ABP के सर्वे में कुछ इस तरह सामने आई लोगों के ‘मन की बात’

महाराष्ट्र के टॉप न्यूज चैनलों में शुमार ‘एबीपी माझा’ (ABP Majha) ने...

Last Modified:
Friday, 29 March, 2019
Survey

समाचार4मीडिया ब्यूरो।।

महाराष्ट्र के टॉप न्यूज चैनलों में शुमार ‘एबीपी माझा’ (ABP Majha) ने ओपिनियन पोल सर्वे के परिणाम जारी कर दिए हैं। चैनल की ओर से ‘नील्सन (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा महाराष्ट्र में यह सर्वे 15 मार्च से 22 मार्च 2019 के बीच 12000 लोगों के बीच राज्य के सभी संसदीय क्षेत्रों में कराया गया था।  

सर्वे के अनुसार, लोगों ने मुख्यमंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस के प्रदर्शन को अच्छा बताया है। उन्हें औसत रूप से 3.70 का स्कोर दिया गया है, जबकि एनडीए के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के प्रदर्शन को भी अच्छा बताते हुए 3.66 का स्कोर दिया गया है। सर्वे के अनुसार, 90 प्रतिशत मतदाता जो भाजपा को वोट देने का इरादा रखते हैं, यदि गठबंधन के कारण उनके निर्वाचन क्षेत्र में कोई शिवसेना का उम्मीदवार चुनाव में खड़ा होता है तो वह उसे वोट देंगे। जबकि, शिवसेना को वोट देने का इरादा रखने वालों में से 85 का मानना है कि गठबंधन के कारण वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा का उम्मीदवार होने पर उसी को वोट देंगे।

किसानों की मदद करने और कानून व्यवस्था के नाम पर लोग भाजपा और शिवसेना को वोट देना चाहते हैं, वहीं रोजगार के मोर्चे पर लोगों ने कांग्रेस को वोट देने का इरादा जताया है। सर्वे के अनुसार सिर्फ पांच प्रतिशत लोग चाहते हैं कि शरद पवार अगले प्रधानमंत्री होने चाहिए, वहीं नरेंद्र मोदी अधिकांश लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। करीब 70 प्रतिशत लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए नरेंद्र मोदी सबसे उपयुक्त हैं, वहीं दूसरे नंबर पर 11 प्रतिशत लोगों ने राहुल गांधी को रखा है। आधे से ज्यादा लोगों (56 प्रतिशत) का मानना है कि यदि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) चुनाव में न उतरने का फैसला लेती है तो उसका फायदा ‘एनडीए’ को होगा, वहीं 22 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इसका फायदा ‘यूपीए’ को होगा।

सर्वे में शामिल आधे से ज्यादा लोगों (54 प्रतिशत) का मानना है कि यदि आगामी लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी चुनाव लड़ती हैं तो वह कांग्रेस को वोट नहीं देंगे। वहीं, 78 प्रतिशत लोगों का कहना है कि यदि लोकसभा चुनाव में कोई फिल्म स्टार मैदान में उतरता है तो वे उसके मुकाबले राजनीतिक दल के नेता को प्राथमिकता देंगे। इस बारे में ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ (ANN) के सीईओ अविनाश पांडे का कहना है, ‘एबीपी माझा महाराष्ट्र का नंबर वन न्यूज चैनल है। यह सर्वे मतदाताओं के मन की बात जानने के लिए किया गया था, जो चुनाव के उत्साह को बढ़ाने में मदद कर सकता है।’

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'किसान संसद' के दौरान कथित पत्रकार ने वीडियो जर्नलिस्ट पर किया हमला

कृषि कानूनों के खिलाफ गुरुवार से जंतर-मंतर पर शुरू हए आंदोलन के दौरान मीडियाकर्मियों से मारपीट का मामला सामने आया है।

Last Modified:
Friday, 23 July, 2021
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कृषि कानूनों के खिलाफ गुरुवार से जंतर-मंतर पर शुरू हए आंदोलन के दौरान मीडियाकर्मियों से मारपीट का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां प्रदर्शन के दौरान एक वीडियो जर्नलिस्ट पर हमला किया गया। मीडियाकर्मी को इलाज के लिए पास के ही राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया।

वीडियो जर्नलिस्ट की पहचान नागेंद्र गोसाईं के रूप में हुई है। हमला वहां हुआ, जहां से सभी मीडियाकर्मी प्रदर्शन कवर कर रहे थे। हालांकि, इसी दौरान एक शख्स ने वीडियो जर्नलिस्ट के ऊपर कैमरा स्टैंड (ट्राईपॉड) से हमला कर दिया, जिसमें उनके हाथ से खून बहने लगा।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमलावर को पकड़ा लिया गया है। गोसाईं पर हमला कथित स्वतंत्र पत्रकार प्रभजोत सिंह द्वारा किया गया।

उन्होंने बताया कि गोसाईं ने कहा कि सिंह सुबह मीडियाकर्मियों को अपशब्द कह रहे थे और उसकी रिकॉर्डिंग भी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सिंह ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

उन्होंने कहा कि जब अन्य पत्रकारों ने अपत्ति जतायी तो कहासुनी हुई और सिंह ने उन पर एक ट्राईपॉड से हमला किया। उन्होंने बताया कि गोसाई ने कहा कि उन पर सिंह ने तीन बार हमला किया जिसमें उनके हाथ में चोट लगी।

गोसाईं ने कहा कि एक मेडिकोलीगल केस (एमएलसी) किया गया है और संसद मार्ग पुलिस थाने में एक लिखित शिकायत दी गई है।

बता दें कि किसानों ने गुरुवार से जंतर-मंतर पर 'किसान संसद' शुरू की है। यह प्रदर्शन 13 अगस्त तक यानी संसद के मॉनसून सत्र खत्म होने तक चलेगा। किसानों ने ऐलान किया है कि तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के लिए वे इस दौरान रोज स्पीकर और डिप्टी स्पीकर चुनेंगे और साथ में अहम बिलों पर चर्चा करेंगे। इस दौरान हर दिन जंतर-मंतर पर 200 किसानों का जमावड़ा लगेगा। 

 

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भैंस का इंटरव्यू कर सुर्खियों में बना यह पत्रकार, वीडियो वायरल

चांद नवाब से लेकर गधे के इंटरव्यू तक, हमेशा ही पाकिस्तान की पत्रकारिता में एक अद्भुत चीज देखने को मिलती है।

Last Modified:
Thursday, 22 July, 2021
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हम सचमुच अजीब दौर में जी रहे हैं। अजीबोगरीब खबरों के सुर्खियों में बने रहने का सिलसिला जारी है। चांद नवाब से लेकर गधे के इंटरव्यू तक, हमेशा ही पाकिस्तान की पत्रकारिता में एक अद्भुत चीज देखने को मिलती है। इन दिनों मशहूर पाकिस्तानी पत्रकार अमीन हफीज का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में पत्रकार हफीज ने ईद के मौके पर एक भैंस का इंटरव्यू लिया और भैंस ने पत्रकार के सवालों का जवाब दिया।

दरअसल हफीज एक भैंस के आगे माइक ले जाते हैं और उससे पूछते, ‘हांजी आप बताएं कि आपको लाहौर में आकर कैसा लगा’ इस पर भैंस भी जवाब देती है तो पत्रकार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वो कहते हैं, ‘भैंस जवाब दे रही है कि लाहौर अच्छा लगा।’

अगर आपको याद हो तो यह वहीं जनाब है जिन्होंने कभी गधे का इंटरव्यू लिया था और अब हफीज ने एक भैंसे का इंटरव्यू लिया है।

इसके बाद हफीज भैंस से अगला सवाल पूछते हैं, ‘आप बताइए, लाहौर का खाना अच्छा है या आपके गांव का खाना अच्छा है।’ इस पर भैंस जवाब देती है तो हफीज खुशी से उछल पड़ते हैं और कहते हैं, ‘हां कहती है लाहौर का खाना अच्छा है।’

यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। नायला इनायत ने इस वीडियो की क्लिप ट्विटर पर साझा की है। इस वीडियो को देखने के बाद हर कोई जमकर हंस रहा है। ये वीडियो देखने के बाद एक यूजर ने कहा कि सच में पाकिस्तान कमाल की जगह है, यहां कुछ भी हो सकता है।

सोशल मीडिया पर धूम मचा रहे इस वीडियो को अभी तक 8 हजार से अधिक लोग देख चुके हैं जबकि बड़ी संख्या में लोग शेयर भी कर रहे हैं। इसके साथ ही लोग इस पर जमकर कमेंट कर पत्रकार हफीज को ट्रोल भी कर रहे हैं।

एक यूजर ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘ये वहीं शख्स है जिसे जानवरों के इंटरव्यू करने में महारत हासिल है’ वहीं एक यूजर ने लिखा, कुर्बानी के नाम पर इतना अत्याचार क्यों हो रहा है।’

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गैरकानूनी घोषित हुआ यह प्रमुख पत्रकार संघ

यह कदम पूर्व सोवियत राष्ट्र के स्वतंत्र मीडिया और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं पर की जा रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है।

Last Modified:
Thursday, 22 July, 2021
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बेलारूस में अधिकारियों ने देश के प्रमुख पत्रकार संघ को गैरकानूनी घोषित कर दिया है। यह कदम पूर्व सोवियत राष्ट्र के स्वतंत्र मीडिया और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं पर की जा रही व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार को न्याय मंत्रालय ने देश की शीर्ष अदालत से कहा कि कार्यालय पट्टा दस्तावेजों में कथित खामियों के मद्देनजर ‘बेलारुसियन एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट’ (बीएजे) को बंद किया जाए।

वहीं दूसरी तरफ, बीएजे ने कहा कि वह शिकायतों का जवाब देने के लिए आवश्यक दस्तावेज इसलिए उपलब्ध नहीं करा सका, क्योंकि पिछले हफ्ते पुलिस द्वारा की गई छापेमारी के बाद से ही उसका मुख्यालय सील है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष आंद्रेई बास्टुनेट्स ने कहा, ‘यह पूरी तरह से खत्म कर देने का अभियान है। न्याय मंत्रालय मर्यादा बनाए रखने की कोशिश भी नहीं कर रहा। भले ही स्थिति निराशाजनक लगती है, हम कानूनी तरीकों से बीएजे का बचाव करेंगे।’

बीएजे ने कहा कि अधिकारियों ने पिछले दो हफ्ते में मीडिया कार्यालयों और पत्रकारों के घर पर 67 छापे मारे हैं, जबकि 31 पत्रकारों को हिरासत में लिया गया।

बता दें कि एसोसिएशन की स्थापना 1995 में की गई थी और अभी 1,204 पत्रकार इसके सदस्य हैं। यह बेलारूस में सबसे बड़ा और सबसे सम्मानित मीडिया संघ है और ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ का सदस्य है।

गौरतलब है कि बीएजे को बंद करने का कदम देश में स्वतंत्र मीडिया पर लगातार किए जा रहे हमलों के बीच उठाया गया है। बेलारूस के तानाशाह राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको के अगस्त 2020 में छठी बार चुने जाने के बाद से ही मीडिया और सरकार के बीच विवाद जारी है।

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इस वजह से पत्रकारों को अपनी लेखनी की धार तेज करने की जरूरत है, बोले राज्यपाल कोश्यारी

पत्रकार अपने विचारों से समाज गढ़ते हैं। समाज में जहां कुछ गलत हो रहा होता है उसे सामने लाने की ताकत पत्रकारों की लेखनी में होती है

Last Modified:
Wednesday, 21 July, 2021
Bhagatsinghkothyari5454

पत्रकार अपने विचारों से समाज गढ़ते हैं। समाज में जहां कुछ गलत हो रहा होता है उसे सामने लाने की ताकत पत्रकारों की लेखनी में होती है, इसलिए पत्रकारों को अपनी लेखनी की धार को तेज करने की जरूरत है। यह बात महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कही।

राज्यपाल मंगलवार को राजभवन में मंत्रालय व विधानमंडल पत्रकार संघ के वार्षिक पत्रकारिता पुरस्कार वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल थे। राज्यपाल द्वारा मंत्रालय और विधानमंडल पत्रकार संघ-2020 के लिए जीवन गौरव पुरस्कार वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश बाल जोशी को प्रदान किया गया, जबकि वरिष्ठ पत्रकार चंदन शिरवाले को उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

वरिष्ठ पत्रकार किरण तारे और औरंगाबाद के सिद्धार्थ गोडम को राज्य स्तरीय उत्कृष्ट पत्रकारिता प्रदान किया गया। इस मौके पर राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि पत्रकारिता एक जोखिम भरा काम है, इसके बावजूद समाज के लिए यह जोखिम उठाने के लिए तैयार रहना महत्वपूर्ण है। समाज की बुरी चीजों के साथ-साथ अच्छी चीजें भी सामने आनी चाहिए। पत्रकारिता को यदि समग्र दृष्टि से किया जाए तो वह निश्चित रूप से समाज के लिए पथ प्रदर्शक होगी।

राज्यपाल ने पुरस्कार विजेता पत्रकारों को बधाई देते हुए कहा कि सभ्य समाज के निर्माण के लिए अच्छी पत्रकारिता महत्वपूर्ण है।

समारोह में मौजूद जनसंपर्क, पर्यटन और राज्य शिष्टाचार राज्य मंत्री अदिति तटकरे ने कहा कि जनसंपर्क महानिदेशालय के माध्यम से पत्रकारों से संवाद बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पत्रकारों के लिए हम इस विभाग के तहत किसी भी योजना या नई पहल को प्राथमिकता देंगे। तटकरे ने कहा कि कुछ खबरें हमें बताती हैं कि बतौर जन प्रतिनिधि हम कौन सा गलत फैसला ले रहे हैं।  

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महज इस आधार पर पत्रकार को हिरासत में रखना उसके जीने के अधिकार का उल्लंघन है: SC

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर के पत्रकार एरेन्ड्रो लेचोम्बाम (Erendro Leichombam) को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।

Last Modified:
Tuesday, 20 July, 2021
ErendroLeichombam575

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर के पत्रकार एरेन्ड्रो लेचोम्बाम (Erendro Leichombam) को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। एरेन्ड्रो लेचोम्बाम को एक विवादित फेसबुक पोस्ट करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, साथ ही उन पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) लगाया गया था। 

दरअसल, बीते गुरुवार को मणिपुर बीजेपी के अध्यक्ष प्रोफेसर एस. टिकेंद्र सिंह का कोरोना संक्रमित होने के कारण निधन हो गया था और उसी दिन पत्रकार  एरेन्ड्रो ने अपनी फेसबुक पोस्ट पर लिखा था, ‘गाय का गोबर और गोमूत्र काम नहीं करता है। रेस्ट इन पीस।’

सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम इस व्यक्ति को एक भी दिन हिरासत में रखने की इजाजत नहीं दे सकते। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि वह (पत्रकार) इसके लिए एक रात भी जेल में नहीं डाला जा सकता है। हालांकि, SG की अपील पर रिहाई मंगलवार तक के लिए रखी गई है, लेकिन बेंच की ओर से कहा गया कि लेचोम्बाम को हिरासत में रखना उनके जीने के अधिकार का उल्लंघन है।

दरअसल, बीजेपी नेता के निधन के बाद एरेन्ड्रो लेचोम्बाम द्वारा फेसबुक पर पोस्ट किया गया था, जिसे विवादित बताते हुए स्थानीय बीजेपी नेताओं ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। स्थानीय पुलिस ने इसी मामले में एक्शन लेते हुए मई महीने में उन पर कई धाराओं में केस दर्ज किया था, साथ ही एनएसए भी लगाया था। मई महीने से ही एरेन्ड्रो लेचोम्बाम जेल में बंद हैं।

एरेन्ड्रो लेचोम्बाम के पिता द्वारा सुप्रीम कोर्ट में इस गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका लगाई गई थी, जिसपर अब सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पत्रकार की तुरंत रिहाई का आदेश दिए हैं।

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मीडिया शिक्षा के सौ वर्ष, चुनौतियां और संभावनाओं पर हुई चर्चा

‘समाचार विज्ञापन बनता जा रहा है और विज्ञापन अब समाचार के रूप में परिवर्तित हो रहा है। अब समाचार और विज्ञापन में भेद करना मुश्किल है।’ यह बात प्रो. सुधीर गव्हाणे ने कही।

Last Modified:
Monday, 19 July, 2021
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‘समाचार विज्ञापन बनता जा रहा है और विज्ञापन अब समाचार के रूप में परिवर्तित हो रहा है। अब समाचार और विज्ञापन में भेद करना मुश्किल है।’ यह बात प्रो. सुधीर गव्हाणे ने कही। सुपरिचित मीडिया शिक्षक प्रो. गव्हाणे ‘मीडिया शिक्षा के सौ वर्ष: चुनौतियां और संभावनाएं’ विषय पर आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकारिता की प्रतिबद्धता लोकतंत्र एवं देश के संविधान के प्रति होना चाहिए।

डॉ. बीआर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय, महू, भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली एवं देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वेबिनार में उन्होंने पत्रकारिता के पांच सूत्र बताये, जिसमें पत्रकारिता की प्रतिबद्धता जनहित, समाज के वंचित एवं पीड़ित लोगों के लिए, सभ्य समाज के निमार्ण तथा राष्ट्रहित एवं देशहित पत्रकारिता का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने पत्रकारिता को अलग अलग कालखंड में रखकर बताया कि 1920-1947 की प्रहार पत्रकारिता का दौर था तो 1947-60 प्रयोगकाल, 1970-1990 आधार खंड रहा तो 1990-2020 का दौर बहार पत्रकारिता का रहा और 1920-1930 का दौर सायबर कालखंड का रहा। प्रो. गव्हाणे ने पत्रकारिता के विगत और आगत का विहंगम विवेचना की।

आईआईएमसी, नई दिल्ली में डीन अकादमिक डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारत और भारतीयता की बात की गई है जिससे हम एक नई दृष्टि विकसित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता शिक्षा में गंभीरता नहीं है और हम पश्चिमी मॉडल पर आश्रित हैं। उन्होंने मीडिया एजुकेशन काउंसिल बनाने की बात की और कहा कि नारद और संजय ही नहीं, गुरु नानकदेव और शंकराचार्य भी कुशल संचारक थे। यह बात हमें मानना चाहिए। उन्होंने मीडिया इंडस्ट्रीज और शिक्षक संस्थाओं के बीच गैप की चर्चा भी की और निदान भी सुझाया।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के विज्ञापन एवं जनसम्पर्क विभाग के एचओडी डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने कहा कि होनहार बच्चा जर्नलिज्म की ओर आता नहीं है लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में यह अवसर दिया गया है। उन्होंने पत्रकारिता एवं संचार को यूपीएससी एवं पीएससी परीक्षाओं में शामिल करने की बात कही। पेंडेमिक में हेल्थ कम्युनिकेशन जैसे विषय की जरूरत को महसूस किया गया।

स्कूल ऑफ जर्नलिज्म, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की विभागाध्यक्ष डॉ. सोनाली नरगुंदे ने कहा कि पत्रकारिता शिक्षा का सामाजिकरण किया जाना चाहिए। संचार के सभी तत्वों को महत्व देना होगा। उन्होंने कहा कि मिशन, प्रोफेशन एवं पेशन तीन अलग अलग चीजें हैं। उन्होंने प्रैक्टिकल एजुकेशन पर जोर दिया।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय केन्द्रीय विश्वविद्यालय में वोकेशनल एजुकेशन के एचओडी प्रो. राघवेन्द्र मिश्रा ने पत्रकारिता शिक्षा के आरंभ से लेकर अब तक विवेचन किया। उन्होंने कहा कि भारत में पत्रकारिता की शुरुआत 1780 से होती है और 1911 में एनीबिसेंट पत्रकारिता शिक्षा की नींव रखती हैं। 1991 में उदारीकरण की चर्चा करते हुए प्रो. मिश्रा ने कहा कि इस दौर में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, रेडियो का आगमन तेजी से हुआ। उन्होंने कहा कि 3 हजार से 3 लाख तक में मीडिया शिक्षा दी जा रही है, जो बच्चे आ रहे हैं, वे ग्लैमर की वजह से आ रहे हैं। प्रो. मिश्रा ने ज्ञान आधारित शिक्षा की पैरवी करते हुए कहा कि एनईपी और मीडिया शिक्षा के उद्देश्य एक हैं। प्रेस्टिज इंस्ट्यूट में पत्रकारिता विभाग की समन्वयक भावना पाठक ने कहा कि अब समय बदल रहा है और पत्रकारिता शिक्षा का पैटर्न भी बदल रहा है। उन्होंने फैकल्टी डेवलपमेंट एवं ट्रेनिंग को पत्रकारिता शिक्षा के सुधार में एक जरूरी कदम बताया।

वेबिनार की अध्यक्ष एवं कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने कहा कि जिस तरह निर्भया कांड को जनआंदोलन बनाने में मीडिया की भूमिका रही, वही मीडिया अन्य नारी अपराधों को जनआंदोलन बनाने में क्यों आगे नहीं आ पायी, इसके कारणों की तलाश की जानी चाहिए। आज भी जनमानस का पत्रकारिता पर भरोसा है और किसी घटना पर वह अखबार में छपी खबर का हवाला देता है। पत्रकारिता को सामाजिक बोध के साथ अपने दायित्व को भी समझना होगा और इसके लिए पत्रकारिता शिक्षा एक बेहतर रास्ता है। उन्होंने वेबिनार में उपस्थिति अतिथियों का स्वागत किया। वेबिनार का संचालन मीडिया एवं नेक, सलाहकार ब्राउस  डॉ. सुरेन्द्र पाठक ने किया। आभार प्रदर्शन मीडिया प्रभारी ब्राउस मनोज कुमार ने किया। वेबिनार के आयोजन में रजिस्ट्रार अजय वर्मा, डीन प्रो. डीके वर्मा के साथ ब्राउस परिवार का सहयोग रहा।

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अब युवाओं को पत्रकारिता की बारीकियों से रूबरू कराएंगे वरिष्ठ पत्रकार खुशदीप सहगल

‘टीवी टुडे नेटवर्क’ से रिटायर होने के बाद करीब तीन दशक के अनुभव के आधार पर अब अपने ब्लॉग ‘देशनामा’ के जरिये मुफ्त में प्रैक्टिकल नॉलेज देंगे

Last Modified:
Monday, 19 July, 2021
Khushdeep Sehgal

‘टीवी टुडे नेटवर्क’ (TV Today Network) से पिछले दिनों रिटायर होने के बाद वरिष्ठ पत्रकार खुशदीप सहगल ने अब पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने वाले युवाओं और यहां कार्यरत पत्रकारों को इस प्रोफेशन की बारीकियां सिखाने का फैसला लिया है।

इस बारे में खुशदीप सहगल का कहना है, ‘मैं आगे भी लेखन से जुड़ा क्रिएटिव कुछ न कुछ करता रहूंगा। अपने इस लंबे अनुभव के आधार पर अब मैं अपने ब्लॉग ‘देशनामा’ के माध्यम से ऐसे युवाओं से संवाद कायम करना चाहता हूं जो क्रिएटिव राइटिंग, ब्लॉगिंग या पत्रकारिता से जुड़ना चाहते हैं या हाल-फिलहाल में जुड़ चुके हैं।’

इसके साथ ही उनका यह भी कहना है, ‘पत्रकारिता के मायने सिर्फ एंकरिंग या रिपोर्टिंग के ज़रिये स्क्रीन पर चेहरा चमकाना ही नहीं होता। मैंने नजदीक से देखा है कि कामयाब एंकर बनने के लिए कैसे दिन-रात एक करना होता है। देश दुनिया के तमाम ताजा घटनाक्रमों की जानकारी रखनी होती है। अब वो दूरदर्शन जैसे पहले दिन नहीं है जब खबरों को वाचक की तरह सिर्फ पढ़ना होता था।‘

खुशदीप सहगल के अनुसार, ‘अगर आप बिना पढ़ने लिखने की जहमत उठाए सिर्फ़ ग्लैमर के वशीभूत पत्रकारिता से जुड़ना चाहते हैं तो मुआफ़ कीजिएगा,ये लाइन आपके लिए नहीं है...ये पेशा जो कड़ी मेहनत मांगता है, वो आप करने के लिए तैयार नहीं हैं तो जल्दी ही हताश हो जाएंगे...आपका पहला लक्ष्य ग्लैमर हैं तो फिर एंटरटेंमेंट की दुनिया को अपनाएं, पत्रकारिता को नहीं...।

ऐसे में होगा ये कि दो-तीन साल इस लाइन में रहने के बाद आपका मोहभंग हो जाएगा और आप इस लाइन से निकलना चाहेंगे...लेकिन तब तक आप बेशकीमती समय और मीडिया स्कूल की पढ़ाई पर खर्च किया हुआ पैसा व्यर्थ कर चुके होंगे...इसलिए बेहतर है कि आप सोच समझ कर ही इस लाइन में आएं...जो समय यहां आप इससे निकलने से पहले लगा चुके होंगे उसका सदुपयोग आप कहीं और करियर बनाने में लगा सकते थे।

हां, अगर आप पत्रकारिता में नाम बनाने के लिए दिन-रात जी तोड़ मेहनत करने को तैयार हैं, शुरू में काफी कुछ सुनने को मानसिक तौर पर मज़बूत हैं तो आपका स्वागत है...एक बात गांठ बांध लीजिए कुआं आपके पास कभी नहीं आएगा, आपको ही अपनी प्यास बुझाने के लिए कुएं पर जाना होगा...वर्क प्लेस पर हर कोई इतना व्यस्त हैं कि उसके पास आपको सिखाने के लिए वक्त नहीं होता...वो एक बार ही आपको समझाएगा...दोबारा पूछेंगे तो उसे खीझ होगी...इसलिए जो कुछ भी सीखना है वो आपको बहुत धैर्य से और बहुत शांत रहते सीखना होगा...।‘

इसके साथ ही पत्रकारिता में एंट्री कर चुके हैं पत्रकारों के लिए खुशदीप सहगल ने कहा, ‘पत्रकार को किसी भी स्टोरी को डील करते वक्त एक अच्छे शेफ को ध्यान में रखना चाहिए...अच्छा शेफ बस डिश को तैयार कर देने में ही अपने काम की इतिश्री नहीं करता... उसका काम डिश के लिए रॉ मैटीरियल से ही शुरू हो जाता है. वो चेक करता है कि ये बढ़िया क्वालिटी का हो... डिश तैयार हो जाने के बाद भी शेफ की पैनी नजर रहती है कि डाइनिंग टेबल पर उसे किस सलीके के साथ पेश किया जा रहा है क्योंकि प्रेजेंटेशन भी बहुत मायने रखता है... इसी तरह पत्रकार को अपनी स्टोरी को शुरू से आखिर तक ओन (Own) करना चाहिए।’

पत्रकारिता संस्थानों में बॉसेज के लिए खुशदीप सहगल का कहना था, ‘कोयला और हीरा दोनों कैमिकल एलीमेंट कार्बन (C) के बने होते हैं बस दोनों में कार्बन की सीक्वेंस का अंतर होता है... इसे बदल दिया जाए तो कोयला हीरा और हीरा कोयला में बदला जा सकता है. हर आदमी में प्लस और माइनस दोनों होते हैं...अब ये काम लेने वाले पर है कि वो कैसे प्लस अधिक निकलवा सकता है। अगर आप मछली से कहें कि पेड़ पर चढ़ जाए तो ये संभव नहीं है। आज हर वक्त अपने केबिन में बैठे रहने वाले मैनेजर्स की नहीं बल्कि ‘वॉक एंड टॉक’ मैनेजर्स की ज़रूरत है...आपको अपनी टीम के हर सदस्य का दिल जीतने की कोशिश करनी चाहिए...टीम के जूनियर से जूनियर सदस्य को ये भरोसा होना चाहिए कि कहीं फंस जाऊं तो बॉस से सही गाइडेंस ले सकता हूं...आप जिस काम की अपेक्षा अपने टीम के सदस्यों से रखते हैं, वही काम करने की आप में खुद भी काबिलियत होनी चाहिए…।’

बता दें कि ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ (TV Today Network) में करीब पांच साल से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे खुशदीप सहगल पिछले हफ्ते ही यहां से रिटायर हुए हैं। यहां पर वह आजतक/इंडिया टुडे में बतौर न्यूज एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। खुशदीप सहगल को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब 27 साल का अनुभव है। ‘टीवी टुडे नेटवर्क‘जॉइन करने से पहले खुशदीप ‘न्यूज24’ के डिजिटल हिंदी विंग की कमान संभाल रहे थे।

खुशदीप सहगल का जन्म मेरठ में हुआ। वहीं राजकीय कॉलेज से इंटरमीडिएट करने के बाद मेरठ कॉलेज से बीएससी की। बिजनेस फैमिली से संबंध होने के बावजूद उनका बिजनेस में कभी मन नहीं रमा। इसके बाद वह पत्रकारिता में आ गए।

खुशदीप ऐसे पत्रकार हैं जिन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल, तीनों तरह की विधाओं में काम करने का अनुभव हैं। मेरठ में दैनिक जागरण से प्रिंट मीडिया में शुरुआत करने वाले खुशदीप ने करीब सात साल तक ‘अमर उजाला’ ग्रुप को भी अपनी सेवाएं दीं। 2001 में खुशदीप मेरठ से नोएडा आकर ‘अमर उजाला डॉट कॉम‘ (amarujala.com) से जुड़ गए। 2004 में वे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का रुख करते हुए ‘जी न्यूज‘ से जुड़े। यहां उन्होंने करीब साढ़े नौ साल की लंबी पारी खेली। इसमें करीब छह साल तक उन्होंने चर्चित कार्यक्रम ‘बड़ी ख़बर’ को प्रड्यूस किया।

खुशदीप हिंदी ब्लॉगिंग की दुनिया में भी जाना-माना नाम हैं। उनके ब्लॉग ‘देशनामा’ को 2013 में इंडीब्लॉगर्स ने पॉलिटिकल न्यूज़ की कैटेगरी में सभी भाषाओं में बेस्ट ब्लॉग चुना। इसके अलावा ब्लॉगअड्डा ने 2014 में खुशदीप के ब्लॉग को हिंदी में भारत का बेस्ट ब्लॉग घोषित किया था।

अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में खुशदीप सहगल ने ‘देशनामा’ में विस्तार से जानकारी दी है। खुशदीप सहगल के इस पूरे ब्लॉग को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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टीवी टुडे नेटवर्क से रिटायर हुए वरिष्ठ पत्रकार खुशदीप सहगल, हुआ सम्मान

वरिष्ठ पत्रकार खुशदीप सहगल ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ (TV Today Network) से रिटायर हो गए हैं। गुरुवार को एक खुशनुमा माहौल में संस्थान ने उन्हें विदाई दी और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

Last Modified:
Saturday, 17 July, 2021
Khushdeep Sehgal

वरिष्ठ पत्रकार खुशदीप सहगल ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ (TV Today Network) से रिटायर हो गए हैं। वह यहां करीब पांच साल से कार्यरत थे और आजतक/इंडिया टुडे में बतौर न्यूज एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। गुरुवार को एक खुशनुमा माहौल में संस्थान ने उन्हें विदाई दी और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

खुशदीप सहगल को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब 27 साल का अनुभव है। ‘टीवी टुडे नेटवर्क‘जॉइन करने से पहले खुशदीप ‘न्यूज24’ के डिजिटल हिंदी विंग की कमान संभाल रहे थे।

समाचार4मीडिया से बातचीत में खुशदीप सहगल ने बताया, ‘आगे भी लेखन से जुड़ा क्रिएटिव कुछ न कुछ करता रहूंगा।अपने इस लंबे अनुभव के आधार अब मैं अपने ब्लॉग ‘देशनामा’ के माध्यम से ऐसे युवाओं से संवाद कायम करना चाहता हूं, जो क्रिएटिव राइटिंग, ब्लॉगिंग या पत्रकारिता से जुड़ना चाहते हैं या हाल-फिलहाल में जुड़ चुके हैं।

बता दें कि खुशदीप सहगल का जन्म मेरठ में हुआ। वहीं राजकीय कॉलेज से इंटरमीडिएट करने के बाद मेरठ कॉलेज से बीएससी की। बिजनेस फैमिली से संबंध होने के बावजूद उनका बिजनेस में कभी मन नहीं रमा। इसके बाद वह पत्रकारिता में आ गए।

खुशदीप ऐसे पत्रकार हैं जिन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल, तीनों तरह की विधाओं में काम करने का अनुभव हैं। मेरठ में दैनिक जागरण से प्रिंट मीडिया में शुरुआत करने वाले खुशदीप ने करीब सात साल तक ‘अमर उजाला’ ग्रुप को भी अपनी सेवाएं दीं। 2001 में खुशदीप मेरठ से नोएडा आकर ‘अमर उजाला डॉट कॉम‘ (amarujala.com) से जुड़ गए। 2004 में वे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का रुख करते हुए ‘जी न्यूज‘ से जुड़े। यहां उन्होंने करीब साढ़े नौ साल की लंबी पारी खेली। इसमें करीब छह साल तक उन्होंने चर्चित कार्यक्रम ‘बड़ी ख़बर’ को प्रड्यूस किया।

खुशदीप हिंदी ब्लॉगिंग की दुनिया में भी जाना-माना नाम हैं। उनके ब्लॉग ‘देशनामा’ को 2013 में इंडीब्लॉगर्स ने पॉलिटिकल न्यूज़ की कैटेगरी में सभी भाषाओं में बेस्ट ब्लॉग चुना। इसके अलावा ब्लॉगअड्डा ने 2014 में खुशदीप के ब्लॉग को हिंदी में भारत का बेस्ट ब्लॉग घोषित किया था।

अपने रिटायरमेंट के बारे में खुशदीप सहगल ने अपने ब्लॉग ‘देशनामा’ में विस्तार से जानकारी दी है। खुशदीप सहगल के इस ब्लॉग को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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अफगानिस्तान में भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दिकी की हत्या, युद्ध को कर रहे थे कवर

अफगानिस्तान में भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की हत्या कर दी गई है। वह अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के लिए काम करते थे।

Last Modified:
Friday, 16 July, 2021
Danish-Siddiqui5454

अफगानिस्तान में भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की हत्या कर दी गई है। वह अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के लिए काम करते थे। दानिश सिद्दीकी अफगानिस्तान में मौजूदा हालात को कवर करने के लिए पिछले कुछ दिनों से वहां डटे हुए थे।

अफगानिस्तान के न्यूज चैनल टोलो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से इस बात की जानकारी दी है कि सिद्दीकी की मौत कांधार प्रांत के स्पिन बोल्डक इलाके में हुई है, जहां इस समय अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद से ही भीषण हिंसा हो रही है। सिद्दिकी बीते कुछ दिनों से कंधार में जारी हालात की कवरेज कर रहे थे। सिद्दीकी ने अपने करियर की शुरुआत एक टेलीविजन न्यूज संवाददाता के रूप में की थी और बाद में वह फोटो जर्नलिस्ट बन गए।

साल 2018 में सिद्दीकी अपने सहयोगी अदनान आबिदी के साथ पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले पहले भारतीय बने थे। इन्होंने रोहिंग्या शरणार्थी संकट को कवर किया था। वहीं कंधार में जारी हिंसा की कवरेज के जुड़ी जानकारी वह अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लगातार शेयर कर रहे थे। 13 जून को उन्होंने जानकारी दी थी कि वह जिस वाहन में सवार थे, उस पर कई हथियारों से हमला किया गया था। अपने ट्वीट में सिद्दिकी ने लिखा था, ‘मेरी किस्मत अच्छी रही कि मैं सुरक्षित रहा और एक रॉकेट को आर्मर प्लेट के ऊपर से टकराते हुए देखा।’

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सर्वे में हुआ खुलासा, पश्चिमी मीडिया ने की भारत में कोविड-19 की 'पक्षपातपूर्ण' कवरेज

आईआईएमसी की ओर से कराए गए इस सर्वेक्षण में देशभर से 529 पत्रकारों, मीडिया शिक्षकों और मीडिया स्कॉलर्स ने हिस्सा लिया।

Last Modified:
Friday, 16 July, 2021
Corona Coverage

‘भारतीय जनसंचार संस्थान’ (आईआईएमसी) द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार 82 फीसदी भारतीय मीडियाकर्मियों की राय में पश्चिमी मीडिया द्वारा भारत में कोविड-19 महामारी की कवरेज ‘पक्षपातपूर्ण’ रही है। इस सर्वेक्षण के अनुसार, 69% मीडियाकर्मियों का मानना है कि इस कवरेज से विश्व स्तर पर भारत की छवि धूमिल हुई है, जबकि 56% लोगों का कहना है कि इस तरह की कवरेज से विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों की भारत के प्रति नकारात्मक राय बनी है।

आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने बताया कि संस्थान के आउटरीच विभाग द्वारा यह सर्वेक्षण जून 2021 में किया गया। इस सर्वेक्षण में देशभर से कुल 529 पत्रकारों, मीडिया शिक्षकों और मीडिया स्कॉलर्स ने हिस्सा लिया। सर्वेक्षण में शामिल 60% मीडियाकर्मियों का मानना है कि पश्चिमी मीडिया द्वारा की गई कवरेज एक पूर्व निर्धारित एजेंडे के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को खराब करने के लिए की गई। अध्ययन के तहत जब भारत में कोविड महामारी के दौरान पश्चिमी मीडिया की कवरेज पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो 71% लोगों का मानना था कि पश्चिमी मीडिया की कवरेज में संतुलन का अभाव था।

प्रो. द्विवेदी के अनुसार, सर्वेक्षण में यह भी समझने की कोशिश की गई कि महामारी के दौरान पश्चिमी मीडिया में भारत के विरुद्ध यह नकारात्मक अभियान वास्तव में कब शुरू हुआ। इसके जवाब में 38% लोगों ने कहा कि यह अभियान दूसरी लहर के दौरान उस समय शुरू हुआ, जब भारत महामारी से लड़ने में व्यस्त था। जबकि 25% मीडियाकर्मियों का मानना है कि यह पहली लहर के साथ ही शुरू हो गया था। वहीं 21% लोगों का मानना है कि भारत के खिलाफ नकारात्मक अभियान तब शुरू हुआ, जब भारत ने कोविड-19 रोधी वैक्सीन के परीक्षण की घोषणा की। इस प्रश्न के उत्तर में 17% लोगों ने कहा कि यह नकारात्मकता तब शुरू हुई, जब भारत ने 'वैक्सीन डिप्लोमेसी' शुरू की।

अध्ययन में पश्चिमी मीडिया द्वारा भारत में महामारी की पक्षपातपूर्ण कवरेज के संभावित कारणों को जानने का भी प्रयास किया गया। 51% लोगों ने इसका कारण अंतरराष्ट्रीय राजनीति को बताया तो 47% लोगों ने भारत की आंतरिक राजनीति को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। 34% लोगों ने फार्मा कंपनियों के निजी स्वार्थ और 21% लोगों ने एशिया की क्षेत्रीय राजनीति को इसका कारण बताया।

सर्वेक्षण के दौरान एक रोचक तथ्य यह भी सामने आया कि लगभग 63 प्रतिशत लोगों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब करने वाली पश्चिमी मीडिया की नकारात्मक खबरों को सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड या साझा नहीं किया।

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