इस न्‍यूज एजेंसी में हुईं बंपर नियुक्तियां, जानें किसे मिली क्‍या जिम्‍मेदारी...

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।। न्‍यूज एजेंसी एएफपी (AFP) ने अपने यहां बड़े पैमाने पर नियुक्त

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Monday, 28 November, 2016
Last Modified:
Monday, 28 November, 2016
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समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

afpन्‍यूज एजेंसी एएफपी (AFP) ने अपने यहां बड़े पैमाने पर नियुक्ति की हैं। इसके तहत ‘Sophie Huet’ को डिप्‍टी ग्‍लोबल न्‍यूज एडिटर बनाया गया है। करीब 30 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय 53 वर्षीय Sophie Huet ने वर्ष 1991 में AFP को जॉइन किया था। ‘Rennes bureau’ में नौकरी की शुरुआत के दौरान वह पहले वाशिंगटन और उसके बाद लंदन में रहीं। ‘Marseille’ में डिप्‍टी ब्‍यूरो चीफ के बाद वह फ्रांस में डिप्‍टी एडिटर-इन-चीफ बनाई गईं। Sophie फिलहाल 22 इंटरनेशनल न्‍यूज एजेंसियों के नेटवर्क ‘MindsInternational’ के बोर्ड ऑफ डायरेक्‍टर्स में AFP का प्रतिनिधित्‍व करती हैं।

इसके अलावा ‘Annie Thomas’ को डिप्‍टी एडिटर-इन-चीफ बनाया गया है। 55 वर्षीयAnnie Thomas करीब साढ़े तीन साल तक पेरिस में ‘general news service’ की मुखिया रह चुकी हैं। उन्‍होंने ‘Lille’, ‘Lyon’ और ‘London’ ब्‍यूरो में कोर्ट को कवर किया है। इसके अलावा वह ‘Europe-Africa’ की एडिटर-इन-चीफ भी रह चुकी हैं। उन्‍होंने 1993 और 1998 में सोमालिया, बुरुंडी और रवांडा संकट (crises) को भी कवर किया है।

वहीं ‘Stéphane Arnaud’ को डिप्‍टी एडिटर-इन-चीफ नियुक्‍त किया गया है और उन्‍हें फोटो की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है। 44 साल के Stéphane Arnaud ने अपने करियर की शुरुआत फ्रांस के दैनिक अखबार ‘Libération’ में फोटो डिपार्टमेंट से की थी। मई 2000 मेंAFP में फोटो एडिटर जॉइन करने से पहले वह फोटो एजेंसी ‘Imapress’ में काम करते थे। हिस्‍ट्री में मास्‍टर डिग्री धारक ‘Stéphane Arnaud’ जून 2005 में फोटो डेस्‍क के डिप्‍टी हेड बना दिए गए। छह महीने बाद ही उन्‍हें इमेज फोरम में फोटो के लिए डिप्‍टी एडिटर-इन-चीफ बना दिया गया। जनवरी 2015 में फोटो के लिए यूरोप के हेड बनाए गए और सितंबर 2016 में डिप्‍टी एडिटर-इन-चीफ (फोटो) की जिम्‍मेदारी सौंप दी गई।

इसके साथ ही ‘Giles Hewitt’ को एशिया पैसिफिक एडिटर बनाया गया है। 53 वर्षीयGiles Hewitt की नियुक्ति जुलाई 1990 में एएफपी हॉन्‍ग कॉन्‍ग ने की थी। ब्रिटेन के नागरिक Giles Hewitt का जन्‍म भारत में हुआ और उन्‍होंने अपनी स्‍नातक की पढ़ाई ‘Norwich’ में ‘University of East Anglia’ से की थी। 1993 से 1997 तक ‘Giles Hewitt’ ने एएफपी के बीजिंग ब्‍यूरो में काम किया। इसके बाद उन्‍हें नई दिल्‍ली में डिप्‍टी ब्‍यूरो चीफ बनाया गया। जून 2002 से ‘Giles Hewitt’ न्‍यूयॉर्क में थे और वर्ष 2006 में एएफपी के पेरिस हेड क्‍वार्टर में वापस लौट आए। दिल्‍ली ब्‍यूरो में लौटने के बाद उन्‍होंने सितंबर 2008 तक इंग्लिश डेस्‍क पर डिप्‍टी हेड के रूप में काम किया। चार साल बाद वह एएफपी के सियोल ब्‍यूरो चीफ बनाए गए जहां पर उन्‍हें नॉर्थ कोरिया की न्‍यूज कवर करने की जिम्‍मेदारी भी सौंपी गई। एएफपी वहां अपना ब्‍यूरो खोलने वाली चुनिंदा विदेशी मीडिया थी।

एएफपी में ‘David Williams’ को यूरोप के लिए एडिटर-इन-चीफ बनाया गया है। 52 वर्षीयDavid Williams के पास यूके और आस्‍ट्रेलिया की राष्‍ट्रीयता है। David Williams ने वर्ष 1993 में एएफपी के सिडनी ब्‍यूरो को जॉइन किया था। दो साल के बाद उन्‍हें हॉन्‍गकॉन्‍ग में एजेंसी के क्षेत्रीय हेडक्‍वार्टर में पोस्टिंग मिली। 1997 में उन्‍हें टोक्‍यो ब्‍यूरो भेज दिया गया जहां पर वह 2000 तक रहे। पेरिस में इंग्लिश डेस्‍क पर कई महीने काम करने के बाद उन्‍हें इकनॉमिक न्‍यूज कवर करने के लिए वाशिंगटन भेज दिया गया। वर्ष 2005 में उन्‍हें पेरिस में इंग्लिश डेस्‍क का हेड और उसके बाद एडिटर-इन-चीफ बना दिया गया। वर्ष 2010 में उन्‍हें मैड्रिड का ब्‍यूरो चीफ बनाया गया। इसके बाद चार साल बाद व वापस पेरिस लौटे और एडिटर-इन-चीफ बनाए गए। सितंबर 2015 में वह एएफपी के पहले ग्‍लोबल इंग्लिश इकनॉमिक्‍स को-ऑर्डिनेटर बनाए गए।

इसके साथ ही ‘Pedro Ugarte’ को लैटिन अमेरिका में एजेंसी का फोटो प्रमुख (head of photo) बनाया गया है। 45 वर्षीय ‘Pedro Ugarte’ मूल रूप से चिली के हैं और उन्‍होंने 1991 में एएफपी के लिए सेंट्रल और लैटिन अमेरिका को कवर करना शुरू कर दिया था। ‘Pedro’ विभिन्‍न ओलंपिक गेम्‍स और फुटबॉल वर्ल्‍ड कप को भी कवर कर चुके हैं।

वहीं ‘Mario Goldman’ को मिडिल ईस्‍ट और नॉर्थ अफ्रीका के लिए हेड ऑफ फोटो की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है। 59 वर्षीय Mario Goldman ने एएफपी की फोटो सर्विस को 1982 में जॉइन किया था। शुरुआत में फोटो लैब में काम करने के बाद उन्‍हें फ्रांस फोटो डेस्‍क पर भेजा गया। वह एजेंसी के विभिन्‍न हेडक्‍वार्टरों में काम कर चुके हैं।

एजेंसी ने ‘Isabelle Wirth’ को यूरोप के लिए फोटो हेड की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है। 44 वर्षीय Isabelle Wirth ने अपने करियर की शुरुआत एएफपी में वर्ष 2000 में फोटो एडिटर के रूप में की थी। अगस्‍त 2003 से 2006 के अंत तक वह इमेज फोरम डेस्‍क में एडिटर भी रह चुकी हैं। सितंबर 2011 में उन्‍होंने बर्लिन में पांच साल की लंबी पारी खेली यहां वह जर्मनी के लिए हेड ऑफ फोटो थीं।

इसके अलावा जितेंद्र जोशी को ग्‍लोबल इंग्लिश इकनॉमिक्‍स को-ऑर्डिनेटर के पद पर नियुक्‍त किया गया है। ब्रिटिश पत्रकार जितेंद्र जोशी ने अपनी स्‍नातक की पढ़ाई कैंब्रिज विश्‍वविद्यालय से की थी। उन्‍होंने वर्ष 1997 में एएफपी के रीजनल हेडक्‍वार्टर से अपने करियर की शुरुआत की थी। 1999 में उन्‍हें टोक्‍यो में नियुक्ति दी गई थी। तब से वह एजेंसी के विभिन्‍न हेडक्‍वार्टर पर काम कर चुके हैं।

एजेंसी ने ‘Emmanuel Parisse’ को कायरो (Cairo) का ब्‍यूरो चीफ बनाया है। 45 साल के ‘Emmanuel Parisse’ ने मई 1998 में एएफपी की इंटरनेशनल फोटो डेस्‍क को जाइन किया था। उन्‍हें भी एजेंसी के साथ काम करने का लंबा अनुभव है और इस दौरान उन्‍होंने कई अहम जिम्‍मेदारियां संभाली हैं।

वहीं ‘Sophie Pons’ को ‘Bureau de Paris’ का हेड बनाया गया है। 53 साल की ‘Sophie Pons’ कई देशों में रह चुकी हैं। 1991 में वह मॉस्‍को में थी और उन्‍होंने यहां तख्‍ता पलट की कोशिश को कवर किया था। 1995 में वह साउथ अफ्रीका आ गई जहां पर नेल्‍सन मंडेला उस समय राष्‍ट्रपति बने थे, उस इवेंट को भी ‘Sophie Pons’ ने कवर किया था।

इसके अलावा ‘Alain Bommenel’ को इंफोग्राफिक्‍स और इनोवेशन (Infographics and Innovation) का हेड बनाया गया है। 54 वर्षीय ‘Alain Bommenel’ ने पॉलि‍टकल साइंस से पढ़ाई पूरी कर अपने करियर की शुरुआत एएफपी से की थी। 1987 से 2000 के दौरान लिली (Lille) और रीम्‍स (Reims) में काम करने के बाद उन्‍होंने अपना ध्‍यान अफ्रीका पर केंद्रित कर लिया और ‘Abidjan’ में तीन साल तक (1990-1993) तक काम किया। इसके अलावा मई 2012 से सितंबर 2013 के बीच ट्रेनिक को-आर्डिनेटर के रूप में वह ‘IRIS editorial system’ को तैयार करने में भी शामिल रहे हैं।

 एजेंसी ने ‘Léon Bruneau’ को इंटरनेशन डेस्‍क का हेड नियुक्‍त किया है। 51 वर्ष केLéon Bruneau ने अपने करियर की शुरुआत ‘ACP-Telpresse agency’ से की थी और 1995 में एएफपी को जाइन किया था। यहां फ्रांस डेस्‍क पर एक साल काम करने के बाद इन्‍हें वाशिंगटन ब्‍यूरो भेज दिया गया, जहां इन्‍होंने ‘Francophone Desk’ तैयार करने में काफी सहायता की। विभिन्‍न ब्‍यूरो में काम करते हुए  ‘Léon Bruneau’ वर्ष 2011 में वाशिंगटन लौट आए और फिलहाल वह डिप्‍टी रीजनल एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि एएफपी एक ग्‍लोबल न्‍यूज एजेंसी है जो समाचारों की कवरेज को तेजी से और गहराई से देती है। 2,326 स्‍टाफ के साथ यह एजेसी लगभग प्रत्‍येक देश में फैली हुई है और यह छह भाषाओं में 24 घंटे काम करती है। न्‍यूज को यह विडियो, टेक्‍स्‍ट, फोटो, मल्‍टीमीडिया और ग्राफिक के रूप में कस्‍टमर को उपलब्‍ध कराती है। इसके कस्‍टमर में विभिन्‍न समाचार पत्र, मैगजीन, रेडियो और टेलिविजन चैनल के साथ ही वेबसाइट और पोर्टलस और मोबाइल ऑपरेटर्स आदि शामिल हैं।

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पत्रकार के साथ हुई इस घटना की मीडिया संगठनों ने की निंदा, उठाई ये मांग

इस पूरी घटना की निंदा करते हुए मीडिया संगठनों का कहना है कि इस तरह की तमाम शिकायतें पहले भी प्राप्त हुई हैं।

Last Modified:
Tuesday, 30 June, 2020
HOFE DADA

अरुणाचल प्रदेश में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार पर हुए हमले की ‘द अरुणाचल प्रेस क्लब’ (The Arunachal Press Club), ‘द अरुणाचल प्रदेश यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स’ (the Arunachal Pradesh Union of Working Journalists), ‘द अरुणाचल इलेक्ट्रॉनिक एंड डिजिटल मीडिया एसोसिएशन’ (the Arunachal Electronic & Digital Media Association) और ‘इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन’ (IJU) ने कड़े शब्दों में निंदा की है।

बताया जाता है कि न्यूज वेबसाइट ‘ज्योलू न्यूज’ (Gyoloo News) में कार्यरत पत्रकार होफे दादा (Hofe Dada) सोमवार को लेखी गांव में ‘एसएमएस स्मेलटर्स लिमिटेड’ (SMS Smelters Ltd) कंपनी पर रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान कथित रूप से चार लोगों ने उन्हें टोका और उनमें से एक व्यक्ति ने दादा को थप्पड़ मार दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब दादा ने पीटे जाने का कारण पूछा तो उन व्यक्तियों ने कथित रूप से दादा से सवाल किया कि क्यों पत्रकार बार-बार कंपनी पर सवाल क्यों खड़े करते हैं।    

दादा ने उनसे कहा कि वह तो सिर्फ ऐसे मुद्दे पर रिपोर्टिंग करने की कोशिश कर रहे थे, जिससे लोग प्रभावित हैं। इसके बाद दादा को वह परिसर छोड़ने के लिए कहा गया, साथ ही चेतावनी दी गई कि ऐसा न करने पर उन्हें इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। आरोप यह भी है कि उनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि दादा को वरिष्ठ पत्रकार तोंगम रीना की तरह अंजाम भुगतना पड़ेगा, जिन्हें वर्ष 2012 में गोली मारी गई थी। इस मामले में दाकान ने निर्जुली पुलिस स्टेशन में विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई है।

इस पूरी घटना की निंदा करते हुए मीडिया संगठनों का कहना है कि इस तरह की तमाम शिकायतें पहले भी प्राप्त हुई हैं। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश पुलिस से इस पूरे मामले की जांच करने की अपील की है। ‘इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन’ (IJU) का कहना है कि पुलिस को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

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ABP न्यूज नेटवर्क के इस चैनल ने पूरे किए 15 साल, यूं बनाई लोगों के दिलों में जगह

‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ का बंगाली न्यूज चैनल ‘एबीपी आनंद’ अपनी 15वीं वर्षगांठ मना रहा है।

Last Modified:
Tuesday, 30 June, 2020
ABP News Network

‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ (ABP News Network) का बंगाली न्यूज चैनल ‘एबीपी आनंद’ (ABP Ananda) अपनी 15वीं वर्षगांठ मना रहा है। अपनी शुरुआत से ही यह चैनल स्थानीय और ऑनग्राउंड रिपोर्टिंग में आगे रहा है, बल्कि बंगाल के लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाने में भी कामयाब रहा है। इस समय में चैनल ने बेस्ट बंगाल के मार्केट में अपनी मजबूत ब्रैंड इक्विटी तैयार की है। चैनल ने ब्रॉडकास्‍ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल' (BARC) इंडिया की रेटिंग में लगातार सात हफ्ते तक नंबर वन रहने के बाद इस संख्या को लगातार न सिर्फ बनाए रखने बल्कि आगे बढ़ाने की योजना भी बनाई है। टॉप फाइव बांग्ला न्यूज चैनल्स की बार्क की वीकली लिस्ट में लगातार दिखाई देने वाले पांच चैनलों में से, एबीपी आनंद सबसे अधिक सुसंगत और सबसे ज्यादा देखा जाने वाला रहा है।

बताया जाता है कि अपने तमाम यादगार शोज की बदौलत यह चैनल अपने व्युअर्स की खासी पसंद रहा है और दर्शकों तक पहुंच के मामले में 13 हफ्तों तक लगातार (Source: BARC, TG - NCCS 2+, Mkt- WB, Wk 12-24’2020, Cume. Reach in Cr.) पूरे पश्चिम बंगाल में नंबर वन चैनल रहा है। चैनल के अनुसार, इसने न सिर्फ जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स (GECs) को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि न्यूज ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में भी काफी बेहतर कर रहा है।

चैनल की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, तमाम मुश्किलों के दौरान यह लोगों के साथ मिलकर खड़ा रहा है और उन्हें दुख व संकट से निकालने में मदद की है। यही नहीं, देश-दुनिया में कहर बरपा रहे कोविड-19 के दौरान भी यह चैनल लोगों को देश-दुनिया के साथ उनके जिलों/कस्बों से जुड़े न्यूज अपडेट्स देने में भी आगे रहा है।  

इसके अलावा, महामारी के दौरान विद्यार्थियों की सुविधा के लिए हाल ही में ‘एबीपी आनंद’ ने राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों के साथ-साथ आईसीएसई (ICSE) और आइएससी (ISC) के नौवीं और 12वीं कक्षाओं के छात्रों के लिए वर्चुअल कक्षाएं प्रसारित की हैं।

विज्ञप्ति के अनुसार, एबीपी आनंद के कुछ लोकप्रिय कार्यक्रमों में ‘खैबर पास फूड फेस्टिवल’ (Khaibar Pass Food Festival) शामिल है। यह कोलकाता के सबसे बड़े ऑनग्राउंड फूड फेस्टिवल्स में शामिल है जो बंगाल के फूड कल्चर को दर्शाता है। इसकी सफलता ने नॉर्थ बंगाल, साउथ बंगाल और नॉर्थ 24 परगनाओं में तीन अन्य खैबर पास कार्यक्रम (Khaibar Pass Events) का मार्ग प्रशस्त किया। इसके अलावा बंगाल की जानी-मानी हस्तियों को सम्मानित करने के लिए एक अवॉर्ड शो सेरा बंगाली (Sera Bangali) और विभिन्न विषयों पर लोगों को गहराई से जानकारी देने के लिए एक डिबेट शो ‘जुक्ती टोको’ (Jukti-Tokko) भी इसकी पेशकश में शामिल है। बताया जाता है कि इन स्पेशल पहल के जरिये ‘एबीपी आनंद’ कोलकाता में घर-घर में जाना माना नाम और देशभर के बंगाली ऑडियंस का सबसे विश्वासपात्र बन गया है।

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कोरोना ने छीन ली इस टीवी पत्रकार की जिंदगी

मुख्यमंत्री सहायता कोष से पत्रकार के परिजनों को दी जाएगी पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता

Last Modified:
Tuesday, 30 June, 2020
E Velmurugan

देश में कोरोनावयरस (कोविड-19) पीड़ितों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इस महामारी की चपेट में आकर अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं तमाम लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। कोविड-19 की चपेट में आने वालों में तमाम मीडियाकर्मी भी शामिल हैं।

कोविड-19 की चपेट में आकर जान गंवाने वालों की लिस्ट में एक नाम और शामिल हो गया है। दरअसल, तमिलनाडु के एक न्यूज चैनल में सीनियर वीडियोग्राफर के तौर पर कार्यरत ई वेलमुरूगन (E Velmurugan) का कोविड-19 की चपेट में आकर निधन हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,  तकरीबन 41 वर्षीय वेलमुरूगन चेन्नई स्थित राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल (RGGGH) में भर्ती थे, जहां शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्हें 14 जून को इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।  

ई वेलमुरूगन के परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा है। वेलमुरूगन के निधन के बाद मुख्यमंत्री ईके पलनीस्वानी, उपमुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम और डीएमके प्रेजिडेंट एमके स्टालिन समेत तमाम राजनेताओं और पत्रकारों ने शोक जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

यही नहीं, ईके पलनीस्वानी ने मुख्यमंत्री राहत कोष से वेलमुरूगन के परिवार को पांच लाख रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। वहीं तीन अन्य मंत्रियों सी विजयभास्कर, डी जयकुमार और कादंबर सी राजू ने भी घोषणा की है कि वे पीड़ित पत्रकार के परिवार को अपनी जेब से 50-50 हजार रुपए देंगे। वेलमुरूगन की पत्नी राजीव गांधी गवर्नमेंट जनरल हॉस्पिटल में कॉन्ट्रैक्ट पर नर्स का काम करती हैं, उनकी नौकरी को सरकार ने स्थायी कर दिया है।

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वरिष्ठ पत्रकार गोविंद सिंह को मिली इस विवि के पत्रकारिता विभाग की कमान

मूलतः पिथौरागढ़ के रहने वाले गोविंद सिंह पहले भी इस यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

Last Modified:
Monday, 29 June, 2020
Govind Singh

तमाम मीडिया संस्थानों में अहम पदों पर अपनी जिम्मेदारी निभा चुके वरिष्ठ पत्रकार गोविंद सिंह ने अब अपनी नई पारी की शुरुआत की है। उन्होंने उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी, हल्द्वानी के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष के रूप में जॉइन कर लिया है। समाचार4मीडिया से बातचीत में गोविंद सिंह ने इस खबर की पुष्टि की है।  

मूलतः पिथौरागढ़ के रहने वाले गोविंद सिंह ने अपने करियर की शुरुआत देहरादून के ‘इंडियन काउंसिल आफ एग्रीकल्चरल रिसर्च’ (आईसीएआर) में बतौर अनुवादक की थी। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वर्ष 1982 में टाइम्स में बतौर ट्रेनी जर्नलिस्ट मुंबई से की। वहां धर्मयुग और नवभारत टाइम्स में भी उन्होंने काम किया। नवभारत के बाद वे आईडीबीआई, कोलकाता में हिंदी अधिकारी बने। वर्ष 1990 में सहायक संपादक के रूप में नभाटा, दिल्ली पहुंचे और 1999 तक यहां रहे। नवभारत के बाद गोविंद सिंह ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की ओर रुख किया और डिप्टी एडिटर के रूप में पहले जी न्यूज फिर आजतक पहुंचे। आजतक में वह सीनियर प्रड्यूसर के रूप में रिसर्च डिपार्टमेंट के हेड बने।

आजतक के बाद वर्ष 2002 में गोविंद सिंह ने एसोसिएट एडिटर के रूप में आउटलुक जॉइन किया और फिर अमेरिकन एंबेसी की हिंदी मैगजीन स्पैम के एडिटर के रूप में नई पारी शुरू की। 2005 में गोविंद सिंह अमर उजाला के एसोसिएट एडिटर बने। बाद में यहां उन्हें सीनियर एसोसिएट एडिटर फिर एग्जिक्यूटिव एडिटर बना दिया गया। जहां से वे हिन्दुस्तान के कार्यकारी संपादक बने।

हिन्दुस्तान के बाद गोविंद सिंह ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में बतौर प्रोफेसर नई पारी शुरू की। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू में अपनी सेवाएं दीं और अब फिर से उत्तराखंड यूनिवर्सिटी में उन्होंने वापसी की है। इस बार उन्हें पत्रकारिता विभाग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। प्रो. सिंह ने करीब 15 वर्षों तक दिल्‍ली विश्वविद्यालय में विजिटिंग फैकल्टी के रूप में पत्रकारिता का अध्यापन कार्य किया है। समाचार4मीडिया की ओर से नई पारी के लिए गोविंद सिंह को शुभकामनाएं।  

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कोरोना ने निगल ली एक और पत्रकार की जिंदगी

देश-दुनिया में कोहराम मचा रहे कोरोनावायरस (कोविड-19) ने एक और पत्रकार की जिंदगी निगल ली

Last Modified:
Monday, 29 June, 2020
ChandraShekhar

देश-दुनिया में कोहराम मचा रहे कोरोनावायरस (कोविड-19) ने एक और पत्रकार की जिंदगी निगल ली। खबर है कि वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर का कोरोना की वजह से निधन हो गया है। वे दिल्ली के लोकनायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल में भर्ती थे।

वे ‘इंडिया न्यूज’, ‘जी न्यूज’, ‘हमार टीवी’ और ‘न्यूज वर्ल्ड इंडिया’ में काम कर चुके थे। मूल रूप से बिहार के रहने वाले चंद्रशेखर अपने पीछे बुजुर्ग मां, पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गए हैं।

बताया जाता है कि कुछ समय पूर्व चंद्रशेखर की नौकरी चली गई थी। इससे वह काफी आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। इन दिनों वह नौकरी की तलाश में जुटे हुए थे। इस बीच वह कोरोना की चपेट में आ गए और उनका निधन हो गया।

बता दें कि कोरोनावायरस की चपेट में आकर देश में अब तक तमाम लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें तमाम मीडियाकर्मी भी शामिल हैं। हाल ही में ‘आजतक’ की डिजिटल विंग में कार्यरत पत्रकार हुमा खान की भी कोरोना की चपेट में आकर मौत हो चुकी है।

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इतनी कम उम्र में जिंदगी की जंग हार गईं पत्रकार हुमा खान

काफी दिनों से मुरादाबाद से कर रही थीं वर्क फ्रॉम होम, जांच कराने पर पॉजिटिव निकला था कोरोना टेस्ट

Last Modified:
Monday, 29 June, 2020
Huma Khan

देश में कोरोनायरस (कोविड-19) का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन इसकी चपेट में आकर कई लोगों की मौत हो रही है। खबर है कि इस महामारी के कारण हिंदी न्यूज चैनल ‘आजतक’ में कार्यरत महिला पत्रकार हुमा खान की मौत हो गई है।

बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद की रहने वाली हुमा खान ‘आजतक’ की ऑनलाइन विंग में काम करती थीं। वह यहां करीब डेढ़ साल से कार्यरत थीं। कोरोनावायरस (कोविड-19) औऱ लॉकडाउन के कारण सुरक्षा की दृष्टि से 'आजतक' ने अपने कई एम्प्लॉयीज को घर से काम ( वर्क फ्रॉम होम ) करने की अनुमति दे रखी है। इसके तहत वे लंबे समय से घर से ही काम कर रही थीं।

22 जून को तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने अपना कोरोना टेस्ट कराया था, जो पॉजिटिव निकला। इसके बाद 24 जून को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 26 जून को उनका निधन हो गया। करीब 31 वर्षीय हुमा खान इससे पहले ‘न्यूज 18’  की अंग्रेजी वेबसाइट में नौकरी कर रही थीं। हुमा की इस तरह से मौत के बाद उनके सहकर्मी स्तब्ध हैं और सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

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महज इतनी सी बात पर पत्रकार की कर दी जमकर पिटाई

पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

Last Modified:
Friday, 26 June, 2020
Attack

पत्रकार के साथ रास्ते में मारपीट का मामला सामने आया है। घटना पंजाब के जीरकपुर (Zirakpur) इलाके की है। ‘द ट्रिब्यून’ (The Tribune) में छपी खबर के मुताबिक, पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

पुलिस को दी अपनी शिकायत में ढकोली निवासी पत्रकार सज्जन देव शर्मा ने बताया कि 24 जून को वह अपनी कार से किसी काम से बाहर जा रहे थे। रास्ते में आरोपित यशपाल शर्मा ने अपनी कार बीच सड़क पर गेट खोलकर खड़ी कर रखी थी। सज्जन देव ने अपनी शिकायत में बताया कि जब उसने वहां से गुजरने के लिए अपनी कार का हॉर्न बजाया तो यशपाल नाराज हो गया और गालीगलौच करने लगा। इसके बाद यशपाल ने अपने बेटे और एक अन्य व्यक्ति को मौके पर बुलाकर सज्जन देव के साथ मारपीट शुरू कर दी।

मारपीट के दौरान रॉड से किए गए हमले में घायल पीड़ित को उपचार के लिए ढकोली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां गंभीर हालत को देखते हुए उसे चंडीगढ़ सेक्टर-दो स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया गया। मामले में जांच जारी है।

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बदतमीजी का विरोध करने की पत्रकार को कुछ यूं चुकानी पड़ी कीमत

पत्रकार की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है।

Last Modified:
Thursday, 25 June, 2020
Crime

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में एक पत्रकार के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना बुधवार दोपहर की है और पीड़ित पत्रकार का नाम संदीप वर्मा है। पीड़ित पत्रकार की शिकायत पर थाना सूरजपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है।

पुलिस में दर्ज एफआईआर के अनुसार, एक हिंदी दैनिक में बतौर सीनियर रिपोर्टर कार्यरत संदीप वर्मा इन ग्रेटर नोएडा के बीटा-एक सेक्टर की एवीजे हाइट्स सोसायटी में रहते हैं। बुधवार की दोपहर करीब तीन बजे वह सोसायटी में ही स्थित मार्केट से घर का जरूरी सामान लेने गए हुए थे। सामान लेकर लौटते समय वह किसी से फोन पर बातचीत करते हुए लौट रहे थे, तभी रास्ते में खड़े कुछ लड़कों ने उनसे बदतमीजी शुरू कर दी।

एफआईआर के अनुसार, विरोध जताने पर उनमें से कुछ लड़कों ने संदीप पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए वह पास में ही स्थित एक रेस्टोरेंट में घुस गए, लेकिन हमलावर वहां भी आ गए और उनकी जमकर पिटाई कर दी।

इस घटना में संदीप के सिर से खून निकल आया और उंगली में भी फ्रैक्चर हुआ है। इसके बाद उन्होंने पुलिस के इस घटना की शिकायत दी। संदीप की शिकायत पर पुलिस ने पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है।

संदीप वर्मा के साथ मारपीट की घटना सीसीटीवी में कैद हो गई है, जिसकी फुटेज आप यहां देख सकते हैं।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के फाउंडर मेंबर विश्वबंधु गुप्ता

विश्वबंधु गुप्ता कई वर्षों तक कांग्रेस की दिल्ली इकाई में वरिष्ठ पद पर रहे थे और उन्होंने कांग्रेस के कई चुनावी अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाई थी।

Last Modified:
Monday, 22 June, 2020
Vishwabandhu Gupta

जाने-माने पत्रकार और पूर्व सांसद विश्वबंधु गुप्ता का रविवार की शाम निधन हो गया। वह 94 साल के थे। परिजनों और करीबियों की मौजूदगी में लोधी रोड स्थित श्मशाम घाट पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।  

'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (Press Club of India) के फाउंडर मेंबर विश्वबंधु गुप्ता वरिष्ठ कांग्रेसी के साथ ‘तेज' और 'सन' अखबार के एडिटर भी थे। वह ‘ऑल इंडिया न्यूजपेपर एडिटर्स कॉन्फ्रेंस’ (AINEC) के अध्यक्ष भी थे। विश्वबंधु गुप्ता कई वर्षों तक कांग्रेस की दिल्ली इकाई में वरिष्ठ पद पर रहे थे और उन्होंने कांग्रेस के कई चुनावी अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाई थी।  

विश्वबंधु गुप्ता के निधन पर कई जाने-मानी हस्तियों ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी है। वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री आलोक मेहता ने विश्वबंधु गुप्ता को श्रद्धांजलि देते हुए बताया, ‘विश्वबंधु जी मुझे सुबह के समय मैसेज किया करते थे। पिछले साल अप्रैल में उन्होंने मुझे अपनी फिलॉसफी भेजी थी। इस साल अप्रैल तक भी मुझे उन्होंने मैसेज भेजे थे। पिछली बार उन्होंने अपना नंबर भेजते हुए कहा था कि यदि किसी को जरूरत है तो वह उनसे संपर्क कर सकता है। वह काफी दयालु और सज्जन व्यक्ति थे। उनके निधन से मैं बहुत दुखी हूं। मैं ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।’

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दरोगा को ब्लैकमेल कर रहा था फर्जी पत्रकार, पुलिस ने दिखाया हवालात का रास्ता

पकड़े गए कथित पत्रकार के पास से पुलिस ने एक मोबाइल फोन, तीन न्यूज चैनल की माइक आईडी और तीन चैनलों के परिचय पत्र भी बरामद किए हैं।

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2020
Arrest

दरोगा को ब्लैकमेल कर अवैध वसूली के आरोप में कथित पत्रकार को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामला उत्तर प्रदेश के इटावा जिले का है और पकड़े गए कथित पत्रकार का नाम सनत तिवारी है। पुलिस के अनुसार, सनत तिवारी सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें डालकर पुलिस और व्यापारियों को ब्लैकमेल कर उनसे अवैध वसूली करता था।  

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इटावा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर ने बताया कि 18 जून को थाना सिविल लाइन पर तैनात उप निरीक्षक सुबोध सहाय ने शिकायत दर्ज कराई थी कि खुद को पत्रकार बता सनत तिवारी नामक एक युवक फोन के माध्यम से लगातार ब्लैकमेल कर रहा है। इस फर्जी पत्रकार द्वारा कहा जा रहा है कि उसके पास सुबोध सहाय की एक वीडियो है, जिसे वह सोशल मीडिया पर वायरल करके सहाय की नौकरी खतरे में डाल सकता है। सनत तिवारी द्वारा ऐसा न करने के एवज में सुबोध सहाय से 50 हजार रुपये की मांग भी की जा रही थी।

अपनी शिकायत में दरोगा का यह भी कहना था कि जब उसने रकम देने से मना कर दिया तो सनत तिवारी ने 18 जून को वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस वीडियो में सनत तिवारी का कहना था कि सुबोध सहाय व उनके साथी पुलिस कर्मियों ने चोरी/लूट की घटना को अंजाम दिया है। एसएसपी आकाश तोमर द्वारा कराई गई जांच में वह वीडियो फर्जी निकला।

इसके बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट वीडियो के जरिये झूठा संदेश देने और दरोगा को ब्लैकमेल के आरोप में सिविल लाइन थाना में तकिया आजादनगर मोहल्ला निवासी सनत तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में पुलिस ने सनत तिवारी को चेकिंग के दौरान शुक्रवार को आईटीआई चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके पास से एक मोबाइल फोन, तीन न्यूज चैनल की माइक आईडी और तीन चैनलों के परिचय पत्र भी बरामद किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एसपी सिटी रामयश सिंह ने बताया कि सनत तिवारी ब्लैकमेल करने की नीयत से यूट्यूब व वॉट्सऐप पर ऐसे वीडियो पोस्ट करता था, जिससे पुलिस की छवि धूमिल हो।

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