न्यूज एंकर चित्रा त्रिपाठी ने सवाल क्या पूछा, पूरी पार्टी ही पीछे पड़ गई

चित्रा को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है

Last Modified:
Tuesday, 18 June, 2019
Chitra Tripathi

बिहार में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत ने पूरे देश को हिला रखा है। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चा है और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाये जा रहे हैं। हालांकि, इतने संवेदनशील मामले में भी राजनीति जोरो पर है जिसका खामियाजा उन पत्रकारों को भी उठाना पड़ रहा है, जो सिर्फ बदहाल व्यवस्था के लिए ज़िम्मेदारों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इनमें चित्रा त्रिपाठी भी शामिल हैं। 

चित्रा को सोशल मीडिया पर लगातार निशाना बनाया जा रहा है। निशाना बनाने वाले इस बात से खफा हैं कि चित्रा केवल राज्य सरकार पर सवाल उठा रहीं हैं केंद्र सरकार पर नहीं। इस ट्रोलिंग की शुरुआत तब हुई जब चित्रा ने बच्चों की मौत पर दुःख व्यक्त करते हुए कुछ ट्वीट किये। उन्होंने लिखा कि ‘बिहार में ना सत्ता पक्ष-ना विपक्ष है। चुनाव में 39 सीटें पाकर #सत्ता नशे में है @RJDforIndia को एक भी नहीं मिली तो पार्टी गर्मी की छुट्टी मना रही है @ichiragpaswan की पार्टी का कहना है बीमारी लाइलाज है सच-गरीबों को वोट मानने वाले नेता संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर चुके हैं।’ 

चित्रा के इस ट्वीट पर राजद नेता अलोक कुमार मेहता ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा ‘@chitraaum जी, विपक्ष गर्मी छुट्टी नहीं मना रहा है बल्कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर कार्रवाई कर रहा है, जरूरत है तो आप पत्रकार बिरादरी से कि आप ऐसे मामलों पर हमारा साथ दे!! मुजफ्फरपुर बालिका गृह की घटना पर मीडिया के रुख को देख लें’? 

इसके बाद राजद के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी ट्वीट किया गया, जिसमें कहा गया कि तीन दिन पहले @RJDforIndia ने प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल मुज़फ़्फ़रपुर भेजा था। शिष्टमंडल अपनी रिपोर्ट पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सौंपेगा। आगे के कार्यक्रम भी तय है। राजद आरोप-प्रत्यारोप से बच पीड़ित परिजनों की संवेदना का ख़्याल रख सकारात्मक राजनीति कर रहा है’। इन जवाबी ट्वीट के बाद चित्रा ने एक ऐसा सवाल पूछा जो राजद समर्थकों को भीतर तक चुभ गया। उन्होंने पूछा कि पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव कहां हैं?
    
तेजस्वी यादव का नाम उछलते ही रमेश यादव नामक राजद समर्थक ने चित्रा त्रिपाठी पर हमले शुरू कर दिए। उसने अपने पहले ट्वीट में लिखा ‘बेशर्म दलाल मीडिया 2 सौ ज्यादा बच्चे मरे है सवाल @narendramodi से पूछना चाहिये, पांच साल आपका आयुष्मान योजना गया कहां, सवाल सरकार से पूछना चाहिये तो दलाली मीडिया विपक्ष से पूछ रहा है? @chitraaum @ModiLeDubega।’ 

जिसका चित्रा ने माकूल जवाब दिया। उन्होंने कहा ‘यादव जी,एक तो मुझे टैग करते समय भाषा की मर्यादा रखें। दूसरा किससे सवाल करना है और किससे नहीं ये मुझे तय करने दें। मेरे ट्वीट पढ़े, ऐसा नहीं है कि सवाल सिर्फ RJD से था। बेशर्म और दलाल आपके घर में बोली जाने वाली भाषा होगी। अपनी मां बहन से कहियेगा ऐसे,मुझसे नहीं।’ 

चित्रा इतने पर ही शांत नहीं हुईं, उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा ‘और हां,@yadavtejashwi के साथ फोटो लगायें हैं तो थोड़ा उनसे सीख लीजिये कि बोलते समय क्या ध्यान रखते हैं। नेता के साथ फोटो खींचा कर चापलूसी नहीं करते, थोड़ा उसकी अच्छाइयों को सीखते भी हैं।’


हालांकि, बात यहीं ख़त्म नहीं हुई। इस बार गुरप्रीत वालिया नामक यूजर ने रमेश यादव के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए लिखा ‘वाह @yadavtejashwi कहा है ये तो पूछ लिया मोदी जी कहां है? अब तक आए क्यू नही? कब आएंगे? एक भी ट्वीट किया क्या अब तक? ये ना पूछा गया तुमसे, मीडिया के हाल देखो, बुरे दिनों में भी विपक्ष से अधिक सवाल करते है सत्ता की बजाए।’ 

जिसके जवाब में चित्रा ने गुरप्रीत की फोटो को आधार बनाते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने कहा ‘शीशे के सामने खड़े होकर सेल्फी खिंचने से फुर्सत मिल जाये तो मेरे ट्वीट पढ़ लेना।’ गुरप्रीत के बाद राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर नवल किशोर ने चित्रा त्रिपाठी पर हमला बोला। उनके अल्फाज थे ‘चाटुकारिता की हर सीमा इसी जन्म में लाँघने की कसम खा ली है क्या??? कुछ हिम्मत उधार ले लीजिए सता से सवाल पूछने के लिए। पत्रकारी जीवन ऐसे ही बर्बाद न कीजिए’। जिस पर चित्रा का जवाब रहा ‘डॉ नवल किशोर, अच्छा लगा ट्वीट पढ़कर। मुझे नहीं पता आप किस चीज के लिये डॉक्टर लगाते हैं,लेकिन मरीजों का इलाज करने वाले हैं तो जाकर मासूमों को बचाइये मुजफ्फरपुर में। ट्विटर पर आपकी गाली मैं खा लूंगी, इससे भी घटिया बोलेंगे सुन लूंगी,लेकिन पहले बच्चों को बचाइये मुजफ्फरपुर जाइये।’


चित्रा त्रिपाठी ने भी शायद यह नहीं सोचा होगा कि उन्हें एक के बाद एक इस तरह नेताओं और समर्थकों के हमले झेलने होंगे। राजद नेता शैलेश कुमार ने भी चित्रा को टैग करते हुए ट्वीट किया ‘आप भूल गयी कि बिहार में सबसे ज़्यादा विधायक एनडीए गठबंधन के है। 99% लोकसभा सांसद NDA गठबंधन के है। क्या आपने @SushilModi PM @narendramodi से सवाल पूछा? हिम्मत नहीं है क्योंकि नौकरी चली जाएगी? पक्षकार पत्रकार विपक्ष को लोकतंत्र ना सिखाए’। 

इसके बाद उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा ‘PM @narendramodi, स्वास्थ्य मंत्री @drharshvardhan, @AmitShahOffice को टैग करने में डर लग रहा है ना? मोदी जी ने अभी तक संवेदना भी प्रकट नहीं की है। अपना पुश्तैनी ज्ञान ज़रा उधर भी बाँट दिजीए। डरिए ना, लोकतंत्र है। सत्ता से सवाल करिए।’ जिसके जवाब में चित्रा ने कहा ‘आज तो पूरी @RJDforIndia आ गई है मुझे कोसने के लिये। ये एक जुटता बच्चों की जान बचाने के लिये दिखाईये साहब। काहे के नेता हैं आप? 2014 में MP थे? और इतनी निर्लज्जता? जनता जितायेगी तभी! 80 विधायक तो आपके भी हैं ना? उनको किसने चुना था? इसी जनता ने। अगले साल फिर चुनाव है ध्यान रखियेगा। बहुत ज्यादा डरी हुई हूं। घर से निकल भी नहीं पा रही। बोलना तो छोड़ दीजिये, कैसे MP रहे हैं आप भई, हैरान हूं।’

हालांकि, हमले और जवाबी हमले का सिलसिला यहीं ख़त्म नहीं हुआ। राजद समर्थक और नेता चित्रा को निशाना बनाते रहे और वह बखूबी उसका सामना करती रहीं।

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इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को खरीद सकती है Google

दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) कथित तौर पर बेंगलुरु स्थित इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को खरीदने की योजना बना रहा है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 24 November, 2020
Last Modified:
Tuesday, 24 November, 2020
Google1

दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) कथित तौर पर बेंगलुरु स्थित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शेयरचैट (ShareChat) को खरीदने की योजना बना रही है।

हालांकि, न तो गूगल और न ही शेयरचैट ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में ये अनुमान लगाया जा रहा है कि गूगल शेयरचैट में 1.03 बिलियन निवेश करने को तैयार है।

शेयरचैट के मुताबिक, पूरे भारत में उसके 160 मिलियन यूजर्स हैं और वह करीब 15 भारतीय भाषाओं में सेवाएं प्रदान करता है। लॉकडाउन के दौरान शेयरचैट ने अपने मंथली यूजर्स की संख्या में 166% स्पाइक देखा, जोकि 60 मिलियन से बढ़कर 160 मिलियन हो गया। साथ ही यह भी देखने को मिला कि इन महीनों में प्लेटफॉर्म पर यूजर्स ने सबसे अधिक समय बिताया है।

हाल के दिनों में शेयरचैट की में हुई इस वृद्धि का श्रेय लॉकडाउन को दिया जा सकता है। और वैसे भी टिकटॉक पर प्रतिबंध लगने के बाद लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख करने लगे थे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह वृद्धि टियर II और टियर III क्षेत्रों की वजह से ज्यादा देखने को मिली है। शायद यही वजह है कि गूगल शेयरचैट को खरीदने की योजना बना रही है।

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इस मामले को लेकर पत्रकारों की कैटेगरी में नंबर-1 बने सीनियर जर्नलिस्ट दीपक चौरसिया

सोशल मीडिया एनालिटिक्स फर्म ‘ट्वीटीट’ (Twitteet) ने अक्टूबर 2020 की अपनी ट्विटर इंगेजमेंट रिपोर्ट जारी की है। ट्वीटीट ने 20 कैटेगरीज में यह रिपोर्ट जारी की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 23 November, 2020
Last Modified:
Monday, 23 November, 2020
deepak

सोशल मीडिया एनालिटिक्स फर्म ‘ट्वीटीट’ (Twitteet) ने अक्टूबर 2020 की अपनी ट्विटर इंगेजमेंट रिपोर्ट जारी की है। ट्वीटीट ने 20 कैटेगरीज में यह रिपोर्ट जारी की है, जिनमें राजनेता, पत्रकार, बिजनेस लीडर्स, फाउंडर और इन्वेस्टर्स, खिलाड़ी, शेफ, लेखक, कॉमेडियन और मूवी स्टार्स शामिल हैं। इस रिपोर्ट में अक्टूबर महीने में इन कैटेगरीज के यूजर्स के अकाउंट पर इंगेजमेंट के बारे में जानकारी दी गई है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक पत्रकारों की लिस्ट में वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया 1.88 मिलियन इंगेजमेंट के साथ पहले नंबर पर, रोहित सरदाना 1.1 मिलियन इंगेजमेंट के साथ दूसरे नंबर पर और सुशांत सिन्हा 1.05 मिलियन इंगेजमेंट के साथ तीसरे नंबर पर हैं।

पॉलिटिक्स कैटेगरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर इंगेजमेंट सबसे ज्यादा 7.2 मिलियन रहा है। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी 3.5 मिलियन इंगेजमेंट के साथ दूसरे नंबर पर हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तीसरे नंबर और प्रियंका गांधी चौथे नंबर पर हैं।

बॉलीवुड फिल्मों में अक्सर विलेन का किरदार निभाने वाले सोनू सूद असल जीवन में हीरो साबित हुए हैं। कोरोना काल के दौरान उन्होंने जिस तरह आम आदमी की मदद की है, वह एक नजीर है। ट्विटर इंगेजमेंट के मामले में 2.4 मिलियन इंगेजमेंट के साथ सोनू सूद बॉलीवुड स्टार्स में पहले पायदान पर पहुंच गए हैं। वहीं शाहरुख खान 7.3 मिलियन इंगेजमेंट के साथ दूसरे नंबर पर हैं। अक्षय कुमार 6.72 मिलियन इंगेजमेंट के साथ तीसरे नंबर पर हैं।

यहां जानिए किस कैटेगरी में किसने मारी बाजी-

पॉलिटिक्स- नरेंद्र मोदी, इंगेजमेंट 72,15,913

बॉलीवुड- सोनू सूद, इंगेजमेंट- 24,36,601

बिजनेस हेड- आनंद महिंद्रा, इंगेजमेंट- 4,08,882

क्रिकेटर- विराट कोहली, इंगेजमेंट- 24,65,918

स्पोर्ट्स स्टार (नॉन-क्रिकेट)- विजेंद्र सिंह, इंगेजमेंट- 4,27,006

टीवी स्टार- सिद्धार्थ शुक्ला, इंगेजमेंट- 3,90,901

पत्रकार- दीपक चौरसिया, इंगेजमेंट- 18,88,720

फाउंडर्स- कुणाल शाह, इंगेजमेंट- 60,093

कॉमेडियन- कुणाल कामरा, इंगेजमेंट- 11,46,111

रीजनल सिनेमा स्टार- महेश बाबू, इंगेजमेंट- 7,32,964

लेखक- आनंद रंगनाथन, इंगेजमेंट- 5,36,874

इंवेस्टर्स- मोहनदास पई, इंगेजमेंट- 99,741

अन्य कैटेगरीज की लिस्ट आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर देख सकते हैं-

https://bit.ly/33byEOR

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इस तरह की सोशल मीडिया पोस्ट पर अब हो सकती है 5 साल तक की जेल

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने पुलिस कानून में बदलाव से जुड़े विवादित अध्यादेश (Ordinance) को मंजूरी दे दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 23 November, 2020
Last Modified:
Monday, 23 November, 2020
Social Media

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने पुलिस कानून में बदलाव से जुड़े विवादित अध्यादेश (Ordinance) को मंजूरी दे दी है। इस अध्यादेश के तहत केरल पुलिस अधिनियम में संशोधन कर किसी भी ‘अपमानजनक’ सोशल मीडिया या साइबर पोस्ट के लिए जेल भेजने का प्रवाधान किया गया है। केरल के राजभवन ने मीडिया को बताया कि ‘केरल पुलिस एक्ट’ में धारा 118 (A) जोड़ने वाले आदेश पर राज्यपाल ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके तहत केवल पोस्ट ही नहीं, बल्कि अगर किसी व्यक्ति द्वारा किसी अन्य को भेजे गए कोई भी संदेश, चाहे वो कोई भी डिजिटल माध्यम हो, अगर आपत्तिजनक या धमकी भरे लगते हैं तो उसे या तो 5 साल कारावास होगा या फिर 10,000 रुपए जुर्माना, या दोनों ही सजा दी जा सकती है।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोगों को निशाना बना कर उन्हें गालियां देने की घटनाएं बढ़ रही हैं, इसीलिए उन पर लगाम लगाने के लिए ये कानून लाया गया है।

वहीं सरकार का यह भी कहना है कि यह अध्यादेश महिला और बच्चों की रक्षा करेगा, जो घृणित बयानों और डराने-धमकाने के वाकयों का सोशल मीडिया पर शिकार होते हैं। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसे हमला किसी भी व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। संशोधित कानून के तहत पुलिस को ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की इजाजत है।

वहीं, कानून के इन कड़े प्रावधानों का विपक्ष विरोध कर रहा है। विपक्ष ने एलडीएफ (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) सरकार के इस कानून पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह पुलिस को अनावश्यक और असीमित ताकत देगा। इससे प्रेस की आजादी (Freedom Of Press) पर भी अंकुश लगेगा।

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट कर इस कानून को लेकर हैरानी जताई है। उन्होंने लिखा, केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंड (एलडीएफ) सरकार द्वारा पारित कानून चौंकाने वाला है। यह सोशल मीडिया पर किसी भी आपत्तिजनक पोस्ट पर 5 साल जेल का प्रावधान करता है। एलडीएफ सरकार ने अक्टूबर में जब पुलिस एक्ट 2011 में बदलाव के लिए यह निर्णय किया था तो सहयोगी दल भाकपा ने भी इस पर चिंता जाहिर की थी।

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जानिए, गूगल-फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियों ने पाकिस्तान से कारोबार समेटने की क्यों दी धमकी

पाकिस्तान में डिजिटल मिडिया को लेकर नए कानून के आने से बवाल मच गया है। इसके चलते गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी बड़ी टेक कंपनियों ने धमकी दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 23 November, 2020
Last Modified:
Monday, 23 November, 2020
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पाकिस्तान में डिजिटल मिडिया को लेकर नए कानून के आने से बवाल मच गया है। इसके चलते गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी बड़ी टेक कंपनियों ने धमकी दी है कि अगर इस कानून में बदलाव नहीं किया जाता है तो फिर उन्हें पाकिस्तान से अपना कारोबार समेटने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) ने बुधवार को ऐलान किया कि अब उनके यहां इंटरनेट के कंटेंट पर सेंशरशिप लाई जाएगी। नियमों को तोड़ने वाली कंपनी के खिलाफ जुर्माना लगाया जाएगा। दरअसल यह कानून लाकर इमरान सरकार ने मीडिया रेगुलेटर को केटेंट पर सेंसरशिप को लेकर ज्यादा अधिकार दे दिए हैं। कंपनियां इस कानून का विरोध कर रही हैं। 

सरकारी नीतियों के मामले में वैश्विक इंटरनेट कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन एशिया इंटरनेट गठबंधन ने एक बयान में कहा कि इंटरनेट कंपनियों को निशाना बनाने वाले नये कानून चिंताजनक हैं। बता दें कि गूगल, फेसबुक और ट्विटर भी इस गठबंधन का हिस्सा है। कंपनियों ने ये बातें ऐसे समय में कही हैं, जब सिर्फ दो दिन पहले सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने इस बारे ऐलान किया।

दरअसल, पाकिस्तान की इमरान सरकार ने देश में डिजिटल सेंसरशिप लॉ लागू किया है, जिसमें स्थानीय अधिकारियों को यह अधिकार दिए गए हैं कि वे अपने यहां जब चाहें गूगल, फेसबुक और ट्विटर पर पाबंदी लगा सकते हैं।

कानून के मुताबिक, पाकिस्तान के टेलिकॉम अथॉरिटी के पास यह अधिकार है कि वे किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को हटा सकें या ब्लॉक कर सकें। इमरान खान का मानना है कि पाकिस्तान या इसकी सरकार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को रोका जाना जरूरी है।

पाकिस्तान के अखबार डॉन के मुताबिक, आईटी मंत्रालय के द्वारा बुधवार को घोषित नए नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों और इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियों को हर वो जानकारी देनी होगी, जो जांच एजेंसियां मांगेंगी। इन जानकारियों में सब्सक्राइबर की सूचना, ट्रैफिक डेटा और यूजर के डेटा जैसी संवेदनशील जानकारियां भी शामिल हो सकती हैं। नए नियमों के तहत, सोशल मीडिया कंपनियों या इंटरनेट सेवा देने वालों को इस्लाम की अवहेलना करने वाली सामग्री, आतंकवाद को बढ़ावा देने, अभद्र भाषा, अश्लील साहित्य या किसी भी सामग्री को खतरे में डालने के लिए 3.14 मिलियन डॉलर तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

इमरान खान सरकार इस साल फरवरी में यह कानून लेकर आई थी। इसका विरोध करने वालों में Apple, Amazon, LinkedIn, SAP, Expedia Group, Yahoo, Airbnb, Grab, Rakuten, Booking.com भी शामिल हैं। जब इस कानून का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा था, तब भी इन कंपनियों ने पाकिस्तान छोड़ने की धमकी दी थी।

कंपनियों का एक स्वर में मानना है कि इस कानून के जरिए पाकिस्तान सरकार अभिव्यक्ति की आजादी का हनन कर रही है। अब कंपनियों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार ने उनसे सभी बात करने की कोशिश नहीं की और अब कानून लागू होने जा रहा है।

कंपनियों का कहना है कि इस कानून के लागू होने के बाद उनके लिए पाकिस्तान में बिजनेस करना और लोगों को प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। कंपनियों के मुताबिक, यदि पाकिस्तान चाहता है कि वह अपने यहां डिजिटल बदलाव लाए और बड़ी कंपनियों ने प्रौद्योगिकी निवेश के लिए प्रोत्साहित करे तो हम सरकार से व्यावहारिक, स्पष्ट नियमों पर उद्योग के साथ काम करने का आग्रह करते हैं जो इंटरनेट के लाभों की रक्षा करते हैं और लोगों को नुकसान से सुरक्षित रखते हैं।

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बिहार चुनाव में Facebook पर विज्ञापनों की भरमार, जानें, राजनीतिक पार्टियों के खर्च का हाल

तीन चरणों में होने वाला बिहार चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता गया, विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा फेसबुक पर विज्ञापन खर्च भी लगातार बढ़ता गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 09 November, 2020
Last Modified:
Monday, 09 November, 2020
Facebook

तीन चरणों में होने वाला बिहार चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता गया, विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा फेसबुक पर विज्ञापन खर्च भी लगातार बढ़ता गया। पिछले 30 दिनों की बात करें तो राष्ट्रीय स्तर पर फेसबुक विज्ञापनों पर खर्च के मामले में कांग्रेस के बिहार चैप्टर द्वारा 58 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किए गए। इस अवधि के दौरान बीजेपी द्वारा इस प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनों पर 25.5 लाख रुपये खर्च किए गए।

फेसबुक की ऐड लाइब्रेरी के अनुसार, ‘इंडियन नेशनल कांग्रेस’ (INC) बिहार ने छह अक्टूबर से चार नवंबर के बीच 1262 विज्ञापनों पर 58,59,658 रुपये खर्च किए। विज्ञापनों पर खर्च के मामले में पिछले कुछ दिनों में यानी 29 अक्टूबर से चार नवंबर के बीच ज्यादा उछाल आया और इन सात दिनों में बिहार कांग्रेस के पेज पर सामाजिक मुद्दों, चुनाव अथवा राजनीति से जुड़े विज्ञापनों पर 3,447,505  रुपये खर्च किए गए। 

यही नहीं, पार्टी की बिहार ईकाई द्वारा चार नवंबर को एक ही दिन में पांच लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए। करीब एक महीने पहले यानी 27 अगस्त से 25 सितंबर के बीच फेसबुक  पर डिजिटल विज्ञापन खर्च की दौड़ में जदयू और बीजेपी आगे चल रहे थे।   

इस अवधि के दौरान बिहार बीजेपी के पेज ने 641 विज्ञापनों पर 2574788 रुपये खर्च किए। वहीं, इसी अवधि में जदयू फेसबुक पर विज्ञापनों पर सबसे ज्यादा खर्च करने वालों में सातवें नंबर पर था। इस पार्टी ने 320 विज्ञापनों पर 2,412,768 रुपये खर्च किए, जबकि पिछले सात दिनों में 470,409 रुपये खर्च किए।    

इस मामले में सबसे ज्यादा खर्च करने वालों की लिस्ट में लोक जनशक्ति पार्टी के प्रेजिडेंट चिराग पासवान का फेसबुक पेज भी शामिल है। इस पेज के द्वारा 105 विज्ञापनों पर 1017821 रुपये खर्च किए गए। बीजेपी का आत्मनिर्भर बिहार पेज भी 30 दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा खर्च करने वालों में से एक था, जिसने फेसबुक पर 151 विज्ञापनों पर 520984 रुपये खर्च किए।

राष्ट्रीय स्तर पर सभी प्रमुख दलों के संबद्ध पेजों ने भी इस अवधि में फेसबुक पर काफी खर्च किया। राष्ट्रीय जंगल दल नामक एक पेज भी पिछले एक महीने में सक्रिय हुआ। इसने 131 विज्ञापनों पर 830507 रुपये खर्च किए, जबकि पिछले सात दिनों में 443,104 रुपये खर्च किए गए।  

इस अवधि के दौरान फेसबुक विज्ञापनों पर खर्च करने वालों में बिहार सबसे आगे था। पिछले एक महीने के दौरान सिर्फ बिहार से ही कुल 1.54 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस राज्य से बीजेपी बिहार 2,573,031 रुपये के साथ सबसे ज्यादा खर्च करने वालों में से था और इसके बाद 1,849,726 रुपये के साथ जदयू का नंबर रहा।  

अन्य फेसबुक पेज जैसे-राष्ट्रीय जंगल दल द्वारा 772,616 रुपये, इंडियन नेशनल कांग्रेस बिहार पेज द्वारा 700,064 रुपये, आत्मनिर्भर बिहार द्वारा 520,974 रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा अन्य गठबंधन पेजों जैसे ‘भक बुडबक’ (Bhak Budbak), ‘मोदी संग नीतीश’ (Modi Sang Nitish) और ‘बिहार का अशोक’ (Bihar ka Ashok) द्वारा पेज द्वारा फेसबुक पर विज्ञापनों पर क्रमश:  394,883 रुपये, 372,657 रुपये और 372,657 रुपये खर्च किए गए।

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यूजर्स के लिए WhatsApp लाया नया फीचर, ये है खासियत

इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप (WhatsApp) ने आज से देश में अपनी पेमेंट सर्विस शुरू कर दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 06 November, 2020
Last Modified:
Friday, 06 November, 2020
Whatsapp

इंस्टैंट मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप (WhatsApp) ने आज से देश में अपनी पेमेंट सर्विस शुरू कर दी है। यानी वॉट्सऐप के यूजर्स अब भारत में मनी ट्रांसफर आसानी से कर सकेंगे।

वॉट्सऐप के जरिए आप किसी दूसरे वॉट्सऐप यूजर्स को या यूपीआई आईडी (UPI ID) में पैसा भेज सकते हैं। दरअसल, यूपीआई पेमेंट सर्विस लॉन्च करने के लिए वॉट्सऐप को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से गुरुवार शाम को मंजूरी मिल गई है। वॉट्सऐप फेसबुक की सब्सिडियरी कंपनी है।

NPCI से मंजूरी मिलने के बाद फेसबुक के CEO मार्क जुकरबर्ग ने एक वीडियो बयान जारी कर कहा कि वॉट्सऐप की पेमेंट सर्विस 10 क्षेत्रीय भाषाओं के वॉट्सऐप वर्जन में उपलब्ध होगी। जुकरबर्ग ने कहा कि वॉट्सऐप के जरिए पेमेंट करने पर किसी भी प्रकार का चार्ज नहीं वसूला जाएगा।

लगभग 3 साल से वॉट्सऐप को इसका इंतजार था और अब कंपनी ने इसे भारत में लाइव कर दिया है। वॉट्सऐप  UPI बेस्ड पेमेंट की टेस्टिंग पहले ही की जा चुकी है। एनपीसीआई ने गुरुवार को वॉट्सऐप पे को लाइव करने की अनुमति फेज वाइज दी है। फिलहाल 20 लाख यूजर्स ही इस सर्विस का लाभ उठा पाएंगे।

मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि 140 से ज्यादा बैंकों के ग्राहक वॉट्सऐप के जरिए अपने दोस्तों और परिजनों को पेमेंट कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि वॉट्सऐप पेमेंट पूरी तरह से सिक्योर है। वॉट्सऐप के जरिए पेमेंट करने के लिए केवल UPI समर्थित डेबिट कार्ड की आवश्यकता होगी और आप सीधे पेमेंट कर सकेंगे।

जुकरबर्ग के मुताबिक, पेमेंट फीचर वॉट्सऐप के नए अपडेट में मिलना शुरू हो जाएगा। वॉट्सऐप ने कहा कि अभी इस सर्विस के लिए ICICI बैंक, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और जियो पेमेंट्स बैंक के साथ साझेदारी की गई है।

फेसबुक इंडिया हेड अजीत मोहन ने कहा है, ‘भारत में वॉट्सऐप पर पेमेंट लाइव हो चुका है और लोग वॉट्सऐप के जरिए पैसे भेज सकेंगे। हम इस बात को लेकर उत्साहित हैं कि कंपनी भारत के डिजिटल पेमेंट शिफ्ट में योगदान दे सकेगी।’

वॉट्सऐप की पेमेंट सर्विस को धीरे-धीरे रोलआउट किया जा रहा है। NPCI की गाइडलाइंस को ध्यान में रखते हुए यूजर्स को धीरे-धीरे पेमेंट सर्विस का अपडेट दिया जा रहा है। शुरुआत में सभी यूजर्स को पेमेंट सर्विस का अपडेट नहीं मिलेगा।

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सोशल मीडिया पर पोस्ट को लेकर पुलिस के एक्शन से सुप्रीम कोर्ट नाराज, कही ये बात

कोलकाता पुलिस को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम नागरिकों को सरकार की आलोचना करने के लिए प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 29 October, 2020
Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों की आलोचना करने और कथित रूप से राजनीतिक तंत्र को बदनाम करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए दूरदराज के लोगों को पुलिस द्वारा समन भेजने के चलन पर चिंता जाहिर की है। कोलकाता पुलिस को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम नागरिकों को सरकार की आलोचना करने के लिए प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में कहा, ‘सरकारी तंत्र की आलोचना और उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट्स डालने पर हम नागरिकों को देश के एक कोने से दूसरे कोने नहीं भेज सकते हैं।’ पुलिस को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘ऐसी पोस्ट को आधार बनाकर लोगों को एक कोने से दूसरे कोने घसीटने की हरकत बंद करें। हम बोलने की स्वतंत्रता (Freedom Of Speech) पर रोक नहीं लगने देंगे।’

दरअसल, दिल्ली निवासी रोशनी बिस्वास (29) ने लॉकडाउन के मानदंडों को लागू नहीं करने को लेकर सोशल पोस्ट्स के जरिये पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की थी। इन पोस्ट में महिला ने कोरोना महामारी के बीच कोलकाता के भीड़भाड़ वाले राजा बाजार इलाके की तस्वीर शेयर की थीं और लॉकडाउन के नियमों को लेकर ममता सरकार की ढिलाई पर सवाल उठाए थे। इसके बाद बंगाल पुलिस ने महिला को समन जारी करते हुए कड़ी चेतावनी दी थी।

पुलिस ने इस संबंध में विशेष समुदाय के खिलाफ नफरत भड़काने का आरोप लगाते हुए एक प्राथमिकी दर्ज की थी। चूंकि उस इलाके में एक समुदाय विशेष की ज़्यादा आबादी है, इसलिए पुलिस ने पोस्ट को सांप्रदायिक नफरत भरा करार दिया। इस मामले में याचिकाकर्ता ने सबसे पहले मई के महीने में दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट जाने की सलाह दी थी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने महिला की फेसबुक पोस्ट को लेकर उसे पूछताछ के लिए पुलिस के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा था। रोशनी ने अपने वकील महेश जेठमलानी के माध्यम से पुलिस द्वारा उन्हें समन जारी करने को चुनौती दी और कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल पुलिस को फटकार लगाई है।

लोगों को संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (A) के तहत दी जाने वाली बोलने की आजादी के अधिकार का हवाला देते हुए जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा, ‘सीमा को पार न करें। भारत को स्वतंत्र देश बने रहने दीजिए। सुप्रीम कोर्ट के रूप में हम बोलने की आज़ादी की रक्षा के लिए यहां हैं। संविधान ने इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट बनाया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य आम नागरिकों को प्रताड़ित न करें।'

पीठ का यह भी कहना था, ‘सरकार की आलोचना वाले सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए रोशनी को पुलिस द्वारा समन भेजना बोलने के अधिकार के साथ छल है। किसी भी नागरिक पर सिर्फ यह कहने के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है कि सरकार कोरोना महामारी से निपट पाने में असफल सिद्ध हो रही है।’ पीठ ने कहा, ‘कल को कोलकाता, चेन्नई, मुंबई और मणिपुर की पुलिस भी यही करेगी और देश के सभी राज्यों के लोगों को कड़ी चेतावनी देते हुए समन भेजने लगेगी’।

राज्य सरकार के काउंसिल ने इसके बाद बीच का रास्ता निकालते हुए कहा कि कोलकाता पुलिस दिल्ली जाकर महिला से पूछताछ करेगी। इसलिए महिला को जांच में सहयोग करने को कहा जाए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस पर रजामंदी दी।

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फेसबुक इंडिया की महिला अधिकारी ने इस्तीफा दिया, बताई यह वजह

सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अंखी दास ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Ankhi Das

सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्‍टर अंखी दास ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी के अनुसार, उन्होंने जन सेवा में अपनी रुचि के अनुसार काम करने के लिए यह कदम उठाया है।

अपने इस कदम के बारे में अंखी दास ने कहा, ‘मैंने फेसबुक से इस्तीफा देने का निर्णय किया है ताकि जन सेवा में अपनी व्यक्तिगत रूचि के अनुसार काम कर सकूं। वर्ष 2011 में जब मैंने फेसबुक जॉइन किया था, तब देश में इंटरनेट का विकास काफी कम था और मैं सोचती थी कि सामाजिक और आर्थिक विषमता को कैसे दूर किया जाए। देश के लोगों को जोड़ने के अपने मिशन और उद्देश्य के तहत उस समय हम एक छोटा सा स्टार्टअप थे। नौ साल के लंबे समय के बाद मुझे लगता है कि यह मिशन काफी हद तक पूरा हो चुका है।’

वहीं, दास के इस निर्णय के बारे में ‘फेसबुक इंडिया’ के हेड अजीत मोहन ने कहा, ‘अंखी दास ने फेसबुक में अपने पद से हटने का निर्णय किया है। उन्होंने जन सेवा में अपनी रुचि के अनुसार काम करने के लिये यह कदम उठाया है। अंखी हमारे उन पुराने कर्मचारियों में शामिल हैं, जिन्होंने भारत में कंपनी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। वह पिछले नौ साल से अधिक समय से अपनी सेवा दे रही थीं। वह पिछले दो साल से मेरी टीम का हिस्सा थी। उन्हें जो भूमिका दी गई थी, उसमें उन्होंने शानदार योगदान दिया। हम उनकी सेवा के आभारी हैं और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हैं।’

गौरतलब है कि पिछले दिनों ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में फेसबुक हेट-स्पीच रूल्स कोलाइड विद इंडियन पॉलिटिक्स शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट के बाद भारत में सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था। अमेरिकी अखबार की इस रिपोर्ट में अंखी दास का जिक्र करते हुए कहा था कि फेसबुक भारत में बीजेपी नेताओं के हेट स्पीच के मामलों में नियम में ढील बरतता है। इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने बीजेपी-आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा था कि फेसबुक और वॉट्सऐप इनके कब्जे में हैं, जिसके जरिये ये नफरत और फेक न्यूज फैलाते हैं।

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फेसबुक इंडिया की महिला अधिकारी ने दिया इस्तीफा, बताई यह वजह

सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अंखी दास ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Ankhi Das

सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्‍टर अंखी दास ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी के अनुसार, उन्होंने जन सेवा में अपनी रुचि के अनुसार काम करने के लिए यह कदम उठाया है।

अपने इस कदम के बारे में अंखी दास ने कहा, ‘मैंने फेसबुक से इस्तीफा देने का निर्णय किया है ताकि जन सेवा में अपनी व्यक्तिगत रूचि के अनुसार काम कर सकूं। वर्ष 2011 में जब मैंने फेसबुक जॉइन किया था, तब देश में इंटरनेट का विकास काफी कम था और मैं सोचती थी कि सामाजिक और आर्थिक विषमता को कैसे दूर किया जाए। देश के लोगों को जोड़ने के अपने मिशन और उद्देश्य के तहत उस समय हम एक छोटा सा स्टार्टअप थे। नौ साल के लंबे समय के बाद मुझे लगता है कि यह मिशन काफी हद तक पूरा हो चुका है।’

वहीं, दास के इस निर्णय के बारे में ‘फेसबुक इंडिया’ के हेड अजीत मोहन ने कहा, ‘अंखी दास ने फेसबुक में अपने पद से हटने का निर्णय किया है। उन्होंने जन सेवा में अपनी रुचि के अनुसार काम करने के लिये यह कदम उठाया है। अंखी हमारे उन पुराने कर्मचारियों में शामिल हैं, जिन्होंने भारत में कंपनी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। वह पिछले नौ साल से अधिक समय से अपनी सेवा दे रही थीं। वह पिछले दो साल से मेरी टीम का हिस्सा थी। उन्हें जो भूमिका दी गई थी, उसमें उन्होंने शानदार योगदान दिया। हम उनकी सेवा के आभारी हैं और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हैं।’

गौरतलब है कि पिछले दिनों ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में फेसबुक हेट-स्पीच रूल्स कोलाइड विद इंडियन पॉलिटिक्स शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट के बाद भारत में सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था। अमेरिकी अखबार की इस रिपोर्ट में अंखी दास का जिक्र करते हुए कहा था कि फेसबुक भारत में बीजेपी नेताओं के हेट स्पीच के मामलों में नियम में ढील बरतता है। इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने बीजेपी-आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा था कि फेसबुक और वॉट्सऐप इनके कब्जे में हैं, जिसके जरिये ये नफरत और फेक न्यूज फैलाते हैं।

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वॉट्सऐप पर चुनिंदा सर्विसेज के लिए फेसबुक वसूलेगा चार्ज

फेसबुक ने वॉट्सऐप बिजनेस ऐप पर चुनिंदा सर्विसेज के लिए यूजर्स से शुल्क वसूलने का मन बना लिया है

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
Whatsapp

फेसबुक ने वॉट्सऐप बिजनेस ऐप पर चुनिंदा सर्विसेज के लिए यूजर्स से शुल्क वसूलने का मन बना लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फेसुबक कितना शुल्क वसूलेगा, अभी इसका खुलासा नहीं हुआ है।  

इस बीच, फेसबुक ने यह जानकारी भी दी है कि वह वॉट्सऐप पर एक शॉपिंग बटन भी जोड़ेगा, जिसका इस्तेमाल बाद में भारत में किया जाएगा।

मई में, वॉट्सऐप ने यह जानकारी दी थी कि यूजर्स अपने बिजनेस अकाउंट को अपने फेसबुक पेजेस से जोड़ सकेगा।

यह नया फीचर यूजर्स को उनके फेसबुक पेजेस के लिए ऐडवर्टाइजमेंट्स बनाने में मदद करेगा, जो सीधे उनके वॉट्सऐप अकाउंट से जुड़े हैं। इसलिए जब एक कस्टमर फेसबुक विज्ञापन पर क्लिक करेगा, तो यह फीचर उसे सीधे वॉट्सऐप बिजनेस ऐप पर ले जाएगा।

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