगा। इसके चलते भी साल भर आयोजन और जलसों का दौर चलेगा। मीडिया के लिए नया साल इस लिहाज से हलचल भरा रहेगा।

सोशल मीडिया का दायरा और बढ़ेगा। 5-जी का विस्तार जैसे-जैसे होगा, एक नई तरह की क्रांति देखने को मिलेगी। मगर एक बड़े खतरे की आहट आने लगी है और डर इस बात का है कि फिर से 2020-21 वाली स्थिति न पैदा हो जाए। चीन में कोरोना का फिर से विस्फोट हुआ है। बेहिसाब मौतें हो रही हैं। शव दफनाने के लिए दो-दो हजार की लाइन है। अगले 90 दिनों के भीतर 60 फीसदी चीन के कोरोना पॉजिटिव होने की आशंका है। अमेरिका, जापान, ब्राजील, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में कोरोना मरीजों की तादाद बढ़ रही है। ऐसे में भारत बचा रहेगा, यह ‘ऊपरवाला’ ही बता सकता है। खबरों की दुनिया में कोरोना का खात्मा ही हो जाए, यही हम सबकी कामना होगी। 2023 मीडिया और देश-दुनिया के लिहाज से ट्रैक ऑफ ईयर साबित हो, यह जरूरी है।

(यह लेखक के निजी विचार हैं। लेखक ‘इंडिया न्यूज’ में मैनेजिंग एडिटर हैं।)


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