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प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री के लिए ‘सुहाना’ हो सकता है आगे का सफर: गिरीश अग्रवाल

‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ के नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का कहना है कि जुलाई 2021 में कंपनी ने जुलाई 2019 का लगभग 75 प्रतिशत हासिल कर लिया, जो कि चीजों के सही दिशा में बढ़ने का संकेत है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 08 September, 2021
Last Modified:
Wednesday, 08 September, 2021
Girish Agarwal

‘डीबी कॉर्प लिमिटेड’ (D. B. Corp Ltd) के नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल का कहना है कि कोविड-19 के मामलों में कमी, अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार और त्योहारी सीजन में एडवर्टाइजर्स की संख्या बढ़ने से वर्ष 2021 की दूसरी छमाही में प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री के एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू (Ad revenue) में उछाल देखने को मिल सकता है।

वित्तीय वर्ष 2022 की पहली तिमाही की अर्निंग कॉन्फ्रेंस कॉल (earnings conference call) के दौरान गिरीश अग्रवाल का कहना था, ‘कोविड-19 के मामलों में कमी आ रही है और सरकार द्वारा प्रतिबंधों में ढील दिए जाने से अर्थव्यवस्था पटरी पर आ रही है। दूसरी लहर में लगाए गए लॉकडाउन से मांग में कमी आयी है, हालांकि, सरकार द्वारा दिए प्रोत्साहन पैकेज से थोड़ी राहत तो मिली है। इसके अलावा 2021 की दूसरी छमाही में त्योहारों सीजन भी है। ऐसे में उम्मीद है कि हमें ऑडियंस तक पहुंचने के लिए सबसे विश्वसनीय माध्यम में भारी निवेश करने वाले तमाम ब्रैंड्स के साथ प्रिंट विज्ञापन में उछाल देखने को मिलेगा।

इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘इस साल जुलाई में कंपनी का विज्ञापन (ad volumes) जुलाई 2019 के विज्ञापन का 75 प्रतिशत था। इसलिए मुझे उम्मीद है कि यदि ऐसे ही जारी रहा तो काफी अच्छा रहेगा।’ गिरीश अग्रवाल के अनुसार कोविड की दूसरी लहर के दौरान अखबार का सर्कुलेशन तो नहीं गड़बड़ाया, लेकिन इससे कोविड से पहले के स्तर पर वापस पहुंचने की प्रक्रिया धीमी हो गई। उन्होंने कहा, ‘पुराने स्तर तक वापस पहुंचने के लिए हम दूसरी तिमाही में योजना बना रहे हैं और मुझे लगता है कि दो और तिमाहियों में यह और आगे बढ़ेगा और उम्मीद है कि इसमें तेजी आएगी।’

गिरीश अग्रवाल का कहना था, ‘यदि विज्ञापन के नजरिये से देखें तो दूसरी लहर के आने से पहले वित्तीय वर्ष 2021 की चौथी तिमाही काफी अच्छी दिख रही थी। अप्रैल के बीच में अचानक कोविड के मामलों में दोबारा से तेजी आ गई। ऐसे में मई में सब बेकार हो गया और यह स्तर घटकर मई 2019 के स्तर के लगभग 25% तक नीचे आ गया। हम घटकर मई 2019 के स्तर के 27 प्रतिशत तक आ गए, लेकिन जून में इसमें सुधार हुआ और यह बढ़कर 40-42 प्रतिशत आ गया। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि जुलाई 2021 में हम जुलाई 2019 का लगभग 75% हासिल करने में सफल रहे। यह एक अच्छा संकेत है और चीजें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं।’

इसके साथ ही गिरीश अग्रवाल ने कहा कि अधिकांश कैटेगरीज जैसे ऑटोमोबाइल्स, एजुकेशन, एफएमसीजी और रियल एस्टेट प्रिंट मीडिया पर वापस आ रही हैं। उन्होंने कहा, ‘उम्मीद करते हैं कि डेल्ट वैरिएंट और तीसरी लहर जैसी चीजें अब न आएं, ताकि सितंबर, अक्टूबर और नवंबर में हमारे त्योहारी सीजन पर कोई विपरीत असर न पड़े।’

राजनीतिक विज्ञापनों (political advertisements) के बारे में गिरीश अग्रवाल ने कहा, ‘कुछ राज्य सरकारों ने डीबी कॉर्प के स्वामित्व वाले अखबारों को विज्ञापन देना बंद कर दिया है। अभी की बात करें तो तीसरी तिमाही और चौथी तिमाही में पंजाब सरकार और यूपी सरकार के चुनाव होने जा रहे हैं। हम उस बिंदु पर देखेंगे। फिलहाल, हमें कोई बड़ा सरकारी विज्ञापन नहीं मिल रहा है। वास्तव में, कुछ राज्यों के हमारे सरकारी विज्ञापन पहले से ही रुके हुए हैं।‘  

इसके साथ ही गिरीश अग्रवाल ने कहा कि कंपनी अपने अखबारों में विज्ञापन फिर से शुरू करने के लिए उन राज्य सरकार के संबंधित विभागों से बात कर रही है।

गिरीश अग्रवाल ने बताया कि दैनिक भास्कर समूह ने नई लॉन्च की गई स्कोडा कुशाक (Škoda Kushaq) कार के एडवर्टाइजिंग कैंपेन के लिए स्कोडा ऑटो इंडिया के साथ एक विशेष एडवर्टाइजिंग डील पर हस्ताक्षर किए थे। यह डील होंडा मोटरसाइकिल्स एंड स्कूटर्स के साथ हाल में हुई बड़ी डील के अलावा थी। अग्रवाल के अनुसार, ‘कंपनी ने इन दो सौदों के अलावा कुछ और सौदे किए हैं। दरअसल से ये विज्ञापनदाता हैं जो कोविड के दौरान भी आए थे और हमारे साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे मार्केट में हमारी मजबूत स्थिति का पता चलता है।‘

उन्होंने यह भी कहा कि छोटे पब्लिकेशंस के बंद होने से प्रिंट मीडिया मार्केट समेकित (consolidated) हो रहा है। उन्होंने कहा कि बड़े पब्लिकेशंस वह हैं जो पिछले कुछ वर्षों में बने रहने और खुद को प्रबंधित करने में सक्षम रहे हैं। यदि आप पिछले पांच साल या सात साल के आंकड़ों को देखें तो छोटे पब्लिकेशंस वास्तव में बिजनेस से बाहर हो रहे हैं।

उन्होंने राजस्थान के मार्केट का उदाहरण दिया, जहां मुख्य रूप से दो प्लेयर्स ‘दैनिक भास्कर’ और ‘राजस्थान पत्रिका’ का वर्चस्व है।  गिरीश अग्रवाल ने कहा, लगभग 90% मार्केट इन दो पब्लिकेशंस के बीच बंटा हुआ है और अगर आप समग्र राजस्थान को देखें तो दोनों की बाजार पर हिस्सेदारी लगभग बराबर है।’

फिलहाल कंपनी का न्यूजपेपर सर्कुलेशन 42,50,000 प्रतियां (copies) है, जो कि चौथी तिमाही की तुलना में छह प्रतिशत कम है। वित्तीय वर्ष 2020 (FY20) में कंपनी का सबसे ज्यादा सर्कुलेशन (55 लाख प्रतियां) था। उन्होंने कहा, ‘हमारा सर्कुलेशन लगभग 45-46 लाख था, लेकिन कोविड की दूसरी लहर के कारण फिर से ट्रेनें रुक गईं, बसें रुक गईं, बाजार बंद थे, कार्यालय बंद थे ऐसे में लगभग छह प्रतिशत प्रतियों का नुकसान हुआ, लेकिन हमें उम्मीद है कि हम इस तिमाही में इसे रिकवर कर लेंगे और फिर अगली तिमाही से हमें अपने पहले के नंबरों पर वापस जाने की जरूरत है।’

इस दौरान गिरीश अग्रवाल का कहना था, ‘पहली तिमाही में डीबी कॉर्प ने साल दर साल (YoY) के आधार पर 8.5 प्रतिशत और तिमाही दर तिमाही (QoQ) के आधार पर कवर प्राइस में दो प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। अभी तक यह न्यूजप्रिंट की कीमतों में हुई वृद्धि को कवर नहीं कर पा रहा है, लेकिन एक सीमा है, जहां तक हम अपने पाठकों तक इसे पहुंचा सकते हैं। कीमत बढ़ाने को लेकर हमारे पास अभी थोड़ा सा मार्जिन है, लेकिन हमें अभी इस पर फैसला लेना है।’

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021 (Q1 FY21) की पहली तिमाही में 35000 से 36000 रुपये प्रति टन की तुलना में अब न्यूजप्रिंट यानी अखबारी कागज की कीमत 41000 प्रति टन पहुंच चुकी है। हमारे लिए न्यूजप्रिंट की कीमतों में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हैरानी की बात यह है कि भारतीय अखबारी कागज की कीमत आयातित (imported) की तुलना में काफी तेज हो गई है। इसका सीधा सा कारण यह है कि हमारे पास आयातित का स्टॉक है। भारतीय अखबारी कागज निर्माताओं ने अपनी कीमतों में करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है,  जिसका काफी असर हुआ है। लेकिन चूंकि हमने स्टॉक पहले ही जमा कर लिया था, इसलिए इसका बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा।

गिरीश अग्रवाल के अनुसार, ‘डिजिटल मोर्चे पर कंपनी का पूरा फोकस ऐप पर है। कंटेंट डील करने के लिए वह गूगल और फेसबुक जैसे डिजिटल प्लेयर्स से भी बातचीत कर रही है। रेडियो कारोबार में भी तेजी से रिकवरी देखने को मिल रही है। नेशनल मार्केट में अन्य प्लेयर्स से तुलना करें तो आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पहली तिमाही में हम पिछले वर्ष की पहली की तुलना में लगभग 94% बढ़े, जबकि अन्य सभी प्लेयर्स लगभग 43% से 44% थे, इसलिए हमारे पास समग्र बाजार की तुलना में मजबूत तिमाही था। हम जुलाई में अच्छी रिकवरी देख रहे हैं।’

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ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन का यह कदम कई प्रकाशकों को नहीं आया रास

ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन के द्वारा अखबारों के वितरण की गणना के तौर पर फ्री व कॉम्प्लीमेंट्री कॉपीज को शामिल करने का फैसला कुछ प्रकाशकों को रास नहीं आ रहा।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 26 September, 2022
Last Modified:
Monday, 26 September, 2022
Newspaper Industry

ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन (एबीसी) के द्वारा अखबारों के वितरण की गणना (सर्कुलेशन ऑडिट) के तौर पर फ्री व कॉम्प्लीमेंट्री कॉपीज (नि:शुल्क व रियायत दरों पर दी गईं प्रतियां) को शामिल करने का फैसला कुछ प्रकाशकों (पब्लिशर्स) को रास नहीं आ रहा। जनवरी से जून 2022 तक के लिए सर्कुलेशन के आंकड़ों में पेड/सब्सक्राइब किए गए अखबारों के अलावा फ्री व कॉम्प्लीमेंट्री कॉपीज को भी शामिल किया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, ‘डेली थांथी’ व एबीसी का संस्थापक सदस्य ‘द हिंदू’ व कुछ ऐसे ही प्रकाशकों ने जनवरी से जून सर्कुलेशन ऑडिट से खुद को अलग करने का फैसला किया है, क्योंकि वे चाहते हैं कि एबीसी पुरानी पद्धति का ही पालन करे, यानी अखबारों की वितरित की गई उन्हीं कुल प्रतियों को अपनी गणना में शामिल करे, जिनका भुगतान किया गया हो।

सूत्रों का यह भी कहना है कि दो प्रमुख अंग्रेजी दैनिकों ने भी अपने कुछ संस्करणों को एबीसी की रिपोर्टिंग से बाहर करने का विकल्प चुना है, जो कार्यप्रणाली (methodology) से संबंधित नहीं हैं।

तमिल अखबार ‘दीनामलर’ के प्रकाशक एल. आदिमूलम ने कहा, ‘एबीसी दो साल के अंतराल के बाद फिर सामने आया है। कई तथाकथित प्रमुख अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्रों को शामिल नहीं किया गया है। तमिलनाडु के अंग्रेजी दैनिक इस ऑडिट में शामिल नहीं हुए हैं। तमिलनाडु में केवल दो प्रमुख भाषाई दैनिक अखबारों के जनवरी से जून 2022 के सर्कुलेशन के आंकड़ों को ही प्रमाणित किया गया है।’

एबीसी के इस कदम के बारे में बात करते हुए एक प्रमुख अखबार के शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘अब तक, एबीसी केवल उन प्रतियों की ही गणना कर रहा था, जिनकी पूरी कीमत दी गई थी। केवल पूरा भुगतान वाले ही अखबारों के नंबर प्रकाशित किए जाते थे।’

उन्होंने कहा कि फ्री व कॉम्प्लीमेंट्री प्रतियों की गणना को शामिल कर लेने से अखबारों के सर्कुलेशन की पूरी ऑडिटिंग प्रक्रिया विफल हो जाएगी। अधिकारी ने कहा, ‘बहुत से प्रकाशकों ने एबीसी से ठीक ही कहा है कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।’

इस कदम के बारे में बताते हुए अधिकारी ने कहा कि नेट पेड सर्कुलेशन के आंकड़े ही एक अखबार की ताकत को दर्शाते हैं। रीडरशिप सर्वे में तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसी को अखबार मुफ्त में मिला है या रियायती मूल्य पर क्योंकि वे केवल पाठकों की संख्या गिन रहे होते हैं। वैसे एबीसी को कहा जा रहा है कि वह बिकी हुई प्रतियों की गणना करें, न कि फ्री या रियायत में दी हुई प्रतियों की। उन्होंने यह कहते हुए तर्क दिया कि इस कदम से उन प्रकाशनों को नुकसान होगा, जिनके पास रियायत में या मुफ्त में देने वाली प्रतियां हैं।

वहीं, इंडस्ट्री से जुड़े एक सीनियर व्यक्ति ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि वे मुफ्त प्रतियों को शामिल कर रहे हैं। लेकिन 'रद्दी दर' से नीचे बेची गई प्रतियों को शायद इसमें शामिल किया है। इसका मतलब यह है कि उन्होंने इस बार एबीसी डेटा में मार्केटिंग गतिविधियों को शामिल किया है, जैसे बहुत ही कम दर पर छह महीने की सदस्यता देना। हालांकि, मेरा मानना ​​है कि जिनके पास छिपाने के लिए कुछ है, वही इससे दूर भाग रहे हैं।’

इस बीच, सूत्रों का कहना है कि एबीसी नाराज प्रकाशकों को शांत करने का प्रयास कर रहा है और उनसे ऑडिट से पीछे नहीं हटने का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें अगली ऑडिट अवधि (जुलाई से सितंबर के बीच) के लिए मुफ्त/ रियायत में दी हुई  प्रतियों पर विचार नहीं करना शामिल है।

आईपीजी मीडियाब्रैंड्स इंडिया के सीईओ शशि सिन्हा, जो एबीसी की प्रबंधन परिषद का हिस्सा हैं, ने इस बात से इनकार किया कि किसी अखबार के प्रकाशक ने ऑडिट प्रक्रिया से हाथ खींच लिया है।

एबीसी व सकाल मीडिया समूह के चेयरमैन प्रताप पवार  ने भी कहा कि उन्हें ऑडिट से किसी प्रकाशन के हटने की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ हितधारकों के पास कुछ मुद्दे हो सकते हैं, जिन्हें हल करने के लिए एबीसी प्रतिबद्ध है।

पवार ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि यह जानकारी (ऑडिट से हटने वाले अखबार) सच है, यह सिर्फ और सिर्फ एक अफवाह है। इस तरह की परिस्थिति को लेकर कुछ मुद्दे हो सकते हैं और कुछ लोगों को दिक्कतें भी हो सकती हैं। एक संगठन के तौर पर एबीसी का काम है इसका समाधान करना। कोई भी पॉलिसी एक व्यक्ति तय नहीं करता, बल्कि इसके पीछ एक पूरी टीम होती है।’

उन्होंने इस तथ्य से भी इनकार किया कि ऑडिट पद्धति में कोई बदलाव किया गया है। उन्होंने कहा, ‘जब तक समिति इसे मंजूरी नहीं देती, तब तक बदलाव नहीं किया जा सकता है। मैं डिसिजन मेकर नहीं हूं। यहां तक ​​​​कि अगर कोई ऐसा मुद्दा है, जिसे मैं अभी तक नहीं जानता, तो हम उस पर चर्चा करेंगे।’

नवंबर 2021 में, एबीसी ने अपने प्रकाशक सदस्यों को जनवरी से जून 2022 की अवधि के लिए सर्कुलेशन के ऑडिट को फिर से शुरू करने के बारे में जानकारी देते हुए एक अधिसूचना जारी की थी। एबीसी ने सभी प्रकाशक सदस्यों से 'ए गाइड टू एबीसी ऑडिट' (A Guide to ABC Audit) में निर्धारित ब्यूरो के ऑडिट दिशानिर्देशों का पालन करने का अनुरोध किया था।

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‘प्रभात खबर’ से रिटायर हुए केके गोयनका, सहकर्मियों ने यूं किया फेयरवेल

‘प्रभात खबर’ (Prabhat Khabar) के मैनेजिंग डायरेक्टर केके गोयनका ने हाल ही में अपने रिटायरमेंट की घोषणा की, जिसके बाद उनके लिए एक विदाई समारोह (फेयरवेल पार्टी) का आयोजन किया गया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 September, 2022
Last Modified:
Thursday, 22 September, 2022
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‘प्रभात खबर’ (Prabhat Khabar) के मैनेजिंग डायरेक्टर केके गोयनका ने हाल ही में अपने रिटायरमेंट की घोषणा की है। 16 सितंबर को उन्होंने ‘प्रभात खबर’ में अपनी 33 साल की लंबी पारी को विराम दिया और प्रभात खबर से संन्यास ले लिया, जिसके बाद उनके लिए एक विदाई समारोह (फेयरवेल पार्टी) का आयोजन किया गया, जिसकी झलकियां आप तस्वीरों के जरिए देख सकते हैं-

इस दौरान उन्होंने कहा, ‘16 सितंबर को मैंने 33 साल की लंबी पारी के बाद ‘प्रभात खबर’ से संन्यास लिया। यह मेरे और साथ ही मेरे साथ जुड़े सभी लोगों के लिए बहुत ही भावुक क्षण था। सभी ने मुझे जो प्यार और स्नेह दिया है, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। प्रभात खबर की पूरी टीम को मेरी शुभकामनाएं। अंत भला तो सब भला।’

बता दें कि समाचार4मीडिया ने केके गोयनका के इस्तीफे की खबर पहले ही प्रकाशित की थी, जिसमें उन्होंने रिटायरटमेंट की घोषणा की खबर दी थी और उनके द्वारा लिखा एक लेटर भी प्रकाशित किया था।

वैसे बता दें कि अपने लेटर में केके गोयनका ने लिखा था, ‘मैंने इस महीने की 17 तारीख को ‘प्रभात खबर’ से इस्तीफा देने का फैसला किया है। इस बारे में मैंने मैनेजमेंट को पहले ही बता दिया है। इस अखबार के साथ मेरी काफी लंबी पारी रही है और मैं इससे वर्ष 1989 से जुड़ा हुआ था। महज 500 कॉपियों से शुरू होकर 650000 कॉपियों तक पहुंचने की यह काफी चुनौतीपूर्ण और आकर्षक यात्रा रही और हमने तीन शीर्ष समाचार पत्रों की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया।’

इसके साथ ही गोयनका ने लिखा था कि अखबार के साथ अपने लंबे जुड़ाव पर उन्हें गर्व महसूस होता है और इस संस्थान को इसके वर्तमान स्तर पर लाने में भूमिका निभाने के लिए वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं।

गोयनका के अनुसार, ‘मैं हर उस व्यक्ति का आभारी हूं, जिसने एक पाठक, विज्ञापनदाता, हॉकर और शुभचिंतक के रूप में इस सबसे कठिन यात्रा के दौरान हमें सपोर्ट किया। संस्थान को स्वतंत्र रूप से चलाने के लिए हमें सपोर्ट देने के लिए मैं प्रबंधन का आभारी हूं। इस सफर में मेरा साथ देने के लिए मैं प्रभात खबर परिवार के प्रत्येक सदस्य का आभारी हूं। आप सबसे कठिन समय में हमेशा मेरे साथ खड़े रहे हैं। मैं आप में से हर एक को याद करूंगा। आप सभी को आगे आने वाले समय की शुभकामनाएं।’

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‘द हिंदू’ समूह ने अपने इन दो प्रमुख अखबारों में किए बड़े बदलाव

इन अखबारों के एडिटर्स का कहना है कि इस पूरी कवायद का उद्देश्य युवा पाठकों को आकर्षित करने के साथ ही न्यूज पढ़ने के अनुभव को भी और बेहतर बनाना है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 September, 2022
Last Modified:
Wednesday, 21 September, 2022
The Hindu

‘द हिंदू’ (The Hindu) समूह ने अपने दो प्रमुख ब्रैंड्स ‘द हिंदू’ (The Hindu) और ‘बिजनेसलाइन’ (Businessline) को रीब्रैंड किया है। इन बदलावों के तहत इन दोनों अखबारों को बिलकुल नया लुक दिया गया है और स्टोरी पैकेजिंग को और बेहतर करते हुए विजुअल डिजाइन व रीडर-फ्रेंडली फीचर्स को भी बढ़ाया गया है।

‘द हिंदू’ के अनुसार, अखबार के डिजाइन में बदलाव किए गए हैं, लेकिन इसकी विश्वसनीयता, रिपोर्टिंग क्वालिटी और गहन विश्लेषण में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। नया डिजाइन पढ़ने के अनुभव को बढ़ाएगा और इसे पाठकों के और करीब लाएगा।

कंटेंट के नए लुक के प्रभाव के बारे में ‘द हिंदू’ के एडिटर सुरेश नामबाथ ने कहा, ‘स्पेस छोटा हो गया है, इसलिए हमें प्रत्येक स्टोरी के मूल संदेशों को प्रस्तुत करना होगा। इसका उद्देश्य सामान्य विचारों को संप्रेषित करने में अधिक स्पष्ट होना, हमारी स्टोरी टैलिंग में बहुत विशिष्ट होना और हर शब्द की गणना करना है।’ 

नामबाथ का यह भी कहना था कि द हिंदू को उम्मीद है कि नई स्टाइल युवा पाठकों को और ज्यादा पसंद आएगी। रीब्रैंडिंग के साथ, समूह मोबाइल/ऐप/वेबसाइट से प्रिंट प्रॉडक्ट और प्रिंट प्रॉडक्ट से ऑनलाइन व ऐप में निर्बाध परिवर्तन करने की भी उम्मीद कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘हम अपने ऐप्स और वेबसाइट को नया स्वरूप दे रहे हैं। इसका मकसद प्रिंट प्रॉडक्ट को उन लोगों के लिए आकर्षक बनाना है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर न्यूज का उपभोग कर रहे हैं।’ 
पब्लिकेशन को उम्मीद है कि नए लुक और डिजाइन से पाठकों का अखबार पढ़ने का अनुभव और बेहतर होगा। क्यूआर कोड और डिजिटल रूप से एकीकृत नेविगेशन पॉइंटर्स पाठकों को ऑनलाइन स्टोरीज, साक्षात्कारों, वीडियो और पॉडकास्ट जैसे मल्टी-मीडिया कंटेंट की पहचान करने में मदद करेंगे।

नामबाथ ने कहा कि कंटेंट का क्रॉस प्लेटफॉर्म होगा। एक क्यूआर कोड होगा, जिसका इस्तेमाल पाठक ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन आर्टिकल पढ़ने में कर सकते हैं। इसके साथ ही पॉडकास्ट और अन्य इंटरव्यू सुन सकते हैं। दोनों प्रॉडक्ट्स एक-दूसरे के पूरक होंगे। नामबाथ ने कहा कि नए बदलावों का उद्देश्य प्रिंट को अधिक आकर्षक बनाना और इस धारणा को बदलना है कि प्रिंट ‘पुराने प्रकार की पत्रकारिता’ है। नया डिजाइन समय से काफी आगे है।

इस बारे में ‘द हिंदू’ समूह का कहना है, ‘बिजनेसलाइन का नया मॉडर्न लोगो हमारे बहादुर, युवा और ऊर्जावान देश के सार को दर्शाता है। नया डिजाइन नए जमाने के बिजनेस के अनुकूल है। टेक्स्ट मैसेजिंग के माध्यम से हम जिस सहज तरीके से संवाद करते हैं, उसी सहज तरीके से स्टोरी टैलिंग के लिए टेक्स्ट और विजुअल को मिश्रित किया गया है।’

वहीं, ‘बिजनेसलाइन’ के एडिटर रघुवीर श्रीनिवासन का कहना है, ‘सिर्फ मास्टहेड ही नहीं, बल्कि डिजाइन और लुक के मामले में अखबार में पूरा बदलाव किया गया है।’ 
इन बदलावों के बारे में श्रीनिवासन ने कहा कि मास्टहेड अब पूरा लोअर केस में है, जो पाठकों की युवा प्रकृति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि चूंकि भारत युवा है, ऐसे में वे युवा पाठकों को आकर्षित करने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत हैं।

श्रीनिवासन ने जोर देकर कहा कि हालांकि समूह ने डिजाइन बदल दिया है, लेकिन कंटेंट की क्वालिटी और विश्वसनीयता वही रहेगी। उन्होंने कहा, ‘बिजनेसलाइन एक बिजनेस अखबार है। ऐसे में अन्य प्रतिस्पर्धियों के विपरीत, हम राजनीतिक, मनोरंजन और खेल समाचार प्रकाशित नहीं करते हैं। हम पूरी तरह से व्यापार, वित्त और अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करते हैं और हम ऐसा करना जारी रखेंगे।’ 

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‘ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस’ के चेयरमैन बने प्रताप पवार

‘आरके स्वामी’ (R K Swamy) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीनिवासन के स्वामी को ‘एबीसी’ का डिप्टी चेयरमैन चुना गया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 16 September, 2022
Last Modified:
Friday, 16 September, 2022
Pratap Pawar

 ‘सकाल मीडिया’ (Sakal Media) के चेयरमैन प्रताप पवार को सर्वसम्मति से ‘ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस’ (ABC) का चेयरमैन चुना गया है। उनका चुनाव वर्ष 2022-23 के लिए किया गया है। वहीं, ‘आरके स्वामी प्रा. लि.’ (R K Swamy Pvt Ltd.) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीनिवासन के स्वामी को ‘एबीसी’ का डिप्टी चेयरमैन चुना गया है।

वर्ष 2022-23 के लिए ‘एबीसी’ की काउंसिल में जिन सदस्यों को शामिल किया गया है, उनकी लिस्ट आप नीचे देख सकते हैं।

Publishers Representatives

1- Pratap G. Pawar – Sakal Papers – Chairman

2- Riyad Mathew – Malayala Manorama – Hony. Secretary

3- Hormusji N. Cama – The Bombay Samachar

4- Shailesh Gupta – Jagran Prakashan

5- Praveen Someshwar – HT Media

6- Mohit Jain – Bennett, Coleman & Co.

7- Dhruba Mukherjee – ABP

8- Karan. Darda – Lokmat Media

Advertising Agencies Representatives

1- Srinivasan K Swamy, RK Swamy – Dy. Chairman

2- Vikram Sakhuja, Madison Communications – Hony. Treasurer

3- Shashidhar Sinha, IPG Mediabrands

4- Prasanth Kumar, GroupM

Advertisers Representatives

1- Debabrata Mukherjee, United Breweries

2- Karunesh Bajaj, ITC

3- Aniruddha Haldar, TVS Motor Company

4- Shashank Srivastava, Maruti Suzuki India

Secretariat

Hormuzd Masani – Secretary General

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ऑफिस से काम करने के लिए इस बड़े अखबार ने एम्प्लॉयीज को दिया ये खास ऑफर

कोरोना महामारी के बाद अब कंपनी का लोगों को काम पर लौटने का आदेश कंपनी और कर्मचारी के बीच विवाद की वजह बनता जा रहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 13 September, 2022
Last Modified:
Tuesday, 13 September, 2022
NYT8725

कोरोना महामारी ने पिछले दो सालों में काफी कुछ बदल दिया है। एक तरफ जहां कोरोना ने न सिर्फ दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया, तो वहीं दूसरी तरफ दो साल से भी ज्यादा समय तक लोगों को कई तरह की पाबंदियों का भी सामना करना पड़ा, जिसके चलते लोगों की आदतों पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। दुनियाभर में लगे लॉकडाउन के बाद लोगों को घर से ही काम करना पड़ा। अब हालत यह है कि कोरोना पर काबू होने के बाद भी कर्मचारी घर से काम करने में इतने सहज हो गए हैं कि अब वो ऑफिस जाना ही नहीं चाहते। उन्होंने अब दफ्तर से दूर बैठ कर काम करने की व्यवस्था को ही अपना लिया है। ऐसे में अब कंपनी का लोगों को काम पर लौटने का आदेश कंपनी और कर्मचारी के बीच विवाद की वजह बनता जा रहा है।

ऐसे में अब, अमेरिका का प्रतिष्ठित मीडिया ग्रुप ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपने कर्मचारियों को फिर से ऑफिस आने के लिए कहा है, जोकि किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि, इन दिनों, न्यूयॉर्क टाइम्स को अपने कर्मचारियों से भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स के सैकड़ों कर्मचारी अब बेहतर डील की मांग कर रहे हैं, जबकि कंपनी की ओर से उन्हें रिटर्न-टू-ऑफिस पर्क के रूप में ब्रैंडेड लंच डिब्बे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

ट्विटर पर अंग्रेजी दैनिक के साथ काम करने वाले पत्रकार दावा कर रहे हैं कि उन्हें ऑफिस आने के एवज में ब्रैंडेड लंच बॉक्स दिए गए हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के स्टॉफ को बुलाए जाने के इस तरीके का सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन रहा है।

विजुअल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्टर हेली विलिस ने अपने एक ट्वीट में लिखा, “@nytimes इस हफ्ते अपने कर्मचारियों को ऑफिस लौटने के रूप में ब्रैंडेड लंच बॉक्स दे रहा है। हम इसकी जगह सम्मान और एक उचित अनुबंध चाहते हैं।”

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उन्होंने आगे लिखा, “इस हफ्ते भी मैं अपने @NYTimesGuild और @NYTGuildTech के 1300 सहयोगियों के साथ @WirecutterUnion के समर्थन के साथ घर से ही काम कर रही हूं।”

बता दें कि ‘द वायरकटर यूनियन’ न्यूयॉर्क के न्यूज गिल्ड का एक हिस्सा है, जो यूएस आधारित मीडिया संगठनों के साथ कार्यरत कर्मचारियों का एक संघ है।

एक अन्य ट्वीट में कहा गया, ‘हम निष्पक्ष अनुबंधों और मजबूत कार्यस्थल सुरक्षा प्रयासों की जंग में अपने @NYTGuildTech और @NYTimesGuild के सहयोगियों के साथ खड़े हैं।” ऐसा माना जाता है कि 1,000 से अधिक कर्मचारी इसका समर्थन कर रहे हैं।

‘द वायरकटर यूनियन’ ने NYT रिपोर्टर रेमी टुमिन की एक पोस्ट भी साझा की है, जिसमें ब्रैंडेड लंचबॉक्स की एक तस्वीर दिख रही है। यह पोस्ट वैसी ही थी जैसी हेली विलिस और न्यूयॉर्क टाइम्स के कई अन्य कर्मचारियों ने की थी।

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जल्द होगी अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा-2022 की घोषणा, ऑनलाइन कर सकेंगे अप्लाई

‘अमर उजाला फाउंडेशन’ की ओर से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को दी जाती है स्कॉलरशिप, कोरोना के चलते पिछले दो वर्षों से परीक्षा का आयोजन नहीं हो पा रहा था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 12 September, 2022
Last Modified:
Monday, 12 September, 2022
Amar Ujala

‘अमर उजाला फाउंडेशन’ (Amar Ujala Foundation) की ओर से संचालित अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा-2022 की घोषणा जल्द होने वाली है। बता दें कि कोरोना के चलते पिछले दो वर्षों से परीक्षा का आयोजन नहीं हो पा रहा था। इस छात्रवृत्ति के तहत नौवीं और दसवीं के प्रादेशिक बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए 30-30 हजार रुपये की 18 छात्रवृत्तियां और 11वीं व 12वीं के विद्यार्थियों के लिए 50-50 हजार रुपये की 18 छात्रवृत्तियां दी जाएंगी।

इस वर्ष की छात्रवृत्ति परीक्षा में भाग लेने के लिए प्रादेशिक शिक्षा बोर्ड से नौवीं से 12वीं कक्षा तक में पढ़ने वाले और पिछली वार्षिक परीक्षा में न्यूनतम 60 फीसदी अंक पाने वाले वे विद्यार्थी पात्र होंगे, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय डेढ़ लाख रुपये से कम हो। आवेदन केवल ऑनलाइन ही भरे जा सकेंगे। पात्र विद्यार्थियों को एडमिट कार्ड भी ऑनलाइन ही भेजे जाएंगे।

दृष्टिहीनों के लिए दो विशेष छात्रवृत्तियां

पिछली बार की तरह ही इस बार भी दो दृष्टिहीन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाएगी। परीक्षा में उन्हें सहायक लाने की स्वीकृति दी जाएगी। इसमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि अपने से एक कक्षा नीचे का छात्र ही उनका सहायक हो सकता है। सहायक को स्कूल का आईकार्ड अपने साथ लाना होगा।

वर्ष 2019 में एक लाख विद्यार्थियों ने दी थी परीक्षा

अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति के लिए वर्ष 2019 में हुई परीक्षा में करीब एक लाख प्रतिभाशाली विद्यार्थी शामिल हुए थे। इनमें से सफल हुए विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के रूप में 14.4 लाख रुपये दिए गए थे।

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भारत-अरब के संबंधों को और मजबूती देती अमर हसन की इस किताब का हुआ विमोचन

‘भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद’ (ICCR) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया इस किताब का विमोचन

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 10 September, 2022
Last Modified:
Saturday, 10 September, 2022
Book Launch

‘भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद’ (ICCR) की ओर से अमर हसन द्वारा अरबी भाषा में अनुवादित किताब ‘मजमा उल बहरीन ऑफ दारा शिकोह’ (Majma Ul Bahrain Of Dara Shikoh) का नौ सितंबर को विमोचन किया गया। नई दिल्ली स्थित ‘ICCR’ के आजाद भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस किताब का विमोचन किया।

‘ICCR’ के प्रेजिडेंट डॉ. बिनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में नेपाल के प्रसिद्ध गजल गायक आनंद कार्की के गीत ‘अतुल्य भारत देश मेरा’ का विमोचन भी किया गया। ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के तहत इस गीत का विमोचन करते हुए उपराष्ट्रपति ने दारा शिकोह को प्रतिभाशाली, कुशल कवि और संस्कृत विद्वान बताते हुए कहा कि वह सामाजिक समरसता और धार्मिक एकता के प्रणेता थे।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के पास दूसरों के विचारों के लिए ‘सहिष्णुता’ की एक शानदार विरासत है और एक ऐसी संस्कृति है जो बहुलवाद और समन्वयवाद का प्रतीक है। यह न केवल भारत के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए हमेशा प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि सम्राट अशोक से लेकर मुगल प्रिंस दारा शिकोह तक के भारतीय शासकों ने भारत में सहिष्णुता की संस्कृति का अनुकरण किया।

उन्होंने कहा कि दारा शिकोह ने विभिन्न धर्मों के बीच संवाद को बेहतर बनाने का प्रयास किया और अपनी विरासत को पुनर्जीवित करने और सामाजिक एकता के लिए अपने आध्यात्मिक विचार को लागू करने का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति का कहना था कि भारत ने हमेशा 'वसुधैव कुटुम्बकम' के सिद्धांत में विश्वास किया है, जिसका शाब्दिक अर्थ है कि दुनिया एक परिवार है।

इस बारे में अमर हसन ने बताया कि यह किताब पहली बार वर्ष 1655 में प्रकाशित हुई थी। फारसी भाषा में लिखी यह पुस्तक मुगल राजकुमार दारा शिकोह द्वारा किए गए नौ वर्षों के गहन शोध और अध्ययन का परिणाम थी। इस पुस्तक में हिंदू धर्म (वेदांत) और इस्लाम (सूफीवाद) के विश्वास की तुलना की गई है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक को अरबी भाषा में अनुवादित करने का मुख्य उद्देश्य अरब पाठकों को भारत की बेहतर समझ बनाने में मदद करने का एक प्रयास है। इस प्रकार इस पुस्तक का भारत और अरब के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में योगदान देने का लक्ष्य है।

कार्यक्रम में ‘भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद’ के डीजी कुमार तुहिन समेत तमाम गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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संपूर्ण हिमाचल के आखिरी छोर तक कुछ यूं दी अमर उजाला ने 'दस्तक'

संपूर्ण हिमाचल के आखिरी छोर तक अपनी पहुंच स्थापित करने की कवायद में जुटा हिंदी दैनिक ‘अमर उजाला’ ने अब इसमें सफलता हासिल कर ली है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 02 September, 2022
Last Modified:
Friday, 02 September, 2022
AmarUjala512187

संपूर्ण हिमाचल के आखिरी छोर तक अपनी पहुंच स्थापित करने की कवायद में जुटे हिंदी दैनिक ‘अमर उजाला’ ने अब इसमें सफलता हासिल कर ली है। अमर अजाला अब शिमला में अपने नए संस्करण का शुभारंभ करने जा रहा है। राजधानी शिमला के औद्योगिक क्षेत्र शोघी में अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं से सुज्जित मुद्रण केंद्र स्थापित किया गया है, जहां से अमर उजाला हिमाचल के ऊपरी जिलों के किन्नौर, रोहड़ू, रामपुर सहित सभी हिस्सों तक सूर्योदय के साथ ही ताजा समाचारों के साथ पहुंच जाएगा।

अमर उजाला की ओर से कहा गया कि पहली बार पूरा हिमाचल अब न सिर्फ ताजा खबरें पढ़ सकेगा, बल्कि अपनी प्रगति की विकास यात्रा से भी गहरे से जुड़ सकेगा।

हिमाचल प्रदेश में शिमला के शोघी से अमर उजाला के 22वें संस्करण का गुरुवार को हवन यज्ञ और कन्या पूजन के साथ विधिवत मुद्रण और प्रकाशन शुरू किया गया। इस मौके पर अमर उजाला समूह के प्रबंध निदेशक तन्मय माहेश्वरी और समूह के प्रेजीडेंट वरुण माहेश्वरी विशेष रूप से मौजूद रहे।

अमर उजाला का यह संस्करण समुद्रतल से सर्वाधिक करीब 5700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जो कि प्रकाशन केंद्रों में से सर्वाधिक ऊंचाई है। इसके साथ ही अमर उजाला छह राज्यों, दो केंद्रशासित प्रदेशों के साथ 22 संस्करणों वाला विशाल समूह बन गया है।

बता दें कि देवभूमि हिमाचल और अमर उजाला का जुड़ाव नया नहीं है। 20 जुलाई 1999 में चंडीगढ़ संस्करण के आरंभ के साथ ‘अमर उजाला’ ने हिमाचल प्रदेश में कदम रखा था। इसके बाद 8 दिसंबर 2005 में अत्याधुनिक मुद्रण (प्रिंटिंग) केंद्र के साथ धर्मशाला से संस्करण आरंभ किया था। अब शिमला के शोघी से भी संस्करण शुरू हो गया। इस संस्करण के साथ अब यह समाचार पत्र भारत-चीन शासित तिब्बत सीमा के अंतिम गांव तक सूरज की पहली किरण के साथ पहुंचेगा।  

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‘अमर उजाला’ को बाय बोलकर अब इस मीडिया समूह से जुड़े पत्रकार अनुराग सिंह सेंगर

अनुराग सिंह सेंगर करीब ढाई साल से ‘अमर उजाला’, नोएडा में बतौर सब एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पूर्व में वह नोएडा में ही ‘दैनिक जागरण’ में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Friday, 02 September, 2022
Last Modified:
Friday, 02 September, 2022
Anurag Singh Sengar

पत्रकार अनुराग सिंह सेंगर ने अब ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ मीडिया समूह के साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने नए सफर की शुरुआत की है। उन्होंने इस मीडिया समूह के हिंदी अखबार ‘हिन्दुस्तान’, नोएडा में बतौर सीनियर सब एडिटर जॉइन किया है।

अनुराग सिंह सेंगर इससे पहले करीब ढाई साल से ‘अमर उजाला’, नोएडा में बतौर सब एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जहां से पिछले दिनों उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। पूर्व में वह नोएडा में ही ‘दैनिक जागरण’ में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।

मूलरूप से उत्तर प्रदेश में जालौन जिले के पतराही गांव के रहने वाले अनुराग सिंह का परिवार फिलहाल कानपुर देहात के झींझक में रहता है। अनुराग ने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, झांसी से ग्रेजुएशन करने के बाद माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से एमएससी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) की पढ़ाई की है।

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ‘न्यूज18 इंडिया’ (News18India) के आउटपुट डिपार्टमेंट के साथ ही ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) में कुछ समय तक काम किया। इसके बाद उन्होंने जुलाई 2018 में 'दैनिक जागरण' के साथ जूनियर सब एडिटर के तौर पर अपनी शुरुआत की थी। इसके बाद 'अमर उजाला' होते हुए अब वह 'हिन्दुस्तान' पहुंचे हैं।

समाचार4मीडिया की ओर से अनुराग सिंह सेंगर को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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‘मलयाला मनोरमा’ व ‘द वीक’ में सच्चिदानंद मूर्ति की जगह नई भूमिका निभाएंगे आर. प्रसन्नन

वर्ष 1982 में ‘द वीक’ की शुरुआत के बाद से ही इसके साथ जुड़े हुए आर. प्रसन्नन एक अक्टूबर 2022 से सच्चिदानंद मूर्ति की जगह यह बागडोर संभालेंगे, जो सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 01 September, 2022
Last Modified:
Thursday, 01 September, 2022
The Week

‘द वीक’ (The Week) मैगजीन के सीनियर को-ऑर्डिनेटिंग एडिटर आर. प्रसन्नन (R Prasannan) समूह में अब नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। इसके तहत एक अक्टूबर 2022 से वह ‘मलयाला मनोरमा’ (Malayala Manorama) और ‘द वीक’ में रेजिडेंट एडिटर के पद पर अपनी नई भूमिका संभालेंगे। वह सच्चिदानंद मूर्ति (Sachidananda Murthy) की जगह यह बागडोर संभालेंगे, जो सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं।

बता दें कि मूर्ति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में विशेषज्ञता हासिल है। वह चार दशक से ज्यादा समय से ‘द वीक’ से जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में बेहतरीन पत्रकारिता के लिए मूर्ति को तमाम पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें कर्नाटक मीडिया अकादमी के राष्ट्रीय स्तर के विशेष पुरस्कार से भी नवाजा गया है।

वहीं, आर.प्रसन्नन रक्षा और विदेशी मामलों के विशेषज्ञ हैं। इतिहास में उनकी गहरी रचि है और वर्ष 1982 में ‘द वीक’ की शुरुआत के बाद से ही वह इसके साथ जुड़े हुए हैं। बता दें कि वर्ष 1982 में स्थापित और ‘द मलयाला मनोरमा कंपनी लिमिटेड‘(The Malayala Manorama Co. Ltd) द्वारा प्रकाशित यह मैगजीन कोच्चि से प्रकाशित होती है और वर्तमान में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोट्टायम में इसकी प्रिंटिंग होती है।

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