निशाना साध रहे लोगों को सुधीर चौधरी ने कुछ यूं दिया जवाब

जी न्यूज के (ZEE NEWS) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और कोशिश करते हैं कि वे ज्यादा से ज्यादा फॉलोअर्स के टच में रहे

Last Modified:
Saturday, 14 March, 2020
sudhir

जी न्यूज के (ZEE NEWS) के एडिटर-इन-चीफ सुधीर चौधरी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और कोशिश करते हैं कि वे ज्यादा से ज्यादा फॉलोअर्स के टच में रहें और उनके सवालों का जवाब भी दें। अपनी इसी कोशिश के दौरान इस बार उन्होंने उन लोगों पर तीखा हमला किया है, जिन्होंने डीएनए कार्यक्रम में किए उनके खुलासे को लेकर उन पर निशाना साधा था।

सुधीर चौधरी ने अपने एक ट्वीट के जरिये कहा कि किसी पत्रकार के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार ये है कि जब जमीन से जुड़े लोग उस मुहिम से जुड़ जाएं, जब देश के लोग कहें कि आपने सच दिखाया और ये अभियान बन जाए। अंग्रेजी बोलने वाले सत्ता के दरबारी पत्रकार और सिलेब्रिटी क्या कहते हैं, इसकी परवाह हमने कभी नहीं की।

दरसअसल, सुधीर चौधरी का ये ट्वीट बॉलिवुड के म्यूजिक डायरेक्टर विशाल ददलानी और वरिष्ठ टीवी पत्रकार राजदीप सरदेसाई द्वारा उन पर उठाए गए सवालों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।   

बता दें कि विशाल ददलानी ने हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी पर तीखा हमला करते हुए उनकी तुलना कीटाणु से की। इतना ही नहीं उन्होंने मुंबई और दिल्ली पुलिस से सुधीर चौधरी की गिरफ्तारी की भी मांग की।

दरअसल हाल ही में अपने ‘डीएनए’ शो में सुधीर चौधरी ने जेहाद पर एक कार्यक्रम किया था, जिसमें उन्होंने जेहाद के अलग-अलग रूप गिनवाए थे। इसी को लेकर विशाल ने उन पर निशाना साधा है। वहीं इससे पहले वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई भी सुधीर चौधरी के इस खुलासे पर अपनी प्रतिक्रिया देने से खुद को नहीं रोक पाए थे।

राजदीप सरदेसाई ने सुधीर चौधरी के शो पर सवाल खड़े करते हुए अपने ट्वीट में लिखा था, ‘इस चैनल द्वारा दैनिक आधार पर फैलाई जा रही अकथनीय सांप्रदायिक घृणा चौंकाने वाली, शर्मनाक और खतरनाक है। और यह वही चैनल है, जिसका समर्थन सरकार के ही एक सांसद करते हैं! क्या सत्ता में मौजूद कोई व्यक्ति इस पर ध्यान देगा, और इस गंदगी को रोक पाएगा? या इसे आगे बढ़ाएगा?'

हालांकि कुछ ही घंटों बाद इस ट्वीट के जवाब में सुधीर चौधरी ने राजदीप के ट्वीट को ही शेयर करते हुए सीधे और स्पष्ट शब्दों में लिखा, ‘हमने जेहाद का सच दिखाया तो ‘मीडिया के जेहादी’ भड़क गए। गुजरात दंगों को बेच-बेचकर पद्म पुरस्कार पाने वाले ये दरबारी पत्रकार पिछली सरकारों के एजेंट बनकर दर्शकों को झूठ दिखाते रहे। अब सच इनसे देखा नहीं जा रहा। हैरान हूं, इन्हें अब भी रोजगार मिल जाता है। हिंदू आतंकवाद ठीक, जेहाद गलत?‘

गौरतलब है कि सुधीर चौधरी ने 11 मार्च को अपने प्राइमटाइम कार्यक्रम ‘डीएनए’ (DNA) में चौंकाने वाला खुलासा किया था कि कैसे हमारे देश में लव जेहाद की तरह जमीन जेहाद भी हो रहा है। उन्होंने बताया था कि जम्मू-कश्मीर ही वह राज्य है, जहां पिछले 17 वर्षो के दौरान इस घोटाले को अंजाम दिया गया। यहां ‘रोशनी एक्ट’ नाम के एक कानून के तहत सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों को ही जमीन का असली मालिक बना दिया गया।  

हालांकि उनके इसी खुलासे के बाद देश के वरिष्ठ पत्रकारों, कलाकारों और बुद्धजीवियों ने उन पर सवाल उठाए थे। हालांकि सोशल मीडिया में कुछ लोग सुधीर चौधरी का समर्थन कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोग विरोध में हैं।

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सोशल मीडिया पर पोस्ट को लेकर पुलिस के एक्शन से सुप्रीम कोर्ट नाराज, कही ये बात

कोलकाता पुलिस को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम नागरिकों को सरकार की आलोचना करने के लिए प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 29 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 29 October, 2020
Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों की आलोचना करने और कथित रूप से राजनीतिक तंत्र को बदनाम करने वाली सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए दूरदराज के लोगों को पुलिस द्वारा समन भेजने के चलन पर चिंता जाहिर की है। कोलकाता पुलिस को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम नागरिकों को सरकार की आलोचना करने के लिए प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में कहा, ‘सरकारी तंत्र की आलोचना और उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट्स डालने पर हम नागरिकों को देश के एक कोने से दूसरे कोने नहीं भेज सकते हैं।’ पुलिस को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘ऐसी पोस्ट को आधार बनाकर लोगों को एक कोने से दूसरे कोने घसीटने की हरकत बंद करें। हम बोलने की स्वतंत्रता (Freedom Of Speech) पर रोक नहीं लगने देंगे।’

दरअसल, दिल्ली निवासी रोशनी बिस्वास (29) ने लॉकडाउन के मानदंडों को लागू नहीं करने को लेकर सोशल पोस्ट्स के जरिये पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना की थी। इन पोस्ट में महिला ने कोरोना महामारी के बीच कोलकाता के भीड़भाड़ वाले राजा बाजार इलाके की तस्वीर शेयर की थीं और लॉकडाउन के नियमों को लेकर ममता सरकार की ढिलाई पर सवाल उठाए थे। इसके बाद बंगाल पुलिस ने महिला को समन जारी करते हुए कड़ी चेतावनी दी थी।

पुलिस ने इस संबंध में विशेष समुदाय के खिलाफ नफरत भड़काने का आरोप लगाते हुए एक प्राथमिकी दर्ज की थी। चूंकि उस इलाके में एक समुदाय विशेष की ज़्यादा आबादी है, इसलिए पुलिस ने पोस्ट को सांप्रदायिक नफरत भरा करार दिया। इस मामले में याचिकाकर्ता ने सबसे पहले मई के महीने में दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट जाने की सलाह दी थी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने महिला की फेसबुक पोस्ट को लेकर उसे पूछताछ के लिए पुलिस के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा था। रोशनी ने अपने वकील महेश जेठमलानी के माध्यम से पुलिस द्वारा उन्हें समन जारी करने को चुनौती दी और कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल पुलिस को फटकार लगाई है।

लोगों को संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (A) के तहत दी जाने वाली बोलने की आजादी के अधिकार का हवाला देते हुए जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा, ‘सीमा को पार न करें। भारत को स्वतंत्र देश बने रहने दीजिए। सुप्रीम कोर्ट के रूप में हम बोलने की आज़ादी की रक्षा के लिए यहां हैं। संविधान ने इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट बनाया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य आम नागरिकों को प्रताड़ित न करें।'

पीठ का यह भी कहना था, ‘सरकार की आलोचना वाले सोशल मीडिया पोस्ट्स के लिए रोशनी को पुलिस द्वारा समन भेजना बोलने के अधिकार के साथ छल है। किसी भी नागरिक पर सिर्फ यह कहने के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है कि सरकार कोरोना महामारी से निपट पाने में असफल सिद्ध हो रही है।’ पीठ ने कहा, ‘कल को कोलकाता, चेन्नई, मुंबई और मणिपुर की पुलिस भी यही करेगी और देश के सभी राज्यों के लोगों को कड़ी चेतावनी देते हुए समन भेजने लगेगी’।

राज्य सरकार के काउंसिल ने इसके बाद बीच का रास्ता निकालते हुए कहा कि कोलकाता पुलिस दिल्ली जाकर महिला से पूछताछ करेगी। इसलिए महिला को जांच में सहयोग करने को कहा जाए। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस पर रजामंदी दी।

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फेसबुक इंडिया की महिला अधिकारी ने इस्तीफा दिया, बताई यह वजह

सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अंखी दास ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Ankhi Das

सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्‍टर अंखी दास ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी के अनुसार, उन्होंने जन सेवा में अपनी रुचि के अनुसार काम करने के लिए यह कदम उठाया है।

अपने इस कदम के बारे में अंखी दास ने कहा, ‘मैंने फेसबुक से इस्तीफा देने का निर्णय किया है ताकि जन सेवा में अपनी व्यक्तिगत रूचि के अनुसार काम कर सकूं। वर्ष 2011 में जब मैंने फेसबुक जॉइन किया था, तब देश में इंटरनेट का विकास काफी कम था और मैं सोचती थी कि सामाजिक और आर्थिक विषमता को कैसे दूर किया जाए। देश के लोगों को जोड़ने के अपने मिशन और उद्देश्य के तहत उस समय हम एक छोटा सा स्टार्टअप थे। नौ साल के लंबे समय के बाद मुझे लगता है कि यह मिशन काफी हद तक पूरा हो चुका है।’

वहीं, दास के इस निर्णय के बारे में ‘फेसबुक इंडिया’ के हेड अजीत मोहन ने कहा, ‘अंखी दास ने फेसबुक में अपने पद से हटने का निर्णय किया है। उन्होंने जन सेवा में अपनी रुचि के अनुसार काम करने के लिये यह कदम उठाया है। अंखी हमारे उन पुराने कर्मचारियों में शामिल हैं, जिन्होंने भारत में कंपनी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। वह पिछले नौ साल से अधिक समय से अपनी सेवा दे रही थीं। वह पिछले दो साल से मेरी टीम का हिस्सा थी। उन्हें जो भूमिका दी गई थी, उसमें उन्होंने शानदार योगदान दिया। हम उनकी सेवा के आभारी हैं और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हैं।’

गौरतलब है कि पिछले दिनों ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में फेसबुक हेट-स्पीच रूल्स कोलाइड विद इंडियन पॉलिटिक्स शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट के बाद भारत में सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था। अमेरिकी अखबार की इस रिपोर्ट में अंखी दास का जिक्र करते हुए कहा था कि फेसबुक भारत में बीजेपी नेताओं के हेट स्पीच के मामलों में नियम में ढील बरतता है। इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने बीजेपी-आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा था कि फेसबुक और वॉट्सऐप इनके कब्जे में हैं, जिसके जरिये ये नफरत और फेक न्यूज फैलाते हैं।

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फेसबुक इंडिया की महिला अधिकारी ने दिया इस्तीफा, बताई यह वजह

सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अंखी दास ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 28 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 28 October, 2020
Ankhi Das

सोशल मीडिया कंपनी ‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्‍टर अंखी दास ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी के अनुसार, उन्होंने जन सेवा में अपनी रुचि के अनुसार काम करने के लिए यह कदम उठाया है।

अपने इस कदम के बारे में अंखी दास ने कहा, ‘मैंने फेसबुक से इस्तीफा देने का निर्णय किया है ताकि जन सेवा में अपनी व्यक्तिगत रूचि के अनुसार काम कर सकूं। वर्ष 2011 में जब मैंने फेसबुक जॉइन किया था, तब देश में इंटरनेट का विकास काफी कम था और मैं सोचती थी कि सामाजिक और आर्थिक विषमता को कैसे दूर किया जाए। देश के लोगों को जोड़ने के अपने मिशन और उद्देश्य के तहत उस समय हम एक छोटा सा स्टार्टअप थे। नौ साल के लंबे समय के बाद मुझे लगता है कि यह मिशन काफी हद तक पूरा हो चुका है।’

वहीं, दास के इस निर्णय के बारे में ‘फेसबुक इंडिया’ के हेड अजीत मोहन ने कहा, ‘अंखी दास ने फेसबुक में अपने पद से हटने का निर्णय किया है। उन्होंने जन सेवा में अपनी रुचि के अनुसार काम करने के लिये यह कदम उठाया है। अंखी हमारे उन पुराने कर्मचारियों में शामिल हैं, जिन्होंने भारत में कंपनी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। वह पिछले नौ साल से अधिक समय से अपनी सेवा दे रही थीं। वह पिछले दो साल से मेरी टीम का हिस्सा थी। उन्हें जो भूमिका दी गई थी, उसमें उन्होंने शानदार योगदान दिया। हम उनकी सेवा के आभारी हैं और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हैं।’

गौरतलब है कि पिछले दिनों ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में फेसबुक हेट-स्पीच रूल्स कोलाइड विद इंडियन पॉलिटिक्स शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट के बाद भारत में सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था। अमेरिकी अखबार की इस रिपोर्ट में अंखी दास का जिक्र करते हुए कहा था कि फेसबुक भारत में बीजेपी नेताओं के हेट स्पीच के मामलों में नियम में ढील बरतता है। इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने बीजेपी-आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा था कि फेसबुक और वॉट्सऐप इनके कब्जे में हैं, जिसके जरिये ये नफरत और फेक न्यूज फैलाते हैं।

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वॉट्सऐप पर चुनिंदा सर्विसेज के लिए फेसबुक वसूलेगा चार्ज

फेसबुक ने वॉट्सऐप बिजनेस ऐप पर चुनिंदा सर्विसेज के लिए यूजर्स से शुल्क वसूलने का मन बना लिया है

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
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फेसबुक ने वॉट्सऐप बिजनेस ऐप पर चुनिंदा सर्विसेज के लिए यूजर्स से शुल्क वसूलने का मन बना लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फेसुबक कितना शुल्क वसूलेगा, अभी इसका खुलासा नहीं हुआ है।  

इस बीच, फेसबुक ने यह जानकारी भी दी है कि वह वॉट्सऐप पर एक शॉपिंग बटन भी जोड़ेगा, जिसका इस्तेमाल बाद में भारत में किया जाएगा।

मई में, वॉट्सऐप ने यह जानकारी दी थी कि यूजर्स अपने बिजनेस अकाउंट को अपने फेसबुक पेजेस से जोड़ सकेगा।

यह नया फीचर यूजर्स को उनके फेसबुक पेजेस के लिए ऐडवर्टाइजमेंट्स बनाने में मदद करेगा, जो सीधे उनके वॉट्सऐप अकाउंट से जुड़े हैं। इसलिए जब एक कस्टमर फेसबुक विज्ञापन पर क्लिक करेगा, तो यह फीचर उसे सीधे वॉट्सऐप बिजनेस ऐप पर ले जाएगा।

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न्यूज कंटेंट के लिए गूगल पब्लिशर्स को देगी 1 बिलियन डॉलर, 200 के साथ किया सौदा

दिग्गज टेक कंपनी गूगल अगले तीन साल में कुछ देशों के पब्लिशर्स को उनके न्यूज कंटेंट के लिए एक बिलियन डॉलर का भुगतान करेगी

Last Modified:
Friday, 02 October, 2020
googlenews

दिग्गज टेक कंपनी गूगल अगले तीन साल में कुछ देशों के पब्लिशर्स को उनके न्यूज कंटेंट के लिए एक बिलियन डॉलर का भुगतान करेगी। गूगल ने इसके लिए कुछ देशों के 200 पब्लिकेशंस के साथ एक लाइसेंसिग सौदा किया है। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने एक ब्लॉगपोस्ट के जरिए गुरुवार को इस बात की जानकारी दी है।

गुरुवार से शुरू हुए गूगल के इस प्रोजेक्ट के बारे में कंपनी के सीईओ सुंदर पिचाई ने बताया  कि ‘गूगल न्यूज शोकेस’ (Google News Showcase) की शुरुआत सबसे पहले जर्मनी और ब्राजील में होगी। कंपनी ने इसके लिए Der Spiegel, Stern, Die Zeit जैसे समाचार पत्रों के साथ समझौता किया है। इसके अलावा कंपनी ने ब्राजील में Folha de S.Paulo, Band और Infobae के साथ पार्टनरशिप की है। अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ब्राजील, कनाडा और जर्मनी के लगभग 200 पब्लिकेशंस ने इस प्रॉडक्ट के लिए करार किया है। इस प्रॉडक्ट को बेल्जियम, भारत और नीदरलैंड में भी पेश किया जाएगा।

यह न्यूज शोकेस फिलहाल केवल एंड्रॉयड पर उपलब्ध गूगल न्यूज एप पर उपलब्ध होगा। लेकिन, जल्द ही इसे आईओएस के लिए भी लॉन्च किया जाएगा। गूगल की योजना इस फीचर को गूगल डिस्कवर एप और गूगल सर्च में भी देने की है।  

इस प्रॉडक्ट में पब्लिशर्स अपनी स्टोरी चुन सकेंगे और उन्हें प्रेजेंट कर सकेंगे। यहां पब्लिशर्स फीचर आर्टिकल्स पर भी फोकस करेंगे, जिनमें टाइमलाइन, बुलेट्स और रिलेटेड आर्टिकल्स शामिल होंगे। इसके अलावा, इनमें दूसरे कॉम्पोनेंट जैसे- वीडियो, ऑडियो और डेली ब्रीफिंग भी होंगे।

इसी साल जून में गूगल ने ‘गूगल न्यूज शोकेस’ का ऐलान किया था, जो गूगल की न्यूज लाइसेंसिंग प्रोग्राम (News Licensing Programme) का हिस्सा होगा। कंपनी का कहना है कि ये रीडर्स और पब्लिशर्स के फायदे के लिए बनाया गया है।

न्यूज इंडस्ट्री में फेसबुक के साथ गूगल विज्ञापन के एक बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है। विज्ञापनों का यह हिस्सा पहले न्यूज इंडस्ट्री के पब्लिशर्स के पास जाता था। गूगल का यह कदम पब्लिशर्स को यह बताने के लिए है कि वह उच्च गुणवत्ता की पत्रकारिता के लिए और संकट से गुजर रहे इस क्षेत्र की बेहतरी के लिए वह भुगतान करने को तैयार है।

इसमें शामिल पब्लिशर इस बात का निर्णय कर सकेंगे कि प्लेटफॉर्म पर उनका कंटेंट किस तरह दिखाई दे। ऐसे लोग जिन्होंने सब्स्क्रिप्शन नहीं लिया है, उनके लिए पेड कंटेंट को मुफ्त उपलब्ध कराने के लिए कुछ पब्लिशर्स को गूगल भुगतान करेगा।

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अपने एम्प्लॉयीज के कार्यों से खुश ShareChat, की बड़ी घोषणा

एक तरफ जहां, लॉकडाउन के दौरान हुए नुकसान की वजह से कई कंपनियों से कॉस्ट कटिंग और छंटनी की खबरें सामने आईं, वहीं अब एक ऐसी कंपनी भी है, जो अपने एम्प्लॉयीज के किए गए कार्यों से काफी खुश है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 23 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 23 September, 2020
Share Chat

एक तरफ जहां, लॉकडाउन के दौरान हुए नुकसान की वजह से कई कंपनियों से कॉस्ट कटिंग और छंटनी की खबरें सामने आईं, वहीं अब एक ऐसी कंपनी भी है, जो ऐसे समय पर अपने एम्प्लॉयीज के किए गए कार्यों से काफी खुश है। ये कंपनी है भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शेयरचैट (ShareChat), जिसने अब अपने कर्मचारियों को पुरस्कृत करने का फैसला किया है।

लिहाजा शेयरचैट ने अपने कर्मचारियों को कंपनी के प्रति उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण को देखते हुए ही उन्हें पुरस्कृत करने के लिए ईसॉप (कर्मचारी शेयर विकल्प) पूल में 1.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर और अतिरिक्त बढ़ाए हैं। इसके साथ ही अब शेयरचैट का कुल ईसॉप (ESOP) पूल $ 3.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का हो गया है।

साथ ही कंपनी ने ईसॉप रखने वाले अपने मौजूदा कर्मचारियों को 50 प्रतिशत बोनस देने की भी घोषणा की है। कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘ईसॉप योजना को वेतनमान वाले प्रत्येक कर्मचारी के लिए बढ़ाया गया है, जिसमें प्रशासनिक कर्मचारी भी शामिल हैं। ‘शेयरचैट’ और हाल ही में लॉन्च किए गए शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म ‘मौज’, दोनों ने ही जोरदार वृद्धि हासिल की। लिहाजा एम्प्लॉईज की कड़ी मेहनत को मान्यता देने के लिए यह निर्णय लिया गया।’

बयान के मुताबिक यह योजना मौजूदा कर्मचारियों पर लागू होगी, जो 30 जून 2020 तक कंपनी के वेतनमान पर थे। इस समय शेयरचैट में 400 से अधिक कर्मचारी हैं।

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खबरों का सबसे विश्वसनीय स्रोत है ये मीडिया माध्यम, सर्वे में हुआ खुलासा

मीडिया कंसल्टिंग फर्म ‘ऑरमैक्स मीडिया’ (Ormax Media) ने ‘फैक्ट या फेक?’ नाम से आज अपनी रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट न्यूज कंज्यूमर्स के सर्वे पर आधारित है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 17 September, 2020
Last Modified:
Thursday, 17 September, 2020
media

मीडिया कंसल्टिंग फर्म ‘ऑरमैक्स मीडिया’ (Ormax Media) ने ‘फैक्ट या फेक?’ नाम से आज अपनी रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट न्यूज कंज्यूमर्स के सर्वे पर आधारित है और विभिन्न न्यूज मीडिया की विश्वसनीयता के साथ-साथ ‘फेक न्यूज’ की समग्र धारणा को मापता है। यह सर्वे देश के केंद्र शासित प्रदेशों और 17 राज्यों के 2,400 शहरी समाचार उपभोक्ताओं (Urban news consumers ) (15 वर्ष से ऊपर) के बीच आयोजित किया गया था।

इस रिपोर्ट में ये निष्कर्ष निकला है कि शहरी भारत में समाचार विश्वसनीयता सूचकांक (News Credibility Index) केवल 39% है। अर्थात, 61% समाचार उपभोक्ता फेक न्यूज को देखते हैं, जोकि चिंताजनक है।

62% पर मीडिया विश्वसनीयता सूचकांक (Media Credibility Index) के साथ प्रिंट मीडिया सबसे ऊपर है। इसके बाद रेडियो नंबर आता है और फिर टेलीविजन का। डिजिटल मीडिया की तुलना में पारंपरिक मीडिया (Traditional media) की अधिक विश्वसनीयता है। वहीं सोशल मीडिया की बात की जाए तो खबरों के लिए सबसे विश्वसनीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्विटर है, जिसकी विश्वसनीयता सूचकांक 53% है।

रिपोर्ट और इसके निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए ऑरमैक्स मीडिया के फाउंडर व सीईओ शैलेश कपूर ने कहा कि फेक न्यूज से संबंधित चिंताएं विश्व स्तर के साथ-साथ भारत में भी चर्चा का विषय रही है। गुजरते वक्त के साथ फेक न्यूज की  समस्या बहुत ही बड़ी होती जा रही है। भारत में यह सर्वे  इस बढ़ती चिंता को मापने के लिए आयोजित किया गया था। साथ ही यह समझने के लिए भी कि क्या कुछ मीडिया दूसरों की तुलना में बेहतर कर रही हैं। हम हर छह महीने में इन मेजर्स को समझने की योजना बनाते हैं, ताकि हम यह तुलना कर सकें कि फेक न्यूज के बारे में समाचार उपभोक्ताओं की धारणा समय के साथ कैसे बदल रही है।

समाचार विश्वसनीयता सूचकांक (News Credibility Index) और मीडिया विश्वसनीयता सूचकांक (Media Credibility Index) समाचार उपभोक्ताओं (खबरें देखने वालों का) का एक प्रतिशत है, जो फेक न्यूज को एक बड़ी परेशानी के तौर पर नहीं देखते हैं।

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हेट स्पीच के मामलों में कार्यवाही को लेकर फेसबुक इंडिया के MD अजीत मोहन ने कही ये बात

‘फेसबुक इंडिया’ के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन का कथित तौर पर कहना कि यह प्लेटफॉर्म हेट स्पीच यानी घृणा फैलाने वाली सामग्री से किसी तरह का फायदा नहीं उठाता है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 16 September, 2020
Last Modified:
Wednesday, 16 September, 2020
Ajit Mohan

‘फेसबुक इंडिया’ (Facebook India) के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन का कथित तौर पर कहना कि यह प्लेटफॉर्म हेट स्पीच (hate speech) यानी घृणा फैलाने वाली सामग्री से किसी तरह का कोई फायदा नहीं उठाता है। एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार के साथ बातचीत के दौरान अजीत मोहन का कथित रूप से यह भी कहना था, ‘यह न हमारे लिए अच्छा है और न इस प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों के लिए। हेट स्पीच से कहीं कोई फायदा नहीं है।’

इस दौरान मोहन ने राजनीतिक नेताओं और अन्य प्रभावशाली लोगों द्वारा नफरत भरे संदेश पोस्ट करने पर प्रतिबंध नहीं लगाने के आरोपों को लेकर भी अपनी बात रखी। यह पूछे जाने पर कि बीजेपी नेता पर बैन लगाने में देरी क्यों की गई, मोहन ने कथित तौर पर कहा कि इस प्लेटफॉर्म पर किसी को बैन किए जाने का मुद्दा ‘जटिल’ है और विवाद बढ़ने पर फेसबुक बैन लगाने की प्रक्रिया को लगभग पूरा कर चुका था।  

अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (Wall Street Journal) द्वारा यह लिखे जाने के बाद कि सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टी के दबाव में नेता को बैन नहीं किया गया, फेसबुक ने इस महीने की शुरुआत में उक्त नेता पर बैन लगा दिया था।

करीब 20 महीने पूर्व फेसबुक में इस पद की जिम्मेदारी संभालने वाले अजीत मोहन ने कथित रूप से कहा कि पिछले तीन सालों में घृणा फैलाने वाली सामग्री पर अंकुश लगाने की दिशा में फेसबुक की प्रतिबद्धता दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि जून तिमाही में इस प्लेटफॉर्म से घृणास्पद कंटेंट के 22 मिलियन से अधिक पीस हटाए गए हैं।

बता दें कि इससे पहले अजीत मोहन ने फरवरी में दिल्ली दंगों के दौरान नफरत फैलाने वाले कंटेंट को हटाने में नाकाम रहने के मामले में दिल्ली विधानसभा समिति द्वारा जारी समन को लेकर मंगलवार को कथित तौर पर वापस लेने के लिए बोल दिया था।

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कोविड-19 से प्रभावित छोटे व्यवसायों की कुछ इस तरह मदद करेगी फेसबुक

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ ने कोविड-19 से प्रभावित हुए छोटे व्यवसायों को सपोर्ट करने की अपनी मुहिम के तहत 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर अनुदान (grant) की घोषणा की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 15 September, 2020
Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2020
Facebook

सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘फेसबुक’ (Facebook) ने कोविड-19 (COVID-19) से प्रभावित हुए छोटे व्यवसायों को सपोर्ट करने की अपनी मुहिम के तहत 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर अनुदान (grant) की घोषणा की है। इस कार्यक्रम के तहत भारत समेत 30 से ज्यादा देशों के 30 हजार से ज्यादा छोटे व्यवसायों को शामिल किया गया है। फेसबुक की ओर से इस कार्यक्रम के लिए अब भारत में आवेदन मांगे गए हैं।

अनुदान को प्राप्त करने के लिए पात्रता की शर्तों के अनुसार, बिजनेस ने कोविड-19 की चुनौतियों का सामना किया हो। एक जनवरी तक उसमें दो से 50 एम्प्लॉयीज कार्यरत रहे हों। वह बिजनेस एक साल से ज्यादा समय से चल रहा हो। फेसबुक इंडिया के ऑफिस के आसपास-नई दिल्ली, गुरुग्राम, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई में स्थित होना चाहिए। आवेदन 21 सितंबर तक भेजे जा सकते हैं।

फेसबुक के अनुसार, यह कार्यक्रम प्रभावित व्यवसायों को उनके कार्यबल (वर्कफोर्स) को मजबूत रखने में मदद करने के साथ ही किराए और परिचालन लागतों में मदद करेगा। इसके साथ ही ज्यादा कस्टमर्स से जुड़ने में भी सहायक होगा।

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फेसबुक इंडिया में इस बड़े पद पर जिम्मेदारी निभाएंगे अरुण श्रीनिवास

पिछले कुछ महीनों के दौरान फेसबुक में मार्केटिंग, पार्टनरशिप, कम्युनेशंस और अन्य वर्टिकल्स में सीनियर लेवल पर कई नियुक्तियां की गई हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 14 September, 2020
Last Modified:
Monday, 14 September, 2020
Arun Srinivas

‘फेसबुक’ (Facebook) इंडिया ने अरुण श्रीनिवास को डायरेक्टर (ग्लोबल बिजनेस ग्रुप) के पद पर नियुक्त किए जाने की घोषणा की है। बता दें कि पिछले कुछ महीनों के दौरान फेसबुक में मार्केटिंग, पार्टनरशिप, कम्युनेशंस और अन्य वर्टिकल्स में सीनियर लेवल पर कई नियुक्तियां की गई हैं।

इस पद पर अपनी भूमिका के तहत श्रीनिवास देश के प्रमुख ब्रैंड्स, एजेंसियों के साथ भारत के प्रमुख चैनल्स में फेसबुक के राजस्व में वृद्धि करने के लिए कंपनी के रणनीतिक संबंधों को बढ़ावा देंगे।श्रीनिवास को OLA, Unilever और Reebok जैसे प्रतिष्ठित ब्रैंड्स के साथ सेल्स और मार्केटिंग में काम करने का करीब 24 साल का अनुभव है।

इसके अलावा वह निवेश फर्म WestBridge Capital Partners के साथ भी काम कर चुके हैं, जहां पर वह कंज्यूमर वर्टिकल का नेतृत्व करते थे। फेसबुक इंडिया से पहले वह OLA में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और OLA Mobility में ग्लोबल चीफ मार्केटिंग ऑफिसर के पद पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

श्रीनिवास ने अपने करियर की शुरुआत Reebok के साथ की थी और फिर Unilever का रुख कर लिया, जहां पर उन्होंने 15 साल से ज्यादा समय तक अपनी भूमिका निभाई। श्रीनिवास ने ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट’, कोलकाता से पढ़ाई की है।

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