फोटो गैलरी : वेदों का बोध कराती किताब 'Vedas–A New Perception' ने दी दस्तक

वेदों का बोध कराती किताब ‘वेदाज़- ए न्यू पर्सेप्शन’ ने मार्केट में दस्तक दे दी है...

Last Modified:
Friday, 26 October, 2018
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

वेदों का बोध कराती किताब वेदाज़- ए न्यू पर्सेप्शन ने मार्केट में दस्तक दे दी है। किताब का अनावरण केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया।


डॉ. सत्यकाम भारद्वाज वैदिक रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में CRIS (Center for Railway Information System an organisation under Ministry of Railways)के गवर्निंग काउंसिल के सदस्य विनीत गोयनका, सामाजिक कार्यकर्ता वपद्मश्री वीरेंद्र राज मेहता, द डिबेटिंग सोसायटी ऑफ इंडिया के फाउंडर व प्रेजिडेंट दीपक वर्मा, लेखिका विनीता बख्शी, साध्वी जया भारती, वरिष्ठ पत्रकार व भारतीय भाषा सम्मेलन के चेयरमैनडॉ. वेद प्रताप वैदिक, डॉ. सत्यकाम भारद्वाज वैदिक रिसर्च फाउंडेशन के फाउंडर दक्ष भारद्वाज,  श्रुति फाउंडेशन की फाउंडर डॉ. श्रुति नदा पोद्दार और वरिष्ठ पत्रकार भव्य श्रीवास्तव शामिल रहे। इन सब ने वैदिक शिक्षा के महत्व के बारे में चर्चा की, जिसे बिजनेसवर्ल्डव एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने मॉडरेट किया।


गौरतलब है कि किताब वेदाज़- ए न्यू पर्सेप्शनडॉ. सत्यकाम भारद्वाज द्वारा लिखी गई है। डॉ. एस.के. भारद्वाज (एमबीबीएस) विएना में ईएनटी स्पेशलिस्ट औक न्यूक्लियर फिज़िक्स के विद्वान हैं। 17 से अधिक भाषाओं में निपुणता के साथ उन्होंने वेदों पर विस्तृत शोध किया और निष्कर्ष निकाला कि वेद के मौलिक मंत्र विषय वस्तु, संदर्भ और वैज्ञानिक अभिव्यक्ति पर केंद्रित हैं। उनकी शोध सात दशकों तक चली और उनके जीवन के अंतिम चार दशकों में वो पूरी तरह से वेदों के सही अर्थ की अभिव्यक्ति करने में जुटे रहे। यह कॉफी टेबल बुक उनकी दशकों की शोध का परिचय देती है।

बता दें कि इस किताब में मानव इतिहास के सबसे पुराने और सबसे विशाल साहित्य के रूप में पूरे विश्व में स्थापितवेदों के बारे में बताया गया है और इसमें अनेक भारतीय ऋषियों के सामूहिक ज्ञान की गहनता और विस्तारहै।

किताब में डॉ. एस. के. भारद्वाज ने बताया है कि वेदों की भाषा, एक ऐसी भाषा थी, जो काफी व्यापक और लचीली थी और यह संस्कृत नहीं थी। यह वैदिक भाषा की प्रतिबंधक व व्युत्पत्ति थी। संस्कृत श्लोकों से अभिव्यक्ति करने वाले अनेक विद्वानों के कार्यों के परिणामस्वरूप वेदों के गैरतार्किक, गैरवैज्ञानिक और कई स्थानों पर हास्यास्पद अभिप्राय निकाल लिए गए हैं। इसके विपरीत, ‘वेदाज़- ए न्यू पर्सेप्शनमें वैदिक भाषा में अनुवाद के साथ मंत्रों, शब्दों और कहानियों को उदाहरणों द्वारा समझाया गया है।

तस्वीरों में देखें कार्यक्रम की झलकियां-















(फोटो: सुरेश गोला)

 

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