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क्यों खास रहा DD का शो ‘मैं कुछ भी कर सकती हूं’
लैंगिक समानता, परिवार नियोजन, हिंसा तथा स्वास्थ्य जैसे विषयों पर बातचीत शुरू करने में सफल रहा है शो
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
दूरदर्शन के प्रमुख शो में शुमार ‘मैं कुछ भी कर सकती हूं’(MKBKSH) ने पांच वर्षों के भीतर अपने तीन सीजन के दौरान 183 एपिसोड पूरे कर लिए हैं। यह शो लैंगिक समानता, परिवार नियोजन, हिंसा तथा स्वास्थ्य जैसे विषयों पर बातचीत शुरू करने में सफल रहा है। शो का निर्माण राष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PFI) द्वारा किया गया है। सीजन 3 में इसने सरकार के फोकस के दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों को उठाया। इनमें पहला, बेहतर स्वास्थ्य के लिए साफ-सफाई और स्वच्छता को बढ़ावा देना और दूसरा, दंपत्ति व युवाओं को उनके प्रजनन स्वास्थ्य और परिवार नियोजन से संबंधित विकल्प अपनाने के लिए सशक्त बनाना शामिल है।
शो को दूरदर्शन के राष्ट्रीय और 14 क्षेत्रीय चैनलों और देशभर के 216 ऑल इंडिया रेडियो स्टेशनों के माध्यम से हिंदी और 12 भाषाओं में प्रसारित किया गया। तीन सीजन में दर्शकों की ओर से 20 लाख से अधिक कॉल शो के इंटरैक्टिव वॉइस रिस्पांस सिस्टम (आईवीआरएस) को मिले। इस शो के प्रभावों का मूल्यांकन स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा किया गया है।
शो की नायिका डॉ. स्नेहा माथुर की रील लाइफ, जिसमें वो सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ती है, से प्रेरित होकर वास्तविक जीवन की कई कहानियों में शो का प्रभाव दिखता है। मध्य प्रदेश के नयागांव की 21 वर्षीय लाडकुंवर कुशवाहा कॉलेज से स्नातक करने वाली गांव की पहली लड़की बनी। इस कार्यक्रम ने मध्य प्रदेश के छतरपुर में पुरुषों के एक समूह को परिवार नियोजन अपनाने और अपनी पत्नी के साथ घर की जिम्मेदारियों को साझा करने के लिए प्रेरित किया। बिहार में गया की निरमा देवी ने अपने पति को परिवार नियोजन अपनाने के लिए राजी किया और अब अपने समुदाय में वो परिवार नियोजन चैंपियन बन गई हैं।
शो के निर्माता व प्रसिद्ध फिल्म और थिएटर निर्देशक फिरोज अब्बास खान कहते हैं, ‘पिछले पांच सालों में हमने जिस तरह के प्रभाव को देखा है, उसकी मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था। मैं एक उच्च गुणवत्ता वाला शो बनाना चाहता था जो बिना प्रचार के महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर प्रभावी ढंग से संवाद कर सके। तीन सीजन के दौरान यह शो देश भर में महिलाओं के लिए एक सशक्त नारा बन गया है। इससे मुझे बहुत खुशी मिलती है कि शो के पात्र घरेलू नाम बन गए हैं और लोगों ने शो के संदेश और भावना को आत्मसात कर लिया है।’
पीएफआई की कार्यकारी निदेशक पूनम मुत्तरेजा कहती हैं, 'विश्व स्तर पर माना जाता है कि सिर्फ सूचना से व्यक्ति या समुदाय के स्तर पर व्यवहार में बदलाव नहीं आता है। हमने इस शो को एक ऐसे कार्यक्रम के तौर पर बनाया, जो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच कर सकारात्मक भूमिका के माध्यम से लोगों के जीवन की कहानियों को बदल दे। इस शो ने भारी संख्या में दर्शकों से लोकप्रियता हासिल की है। इस यात्रा में, हमें दूरदर्शन का पूरा समर्थन मिला है, जिन्होंने एक ऐसे शो की आवश्यकता को पहचाना और इसे देश के सबसे दूरस्थ हिस्सों में ले जाने में हमारा समर्थन किया।‘
इस शो को शबाना आजमी, शर्मिला टैगोर, सोहा अली खान और फरहान अख्तर जैसी कई फिल्मी हस्तियों ने समर्थन दिया है। शो के पहले सीजन में 52 एपिसोड शामिल थे, जिसमें बाल विवाह, जन्म के समय लिंग चयन और लैंगिक भेदभाव जैसे मुद्दे थे। 79 एपिसोड का दूसरा सीज़न युवाओं और किशोरों पर केंद्रित था। तीसरा सीजन स्वच्छता और परिवार नियोजन जैसे मुद्दों पर बात करता है और हाल ही में इसके 52 एपिसोड पूरे हुए है। शो के तीसरे सीजन का निर्माण आरईसी फाउंडेशन और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) के सहयोग से किया गया था।
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