Times Now: नए 'सेनापति' की दौड़ में शामिल हैं ये वरिष्ठ पत्रकार...

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।। टाइम्‍स नाउ (Times Now) और ईटी नाउ (ET Now) के एडिटर-इन-चीफ और प्रेजिडेंट-न्यूज पद से इस्‍तीफा देने के बाद अरनब गोस्‍वामी के अगले कदम के बारे में लोग तमाम तरह के कयास लगा रहे हैं। लोग जानने की कोशिश में जु

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Published - Wednesday, 02 November, 2016
Last Modified:
Wednesday, 02 November, 2016
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समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

टाइम्‍स नाउ (Times Now) और ईटी नाउ (ET Now) के एडिटर-इन-चीफ और प्रेजिडेंट-न्यूज पद से इस्‍तीफा देने के बाद अरनब गोस्‍वामी के अगले कदम के बारे में लोग तमाम तरह के कयास लगा रहे हैं। लोग जानने की कोशिश में जुटे हैं कि अरनब अब कौन सा कदम उठाने वाले हैं और उनकी जगह मीडिया जगत की कौन सी हस्‍ती टाइम्स नाउ को संभालेगी। लोगों का मानना है कि अरनब के इस्तीफे से चैनल में बड़ी उथलपुथल होगी, जिस कारण डैमेज कट्रोल करना चैनल के लिए काफी बड़ी चुनौती होगी।

शायद ही बहुत कम लोगों को पता होगा कि जब वर्ष 2004 में एनडीटीवी छोड़कर अरनब ने बेनेट कोलमैन (Bennett Coleman) का दामन थामा था तब वे ज्यादा लोकप्रिय नहीं थे, लेकिन इतने वर्षों में अरनब ने चैनल के साथ खुद भी काफी नाम कमाया। इन वर्षों में वह न सिर्फ देश में सबसे ज्‍यादा देखने वाले न्‍यूज एंकर बन गए बल्कि अपनी दमदार एंकरिंग की बदौलत उन्होंने देश के 50 पॉवरफुल शख्सियतों की सूची में भी अपना नाम दर्ज कराया।

गोस्‍वामी के नेतृत्‍व में टाइम्‍स नाउ चैनल ने वर्ष 2006 में अपनी लॉन्चिंग के एक साल से भी कम समय में काफी ख्‍याति बटोर ली थी। वर्ष 2007 से लगातार आठ वर्षों से वह टाइम्‍स नाउ को नंबर एक के पायदान पर संभाले हुए थे और यह चैनल लगातार तरक्‍की कर रहा था। रात नौ बजे प्रसारित होने वाला उनका शो द न्‍यूजआर (The Newshour) आठ वर्षों से दर्शकों की पहली पसंद बना हुआ था और करीब 70 प्रतिशत दर्शक वर्ग पर इसने कब्‍जा जमाया हुआ है। हालांकि अब अरनब ने संकेत दिए हैं कि वह अपना न्‍यूज चैनल शुरू करेंगे। ऐसे में टाइम्‍स ग्रुप को अब किसी को उनका उत्‍तराधिकारी नियुक्‍त करना होगा।

कयास लगाए जा रहे हैं कि इस पद पर टाइम्स नाउ मीडिया जगत की जिस हस्‍ती को नियुक्‍त कर सकता है, उनमें राजदीप सरदेसाई, विक्रम चंद्रा, बरखा दत्‍त और करन थापर जैसे नाम रेस में शामिल है। ये सभी मीडिया जगत के काफी बड़े नाम हैं और सबकी अपनी क्‍वॉलिटी है। ऐसे में यह देखना काफी रोचक होगा कि इनमें से कौन अरनब गोस्‍वामी की जगह लेगा और उनकी कमी को पूरा करेगा।

यह भी बहुत कम लोग जानते हैं कि 42 वर्षीय अरनब गोस्‍वामी ने वर्ष 1994 में अपना करियर द टेलिग्राफ (The Telegraph) में बतौर ट्रेनी सब (trainee-sub) शुरू किया था और आज वह देश की आवाज बन चुके हैं।

अरनब गोस्वामी की कमी पूरा करने की दौड़ में शामिल वरिष्ठ पत्रकारों की प्रोफाइल आप यहीं पढ़ सकते हैं...

राजदीप सरदेसाई

प्रिंट और टीवी इंडस्ट्री में राजदीप सरदेसाई को 26 साल का अनुभव है। 24 मई 1965 को जन्में राजदीप सरदेसाई ने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत 1988 में की थी। शुरुआत में ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ के मुंबई एडिशन में बतौर सिटी एडिटर उन्होंने 6 वर्षों तक काम किया। 26 साल की उम्र में वे ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के मुंबई एडिशन के सिटी एडिटर बन गए थे। टेलिविजन क्षेत्र में उन्होंने 1994 में एनडीटीवी से बतौर पॉलिटिकल एडिटर शुरुआत की। यहां उन्होंने विभिन्न पदों पर रहते हुए बखूबी अपनी जिम्मेदारी संभाली और अंत में मैनेजिंग एडिटर के पद तक पहुंच गए थे और इसके बाद उन्होंने यहां से इस्तीफा देकर उन्होंने आईबीएन18 (IBN 18) नेटवर्क की स्थापना की और CNN-IBN के फाउंडर एडिटर बन गए। वर्तमान में वह इंडिया टुडे ग्रुप के कंसल्टिंग एडिटर हैं और चैनल के प्राइम टाइम शो की एंकरिंग करते हैं।

पत्रकारिता करियर में वे कई अवॉर्ड से सम्मानित भी किए जा चुके हैं। पिछले 26 सालों से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मसलों को कवर करते आ रहे हैं, वैसे राष्ट्रीय राजनीति के बारे में उन्हें महारथ हासिल है। पत्रकारिता के लिए सबसे बड़ा सम्मान उन्हें साल 2008 में पद्मश्री के रूप में मिला। राजदीप सरदेसाई को 2002 के गुजरात दंगा को कवर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रसारण पुरस्कार मिला हुआ है, वहीं साल 2007 में उन्हें पत्रकारिता में बेहतर करने के लिए रामनाथ गोयनका एक्सलेंस पुरस्कार दिया जा चुका है। अपने टॉक शो के लिए वे एशियन टेलिविजन अवॉर्ड भी जीत चुके हैं। उन्हें पिछले 10 सालों में आठ बार सर्वश्रेष्ठ न्यूज एंकर का अवॉर्ड भी मिल चुका है। राजदीप सरदेसाई एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके साथ ही वे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा ‘कल के वैश्विक नेता’ (ग्लोबल लीडर फॉर टुमॉरो) चुने जा चुके हैं। सरदेसाई हिन्दुस्तान टाइम्स जैसे कई अखबारों में एक पाक्षिक स्तंभ  भी लिखते हैं।

उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक किया और इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक और फिर एलएलबी किया।

बरखा दत्त:

पद्मश्री से सम्मानित बरखा दत्त वर्तमान में एनडीटीवी की कंसल्टिंग एडिटर हैं और लोकप्रिय टेलिविज शो ‘वी द पीपल’ (We the People) को होस्ट करती हैं। उनका “The Buck Stops Here” शो Emmy अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हो चुका है।

हाल ही में बरखा अमेरिका के लोकप्रिय दैनिक अखबार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ से कंट्रीब्यूटिंग कॉलमनिस्ट के तौर पर जुड़ गईं हैं और अब उनका कॉलम ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ के ग्लोबल ओपिनियंस पेज पर प्रकाशित होता है।

बता दें कि बरखा दत्त ने इस साल की शुरुआत में वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता के साथ मिलकर एक नया न्यूज मीडिया वेंचर ‘द प्रिंट’ भी लॉन्च किया है। बरखा इस वेंचर की को-फाउंडर हैं।

बरखा का जन्म 18 दिसबंर 1971 में नई दिल्ली में हुआ। उनके पिता एस.पी. दत्त एयर इंडिया में काम करते थे और मां एक मशहूर पत्रकार थीं- प्रभा दत्त। वह हिन्दुस्तान टाइम्स में काम करती थीं। बरखा ने दिल्ली के मशहूर कॉलेज सेंट स्टीफंस से अंग्रेजी लिटरेचर की पढ़ाई की और इसके बाद मास्टर्स इन मास कम्युनिकेशन के लिए जामिया मिलिया इस्लामिया पहुंच गईं।

जामिया के बाद नौकरी के सिलसिले में वह मीडिया मुगल प्रणॉय रॉय से मिली तो उन्होंने बरखा को रिपोर्टर बनने का न्यौता दिया। कुछ महीनों तक रिपोर्टिंग के साथ-साथ बरखा ने प्रडक्शन का काम भी किया। यह ट्रेनिंग उनके लिए अच्छी साबित हुई और वह पूरी तरह पत्रकार बन गईं। वैसे उन्होंने बाद में कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की मास्टर्स डिग्री भी हासिल की। पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के लिए बरखा ने अपनी नौकरी से डेढ़ साल की छुट्टी ली। जब बरखा लौटकर आईं तो उसके आठ महीने बाद ही करगिल युद्ध शुरू हो गया। यह उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती थी। उन्हें वॉर कवर करने के लिए कारगिल भेजा गया। टाइगर हिल पर गोलीबारी के दौरान बरखा बंकर में रही और वहीं से सेटेलाइट फोन के जरिए रिपोर्टिंग की। कारगिल युद्ध के बाद बरखा को कश्मीर, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक में रिपोर्टिंग का मौका भी मिला।

बरखा को तमाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। 2008 में उन्हें मोस्ट इंटेलिजेंट न्यूज शो होस्ट का इंडियन न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड दिया गया। उन्हें कॉमनवेल्थ ब्राडकास्टिंग एसोसिएशन अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। ‘वी द पीपुल’ जैसे प्रोग्राम के लिए उन्हें बेस्ट टीवी न्यूज एंकर का सम्मान दिया जा चुका है। अपने साहस और शानदार रिपोर्टिंग के कारण बरखा ने ये सम्मान हासिल किए हैं।

भूपेंद्र चौबे-

एनडीटीवी (NDTV) से अपने करियर की शुरुआत करने वाले भूपेंद्र चौबे 16 वर्षों से अधिक समय से टीवी के लिए पत्रकारिता कर रहे हैं। राजनीतिक पत्रकार के रूप में वह देश के विभिन्‍न हिस्‍सों की यात्रा कर चुके हैं और किसी भी चीज का बारीकी से अध्‍ययन कर उसे विस्‍तार रूप देने में उन्‍हें महारत हासिल है। एनडीटीवी छोड़ने के बाद वे सीएनएन-आईबीएन (CNN-IBN) की लॉन्चिंग टीम के साथ जुड़ गए। भूपेन्द्र सीएनएन-आईबीएन के एग्जिक्यूटिव एडिटर भी रह चुके हैं। फिलहाल वे कंसल्टिंग एडिटर हैं। वे चैनल पर प्राइम टाइम शो ‘India at 9’ भी होस्ट करते थे।

चौबे ने गणित में स्‍नातक (graduate) और फिल्‍म्‍स में परास्‍नातक (post graduate) भूपेंद्र चौबे मंझे हुए राजनीतिक पत्रकार हैं और उन्‍होंने दो आम चुनाव और लगभग प्रत्‍येक राज्‍य में विधानसभा चुनाव भी कवर किए हैं। वह उन पत्रकारों में से एक हैं, जिन्‍हें राजनीति की गहरी समझ है। चौबे ने तीन आम चुनावों और ज्यादातर राज्यों के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। फिलहाल वे वीकेंड इंटरव्यू शो ‘हॉट सीट’ शो होस्ट करते हैं। वे अंग्रेजी-हिंदी अखबार और मैगजीन के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के भी कॉलमनिस्ट हैं।

राहुल शिवशंकर 

राहुल शिवशंकर ने सितंबर, 2013 में मैनेजिंग एडिटर के रूप में न्यूजX  जॉइन किया था और एक साल बाद ही उन्हें एडिटर-इन-चीफ के रूप में पदोन्नत किया गया था। शिवशंकर चैनल के वीकडेज पर प्राइम टाइम शो ‘Nation@9:00pm’ और ‘India Debates’ शो की एंकरिंग भी करते हैं।

20 साल के अपने करियर में, उन्होंने एग्जिक्यूटिव एडिटर के रूप में हेडलाइंस टुडे (TV Today Network) और सीनियर एडिटर के रूप में टाइम्स नाउ को अपनी सेवाएं दीं।

इसके अतिरिक्त वे अहम मसलों पर अपनी टिप्पणी करते रहते हैं। शिवशंकर ने मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए नरीमन हाउस पर हमले को लेकर खोजी रिपोर्टिंग कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे बाद में रोली बुक्स ने पब्लिश भी किया था।

श्रीनिवासन जैन

श्रीनिवासन जैन 1995 से एनडीटीवी के साथ जुड़े हुए हैं और वह मौजूदा समय में चैनल के मैनेजिंग एडिटर हैं। वह एनडीटीवी24x7 (NDTV 24x7) पर ‘Truth vs Hype’ शो की एंकरिंग और वीकली ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। जैन साल 2003 से 2008 तक एनडीटीवी के मुंबई ब्यूरो चीफ थे। वह कुछ समय के लिए एनडीटीवी के बिजनेस चैनल प्रॉफिट (Profit) के भी मैनेंजिग एडिटर रह चुके हैं। वे ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ (Business Standard) अखबार के स्तंभकार भी हैं। मीडिया की निगरानी करने वाली साउथ एशिया की स्वतंत्र वेबसाइट ‘द हूट’ अपने संपादकीय कॉलम में मुजफ्फरनगर दंगो को लेकर किए गए टेलिविजन कवरेज पर जैन की प्रशंसा कर चुकी है।

विक्रम चंद्रा

विक्रम चंद्रा एनडीटीवी के पुराने दिग्गज हैं। वे 1991 से इस ऑर्गनाइजेशन से जुड़े हैं। हाल ही में वे पत्रकारिता की ओर अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए एनडीटीवी में ग्रुप सीईओ पद से हट गए हैं। इस पद पर रहते हुए उन पर कंपनी के सभी पहलुओं की जिम्मेदारी थी।

देश के शीर्ष न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के बीच इस शिखर तक पहुंचने में उन्होंने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। टेलिविजन का चेहरा होने के अतिरिक्त चंद्रा लंबे समय से एनडीटीवी के ऑनलाइन ऑपरेशन को भी संभाल रहे हैं। चंद्रा साल 2011 में तीन साल के लिए ग्रुप सीईओ बनाया गया था, लेकिन इसके बाद इस पद पर उनका कार्यकाल 2 सालों तक और बढ़ा दिया गया था।

वह ग्रुप के ऑनलाइन वेंचर एनडीटीवी कनवर्जेंस (NDTV Convergence) के एग्जिक्यूटिव चेयरपर्सन हैं, और इसे चंद्रा की मदद से ही 1991 में लॉन्च किया गया था। बाद में बतौर सीईओ उन्होंने इस वेबसाइट को एक नई पहचान दी।

टेक्नोलॉजी प्रेमी होने की वजह से वे एनडीटीवी के शो ‘गैजेट गुरु’ और ‘द बिग फाइट’ व 9 o’clock न्यूज शो होस्ट करते हैं। वहीं इसके अतिरिक्त चंद्रा एनडीटीवी के सोशल इनिशिएटिव ‘एनडीटीवी ग्रीनॉथन’ और ‘सेव द टाइगर्स’ प्रोग्राम्स भी होस्ट करते हैं।

सोनिया सिंह

सोनिया सिंह एनडीटीवी 24X7 की एडिटोरियल डायरेक्टर हैं। वह ‘The NDTV Dialogues’ शो भी होस्ट करती हैं। एनडीटीवी एथिक्स कमेटी की प्रेजिडेंट भी हैं।

सोनिया ने अपने करियर की शुरुआत 1992 में एनडीटीवी के साथ ही बतौर रिसर्चर की थी, जब यह एक ही शो प्रड्यूस करता था और वह भी दूरदर्शन के लिए, जिसका नाम था- ‘The World This Week’। उन्होंने कंधार हाइजैक, संसद हमला, 26/11 हमला, करगिल युद्ध, जैसिका लाल मर्डर केस जैसे अन्य महत्वपूर्ण मसलों पर बेहद विस्तृत कवरेज की है।

करण थापर

वरिष्ठ पत्रकार करण थापर इन दिनों इंडिया टुडे के साथ जुड़े हुए हैं और ‘To the Point’ और ‘Nothing But The Truth’ शो को होस्ट करते हैं। इससे पहले थापर सीएनएन-आईबीएन (CNN-IBN) के साथ जुड़े हुए थे और 'डेविल्स एडवोकेट'  (The Devil's Advocate) और ‘द लास्ट वर्ड’ (The Last Word) शो होस्ट करते थे। सीएनबीसी पर थापर ‘Tonight at 10’ प्रोग्राम भी होस्ट कर चुके हैं।

पत्रकारिता जगत में उन्हें तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है और इस बीच उन्होंने कई अवॉर्ड्स भी जीते हैं। उनका 'इनफोटेनमेंट टेलिविजन' नाम से अपना एक प्रोडक्शन हाउस भी है, जहां  बीबीसी, दूरदर्शन और चैनल न्यूज एशिया के लिए प्रोग्राम्स निर्मित होते हैं।

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मीडिया मैनेजमेंट को सुकून देने वाला है बॉम्बे HC का ये फैसला

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने हाल ही में लोकमत मीडिया हाउस के खिलाफ दाखिल मानहानि वाद को खारिज कर दिया है।

Last Modified:
Wednesday, 29 June, 2022
Bombay HC

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने हाल ही में लोकमत मीडिया हाउस के खिलाफ दाखिल मानहानि वाद को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यह कहते हुए मामला खारिज किया कि मीडिया को प्राथमिकी दर्ज होने की खबर देने का अधिकार है और प्रकाशक से समाचार प्रकाशित होने से पहले प्राथमिकी की सत्यता का पता लगाने की अपेक्षा नहीं की जाती।

हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनय जोशी ने 20 जून को लोकमत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन विजय दर्डा और इसके एडिटर-इन-चीफ राजेंद्र दर्डा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए आपराधिक मानहानि की शिकायत को खारिज कर दिया। उन्होंने 20 मई, 2016 को दैनिक 'लोकमत' में प्रकाशित एक समाचार को लेकर एक व्यक्ति द्वारा दाखिल मानहानि शिकायत पर एक मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा की गई आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का आग्रह किया था।

बता दें कि यह खबर शिकायतकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होने से संबंधित थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि यह मामला 'झूठा और मानहानिकारक है क्योंकि प्रकाशकों ने समाचार प्रकाशित करने से पहले तथ्यों को सत्यापित नहीं किया।'

शिकायतकर्ता ने अदालत में कहा कि आवेदक (लोकमत) समाचार पत्र में प्रकाशित खबरों के लिए जिम्मेदार हैं, जिन्होंने संबंधित समाचार की सत्यता की पुष्टि किए बिना इसे प्रकाशित किया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस रिपोर्ट 'पूरी तरह से झूठी और मनगढ़ंत' थी।

शिकायतकर्ता ने कहा कि कथित घटना के समय वह अपराध स्थल पर था ही नहीं और बाद में उसका नाम आरोप पत्र से हटा दिया गया। उसने आरोप लगाया कि आवेदकों ने पुलिस रिपोर्ट की सत्यता का पता लगाए बिना समाचार प्रकाशित किया, जिससे उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। न्यायाधीश ने समाचार पत्र के मालिकों के खिलाफ मानहानि के मामले को खारिज करते हुए प्रेस की स्वतंत्रता और मीडिया द्वारा प्रदान की जाने वाली जानकारी के महत्व पर जोर दिया।

कोर्ट ने कहा, 'यह सामान्य ज्ञान की बात है कि दैनिक समाचार पत्रों में कम से कम कुछ स्थान अपराधों के मामले दर्ज होने, अदालतों में मुकदमे दाखिल होने, जांच की प्रगति, व्यक्तियों की गिरफ्तारी आदि से संबंधित समाचारों के लिए निर्धारित होते हैं। इनसे कुछ समाचार बनते हैं, जिन्हें जानना जनता का अधिकार है।'

लोकमत की खबर के मुताबिक, यह मामला यवतमाल जिले के मारेगांव स्थित मारवाड़ी चौक की संपत्ति के विवाद में रविंद्र घीसूलाल गुप्ता व अरविंद गुप्ता परिवार के बीच विवाद व मारपीट का था। दोनों पक्षों के खिलाफ दर्ज मामले की खबर 20 मई 2016 को लोकमत में संतुलित तरीके से प्रकाशित की गई थी। रविंद्र गुप्ता ने लोकमत मीडिया के चेयरमैन विजय दर्डा और एडिटर-इन-चीफ राजेंद्र दर्डा के खिलाफ फौजदारी मुकदमा दायर किया था। 

प्रथम श्रेणी न्यायदंडाधिकारी ने इस पर 16 जनवरी 2018 को प्रोसेस इशू किया था। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने यवतमाल के प्रथम श्रेणी न्यायदंडाधिकारी के आदेश पर रोक लगा दी और दोनों पर फौजदारी शिकायत को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया।

इस खबर को लेकर ‘लोकमत’ ने अपने एक संपादकीय में कहा, ‘पीआरबी एक्ट के तहत किसी भी अखबार में खबरों के चयन और प्रस्तुतिकरण की संपूर्ण जिम्मेदारी संपादक की होती है। अखबार के प्रिंट लाइन में इस बात का स्पष्ट तौर पर जिक्र भी होता है। ऐसी स्थिति में किसी खबर को लेकर चेयरमैन या एडिटर-इन-चीफ को शिकायत के घेरे में नहीं रखा जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने केएम मैथ्यू मामले में फैसला दिया था कि अखबारों में प्रकाशित खबरों के लिए एडिटर के जिम्मेदार होने से चेयरमैन, ग्रुप एडिटर व अन्य को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हाई कोर्ट ने इस दलील को मान्य किया। वास्तव में केवल अखबार की लाइन में नाम है इसलिए मीडिया संस्था के उच्च अधिकारियों के खिलाफ फौजदारी मामला दायर नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद यह देखने में आता है कि कुछ लोग चेयरमैन, एडिटर-इन-चीफ या ग्रुप एडिटर जैसे पद पर बैठे लोगों को शिकायत के घेरे में शामिल कर लेते हैं। यह प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है और इसके पीछे अखबार के पूरे प्रबंधन को दबाव में लाने की मंशा रहती है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ था। संपादक का नाम शिकायत पत्र में शामिल नहीं था जबकि चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ का नाम शामिल किया गया था। इस मामले में लोकमत ने जो खबर प्रकाशित की थी, वह एफआईआर के आधार पर थी। खबर का स्रोत स्पष्ट था इसलिए मानहानि जैसी कोई बात उठती ही नहीं है। 

भारतीय संविधान का आर्टिकल 19(1)(ए) फ्रीडम ऑफ स्पीच को सुनिश्चित करता है। मीडिया को यह अधिकार है कि वह उन सभी बातों को रिपोर्ट करे जो पब्लिक डोमेन में हैं। लोगों को जानकारी देना उसका न केवल अधिकार है बल्कि दायित्व भी है। निश्चय ही बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ का यह फैसला दूरगामी है और मीडिया प्रबंधन को बगैर किसी भय के काम करने में मदद मिलेगी। मीडिया को प्रताड़ित करने, दबाव डालने या भयभीत करने की कोशिश करने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी। मीडिया के मजबूत होने का सीधा सा अर्थ है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। लोगों की आवाज मजबूत करने का माध्यम आखिर मीडिया ही तो है।’

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प्रकाशित हुई IIMC की किताब 'शुक्रवार संवाद'

IIMC द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'शुक्रवार संवाद' का विमोचन मंगलवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने किया

Last Modified:
Tuesday, 28 June, 2022
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भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'शुक्रवार संवाद' का विमोचन मंगलवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने किया। इस अवसर पर आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी, डीन अकादमिक प्रो. (डॉ.) गोविंद सिंह, पुस्तक के संपादक व डीन छात्र कल्याण प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार, डॉ. पवन कौंडल व श्री संत समीर भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर प्रो. सुरेश ने कहा कि 'शुक्रवार संवाद' समाज और संस्कृति का विमर्श है। नवोदित पत्रकारों के लिए यह पुस्तक बेहद उपयोगी है। यह पुस्तक न सिर्फ मीडिया से जुड़े विभिन्न विषयों पर एक नए तरीके से सोचने पर विवश करती है, बल्कि समाज और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को भी सरल शब्दों में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि संचार, मीडिया, विज्ञापन और जनसंपर्क के विद्यार्थियों की जानकारी का आकाश जितना विस्तृत होगा, उनकी अभिव्यक्ति भी उतनी ही बेहतर होगी। इस दिशा में यह पुस्तक सभी विद्यार्थियों के लिए मूल्यवान है।

आईआईएमसी के महानिदेशक प्रो. (डॉ.) संजय द्विवेदी ने कहा कि कोई भी समाज सार्थक संवाद से ही जीवंत बनता है। 'शुक्रवार संवाद' भारतीय जन संचार संस्थान का ऐसा लोकप्रिय विमर्श मंच बन चुका है, जहां सिर्फ पत्रकारिता नहीं, बल्कि समाज जीवन के विविध क्षेत्रों की प्रतिभाएं विद्यार्थियों से संवाद करती हैं। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से ये समस्त संवाद हमारे पास संरक्षित हो जाएंगे। यह पुस्तक हम सभी की चिंतन और विमर्श प्रकिया को आगे बढ़ाएगी।

आईआईएमसी के डीन छात्र कल्याण एवं पुस्तक के संपादक प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों के कौशल विकास और महत्वपूर्ण विषयों पर उनकी समझ को विकसित करने के लिए आईआईएमसी वर्ष 2020 से 'शुक्रवार संवाद' नामक कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर वह जानकारी प्रदान की जाती है, जो उन्हें क्लासरूम में प्राप्त नहीं होती। यह जानकारी आईआईएमसी के दूसरे विद्यार्थियों के भी काम आए, इस दृष्टि से इन कार्यक्रमों का संकलन इस पुस्तक में किया गया है।

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हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा को लेकर ‘न्यूज18 इंडिया’ से हो गई बड़ी भूल, मांगी पाठकों से माफी

कई बार तमाम न्यूज संस्थानों से कुछ इस तरह की गलतियां हो जाती हैं, जिससे उन्हें किरकिरी का सामना करना पड़ता है और ‘भूल सुधार’ तक प्रकाशित/प्रसारित करना पड़ता है।

Last Modified:
Tuesday, 28 June, 2022
News18 India

इसे काम का अत्यधिक दबाव कह लें, खबरों को जल्दी से जल्दी ‘ब्रेक’ करने की होड़ कह लें अथवा लापरवाही। कई बार तमाम न्यूज संस्थानों से कुछ इस तरह की गलतियां हो जाती हैं, जिससे उन्हें किरकिरी का सामना करना पड़ता है और ‘भूल सुधार’ तक प्रकाशित/प्रसारित करना पड़ता है।

हाल ही में कुछ ऐसा ही नामी-गिरामी हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा की खबर को लेकर ‘नेटवर्क18’ समूह की हिंदी न्यूज वेबसाइट ‘न्यूज18 इंडिया’ के साथ हुआ, जब उसे सार्वजनिक रूप से गलती मानते हुए भूल सुधार पब्लिश करना पड़ा।

दरअसल, हुआ कुछ ऐसा कि हाल ही में पंजाबी कॉमेडियन सुरिंदर शर्मा का निधन हो गया था। इस पर ‘न्यूज18 इंडिया’ ने ’पंजाबी कॉमेडियन सुरिंदर शर्मा का निधन, शोक में मनोरंजन जगत’ नाम से वेबसाइट पर एक खबर पब्लिश कर दी। इस खबर में ‘न्यूज18 इंडिया’ ने बताया कि पंजाबी इंडस्ट्री के मशहूर कॉमेडियन, कवि और लेखक सुरिंदर शर्मा अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने थियेटर से लेकर फिल्मों और शोज में भी काम किया था। लेकिन, इस खबर में जो फोटो लगाई गई, वह जाने-माने हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा की थी।

देखते ही देखते यह खबर वायरल हो गई। इसके बाद तो सोशल मीडिया पर सुरेंद्र शर्मा की तस्वीर वायरल होने लगी। कई प्रशंसकों ने उन्हें श्रद्धांजलि देना तक शुरू कर दिया। सुरेंद्र शर्मा तक भी यह खबर पहुंची। इसके बाद उन्होंने खुद एक वीडियो जारी किया और अपनी सलामती के बारे में बताया। इसके बाद ‘न्यूज18 इंडिया’ ने इस बारे में अपनी गलती मानी और सुरिंदर शर्मा की सही फोटो लगाते हुए भूल सुधार पब्लिश किया। अपने माफीनामे में ‘न्यूज18 इंडिया’ ने इस गलती को मानवीय भूल बताते हुए खेद प्रकट किया है। अपने भूल सुधार में इस वेबसाइट ने लिखा-‘इस खबर में मानवीय भूलवश हिंदी के सुप्रसिद्ध हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा की फोटो प्रकाशित हो गई थी, इसके लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं।‘ ‘न्यूज18 इंडिया’ की इस खबर को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं। 

गौरतलब है कि कुछ साल पहले तमाम मीडिया संस्थानों ने मसालों के किंग के रूप में चर्चित एमडीएच के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी (अब दिवंगत) के निधन की खबर चला दी थी। बाद में उनके परिवार की ओर से इस खबर का खंडन करते हुए एक विडियो जारी किया गया था। मीडिया में चल रहीं इस तरह की खबरों पर परिवार ने निंदा भी की थी। उस समय परिवार की ओर से जारी संदेश में कहा गया था कि वह एकदम स्वस्थ हैं। बता दें कि सोशल मीडिया पर धर्मपाल के निधन की अफवाह उड़ने के बाद कई प्रमुख न्यूज वेबसाइट ने भी यह खबर पब्लिश कर दी थी।

मशहूर हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा द्वारा अपनी सलामती के बारे में शेयर किए गए वीडियो को आप यहां देख सकते हैं-

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इस बड़े पद पर Viacom18 Sports से जुड़े पुष्पेंद्र सिंह

‘वायकॉम18 स्पोर्ट्स’ को जॉइन करने से पहले पुष्पेंद्र सिंह एक शॉर्ट वीडियो प्रॉडक्शन और क्रिएटर इकनॉमी स्टार्टअप ‘Fandawm’ के को-फाउंडर रहे हैं।

Last Modified:
Monday, 27 June, 2022
Pushpendra Singh Viacom18 Sports

‘वायकॉम18 स्पोर्ट्स’ (Viacom18 Sports) ने पुष्पेंद्र सिंह को चीफ प्रॉडक्ट ऑफिसर के तौर पर नियुक्त किया है। ‘वायकॉम18 स्पोर्ट्स’ को जॉइन करने से पहले पुष्पेंद्र सिंह एक शॉर्ट वीडियो प्रॉडक्शन और क्रिएटर इकनॉमी स्टार्टअप ‘Fandawm’ के को-फाउंडर रहे हैं।  

इस बारे में अपनी एक लिंक्डइन पोस्ट में पुष्पेंद्र सिंह ने लिखा है, ‘वायकॉम 18 स्पोर्ट्स में चीफ प्रॉडक्ट ऑफिसर के रूप में अपनी नई पारी की घोषणा करते हुए मुझे काफी खुशी हो रही है। आईपीएल डिजिटल मीडिया अधिकारों के साथ वायकॉम18 एक शानदार स्पोर्ट्स वीडियो स्ट्रीमिंग अनुभव देने के लिए पूरी तरह तैयार है। धन्यवाद वायकॉम18 टीम।’

पुष्पेंद्र सिंह को शॉर्ट वीडियो, ओटीटी म्यूजिक, वीडियो स्ट्रीमिंग, ई-कॉमर्स, प्रॉडक्ट मैनेजमेंट एंड ग्रोथ, कंटेंट स्ट्रैटेजी और मोबाइल एंड इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स का काफी अनुभव है। पूर्व में वह MX Player, MX TakaTak, Gaana, Amazon, Snapdeal, Genpact Headstrong और Sapient जैसी जानी-मानी कंपनियों में अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

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इंडिया टुडे के सर्वे में बरकरार रही IIMC की ‘बादशाहत’

‘आईआईएमसी‘ के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा, हमारा उद्देश्य है कि ‘आईआईएमसी‘ कम्युनिकेशन की दुनिया के ‘ग्लोबल लीडर्स’ तैयार करे।

Last Modified:
Monday, 27 June, 2022
IIMC

देश की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘इंडिया टुडे’ (India Today) के 'बेस्ट कॉलेज सर्वे' (Best College Survey) में ‘भारतीय जनसंचार संस्थान‘ (IIMC), नई दिल्ली को पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में देश का सर्वश्रेष्ठ मीडिया शिक्षण संस्थान घोषित किया गया है।

इस उपलब्धि पर ‘आईआईएमसी‘ के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा, ‘आईआईएमसी‘ परिवार के लिए बड़े ही गर्व का विषय है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर और संस्थान के चेयरमैन अपूर्व चंद्र के मार्गदर्शन और सहयोग से संस्थान अकादमिक गुणवत्ता के मानकों को स्थापित करने में सफल रहा है।‘ उन्होंने कहा कि ‘आईआईएमसी‘ के सभी पूर्व महानिदेशकों, श्रेष्ठ प्राध्यापकों, अधिकारियों और कर्मचारियों के अथक प्रयास से ही हम लगातार कई वर्षों से पहले स्थान पर हैं।

प्रो. द्विवेदी के अनुसार, ‘डिजिटल मीडिया और मीडिया कन्वर्जेंस आज की जरुरत है। ‘आईआईएमसी‘ ने मीडिया शिक्षण, प्रशिक्षण और शोध के क्षेत्र में एक अलग जगह बनाई है। हमने मीडिया क्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से पाठ्यक्रमों को निरंतर अपडेट किया है। यही कारण है कि ‘आईआईएमसी‘ के पूर्व छात्र आज देश के ही नहीं, विदेशों के भी मीडिया, सूचना और संचार संगठनों में नेतृत्वकारी भूमिका में हैं।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता ही किसी संस्थान की सफलता है। हम अपने विद्यार्थियों को हर वह अवसर सुलभ करा रहे हैं, जो उनके सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी हैं। हम चाहते हैं कि दुनिया के सफलतम लोगों से हमारे विद्यार्थी संवाद कर पाएं। हमारा उद्देश्य है कि ‘आईआईएमसी‘ कम्युनिकेशन की दुनिया के ‘ग्लोबल लीडर्स’ तैयार करे।

गौरतलब है कि ‘भारतीय जनसंचार संस्थान‘ सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में प्रमुख शिक्षण संस्थान है। ‘आईआईएमसी‘ हिंदी पत्रकारिता, अंग्रेजी पत्रकारिता, विज्ञापन एवं जनसंपर्क, रेडियो एवं टेलीविजन, डिजिटिल मीडिया, ओड़िया, मराठी, मलयालम और उर्दू पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करता है।

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इस प्रतिष्ठित अवॉर्ड से नवाजे गए iTV नेटवर्क के फाउंडर और MD कार्तिकेय शर्मा

नवनियुक्त राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा को खेलों में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिल्ली में रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम में यह सम्मान दिया गया।

Last Modified:
Monday, 27 June, 2022
Kartikeya Sharma

‘प्रो स्पोर्टीफाई’ (Pro Sportify) के संस्थापक और हरियाणा से नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा को भारतीय खेलों में उनके बेजोड़ योगदान के लिए ‘स्पोर्ट्स फैन अवार्ड 2022‘ (Sports Fan Award 2022)  से सम्मानित किया गया है।

नवनियुक्त राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा को दिल्ली में रविवार को आयोजित ‘स्पोर्ट्स फिलेंथ्रॉपी अवॉर्ड्स’ कार्यक्रम में खेलों में उनके उल्लेखनीय योगदान और लीग के माध्यम से ओलंपिक खेलों को बढ़ावा देने में अनुकरणीय समर्पण के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

बता दें कि ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) के फाउंडर व मैनेजिंग डायरेक्टर कार्तिकेय शर्मा एक दशक से भी ज्यादा समय से खेलों का समर्थन कर रहे हैं। प्रो रेसलिंग लीग, बिग बाउट इंडियन बाक्सिंग लीग, द इंडियन एरिना पोलो लीग और दो अन्य आगामी लीगों को वह बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।

इस अवार्ड के मिलने के बाद कार्तिकेय शर्मा ने एक ट्वीट कर अपनी खुशी का इजहार किया। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं, जो आपने मुझे ये सम्मान दिया। मेरा मानना है कि खेल युवाओं को अच्छी और ऊंची जगह के लिए अग्रसर करता है और मैं हमेशा युवाओं के लिए और खेल जगत के लिए अपना पूर्ण रूप से सहयोग दूंगा।‘

हरियाणा के खेल मंत्री संदीप सिंह,  टीम इंडिया के सुपरफैन सुधीर कुमार गौतम, सुगुमर कुमार, देश की पहली महिला ओलंपियन कर्णम मल्लेश्वरी और लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त ने उन्हें शानदार ट्राफी प्रदान की। गौरतलब है कि राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार विजेताओं, अर्जुन पुरस्कार विजेताओं और द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं समेत भारतीय खेल दिग्गजों ने इस अवॉर्ड के लिए कार्तिकेय शर्मा को चयनित किया।

कार्यक्रम की झलक आप यहां देख सकते हैं-

 

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iTV Network ने ‘अग्निपथ’ योजना का किया समर्थन, की ये बड़ी घोषणा

नवनियुक्त राज्यसभा सदस्य और ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) के फाउंडर व मैनेजिंग डायरेक्टर कार्तिकेय शर्मा का कहना है कि ये योजना देश की सशस्त्र सुरक्षा प्रणाली को एक नए मुकाम पर ले जाएगी।

Last Modified:
Saturday, 25 June, 2022
itv Network

रक्षा सेनाओं (आर्मी, नेवी, एयर फोर्स) में भर्ती के लिए पिछले दिनों सरकार द्वारा लॉन्च की गई ‘अग्निपथ योजना’ (Agnipath Scheme) का काफी विरोध हो रहा है। इस योजना को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं। ‘चार साल बाद अग्निवीर क्या करेंगे?’ के जवाब में केंद्रीय बलों (सीएपीएफ); यूपी, हरियाणा, उत्तराखण्ड, आदि राज्यों में पुलिस व सम्बद्ध विभागों में भर्ती में प्राथमिकता की घोषणा की जा रही हैं। कई औद्योगिक घराने भी सरकार की इस योजना के समर्थन में आगे आए हैं। हाल ही में ‘महिंद्रा’ ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने अग्निवीरों को सेवानिवृत्ति के बाद अपने ग्रुप में नौकरी देने की बात कही है।

देश के बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स में शुमार ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) ने भी सरकार की इस योजना का समर्थन किया है।

नवनियुक्त राज्यसभा सदस्य और ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) के फाउंडर व मैनेजिंग डायरेक्टर कार्तिकेय शर्मा का कहना है कि सेना में भर्ती की ‘अग्निपथ’ स्कीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। ये योजना गेम-चेंजर साबित होगी और देश की सशस्त्र सुरक्षा प्रणाली को एक नए मुकाम पर ले  जाएगी।

इसके साथ ही कार्तिकेय शर्मा ने घोषणा की है कि चार साल की नौकरी के बाद उनके नेटवर्क की तरफ से भी अग्निवीरों को हरसंभव मदद की जाएगी और योग्यता के आधार पर नौकरी पर रखा जाएगा।

गौरतलब है कि कार्तिकेय शर्मा ने काफी कम उम्र में मीडिया बिजनेस में मजबूती से अपने पैर जमा लिए हैं और हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में हरियाणा से कांग्रेस के अजय माकन को हराकर अपनी जीत दर्ज की है।

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गुजरात दंगों के मामले में मोदी को क्लीन चिट, SC ने ‘जी’ न्यूज व सुधीर चौधरी का किया जिक्र

'जी न्यूज' के एडिटर-इन-चीफ व सीईओ सुधीर चौधरी ने शुक्रवार के अपने शो ‘डीएनए’ (DNA) में इस पूरे फैसले और ‘जी न्यूज’ की कवरेज को लेकर विस्तार से बात की।

Last Modified:
Saturday, 25 June, 2022
Sudhir Chaudhary

गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री) को क्लीन चिट दे दी है। इसके साथ ही दंगों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच को सही ठहराया है। यही नहीं, अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 'जी न्यूज' व उसके एडिटर-इन-चीफ व सीईओ सुधीर चौधरी की कवरेज का भी जिक्र किया है।

बता दें कि 72 साल के एहसान जाफरी कांग्रेस नेता और सांसद थे। उन्हें उत्तरी अहमदाबाद में गुलबर्ग सोसाइटी के उनके घर से निकालकर गुस्साई भीड़ ने मार डाला था। एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी ने दंगे की साजिश के मामले में मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी थी। मजिस्ट्रेट ने एसआईटी की उस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया था, जिसमें तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी समेत 63 लोगों को दंगों की साजिश रचने के आरोप से आजाद किया गया था। हाई कोर्ट भी इस फैसले को सही करार दे चुका है। जाकिया जाफरी ने विशेष जांच दल की रिपोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने अब अहम फैसला लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि इस केस को 16 साल तक जिंदा रखा गया और कई याचिकाएं दायर की गईं। जो लोग भी कानून के गलत इस्तेमाल में शामिल हैं, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

गौरतलब है कि पूर्व सीबीआई निदेशक आरके राघवन के नेतृत्व वाली एसआईटी ने तत्काल मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रशासन को क्लीन चिट दी थी। इसे जाकिया जाफरी ने चुनौती दी थी। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पुलिस की कमी के बावजूद प्रशासन ने दंगों को शांत कराने की पूरी कोशिश की, लेकिन कुछ अधिकारियों ने निजी स्वार्थ के लिए इस मामले को संवेदनशील बनाया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन अधिकारियों ने दावा किया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बड़े अधिकारियों ने मीटिंग में दंगे की साजिश रची। इन अधिकारियों का दावा था कि वे इस मीटिंग में मौजूद थे, जबकि सच में वे इस मीटिंग में मौजूद नहीं थे। 

सुधीर चौधरी ने शुक्रवार के अपने शो ‘डीएनए’ (DNA) में इस पूरे फैसले और ‘जी न्यूज’ की कवरेज को लेकर विस्तार से बात की। सुधीर चौधरी ने उस दौरान नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू किया था, जिसको लेकर भी काफी हंगामा हुआ था। सुधीर चौधरी का कहना था कि इस मामले में उनसे भी कई बार पूछताछ हुई थी और जांच एजेंसी हर बार यही जानना चाहती थीं कि क्या नरेंद्र मोदी ने ये कहा था कि गुजरात में दंगे गोधरा कांड का बदला लेने के लिए हुए थे। सुधीर चौधरी के अनुसार, ऐसा कुछ नहीं था। नरेंद्र मोदी ने ऐसा कुछ नहीं कहा था और अपनी कवरेज में उन्होंने पूरा सच दिखाया था। सुधीर चौधरी के अनुसार, कुछ लोगों ने उनके इंटरव्यू के अंशों को तोड़-मरोड़कर पेश किया, ताकि इसमें मोदी और तत्कालीन सरकार की साजिश दिखे। अपने शो में सुधीर चौधरी ने वर्ष 2002 की कवरेज को भी दिखाया है।

इस मुद्दे पर शुक्रवार का पूरा DNA शो आप यहां देख सकते हैं-

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मीडिया मुगल डॉ. अनुराग बत्रा ने नवनियुक्त राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा को दी बधाई

‘बिजनेसवर्ल्ड’ समूह के चेयरमैन और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह के फाउंडर व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने ‘आईटीवी नेटवर्क’ के फाउंडर व एमडी कार्तिकेय शर्मा को राज्यसभा सदस्य बनने पर बधाई दी है।

Last Modified:
Thursday, 23 June, 2022
Dr Annurag Batra Kartikeya Sharma

‘बिजनेसवर्ल्ड’ समूह के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ और ‘एक्सचेंज4मीडिया’ समूह के फाउंडर व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) के फाउंडर व मैनेजिंग डायरेक्टर कार्तिकेय शर्मा से मुलाकात की और उन्हें राज्यसभा सदस्य बनने पर बधाई दी।

कार्तिकेय शर्मा से मुलाकात करने के बाद डॉक्टर बत्रा ने अपने ट्विटर पर लिखा, प्रिय कार्तिक, आज मैं जब आपसे मिल रहा हूं तो आप एक युवा इंडिपेंडेंट राज्यसभा सदस्य हैं। इतनी कम उम्र में इस उपलब्धि के लिए आपको बधाई। मुझे इन तीन चीजों को लेकर काफी खुशी है कि आप अपने पिता की विरासत को आगे ले जाने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा आप काफी फिट हैं और सदैव अच्छे इरादे के साथ लोगों की मदद करते हैं।

उनके इस ट्वीट पर राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा ने लिखा है, मेरे प्रिय मित्र और भाई अनुराग, आपके इस प्रेम और स्नेह के लिए मैं आभारी हूं। ये सच्चा प्यार और गर्मजोशी आपने हमेशा मुझे दी है और इसके लिए आपका शुक्रिया।

गौरतलब है कि कार्तिकेय शर्मा ने काफी कम उम्र में मीडिया बिजनेस में मजबूती से अपने पैर जमा लिए हैं और हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में हरियाणा से कांग्रेस के अजय माकन को हराकर अपनी जीत दर्ज की है। वहीं, डॉक्टर अनुराग बत्रा पिछले दो दशक से भी अधिक समय से मीडिया बिजनेस में हैं। वह मीडिया जगत से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय बेबाकी से रखने के लिए जाने जाते हैं।

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पत्रकार अनुराग मिश्रा वत्स को ‘राजस्थान पत्रिका‘ में मिली अब नई जिम्मेदारी

अनुराग मिश्रा करीब पांच साल से ‘राजस्थान पत्रिका‘ के नेशनल ब्यूरो में गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की खबरों को भी देख रहे थे।

Last Modified:
Thursday, 23 June, 2022
Anurag Mishra

पत्रकार अनुराग मिश्रा वत्स को ‘राजस्थान पत्रिका’ ने उत्तर प्रदेश (डिजिटल और न्यूजपेपर) का संपादकीय प्रभारी बनाया है।

साल 2003 में ‘स्टार न्यूज’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अनुराग मिश्र ’सीएनबीसी’, ’आईबीएन7’, ’एनडीटीवी’, ’जी न्यूज’ और ’न्यूज18’ जैसे जाने-माने चैनल्स में रिपोर्टिंग समेत कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वह ’ईटीवी’ में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और हरियाणा के हेड रह चुके हैं।

अनुराग मिश्रा द्वारा वर्ष 2016 में गए किए देश के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर के इंटरव्यू ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इस इंटरव्यू में जस्टिस ठाकुर ने कहा था कि केंद्र व  राज्य सरकारों की नाकामी की वजह से लोग न्यायालय का रुख करते हैं। अनुराग मिश्र द्वारा लिया गया यह इंटरव्यू देश के तमाम न्यूज चैनल्स और अखबारों समेत कई विदेशी चैनल्स में छाया रहा था।

इसके अलावा इंटरपोल की रिपोर्ट के आधार पर अवैध वेस्ट ई-वेस्ट के जलाए जाने को लेकर उनकी खबर के बाद उत्तर प्रदेश सरकार अलर्ट हुई थी। यही नहीं, अनुराग की खबर पर ‘नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल’ (NGT) ने एक्शन लेते हुए यूपी सरकार पर जुर्माना भी लगाया था।

अनुराग मिश्रा करीब पांच साल से ‘राजस्थान पत्रिका‘ के नेशनल ब्यूरो में गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की खबरों को भी देख रहे थे। ‘राजस्थान पत्रिका‘ द्वारा अनुराग को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाए जाने पर कई वरिष्ठ पत्रकारों ने उन्हें बधाई दी है।

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