एक्सपर्ट्स की राय: सरकार नहीं, इंडस्ट्री खुद करे OTT कंटेंट को रेगुलेट

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंटेंट को रेगुलेट सरकार के बजाय खुद इंडस्ट्री के अंदर से आनी चाहिए।

Last Modified:
Monday, 28 July, 2025
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ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म्स को लेकर निगरानी और रेगुलेशन (नियंत्रण) की बहस लगातार तेज होती जा रही है। इस बीच कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंटेंट को रेगुलेट सरकार के बजाय खुद इंडस्ट्री के अंदर से आनी चाहिए।

उनका कहना है कि एक स्वतंत्र इंडस्ट्री बॉडी द्वारा संचालित स्व-नियामक ढांचा ज्यादा प्रभावी, लचीला और रचनात्मक स्वतंत्रता के लिए अनुकूल होगा। इससे रचनाकारों को जवाबदेही के साथ अपनी कला प्रस्तुत करने की आजादी मिल सकेगी। एक्सपर्ट्स ने चेताया कि यदि सरकार सीधे हस्तक्षेप करती है, तो इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लग सकता है और ऑनलाइन कंटेंट पर अति-नियंत्रण की स्थिति बन सकती है।

इंडस्ट्री लीडर्स का कहना है, "नैतिक पहरेदारी (मोरल पुलिसिंग) से दीर्घकालिक परिणाम नहीं मिलते।" उनका मानना है कि टिकाऊ और संतुलित कंटेंट रेगुलेशन सिर्फ प्रतिक्रियात्मक बैन या वैचारिक फैसलों से नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित ढांचे से संभव है। इसमें स्पष्ट कंटेंट गाइडलाइंस, एक विश्वसनीय व स्वतंत्र इंडस्ट्री-नेतृत्व वाली संस्था और दर्शकों की शिक्षा में निवेश शामिल होना चाहिए।

एक प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमें यह तय करने के बजाय कि लोग क्या देख सकते हैं, उन्हें सही जानकारी देकर सोच-समझकर निर्णय लेने में सक्षम बनाना चाहिए।” उनका मानना है कि यही तरीका रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाता है, और एक स्वस्थ डिजिटल वातावरण को बढ़ावा देता है।

नियमन की जरूरत, लेकिन संतुलन के साथ

ओटीटी इंडस्ट्री के सामने इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि वयस्क कंटेंट और अश्लीलता की रेखा कहां खींची जाए और यह तय करने का अधिकार किसे हो? कुछ लोग मानते हैं कि ज्यादा रेगुलेशन से इनोवेशन रुक सकता है, वहीं कुछ का कहना है कि अगर कंटेंट की स्पष्ट लेबलिंग, उम्र आधारित फिल्टरिंग और मॉडरेशन के मानक तय कर दिए जाएं तो एक संतुलित समाधान मिल सकता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब कंटेंट का रेगुलेशन व्यक्तिगत पसंद और राजनीति से प्रभावित होता है, तो इसके नाम पर कला, व्यंग्य, सामाजिक टिप्पणी और ऐतिहासिक प्रस्तुतियों तक को सेंसर किया जा सकता है।

"अश्लीलता की परिभाषा समय और संस्कृति के अनुसार बदलती रहती है, इसलिए किसी भी सरकार को इसे तय करने का एकतरफा अधिकार देना सेंसरशिप को बढ़ावा देना होगा," ऐसा कहना है पीटीपीएल इंडिया के सीओओ और पूर्व SonyLIV कार्यकारी पेप फिगेरेडो का।

उनका कहना है, “आज जरूरत इस बात की है कि हम एक पारदर्शी और संतुलित कंटेंट रेगुलेशन का ढांचा बनाएं जो समय की मांग के अनुसार हो। अगर कंटेंट गंभीर रूप से आपत्तिजनक नहीं है या जनविरोध नहीं हो रहा है, तो सरकार को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। वैसे भी अधिकतर प्लेटफॉर्म पेवॉल (सब्सक्रिप्शन) के पीछे काम कर रहे हैं, जहां दर्शक खुद निर्णय लेते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “वैसे रचनात्मक स्वतंत्रता की बात करें तो मेरे पास जोड़ने को ज्यादा कुछ नहीं है- सच कहूं तो आजकल के कई शो में रचनात्मकता होती ही नहीं है।”

“पहले यह तो तय करें कि अश्लीलता है क्या”

उत्तराखंड हाई कोर्ट के अधिवक्ता अभिषेक अंतवाल का कहना है कि जब तक यह स्पष्ट नहीं किया जाएगा कि 'अश्लील' किसे माना जाएगा, तब तक सरकार की कार्रवाइयाँ मनमानी लगेंगी। “जब ट्विटर और फेसबुक जैसे मुख्यधारा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी खुलेआम आपत्तिजनक कंटेंट उपलब्ध है, तब कुछ ऐप्स को बैन करने से सरकार के लक्ष्य पूरे नहीं होते।”

उनका यह भी कहना है कि “भारत की प्रशासनिक व्यवस्था अक्सर देरी, निष्क्रियता और लालफीताशाही से जूझती है। इस कारण सही समाधान समय पर नहीं आ पाते। ऐप्स को बैन करने से रचनात्मक अभिव्यक्ति पर एक डर का माहौल बनता है, जो अंततः रचनात्मकता को खत्म कर सकता है। टीवी इंडस्ट्री की तरह ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए भी एक स्वतंत्र, मजबूत निगरानी तंत्र की जरूरत है।”

फिगेरेडो मानते हैं, “रचनात्मक स्वतंत्रता को सामाजिक जिम्मेदारी और ब्रांड रणनीति के साथ संतुलित करना होगा। जैसे-जैसे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म परिपक्व होंगे, उन्हें सोच-समझकर यह तय करना होगा कि वे किस तरह का कंटेंट बढ़ावा देना चाहते हैं और किस तरह के दर्शकों की सेवा करना चाहते हैं।”

वह कहते हैं कि भारत को ऐसी संस्था की जरूरत है जो सरकारी नियंत्रण से अलग, लेकिन प्रभावी हो—जैसे पहले Sony, Star और Viacom की 'One Alliance' थी—जो ओटीटी कंटेंट के नियमन में स्वतंत्रता और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित कर सके, खासतौर पर नाबालिगों के लिए।

उनका स्पष्ट कहना है: “डिजिटल युग को सही तरीके से समझने के लिए नैतिक घबराहट नहीं, बल्कि शिक्षा जरूरी है। बहुत समय से ओटीटी स्पेस में अभिव्यक्ति की आजादी को सनसनीखेज आलस के साथ भ्रमित किया गया है।”

रास्ता क्या है: नैतिक दहशत नहीं, मीडिया साक्षरता

एक्सपर्ट मानते हैं कि बैन किसी भी दीर्घकालिक समाधान का रास्ता नहीं है। इससे केवल डिमांड अंडरग्राउंड चली जाती है, जहां दर्शक वीपीएन और अवैध डाउनलोड जैसे रास्ते अपनाते हैं और इस तरह वे किसी भी निगरानी से पूरी तरह बाहर हो जाते हैं।

एक पूर्व प्लेटफॉर्म कार्यकारी ने कहा, “बात केवल बैन से शुरू और खत्म नहीं होनी चाहिए। असली चर्चा मीडिया साक्षरता से होनी चाहिए। क्या हम माता-पिता, युवाओं और कंटेंट क्रिएटर्स को यह सिखा रहे हैं कि कौन सा कंटेंट हानिकारक है और क्यों? या फिर सिर्फ सुर्खियों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं?”

अधिकांश एक्सपर्ट मानते हैं कि समाधान तीन बिंदुओं पर आधारित होना चाहिए- पहला स्पष्ट कंटेंट गाइडलाइंस, दूसरा एक मजबूत इंडस्ट्री-नेतृत्व वाली संस्था और तीसरा दर्शकों की शिक्षा में निवेश।

फिगेरेडो कहते हैं, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कई बार बेवजह की सनसनी के रूप में देखा गया है। लेकिन इसका हल सेंसरशिप नहीं, बल्कि जवाबदेही, समझदारी और बेहतर कहानी कहने की कला है।”

कंटेंट रेगुलेशन: एक जटिल मसला

भारत सरकार ने पहले ‘ब्रॉडकास्टिंग सर्विसेज (रेगुलेशन) बिल, 2024’ का मसौदा प्रस्तावित किया था, जिसका उद्देश्य पारंपरिक मीडिया और ओटीटी दोनों को रेगुलेट करना था। नवंबर 2023 में यह ड्राफ्ट सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया था, जिसमें यूट्यूब, इंस्टाग्राम, न्यूजलेटर राइटर्स जैसे डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को भी रेगुलेशन के दायरे में लाने की बात थी।

इस मसौदे में एक विवादास्पद प्रावधान यह था कि अगर कोई कंटेंट क्रिएटर सरकार द्वारा तय सीमा को पार करता है, तो उन्हें कंटेंट प्री-सर्टिफिकेशन के लिए कंटेंट इवैल्यूएशन कमेटी (CEC) बनानी होगी- जैसे टीवी पर होता है।

हालांकि, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अगस्त 2024 में इस बिल को औपचारिक रूप से वापस ले लिया, जो यह दर्शाता है कि सरकार या तो इसे फिर से सोच रही है या दोबारा मसौदा तैयार करेगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि क्या सरकार इस बिल को पूरी तरह दोबारा बनाएगी या सिर्फ कुछ हिस्सों को संशोधित करेगी, क्योंकि अभी तक कोई नई घोषणा नहीं हुई है।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, “बिल की वापसी यह दिखाती है कि भारत के तेजी से बदलते डिजिटल मीडिया परिदृश्य में कंटेंट रेगुलेशन एक अत्यंत संवेदनशील और जटिल मामला है। अगर यह रेगुलेशन ज्यादा सख्त या व्यापक हो गया, तो यह विविध डिजिटल आवाजों को दबा सकता है।”

जैसे-जैसे सरकार आगे की रणनीति तय कर रही है, इंडस्ट्री लीडर्स लगातार यह अपील कर रहे हैं कि एक संतुलित ढांचा तैयार किया जाए- जो दर्शकों, खासकर बच्चों की सुरक्षा करे, लेकिन साथ ही रचनात्मक अभिव्यक्ति और ऑनलाइन क्रिएशन की स्वायत्तता का भी सम्मान करे। 

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2025: OTT प्लेटफॉर्म्स का टर्निंग पॉइंट, जब स्ट्रीमिंग ने बदली मनोरंजन की परिभाषा

साल 2025 ओटीटी (Over The Top) प्लेटफॉर्म्स के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा, जब डिजिटल स्ट्रीमिंग ने पारंपरिक मनोरंजन और मीडिया के रूप को पूरी तरह बदल दिया।

Last Modified:
Wednesday, 31 December, 2025
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साल 2025 ओटीटी (Over The Top) प्लेटफॉर्म्स के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा, जब डिजिटल स्ट्रीमिंग ने पारंपरिक मनोरंजन और मीडिया के रूप को पूरी तरह बदल दिया। इस साल भारत में ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने दर्शकों की संख्या और व्युअरशिप के मामले में कई बड़े रिकॉर्ड तोड़े और दर्शकों के लिए मनोरंजन के विकल्प को मुख्यधारा का रूप दे दिया गया।

Ormax OTT Audience Report 2025 के अनुसार भारत में ओटीटी दर्शकों की संख्या 601 मिलियन (60 करोड़) तक पहुंच चुकी है, जिसमें लगभग 148 मिलियन (14.8 करोड़) सक्रिय पेड सब्सक्रिप्शन्स शामिल हैं, जो दर्शाता है कि स्ट्रीमिंग अब व्यापक जनसंख्या में लोकप्रिय हो चुकी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक यह भी सामने आया कि Connected TV यूजर्स की संख्या में वर्ष-दर-वर्ष 87% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो दर्शाता है कि बड़े स्क्रीन पर OTT देखने का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। इस उभरते डिजिटल दर्शक आधार ने OTT को मुख्यधारा के मनोरंजन चैनलों के बराब और कई मामलों में उनसे आगे ला दिया है, जिससे पारंपरिक टीवी की भूमिका चुनौती के सामने आ गई है। 

2025 में पहली बार यह देखा गया कि ओटीटी पर बिताया गया स्ट्रीमिंग समय पारंपरिक टीवी देखने के समय से अधिक रहा, जिससे स्पष्ट होता है कि दर्शक अब अपनी पसंद के अनुसार कंटेंट चुनने, किसी भी समय देखने और विज्ञापन-मुक्त अनुभव प्राप्त करने के लिए डिजिटल स्ट्रीमिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण ऑन-डिमांड कंटेंट की उपलब्धता, भाषा-विशेष और रीजनल कंटेंट का अवसर और मल्टी-स्क्रीन अनुभव रहा, जिससे युवा वर्ग से लेकर मध्यम और वरिष्ठ आयु तक के दर्शक OTT प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हुए हैं। इन ट्रेंड्स से यह भी स्पष्ट होता है कि अब OTT मनोरंजन का मुख्य माध्यम बन चुका है, न कि सिर्फ एक विकल्प।

2025 की सबसे बड़ी OTT संबंधित खबरों में से एक थी JioHotstar का अभूतपूर्व उभार, जिसने भारतीय और वैश्विक OTT परिदृश्य में अपनी स्थिति को मजबूती से स्थापित किया। Reliance और Disney के संयुक्त प्लेटफॉर्म JioHotstar ने फरवरी 2025 में लगभग 50 मिलियन सब्सक्राइबर से शुरुआत करते हुए जून 2025 में अपनी संख्या को 300 मिलियन सब्सक्राइबर्स तक पहुंचा दिया, जो वैश्विक OTT दिग्गज Netflix के अनुमानित 301.63 मिलियन सब्सक्राइबर्स के बेहद करीब रही। यह वृद्धि बड़ी हद तक IPL 2025 की गूंज के कारण हुई, जिसमें डिजिटल व्युअरशिप ने 652 मिलियन तक पहुंचकर पहली बार टेलीविजन व्युअरशिप (537 मिलियन) को भी पीछे छोड़ दिया। इस उभार ने स्पष्ट रूप से यह संकेत दिया कि भारत में लाइव स्पोर्ट्स जैसे कंटेंट की स्ट्रीमिंग पसंद दर्शकों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है और इससे OTT प्लेटफॉर्म्स की यूजर संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई।

मार्च 2025 में Nielsen की मोबाइल ऑडियंस मेजरमेंट रिपोर्ट ने भी यह दर्शाया कि JioHotstar भारत के OTT बाजार में सबसे आगे रहा है, जिसने फिल्मों, ओरिजिनल सीरीज और गैर-ओरिजिनल कार्यक्रमों समेत शीर्ष 30 सबसे अधिक देखे जाने वाले शीर्षकों में लगभग दो-तिहाई हिस्सेदारी हासिल की, जबकि Netflix और अन्य प्लेटफॉर्म पीछे रहे। यह डेटा यह दिखाता है कि JioHotstar न केवल सब्सक्राइबर संख्या में आगे बढ़ा है, बल्कि व्युअरशिप में भी प्रमुख स्थान हासिल कर रहा है, जिससे भारतीय OTT लैंडस्केप पर उसकी पकड़ मजबूत हुई है। 

JioHotstar की ली़डरशिप केवल सब्सक्राइबर्स तक सीमित नहीं रही बल्कि व्युअरशिप में भी निरंतर स्पष्ट रूप से उभरती रही। उदाहरण के लिए Chrome OTT (COTT) Report के अनुसार 2025 के 19वें और 20वें हफ्ते के दौरान JioHotstar ने क्रमशः 129.29 मिलियन और 139.81 मिलियन अद्वितीय दर्शकों को आकर्षित किया, जिसमें इसके कई शो और फिल्में शीर्ष वॉच्ड लिस्ट में थीं, जबकि Amazon Prime Video और MX Player जैसे प्लेटफॉर्म्स ने काफी पीछे स्थान हासिल किया। इससे यह साबित होता है कि JioHotstar की सामग्री की व्याप्ति और विविधता दर्शकों को जोड़ने में प्रभावी साबित हुई। 

OTT कंटेंट की उपलब्धता में लगातार वृद्धि ने दर्शकों को हर हफ्ते और हर महीने नई वेब सीरीज, बड़ी फिल्में और अंतरराष्ट्रीय शो प्रदान किए हैं। 2025 में क्रिसमस वीकेंड पर OTT प्लेटफॉर्म्स पर लगभग 11 नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज की गईं, जिनमें Stranger Things Season 5 Volume 2, नॉबडी 2, सिसली एक्सप्रेस सहित अन्य विविध जॉनर के शोज शामिल थे, जो भारत में OTT के दर्शकों की बढ़ती अपेक्षाओं को दर्शाते हैं। यह रिलीज लाइन-अप दर्शकों को पारंपरिक रिलीज शेड्यूल से परे हर समय गुणवत्तापूर्ण मनोरंजन उपलब्ध कराता है, जिससे OTT प्लेटफॉर्म्स की पकड़ और भी मजबूत हुई है। 

भारत में 2025 में OTT प्लेटफॉर्म्स पर रीजनल कंटेंट की लोकप्रियता भी बढ़ी है। उदाहरण के लिए मराठी वेब सीरीज को व्यापक दर्शकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिससे यह साबित होता है कि अब दर्शक केवल हिंदी या अंग्रेजी कंटेंट नहीं देख रहे हैं, बल्कि तमिल, तेलुगु, मलयालम, मराठी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को भी समान रूप से अपनाया जा रहा है। इस विविधता ने OTT प्लेटफॉर्म्स को विभिन्न भाषा-भाषी दर्शकों के बीच एक मजबूत कनेक्शन स्थापित करने में मदद की है। 

OTT के बढ़ते प्रभाव के साथ ही रियलिटी शो और लाइव इवेंट्स का ट्रेंड भी OTT प्लेटफॉर्म्स पर उभरा है। जहां पहले रियलिटी कंटेंट टीवी का क्षेत्र माना जाता था, OTT पर Bigg Boss 19 और Rise and Fall जैसे शो ने डिजिटल दर्शकों को अपनी ओर खींचा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि रियलिटी टीवी का भविष्य भी अब OTT प्लेटफॉर्म्स पर स्थान बनाने लगा है। 

हालांकि OTT की लोकप्रियता चरम पर रही, फिर भी मुनाफे और लागत एक चुनौती बनी रही है। JioHotstar जैसे प्लेटफॉर्म्स का विस्तार दर्शकों की संख्या में वृद्धि के बावजूद, सब्सक्रिप्शन-आधारित राजस्व, विज्ञापन-आधारित मॉडल और कंटेंट निर्माण खर्च जैसे मुद्दों पर विचार करना पड़ा। कई सेवाओं ने मौजूदा सब्सक्रिप्शन रेट बढ़ाए और फ्री कंटेंट में कटौती की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि OTT कंपनियां संतुलित व्यावसायिक मॉडल ढूंढने की कोशिश में हैं।

इन सभी के बीच 2025 में एक और बड़ा नाम उभरा है, जो है भारत के सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती द्वारा विकसित WAVES OTT प्लेटफॉर्म का। Waves OTT को नवंबर 2024 में लॉन्च किया गया था और इसके बाद से यह धीरे-धीरे दर्शकों के बीच लोकप्रियता हासिल कर रहा है, खासकर मुफ्त और विविध कंटेंट की पेशकश के कारण। Waves प्लेटफॉर्म पर यूजर लाइव चैनल्स, टीवी शो, फिल्में, वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्रीज और स्पोर्ट्स जैसे कंटेंट मुफ्त में देख सकते हैं, जो पारंपरिक OTT मॉडलों से अलग एक सशक्त ओपन-एक्सेस विकल्प प्रदान करता है। 

WAVES OTT की खास बात यह है कि यह केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि सरकारी और लोक सामग्री का डिजिटल हब बनाने का प्रयास करता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, WAVES ने अब तक 3.8 मिलियन (38 लाख) डाउनलोड और लगभग 2.3 मिलियन रजिस्ट्रेशन हासिल कर लिए हैं और प्रसार भारती ने एक Project Management Unit (PMU) के लिए बोली प्रक्रिया शुरू कर रखी है ताकि प्लेटफॉर्म का विस्तार, ऐड-राजस्व वृद्धि, वैश्विक साझेदारी और बहुभाषी सामग्री को और मजबूत किया जा सके। इसका लक्ष्य 2026 तक 10 मिलियन (1 करोड़) यूजर्स तक पहुंच बनाना और विज्ञापन आधारित राजस्व को पांच गुना बढ़ाना है, जो इसके व्यावसायिक विस्तार की दिशा को दर्शाता है।

इन सभी डेटा और ट्रेंड्स को देखने पर यह स्पष्ट होता है कि साल 2025 OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए निर्णायक मोड़ रहा, जहां स्ट्रीमिंग ने पारंपरिक टीवी को चुनौती दी और OTT को मनोरंजन और मीडिया की मुख्य धारा के रूप में स्थापित किया। दर्शकों की बदलती प्राथमिकताएं, विविध और क्षेत्रीय कंटेंट की उपलब्धता, तकनीकी उन्नति और कई प्लेटफॉर्म्स की प्रतिस्पर्धा के कारण OTT अब विकल्प नहीं, बल्कि मीडिया का मुख्य आधार बन चुका है और आने वाले वर्षों में यह प्रवृत्ति और तेजी से विकसित होने की उम्मीद है।

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OTT प्लेटफॉर्म्स पर एक्सेसिबिलिटी गाइडलाइन लागू करने से पहले पायलट टेस्ट जरूरी: IAMAI

इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से कहा है कि OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए ड्राफ्ट एक्सेसिबिलिटी गाइडलाइन लागू करने से पहले इसे पायलट या सैंडबॉक्स तरीके से टेस्ट किया जाए।

Last Modified:
Thursday, 20 November, 2025
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इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से कहा है कि OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए ड्राफ्ट एक्सेसिबिलिटी गाइडलाइन लागू करने से पहले इसे पायलट या सैंडबॉक्स तरीके से टेस्ट किया जाए। IAMAI ने चेताया कि मौजूदा ड्राफ्ट छोटे और रीजनल प्लेटफॉर्म्स के लिए भारी नुकसानदेह हो सकता है।

IAMAI ने सुझाव दिया है कि MIB और प्रसार भारती मिलकर पहले सीमित स्तर पर एक्सेसिबिलिटी स्टैंडर्ड्स का परीक्षण करें और इसके नतीजों को स्टेटस रिपोर्ट के रूप में प्रकाशित करें। इससे प्लेटफॉर्म्स को तकनीकी, ऑपरेशनल और वित्तीय असर समझने में मदद मिलेगी।

एसोसिएशन ने कहा कि डिजिटल एंटरटेनमेंट को विकलांग लोगों के लिए और ज्यादा इनक्लूसिव बनाने का सरकार का उद्देश्य सही है, लेकिन वर्तमान ड्राफ्ट छोटे और रीजनल OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए व्यावसायिक रूप से मुश्किल बना सकता है। कई मामलों में, एक्सेसिबिलिटी नियमों का पालन करने की लागत उनके राजस्व से ज्यादा हो सकती है।

IAMAI ने ड्राफ्ट को “निर्देशात्मक और पिछड़ा हुआ” बताया और कहा कि हज़ारों घंटे के पुराने कंटेंट पर सबटाइटल्स, ऑडियो डिस्क्रिप्शन या साइन लैंग्वेज जैसी सुविधाएं जोड़ना और लगातार चेक करना प्लेटफॉर्म्स के लिए भारी खर्चा साबित होगा। इसके अलावा, पुराने लाइसेंस एग्रीमेंट्स की समीक्षा करना भी जरूरी होगा, जो पुराने कंटेंट को होस्ट करने से प्लेटफॉर्म्स को हतोत्साहित कर सकता है।

IAMAI ने यह भी कहा कि पूरे बैक कैटलॉग के लिए एक्सेसिबिलिटी अनिवार्य करना सही नहीं है, क्योंकि पुराने कंटेंट की व्युअरशिप सीमित होती है। इसलिए पुराने कंटेंट पर नियम “बेस्ट-एफर्ट बेसिस” पर लागू होने चाहिए, अनिवार्य नहीं।

टेक्निकल नियम जैसे कैप्शन का फॉन्ट साइज, रंग और पोज़िशन बहुत सख्त हैं और RPwD एक्ट के तहत भी इतने सख्त नहीं हैं। इसके अलावा, कई OTT लाइब्रेरी में लाइसेंस्ड रीजनल, विदेशी या सिंडिकेटेड कंटेंट होता है, जिसके लिए प्लेटफॉर्म्स के पास एक्सेसिबिलिटी जोड़ने के अधिकार नहीं होते।

अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क जैसे EU Accessibility Act 2025 और UK Media Act 2024 में कंटेंट प्रोड्यूसर और प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों में फर्क किया गया है। वहां प्लेटफॉर्म्स को सिर्फ तकनीकी क्षमता सुनिश्चित करनी होती है, पुराने कंटेंट में बदलाव करने की बाध्यता नहीं होती।

इसलिए IAMAI ने सुझाव दिया है कि MIB “वन-साइज़-फिट्स-ऑल” नियम छोड़कर एक फ्लेक्सिबल और चरणबद्ध लागू करने का तरीका अपनाए। प्लेटफॉर्म्स को अपने कैटलॉग, राइट्स और ऑडियंस प्रोफाइल के अनुसार एक्सेसिबिलिटी सर्विस चुनने की अनुमति दी जाए और धीरे-धीरे सरकार के समावेशन के लक्ष्य की ओर बढ़ा जाए।

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फिल्म व ओटीटी कंटेंट की पाइरेसी रोकने के लिए MIB ने इंडस्ट्री से मांगे सुझाव

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश में डिजिटल पाइरेसी पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ी पहल शुरू की है।

Last Modified:
Saturday, 08 November, 2025
MIB874

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने देश में डिजिटल पाइरेसी पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ी पहल शुरू की है। मंत्रालय ने मीडिया व एंटरटेनमेंट सेक्टर से जुड़े सभी प्रमुख हितधारकों से सुझाव आमंत्रित करते हुए एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस 7 नवंबर 2025 को जारी किया गया, जिसमें फिल्म, प्रसारण और ओटीटी कंटेंट की लगातार बढ़ती चोरी को लेकर उद्योग जगत की चिंताओं को दर्शाया गया है।

मंत्रालय ने कहा है कि वह मौजूदा एंटी-पाइरेसी सिस्टम की पूरी समीक्षा करेगा, ताकि डिजिटल उल्लंघन से प्रभावित सभी क्षेत्रों- जैसे फिल्म प्रड्यूसर, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, ब्रॉडकास्टर, इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म, टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बन सके।

इस प्रक्रिया के तहत मंत्रालय ने हितधारकों से कई बिंदुओं पर सुझाव मांगे हैं। इनमें शामिल है- पाइरेटेड कंटेंट की पहचान और उसे हटाने में आने वाली दिक्कतें, मौजूदा तकनीकी या प्रक्रियागत कमियां, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जाने योग्य सफल उपाय, और सरकारी एजेंसियों व उद्योग के बीच बेहतर तालमेल के तरीके।

मंत्रालय ने कहा है कि इच्छुक लोग इस नोटिस के जारी होने के 20 दिनों के भीतर अपने सुझाव ईमेल के जरिए भेज सकते हैं। जवाब भेजने के लिए ईमेल पता है: digital-mediamib@gov.in। सरकार का कहना है कि वह उद्योग से नजदीकी सहयोग के साथ मिलकर एक प्रभावी निगरानी और कंटेंट हटाने की प्रणाली तैयार करना चाहती है।

इस नोटिस पर मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर (डिजिटल मीडिया) क्षितिज अग्रवाल के हस्ताक्षर हैं और इसकी प्रति अंडर सेक्रेटरी (फिल्म्स) को भी भेजी गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मंत्रालय के विभिन्न विभाग मिलकर इस मुद्दे पर समन्वित कार्रवाई करेंगे।

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‘Times Internet’ ने निखिल शर्मा को बनाया ‘Newspoint’ ऐप का बिजनेस हेड

निखिल शर्मा इससे पहले ‘टाइम्स इंटरनेट’ में हेड (Business Development) के पद पर अपनी भूमिका निभा रहे थे।

Last Modified:
Wednesday, 05 November, 2025
Nikhil Sharma

‘टाइम्स इंटरनेट’ (Times Internet) ने निखिल शर्मा को प्रमोशन का तोहफा देते हुए उन्हें ‘न्यूजप्वॉइंट’ (Newspoint) ऐप का बिजनेस हेड बनाया है। उनकी यह नियुक्ति नवंबर से प्रभावी होगी।

निखिल शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘लिंक्डइन’ (LinkedIn) पर खुद यह जानकारी शेयर की है। अपनी पोस्ट में निखिल शर्मा ने लिखा है, ‘विकास सिर्फ़ आंकड़ों की बात नहीं है, यह ऐसे इकोसिस्टम (परिस्थितियों) को बनाने की प्रक्रिया है जो लोगों को आगे बढ़ाते हैं और ऐसे लोग जो इकोसिस्टम को आगे बढ़ाते हैं। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने टाइम्स इंटरनेट के न्यूजपॉइंट ऐप में बिजनेस हेड के रूप में नई ज़िम्मेदारी संभाली है।’

इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा है, ‘पिछले कुछ वर्षों में ग्रोथ की कमान संभालने से लेकर अब भारत के सबसे बड़े कंटेंट डिस्कवरी प्लेटफॉर्म्स में से एक का नेतृत्व करने तक का सफर बेहद संतोषजनक रहा है। यह यात्रा सहयोग, प्रयोग और इस विश्वास से बनी है कि पैमाना (स्केल) और उद्देश्य साथ-साथ चल सकते हैं।’

बता दें कि निखिल शर्मा इससे पहले ‘टाइम्स इंटरनेट’ में हेड (Business Development) के पद पर अपनी भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने फरवरी 2017 में ‘Times Internet’ जॉइन किया था।

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PW ने लॉन्च किया नया OTT प्लेटफॉर्म ‘PW Pi OTT’, इन मायनों में है खास

भारत में ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाते हुए PW (Physics Wallah) ने अपना नया OTT प्लेटफॉर्म ‘PW Pi OTT’ लॉन्च किया है।

Last Modified:
Monday, 03 November, 2025
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देश में ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाते हुए PW (Physics Wallah) ने अपना नया OTT प्लेटफॉर्म ‘PW Pi OTT’ लॉन्च किया है। इसका मकसद देशभर के छात्रों को कम दाम में, बेहतर और बिना किसी बाधा के पढ़ाई का मौका देना है।

PW के मुताबिक, भारत में अच्छी शिक्षा हमेशा महंगी रही है। PW पहले से ही IIT-JEE, NEET, UPSC, CA जैसे एग्जाम्स के लिए सस्ते कोर्सेज देता रहा है, जिनकी कीमत आम तौर पर ₹4,000 से ₹6,000 तक होती है। लेकिन अभी भी लगभग 70% छात्र ऐसे हैं जो ये फीस नहीं दे पाते। इसी कमी को पूरा करने के लिए PW ने PW Pi OTT पेश किया है, जिसमें सब्सक्रिप्शन की कीमत है:

  • मासिक प्लान: ₹300

  • 6 महीने का प्लान: ₹1,500

  • वार्षिक प्लान: ₹2,400

PW का कहना है कि इस मॉडल से छोटे शहरों, गांवों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्र भी अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक आसानी से पहुंच सकेंगे। विज्ञापन, नोटिफिकेशन और रिकमेंडेड वीडियो की वजह से फ्री लर्निंग प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब या सोशल मीडिया पर छात्रों का ध्यान आसानी से भटक जाता है। PW Pi OTT इन सब परेशानियों को दूर करता है, क्योंकि यह एक ऐड-फ्री प्लेटफॉर्म है जहां छात्र सिर्फ पढ़ाई पर फोकस कर सकते हैं।

कंपनी का कहना है कि यह OTT प्लेटफॉर्म छात्रों को स्मार्ट और इंटरएक्टिव लर्निंग का अनुभव प्रदान करेगा। इसमें कई आधुनिक फीचर्स दिए गए हैं जैसे- AI की मदद से लाइव डाउट सॉल्विंग, प्रैक्टिस क्विज और होमवर्क असाइनमेंट, पॉकेट कोर्स जिनसे किसी खास टॉपिक पर फोकस किया जा सकता है, रिकॉर्डेड लेक्चर्स, ताकि छात्र अपनी गति से पढ़ सकें। इससे छात्र किसी भी समय और कहीं से भी अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं, बिना लाइव क्लास के दबाव के और PW Pi OTT पर छात्रों के लिए हर तरह की परीक्षा का कोर्स मौजूद है।

इसके साथ ही, प्लेटफॉर्म पर डाउनलोडेबल PDF, पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र (PYQs), प्रैक्टिस टेस्ट, और शिक्षक, विषय या टॉपिक के अनुसार लेक्चर सर्च करने की सुविधा भी दी गई है। यह प्लेटफॉर्म कम डेटा उपयोग और ऑफ़लाइन डाउनलोड की सुविधा के साथ ग्रामीण छात्रों के लिए भी सुलभ है। 

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गैंगस्टर व क्राइम आधारित कंटेंट पर सरकार सख्त, MIB की OTT प्लेटफॉर्म्स को नई एडवाइजरी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने एक बार फिर ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और उनकी स्वयं-नियामक संस्थाओं को सलाह जारी की है।

Last Modified:
Wednesday, 29 October, 2025
OTT89

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने एक बार फिर ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और उनकी स्वयं-नियामक संस्थाओं को सलाह जारी की है। मंत्रालय ने कहा है कि किसी भी फिल्म, वेब सीरीज या डॉक्यूमेंट्री को रिलीज करने से पहले खास सतर्कता और समझदारी से काम लिया जाए, खासतौर पर यदि वह गैंगस्टर्स या क्राइम पर आधारित हो।

मंत्रालय ने अपने पुराने दिशा-निर्देश (संख्या A-50013/123/2021-DM, दिनांक 22 अक्टूबर 2021) का हवाला देते हुए कहा है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट से बचने की सलाह दी गई थी जो भारत की संप्रभुता और एकता को नुकसान पहुंचा सकता है, राज्य की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है, देश के विदेशी रिश्तों को प्रभावित कर सकता है या फिर हिंसा या सार्वजनिक अव्यवस्था को भड़का सकता है।

नए नोटिस में मंत्रालय ने साफ कहा है कि “गैंगस्टरों और अपराधियों पर आधारित किसी भी फिल्म, वेब सीरीज, बायोपिक या डॉक्यूमेंट्री को रिलीज या प्रसारित करने से पहले ऊपर दिए गए दिशा-निर्देशों का ध्यान रखा जाए।”

सरकार का यह कदम इस बात का संकेत है कि वह अब स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर आने वाले क्राइम-ड्रामा कंटेंट पर और सख्ती से नजर रख रही है। इससे उम्मीद है कि ओटीटी कंपनियां और उनकी नियामक संस्थाएं अपने अंदरूनी कंटेंट अप्रूवल सिस्टम और कम्प्लायंस प्रक्रियाओं की समीक्षा करेंगी, ताकि भविष्य में किसी विवाद या नियम उल्लंघन से बचा जा सके।

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बिहार की संस्कृति व आस्था को समर्पित फिल्म ‘छठ’ का प्रीमियर 24 अक्टूबर से Waves ओटीटी पर

नितिन नीरा चंद्रा द्वारा निर्देशित और अभिनेत्री एवं निर्माता नीतू चंद्रा द्वारा निर्मित ‘छठ’ फिल्म बिहार की मिट्टी, लोगों और उनकी परंपराओं को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती है।

Last Modified:
Friday, 24 October, 2025
Chhath

सार्वजनिक प्रसारक ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) के ओटीटी प्लेटफार्म ‘वेव्स’ (Waves) पर 24 अक्टूबर से बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘छठ’ का एक्सक्लूसिव वर्ल्डवाइड प्रीमियर होने जा रहा है। यह फिल्म बिहार की संस्कृति, आस्था और जीवन मूल्यों को समर्पित एक भावनात्मक सिनेमाई अनुभव है।

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक नितिन नीरा चंद्रा द्वारा निर्देशित और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री एवं निर्माता नीतू चंद्रा द्वारा निर्मित ‘छठ’ फिल्म बिहार की मिट्टी, लोगों और उनकी परंपराओं को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती है। फिल्म देश के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक छठ पूजा की भक्ति, अनुशासन और पवित्रता को खूबसूरती से दर्शाती है।

फिल्म की निर्माता नीतू चंद्रा के अनुसार, ‘छठ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि बिहार के प्रत्येक व्यक्ति के दिल की भावना है। यह हमारी पहचान, हमारी आस्था और हमारी जड़ों से जुड़ाव की कहानी है। इस फिल्म के ज़रिए हम चाहते हैं कि दुनिया बिहार की संस्कृति, सादगी और शक्ति को महसूस करे। हमें खुशी है कि वेव्स ओटीटी इस फिल्म को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचा रहा है।’

वहीं, ‘प्रसार भारती’ के सीईओ गौरव द्विवेदी का इस बारे में कहना है, ’छठ हमें याद दिलाती है कि भारत की सबसे सशक्त कहानियां उसकी मिट्टी से जन्म लेती हैं। यह फिल्म हमारी सांस्कृतिक गहराई और भावनात्मक समृद्धि को उजागर करती है। वेव्स ओटीटी के माध्यम से हम देश की ऐसी कहानियों को वह मंच दे रहे हैं, जिसकी वे सच्चे अर्थों में हकदार हैं।’

प्रसार भारती के अनुसार, 24 अक्टूबर से वेव्स ओटीटी पर ‘छठ’ को देख सकते हैं और महसूस कर सकते हैं आस्था, संस्कृति और सिनेमा का अनोखा संगम, जो बिहार की आत्मा से जुड़ी एक प्रेरक कहानी को जीवंत करता है।

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प्रसार भारती की नई पहल, WAVES OTT पर क्रिएटर्स को व्यूज के आधार पर मिलेगा भुगतान

अपने OTT प्लेटफॉर्म WAVES की गुणवत्ता और आकर्षण बढ़ाने के लिए प्रसार भारती ने नया Pay-Per-View (पे-पर-व्यू) कंटेंट सोर्सिंग पॉलिसी शुरू की है।

Last Modified:
Thursday, 23 October, 2025
PrasarBharati78542

अपने OTT प्लेटफॉर्म WAVES की गुणवत्ता और आकर्षण बढ़ाने के लिए प्रसार भारती ने नया Pay-Per-View (पे-पर-व्यू) कंटेंट सोर्सिंग पॉलिसी शुरू की है। इस पहल का मकसद स्वतंत्र फिल्म निर्माताओं, प्रोडक्शन हाउस और डिजिटल क्रिएटर्स को जोड़ना है, ताकि एक मजबूत और डेटा-आधारित कंटेंट इकोसिस्टम तैयार किया जा सके।

इस नई व्यवस्था के तहत, कंटेंट क्रिएटर्स को उनके कंटेंट के वैलिडेटेड व्यूज के आधार पर भुगतान किया जाएगा। वैलिडेटेड व्यू का मतलब है- जब कोई दर्शक किसी फिल्म या एपिसोड का कम से कम 30% हिस्सा देखता है। इस तरह से भुगतान सीधे दर्शकों की एंगेजमेंट यानी जुड़ाव से जुड़ा रहेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।

पायलट फेज, जो मार्च 2026 तक चलेगा, के दौरान WAVES पर मौजूद सारा कंटेंट दर्शकों के लिए पूरी तरह मुफ्त रहेगा। यानी दर्शकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, बल्कि प्रसार भारती कंटेंट के व्यूज के हिसाब से निर्माताओं को भुगतान करेगी।

अधिकारियों के मुताबिक, यह पहल WAVES को और प्रतिस्पर्धी और कंटेंट से भरपूर बनाने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा, 'हमारे पास अच्छा कंटेंट है, लेकिन प्लेटफॉर्म अभी बाकी सेवाओं जितना मजबूत नहीं है। इसलिए हमने यह नई व्यवस्था शुरू की है ताकि WAVES की गुणवत्ता और दायरा बढ़ाया जा सके।'

WAVES प्लेटफॉर्म, जो पिछले साल नवंबर 2024 में लॉन्च हुआ था, इस समय अलग-अलग भारतीय भाषाओं और विधाओं में ऑन-डिमांड कंटेंट और लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध कराता है। अपने पहले साल की सालगिरह के मौके पर शुरू की गई यह नई पॉलिसी उच्च गुणवत्ता वाले, एक्सक्लूसिव और क्षेत्रीय विविधता से भरे कंटेंट को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

पॉलिसी दस्तावेज के अनुसार, 'यह पॉलिसी कंटेंट ऑनबोर्डिंग और क्रिएटर्स के भुगतान के लिए एक न्यायसंगत और डेटा-आधारित मॉडल तैयार करती है।' इसके जरिए यह भी देखा जाएगा कि क्या यह परफॉर्मेंस-लिंक्ड मॉडल पब्लिक सर्विस OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए लंबे समय तक कारगर रह सकता है।

प्लेटफॉर्म पर डाले जाने से पहले हर कंटेंट को तकनीकी गुणवत्ता जांच, राइट्स वेरिफिकेशन और कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

एक इवैल्यूएशन कमेटी हर महीने कंटेंट के एनालिटिक्स, वित्तीय आंकड़ों और दर्शक रुझानों की समीक्षा करेगी। यह समिति कॉस्ट-पर-व्यू, कंटेंट की विविधता और प्रभाव का भी मूल्यांकन करेगी, ताकि नीति में समय-समय पर सुधार और दरों में समायोजन किए जा सकें।

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Netflix के CEO टेड सारांडोस ने Warner Bros. की खरीदारी पर दी ये प्रतिक्रिया

उन्होंने सीधे वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह साफ कर दिया कि Netflix अपने उद्देश्यों के लिए बड़ी खरीदारी पर निर्भर नहीं है।

Last Modified:
Wednesday, 22 October, 2025
TedSarandos84521

ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) के को-सीईओ टेड सारांडोस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्ट्रीमिंग दिग्गज को वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी (Warner Bros. Discovery यानी WBD) में खरीदारी करने में कोई खास दिलचस्पी नहीं है।

सारांडोस ने यह बात Netflix के तीसरे तिमाही के वित्तीय नतीजों के बाद निवेशकों के साथ हुई अर्निंग कॉल में कही। उन्होंने सीधे वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी का नाम नहीं लिया, लेकिन यह साफ कर दिया कि Netflix अपने उद्देश्यों के लिए बड़ी खरीदारी पर निर्भर नहीं है।

उन्होंने कहा कि Netflix के लिए ऑर्गेनिक ग्रोथ यानी अपनी ताकत से बढ़ना, बड़ी कंपनियों को खरीदने से बेहतर है। उन्होंने जोड़ा, “जब हम M&A यानी Merger (विलय) और Acquisition (अधिग्रहण)  के मौके देखते हैं, तो हम सभी पर ध्यान देते हैं और वही फ्रेमवर्क अपनाते हैं जो हम निवेश के फैसले में अपनाते हैं। क्या यह बड़ा अवसर है? क्या इसमें अतिरिक्त मूल्य है?”

सारांडोस ने यह भी कहा कि Netflix मुख्य रूप से आर्गेनिक ग्रोथ, जिम्मेदारी से निवेश और शेयरधारकों को लाभ वापस करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने बताया कि बड़े अधिग्रहण से कंपनी की रणनीति में कोई बदलाव नहीं होगा।

वैसे बता दें कि संभावित खरीदारों में Paramount Skydance, Comcast और Netflix का नाम सामने आया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, WBD के पास रणनीतिक विकल्प है कंपनी को दो हिस्सों में बांटना (Warner Bros. और Discovery Global), पूरी कंपनी के लिए कोई लेनदेन करना या अलग-अलग लेनदेन करना। मंगलवार को CNBC ने बताया कि Warner Bros. ने Paramount Skydance के पहले ऑफर को ठुकरा दिया, जिससे Netflix और Comcast जैसी कंपनियों के लिए रास्ता खुल गया।

वहीं अब Netflix के को-सीईओ टेड सारांडोस ने भी स्पष्ट कर दिया और निवेशकों से कहा, “हमने हमेशा स्पष्ट किया है कि हमें परंपरागत मीडिया नेटवर्क में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारी रणनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हम चुनिंदा तरीके से ही आगे बढ़ेंगे।”

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प्रसार भारती की WAVES OTT के लिए नई रणनीति, बनाना चाहता है ग्लबोल स्तर का बड़ा खिलाड़ी

प्रसार भारती अपने ओवर द टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म WAVES को लेकर उत्साहित प्रतिक्रिया से प्रेरित होकर अब इसे देश और दुनिया में अग्रणी डिजिटल कंटेंट प्लेटफॉर्म बनाने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार कर रहा है।

Last Modified:
Saturday, 18 October, 2025
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सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती अपने ओवर द टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म WAVES को लेकर उत्साहित प्रतिक्रिया से प्रेरित होकर अब इसे देश और दुनिया में अग्रणी डिजिटल कंटेंट प्लेटफॉर्म बनाने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार कर रहा है।

नवंबर 2024 में लॉन्च हुए WAVES ने पहले ही शुरुआती सफलता हासिल कर ली है। प्लेटफॉर्म को अब तक 3.8 मिलियन से अधिक डाउनलोड और 2.3 मिलियन रजिस्टर्ड यूजर्स मिल चुके हैं। इस सफलता से उत्साहित होकर प्रसार भारती अब प्लेटफॉर्म की वृद्धि और पहुंच को और तेज करने के लिए नए कदम उठा रहा है।

'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नई रणनीति के तहत वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन, ऐप बंडलिंग डील, ऐप-इन-ऐप इंटीग्रेशन और कंटेंट सिंडिकेशन व अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां हासिल करने पर ध्यान दिया जाएगा। एजेंसी का लक्ष्य दो साल के भीतर ऑपरेशनल और वित्तीय स्थिरता स्थापित करना है, जिसके लिए संसाधनों का बेहतर उपयोग, कंटेंट पाइपलाइन को व्यवस्थित करना और राजस्व स्रोतों में विविधता लाना शामिल है।

अधिकारियों के अनुसार, प्रसार भारती एक एक्सपर्ट टीम को शामिल करेगा जो कंटेंट, टेक्नोलॉजी, मार्केटिंग, यूजर अधिग्रहण, डिस्ट्रीब्यूशन और राजस्व क्षेत्रों में रणनीतिक, संचालन और विश्लेषणात्मक समर्थन प्रदान करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य WAVES की सतत और स्केलेबल वृद्धि सुनिश्चित करना है।

टीम आने वाले कंटेंट प्रस्तावों का OTT के लिहाज से मूल्यांकन करेगी, जिसमें अनुपालन और दर्शक जुड़ाव की क्षमता देखी जाएगी। इन विशेषज्ञों की मदद से प्रसार भारती भाषा, शैली और डेमोग्राफिक के हिसाब से कंटेंट में मौजूद अंतर को भी पहचानेगा।

अधिकारियों ने कहा, “यूनिट शीर्ष OTT प्लेटफॉर्म से कंटेंट क्यूरेशन, शैली विविधता और मेटाडेटा ऑप्टिमाइजेशन की वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन और सिफारिश करेगी। यह मार्केटिंग एजेंसियों और क्रिएटिव पार्टनर्स को मास मीडिया, कम्युनिटी आउटरीच और डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित इन्फ्लुएंसर साझेदारी, त्योहारी कैंपेन और इवेंट-आधारित एक्टिवेशन जैसी व्यापक प्रचार रणनीति विकसित करने में मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करेगी।”

वर्तमान में WAVES कम से कम 65 चैनल उपलब्ध कराता है, जिनमें 40 लाइव सर्विसेज हैं, जो न्यूज, एंटरटेनमेंट नेटवर्क, मूवीज, टीवी शो और गेम्स को हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, तमिल और असमिया जैसी 10 भाषाओं में पेश करती हैं। इसमें दूरदर्शन और आवाज़ भारत के क्लासिक्स के साथ-साथ एप्लिकेशन पर उपलब्ध नई प्रोग्रामिंग भी शामिल है।

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