मीडिया इंडस्ट्री में विरले होते हैं राधाकृष्णन जैसे मैनेजिंग एडिटरः राजदीप सरदेसाई

राधा बहुत ही सज्जन व्यक्ति थे। मैं आज जब राधा को याद करता हूं तो याद आता है...

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 November, 2018
Last Modified:
Tuesday, 27 November, 2018
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राजदीप सरदेसाई

कंसल्टिंग एडिटर, टीवी टुडे ग्रुप ।।

राधा बहुत ही सज्जन व्यक्ति थे। मैं आज जब राधा को याद करता हूं तो याद आता है उनका वो उत्साह,  उनकी वो ऊर्जा और उनकी वो नम्रता, जो उनसे मिलने वाला हर शख्स चाहे वो कोई वो टॉप अधिकारी हो या जूनियर, महसूस करता था। राधा की विशेषता थी कि वह न्यूज रूम में मौजूद यंगस्टर्स के साथ बहुत आसानी से घुल-मिल जाते थे। वो ऐसे मैनेजिंग एडिटर थे, जिनमें नाममात्र का भी ईगो नहीं था। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि राधा जैसे एडिटर मीडिया इंडस्ट्री में विरले ही होते हैं, जिनकी न कभी किसी से दुश्मनी रही और न ही कभी वो किसी भी तरह से न्यूज रूम की पॉलिटिक्स का हिस्सा बने।

मुझे अच्छी तरह से याद है कि राधा यदि किसी क्षण किसी पर चिल्लाते थे, तो अगले ही पल मैं उन्हें उसके साथ कॉफी पीते हुए पाता था। खबर पर राधा की पकड़ अद्भुत थी। ‘यूएनआई’ जैसी प्रतिष्ठित न्यूज एजेंसी से अपने करियर की शुरुआत करने वाले राधा समझते थे कि खबर क्या है और खबर कैसी होनी चाहिए। मुझे याद है कि न्यूज रूम में खबरों को लेकर उनका पैशन जनहित की खबरों पर रहता था। वह ह्यूमन इंटरेस्ट की स्टोरी समझने में माहिर थे। वह हमेशा कहते थे कि अच्छी स्टोरी का आमजन से जुड़ाव होना बहुत जरूरी है।

राधा को याद करते हुए मैं एक बात का उल्लेख जरूर करूंगा कि उनके नेतृत्व में कई नए इनोवेशन मीडिया इंडस्ट्री को देखने को मिले हैं। चूंकि राधा सीएनबीसी से सीएनएन-आईबीएन में आए थे, ऐसे में बजट को लेकर उन्होंने यहां पर जो खाका बनाया, वो अब तक का बेस्ट बजट प्रजेंटेशन रहा। यह उनका ही आयडिया था कि हमने पीपल्स (लोगों का) बजट बनाया, जिसके तहत वो दस मांगें फाइनेंस मिनिस्टर को सौंपी गईं, जो इस देश का आमजन चाहता था। वाकई ये एक अद्भुत प्रयोग था, जिसने बजट को इस देश के आमजन से जोड़ दिया।

मैं ये दावे के साथ कह सकता हूं कि दिल्ली के कई संपादक दक्षिण भारत को नहीं समझते हैं, लेकिन राधा चूंकि खुद त्रिवेंद्रम से थे, ऐसे में दक्षिण भारत के बारे में उनका ज्ञान बेहद सटीक था। वे कई बार दक्षिण भारत की खबरों में ऐसे एंगल निकालते थे, जो दिल्ली के पत्रकार कभी सोच भी नहीं पाते थे।

मुझे आज भी राधा की जिंदादिली याद है। पॉजिटिव स्प्रिट वाले इस शख्स को मैंने कभी भी किसी की टांग खिंचाई करते हुए नहीं देखा। दो बेटियों के पिता राधा के लिए न्यूज रूम भी एक विस्तारित परिवार की तरह था। एक टीम लीडर के तौर पर वह इतने कुशल थे कि जब भी उनके किसी साथी को एचआर के साथ किसी भी तरह की कोई समस्या होती थी तो वे सीधे राधा तक पहुंचते थे और राधा उस परेशानी को आसानी से हल कर देते थे। वह चैनल के पीछे की असली ताकत थे। उनके संचालन में चैनल ने कई नए आयाम रचे हैं। वह एक अच्छे श्रोता भी थे। लोगों की बातें बड़ी तन्मयता से सुनते थे।

Dear Radha, We miss u a lot, you are the finest human being, Salute to my friend

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PIB ने Corona से जुड़ी इन दो खबरों को बताया गलत

कोरोनावायरस (Coronavirus) के संक्रमण को लेकर जितना डर फैला हुआ है, उससे कहीं ज्यादा इससे जुड़ी निरधार खबरें।

Last Modified:
Monday, 30 March, 2020
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कोरोनावायरस (Coronavirus) के संक्रमण को लेकर जितना डर फैला हुआ है, उससे कहीं ज्यादा इससे जुड़ी निरधार खबरें। कोरोनावायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने देश में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। सोमवार को लॉकडाउन का छठा दिन है। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया जा रहा है कि लॉकडाउन की समयसीमा बढ़ सकती है।

तो यहां बता दें कि यह खबर पूरी तरह से गलत है, क्योंकि 21 दिनों के लॉकडाउन को आगे बढ़ाने वाली खबरों का केंद्र सरकार ने खंडन करते हुए इसे अफवाह करार दिया है। सरकार का कहना है कि इन खबरों को कोई आधार नहीं है।

पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर ये जानकारी दी है। पीआईबी ने अपने पहले ट्वीट में कहा कि अफवाह पर ध्यान न दें। अफवाहें और मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि सरकार #Lockdown21 की अवधि समाप्त होने के बाद इसे बढ़ा देगी। कैबिनेट सचिव ने इन रिपोर्टों का खंडन किया है और कहा है कि वे निराधार हैं।

पीआईबी ने एक अन्य ट्वीट में कैबिनेट सचिव ने क्या कहा, इसकी जानकारी दी। ट्वीट में लिखा, ‘राजीव गौबा ने इन खबरों खंडन किया है और कहा है इस तरह की खबरें आधारहीन हैं। उन्होंने कहा कि अफवाहों और मीडिया में चल रही खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि सरकार लॉकडाउन की अवधि समाप्त होने के बाद इसे बढ़ा देगी। कैबिनेट सचिव ने इन रिपोर्टों का खंडन किया है और कहा है कि वे निराधार हैं।’

वहीं सोशल मीडिया पर फैलायी जा रही एक अन्य खबर को भी पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने गलत बताया है। दरअसल, इस खबर में यह झूठ फैलाया जा रहा है कि गृह मंत्रालय के प्रमुख सचिव रवि नायक के कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कोरोना वायरस से सम्बंधित कोई भी पोस्ट को दंडनीय अपराध घोषित कर दिया गया है। गलत पोस्ट या मैसेज करने पर ग्रुप एडमिन सहित पूरे ग्रुप के सदस्यों पर आईटी एक्ट के अन्तर्गत मुकदमा पंजीकृत कर कार्यवाही की जाएगी, इसलिए ध्यान रखें, सतर्क रहें, सुरक्षित रहे।

इस खबर को लेकर पीआईबी ने ट्वीट कर कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा ऐसा कोई भी निर्देश सोशल मीडिया को लेकर नहीं जारी किया गया है।

 

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कोरोना का खौफ: प्रशासन की कार्रवाई से पत्रकारों में नाराजगी

शासकीय आदेशों का उल्लंघन करने पर थाना श्यामला हिल्स ने कोरोना पॉजिटिव पाए गए पत्रकार केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

नीरज नैयर by
Published - Saturday, 28 March, 2020
Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
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वरिष्ठ पत्रकार केके सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से भोपाल प्रशासन सकते में है। प्रशासन द्वारा पत्रकारों के घर पर ‘Covid19 डू नॉट विजिट’ पोस्टर चस्पा किये जा रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि इनमें वह पत्रकार भी शामिल हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद नहीं थे। इसी बात को लेकर प्रशासन और पत्रकारों में ठन गई है। पोस्टर लगाने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम से कई पत्रकारों का विवाद भी हुआ। पत्रकारों का कहना है कि सरकार बिना वजह दहशत फैला रही है। हमने खुद आगे बढ़कर टेस्ट कराने को कहा है, लेकिन वह पोस्टर चिपकाने तक सीमित है। जो पत्रकार प्रेस कांफ्रेंस में गए भी नहीं थे, उनके भी नाम संदिग्धों की सूची में डाल दिए गए हैं। आखिर ऐसा किस आधार पर किया जा रहा है?

शुक्रवार को भी स्वास्थ्य विभाग की टीम कुछ पत्रकारों के घर पोस्टर लगाने गई थी। इस दौरान उनका पत्रकारों से विवाद भी हुआ। पत्रकारों ने प्रेस कांफ्रेंस में न होने का हवाला भी दिया, लेकिन कर्मचारी कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। हालांकि, कड़े विरोध को देखते हुए उन्हें बिना पोस्टर लगाये ही वापस लौटना पड़ा।

कर्मचारियों का कहना है कि वह सिर्फ कलेक्टर के आदेश की तालीम कर रहे हैं। उन्हें जिन पत्रकारों की सूची सौंपी गई है, उसी के आधार पर पोस्टर लगाये जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर एक विडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें पत्रकार को पोस्टर लगाने पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को भगाते हुए दिखाया गया है। विडियो में पत्रकार पूछता है कि क्या कमलनाथ या शिवराज सिंह के घर पर पोस्टर लगाये हैं? नहीं, तो फिर यहां कैसे आये’? इस विडियो के सामने आने के बाद जहां कुछ पत्रकारों उक्त पत्रकार के बर्ताव पर नाराजगी जाता रहे हैं। वहीं कुछ की नजर में यह प्रशासन की बेवकूफी से उपजा गुस्सा है। नाराजगी जताने वालों का कहना है कि भले ही प्रशासन ने गलती की, लेकिन अधिकारियों का गुस्सा कर्मचारियों पर नहीं निकाला जाना चाहिए।
केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज

वहीं, शासकीय आदेशों का उल्लंघन करने पर थाना श्यामला हिल्स ने कोरोना पॉजिटिव पाए गए पत्रकार केके सक्सेना के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। सक्सेना के खिलाफ धारा 188, 269, 270 भा.द.वि. के तहत अपराध पंजीबद्ध कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। सक्सेना ने न केवल कोरोना संक्रमित होकर लापरवाही की बल्कि इलाज के लिये गए सरकारी डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार भी किया था।

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IBF की बड़ी पेशकश, मुफ्त में देख सकेंगे ये चार टीवी चैनल्स

कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ लड़ाई में सरकार के सपोर्ट के लिए ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ भी आगे आया है।

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
Channel

कोरोनावायरस (कोविड-19) के खिलाफ लड़ाई में सरकार के सपोर्ट के लिए ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ (Indian Broadcasting Foundation) भी आगे आया है। इसके तहत ‘इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन’ के सदस्यों ने सोनी के चैनल ‘सोनी पल’, स्टार इंडिया के चैनल ‘स्टार उत्सव’ जी टीवी के चैनल ‘जी अनमोल’ और ‘वायकॉम18’ के कलर्स बुके (bouquet) में शामिल चैनल ‘कलर्स रिश्ते’ को दो माह तक मुफ्त में प्रसारित करने की पेशकश की है। ये सभी चैनल पे चैनल्स (pay channels) हैं।

इस पेशकश के तहत अब ये चारों चैनल देश भर में सभी ‘डायरेक्ट टू होम’ (DTH) और केबल नेटवर्क्स पर दो महीने के लिए मुफ्त में देखने को मिलेंगे। यानी देश भर के दर्शकों को इन चारों चैनल्स को देखने के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा।     

दरअसल, इन सभी ब्रॉडकास्टर्स का मानना है कि जब लॉकडाउन के कारण लोगों को 21 दिनों तक अपने घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है, ऐसे मे इस कदम से लोगों को थोड़ा एंटरटेनमेंट और स्फूर्तिदायक कंटेंट मिल सकेगा, जो लोगों को काफी राहत प्रदान करेगा।   

बता दें कि कोरोनावायरस के प्रकोप को देखते हुए सरकार ने लोगों से सोशल डिस्टिंग अपनाने के साथ ही घरों पर ही रहने को कहा है। ऐसे में इन चारों ब्रॉडकास्टर्स ने भी आगे आकर इन चारों चैनल्स के लिए दो महीने तक अपने सभी तरह के टैरिफ और शुल्क को दर्शकों के लिए मुफ्त करने का निर्णय कर कोरोना से ‘जंग’ में अपना साथ दिया है।

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पत्रकारों के लिए सरकार ने शुरू की ये योजना, इस तरह मिलेगा लाभ

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के पत्रकारों को एक बड़ी सौगात दी है

Last Modified:
Saturday, 28 March, 2020
Journalist

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य के पत्रकारों को एक बड़ी सौगात दी है। दरअसल, मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को बिहार पत्रकार सम्मान पेंशन योजना की शुरुआत की है। इसके तहत बिहार के पत्रकारों को हर महीने 6000 रुपए की पेंशन दी जाएगी। फिलहाल राज्य के 48 पत्रकारों को यह पेंशन मिलेगी। यह योजना 14 नवंबर 2019 से प्रभावी की गई है और पेंशन पाने वाले पत्रकारों को एरियर का भुगतान भी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुक्रवार को 40 पत्रकारों के खाते में पेंशन की राशि स्थानांतरित कर दी गयी। इन 40 पत्रकारों के अतिरिक्त पांच पत्रकारों को 6 मार्च 2020 तथा तीन पत्रकारों को 16 मार्च 2020 के प्रभाव से पेंशन का लाभ मिलेगा।

जिन 40 पत्रकारों को नवंबर 2019 से लाभ मिलना है, उनके लिए 1.36 लाख रुपए का भुगतान किया गया है। वहीं, जिन पत्रकारों के पेंशन की स्वीकृति मार्च से दी गयी है, उनके खाते में पेंशन की राशि अगले महीने स्वीकृति के एक माह पूरा होने के बाद जाएगी।

राज्य में पेंशन योजना को स्वीकृत किए जाने के मौके पर उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय. कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा, मुख्य सचिव दीपक कुमार, डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव अनुपम कुमार आदि वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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प्रेस एसोसिएशन ने पीएम को लिखा पत्र, पत्रकारों के लिए मांगी ये सुविधा

एसोसिएशन ने पीएम से गुहार लगाई है कि कोरोना की खबर देने के लिए पत्रकार फील्ड से रिपोर्ट भेज रहे है और लोगों से मिलकर जानकारी ग्रहण कर रहे है, इसलिए वह खतरे का सामना कर रहे हैं।

Last Modified:
Friday, 27 March, 2020
Journalist

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कोरोना से जंग लड़ रही आशा कार्यकर्ताओं, स्वच्छता कर्मचारियों, मेडिकल और पैरा-मेडिकल स्टाफ के लिए 50 लाख रुपए के बीमा कवर का ऐलान किया है, जिसका फायदा 20 लाख मेडिकल स्टाफ और कोरोना वॉरियर्स को मिलेगा। लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर देश को जागरूक करने वाले पत्रकारों को इस बीमा कवर से दूर रखा गया है। लिहाजा, मान्यताप्राप्त पत्रकारों के एक संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पत्रकारों को उस विशेष बीमा योजना में शामिल करने का अनुरोध किया है जिसकी घोषणा सरकार ने गुरुवार को की।

बता दें कि प्रेस एसोसिएशन ने कोरोना महामारी को देखते हुए पीएम मोदी को पत्र लिखकर पत्रकारों के लिए भी 50 लाख रुपए के बीमा की मांग की है। एसोसिएशन ने अपने पत्र में पीएम से गुहार लगाई है कि कोरोना की खबर देने के लिए देश के पत्रकार फील्ड से रिपोर्ट भेज रहे है और लोगों से मिलकर जानकारी ग्रहण कर रहे है, इसलिए वह खतरे का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पत्रकार भी महामारी के खिलाफ लड़ाई में योगदान दे रहे हैं, जिस तरह वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मचारियों आदि के लिए 50 लाख बीमे की घोषणा की उसी तरह यह सुविधा पत्रकारों को भी मिलनी चाहिए। उन्होंने मोदी से अपील की कि सरकार अपनी स्कीम में पत्रकारों को शामिल करें, जिससे पत्रकार निर्भीक होकर अपना काम कर सके।

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‘उस’ प्रेस कांफ्रेंस में नहीं जाने वाले खुद को मान रहे खुशनसीब

भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार के.के. सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से यहां हड़कंप मच गया है। सक्सेना मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में भी मौजूद थे

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
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भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार के.के. सक्सेना के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से यहां हड़कंप मच गया है। सक्सेना मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में भी मौजूद थे, लिहाजा अन्य पत्रकार भी खौफ में हैं।

बताया जा रहा है कि के.के. सक्सेना कांग्रेस नेता रवि सक्सेना के भाई हैं, ऐसे में उनके के भी संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। पत्रकार होने के नाते सक्सेना का हर रोज काफी लोगों से मिलना रहता था। वह अकसर सघन बसावट वाले पुराने भोपाल भी जाया करते थे, इस वजह से लोगों में घबराहट का माहौल है। वहीं, प्रशासन भी स्थिति की गंभीरता को समझ रहा है।

कुछ स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि संक्रमित सक्सेना के कांग्रेस नेता भाई की भी जांच कराई जानी चाहिए और यदि वह पॉजिटिव आती है, तो स्थिति बहुत ही भयानक हो जाएगी, क्योंकि उनका बड़ी संख्या में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिलना-जुलना रहता है।

वहीं, मामला सामने आने के बाद करीब 30 पत्रकारों की स्क्रीकिंग करवाई गई है। अच्छी बात यह है कि एक भी पत्रकार में कोरोना के लक्षण नहीं पाए गए। फिर भी इन पत्रकारों को अगले कुछ दिनों तक होम क्वॉरेंटाइन रहने को कहा गया है।

गौरतलब है कि खुद का अखबार चलाने वाले के.के. सक्सेना भोपाल में कोरोना की पहली महिला मरीज के पिता हैं। उनकी बेटी 18 मार्च को ही लंदन से भोपाल आई थी और उसके नमूनों की जांच में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। लंदन से लौटने के बाद पत्रकार की बेटी 2 दिन तक अपने परिवार के साथ रही थी। स्थानीय पत्रकारों में सक्सेना को लेकर इसलिए नाराजगी है कि उन्होंने सरकार के बार-बार कहने के बावजूद भी विदेश से आई अपनी बेटी के बारे में सूचना नहीं दी, जिसकी वजह से अब कई लोगों पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है।

कुछ पत्रकारों की मांग है कि के.के. सक्सेना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने कई लोगों की जान को खतरे में डाला है। वहीं, कुछ को उनके प्रति सहानुभूति भी है, लेकिन वह अपने को खुशनसीब मान रहे हैं कि वो कमलनाथ की आखिरी प्रेस कांफ्रेंस में नहीं थे।

एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, ‘मैंने आखिरी वक्त पर पूर्व मुख्यमंत्री की प्रेस कांफ्रेंस में न जाने का फैसला लिया और अब मुझे इसकी खुशी है। इतना ही नहीं, उसी रात सक्सेना मुझे भोपाल बाजार में भी दिखाई दिए, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी। मेरे लिए तो दोनों ही संयोग बेहद अच्छे रहे’। इससे पहले बुधवार को स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम जब सक्सेना के आवास पर पहुंची तो उन्होंने एम्स चलने से इनकार कर दिया। बाद में जब कलेक्टर ने फटकार लगाई तब कहीं जाकर वह एम्स में भर्ती हुए।

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इस वजह से छत्तीसगढ़ विधानसभा में पत्रकारों के प्रवेश पर लगी रोक

कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए देशभर में ऐहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इसी बीच छत्त्तीसगढ़ विधानसभा में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
chhattisgarhassembly

कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए देशभर में ऐहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इसी बीच छत्त्तीसगढ़ विधानसभा में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है।

बता दें कि अभी छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। देश में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण को देखते हुए पहले विधानसभा की कार्यवाही को 25 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन गुरुवार यानी आज से विधानसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हो गई।  

विधानसभा के प्रमुख सचिव चंद्रशेखर गंगवाड़े ने बताया, कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी की गई एडवाइजरी व लॉक डाउन को ध्यान में रखते हुए पत्रकार दीर्घा को बंद कर दिया गया है। विधानसभा परिसर में पत्रकारों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। विधानसभा में केवल विधायक अफसर और विधानसभा सचिवालय के अफसर और कर्मचारी ही रहेंगे। विधानसभा की दर्शक दीर्घा को पहले ही बंद किया जा चुका है।

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 छत्तीसगढ़ सरकार ने पत्रकारों को दी यह सलाह, दिलाया भरोसा

कोरोना के खौफ के चलते जहां पूरा देश थम गया है। अधिकांश जनता अपने घरों में बैठी है, वहीं पत्रकार घूम-घूमकर खबरें जुटा रहे हैं, ताकि लोगों तक हर जरुरी जानकारी पहुंचाई जा सके

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
CM

कोरोना के खौफ के चलते जहां पूरा देश थम गया है। अधिकांश जनता अपने घरों में बैठी है, वहीं पत्रकार घूम-घूमकर खबरें जुटा रहे हैं, ताकि लोगों तक हर जरूरी जानकारी पहुंचाई जा सके। पत्रकारों के इस जज्बे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सराहा है। वहीं, राज्य सरकारें भी अपने-अपने स्तर पत्रकारों का ख्याल रखने का प्रयास कर रही हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने बाकायदा संदेश जारी करके पत्रकारों को महामारी की कवरेज के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। साथ ही इस विषम परिस्थिति में निर्बाध रूप से खबरें पहुंचाने के लिए उन्हें सराहा है।

जनसंपर्क आयुक्त तारन प्रकाश सिन्हा की तरफ से जारी किये गए इस संदेश में कहा गया है कि ‘आम जनता तक सही सूचना पहुंचाने और उन्हें जागरूक करने में सभी समाचार माध्यमों के प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में जब पूरा देश लॉकडाउन में है, आप दिन रात समाज और देश के प्रति अपने दायित्व को निभाने के लिए कठिन स्थितियों में परिश्रम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस पर चिंता जताई है कि कई बार पत्रकार अपने कर्तव्य की पूर्ति के क्रम में अपनी सुरक्षा के प्रति लापरवाह हो जाते हैं और इसका विपरीत प्रभाव उनके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। विश्व के कई पत्रकार कोरोना की कवरेज के दौरान इसकी चपेट में आ चुके हैं, लिहाजा सभी पत्रकारों से आग्रह है कि पूरी सावधानी बरतें।’

लॉकडाउन में सभी इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के पत्रकारों को छूट मिली हुई है, लेकिन इसके बावजूद पुलिस अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है। राजधानी दिल्ली में ही कई वरिष्ठ पत्रकारों को पुलिस की बर्बरता का सामना करना पड़ा है। इन घटनाओं को देखते हुए अन्य शहरों के पत्रकार भी आशंका में घिर गए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के पत्रकारों की इस आशंका को दूर करने का भी प्रयास किया है।

जनसंपर्क आयुक्त की ओर से जारी संदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि पत्रकारों को कवरेज के दौरान किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। संदेश में कहा गया है, ‘माननीय मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पत्रकारों को लॉकडाउन के दौरान समाचार संकलन में किसी तरह की कठनाई न आये’। हालांकि, अब पुलिस इसका कितना पालन करती है यह देखने वाली बात होगी।

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सामने आया पुलिसकर्मियों का अमानवीय चेहरा, रिपोर्टिंग के दौरान ET Now के पत्रकार को पीटा

देश में 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान मीडियाकर्मी को बहाल रखा गया है। बावजूद इसके रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकारों से बदसलूकी के मामले सामने आ रहे हैं।

Last Modified:
Thursday, 26 March, 2020
uttkarsh

कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। लेकिन इस दौरान कुछ जरूरी सेवाओं और लोगों को बहाल रखा गया है, जिनमें मीडियाकर्मी भी शामिल हैं। बावजूद इसके लॉकडाउन पर रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों द्वारा पत्रकारों से बदसलूकी के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा ही ताजा मामला महाराष्ट्र के ठाणे से सामने आया है।

बता दें कि अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘ईटी नाउ’ (ET Now) के डिप्टी न्यूज एडिटर उत्कर्ष चतुर्वेदी ने बुधवार को आरोप लगाया कि ठाणे जिले में लॉकडाउन पर रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की।

अपने आरोप में उत्कर्ष चतुर्वेदी ने कहा कि पुलिसकर्मिंयों को अपना प्रेस कार्ड भी दिखाया लेकिन पुलिस वालों ने फिर भी उनके साथ मारपीट की। उन्होंने बताया कि यह घटना ठाणे ग्रामीण पुलिस क्षेत्र के तहत पश्चिम उपनगर में दहिसर पुलिस चौकी के पास हुई।

उत्कर्ष चतुर्वेदी ने ट्विटर के जरिए मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को टैग करते हुए इस बात की जानकारी दी। उन्होंने घटना के बारे में ठाणे ग्रामीण के एसपी शिवाजी राठौड़ को भी सूचित किया है, लेकिन इस संबंध में की गयी कॉल और भेजे गए मैसेज का उन्होंने जवाब नहीं दिया।

 

 

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कमलनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस से क्यों मच रहा हड़कंप, जानें यहां

मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की पिछले दिनों भोपाल में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भोपाल ही नहीं, दिल्ली के भी कई पत्रकार शामिल थे।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 25 March, 2020
Last Modified:
Wednesday, 25 March, 2020
Press Conference

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे एक पत्रकार में कोरोना वायरस (COVID-19) की पुष्टि हुई है। पत्रकार की बेटी भी कोरोना पॉजीटिव मिली है। यह मामला सामने आते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ की पिछले दिनों भोपाल में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सभी पत्रकार अब क्वारंटाइन में जाएंगे। इस कॉन्फ्रेंस में भोपाल ही नहीं, दिल्ली के भी कई पत्रकार शामिल थे।  

बताया जाता है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों और मंत्रियों समेत तमाम नेता शामिल हुए थे। जिला प्रशासन की ओर से इन सभी लोगों की लिस्ट बनाई जा रही है और सभी को क्वारंटाइन में भेजा जाएगा। वहीं, यह मामला सामने आते ही पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने खुद को आइसोलेट कर लिया है।  

बता दें कि कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले 20 मार्च को अपने निवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसे कवर करने के लिए कई पत्रकार पहुंचे थे। इनमें वह पत्रकार भी शामिल था, जिसकी बेटी कोरोना से संक्रमित पाई गई है।

इस बीच खबर है कि कोरोना संक्रमित पत्रकार के संपर्क में आए मीडिया विभाग, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी से जुड़े अभय दुबे ने खुद को होम क्वारंटाइन कर लिया है। दुबे ने मुख्यमंत्री कमल नाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोरोना पीड़ित पत्रकार से हाथ मिलाया था।

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