लोन के लिए अब आपको बैंक के चक्कर नहीं काटने होंगे। यानी अब सिर्फ एक मोबाइल ऐप और लोन हाजिर। बेंगलुरु स्थित एक स्टार्टअप कंपनी मनीटैप ने ऐप आधारित क्रेडिट सेवा शुरू की है।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
लोन के लिए अब आपको बैंक के चक्कर नहीं काटने होंगे। यानी अब सिर्फ एक मोबाइल ऐप और लोन हाजिर। बेंगलुरु स्थित एक स्टार्टअप कंपनी मनीटैप ने ऐप आधारित क्रेडिट सेवा शुरू की है। इस सुविधा के जरिए ग्राहक 3,000 रुपए से लेकर 5 लाख रुपए तक का कर्ज ले सकेंगे। मनीटैप ने इसके लिए बैंकों से गठजोड़ किया है।
अभी तक क्रेडिट सेवा केवल व्यापारियों के लिए ही उपलब्ध थी, अब वह ग्राहकों के लिए भी खोल दी गई है। ‘क्रेडिट लाइन’ का मतलब है कि बैंक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क लिए 5 लाख रुपए तक के ऋण प्राप्त करने की लिमिट प्रदान करता है।
इस लोन को प्राप्त करने के लिए आपको अपने ‘मनीटैप ऐप’ पर दिए बटन की सहायता से 3000 रुपए से लेकर 5 लाख रुपए तक का लोन प्राप्त कर सकते हैं और इसके भुगतान के लिए 2 महीने की आसान किश्तों से लेकर 3 साल तक का समय चुन सकते हैं। लिए गए लोन पर 1.25 प्रतिशत की न्यूनतम मासिक ब्याज दर लगेगी। लिए गए लोन की समस्त किश्तों का भुगतान हो जाने पर क्रेडिट लिमिट एक फिर शुरू हो जाएगी।
आपको ऐप डाउनलोड करने के बाद अपना पैन, इनकम जैसी डिटेल देनी होती है और एक दो दिन में आपको मिल जाएगी आपकी क्रेडिट लिमिट। यह ऐप सुरक्षात्मक तरीके से बैंक के साथ मिलकर कार्य करती है।
इसके साथ ही आपको ऐप्लिकेशन सेट-अप के लिए 499 पल्स टैक्स फीस बैंक को देना होगा। ईएमआई लौटाने के बाद आपका क्रेडिट लिमिट वापस उतना ही हो जाता है।
कोई भी सैलरी प्राप्त करने वाला कर्मचारी दिए गए दिशा निर्देशों का पालन कर और अपने बैंक की जानकारी प्रदान कर कुछ ही मिनटों में इस फ्री एन्ड्रॉयड ऐप को डाउनलोड कर सकता है।
समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन ChatGPT के जवाबों को प्रभावित नहीं करेंगे। Ads पर ‘Sponsored’ लेबल होगा और उन्हें सामान्य जवाबों से अलग दिखाया जाएगा।
by
Samachar4media Bureau
ओपनएआई (OpenAI) ने भारत के कुछ चैटजीपीटी (ChatGPT) यूजर्स को ईमेल भेजकर विज्ञापन से जुड़ी प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव की जानकारी दी है। इससे संकेत मिले हैं कि आने वाले समय में भारत में भी ChatGPT पर विज्ञापन दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, कंपनी ने अभी भारत में विज्ञापन शुरू करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
ईमेल में ओपनएआई ने बताया कि ChatGPT पर विज्ञापन कैसे काम करेंगे और यूजर्स के पास उन्हें नियंत्रित करने के लिए क्या विकल्प होंगे। कंपनी के मुताबिक, Free और Go प्लान इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को विज्ञापन दिखाई दे सकते हैं। वहीं Plus, Pro, Enterprise, Business और Education प्लान के यूजर्स को विज्ञापन नहीं दिखेंगे।
भारत में ChatGPT Go प्लान की कीमत 399 रुपये प्रति माह और ChatGPT Plus की कीमत 1,999 रुपये प्रति माह बताई गई है। ओपनएआई पहले ही अमेरिका में ChatGPT पर विज्ञापन दिखा रहा है।
कंपनी ने ब्रिटेन, मैक्सिको, ब्राजील, जापान और दक्षिण कोरिया में भी विज्ञापन का विस्तार किया है। वहीं न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में विज्ञापनों की टेस्टिंग चल रही है। भारत को अभी आधिकारिक तौर पर इस सूची में शामिल नहीं किया गया है।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापन ChatGPT के जवाबों को प्रभावित नहीं करेंगे। Ads पर ‘Sponsored’ लेबल होगा और उन्हें सामान्य जवाबों से अलग दिखाया जाएगा। ओपनएआई के अनुसार, विज्ञापन को यूजर के लिए प्रासंगिक बनाने के लिए ChatGPT में मौजूद जानकारी, पिछली विज्ञापन गतिविधियों और बातचीत के संदर्भ का इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि, विज्ञापनदाताओं को यूजर्स की चैट, चैट हिस्ट्री, मेमोरी या निजी जानकारी नहीं दी जाएगी। उन्हें केवल विज्ञापन के व्यू और क्लिक जैसी समेकित जानकारी मिलेगी।
गूगल (Google) ने Gemini 3.7 Flash लॉन्च किया है। नया AI मॉडल कोडिंग, सॉफ्टवेयर टूल्स और कई कामों को खुद करने वाले AI सिस्टम के लिए बनाया गया है।
by
Samachar4media Bureau
गूगल (Google) ने अपना नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल Gemini 3.7 Flash लॉन्च किया है। कंपनी ने इसे खास तौर पर सॉफ्टवेयर कोडिंग और ऐसे बिजनेस कामों के लिए तैयार किया है, जिन्हें AI कम इंसानी मदद के साथ खुद पूरा कर सके।
Gemini 3.7 Flash को कारोबारियों के लिए कम कीमत वाला विकल्प बताया जा रहा है। इसकी मदद से ऐसे AI सिस्टम बनाए जा सकते हैं, जो किसी काम की योजना तैयार करने, सॉफ्टवेयर टूल्स का इस्तेमाल करने और कई चरणों वाले काम को खुद पूरा करने में सक्षम हों।
कोडिंग में बेहतर प्रदर्शन
गूगल के मुताबिक, नया मॉडल पिछले मॉडल की तुलना में कोडिंग से जुड़े कामों में बेहतर है। इसमें सॉफ्टवेयर की गलतियां ढूंढना, समस्याओं को ठीक करना और इस्तेमाल के लिए तैयार कोड तैयार करना शामिल है।
खास बात यह है कि गूगल ने Gemini 3.7 Flash को अपने पिछले मॉडल Gemini 3.6 Flash के लॉन्च के सिर्फ तीन हफ्ते बाद पेश किया है। इससे AI मॉडल के क्षेत्र में कंपनियों के बीच चल रही तेज प्रतिस्पर्धा का अंदाजा लगाया जा सकता है।
आधी कीमत में मिलेगा मॉडल
गूगल ने Gemini 3.7 Flash को अपनाने के लिए शुरुआती कीमत भी कम रखी है। 2026 के अंत तक इसकी कीमत प्रति 10 लाख इनपुट टोकन 0.75 डॉलर और प्रति 10 लाख आउटपुट टोकन 3.75 डॉलर होगी। यह Gemini 3.6 Flash की शुरुआती कीमत से करीब आधी है।
Gemini 3.7 Flash को गूगल की सब्सक्रिप्शन आधारित AI एजेंट सर्विस Gemini Spark में भी तुरंत उपलब्ध कराया गया है। यह सर्विस 160 से ज्यादा देशों में Google AI Pro और Ultra ग्राहकों के लिए उपलब्ध है।
OpenAI और Anthropic से मुकाबला
Gemini 3.7 Flash का लॉन्च ऐसे समय हुआ है जब गूगल की सीधी टक्कर ओपनएआई (OpenAI) और एंथ्रोपिक (Anthropic) जैसी कंपनियों से है। खासतौर पर AI कोडिंग और AI एजेंट से जुड़े कारोबार में कंपनियां तेजी से नए मॉडल पेश कर रही हैं।
गूगल के ज्यादा शक्तिशाली Gemini 3.5 Pro मॉडल को लेकर भी काफी चर्चा है। कंपनी ने जुलाई में बताया था कि इस मॉडल की पार्टनर्स के साथ टेस्टिंग चल रही है और इसे जल्द लॉन्च किया जाएगा। हालांकि, इसकी आधिकारिक रिलीज डेट अभी सामने नहीं आई है।
गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) में हालिया नेतृत्व बदलावों के बीच भी यह लॉन्च हुआ है। Gemini की शुरुआती तकनीकी टीम के दो प्रमुख सह-नेता कंपनी छोड़कर नया वेंचर शुरू कर चुके हैं।
गूगल अब AI को सिर्फ चैटबॉट तक सीमित रखने के बजाय ऐसे सिस्टम की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो यूजर्स और कंपनियों की ओर से काम कर सकें, कोड लिख सकें और अलग-अलग सॉफ्टवेयर टूल्स का इस्तेमाल कर सकें। Gemini 3.7 Flash इसी रणनीति का एक अहम हिस्सा है।
एलएंडटी (Larsen & Toubro-L&T) को 10,000 से 15,000 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी चेन्नई में 10,000 GPU वाली AI फैक्ट्री बनाएगी।
by
Samachar4media Bureau
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और इसी बीच एलएंडटी (Larsen & Toubro-L&T) ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी को 10,000 करोड़ से 15,000 करोड़ रुपये का मेगा ऑर्डर मिला है। इसके तहत चेन्नई में भारत की बड़ी सिंगल-क्लस्टर AI इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधा तैयार की जाएगी।
इस AI फैक्ट्री में एनवीडिया (NVIDIA) के B300 प्लेटफॉर्म पर आधारित करीब 10,000 GPU लगाए जाएंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट अमेरिका की AI क्लाउड कंपनी टुगेदर AI (Together AI) के लिए तैयार किया जाएगा।
इस सुविधा का इस्तेमाल बड़े AI मॉडल की ट्रेनिंग, फाइन-ट्यूनिंग और इनफरेंस के लिए किया जाएगा। आसान भाषा में समझें तो यहां AI कंपनियों और डेवलपर्स को बड़े स्तर पर तेज कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे AI मॉडल को तैयार करने और चलाने में मदद मिलेगी।
L&T के लिए यह ऑर्डर इसलिए भी खास है क्योंकि इससे कंपनी AI फैक्ट्री कारोबार में अपनी मौजूदगी मजबूत करेगी। कंपनी पहले से डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम कर रही है और अब इस बड़े प्रोजेक्ट के जरिए भारत के तेजी से बढ़ते AI इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
10 हजार GPU से बढ़ेगी कंप्यूटिंग क्षमता
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका करीब 10,000 GPU वाला क्लस्टर है। बड़े AI मॉडल को तैयार करने के लिए बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। GPU एक साथ बड़ी संख्या में गणनाएं करने में सक्षम होते हैं, इसलिए AI मॉडल की ट्रेनिंग और जटिल कामों को तेजी से पूरा करने में इनका इस्तेमाल किया जाता है।
एनवीडिया का B300 प्लेटफॉर्म भी इसी तरह के बड़े AI कंप्यूटिंग कामों के लिए तैयार किया गया है। इतने बड़े स्तर पर GPU की तैनाती से AI मॉडल की ट्रेनिंग, फाइन-ट्यूनिंग और इनफरेंस की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पहले भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही है L&T
L&T की AI और डेटा सेंटर रणनीति नई नहीं है। फरवरी 2026 में कंपनी ने एनवीडिया के साथ भारत में गीगावॉट-स्केल AI फैक्ट्री इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की योजना का ऐलान किया था।
इसके तहत चेन्नई में GPU क्लस्टर को 30 मेगावाट तक बढ़ाने और मुंबई में 40 मेगावाट का नया डेटा सेंटर विकसित करने की योजना बताई गई थी। कंपनी का लक्ष्य ऐसा AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है, जहां भारतीय कंपनियों के साथ ग्लोबल क्लाउड कंपनियां और अन्य संस्थान बड़े स्तर पर AI मॉडल तैयार और इस्तेमाल कर सकें।
नया ऑर्डर भारत में AI कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे देश में बड़े AI मॉडल की ट्रेनिंग और इस्तेमाल के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका में AI के बढ़ते इस्तेमाल के खिलाफ विरोध तेज हो रहा है। वॉशिंगटन डीसी में OpenAI के दफ्तर में प्रदर्शन के दौरान 13 छात्रों को गिरफ्तार किया गया।
by
Samachar4media Bureau
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अमेरिका और यूरोप में विरोध बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी (Washington DC) का है, जहां प्रदर्शनकारियों ने ओपनएआई (OpenAI) के दफ्तर में घुसकर AI के बढ़ते इस्तेमाल के खिलाफ प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला और इस दौरान 13 छात्रों को गिरफ्तार किया गया।
यह सिर्फ किसी कंपनी के दफ्तर के बाहर हुआ सामान्य प्रदर्शन नहीं है। पिछले कुछ समय से अमेरिका और यूरोप में AI को लेकर अलग-अलग मुद्दों पर लोगों की चिंता और नाराजगी सामने आ रही है। इनमें नौकरी जाने का डर, कलाकारों के काम के इस्तेमाल और AI के लिए बनाए जा रहे बड़े डेटा सेंटर से जुड़ी बिजली और पानी की खपत जैसे मुद्दे शामिल हैं।
मार्च 2026 में सैन फ्रांसिस्को (San Francisco) में भी प्रदर्शनकारियों ने ओपनएआई के दफ्तर से लेकर एलन मस्क (Elon Musk) की एक्सएआई (xAI) तक मार्च किया था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि AI के विकास की रफ्तार को रोका जाए।
वॉशिंगटन डीसी में हुए प्रदर्शन में भी AI के तेजी से बढ़ते प्रभाव और उससे होने वाले संभावित नुकसान को लेकर सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि AI कंपनियां जिस तेजी से नई तकनीक विकसित कर रही हैं, उसके मुकाबले सरकारें नियम और सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने में पीछे रह रही हैं।
इसी वजह से अमेरिका में AI का विरोध करने वाले अलग-अलग समूह अब टेक कंपनियों के दफ्तरों, सरकारी संस्थानों और डेटा सेंटर से जुड़े प्रोजेक्ट्स के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। मार्च में सैन फ्रांसिस्को में ओपनएआई (OpenAI), एंथ्रोपिक (Anthropic) और गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) से जुड़े ठिकानों पर भी प्रदर्शन हुए थे। जुलाई में भी सैन फ्रांसिस्को में स्टॉपएआई (StopAI) से जुड़े लोगों ने AI कंपनियों के खिलाफ मार्च किया।
ओपनएआई (OpenAI) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर ब्रैड लाइटकैप (Brad Lightcap) करीब आठ साल बाद कंपनी छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब कुछ नया शुरू करेंगे।
by
Samachar4media Bureau
ओपनएआई (OpenAI) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Chief Operating Officer-COO) ब्रैड लाइटकैप (Brad Lightcap) करीब आठ साल बाद कंपनी छोड़ने जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर बताया कि वह अब “कुछ नया शुरू” करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
ब्रैड लाइटकैप 2018 में ओपनएआई से चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (Chief Financial Officer-CFO) के तौर पर जुड़े थे। इसके बाद 2022 में उन्हें चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी दी गई। कंपनी में अपने कार्यकाल के दौरान लाइटकैप ने कई अहम बिजनेस और ऑपरेशनल टीमों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें फाइनेंस, लीगल, पीपल, कॉरपोरेट सिक्योरिटी, गो-टू-मार्केट, गवर्नमेंट अफेयर्स और पार्टनरशिप्स जैसी टीमें शामिल हैं।
लाइटकैप ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें कंपनी की कई ऑपरेशनल और बिजनेस टीमों के शुरुआती ढांचे तैयार करने का मौका मिला। उन्होंने इन टीमों को आगे बढ़ते और अनुभवी नेतृत्व के तहत मजबूत होते देखना अपने सफर के सबसे अच्छे अनुभवों में से एक बताया।
उन्होंने ओपनएआई की मौजूदा टीम पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह कंपनी के अगले दशक को आगे बढ़ाने के लिए सक्षम लोगों के हाथों में देखकर उत्साहित हैं। ब्रैड लाइटकैप तुरंत कंपनी से अलग नहीं होंगे। वह अगले कुछ हफ्तों तक ओपनएआई में बने रहेंगे और जिम्मेदारियों के ट्रांजिशन (Transition) में मदद करेंगे।
उनके जाने के बाद ओपनएआई के ऑपरेशनल और बिजनेस नेतृत्व में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, कंपनी की ओर से उनके अगले कदम या नई कंपनी को लेकर अभी कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
क्लाउडफ्लेयर (Cloudflare) के मुताबिक जून 2026 में इंटरनेट का 50% से ज्यादा ट्रैफिक इंसानों के बजाय एआई, क्रॉलर और दूसरे ऑटोमेटेड सिस्टम से आया।
by
Samachar4media Bureau
इंटरनेट की दुनिया तेजी से बदल रही है। अब वेबसाइट्स पर आने वाले ट्रैफिक में इंसानों के मुकाबले मशीनों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है। क्लाउडफ्लेयर (Cloudflare) के मुताबिक जून 2026 में इंटरनेट पर पहली बार 50 फीसदी से ज्यादा ट्रैफिक नॉन-ह्यूमन सिस्टम (Non-Human Traffic) से आया। इसमें एआई सिस्टम, क्रॉलर और दूसरे ऑटोमेटेड सिस्टम शामिल हैं।
इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल माना जा रहा है। एआई एजेंट अब इंसानों की तरह एक-एक वेबसाइट खोलकर जानकारी तलाशने के बजाय एक साथ बड़ी संख्या में वेबसाइट्स से डेटा जुटा सकते हैं।
इसे एक आसान उदाहरण से समझें। अगर किसी व्यक्ति को नई घड़ी खरीदनी है तो वह कीमत और फीचर्स देखने के लिए कुछ वेबसाइट्स खोल सकता है। वहीं, एआई एजेंट इसी काम के लिए हजारों वेबसाइट्स से एक साथ जानकारी जुटाकर उसका विश्लेषण कर सकता है और फिर यूजर को एक जवाब दे सकता है।
क्लाउडफ्लेयर के सीईओ मैथ्यू प्रिंस (Matthew Prince) ने मार्च में बताया था कि एक इंसान किसी प्रोडक्ट की जानकारी के लिए करीब पांच वेबसाइट्स देख सकता है, जबकि एआई एजेंट उसी काम के लिए हजारों वेबसाइट्स तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मशीनों की ओर से भेजी जाने वाली रिक्वेस्ट भी तेजी से बढ़ रही हैं।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ महीने पहले तक क्लाउडफ्लेयर का अनुमान था कि बॉट ट्रैफिक 2027 तक इंसानी ट्रैफिक से आगे निकल सकता है। लेकिन कंपनी के नए आंकड़ों के मुताबिक यह बदलाव अनुमान से पहले ही हो गया।
जुलाई 2026 में क्लाउडफ्लेयर ने बताया कि इंटरनेट के इतिहास में पहली बार 50 फीसदी से ज्यादा ट्रैफिक इंसानों के बजाय नॉन-ह्यूमन सिस्टम से आया। आसान भाषा में कहें तो वेबसाइट्स पर आने वाली हर 100 रिक्वेस्ट में 50 से ज्यादा रिक्वेस्ट इंसानों के अलावा दूसरे सिस्टम से आ रही हैं।
इस बदलाव से यह संकेत मिलता है कि इंटरनेट का इस्तेमाल अब सिर्फ इंसानों द्वारा वेबसाइट्स देखने तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले समय में एआई एजेंट भी इंटरनेट पर जानकारी खोजने, तुलना करने और यूजर्स के लिए काम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी जीस्केल (GScale) ने सिद्धार्थ सिंह को President – Marketing एवं Chief Marketing Officer नियुक्त किया है। इसकी जानकारी उन्होंने LinkedIn पोस्ट के जरिए साझा की।
by
Samachar4media Bureau
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर (AI Infrastructure) कंपनी जीस्केल (GScale) ने सिद्धार्थ सिंह (Siddharth Singh) को प्रेसिडेंट–मार्केटिंग (President – Marketing) और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer-CMO) नियुक्त किया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा करते हुए बताया कि वह पिछले कुछ महीनों से कंपनी के साथ काम कर रहे हैं।
नई जिम्मेदारी में सिद्धार्थ सिंह जीस्केल की मार्केटिंग (Marketing), बिजनेस डेवलपमेंट (Business Development), रणनीतिक साझेदारियों (Strategic Partnerships) और गो-टू-मार्केट (Go-to-Market) रणनीतियों का नेतृत्व करेंगे।
अपने लिंक्डइन पोस्ट में सिद्धार्थ सिंह ने लिखा कि स्टार्टअप्स में काम करने का अनुभव इतना रोमांचक रहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी नई भूमिका साझा करने में कुछ महीने लग गए। उन्होंने कहा कि जीस्केल का लक्ष्य भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) को गति देने के लिए एक एकीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म तैयार करना है।
उन्होंने कहा कि एआई की चर्चा अक्सर केवल मॉडल्स तक सीमित रहती है, जबकि उन्हें सुचारु रूप से चलाने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सिद्धार्थ ने कहा कि नई भूमिका उन्हें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को और गहराई से समझने तथा इस क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों के साथ मिलकर भविष्य की तकनीक विकसित करने का अवसर देगी।
व्हाट्सऐप (WhatsApp) जल्द Offers & Updates फोल्डर लाने की तैयारी में है, जिससे ऑफर्स, डिलीवरी और एयरलाइन अपडेट जैसे बिजनेस मैसेज मुख्य चैट लिस्ट से अलग दिखाई देंगे।
by
Samachar4media Bureau
मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप (WhatsApp) अपने यूजर्स के लिए एक नया फीचर लाने की तैयारी कर रहा है। इस अपडेट के तहत ऐप में ''Offers & Updates'' नाम का नया फोल्डर या सेक्शन जोड़ा जाएगा, जिसमें बड़ी कंपनियों की ओर से आने वाले ऑफर्स, डिस्काउंट, डिलीवरी अपडेट और एयरलाइन से जुड़े संदेश अपने आप अलग दिखाई देंगे।
टेकक्रंच (TechCrunch) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स की मुख्य चैट लिस्ट (Main Chat List) को साफ-सुथरा रखना है। नया फीचर आने के बाद ई-कॉमर्स कंपनियों, एयरलाइंस और अन्य बड़े ब्रांड्स के बिजनेस मैसेज कुछ समय बाद स्वतः ''Offers & Updates'' फोल्डर में चले जाएंगे, जिससे व्यक्तिगत चैट्स के बीच इन संदेशों की भीड़ नहीं रहेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सऐप फिलहाल इस फीचर के लिए अलग-अलग समय सीमा की टेस्टिंग कर रहा है। यह अवधि अधिकतम 24 घंटे तक हो सकती है। हालांकि यूजर्स इस समय सीमा को अपनी पसंद के अनुसार बदल नहीं सकेंगे।
अगर किसी यूजर को यह फीचर पसंद नहीं आता है, तो वह ऐप की सेटिंग्स (Settings) में जाकर इसे बंद भी कर सकेगा। शुरुआत में यह सुविधा केवल बड़ी कंपनियों (Large Businesses) के बिजनेस अकाउंट्स पर लागू होगी। छोटे बिजनेस और पर्सनल अकाउंट्स को फिलहाल इससे बाहर रखा जाएगा, हालांकि भविष्य में उन्हें भी इस फीचर के दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है।
ओपनएआई (OpenAI) की चैटजीपीटी (ChatGPT) सेवा शनिवार दोपहर करीब एक घंटे तक प्रभावित रही। भारत समेत कई देशों के यूजर्स ने दिक्कत की शिकायत की।
by
Samachar4media Bureau
ओपनएआई (OpenAI) का लोकप्रिय एआई चैटबॉट चैटजीपीटी (ChatGPT) शनिवार दोपहर अचानक तकनीकी समस्या का शिकार हो गया। इस दौरान भारत सहित दुनिया के कई देशों के यूजर्स करीब एक घंटे तक सेवा का उपयोग नहीं कर सके। बाद में कंपनी ने समस्या दूर होने की पुष्टि की और सेवाएं सामान्य हो गईं।
आउटेज ट्रैक करने वाली वेबसाइट डाउनडिटेक्टर (Downdetector) पर भी बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज की गईं। यूजर्स ने बताया कि उन्हें चैटजीपीटी का वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप दोनों इस्तेमाल करने में दिक्कत आ रही थी।
यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं रही। अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के यूजर्स ने भी सेवा बाधित होने की रिपोर्ट दी। ओपनएआई (OpenAI) ने स्वीकार किया कि चैटजीपीटी (ChatGPT) के साथ-साथ उसकी एपीआई (APIs) और कोडैक्स (Codex) सेवाएं भी प्रभावित हुईं। कंपनी ने कहा कि तकनीकी गड़बड़ी के कारणों की जांच की जा रही है और समस्या की वजह का पता लगाया जा रहा है।
चैटजीपीटी (ChatGPT) एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट है, जिसे ओपनएआई (OpenAI) ने विकसित किया है। यह यूजर्स के प्रॉम्प्ट के आधार पर जवाब तैयार करता है और ईमेल, लेख, अनुवाद, कहानियां तथा सोशल मीडिया पोस्ट जैसी सामग्री बनाने में मदद करता है। इसके अलावा, यह इमेज जनरेट करने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है।
नोटिस में उनसे कंपनी से जुड़े दस्तावेज, नोट्स और इलेक्ट्रॉनिक संचार रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ-साथ एप्पल के कॉर्पोरेट वकीलों से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए भी कहा गया है।
by
Samachar4media Bureau
एप्पल (Apple) ने ओपनएआई (OpenAI) के साथ चल रहे कानूनी विवाद को और आगे बढ़ाते हुए अपने करीब 40 पूर्व एंप्लॉयीज को औपचारिक कानूनी नोटिस जारी किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सभी कर्मचारी अब ओपनएआई में कार्यरत हैं। नोटिस में उनसे कंपनी से जुड़े दस्तावेज, नोट्स और इलेक्ट्रॉनिक संचार रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ-साथ एप्पल के कॉर्पोरेट वकीलों से व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए भी कहा गया है।
यह कदम उस संघीय मुकदमे (Federal Lawsuit) के बाद उठाया गया है, जिसमें एप्पल ने आरोप लगाया है कि ओपनएआई ने अपने हार्डवेयर कारोबार को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए गोपनीय हार्डवेयर डिजाइनों, इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं और मैन्युफैक्चरिंग ब्लूप्रिंट्स तक पहुंच बनाने की संगठित कोशिश की।
मुकदमे में एप्पल (Apple) ने अपने दो पूर्व एंप्लॉयीज का नाम लिया है, जो अब ओपनएआई (OpenAI) के हार्डवेयर डिवीजन से जुड़े हैं। इनमें पूर्व वाइस प्रेसिडेंट, प्रोडक्ट डिजाइन (Vice President of Product Design) तांग तान (Tang Tan) शामिल हैं, जो वर्तमान में ओपनएआई में हेड ऑफ हार्डवेयर (Head of Hardware) हैं। दूसरे नाम चांग लियू (Chang Liu) का है, जो पहले आईफोन (iPhone) के वरिष्ठ सिस्टम इलेक्ट्रिकल इंजीनियर (Senior System Electrical Engineer) रह चुके हैं।
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, एप्पल का मानना है कि यह मामला केवल दो एंप्लॉयीज तक सीमित नहीं है। कंपनी का दावा है कि उसके 400 से अधिक पूर्व कर्मचारी वर्तमान में ओपनएआई में कार्यरत हैं और मुकदमे में नामित दोनों लोग इस बड़े मामले का केवल "आइसबर्ग का ऊपरी हिस्सा" (Tip of the Iceberg) हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल ने मुकदमा दायर करने के तुरंत बाद अपने लगभग 10 प्रतिशत पूर्व एंप्लॉयीज को लीगल प्रिजर्वेशन नोटिस भेजे हैं। कंपनी का उद्देश्य ऐसे साक्ष्य जुटाना है, जिनसे यह साबित किया जा सके कि ओपनएआई का हार्डवेयर कारोबार कथित रूप से एप्पल के ट्रेड सीक्रेट्स के अनुचित उपयोग पर आधारित है।
वहीं ओपनएआई (OpenAI) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसे प्रतिस्पर्धी कंपनियों के ट्रेड सीक्रेट्स में कोई रुचि नहीं है। कंपनी का कहना है कि उसे ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे एप्पल की शिकायत को उचित ठहराया जा सके।