अब युवाओं को पत्रकारिता की बारीकियों से रूबरू कराएंगे वरिष्ठ पत्रकार खुशदीप सहगल

‘टीवी टुडे नेटवर्क’ से रिटायर होने के बाद करीब तीन दशक के अनुभव के आधार पर अब अपने ब्लॉग ‘देशनामा’ के जरिये मुफ्त में प्रैक्टिकल नॉलेज देंगे

Last Modified:
Monday, 19 July, 2021
Khushdeep Sehgal

‘टीवी टुडे नेटवर्क’ (TV Today Network) से पिछले दिनों रिटायर होने के बाद वरिष्ठ पत्रकार खुशदीप सहगल ने अब पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने वाले युवाओं और यहां कार्यरत पत्रकारों को इस प्रोफेशन की बारीकियां सिखाने का फैसला लिया है।

इस बारे में खुशदीप सहगल का कहना है, ‘मैं आगे भी लेखन से जुड़ा क्रिएटिव कुछ न कुछ करता रहूंगा। अपने इस लंबे अनुभव के आधार पर अब मैं अपने ब्लॉग ‘देशनामा’ के माध्यम से ऐसे युवाओं से संवाद कायम करना चाहता हूं जो क्रिएटिव राइटिंग, ब्लॉगिंग या पत्रकारिता से जुड़ना चाहते हैं या हाल-फिलहाल में जुड़ चुके हैं।’

इसके साथ ही उनका यह भी कहना है, ‘पत्रकारिता के मायने सिर्फ एंकरिंग या रिपोर्टिंग के ज़रिये स्क्रीन पर चेहरा चमकाना ही नहीं होता। मैंने नजदीक से देखा है कि कामयाब एंकर बनने के लिए कैसे दिन-रात एक करना होता है। देश दुनिया के तमाम ताजा घटनाक्रमों की जानकारी रखनी होती है। अब वो दूरदर्शन जैसे पहले दिन नहीं है जब खबरों को वाचक की तरह सिर्फ पढ़ना होता था।‘

खुशदीप सहगल के अनुसार, ‘अगर आप बिना पढ़ने लिखने की जहमत उठाए सिर्फ़ ग्लैमर के वशीभूत पत्रकारिता से जुड़ना चाहते हैं तो मुआफ़ कीजिएगा,ये लाइन आपके लिए नहीं है...ये पेशा जो कड़ी मेहनत मांगता है, वो आप करने के लिए तैयार नहीं हैं तो जल्दी ही हताश हो जाएंगे...आपका पहला लक्ष्य ग्लैमर हैं तो फिर एंटरटेंमेंट की दुनिया को अपनाएं, पत्रकारिता को नहीं...।

ऐसे में होगा ये कि दो-तीन साल इस लाइन में रहने के बाद आपका मोहभंग हो जाएगा और आप इस लाइन से निकलना चाहेंगे...लेकिन तब तक आप बेशकीमती समय और मीडिया स्कूल की पढ़ाई पर खर्च किया हुआ पैसा व्यर्थ कर चुके होंगे...इसलिए बेहतर है कि आप सोच समझ कर ही इस लाइन में आएं...जो समय यहां आप इससे निकलने से पहले लगा चुके होंगे उसका सदुपयोग आप कहीं और करियर बनाने में लगा सकते थे।

हां, अगर आप पत्रकारिता में नाम बनाने के लिए दिन-रात जी तोड़ मेहनत करने को तैयार हैं, शुरू में काफी कुछ सुनने को मानसिक तौर पर मज़बूत हैं तो आपका स्वागत है...एक बात गांठ बांध लीजिए कुआं आपके पास कभी नहीं आएगा, आपको ही अपनी प्यास बुझाने के लिए कुएं पर जाना होगा...वर्क प्लेस पर हर कोई इतना व्यस्त हैं कि उसके पास आपको सिखाने के लिए वक्त नहीं होता...वो एक बार ही आपको समझाएगा...दोबारा पूछेंगे तो उसे खीझ होगी...इसलिए जो कुछ भी सीखना है वो आपको बहुत धैर्य से और बहुत शांत रहते सीखना होगा...।‘

इसके साथ ही पत्रकारिता में एंट्री कर चुके हैं पत्रकारों के लिए खुशदीप सहगल ने कहा, ‘पत्रकार को किसी भी स्टोरी को डील करते वक्त एक अच्छे शेफ को ध्यान में रखना चाहिए...अच्छा शेफ बस डिश को तैयार कर देने में ही अपने काम की इतिश्री नहीं करता... उसका काम डिश के लिए रॉ मैटीरियल से ही शुरू हो जाता है. वो चेक करता है कि ये बढ़िया क्वालिटी का हो... डिश तैयार हो जाने के बाद भी शेफ की पैनी नजर रहती है कि डाइनिंग टेबल पर उसे किस सलीके के साथ पेश किया जा रहा है क्योंकि प्रेजेंटेशन भी बहुत मायने रखता है... इसी तरह पत्रकार को अपनी स्टोरी को शुरू से आखिर तक ओन (Own) करना चाहिए।’

पत्रकारिता संस्थानों में बॉसेज के लिए खुशदीप सहगल का कहना था, ‘कोयला और हीरा दोनों कैमिकल एलीमेंट कार्बन (C) के बने होते हैं बस दोनों में कार्बन की सीक्वेंस का अंतर होता है... इसे बदल दिया जाए तो कोयला हीरा और हीरा कोयला में बदला जा सकता है. हर आदमी में प्लस और माइनस दोनों होते हैं...अब ये काम लेने वाले पर है कि वो कैसे प्लस अधिक निकलवा सकता है। अगर आप मछली से कहें कि पेड़ पर चढ़ जाए तो ये संभव नहीं है। आज हर वक्त अपने केबिन में बैठे रहने वाले मैनेजर्स की नहीं बल्कि ‘वॉक एंड टॉक’ मैनेजर्स की ज़रूरत है...आपको अपनी टीम के हर सदस्य का दिल जीतने की कोशिश करनी चाहिए...टीम के जूनियर से जूनियर सदस्य को ये भरोसा होना चाहिए कि कहीं फंस जाऊं तो बॉस से सही गाइडेंस ले सकता हूं...आप जिस काम की अपेक्षा अपने टीम के सदस्यों से रखते हैं, वही काम करने की आप में खुद भी काबिलियत होनी चाहिए…।’

बता दें कि ‘टीवी टुडे नेटवर्क’ (TV Today Network) में करीब पांच साल से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे खुशदीप सहगल पिछले हफ्ते ही यहां से रिटायर हुए हैं। यहां पर वह आजतक/इंडिया टुडे में बतौर न्यूज एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। खुशदीप सहगल को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब 27 साल का अनुभव है। ‘टीवी टुडे नेटवर्क‘जॉइन करने से पहले खुशदीप ‘न्यूज24’ के डिजिटल हिंदी विंग की कमान संभाल रहे थे।

खुशदीप सहगल का जन्म मेरठ में हुआ। वहीं राजकीय कॉलेज से इंटरमीडिएट करने के बाद मेरठ कॉलेज से बीएससी की। बिजनेस फैमिली से संबंध होने के बावजूद उनका बिजनेस में कभी मन नहीं रमा। इसके बाद वह पत्रकारिता में आ गए।

खुशदीप ऐसे पत्रकार हैं जिन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल, तीनों तरह की विधाओं में काम करने का अनुभव हैं। मेरठ में दैनिक जागरण से प्रिंट मीडिया में शुरुआत करने वाले खुशदीप ने करीब सात साल तक ‘अमर उजाला’ ग्रुप को भी अपनी सेवाएं दीं। 2001 में खुशदीप मेरठ से नोएडा आकर ‘अमर उजाला डॉट कॉम‘ (amarujala.com) से जुड़ गए। 2004 में वे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का रुख करते हुए ‘जी न्यूज‘ से जुड़े। यहां उन्होंने करीब साढ़े नौ साल की लंबी पारी खेली। इसमें करीब छह साल तक उन्होंने चर्चित कार्यक्रम ‘बड़ी ख़बर’ को प्रड्यूस किया।

खुशदीप हिंदी ब्लॉगिंग की दुनिया में भी जाना-माना नाम हैं। उनके ब्लॉग ‘देशनामा’ को 2013 में इंडीब्लॉगर्स ने पॉलिटिकल न्यूज़ की कैटेगरी में सभी भाषाओं में बेस्ट ब्लॉग चुना। इसके अलावा ब्लॉगअड्डा ने 2014 में खुशदीप के ब्लॉग को हिंदी में भारत का बेस्ट ब्लॉग घोषित किया था।

अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में खुशदीप सहगल ने ‘देशनामा’ में विस्तार से जानकारी दी है। खुशदीप सहगल के इस पूरे ब्लॉग को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार आकाश भार्गव, CM समेत कई नेताओं-पत्रकारों ने दी श्रद्धांजलि

काफी समय से लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे आकाश भार्गव, दिल्ली में इलाज के दौरान हुआ निधन

Last Modified:
Monday, 25 October, 2021
Akash Bhargava

रांची के जाने-माने पत्रकार आकाश भार्गव का निधन हो गया है। ‘न्यूज11 भारत’ (News11 Bharat) के वरिष्ठ पत्रकार आकाश भार्गव काफी समय से लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे और दिल्ली स्थित ‘इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलेरीज साइंसेज’ (ILBS) में उनका इलाज चल रहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इलाज के दौरान ही शुक्रवार की शाम करीब सवा सात बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

बताया जाता है कि आकाश भार्गव के बेहतर इलाज के लिए पिछले दिनों ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके परिजनों को आर्थिक सहायता सौंपी थी। आकाश के निधन की खबर सुनते ही पत्रकार जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

आकाश भार्गव के निधन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल रमेश बैस समेत तमाम नेताओं और पत्रकारों ने दिवंगत आत्मा को सद्गति और शोकाकुल परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की ईश्वर से प्रार्थना की है।

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फेक न्यूज के दौर में डिजिटल सत्याग्रह की जरूरत: प्रो. संजय द्विवेदी

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने फेक न्यूज पर चिंता जाहिर की

Last Modified:
Monday, 25 October, 2021
fakenews5454

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने फेक न्यूज पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि फेक न्यूज के इस दौर में डिजिटल सत्याग्रह की आवश्यकता है।

जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ भारत (जाब) व राष्ट्र सम्मत प्रकाशन समूह की ओर से रविवार को राजस्थान के दौसा में 'सच्ची खबरें बनाम झूठी खबरें' विषय पर संगोष्ठी और भारत गौरव पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें बतौर मुख्य वक्ता प्रो. द्विवेदी ने कहा कि जिस तरह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने तीन बंदरों का उदाहरण देते हुए बुरा ना देखने, बुरा ना बोलने तथा बुरा ना सुनने की शिक्षा दी थी, उसी तरह आज सोशल मीडिया के दौर में 'बुरा मत टाइप करो, बुरा मत लाइक करो और बुरा मत शेयर करो' की सीख जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमें झूठी खबरें फैलाने वालों के समक्ष असहयोग आंदोलन की शुरुआत करनी चाहिए। सच में झूठ की मिलावट अगर नमक के बराबर भी होती है तो वह सच नहीं रहता, उसका स्वाद किरकिरा हो जाता है। इसलिए अब वक्त आ गया है कि असली खबरों पर झूठ का नमक छिड़कने वालों के खिलाफ खड़ा हुआ जाए।

मुख्य अतिथि और दौसा सांसद जसकोर मीना ने कहा कि यदि झूठ हजार बार बोला जाए तो वह सच जैसा दिखने लगता है, लेकिन हमें झूठ और सच के बीच का अंतर समझने की जरूरत है। झूठी खबरों से देश का भविष्य कमजोर होता है। हमें झूठी खबरों के खिलाफ उठ खड़ा होना है। असत्य तब विजयी होता है, जब हम अपने को छोटा मान लेते हैं। इसलिए सत्य के साथ चलें। सांसद ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह प्रबुद्धजनों का संगम राष्ट्र निर्माण, समाज निर्माण तथा मानव निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम में राजस्थान लोकसेवा आयोग के पूर्व सदस्य विनोद बिहारी शर्मा, कवि, साहित्यकार और प्रशासनिक अधिकारी टीकम बोहरा, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य एल.सी. भारतीय, सर्वब्राह्मण समाज के प्रदेशाध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने भी विचार व्यक्त किए।

राजस्थान से प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य बनने पर एल.सी. भारतीय का सम्मान किया गया। पंडित नवल किशोर शर्मा सामुदायिक भवन में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में नन्ही गायिका आकांक्षा राव ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। कार्यक्रम में अतिथियों ने भारत गौरव, राजस्थान गौरव तथा दौसा गौरव से पत्रकारों को सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लेखक व साहित्यकार लक्ष्मीनारायण भाला ने की। स्वागताध्यक्ष दीपक लवानिया ने सभी आगुन्तको का स्वागत किया। कार्यक्रम संयोजक महेश बालाहेड़ी, सह संयोजक कमलेश त्रिवेदी, वरिष्ठ पत्रकार विनोद पाठक और संजीव माथुर ने अतिथियों का स्वागत किया। समारोह का संचालन श्रीकांत शर्मा ने किया।  समारोह में राजस्थान, बिहार, दिल्ली, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश आदि देशभर से आए पत्रकारों ने शिरकत की। समारोह राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ।

 इन्हें मिला भारत गौरव सम्मान :

अजमेर से सबगुरु डॉट कॉम के संपादक विजय मौर्य, दिल्ली से विष्णु गुप्त, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फोटो जर्नलिस्ट शैलेन्द्र पांडेय, बिहार से दीपक कुमार, हिमाचल प्रदेश से गोपाल शर्मा, मध्यप्रदेश से जितेंद्र जाट।

 इन्हें मिला राजस्थान गौरव सम्मान :

जयपुर से दैनिक जागरण के संवाददाता नरेंद्र शर्मा, दैनिक नवज्योति के के.एल शर्मा, राजस्थान पंछी के श्याम सुंदर शर्मा, ढूढ़ाढ़ री ललकार के अशोक शर्मा, लालसोट दौसा से राजस्थान पत्रिका के कमलेश बैंदाड़ा, अलवर से प्रशांत।

इन्हें मिला दौसा गौरव सम्मान

दौसा से गौरव खंडेलवाल, राजेन्द्र जैन, रोशन जोशी, भास्कर जैमन, जुगल शर्मा, राजेन्द्र जैमन, विनय जोशी, बांदीकुई से गजेंद्र राठौड़, लालसोट से कमलेश आसिका, धर्मेंद्र शर्मा, पूजा जोशी, तरुण त्रिवेदी, सिकंदरा से विश्राम सैनी, विनोद जैमन, मानपुर से मुकेश सैनी, महुवा से संजय लाटा, अवधेश अवस्थी, राजेन्द्र पीपलखेड़ा, मेहंदीपुर बालाजी से सुरेश तिवाड़ी

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लाइव कवरेज के दौरान पत्रकार का मोबाइल चुराना चोर को यूं पड़ा महंगा

मिस्र में एक चोर को लाइव कवरेज कर रहे पत्रकार का मोबाइल चुराना महंगा पड़ गया। दरअसल, चोर ने मोबाइल छीनने के बाद ऐसी गलती कर दी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 23 October, 2021
Last Modified:
Saturday, 23 October, 2021
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मिस्र में एक चोर को लाइव कवरेज कर रहे पत्रकार का मोबाइल चुराना महंगा पड़ गया। दरअसल, चोर ने मोबाइल छीनने के बाद ऐसी गलती कर दी, जिससे कई हजार लोगों ने उसे चोरी करते हुए देख लिया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार होना पड़ा। अब उसका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

घटना मिस्र की राजधानी काहिरा की है। चोरी उस समय हुई जब न्यूज साइट Youm7 के पत्रकार महमूद राघेब इस सप्ताह देश में आए भूकंप के बाद की लाइव रिपोर्ट दे रहे थे। इस बीच ही एक चोर बाइक पर आया और पत्रकार का मोबाइल छीनकर भाग निकला। मोबाइल पर लाइव कवरेज बंद नहीं हुआ था, इसलिए कवरेज देख रहे 20 हजार लोगों ने पूरी घटना के साथ चोर का चेहरा भी देख लिया। चोर की सिगरेट पीते हुए लाइव स्ट्रीमिंग हो गई। इस वीडियो को 70 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। इस पर हजारों कमेंट्स भी आ चुके हैं।

पुलिस ने चोर को गिरफ्तार कर चोरी के लिए इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया है। पुलिस ने बताया कि चोर बेरोजगार था। उसने पुलिस के हाथ लगने से पहले ही वह फोन एक कारोबारी को बेच दिया था।

 

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MCU और चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मिलकर इस दिशा में करेंगे काम, हुआ करार

एक कार्यक्रम में इस एमओयू पर एमसीयू के कुलपति प्रो. केजी सुरेश और सीसीएसयू के कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार तनेजा ने हस्ताक्षर किए।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 23 October, 2021
Last Modified:
Saturday, 23 October, 2021
MCU MOU

तिलक स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के मध्य 22 अक्टूबर 2021 को एक एमओयू हुआ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) में आयोजित कार्यक्रम में इस एमओयू पर एमसीयू के कुलपति प्रो. केजी सुरेश और सीसीएसयू के कुलपति प्रो. नरेन्द्र कुमार तनेजा ने हस्ताक्षर किए।

इस मौके पर प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि दोनों विश्वविद्यालय पत्रकारिता एवं संचार के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देंगे और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय एवं माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के बीच जो एमओयू साइन हुआ है, इससे दोनों को ही लाभ मिलेगा। दोनों विश्वविद्यालय शोधकार्य को बढ़ावा देंगे।

वहीं, प्रो. नरेंद्र कुमार तनेजा ने कहा कि इस प्रकार के एमओयू अन्य विभागों को भी करने चाहिए। एक-दूसरे की अच्छाइयों को ग्रहण करते हुए आगे बढ़ने का काम करना चाहिए। एमओयू होने के बाद सीसीएसयू की प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर सीसीएसयू के कुलसचिव धीरेंद्र कुमार वर्मा और पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के निदेशक प्रो. प्रशांत कुमार आदि मौजूद रहे।

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लखीमपुर हिंसा: पत्रकार के परिवार को कांग्रेस ने सौंपा एक करोड़ का चेक

लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को हिंसा के दौरान मारे गए चार किसानों और एक पत्रकार को कांग्रेस ने आर्थिक सहायता प्रदान की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 23 October, 2021
Last Modified:
Saturday, 23 October, 2021
Financial Assistance

लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को हिंसा के दौरान मारे गए चार किसानों और एक पत्रकार को कांग्रेस ने आर्थिक सहायता प्रदान की। पंजाब सरकार के कृषि मंत्री रणदीप सिंह नाभा व छत्तीसगढ़ सरकार के नगरीय प्रशासन मंत्री शिवकुमार डहरिया ने शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में इन पांचों को एक-एक करोड़ रुपए का चेक सौंपा। 

बता दें कि पांचों मृतकों के परिजनों को पंजाब व छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से 50-50 लाख रुपए की सहायता राशि प्रदान करने घोषणा की गयी थी, जिसके बाद अब दोनों ही राज्यों की सरकारों ने यह सहायता राशि प्रदान की।

लखीमपुर में बीते तीन अक्टूबर को हुई घटना में किसान नक्षत्र सिंह, लवप्रीत सिंह, दलजीत सिंह, गुरविंदर सिंह व पत्रकार रमन कश्यप समेत कुल आठ लोगों की मौत हो गयी थी। इनमें तीन बीजेपी नेता शामिल थे। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ बीती छह अक्टूबर को लखीमपुर पहुंचे पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मृत किसानों व पत्रकार के आश्रितों को अपनी राज्य सरकारों की ओर से 50-50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी।

वहीं, इस मामले में प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों के लिए न्याय की लड़ाई पुरजोर तरीके से लड़ेगी। यही हमारी प्रतिज्ञा भी है और प्रतिबद्धता भी। उधर, पंजाब सरकार के कृषि मंत्री रणदीप सिंह नाभा ने कहा कि शहीद किसानों के परिवारों को न्याय मिले, इसके लिए कांग्रेस हर संभव प्रयास करेगी। कांग्रेस हर कदम पर पीड़ित परिवारों के साथ है।

छत्तीसगढ़ सरकार के नगरीय प्रशासन मंत्री शिवकुमार डहरिया ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा की केंद्र व राज्य सरकार किसानों को अपने कारपोरेट मित्रों के हित में बर्बाद करने पर तुली है। कांग्रेस पार्टी यहां अपना वचन निभाने व आपके दर्द को साझा करने आयी है।

सहायता राशि का चेक पत्रकार रमन कश्यप की पत्नी आराधना कश्यप,  सरदार नक्षत्र सिंह की पत्नी जसवंत कौर, लवप्रीत सिंह के पिता सरदार सतनाम सिंह, दलजीत सिंह की पत्नी परमजीत कौर व गुरविंदर सिंह के पिता सरदार सुखविंदर सिंह को सौंपा गया। 

बता दें कि लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को किसानों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हुई भिड़ंत में एक पत्रकार सहित आठ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। हिंसा में मारे गए 30 वर्षीय स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप साधना टीवी के लिए काम करते थे। वे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की रैली को कवर करने घटना स्थल पर पहुंचे थे, जहां उनकी रैली निकलने से पहले ही हिंसा हो गयी और उनकी रैली को डायवर्ट कर दिया गया। हिंसा के बाद से ही पत्रकार रमन कश्यप लापता थे। चार अक्टूबर को उनका शव बरामद हुआ।

वहीं सूबे की सरकार की ओर से एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने यह जानकारी दी थी कि घटना में मारे गए किसानों के परिवारजन को सरकार की ओर से 45-45 लाख रुपए की धनराशि व परिवार के एक सदस्य को सरकार नौकरी देगी। वहीं घायलों को 10-10 लाख रुपए मुआवजे के तौर पर दिए जाएंगे। फिलहाल प्रशासन की ओर से 45 लाख रुपए का मुआवजा चेक सभी पीड़ित परिवारों को सौंपा जा चुका है।

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IIMC का सत्रारंभ समारोह 25 से, विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगी जानी-मानी हस्तियां

कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार 25 अक्टूबर की सुबह 10:30 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे। कोरोना के कारण इस वर्ष सत्रारंभ समारोह ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है।

Last Modified:
Friday, 22 October, 2021
IIMC

‘भारतीय जनसंचार संस्थान‘ (आईआईएमसी) का सत्रारंभ समारोह 25 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार 25 अक्टूबर की सुबह 10:30 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करेंगे। कोरोना के कारण इस वर्ष सत्रारंभ समारोह ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है।

कार्यक्रम के संयोजक और डीन (अकादमिक) प्रो. गोविंद सिंह ने बताया कि इस पांच दिवसीय आयोजन में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर,  केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान,  राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह,  सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन,  सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव एवं आईआईएमसी के अध्यक्ष अपूर्व चंद्र,  दूरदर्शन के महानिदेशक मयंक अग्रवाल,  प्रख्यात लोक गायिका मालिनी अवस्थी एवं फिल्म अभिनेता अनंत महादेवन जैसी जानी-मानी हस्तियां विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगी।

इसके अलावा  ‘न्यूज 24 ‘ की प्रबंध निदेशक अनुराधा प्रसाद,  ‘एनडीटीवी ‘ की पत्रकार नगमा सहर,  पैरालंपिक मेडल विजेता एवं नोएडा के कलेक्टर सुहास लालिनाकेरे यथिराज,  ‘भारतीय विश्वविद्यालय संघ ‘ की महासचिव प्रो. पंकज मित्तल,  ‘गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय ‘,  नोएडा के कुलपति प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा, ‘विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय ‘, हरियाणा के कुलपति प्रो. राज नेहरू,  ‘भारतीय विज्ञापन मानक परिषद ‘ की महासचिव मनीषा कपूर,  ‘हिन्दुस्तान टाइम्स ‘ के प्रधान संपादक सुकुमार रंगनाथन, ‘जी न्यूज ‘ के प्रधान संपादक सुधीर चौधरी,  ‘एशियन न्यूज इंटरनेशनल ‘ (एएनआई) की प्रधान संपादक स्मिता प्रकाश,  ‘दैनिक जागरण ‘ के कार्यकारी संपादक विष्णु त्रिपाठी,  लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन,  मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) ध्रुव कटोच,  ‘महाराष्ट्र टाइम्स ‘ के संपादक पराग करंदीकर, ‘ न्यूज 18 ‘ उर्दू के संपादक राजेश रैना, ओडिया समाचार पत्र 'समाज' के संपादक सुसांता मोहंती,  मलयालम समाचार पत्र 'जन्मभूमि' के संपादक केएनआर नंबूदिरी,  लेखक संक्रान्त सानु एवं  ‘काठमांडू विश्वविद्यालय ‘ के प्रो. निर्मल मणि अधिकारी भी समारोह में हिस्सा लेंगे।

कार्यक्रम के समापन सत्र में  ‘आईआईएमसी ‘ के पूर्व छात्र, नए विद्यार्थियों से रूबरू होंगे। इन पूर्व छात्रों में  ‘आजतक ‘ के न्यूज डायरेक्टर सुप्रिय प्रसाद,  ‘इंडिया न्यूज ‘ के प्रधान संपादक राणा यशवंत,  जनसंपर्क विशेषज्ञ सिमरत गुलाटी,  ‘इफको ‘ के जनसंपर्क प्रमुख हर्षेंद्र सिंह वर्धन एवं  ‘आईआईएमसी एलुमिनाई एसोसिएशन ‘ के अध्यक्ष कल्याण रंजन शामिल हैं। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण  ‘आईआईएमसी ‘ के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा।

बता दें कि  ‘भारतीय जनसंचार संस्थान ‘ नए विद्यार्थियों के स्वागत और उन्हें मीडिया,  जनसंचार, विज्ञापन एवं जनसंपर्क के क्षेत्र में करियर संबंधी मार्गदर्शन दिलाने के लिए प्रतिवर्ष सत्रारंभ कार्यक्रम का आयोजन करता है।

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नवनिर्मित मकान ढहने से मलबे में दबकर पोता-पोती समेत वरिष्ठ पत्रकार की मौत

अल्मोड़ा में हुआ हादसा, पत्रकार की पत्नी को ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किल से मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 20 October, 2021
Last Modified:
Wednesday, 20 October, 2021
Anand Negi

भारी बारिश के चलते अल्मोड़ा में नवनिर्मित मकान ढहने से मलबे में दबकर ‘क्रिएटिव न्यूज एक्सप्रेस’ (CNE) न्यूज पोर्टल के संवाददाता व वरिष्ठ पत्रकार आनंद नेगी की मौत हो गई। तहसील भिकियासैंण थाना भतरौजखान के तहत ग्राम रापड़ में सोमवार की रात हुए इस हादसे में उनके पोते और पोती की भी मौत हुई है। तीनों के शव बरामद हो गए हैं, जबकि नेगी की पत्नी को ग्रामीणों ने मलबे से सकुशल बाहर निकाल लिया।  

अमर उजाला के पूर्व उप संपादक आनंद नेगी सल्ट, भिकियासैंण व रानीखेत से लगातार बारिश की कवरेज कर रहे थे। अपनी मौत से एक दिन पहले तक उन्होंने बारिश से हुए नुकसान पर खबरें भी प्रेषित की थीं, लेकिन देर रात वह खुद इस आपदा की चपेट में आ गए।

बताया जाता है कि सोमवार की देर रात करीब एक बजे भारी बारिश के कारण आनंद नेगी का नवनिर्मित मकान ढह गया। इस हादसे में आनंद नेगी (60), उनकी पत्नी ऊषा (55), आनंद के बड़े भाई की पुत्री के बच्चे यानी पोती किरण (16) व पोता तनुज (12) मलबे में दब गए। जिस वक्त यह घटना हुई, उस समय परिवार के सभी लोग सो रहे थे।

ग्रामीणों ने किसी तरह रात्रि में ऊषा को मलबे से सकुशल बाहर निकाल लिया, मंगलवार की सुबह पुलिस व राजस्व दल ने ग्रामीणों का मदद से रेस्क्यू अभियान चलाया, जिसमें किरण व तनुज मलबे में मृत मिले, जबकि बाद में आनंद नेगी का भी शव मलबे से बरामद हुआ।

आनंद नेगी के निधन पर स्थानीय पत्रकारों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। जिला पत्रकार संघ ने संगठन के जिला उपाध्यक्ष नेगी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की है। इसके साथ ही भगवान से परिजनों को यह दु:ख सहने की ताकत देने की प्रार्थना की है।

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दुनिया को अलविदा कह गए वरिष्ठ पत्रकार सतीश जुगरान

वरिष्ठ पत्रकार व न्यूज एजेंसी ‘भाषा’ के पूर्व विशेष संवाददाता सतीश जुगरान का शुक्रवार तड़के निधन हो गया।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 16 October, 2021
Last Modified:
Saturday, 16 October, 2021
SatishJugran4545

वरिष्ठ पत्रकार व न्यूज एजेंसी ‘भाषा’ के पूर्व विशेष संवाददाता सतीश जुगरान का शुक्रवार तड़के निधन हो गया। वह 80 वर्ष के थे।

परिवार के सूत्रों ने बताया कि उनका निधन गुरुग्राम में उनके छोटे पुत्र के निवास पर हुआ। उनका बड़ा पुत्र स्वीडन में रह रहा है और उसके यहां आने पर जुगरान का अंतिम संस्कार 16 अक्टूबर को किया जाएगा। उनके परिवार में पत्नी, दो पुत्र एवं एक पुत्री है।

जुगरान 'भाषा' के विशेष संवाददाता के रूप में सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने न्यूज एजेंसी के लिए गृह एवं रेलवे सहित विभिन्न मंत्रालयों को कवर किया। इससे पहले वह समाचार भारती और समाचार संवाद एजेंसियों में भी काम कर चके थे।

सेवानिवृत्त होने के बाद भी जुगरान काफी सक्रिय थे और रेडियो के लिए संसद समीक्षा व विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के लिए स्वतंत्र लेखन करते थे। हंसमुख स्वभाव के जुगरान का मित्रता दायरा काफी विस्तृत था।

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श्रीनगर पहुंची प्रेस काउंसिल की टीम, करेगी पत्रकारों पर शोषण के आरोपों की जांच

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी (तथ्यान्वेषी समिति) बुधवार को अपने तीन दिवसीय दौरे पर श्रीनगर पहुंची।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 14 October, 2021
Last Modified:
Thursday, 14 October, 2021
PCI

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी (तथ्यान्वेषी समिति) बुधवार को अपने तीन दिवसीय दौरे पर श्रीनगर पहुंची। जम्मू-कश्मीर में पत्रकारों के उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए वह यहां आयी है। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।

प्रवक्ता ने बताया कि यह कमेटी कश्मीर के मीडिया वर्ग के लोगों से मुलाकात करेगी। तीन सदस्यीय इस कमेटी में ‘दैनिक भास्कर’ के ग्रुप एडिटर प्रकाश दुबे, ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ के गुरबीर सिंह और ‘जन मोर्चा’ के एडिटर डॉ. सुमन गुप्ता शामिल हैं।

‘पीडीपी’ अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती द्वारा घाटी में पत्रकारों के शोषण का आरोप लगाए जाने के बाद प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए यह कमेटी गठित की है।

गौरतलब है कि महबूबा मुफ्ती ने 27 सितंबर को ‘प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया’ और ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (Editors Guild of India) को एक पत्र लिखकर केंद्र शासित प्रदेश में पत्रकारों को धमकी, जासूसी और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे और तथ्यों की जांच के लिए दोनों निकायों से क्षेत्र में एक टीम भेजने का आग्रह किया था।

उन्होंने कहा था कि पुलिस ने कई पत्रकारों पर छापे मारे और उनके व्यक्तिगत सामान जब्त किए। महबूबा मुफ्ती ने पीसीआई के अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा था कि उन्हें यकीन है कि वह जानते हैं कि पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में कश्मीर में कई पत्रकारों के घरों पर छापेमारी की थी। उन्होंने कहा था कि यह सब 5 अगस्त, 2019 के बाद से देखने को मिल रहा है।

 

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हिन्दुस्तान की आजादी के बाद का सफर बताएगी वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल की ये नई किताब

जब यह देश आजाद हुआ तो किस हाल में था। बंटवारे की छुरी कलेजे पर चली थी। अंग्रेजों ने जी भरकर लूटा था।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 13 October, 2021
Last Modified:
Wednesday, 13 October, 2021
rajeshbadal544

जब यह देश आजाद हुआ तो किस हाल में था। बंटवारे की छुरी कलेजे पर चली थी। अंग्रेजों ने जी भरकर लूटा था। न पेट भर अनाज था, न तन ढकने को कपड़े और न बच्चों के लिए दूध। पढ़ने के लिए स्कूल, कॉलेज, इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेज नाम मात्र के थे। उद्योग धंधे नहीं थे। हर हाथ को काम नहीं था। सब कुछ छिन्न-भिन्न था। इस हाल में भारत ने अपने आप को समेटा और तिनका-तिनका कर अपना मजबूत लोकतांत्रिक घोंसला बनाया। अफसोस हमारी नई पीढ़ी संघर्ष के उस दौर से परिचित नहीं है।

मैनें इन नौजवानों के लिए एक छोटी सी पुस्तिका लिखी है- ‘हिन्दुस्तान का सफ़र’। दरअसल इससे पहले मैनें इसी विषय पर एक फिल्म बनाई थी। उसे जाने माने गांधीवादी और गांधी जी के साथ वर्षों काम कर चुके प्रेमनारायण नागर ने देखा। नागर जी 96 बरस के हैं और सदी के सुबूत की तरह हमारे सामने हैं। उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए भोपाल के गौरव फाउंडेशन ने यह पुस्तिका प्रकाशित की है।

गौरव फाउंडेशन के प्रेरणा पुरुष और माधव राव सप्रे स्मृति राष्ट्रीय संग्रहालय के संस्थापक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर की देख रेख में यह पुस्तिका उपयोगी बन पड़ी है। इसका लोकार्पण उज्जैन विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के वाग्देवी भवन में हुआ। इसमें श्रीधरजी के अलावा स्वयं प्रेमनारायण नागर जी, विवि के कुलपति अखिलेश पांडे, पूर्व कुलपति डॉक्टर रामराजेश मिश्र, विभागाध्यक्ष डॉक्टर प्रोफेसर शैलेन्द्र शर्मा, जानी-मानी लेखिका डॉक्टर मंगला अनुजा, नेहरू युवा केंद्र के संभागीय निदेशक श्री अरविन्द श्रीधर समेत अनेक विद्वान, पत्रकार, लेखक और छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

ज़ाहिर है इस कार्यक्रम में नागरजी को सुनने से बेहतर और कोई अनुभव नहीं हो सकता था। आज भी उन्हें अस्सी पचासी साल पुराने भारत की कहानी याद है। सन 1924 में जन्में श्री नागर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निर्देश पर हजारों कार्यकर्ताओं के साथ गांवों को मजबूत बनाने के मिशन पर निकल पड़े थे। गांधीजी ने 8 अक्टूबर, 1946 को खादी ग्रामोद्योग से जुड़े अपने कार्यकर्ताओं को बुलाया और उनसे कहा, ‘असल तस्वीर देखनी है तो शहरों में नहीं गांवों में जाओ। ग्रामीण क्षेत्रों के काम-धंधों को बचाना ही पर्याप्त नहीं है। उनमें सुधार लाकर गांव के लोगों को रोजगार भी देना होगा। श्री नागर कहते हैं, ‘बापू के निर्देश पर मैं और मेरे साथी ग्वालियर तहसील में भांडेर से पंद्रह किलोमीटर दूर गांव उड़ीना पहुंचे। उन दिनों वहां जाने के लिए कोई सड़क नहीं थी और न कोई अन्य बुनियादी ढांचा। बरसात के दिनों में तो दो नदियों को तैरकर पार करना पड़ता था। मैं उस क्षेत्र में एक साल तक काम करता रहा।

उन्हीं दिनों पास के गांव भिटारी भरका में आपसी संघर्ष में एक दलित श्रमिक को मार डाला गया। पास के पड़ोखर थाने से पुलिस आई। भांडेर से तहसीलदार जांच के लिए उस श्रमिक के घर पहुंचा। उस परिवार की गरीबी को देखकर वह द्रवित हो गया। उसने अंतिम संस्कार और कुछ समय तक पेट भरने के लिए कुछ आर्थिक सहायता देनी चाही। झोपड़ी के द्वार पर श्रमिक का शव रखा था। देहरी पर उसकी बेटी बैठी आंसू बहा रही थी। गांव के चौकीदार ने उससे कहा कि अपनी मां को बाहर लेकर आ। साहब कुछ मदद देना चाहते हैं। रोती हुई बेटी ने कहा कि अम्मा बाहर नहीं आएगी। उससे बार-बार कहा गया, लेकिन हर बार उसने मना कर दिया। जब बहुत देर तक उसने मां को नहीं बुलाया तो चौकीदार ने कहा कि मैं अंदर जाकर मिल लेता हूं। तब उस बिलखती बेटी ने बेबसी से कहा, ‘अम्मा बाहर नई आ सकत। वा नंगी बैठी है। उसके पास एकई धोती (साड़ी) हती। वा दद्दा (पिता) पै डार दई तो कैसें बाहर आहै"।

(इसी पुस्तिका- हिन्दुस्तान का सफ़र का एक अंश )

 

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