‘जब डॉ. वेद प्रताप वैदिक के उस फोन के मायने नहीं समझा और स्टोरी से चूक गया...’

संबंधों को कितनी तरजीह देते थे, इसका उदाहरण ‘नया इंडिया’ अखबार है। हरिशंकर व्यास के साथ अपने संबंधों के चलते ही वह उनके लिए नियमित तौर पर कॉलम लिखते रहे।

Last Modified:
Tuesday, 14 March, 2023
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अभिषेक मेहरोत्रा, संपादक, बिजनेस वर्ल्ड हिंदी ।। वैदिक जी नहीं रहे, उनको मैं ‘वैदिक जी’ से ही संबोधित करता था। उनसे संबंध करीब डेढ़ दशक...
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