अब नए तेवर व कलेवर के साथ पाठकों को पढ़ने को मिलेगा यह अखबार

राजनगर डिस्ट्रिक सेंटर (आरडीसी) में पिछले दिनों अखबार के नए कार्यालय का उद्घाटन किया गया।

Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2020
Newspaper

उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद से पब्लिश होने वाला हिंदी दैनिक ‘अथाह’ (Athah) अब नए तेवर व कलेवर के साथ पाठकों को पढ़ने के लिए मिलेगा। राजनगर डिस्ट्रिक सेंटर (आरडीसी) में शुक्रवार को अखबार के नए कार्यालय का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही अखबार ने डिजिटल की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं और अपनी वेबसाइट https://dainikathah.com/ लॉन्च की है। इस अखबार का ई-पेपर भी पाठकों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

अखबार के प्रधान संपादक अशोक ओझा ने बताया कि हालांकि अखबार पिछले 33 सालों से प्रकाशित हो रहा है, लेकिन अब नए तेवर व कलेवर के साथ यह पाठकों के सामने पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि निष्पक्षता और पारदर्शिता अखबार की प्राथमिकता होगी।अखबार में सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक, खेलकूद, अध्यात्म और मनोरंजन से जुड़ी खबरों के साथ जनहित से जुड़ी सरकारी और गैरसरकारी योजनाओं को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि अखबार में समाचारों के साथ विचार और विश्लेषण को भी महत्व दिया जाएगा और यही इसकी टैगलाइन भी रखी गई है। छह पेज के इस अखबार की कीमत दो रुपए रखी गई है। बता दें कि अशोक ओझा पूर्व में राष्ट्रीय सहारा, दैनिक भास्कर गाजियाबाद में काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह दैनिक जागरण, गाजियाबाद में लंबे समय तक ब्यूरो चीफ भी रहे हैं। वह दैनिक जागरण में जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर में चीफ रिपोर्टर भी रह चुके हैं।

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अब इस समूह के हाथ में होगी ‘फॉर्च्यून इंडिया’ की कमान

इस बारे में समूह ने ‘फॉर्च्यून’ मैगजीन के पब्लिशर ‘फॉर्च्यून मीडिया ग्रुप’ के साथ एक समझौते की घोषणा की है

Last Modified:
Friday, 03 July, 2020
Magazine

आरपी संजीव गोयनका समूह (RP-Sanjiv Goenka Group) प्रतिष्ठित बिजनेस मैगजीन ‘फॉर्च्यून’ (Fortune) के इंडिया एडिशन को पब्लिश करेगा। इस बारे में ग्रुप ने ‘फॉर्च्यून’ मैगजीन के पब्लिशर ‘फॉर्च्यून मीडिया ग्रुप’ के साथ एक समझौते की घोषणा की है। इस बारे में आरपी संजीव गोयनका (RPSG) समूह के चेयरमैन संजीव गोयनका का कहना है कि वह इस पार्टनरशिप से बहुत खुश हैं।

संजीव गोयनका के अनुसार, ‘फॉर्च्यून विश्व के बड़े मीडिया ब्रैंड्स में शुमार है और ऐसे समय में जब सरकार देश की नई पीढ़ी और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है, फॉर्च्यून इंडिया इस ग्रुप में एक नई पहचान शामिल करेगी। हमारे पास फॉर्च्यून इंडिया के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं।’   

वहीं, ‘फॉर्च्यून मीडिया ग्रुप’ के सीईओ एलन मुरे (Alan Murray) का कहना है, ‘इस पार्टनरशिप के साथ दो बड़े संस्थान एक साथ आए हैं। हमारे लिए भारत प्रमुख मार्केट है और हमें विश्वास है कि आरपी संजीव गोयनका समूह के नेतृत्व में फॉर्च्यून इंडिया नई ऊंचाइयों को छुएगी।’ गौरतलब है कि भारत में पहले यह मैगजीन 'आनंद बाजार पत्रिका' (एबीपी) समूह द्वारा पब्लिश की गई थी। 

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अमर उजाला के ई-पेपर की PDF प्रसारित करने पर हुई शिकायत

अमर उजाला के ई-पेपर की पीडीएफ अनधिकृत रूप से प्रसारित करने पर हरियाणा पुलिस ने बुधवार को कुछ वॉट्सऐप ग्रुप के एडमिन से पूछताछ की है

Last Modified:
Friday, 03 July, 2020
PDF

अमर उजाला के ई-पेपर की पीडीएफ (PDF) अनधिकृत रूप से प्रसारित करने पर हरियाणा पुलिस ने बुधवार को कुछ वॉट्सऐप ग्रुप के एडमिन से पूछताछ की है और कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। अमर उजाला प्रबंधन की ओर से की गई शिकायत के आधार पर हरियाणा पुलिस ने यह कार्रवाई की है।

बता दें कि हरियाणा के कई जिलों के कुछ वॉट्सऐप ग्रुप में अमर उजाला अखबार के ई-पेपर की पीडीएफ अनधिकृत रूप से नियमित तौर पर प्रसारित की जा रही थीं, जिसे देखते हुए अमर उजाला प्रबंधन की ओर से की गई शिकायत के आधार पर हरियाणा पुलिस ने कार्रवाई की तो कई ग्रुप एडमिन ने न सिर्फ ई-पेपर की पीडीएफ हटा ली, बल्कि भविष्य में ऐसा न करने का वादा भी किया। एडमिन ने अपने-अपने वॉट्सऐप ग्रुप में अखबारों की पीडीएफ शेयर न करने का निवेदन अपने सदस्यों से किया है।

आपको बता दें कि समाचार पत्र के ई-पेपर की पीडीएफ कॉपी डाउनलोड कर उसे वॉट्सऐप ग्रुप और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रसारित करना किसी को भी भारी पड़ सकता है। ऐसा करना न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि कॉपीराइट कानून और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन भी है। 

अदालती निर्देशों और अन्य एडवाइजरी में भी ये कहा जा चुका है कि किसी भी सोशल मीडिया ग्रुप में अखबार के ई-पेपर की पीडीएफ या अन्य माध्यम से कॉपी प्रसारित करना गैरकानूनी और अनैतिक है। इन निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया जा चुका है कि जिस भी सोशल मीडिया ग्रुप में ऐसा किया जा रहा है उसका एडमिन इस गैरकानूनी कृत्य के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।    

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कुछ यूं छात्रों का करियर संवारने में मदद करेगा India Today का स्पेशल एडिशन

हर स्ट्रीम में बेस्ट कॉलेजों की लिस्ट तैयार की गई है, ताकि कॉलेज जाने की तैयारी में जुटे विद्यार्थी जान सकें कि किस विषय की पढ़ाई के लिए कौन से कॉलेज अच्छे हैं।

Last Modified:
Friday, 26 June, 2020
IndiaToday487

'इंडिया टुडे' (India Today) मैगजीन ने देश के टॉप कॉलेजों के सर्वे पर अपना बहुप्रतीक्षित 24वां एडिशन निकाला है। वैश्विक महामारी के बीच कॉलेज सितंबर में खुलने की उम्मीद है और प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन शुरू हो चुकी है, ऐसे में छात्रों ने भी बेस्ट कॉलेज और उनमें उपलब्ध कोर्स व प्रवेश प्रक्रिया की तलाश करनी शुरू कर दी है।

मार्केट रिसर्च एजेंसी ‘मार्केटिंग एंड डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएट्स’ (MDRA) के इस सर्वे में देश के बेहतरीन कॉलेजों की एक लिस्ट बनाई गई है। इसमें 14 स्ट्रीम्स (आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स, मेडिकल, डेंटल, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, लॉ, मास कम्युनिकेशन, होटल मैनेजमेंट, बीबीए, बीसीए, सोशल वर्क और फैशन डिजाइन) को शामिल किया गया है। बताया जाता है कि हर स्ट्रीम में बेस्ट कॉलेजों की लिस्ट तैयार की गई है, ताकि कॉलेज जाने की तैयारी में जुटे विद्यार्थी और उनके अभिभावक जान सकें कि किस विषय की पढ़ाई के लिए कौन से कॉलेज अच्छे हैं।

इस महामारी को देखते हुए अगला शैक्षणिक सत्र डिजिटल इंफ्रॉस्ट्रक्चर पर ज्यादा केंद्रित होगा। मैगजीन के इस इश्यू में लोगों के दिमाग में उठने वाले तमाम सवालों को भी समाहित किया गया है जैसे- घर से दूर बड़े शहरों के कॉलेजों में प्रवेश लेने पर क्या हॉस्टल में रहना सेफ होगा अथवा पेइंग गेस्ट बनना ज्यादा ठीक रहेगा?, देश के छोटे शहरों के कॉलेज कितने अच्छे हैं? क्या इस साल ज्यादा गलाकाट प्रतियोगिता होगी? क्योंकि कोविड-19 के कारण विदेश जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट हो सकती है।  

हालांकि, सर्वे में 31 शहरों ने भाग लिया, लेकिन कला, विज्ञान और वाणिज्य में शीर्ष 25 कॉलेज केवल आठ शहरों तक ही सीमित हैं। ऐसे ही टॉप 25 इंजीनियरिंग और लॉ कॉलेज सिर्फ छह शहरों में हैं। मेडिकल की स्थिति थोड़ी बेहतर है और 25 टॉप मेडिकल कॉलेजों की बात करें तो यह 11 शहरों में फैले हुए हैं।  

इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे विद्यार्थियों अथवा उनके अभिभावकों के लिए यह जानने में भी मदद करता है कि किन कॉलेजों में कोर्स फीस कम है और सबसे खास बात कि उनका प्लेसमेंट कैसा है। यही नहीं,पुराने कॉलेजों के साथ ही सर्वे में देश के उभरते कॉलेजों (वर्ष 2000 अथवा उसके बाद शुरू हुए) कॉलेजों को भी शामिल किया गया है। यह इश्यू 26 जून 2020 से स्टैंड्स पर उपलब्ध होगा।

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चुनौतीपूर्ण दौर का अखबारों ने कुछ यूं किया डटकर 'मुकाबला'

इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) की चार तिमाहियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब में तमाम अखबारों की ग्रोथ बढ़ी हुई दिखाई देती है।

Last Modified:
Friday, 26 June, 2020
Newspapers

प्रिंट मीडिया के लिए पिछला कुछ समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। लेकिन इन सबके बीच यदि हम इंडियन रीडरशिप सर्वे (IRS) की चार तिमाहियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब में तमाम अखबारों की ग्रोथ बढ़ी हुई दिखाई देती है। फिर चाहे वह ‘कुल रीडरशिप’ (total readership) हो या ‘एवरेज इश्यू रीडरशिप’ (average issue readership)।

उदाहरण के लिए, क्षेत्र के प्रमुख अखबार ‘पंजाब केसरी’ (Punjab Kesari) की ‘एवरेज इश्यू रीडरशिप’ में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ‘इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की पहली तिमाही’ (IRS 2019 Q1) के अनुसार, जहां इस अखबार की ‘एवरेज इश्यू रीडरशिप’ 936000 थी, वह तीसरी तिमाही (Q3) में बढ़कर 950000 हो गई। चौथी तिमाही (Q4) में कोविड-19 के बावजूद यह संख्या ज्यादा नहीं घटी और 872000 दर्ज की गई है।

इसी तरह की ग्रोथ स्टोरी ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) की भी है। पहली तिमाही में इसकी टोटल रीडरशिप 1857000 थी, जो दूसरी तिमाही में बढ़कर 1924000 और तीसरी तिमाही में 2167000 हो गई। यदि चौथी तिमाही की बात करें तो कोविड-19 के प्रभाव के कारण इस अखबार की टोटल रीडरशिप चौथी तिमाही में 2069000 दर्ज की गई है। इसी तरह इस अखबार की एवरेज इश्यू रीडरशिप भी क्रमश: 493000, 500000, 596000 और चौथी तिमाही में बढ़कर 634000 हो गई है।  

वहीं, ‘दैनिक जागरण’ (Dainik Jagran) की बात करें तो इस अखबार की टोटल रीडरशिप पहली तिमाही में 1819000 थी, जो दूसरी तिमाही में बढ़कर 1922000 और तीसरी तिमाही में 1971000 हो गई। चौथी तिमाही में कोविड-19 के बावजूद इस अखबार की टोटल रीडरशिप 1721000 पर बनी हुई है। इस क्षेत्र में दैनिक जागरण के एवरेज इश्यू रीडरशिप पहली तिमाही में 446000 थी जो दूसरी तिमाही में थोड़ी घटकर 436000 हो गई, लेकिन तीसरी तिमाही में इसने तेजी से बढ़त बनाई और अब तक के सबसे उच्च स्तर 466000 पहुंच गई। चौथी तिमाही में कोविड-19 के वावजूद यह 446000 जैसे प्रभावशाली स्तर पर है।  

हालांकि, इन सबके बीच ‘दैनिक सवेरा’ (Dainik Savera) की ग्रोथ में कमी देखने को मिल रही है। पहली तिमाही में जहां इसकी टोटल रीडरशिप 858000 थी, वहीं, दूसरी, तीसरी और चौथी तिमाही में इसमें काफी बदलाव देखने को मिला। तीसरी तिमाही में इस अखबार की एवरेज इश्यू रीडरशिप 381000 थी, जो चौथी तिमाही में घटकर 361000 पर आ गई।

यदि हम पंजाब केसरी, दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण को देखें तो उनकी महत्वपूर्ण ऑनलाइन मौजूदगी है। ऐसे में कोविड-19 के दौरान उनके आंकड़ों में आई क्षणिक कमी ने उनके कोर रीडरशिप बेस को प्रभावित नहीं किया है। तीनों अखबार नए परिदृश्य में पाठकों को अपने साथ फिर जोड़ने में सफल रहे हैं। इसके विपरीत दैनिक सवेरा पूर्ववत बना हुआ है और विशेषज्ञों का मानना है कि यह मीडिया हाउस इस चुनौतीपूर्ण समय को एडजस्ट करने में विफल रहा है। नए रीडरशिप ट्रेंड को एडजस्ट करने में विफल रहने की वजह से दैनिक सवेरा अपने रीडरशिप बेस को खोने का जोखिम उठा रहा है।

इस बारे में दैनिक सवेरा के मुख्य संपादक शीतल विज ने माना कि अखबार की रीडरशिप में काफी कमी आई है और वे नई स्ट्रैटेजी लाने के साथ आने की कोशिश कर रहे हैं। विज का कहना है, ‘हमारी रीडरशिप कोविड-19 के कारण प्रभावित हुई है और अब हम अपनी ऑनलाइन मौजूदगी की दिशा में काम कर रहे हैं।’ इंडियन रीडरशिप सर्वे की चौथी तिमाही में दैनिक सवेरा के कम आंकड़ों के बारे में उन्होंने आईआइएस डाटा को ही दोषी ठहराया और इसकी वैधानिकता व पारदर्शिता पर सवाल उठाया। इसके साथ ही उनका यह भी कहना था कि वह आईआरएस के कामकाज को पूरी तरह से नहीं समझते हैं। विज के अनुसार, ‘आईआरएस के कामकाज का अपना तरीका है, मुझे नहीं पता कि आईआरएस में किस तरह का काम हो रहा है।’  

इस बारे में आईआरएस की टेक्निकल कमेटी के चेयरमैन विक्रम सखूजा का कहना है, ‘ आईआरएस 3.3 लाख उत्तरदाताओं (respondents) के नमूने पर आधारित है। हमारे पास एक सत्यापन समिति है जो हर दौर के आंकड़ों को जारी करने से पहले एक कड़ी जांच करती है। रिपोर्ट जारी होने के बाद कुछ पब्लिकेशंस इन आंकड़ों से खुश नहीं होते हैं। हम उन्हें प्रश्न उठाने का मौका देते हैं और जिनका अध्ययन के डिजाइन के मापदंडों के तहत उत्तर दिया जाता है।’

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42 साल पुरानी ये लोकप्रिय मैगजीन अब हो रही बंद, लोगों ने कहा- एक युग का अंत

कोरोना अब भारत की अर्थव्यवस्था पर तेजी से असर डाल रहा है। इसकी वजह से मीडिया इंडस्ट्री भी काफी प्रभावित हुई है, जिसके चलते कई मीडियाकर्मियों को अपनी जॉब से हाथ धोना पड़ा है

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2020
cricketSamrat

कोरोनावायरस अब भारत की अर्थव्यवस्था पर तेजी से असर डाल रहा है। इसकी वजह से मीडिया इंडस्ट्री भी काफी प्रभावित हुई है, जिसके चलते कई मीडियाकर्मियों को अपनी जॉब से हाथ धोना पड़ा है, तो कई कंपनियों को अपने एडिशन तक बंद करने पड़े हैं। ऐसे में क्रिकेट की खबरों के दीवानों के लिए बुरी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में 42 साल से क्रिकेट की हर खबर देने वाली लोकप्रिय मैगजीन ‘क्रिकेट सम्राट’ बंद होने जा रही है।

अंग्रेजी दैनिक ‘मिडडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिकेट सम्राट (Cricket Samrat) के प्रकाशक ने इसे बंद करने की घोषणा कर दी है। इससे खेलप्रेमी, खासकर क्रिकेट के दीवाने खासे दुखी हैं। कुछ ने तो इसे एक युग का अंत करार दिया है।

बता दें कि पहली बार ‘क्रिकेट सम्राट’ मैगजीन का प्रकाशन नवंबर 1978 में हुआ था। लेकिन कुछ ही वर्षों में यह क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय मैगजीन बन गई। लोग बेसब्री से इसका इंतजार करते थे। इस मैगजीन में खेल की खबरों के साथ-साथ प्रमुख खिलाड़ियों के इंटरव्यू भी छपते थे। इससे लोग अपने चहेते सितारों की निजी पसंद, नापसंद, संघर्ष से लेकर तमाम बातें जान पाते थे।

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अब कुछ इस तरह मुंबई मार्केट में अपनी सेवाएं देगा The Hindu

बताया जाता है कि अपने नेशनल एडिशन के जरिये वह यहां के मार्केट में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा।

Last Modified:
Friday, 26 June, 2020
The Hindu

कोरोनावायरस (कोविड-19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू किए गए लॉकडाउन का असर तमाम उद्योग-धंधों के साथ मीडिया पर भी पड़ रहा है। ्कई मैगजींस को तो अपने प्रिंट एडिशन को फिलहाल बंद करने का निर्णय भी लेना पड़ा है। इस बीच खबर है कि अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ (The Hindu) अपना मुंबई एडिशन बंद कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अखबार ने मुंबई में कार्यरत अपने 20 से ज्यादा पत्रकारों को इस्तीफा देने के लिए कहा है। अखबार का मुख्यालय चेन्नई में है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार, यह अखबार अब नेशनल एडिशन के तौर पर मुंबई के मार्केट में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा। यही नहीं, मुंबई के लिए डिजिटल के मामले में भी समान स्ट्रैटेजी अपनाई जाएगी। 

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पत्रकारों को नौकरी से बाहर किये जाने की धमकी पर PCI ने जताई चिंता, लिया ये संज्ञान

इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए अखबार के एडिटर और मुंबई में अखबार के रीजनल जनरल मैनेजर से उनका पक्ष मांगा गया है।

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2020
PCI

‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ (PCI) के चेयरमैन जस्टिस सीके प्रसाद ने ‘द हिन्दू’ (The Hindu) अखबार के मुंबई ब्यूरो से जुड़े कई पत्रकारों को नौकरी से बाहर किये जाने की धमकी देने के मामले में चिंता जताई है। पीसीआई का कहना है, 'यह जानकारी में आया है कि अखबार के प्रबंधन द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।'

‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ की ओर से इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए ‘द हिन्दू’के एडिटर और मुंबई में ‘द हिन्दू’ के रीजनल जनरल मैनेजर से उनका पक्ष मांगा गया है। 'पीसीआई' की ओर से जारी बयान को आप यहां देख सकते हैं।

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Times Group ने लॉन्च किया नया कैंपेन

इस कैंपेन का उद्देश्य पाठकों को इस बात से अवगत कराना है कि अपने भरोसेमंद अखबार को हाथ में न पाकर वास्तव वे में क्या मिस कर रहे हैं।

Last Modified:
Friday, 19 June, 2020
Times Group

देश के बड़े मीडिया समूहों में शुमार ‘टाइम्स समूह’ (The Times Group) ने एक नया कैंपेन ‘Want My Paper’ लॉन्च किया है। इस कैंपेन का उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि अखबार न मिलने की वजह से वह कितनी भरोसेमंद और जानकारीपरक सूचनाएं मिस कर रहे हैं।

इस बारे में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के डायरेक्टर संजीव भार्गव का कहना है, ‘अखबार लोकतंत्र के संरक्षक हैं और वे देश-दुनिया में चल रहे विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर लोगों को सूचना देने का काम करते हैं। इसके साथ ही वे राष्ट्रीय हित के प्रमुख मुद्दों पर लोगों की राय को आकार देने में मदद करते हैं।’

उन्होंने कहा, ‘वैज्ञानिक तथ्यों से स्पष्ट है कि अखबार सुरक्षित हैं और उनसे संक्रमण फैलने का वास्तव में कोई खतरा नहीं है, इस कैंपेन का उद्देश्य हमारे पाठकों को इस बात से अवगत कराना है कि अपने भरोसेमंद अखबार को हाथ में न पाकर वास्तव में वे क्या मिस कर रहे हैं।’

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153 वर्षों में पहली बार इस मैगजीन की एडिटर-इन-चीफ बनी अश्वेत महिला पत्रकार

153 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब फैशन मैगजीन ने एक अश्वेत महिला को अपना एडिटर-इन-चीफ नियुक्त किया है

Last Modified:
Thursday, 11 June, 2020
Samira-Nasr

153 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब फैशन मैगजीन ‘हार्पर्स बाजार’ (Harper's Bazaar) ने एक अश्वेत महिला को अपना एडिटर-इन-चीफ नियुक्त किया है। समीरा नास्र, जो हाल ही में ‘वैनिटी फेयर’ (Vanity Fair) की एग्जिक्यूटिव फैशन डायरेक्टर थीं, वे अगले महीने से अमेरिका में इस मैगजीन का नेतृत्व करेंगी। इसकी जानकारी प्रकाशक ‘हर्स्ट’ (Hearst) ने मंगलवार को घोषणा की।   

मॉन्ट्रियल में जन्मी नास्र ने इस मैगजीन में सबसे लंबे समय तक रहने वाली एडिटर-इन-चीफ ग्लेंडा बेली की जगह ली है, जिन्होंने करीब 19 साल बाद जनवरी में इस मैगजीन से अलग होने की घोषणा की थी।

सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में  नास्र ने इस टॉप पॉजिशन पर चुने जाने को लेकर गर्व महसूस किया।

नास्र का यह कदम मैगजीन की पैरेंट कंपनी ‘हर्स्ट’ में उनकी वापसी है। पहले वे  इस कंपनी की दूसरी मैगजीन (Elle) में फैशन डायरेक्टर के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। वहीं इससे पहले, वे फैशन मैगजीन ‘इनस्टाइल’ (InStyle) में डायरेक्टर पद की भूमिका निभा चुकी हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत Vogue मैगजीन के पूर्व क्रिएटिव डायरेक्टर ग्रेस कोडिंगटन की असिसटेंट के तौर पर की।  

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नस्लीय कार्टून छापने का हुआ विरोध, तो अखबार के सह-मालिकों ने दे दिया इस्तीफा

एक अखबार के सह-मालिकों (को-ऑनर्स) ने बुधवार को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। बताया जा रहा है कि एक नस्लीय कार्टून के प्रकाशन के बाद उन्होंने ये फैसला लिया है

Last Modified:
Thursday, 11 June, 2020
newspaper

अमेरिका में मिसूरी राज्य के एक अखबार के सह-मालिकों (को-ऑनर्स) ने बुधवार को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। बताया जा रहा है कि एक नस्लीय कार्टून के प्रकाशन के बाद उन्होंने ये फैसला लिया है।

बता दें कि इस विवादित कार्टून में पुलिस की फंडिंग में कटौती की प्रशंसा करते हुए एक काले व्यक्ति को एक श्वेत महिला का पर्स झपटते हुए दिखाया गया है। ‘वॉशिंगटन मिसूरियन’ में प्रकाशित इस कार्टून में एक श्वेत महिला किसी को 911 नंबर पर फोन करने के लिए कह रही है लेकिन मास्क लगाए हुए काला व्यक्ति कहता है, ‘गुड लक विद दैट, लेडी...वी डिफंडिड द पुलिस।’

यह कार्टून ऐसे समय पर प्रकाशित हुआ है, जब पुलिस के अत्याचारों और मिनियापोलिस में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हो रहे है।

अखबार के मालिक और बहनें सुजैन मिलर और जीन मिलर वुड ने माफी मांगते हुए कहा कि अखबार के प्रकाशक उनके पिता ने कार्टून छापने का निर्णय लिया और उन्हें इसके बारे में नहीं बताया। उन्होंने कहा, ‘सह-मालिक होने के नाते हमारा मानना है कि यह नस्लीय कार्टून है और किसी भी परिस्थिति में इसका प्रकाशन नहीं होना चाहिए था।’ उन्होंने कहा कि उन्होंने विरोध में इस्तीफा दे दिया है क्योंकि उनके पास फिर से इस तरह की कोई चीज प्रकाशित न हो, इसके लिए संपादकीय अधिकार नहीं रहा है। 

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