भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने राइस ब्रान (चावल की भूसी) से बनने वाले तेल (Rice Bran Oil) के स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर तीन कंपनियों को नोटिस जारी किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने राइस ब्रान (चावल की भूसी) से बनने वाले तेल (Rice Bran Oil) के स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर तीन कंपनियों को नोटिस जारी किया है। इनमें हैदराबाद की Gemini Edibles & Fats India Ltd, BigBasket और Flipkart शामिल हैं। नियामक के मुताबिक, कंपनियों की ओर से ‘Freedom Cooking Rice Bran Oil’ को लेकर किए गए कुछ दावे भ्रामक हो सकते हैं और तय नियमों के तहत इनकी अनुमति नहीं है।
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, FSSAI ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इन नोटिसों की जानकारी दी। BigBasket का संचालन करने वाली कंपनी Innovative Retail Concepts और Flipkart India को भी इस मामले में नोटिस जारी किया गया है।
कोलेस्ट्रॉल कम करने के दावे पर उठे सवाल
FSSAI के मुताबिक, ‘Freedom Cooking Rice Bran Oil’ का प्रचार ई-कॉमर्स मंचों और सोशल मीडिया पर कुछ स्वास्थ्य संबंधी दावों के साथ किया जा रहा था। इनमें “खराब कोलेस्ट्रॉल कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखने या बढ़ाने” जैसे दावे शामिल थे। इसके अलावा, उत्पाद में “10,000 से अधिक पीपीएम प्राकृतिक ओराइज़नॉल” होने की बात भी कही गई थी।
नियामक ने कहा कि कोलेस्ट्रॉल और दिल की सेहत से जुड़े ये दावे खाद्य तेलों, खासकर चावल की भूसी के तेल के लिए लागू विज्ञापन और दावों से जुड़े नियमों के तहत अनुमत नहीं पाए गए।
FSSAI के विज्ञापन और दावे संबंधी नियम 2018 के तहत खाद्य उत्पादों के बारे में किए जाने वाले दावों को तय मानकों का पालन करना होता है। कंपनियों को अपने उत्पादों के प्रचार में ऐसे दावे नहीं करने चाहिए, जिनकी संबंधित नियमों के तहत अनुमति नहीं है।
अपनी वेबसाइट पर लाइसेंस को लेकर भी सवाल
FSSAI ने Gemini Edibles & Fats India के मामले में एक और कमी की ओर ध्यान दिलाया है। नियामक के मुताबिक, कंपनी अपनी ई-कॉमर्स वेबसाइट के जरिए खाद्य उत्पादों की पेशकश और बिक्री कर रही थी, लेकिन उसके पास इस गतिविधि को कवर करने वाला वैध केंद्रीय लाइसेंस दिखाई नहीं दिया।
इस मामले में तीनों खाद्य कारोबार संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे पूछा गया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। हालांकि, नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई हो चुकी है। नियामक की ओर से उठाए गए सवालों पर कंपनियों का जवाब और आगे की कार्रवाई इस मामले में अहम होगी।
दो अन्य कंपनियों पर भी कार्रवाई
FSSAI ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन से जुड़े दो अन्य मामलों में भी कार्रवाई की है। नियामक ने निरीक्षण के दौरान गंभीर कमियां पाए जाने के बाद DNV Food Products Ltd का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। निरीक्षण में साफ-सफाई, स्वच्छता, खाद्य उत्पादों के भंडारण और लाइसेंस से जुड़े नियमों के पालन में कमियां सामने आई थीं।
इसके अलावा, Jhanvittanni का लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया है। FSSAI के मुताबिक, इस कंपनी की ओर से खाद्य सुरक्षा नियमों और विनियमों का लगातार पालन नहीं किया जा रहा था। इन कार्रवाइयों के जरिए नियामक ने खाद्य उत्पादों की बिक्री, उनके प्रचार और कारोबार से जुड़े लाइसेंस नियमों के पालन पर अपना रुख स्पष्ट किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नसीम अहमद दिवाली का विज्ञापन लेने फ्लोर मिल गए थे, जहां विवाद के बाद उनके साथ जमकर मारपीट की गई, जिससे उनकी मौत हो गई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ में पत्रकार मोहम्मद नसीम अहमद की हत्या का मामला सामने आया है। आरोप है कि 18 अक्टूबर को जरौठी रोड स्थित एक फ्लोर मिल में दिवाली के विज्ञापन को लेकर विवाद के बाद उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। गंभीर हालत में उन्हें गढ़ रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नसीम अहमद जनवाणी अखबार से जुड़े हुए थे और अपने कुछ साथियों के साथ फ्लोर मिल पहुंचे थे। उनके साथ मौजूद सलाउद्दीन ने आरोप लगाया कि दिवाली के विज्ञापन को लेकर वहां कहासुनी हुई। इसी दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर नसीम अहमद और उनके साथियों को फर्जी पत्रकार कहा, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। हापुड़ के पुलिस अधीक्षक मधुबन कुमार सिंह ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और मामले की जांच के निर्देश दिए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नसीम अहमद के दामाद डॉ. शाहरुख की शिकायत पर हापुड़ देहात थाने में चार नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नसीम अहमद की छोटी बेटी की शादी 14 नवंबर को होनी थी। उनकी मौत की खबर के बाद परिवार में शोक का माहौल है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मीडिया से कहा है कि वह उन नेताओं को उनके पुराने बयान याद दिलाए, जिन्होंने कभी कहा था कि अगर वे सत्ता में नहीं आए तो अपनी पार्टी भंग कर देंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मीडिया से कहा है कि वह उन नेताओं को उनके पुराने बयान याद दिलाए, जिन्होंने कभी कहा था कि अगर वे सत्ता में नहीं आए तो अपनी पार्टी भंग कर देंगे। उन्होंने कहा कि मीडिया को यह भी याद दिलाना चाहिए कि उन नेताओं ने बाद में क्या किया और बीजेपी (BJP) व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर पहले क्या-क्या कहा था।
शिवकुमार रविवार शाम मैसूरु में कंबाला कार्यक्रम का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने यह बात कही।
2028 में सत्ता में आने के दावे पर दिया जवाब
सीएम शिवकुमार की यह टिप्पणी केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के उस बयान के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी-जेडी(एस) गठबंधन 2028 में कर्नाटक की सत्ता में वापसी करेगा। इस पर शिवकुमार ने कहा कि मीडिया को नेताओं के पुराने बयानों का फ्लैशबैक दिखाना चाहिए, ताकि लोगों को याद रहे कि पहले उन्होंने क्या कहा था और बाद में उनका रुख क्या रहा।
जब शिवकुमार से कुमारस्वामी के उस बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें अपना एक अलग रूप दिखाना पड़ सकता है, तो मुख्यमंत्री ने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं बड़े लोगों के बारे में बात नहीं करना चाहता।” इसके बाद वह हाथ जोड़कर वहां से चले गए।
गन्ना किसानों के मुद्दे पर क्या बोले शिवकुमार?
गन्ना किसानों की मांगों को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा है। वह गन्ने की कीमत बढ़ाने और सूखे से राहत जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री से चर्चा करना चाहते हैं, क्योंकि इन मामलों में केंद्र सरकार का सहयोग जरूरी है।
शिवकुमार ने कहा कि अगर सभी राजनीतिक दल सहमत होते हैं, तो वह एक प्रतिनिधिमंडल को भी साथ लेकर जाएंगे। उन्होंने गन्ना किसानों से अपना विरोध-प्रदर्शन वापस लेने की अपील करते हुए कहा, “मैं किसानों के मुद्दे पर राजनीति करने के लिए तैयार नहीं हूं।”
दिल्ली पुलिस ने SIR प्रदर्शन से जुड़े कथित भ्रामक दावों, अफवाहों और फर्जी वीडियो प्रसारित करने के आरोप में 37 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली पुलिस ने SIR प्रदर्शन से जुड़े कथित भ्रामक दावों, अफवाहों और फर्जी वीडियो प्रसारित करने के आरोप में 37 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की है। इनमें 17 अकाउंट दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े बताए गए हैं। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर (FIR) भी दर्ज की हैं और कुछ अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारी के अनुसार, अब तक 17 सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई की गई है। इन अकाउंट पर लोगों को भड़काने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को पोस्ट हटाने का नोटिस
पुलिस ने संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को नोटिस भेजकर कथित भ्रामक पोस्ट हटाने के लिए कहा है। इसके अलावा, X से उन उपयोगकर्ताओं की जानकारी मांगी गई है, जिन पर फर्जी वीडियो अपलोड करने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, इन पोस्ट और वीडियो से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। जांच के दौरान ऐसे कई अकाउंट की भी पहचान की गई है, जिन पर प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने और प्रदर्शन को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप है।
पुलिस कुछ अन्य अकाउंट की भी जांच कर रही है, जिन पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर कथित रूप से फर्जी सामग्री साझा करने का आरोप है।
AI से बनाई गईं ACP और महिला पत्रकार की तस्वीरें
इस मामले में दर्ज एफआईआर में से एक के आधार पर पुलिस ने कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। उन पर सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विवेक भगत और एक महिला पत्रकार की AI से बनाई गई तस्वीरें तैयार करने और उन्हें प्रसारित करने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, इन तस्वीरों के जरिए कथित तौर पर यह दिखाने की कोशिश की गई थी कि महिला पत्रकार को परेशान किया जा रहा है। जांचकर्ताओं ने तस्वीरों की जांच की और उन्हें AI से तैयार किया गया पाया। यह मामला उस शिकायत से जुड़ा है, जिसमें महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के दौरान ACP विवेक भगत ने उनका यौन उत्पीड़न किया था।
दूसरी ओर, विवेक भगत ने भी महिला पत्रकार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 13 अक्टूबर को कथित जातिसूचक टिप्पणियां करने के आरोप में महिला पत्रकार के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इस मामले में दोनों पक्षों की शिकायतों और आरोपों की जांच की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने वाले अकाउंट भी जांच के दायरे में
पुलिस के अनुसार, जांच में ऐसे कई दक्षिणपंथी सोशल मीडिया अकाउंट सामने आए हैं, जिनसे प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाते हुए पोस्ट और रील साझा की गईं। पुलिस का आरोप है कि कुछ पोस्ट में प्रदर्शनों को गलत तरीके से पेश किया गया।
इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से संबंधित कथित रूप से मनगढ़ंत सामग्री साझा करने वाले दूसरे अकाउंट की भी पहचान की गई है।
पुलिस विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गतिविधियों की निगरानी कर रही है। अधिकारी के मुताबिक, मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
फ्रिट्ज फर्नांडिस महिंद्रा एक्सपीरियंसेज से जुड़ गए हैं। 17 वर्षों से अधिक अनुभव वाले फर्नांडिस इवेंट्स और पार्टनरशिप्स की जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे पहले वह पीवीआर लिमिटेड में प्रमुख थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
फ्रिट्ज फर्नांडिस (Fritz Fernandes) महिंद्रा ग्रुप (Mahindra Group) से जुड़ गए हैं। उन्होंने महिंद्रा एक्सपीरियंसेज (Mahindra Experiences) में इवेंट्स और पार्टनरशिप्स के प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली है। फर्नांडिस ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपने नए पद की जानकारी साझा की।
फर्नांडिस के पास लग्जरी लाइफस्टाइल, हॉस्पिटैलिटी, म्यूजिक, स्पोर्ट्स और सिनेमा के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उनके करियर में बिजनेस बनाने के साथ कंज्यूमर्स के लिए नए एक्सपीरियंसेज तैयार करने पर खास फोकस रहा है।
महिंद्रा ग्रुप में शामिल होने से पहले वह पीवीआर लिमिटेड (PVR Limited) में वाइस प्रेसिडेंट और एक्सपीरियंसेज के प्रमुख के पद पर काम कर रहे थे।
अपने करियर में फर्नांडिस द बे क्लब-मुंबई (The Bay Club-Mumbai), कैडिला फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (Cadila Pharmaceuticals Limited), कोंडे नास्ट इंडिया (Condé Nast India), फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (Football Sports Development Limited), डीएनए नेटवर्क्स (DNA Networks) और ईएमआई म्यूजिक (EMI Music) जैसी कंपनियों में भी अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को सोशल मीडिया के खतरों से बचाने के लिए राष्ट्रीय नियम बनाने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र और NCPCR से जवाब मांगा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े कथित खतरों से बचाने के लिए एक व्यापक और सख्ती से लागू किए जा सकने वाले राष्ट्रीय ढांचे की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से जवाब मांगा है। यह याचिका इंदौर के एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल और उसके अकादमिक निदेशक सिद्धार्थ सिंह गिरनार ने दाखिल की है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को नोटिस जारी किए। वैभव चौधरी की ओर से दाखिल इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित एक अन्य याचिका के साथ जोड़ दिया गया है। अब इस मामले पर 7 दिसंबर को सुनवाई होगी।
याचिका में अदालत से उचित आदेश जारी करने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि बच्चों को सोशल मीडिया के संभावित खतरों से प्रभावी सुरक्षा देने में संबंधित पक्षों की लगातार नाकामी मनमानी और अनुचित है। याचिका के मुताबिक, यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3), 21 और 21A का उल्लंघन करती है।
इन खतरों में बच्चों को बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसाना, यौन शोषण, साइबर बुलिंग यानी इंटरनेट पर परेशान करना, उम्र के लिहाज से अनुचित और नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री दिखना, बच्चों के व्यवहार के आधार पर उनकी प्रोफाइल तैयार करना और ऐसे फीचर शामिल हैं, जो उन्हें लंबे समय तक प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं।
सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए उम्र तय करने की मांग
याचिका में बच्चों की उम्र की अनिवार्य जांच, उनकी उम्र के हिसाब से सोशल मीडिया तक पहुंच, माता-पिता की सत्यापित सहमति और बच्चों को साइबर बुलिंग, यौन शोषण, हानिकारक सामग्री और सोशल मीडिया के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार को बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए एक अलग, व्यापक और कानूनी रूप से लागू किए जा सकने वाले नियामक ढांचे को तैयार करने, अधिसूचित करने और लागू करने का निर्देश देने की भी मांग की है।
याचिका में कहा गया है कि अदालत केंद्र सरकार को निर्देश दे कि तय की जाने वाली उम्र से कम बच्चों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने पर रोक लगाई जाए। वहीं, निर्धारित उम्र से अधिक के बच्चों के लिए इन प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को उचित नियमों के तहत नियंत्रित किया जाए।
इसके अलावा, याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार तय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के खाते बनाने, उन्हें बनाए रखने और इस्तेमाल करने के लिए उम्र के आधार पर उचित पाबंदियां तैयार करे और उन्हें लागू करे।
बच्चों पर सोशल मीडिया के असर को लेकर चिंता
याचिका में ऐसे कई मामलों का जिक्र किया गया है, जिनमें कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया खाते चला रहे हैं, अनजान लोगों के संपर्क में आ रहे हैं और उन्हें इंटरनेट पर परेशान किया जा रहा है। इसमें मोबाइल फोन का लंबे समय तक इस्तेमाल करने के कारण बच्चों की नींद पूरी न होने और एकाग्रता कम होने की समस्या भी उठाई गई है।
याचिका के मुताबिक, माता-पिता ने बच्चों के जरूरत से ज्यादा स्क्रीन देखने, ऑनलाइन लोकप्रियता को लेकर चिंता करने, अपने शरीर और रूप-रंग को लेकर असहज महसूस करने, दूसरों से दूरी बनाने और पढ़ाई तथा बाहर की गतिविधियों में रुचि कम होने जैसी समस्याओं पर भी चिंता जताई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि स्कूल और माता-पिता अकेले इस समस्या से नहीं निपट सकते। इसकी वजह यह है कि सोशल मीडिया से जुड़े खतरे सिर्फ इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री तक सीमित नहीं हैं। इन प्लेटफॉर्म की बनावट और काम करने का तरीका भी बच्चों को लंबे समय तक इनसे जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करता है।
बच्चों के लिए कई तरह के खतरे
याचिका में कहा गया है कि बच्चे सोशल मीडिया पर कई तरह के खतरों के प्रति खास तौर पर संवेदनशील होते हैं। इनमें बच्चों को बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसाना, यौन शोषण, ब्लैकमेल करना, किसी और की पहचान अपनाकर धोखा देना, निजी तस्वीरों का प्रसार और हिंसक, यौन रूप से स्पष्ट या खुद को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी सामग्री के संपर्क में आना शामिल है।
याचिकाकर्ता ने इन खतरों से बच्चों को बचाने के लिए उम्र के आधार पर नियम बनाने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाला एक मजबूत राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल संबंधित मंत्रालयों और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।
ब्लाइव प्रोडक्शंस एंड म्यूजिक के सह-संस्थापक सूरज सिंह जी स्टूडियोज से जुड़ने जा रहे हैं। उनके पास फिल्म और टेलीविजन प्रोडक्शन में दो दशक से अधिक का अनुभव है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ब्लाइव प्रोडक्शंस एंड म्यूजिक (Blive Productions & Music) के सह-संस्थापक सूरज सिंह (Suraj Singh) जी स्टूडियोज (Zee Studios) से जुड़ने जा रहे हैं। उनके पास फिल्म और टेलीविजन प्रोडक्शन के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव है।
सूरज सिंह का जी स्टूडियोज से जुड़ना कंपनी के वरिष्ठ स्तर पर हुए बदलावों के बीच हो रहा है। उमेश बंसल (Umesh Bansal) जी स्टूडियोज से अलग होकर बी4यू/आईवीवाई (B4U/IVY) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बन चुके हैं। वहीं, जून 2024 में जी स्टूडियोज में सभी वर्टिकल्स के लिए कंटेंट प्रमुख नियुक्त की गईं प्रगति देशमुख (Pragati Deshmukh) भी कंपनी छोड़ चुकी हैं और अब स्पेलबाउंड लैब्स (Spellbound Labs) में निर्माता हैं।
जी स्टूडियोज की हिंदी फिल्म टीम में रैदिता टंडन (Raedita Tandan) भी शामिल हैं। वह अप्रैल 2026 में सह-निर्माता-हिंदी फिल्म्स बनी थीं। इससे पहले सितंबर 2025 में उन्होंने क्रिएटिव प्रोड्यूसर के तौर पर कंपनी में शुरुआत की थी। टंडन इससे पहले जंगली पिक्चर्स (Junglee Pictures), लव फिल्म्स (Luv Films) और अबुंडंतिया एंटरटेनमेंट (Abundantia Entertainment) में काम कर चुकी हैं।
उनके अनुभव में क्रिएटिव डेवलपमेंट, फिल्मों और सीरीज का निर्माण, मार्केटिंग और कम्युनिकेशंस शामिल हैं। प्रोडक्शन में आने से पहले वह फिल्मफेयर (Filmfare) जैसी मनोरंजन पत्रिकाओं में संपादकीय भूमिकाओं में भी काम कर चुकी हैं।
सूरज सिंह के करियर में क्रिएटिव डेवलपमेंट के साथ प्रोडक्शन मैनेजमेंट, बजट तैयार करना और नए कारोबारी अवसर हासिल करना शामिल रहा है। उन्होंने जनवरी 2017 में ब्लाइव प्रोडक्शंस एंड म्यूजिक की सह-स्थापना की। यहां उन्होंने स्क्रिप्टिंग, कास्टिंग, प्रोडक्शन प्लानिंग, वेंडर से बातचीत और शूटिंग व पोस्ट-प्रोडक्शन शेड्यूल के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली।
इससे पहले सूरज सिंह बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms) में वरिष्ठ पदों पर रहे। उन्होंने यहां उपाध्यक्ष और टेलीविजन प्रोडक्शन एंड ऑपरेशंस के उपाध्यक्ष के तौर पर काम किया। उनकी जिम्मेदारियों में प्रोडक्शन की निगरानी, प्रसारकों के साथ बजट और क्रिएटिव जरूरतों पर काम करना तथा नए प्रोग्रामिंग प्रोजेक्ट हासिल करना शामिल था।
बालाजी टेलीफिल्म्स में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ‘द डर्टी पिक्चर’, ‘क्या सुपर कूल हैं हम’, ‘एक थी डायन’, ‘शूटआउट एट वडाला’, ‘लुटेरा’, ‘रागिनी एमएमएस 2’ और ‘एक विलेन’ जैसी परियोजनाओं पर काम किया।
टेलीविजन के क्षेत्र में उन्होंने स्फीयर ओरिजिन्स मल्टीविजन (Sphere Origins Multivision) में क्रिएटिव प्रोड्यूसर के तौर पर भी काम किया। यहां उन्होंने कहानी, पटकथा, कास्टिंग और प्रसारकों के साथ समन्वय की जिम्मेदारी संभाली।
सूरज सिंह ने बालाजी के दुबई स्थित विदेशी प्रोजेक्ट फ्री जोन एंटरप्राइजेज (Free Zone Enterprises) का नेतृत्व भी किया। उन्होंने कंपनी का कार्यालय और संचालन स्थापित करने में भूमिका निभाई तथा बजट, कारोबार विकास और प्रोग्रामिंग अधिग्रहण का काम संभाला।
सूरज सिंह, भंसाली प्रोडक्शंस (Bhansali Productions) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहीं प्रेरणा सिंह (Prerna Singh) के भाई हैं। सूरज सिंह ने वर्ष 2001 में बालाजी टेलीफिल्म्स से अपने करियर की शुरुआत की थी। यहां उन्होंने प्रोडक्शन और क्रिएटिव से जुड़ी विभिन्न भूमिकाओं में काम करते हुए आगे चलकर व्यापक प्रबंधन जिम्मेदारियां संभालीं।
पत्रकारों की सुरक्षा, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और पुलिस के साथ बेहतर तालमेल पर जोर, पहचान पत्र साथ रखने से लेकर आंसू गैस के बीच सुरक्षित निकलने तक के लिए दिए दिशा-निर्देश
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India) ने विरोध प्रदर्शनों और धरना-प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य पत्रकारों को अपने काम को प्रभावी ढंग से करने में मदद देना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना, जिम्मेदार रिपोर्टिंग को बढ़ावा देना और पत्रकारों, मीडिया संगठनों तथा कानून लागू कराने वाली एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।
भारतीय प्रेस परिषद ने 14 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में ‘विरोध प्रदर्शनों और प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए दिशा-निर्देश’ अपनाए। परिषद ने 15 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में इन दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। इसमें पत्रकारों को छह प्रमुख क्षेत्रों में सावधानी बरतने और पेशेवर आचरण बनाए रखने की सलाह दी गई है।
पहचान पत्र साथ रखना और पेशेवर व्यवहार जरूरी
दिशा-निर्देशों के मुताबिक, पत्रकारों को अपने मीडिया संगठन या समाचार पत्र की ओर से जारी वैध पहचान पत्र और, जहां लागू हो, वैध पीआईबी (PIB) या डीआईपी (DIP) मान्यता पत्र साथ रखना चाहिए। प्रेस पहचान पत्र को हर समय स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली जगह पर रखना चाहिए।
यदि पहचान पत्र गले में डोरी यानी लैनयार्ड से पहना गया है, तो उसे इस तरह सुरक्षित रखना चाहिए कि भीड़ की आवाजाही या टकराव के दौरान उसके उलझने का खतरा कम हो। पुलिसकर्मियों की ओर से पूछे जाने पर पत्रकारों को शांतिपूर्वक अपनी पहचान बतानी चाहिए।
पत्रकारों को तटस्थ और पेशेवर बने रहना चाहिए। उन्हें प्रदर्शन में भाग नहीं लेना चाहिए, किसी पक्ष का समर्थन नहीं करना चाहिए, टकराव भड़काने से बचना चाहिए और प्रदर्शनकारियों, विरोधी प्रदर्शनकारियों या पुलिस के काम में बाधा नहीं डालनी चाहिए। तनावपूर्ण स्थिति में बहस करने से बचने, सम्मानजनक व्यवहार करने और पुलिस के वैध निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। खासतौर पर तत्काल सुरक्षा के लिए दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए जरूरत पड़ने पर अपनी पत्रकारिता संबंधी पहचान शांतिपूर्वक स्पष्ट करनी चाहिए।
भीड़ और टकराव से सुरक्षित दूरी बनाए रखें
प्रेस काउंसिल ने पत्रकारों को टकराव वाली जगहों से उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी है। खासकर उस समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, जब तनाव बढ़ रहा हो या पुलिस कार्रवाई की आशंका हो। पत्रकारों को अपने कैमरे या रिकॉर्डिंग उपकरण पुलिस की बैरिकेडिंग, वाहनों या अन्य उपकरणों से इस तरह नहीं जोड़ने चाहिए कि आवाजाही में बाधा आए या संपत्ति को नुकसान पहुंचे।
भीड़ के बीच चलते समय सावधानी बरतनी चाहिए और छोटे कदमों से आगे बढ़ना चाहिए, ताकि गिरने या भीड़ के पैरों तले कुचले जाने का खतरा कम हो। पत्रकारों को प्रदर्शनकारियों, विरोधी प्रदर्शनकारियों, पुलिस और खतरे के अन्य संभावित स्रोतों के संबंध में अपनी स्थिति का लगातार आकलन करते रहना चाहिए।
आसपास की स्थिति पर नजर रखें, बाहर निकलने का रास्ता पहले से पहचानें
दिशा-निर्देशों में पत्रकारों को अपने आसपास की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए कहा गया है। उन्हें भीड़ के व्यवहार में बदलाव, पास आते लोगों, संभावित टकराव, भीड़ के शोर में बदलाव और उभरते खतरों के प्रति सतर्क रहना चाहिए।
पत्रकारों को पहले से सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता ध्यान में रखना चाहिए और हालात बदलने पर उसे अपडेट करना चाहिए। आसपास के निकास द्वार, खुली सड़कें, फुटपाथ और सुरक्षित स्थानों की पहचान पहले से कर लेनी चाहिए। यदि धुआं या आंसू गैस फैल जाए, तो पत्रकारों को दिखाई देने वाले स्थलों और सुरक्षित रास्तों की मदद से प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकलना चाहिए। इस दौरान उन्हें भीड़ के और भीतर जाने से बचना चाहिए।
इमरजेंसी किट में रखें ये जरूरी सामान
प्राथमिक उपचार की बुनियादी किट और जरूरी व्यक्तिगत दवाएं, पीने का पानी और प्रोटीन से भरपूर स्नैक्स, टॉर्च, कपड़ा या हाथ पोंछने के लिए छोटा तौलिया, आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा या गॉगल्स।
खतरे के आकलन के आधार पर पत्रकारों को उपयुक्त सुरक्षा हेलमेट और शरीर की सुरक्षा के लिए कवच पहनने पर भी विचार करना चाहिए। हालांकि, सुरक्षा उपकरणों की मौजूदगी पत्रकारों को अनावश्यक जोखिम लेने के लिए प्रोत्साहित नहीं करनी चाहिए।
पत्रकारों को प्राथमिक उपचार की बुनियादी जानकारी हासिल करनी चाहिए और काम पर जाने से पहले सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करने का अभ्यास करना चाहिए।
दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि पत्रकार आंसू गैस के गोले, फ्लैश-बैंग उपकरण या धुआं पैदा करने वाले ग्रेनेड को कभी न छुएं, न उठाएं और न ही उन्हें हटाने की कोशिश करें। ये उपकरण गर्म हो सकते हैं, इनमें विस्फोट हो सकता है या इन पर खतरनाक अवशेष मौजूद हो सकते हैं।
न्यूजरूम के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें
प्रेस काउंसिल ने रिपोर्टिंग के दौरान न्यूजरूम के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया है। मीडिया संगठनों को एक ऐसे व्यक्ति को संपर्क अधिकारी के रूप में नामित करना चाहिए, जो पत्रकारों की लोकेशन पर नजर रख सके और आपातकालीन स्थिति में जरूरी कार्रवाई कर सके।
फ्रीलांस पत्रकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके किसी भरोसेमंद संपादक या संपर्क व्यक्ति को उनकी लोकेशन, असाइनमेंट की योजना और वापस लौटने के संभावित समय की जानकारी हो। पत्रकारों को अपने साथी पत्रकारों का भी ध्यान रखना चाहिए, खासकर तब जब वे अकेले काम कर रहे हों। जहां तक संभव हो, उन्हें अपने सहकर्मियों के साथ संपर्क बनाए रखना चाहिए।
पहले से तय प्रदर्शनों के मामले में मीडिया संगठनों को, जहां संभव हो, संबंधित पुलिस अधिकारियों, जन सूचना अधिकारियों या प्रेस संपर्क अधिकारियों के साथ समन्वय करना चाहिए। इससे संपर्क की प्रक्रिया स्पष्ट करने और मीडिया के लिए निर्धारित स्थानों की जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी।
खबरों की पुष्टि और निष्पक्षता पर विशेष जोर
प्रेस काउंसिल ने पत्रकारों को घटनाओं की सटीक, वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने की सलाह दी है। खबरों में सत्यापित तथ्यों, आरोपों, विचारों और अपुष्ट दावों के बीच स्पष्ट अंतर रखा जाना चाहिए। पत्रकारों को सटीकता और निष्पक्षता से संबंधित पत्रकारिता आचरण के लागू मानदंडों का पालन करना चाहिए।
जहां तक संभव हो, जानकारी की पुष्टि कई स्रोतों से की जानी चाहिए। किसी गवाह से जानकारी लेते समय यह भी समझना चाहिए कि उसे जानकारी कहां से मिली, वह घटना के कितने करीब था, उसे घटना कितनी स्पष्ट दिखाई दी और उसकी जानकारी कितनी भरोसेमंद है। गवाह के संभावित पूर्वाग्रहों का भी आकलन किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों, कार्यक्रम के आयोजकों, पुलिस और सरकारी अधिकारियों के बयानों की समान रूप से पत्रकारिता के मानकों पर जांच की जानी चाहिए। दावों को संबंधित व्यक्ति या संस्था के नाम से स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना चाहिए और उनकी पुष्टि के लिए अन्य स्रोतों से जानकारी जुटानी चाहिए।
दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि पुलिस की वास्तविक समय की तैनाती, उसकी रणनीतिक गतिविधियों या सुरक्षित निकलने के रास्तों का प्रसारण या प्रकाशन करने से सुरक्षा अथवा अभियान की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है, तो ऐसी जानकारी प्रसारित या प्रकाशित नहीं करनी चाहिए।
पत्रकारों को लोगों की मंशा, इरादों या भावनाओं के बारे में अनुमान लगाने के बजाय वही बताना चाहिए, जो घटनास्थल पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
नाबालिगों और संकट में फंसे लोगों की पहचान उजागर करने में सावधानी
प्रेस काउंसिल ने नाबालिगों, असुरक्षित परिस्थितियों में मौजूद लोगों, घायलों और संकट में फंसे आम नागरिकों की तस्वीरें लेने या उनकी पहचान उजागर करने में विशेष सावधानी बरतने को कहा है।
पत्रकारों को यह विचार करना चाहिए कि किसी व्यक्ति की तस्वीर या पहचान प्रकाशित करने से उसे बदले की कार्रवाई, उत्पीड़न या किसी अन्य तरह के नुकसान का सामना तो नहीं करना पड़ेगा और क्या इससे उसकी निजता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।
दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि पत्रकारों को उपकरणों, लाइव प्रसारण की प्रतिबद्धताओं या विशेष फुटेज हासिल करने के दबाव को अपनी सुरक्षा पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
शिवानी पाल ने Equirus में Group PR और Strategic Communications की जिम्मेदारी संभाली है। वह कंपनी के कम्युनिकेशन नैरेटिव को मजबूत करने और Equirus की कहानी ऑडियंस तक पहुंचाने पर काम करेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
शिवानी पाल (Shivani Pal) ने इक्विरस (Equirus) में ग्रुप के लिए पीआर और स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस (PR and Strategic Communications) की जिम्मेदारी संभाल ली है। नई भूमिका में वह ग्रुप की पीआर और स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस का नेतृत्व करेंगी।
उनका फोकस कंपनी के कम्युनिकेशन नैरेटिव को मजबूत करने और इक्विरस की कहानी को संबंधित ऑडियंस तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर रहेगा।
अपनी नियुक्ति की जानकारी साझा करते हुए शिवानी पाल ने कहा कि इक्विरस के साथ शुरुआत काफी उत्साहजनक रही है। उन्होंने बताया कि वह बिजनेस को समझने, ग्रुप की अलग-अलग टीमों के साथ काम करने और इक्विरस की कहानी को नए तरीकों से सामने लाने पर काम कर रही हैं।
इक्विरस से जुड़ने से पहले शिवानी पाल एम्बिट प्राइवेट लिमिटेड (Ambit Private Limited) में मैनेजर-ग्रुप ब्रांड एंड कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Manager-Group Brand & Corporate Communications) के पद पर कार्यरत थीं।
मेहराज दुबे ने बताया कि वह पार्थिव देह को मूल निवास मध्यप्रदेश स्थित पन्ना ले जा रहे हैं। अंतिम यात्रा शुक्रवार शाम 4:00 बजे अपने निवास धाम मोहल्ला पन्ना से मुक्तिधाम के लिए रवाना होगी।।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ पत्रकार मेहराज दुबे के पिता और प्रणामी संप्रदाय के जाने-माने विद्वान पंडित श्याम बिहारी दुबे जी का निधन हो गया है। वह दिल्ली में मेहराज दुबे के साथ निवास कर रहे थे। करीब 88 वर्षीय पंडित श्याम बिहारी दुबे जाने-माने धर्मोपदेशक थे और कुछ समय से बीमार चल रहे थे। दिल्ली स्थित आर्युविज्ञान संस्थान (AIIMS) में उनका उपचार चल रहा था, जहां पर 15 अक्टूबर की शाम उन्होंने अंतिम सांस ली।
समाचार4मीडिया से बातचीत में मेहराज दुबे ने बताया कि वह पार्थिव देह को मूल निवास मध्यप्रदेश स्थित पन्ना ले जा रहे हैं। पंडित श्याम बिहारी दुबे की अंतिम यात्रा शुक्रवार शाम 4:00 बजे अपने निवास धाम मोहल्ला पन्ना से मुक्तिधाम के लिए रवाना होगी।।
श्याम बिहारी शर्मा ने प्रणामी संप्रदाय को पूरी दुनिया में आगे बढ़ाने के लिए काफी कार्य किया था। उन्होंने धर्म का प्रचार प्रसार तो किया ही कई पुस्तके भी लिखी हैं। उन्होंने 1970 दशक मे प्रणामी धर्म के साक्ष्य साबित करने के लिए नेपाल में शास्त्रार्थ किया। बनारस की ब्राह्मण सभा ने उन्हें निजानंदाचार्य की उपाधि से सम्मानित किया था।
पंडित श्याम बिहारी दुबे अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी पांच संताने हैं। पंडित श्याम बिहारी दुबे के निधन पर उनके परिचितों और पन्ना के लोगों ने दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है और ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।
समाचार4मीडिया की ओर से पंडित श्याम बिहारी दुबे को भावभीनी श्रद्धांजलि।
म्यूजिक व एंटरटेनमेंट कंपनी Saregama India Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही और पहली छमाही के वित्तीय नतीजों पर विचार करने के लिए 4 नवंबर, 2026 को बोर्ड बैठक बुलाई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
म्यूजिक व एंटरटेनमेंट कंपनी Saregama India Limited ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही और पहली छमाही के वित्तीय नतीजों पर विचार करने के लिए 4 नवंबर, 2026 को बोर्ड बैठक बुलाई है। कंपनी ने 15 अक्टूबर को शेयर बाजार को इसकी जानकारी दी।
कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, बुधवार, 4 नवंबर को होने वाली इस बैठक में 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही और छह महीने की अवधि के लिए कंपनी के बिना ऑडिट किए गए वित्तीय नतीजों पर विचार किया जाएगा।
ये वित्तीय नतीजे कंपनी के अलग-अलग (स्टैंडअलोन) और समूह के संयुक्त (कंसोलिडेटेड) आधार पर होंगे। कंपनी ने यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के तहत शेयर बाजारों को दी है।
ट्रेडिंग विंडो रहेगी बंद
Saregama India ने यह भी बताया कि कंपनी के अंदरूनी कारोबार से जुड़े नियमों के तहत ट्रेडिंग विंडो पहले से बंद है। कंपनी ने 28 सितंबर, 2026 को शेयर बाजारों को इस बारे में जानकारी दी थी।
यह ट्रेडिंग विंडो कंपनी के वित्तीय नतीजों की घोषणा के बाद 48 घंटे पूरे होने तक बंद रहेगी। इस दौरान कंपनी के तय अधिकारियों और कर्मचारियों (डेजिग्नेटेड पर्सन्स) के साथ उनके करीबी रिश्तेदारों पर भी यह पाबंदी लागू रहेगी।