नीरज ने किताब में गिरीश मिश्रा के साथ काम करने के अपने अनुभवों को साझा किया है। साथ ही यह भी बताया है कि मिश्राजी किस तरह दूसरे संपादकों से अलग रहे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो