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हिन्दुत्व के बारे में फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने का प्रयास है डॉ. इंदुशेखर की यह किताब
‘आरएसएस’ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रख्यात कवि, आलोचक एवं संपादक डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष की किताब 'हिन्दुत्व: एक विमर्श' का विमोचन किया
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
प्रख्यात कवि, आलोचक एवं संपादक डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष की किताब 'हिन्दुत्व: एक विमर्श' का विमोचन 26 दिसंबर 2022 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने किया। नई दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित एकात्म भवन में सोमवार को हुए इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सुनील आंबेकर ने कहा कि विश्व शांति के लिए हिन्दुत्व बेहद जरूरी है। आधुनिक समय में हिन्दुत्व के नियमों को भूलने का परिणाम हम जीवन के हर क्षेत्र में महसूस करते हैं।
‘एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान’ के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ. महेश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में आंबेकर का कहना था कि हिन्दुत्व का मूल तत्व एकत्व की अनुभूति है। वेदों में जिस एकत्व की बात कही गई है, उसे सामाजिक जीवन में महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसी एकत्व भाव के कारण हम एक रहे और आगे बढ़ते रहे। अब हमें अपने लिए नए मार्ग तलाशने हैं और हिन्दुत्व के नियम इस दिशा में हमारा मार्गदर्शन कर सकते हैं।
आंबेकर के अनुसार हिन्दुत्व के नियमों के अनुसार एक-दूसरे की चिंता करना जरूरी है। हमारे बीच प्रतिस्पर्धा हो, लेकिन एक-दूसरे को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिस्पर्धा हो। उन्होंने कहा कि देश के सामान्यजनों तक हिन्दुत्व की समझ को पहुंचाना राष्ट्रीय कार्य है और हम सभी को मिलकर यह कार्य करना होगा।
भारतबोध का पर्याय है 'हिन्दुत्व: एक विमर्श': प्रो. द्विवेदी
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित ‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी ने कहा कि डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष की किताब 'हिन्दुत्व: एक विमर्श' भारतबोध का पर्याय है। उन्होंने कहा कि इस किताब के माध्यम से हिन्दुत्व को उजाला मिलेगा। डॉ. तत्पुरुष किताब के माध्यम से एक सार्थक विमर्श हमारे सामने लेकर आए हैं, जिस पर चर्चा करना बेहद जरूरी है।
हिन्दुत्व के बिना दार्शनिक व्याख्या संभव नहीं : हितेश शंकर
‘पांचजन्य’ के संपादक और कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि हितेश शंकर ने कहा कि संसार की दार्शनिक व्याख्या हिन्दुत्व के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इस किताब में पहले हिन्दुत्व, फिर भारत, भारतबोध और अंत में संस्कृति और स्वाधीनता की बात की गई है, जो आजादी के अमृतकाल में हम सभी के लिए मार्गदर्शक होगी। उन्होंने इस किताब को साहित्य से अकादमिक जगत की तरफ ले जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
वहीं, डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष को किताब के प्रकाशन के लिए बधाई दी। किताब के बारे में डॉ. तत्पुरुष ने कहा कि पराधीन मानसिकता के कारण लोगों द्वारा हिन्दुत्व की मनमानी व्याख्या कर जो भ्रामक निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं, इस किताब के माध्यम से उस भ्रम को दूर करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर दो मत हो सकते हैं कि हिन्दुत्व भारतीयता का पर्याय है, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि हिन्दुत्व इसी देश और इसी मिट्टी की उपज है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकारों, लेखकों एवं साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। संचालन ‘दिल्ली विश्वविद्यालय’ में वरिष्ठ आचार्या प्रो. कुमुद शर्मा ने किया।
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