एन चंद्रशेखरन के बाद कौन बनेगा टाटा संस का चेयरमैन? सामने आए तीन नाम

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होगा। उनके बाद पद संभालने के लिए टी वी नरेंद्रन, सौरभ अग्रवाल और आशीष चौहान के नाम चर्चा में हैं।

Last Modified:
Saturday, 05 September, 2026
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टाटा संस (Tata Sons) के अगले चेयरमैन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने संभावित उम्मीदवारों की सूची को तीन नामों तक सीमित कर लिया है।

इनमें टाटा स्टील (Tata Steel) के सीईओ और एमडी टी वी नरेंद्रन, टाटा संस के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और ग्रुप सीएफओ (Group CFO) सौरभ अग्रवाल और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (National Stock Exchange) के एमडी और सीईओ आशीष चौहान शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, टी वी नरेंद्रन को टाटा ग्रुप (Tata Group) के भीतर से सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वह लंबे समय से ग्रुप से जुड़े हैं और टाटा स्टील जैसे बड़े कारोबार को संभालने का अनुभव रखते हैं।

सौरभ अग्रवाल भी इस रेस में बताए जा रहे हैं। उनका अनुभव इन्वेस्टमेंट बैंकिंग (Investment Banking), फाइनेंस (Finance) और ग्रुप स्तर पर पूंजी प्रबंधन (Capital Allocation) से जुड़ा है।

वहीं, आशीष चौहान बाहरी उम्मीदवार के तौर पर देखे जा रहे हैं। वह भारतीय वित्तीय बाजार (Financial Markets) के अनुभवी नाम हैं और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत से जुड़े अधिकारियों में रहे हैं। उनके पास कैपिटल मार्केट, टेक्नोलॉजी और संस्थागत प्रबंधन का लंबा अनुभव है।

हालांकि, चेयरमैन पद को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। टाटा संस का बोर्ड और कंपनी में नियंत्रक हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) इस नियुक्ति में अहम भूमिका निभाएंगे।

एन चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था और फिलहाल अपने दूसरे पांच साल के कार्यकाल में हैं। उन्होंने हाल ही में संकेत दिया था कि 20 फरवरी 2027 को कार्यकाल पूरा होने के बाद वह एक और टर्म नहीं लेंगे।

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बिबाबसु कुमार बने अडानी नवभारत डेवलपर्स के उपाध्यक्ष और संचार प्रमुख

बिबाबसु कुमार को अडानी नवभारत डेवलपर्स में उपाध्यक्ष और मीडिया एवं कॉरपोरेट संचार प्रमुख बनाया गया है। वह दो वर्षों से अधिक समय से कंपनी से जुड़े हैं और नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

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Thursday, 22 October, 2026
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बिबाबसु कुमार को अडानी नवभारत डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (Adani Navbharat Developers Private Limited) में उपाध्यक्ष और मीडिया एवं कॉरपोरेट संचार प्रमुख बनाया गया है। वह दो वर्षों से अधिक समय से कंपनी से जुड़े हुए हैं।

इससे पहले कुमार कंपनी में महाप्रबंधक और मीडिया एवं कॉरपोरेट संचार प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पदोन्नति के बाद वह संगठन के मीडिया और कॉरपोरेट संचार से जुड़े काम का नेतृत्व जारी रखेंगे।

नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा करते हुए कुमार ने कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने अडानी नवभारत डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड में उपाध्यक्ष और मीडिया एवं कॉरपोरेट संचार प्रमुख के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है।”

अडानी नवभारत डेवलपर्स से जुड़ने से पहले कुमार ने मीडिया और कॉरपोरेट संचार के क्षेत्र में काम किया है। उनका अनुभव मीडिया संबंधों और रणनीतिक संचार से जुड़े काम पर केंद्रित रहा है।

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जन्मदिन विशेष: अमित शाह ने कैसे बदला चुनावी प्रचार और राजनीतिक मार्केटिंग का अंदाज?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में उनकी पहचान लंबे समय से चर्चा में रही है।

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Thursday, 22 October, 2026
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में उनकी पहचान लंबे समय से चर्चा में रही है। राजनीतिक विश्लेषक उन्हें अक्सर भाजपा के आधुनिक दौर का ‘चाणक्य’ कहते हैं। हालांकि, विज्ञापन और संचार जगत के नजरिए से उनकी चुनावी रणनीति का एक अहम पहलू यह भी है कि उन्होंने भारत में राजनीतिक प्रचार के तरीके को किस तरह बदला। उनकी रणनीति में बड़े स्तर पर प्रचार करने के साथ-साथ अलग-अलग क्षेत्रों और मतदाता समूहों तक सीधे पहुंचने पर भी जोर रहा है।

अमित शाह की चुनावी रणनीति ने राजनीतिक प्रचार में आंकड़ों, सोशल मीडिया, जमीनी नेटवर्क और मतदाताओं से सीधे संपर्क की भूमिका को प्रमुख बनाया। इस मॉडल में केवल रैलियों, पोस्टरों और टीवी विज्ञापनों के जरिए संदेश पहुंचाना ही काफी नहीं था, बल्कि बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करना और स्थानीय जरूरतों के हिसाब से प्रचार करना भी महत्वपूर्ण रहा।

प्रधानमंत्री के प्रमुख रणनीतिकार

भाजपा के संगठनात्मक विस्तार में अमित शाह की भूमिका को पार्टी के प्रमुख नेताओं ने भी सराहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की संसदीय दल की बैठक में शाह के लंबे कार्यकाल और उनके योगदान की प्रशंसा की थी। अमित शाह ने 30 मई 2019 को प्रधानमंत्री मोदी के दूसरे कार्यकाल के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री का पद संभाला था।

राजनीतिक स्तर पर भाजपा के विस्तार के पीछे संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग क्षेत्रों में पार्टी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति को अहम माना जाता है। इस रणनीति में राष्ट्रीय स्तर के संदेश को स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं की जरूरतों के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया।

विज्ञापन जगत की भाषा में देखें तो यह तरीका किसी बड़े ब्रांड की मार्केटिंग रणनीति से मिलता-जुलता है। किसी ब्रांड को अलग-अलग बाजारों में अपनी पहचान बनाने के लिए स्थानीय लोगों की पसंद और जरूरतों को समझना पड़ता है। इसी तरह चुनावी प्रचार में भी अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के हिसाब से संदेश तैयार करना अहम होता है।

बूथ स्तर तक पहुंच और माइक्रो-टारगेटिंग

अमित शाह की चुनावी रणनीति का एक प्रमुख पहलू बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना रहा है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्य में, भाजपा ने जमीनी कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर जोर दिया।

इस रणनीति का मकसद केवल बड़े मंचों से भाषण देना नहीं था, बल्कि मतदान केंद्रों के स्तर तक पार्टी का संदेश पहुंचाना था। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय करने से पार्टी को स्थानीय मुद्दों पर संवाद करने और मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखने में मदद मिली।

सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप जैसे माध्यमों ने इस संपर्क को और आसान बनाया। इनके जरिए पार्टी समर्थकों और कार्यकर्ताओं तक संदेश पहुंचाना संभव हुआ। हालांकि, अलग-अलग बूथों पर तैनात लोगों और डिजिटल नेटवर्क से जुड़े आंकड़ों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना निश्चित संख्या के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

मार्केटिंग के नजरिए से इस तरह की रणनीति को माइक्रो-टारगेटिंग से जोड़कर देखा जा सकता है। इसमें एक ही संदेश सभी लोगों तक समान तरीके से पहुंचाने के बजाय अलग-अलग समूहों की जरूरतों, रुचियों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर संवाद किया जाता है।

नए राज्यों में पार्टी का विस्तार

किसी ब्रांड की तरह राजनीतिक दलों के लिए भी नए क्षेत्रों में अपनी पहुंच बनाना बड़ी चुनौती होती है। अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा ने पूर्वोत्तर भारत में अपना संगठन मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया। त्रिपुरा में 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत इसका एक प्रमुख उदाहरण बनी। इससे पहले राज्य में लंबे समय तक वामपंथी दलों का दबदबा रहा था।

पूर्वोत्तर में पार्टी के विस्तार के दौरान स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए प्रचार किया गया। साथ ही, पार्टी की राष्ट्रीय पहचान को भी बनाए रखा गया।

राजनीतिक मार्केटिंग के लिहाज से यह रणनीति बताती है कि किसी एक संदेश को हर क्षेत्र में एक ही रूप में लागू करना हमेशा कारगर नहीं होता। स्थानीय भाषा, मुद्दों और मतदाताओं की प्राथमिकताओं के अनुसार प्रचार में बदलाव करना जरूरी हो सकता है।

शेयर बाजार से सहकारी बैंक तक का सफर

अमित शाह की प्रबंधन क्षमता का एक पहलू उनके राजनीतिक जीवन से पहले के अनुभवों से भी जुड़ा है। राजनीति में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने से पहले वह शेयर ब्रोकर के रूप में काम कर चुके हैं। इस काम में बाजार के उतार-चढ़ाव, आंकड़ों और जोखिम का आकलन करना महत्वपूर्ण होता है।

इसके अलावा, वह अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक (ADCB) के सबसे कम उम्र के अध्यक्षों में शामिल रहे। उनके कार्यकाल के दौरान बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार की बात कही जाती है। बैंक के कामकाज में बदलाव और उसे लाभ की स्थिति में लाने का अनुभव उनके प्रबंधन संबंधी सफर का हिस्सा रहा है।

हालांकि, बैंक के प्रदर्शन में सुधार के पीछे की पूरी प्रक्रिया और उसके वित्तीय आंकड़ों का आकलन करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड देखना जरूरी है। इस अनुभव को सीधे चुनावी रणनीति की सफलता का कारण मानने के बजाय उनके पेशेवर और संगठनात्मक सफर के एक हिस्से के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

संगठन में पेशेवर प्रबंधन पर जोर

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अमित शाह के कार्यकाल में पार्टी संगठन को अधिक व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया। पार्टी के अलग-अलग कामों के लिए विशेष विभाग बनाना, नेताओं के दौरों की निगरानी और कार्यालयों में तकनीक के इस्तेमाल जैसे कदम संगठनात्मक प्रबंधन का हिस्सा रहे।

चुनावी प्रचार में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। सोशल मीडिया के जरिए समर्थक संदेशों को साझा कर सकते हैं और अपने स्तर पर प्रचार में हिस्सा ले सकते हैं। इस तरह प्रचार केवल पार्टी के आधिकारिक विज्ञापनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समर्थकों के नेटवर्क के जरिए भी आगे बढ़ता है।

हालांकि, आम लोगों या समर्थकों की ओर से साझा की गई सामग्री को हमेशा अधिक भरोसेमंद मानना सही नहीं है। उसकी विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें दी गई जानकारी कितनी सही है और उसे किस संदर्भ में साझा किया जा रहा है।

राजनीतिक प्रचार और विज्ञापन जगत के लिए क्या मायने?

अमित शाह की चुनावी रणनीति को राजनीतिक संचार और मार्केटिंग के अध्ययन के एक उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। इससे तीन प्रमुख बातें सामने आती हैं- जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल और स्थानीय जरूरतों के अनुसार संदेश तैयार करना।

इन तरीकों का असर केवल राजनीतिक प्रचार तक सीमित नहीं है। विज्ञापन और संचार जगत में भी कंपनियां अपने ग्राहकों को बेहतर समझने, अलग-अलग समूहों तक पहुंचने और डिजिटल माध्यमों के जरिए संवाद बढ़ाने की कोशिश करती हैं। हालांकि, राजनीतिक प्रचार और किसी उत्पाद की मार्केटिंग के उद्देश्य अलग होते हैं, इसलिए दोनों की तुलना सीमित दायरे में ही की जानी चाहिए।

अमित शाह की रणनीति का महत्व इस बात में है कि चुनावी प्रचार में संगठन, आंकड़ों और तकनीक के इस्तेमाल को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया। इससे भारतीय चुनावों में बूथ स्तर के नेटवर्क और डिजिटल प्रचार की भूमिका पर चर्चा और तेज हुई।

कुल मिलाकर, अमित शाह का चुनावी मॉडल भारतीय राजनीति में संगठनात्मक तैयारी, स्थानीय संपर्क और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। उनकी राजनीति से सहमति या असहमति से अलग, विज्ञापन और संचार जगत के लिए यह समझना उपयोगी है कि बड़े स्तर के संदेश को स्थानीय स्तर तक पहुंचाने में संगठन और तकनीक किस तरह भूमिका निभा सकते हैं। 

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सिटी में हेमानी भट्ट बनीं वाइस प्रेसिडेंट-चैनल मार्केटिंग

हेमानी भट्ट ने सिटी में वाइस प्रेसिडेंट – चैनल मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह पीडब्ल्यूसी इंडिया में एडवाइजरी सीनियर एसोसिएट और जेपीमॉर्गन चेस में एसोसिएट थीं।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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हेमानी भट्ट ने सिटी (Citi) में वाइस प्रेसिडेंट – चैनल मार्केटिंग के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। नई भूमिका में वह कंपनी की चैनल मार्केटिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालेंगी। हेमानी हाल ही में पीडब्ल्यूसी इंडिया (PwC India) में एडवाइजरी में सीनियर एसोसिएट के पद पर कार्यरत थीं। वह फरवरी 2026 में पीडब्ल्यूसी इंडिया से जुड़ी थीं।

इससे पहले हेमानी ने अगस्त 2023 से जुलाई 2025 तक जेपीमॉर्गन चेस एंड कंपनी (JPMorgan Chase & Co.) में एसोसिएट के रूप में काम किया। यहां उनकी भूमिका में मार्केटिंग रणनीति और विश्लेषण से जुड़े कार्य शामिल थे।

इससे पहले उन्होंने आईप्रॉस्पेक्ट (iProspect) में दो वर्षों से अधिक समय तक काम किया। यहां उन्होंने अप्रैल 2022 से अगस्त 2023 तक एसोसिएट मैनेजर और मई 2021 से सीनियर एग्जीक्यूटिव के रूप में जिम्मेदारियां संभालीं।

आईप्रॉस्पेक्ट में अपने कार्यकाल के दौरान हेमानी ने रणनीतिक सोच और बिजनेस-टू-बिजनेस यानी बी2बी (B2B) मार्केटिंग से जुड़ा अनुभव हासिल किया, जिससे मार्केटिंग के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता और मजबूत हुई। सिटी में नई भूमिका के साथ हेमानी वित्तीय सेवाओं, एडवाइजरी और मार्केटिंग रणनीति से जुड़े अपने अनुभव का इस्तेमाल चैनल मार्केटिंग को आगे बढ़ाने में करेंगी।

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सोनी को ₹47.39 लाख बकाया चुकाएगा Multicity Digital Consortium, TDSAT ने दिया आदेश

TDSAT ने Multicity Digital Consortium को Sony Pictures Networks India के 47.39 लाख रुपये के बकाया सब्सक्रिप्शन शुल्क का भुगतान करने का आदेश दिया है।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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इमरान फजल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।

दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण (TDSAT) ने मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर (MSO) Multicity Digital Consortium Pvt Ltd को Sony Pictures Networks India को 47.39 लाख रुपये के बकाया टीवी चैनल सब्सक्रिप्शन शुल्क का भुगतान करने का आदेश दिया है। न्यायाधिकरण ने इस रकम पर याचिका दाखिल करने की तारीख से वास्तविक भुगतान होने तक 9% सालाना की दर से साधारण ब्याज देने का भी निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राम कृष्ण गौतम की अध्यक्षता वाले न्यायाधिकरण ने कंपनी को आदेश की तारीख से दो महीने के भीतर यह रकम जमा करने को कहा है। न्यायाधिकरण ने मामले में याचिका को खर्च सहित मंजूर कर लिया।

यह विवाद Sony के टीवी चैनलों के प्रसारण से जुड़े सब्सक्रिप्शन शुल्क का भुगतान नहीं किए जाने को लेकर था। Culver Max Entertainment Pvt Ltd, जो अब Sony Pictures Networks India के नाम से जानी जाती है, ने तमिलनाडु और कर्नाटक में अपने टीवी चैनलों के वितरण के लिए Multicity Digital Consortium के साथ समझौता किया था।

न्यायाधिकरण ने कहा कि ब्रॉडकास्टर ने सब्सक्रिप्शन समझौते, बिलों, खातों के विवरण और सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों के जरिए अपना दावा साबित किया है।

18% ब्याज की मांग, 9% देने का आदेश

Sony की ओर से पहले 47.39 लाख रुपये के बकाया के साथ 18% सालाना ब्याज की मांग की गई थी। हालांकि, न्यायाधिकरण ने पिछले मामलों में अपनाई गई दर और मौजूदा वित्तीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 9% सालाना साधारण ब्याज देने का आदेश दिया।

न्यायाधिकरण के मुताबिक, Multicity Digital Consortium को कुल 47,39,820 रुपये जमा करने होंगे। इसमें तमिलनाडु के लिए करीब 41.72 लाख रुपये और कर्नाटक के लिए करीब 5.68 लाख रुपये का बकाया शामिल था।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

फैसले के अनुसार, Sony Pictures Networks India और Multicity Digital Consortium के बीच 25 फरवरी, 2019 को सब्सक्रिप्शन समझौता हुआ था। इसके तहत MSO को तमिलनाडु के डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (DAS) क्षेत्रों में Sony के टीवी चैनलों का प्रसारण करने की अनुमति दी गई थी।

बाद में इस समझौते को आगे बढ़ाया गया। जून 2020 में Multicity Digital Consortium के अनुरोध पर कर्नाटक को भी इसके अधिकृत क्षेत्र में शामिल कर लिया गया।

समझौते के तहत Sony लगातार अपने चैनलों के सिग्नल उपलब्ध करा रहा था और हर महीने सब्सक्रिप्शन शुल्क के बिल जारी कर रहा था। इन बिलों का भुगतान मिलने के 15 दिनों के भीतर किया जाना था।

Sony का आरोप था कि Multicity Digital Consortium को बिल मिलने के बावजूद उसने बकाया रकम का भुगतान नहीं किया। कई बार भुगतान के लिए कहने के बाद ब्रॉडकास्टर ने 26 फरवरी, 2021 को संबंधित प्रसारण नियमों के तहत सिग्नल बंद करने का नोटिस जारी किया। 

इसके बावजूद भुगतान नहीं होने पर 3 अप्रैल, 2021 को MSO के लिए चैनलों के सिग्नल बंद कर दिए गए। इसके बाद 6 मई, 2021 को एक और मांग नोटिस जारी किया गया।

बकाया रकम नहीं मिलने पर Sony ने TDSAT का रुख किया। उसने बकाया शुल्क और ब्याज की वसूली के साथ सिग्नल बंद होने के बाद अपने चैनलों के किसी भी अनधिकृत प्रसारण के खिलाफ राहत देने की मांग भी की।

दूसरे केबल ऑपरेटरों को लेकर उठाए सवाल

Multicity Digital Consortium ने Sony के दावे का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि ब्रॉडकास्टर ने अलग-अलग वितरकों के साथ कारोबार में समान शर्तें नहीं रखीं। MSO का कहना था कि लागू नियमों के तहत सभी वितरकों को समान अवसर मिलना चाहिए।

उसने आरोप लगाया कि Sony ने Siti Cable Networks और GTPL जैसे बड़े प्रतिस्पर्धी MSO के साथ तय शुल्क पर समझौते किए थे। इससे इन कंपनियों को स्थानीय केबल ऑपरेटरों को कम दरों पर सेवाएं देने का मौका मिला।

Multicity Digital Consortium के मुताबिक, इसके कारण कई स्थानीय केबल ऑपरेटरों ने उसका नेटवर्क छोड़कर दूसरे वितरकों की सेवाएं लेनी शुरू कर दीं। MSO ने दावा किया कि इससे उसे करीब 24 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसमें लगभग 3 करोड़ रुपये स्थानीय केबल ऑपरेटरों से बकाया सब्सक्रिप्शन शुल्क और 21 करोड़ रुपये ऐसे सेट-टॉप बॉक्स के शामिल थे, जिन्हें कथित तौर पर वापस नहीं किया गया।

MSO ने दलील दी कि इन परिस्थितियों ने उसके कारोबार को नुकसान पहुंचाया और भुगतान वसूलने की क्षमता को प्रभावित किया। उसने दूसरे MSO के साथ हुए समझौतों, मासिक ग्राहक रिपोर्ट और खातों के विवरण भी मांगे, ताकि अपने आरोपों को साबित कर सके।

हालांकि, न्यायाधिकरण ने कहा कि Multicity Digital Consortium अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेजी या मौखिक सबूत पेश नहीं कर सका। उसने संबंधित गवाहों को नहीं बुलाया और न ही जरूरी दस्तावेज हासिल करने या ब्रॉडकास्टर के गवाह से इन आरोपों पर जिरह करने के लिए उचित कदम उठाए।

न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि केवल लिखित जवाब में आरोप लगा देने से वे साबित नहीं हो जाते। उसने यह भी कहा कि स्थानीय केबल ऑपरेटरों से बकाया वसूलने और सेट-टॉप बॉक्स वापस लेने के मामले अलग हैं। MSO इन मामलों में संबंधित ऑपरेटरों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई कर सकता है, लेकिन इनका Sony के बकाया सब्सक्रिप्शन शुल्क से सीधा संबंध नहीं है।

SonyLIV को लेकर दी गई दलील भी खारिज

Multicity Digital Consortium ने यह भी दलील दी कि SonyLIV पर Sony के चैनलों और कार्यक्रमों की उपलब्धता से केबल टीवी सेवाओं के साथ प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई। उसके मुताबिक, दर्शक कई उपकरणों पर ओटीटी मंच के जरिए सामग्री देख सकते हैं, जिससे उसके केबल नेटवर्क को नुकसान हुआ।

इसके अलावा, MSO ने आरोप लगाया कि ब्रॉडकास्टर जरूरी अनुमतियों के बिना सीधे ग्राहकों तक लाइव टीवी चैनल पहुंचा रहा था। उसने केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के कथित उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया।

इसके जवाब में Sony ने कहा कि ओटीटी सेवाएं और केबल वितरकों के जरिए टीवी सिग्नल का प्रसारण अलग-अलग गतिविधियां हैं। उसने यह भी दलील दी कि लागू नियमों का पालन करते हुए ब्रॉडकास्टर अपने कार्यक्रम सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकता है।

न्यायाधिकरण ने पाया कि Multicity Digital Consortium कथित नियामकीय उल्लंघनों को साबित करने के लिए जरूरी नियमों और सहायक सबूतों को रिकॉर्ड पर नहीं रख सका। न्यायाधिकरण ने कहा कि इन आरोपों को साबित करने की जिम्मेदारी MSO की थी और वह ऐसा करने में नाकाम रहा।

फैसले में यह भी गौर किया गया कि समझौता जारी रहने के दौरान MSO ने कथित मूल्य अंतर या ओटीटी वितरण को लेकर कोई शिकायत करने का सबूत पेश नहीं किया। इसके उलट, उसने जून 2020 में अपने अधिकृत क्षेत्र में कर्नाटक को शामिल करने का अनुरोध किया था।

समझौते और बकाया रकम को माना सही

न्यायाधिकरण के सामने एक अहम सवाल यह भी था कि शुरुआती एक साल की अवधि के बाद सब्सक्रिप्शन समझौता जारी रहा था या नहीं। Multicity Digital Consortium ने समझौते की अवधि बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए थे।

हालांकि, न्यायाधिकरण ने दोनों पक्षों के बीच हुए ईमेल संवाद की जांच की। इसमें पाया गया कि Sony ने लगातार एक-एक महीने के लिए समझौते की अवधि बढ़ाए जाने की जानकारी दी थी। इसके अलावा, कर्नाटक को अधिकृत क्षेत्र में शामिल करने के अनुरोध को भी समझौते के जारी रहने का आधार माना गया।

न्यायाधिकरण ने कहा कि समझौता जारी था और Sony को तमिलनाडु तथा कर्नाटक के लिए बिल जारी करने का अधिकार था।

सुनवाई के दौरान MSO के वकील ने सब्सक्रिप्शन शुल्क का भुगतान किए जाने की दलील भी दी। हालांकि, कंपनी ने इस दावे के समर्थन में खातों का विवरण या भुगतान का कोई प्रमाण पेश नहीं किया।

दूसरी ओर, Sony ने समझौते, बिलों, खातों के विवरण, सिग्नल बंद करने के नोटिस और अपने वितरण बिक्री प्रबंधक की गवाही के जरिए बकाया रकम का दावा साबित किया।

इसी आधार पर न्यायाधिकरण ने Multicity Digital Consortium को अपने निदेशकों के माध्यम से 47,39,820 रुपये जमा करने का निर्देश दिया। इस रकम पर याचिका दाखिल करने की तारीख से वास्तविक भुगतान होने तक 9% सालाना साधारण ब्याज भी देना होगा। आदेश का पालन नहीं होने पर रकम की वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

इस फैसले से साफ होता है कि ब्रॉडकास्टर और वितरण कंपनियों के बीच सब्सक्रिप्शन शुल्क के विवाद में दस्तावेजी सबूत अहम भूमिका निभाते हैं। व्यावसायिक शर्तों में भेदभाव या नियमों के उल्लंघन जैसे आरोपों के आधार पर भुगतान रोकने के लिए उन्हें उचित सबूतों के साथ साबित करना जरूरी है।

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अतुल कपूर ने ‘प्रतियोगिता दर्पण’ को कहा अलविदा, 38 साल के सफर को बताया यादगार

अतुल कपूर ने 28 अक्टूबर 1988 को प्रतियोगिता दर्पण के साथ अपनी यात्रा शुरू की थी। वह यहां वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
Atul Kapoor

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली जानी-मानी पत्रिका प्रतियोगिता दर्पण (Pratiyogita Darpan) के साथ 38 साल तक जुड़े रहे अतुल कपूर ने यहां से अलविदा बोल दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर एक भावुक पोस्ट साझा कर इस लंबे सफर की यादें ताजा कीं और संस्थान, अपने मार्गदर्शकों व सहयोगियों के प्रति आभार जताया। अतुल कपूर ने 28 अक्टूबर 1988 को प्रतियोगिता दर्पण के साथ अपनी यात्रा शुरू की थी। वह यहां वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे।

अतुल कपूर ने अपनी पोस्ट में बताया कि प्रतियोगिता दर्पण के साथ उनका जुड़ाव महज एक पेशेवर रिश्ता नहीं रहा, बल्कि यह उनके जीवन का एक बेहद अहम अध्याय बन गया। इस दौरान उन्होंने कई अनुभव हासिल किए, चुनौतियों का सामना किया और अनेक लोगों के साथ दोस्ती व रिश्ते बनाए। उन्होंने कहा कि इस सफर ने उनके व्यक्तित्व को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अतुल कपूर ने बताया कि प्रतियोगिता दर्पण को करियर डेवलपमेंट श्रेणी की नंबर-1 मैगजीन बनाने का सपना लेकर काम शुरू किया गया था। यह एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य था, लेकिन समर्पण, निरंतर प्रयास, टीमवर्क और भरोसे के दम पर इसे हकीकत में बदला गया। उनके मुताबिक, यह सफर किसी संस्थान को खड़ा करने और आगे बढ़ाने की एक मिसाल बन सकता है, जिसमें नए विचारों को अपनाने के साथ उन्हें लागू करने का साहस भी शामिल है।

उन्होंने प्रतियोगिता दर्पण के दिवंगत मार्गदर्शक महेंद्र एस. जैन को दूरदर्शी और कुशल उद्यमी बताते हुए उनके काम करने के तरीके को याद किया। अतुल कपूर के अनुसार, महेंद्र जैन की सबसे खास बात उनकी निर्णय लेने की गति थी। वह किसी विचार या चुनौती पर कुछ ही सेकंड या मिनट में फैसला कर लेते थे कि उस पर आगे बढ़ना है या नहीं। अतुल कपूर ने कहा कि उनकी इसी स्पष्टता ने संस्थान की कार्यसंस्कृति को आकार दिया। उनके नेतृत्व में चुनौतियां अवसरों में बदलीं और टीमवर्क के जरिए कई उपलब्धियां हासिल हुईं।

अतुल कपूर ने अपने युवा बॉस राहुल जैन के साथ काम करने के अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने राहुल जैन के समर्पण, ऊर्जा और दूरदृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि इन गुणों ने उन्हें संस्थान के भविष्य और उससे जुड़े मूल्यों को लेकर भरोसा दिया है।

अपनी पोस्ट के अंत में अतुल कपूर ने कहा कि वह इस लंबे जुड़ाव से विदा लेते हुए इसे किसी अंत के रूप में नहीं देखते, बल्कि उनके मन में इसके लिए गहरा आभार है। उन्होंने संस्थान की ओर से मिले भरोसे, अवसरों, सीख और उन सभी लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की, जो इस यात्रा में उनके साथ रहे।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता दर्पण के साथ बिताए 38 सालों ने उन्हें केवल करियर ही नहीं दिया, बल्कि ऐसी यादें, रिश्ते और अनुभव भी दिए, जिन्हें वह हमेशा संजोकर रखेंगे। उनके मुताबिक, कुछ सफर खत्म हो जाते हैं, लेकिन कुछ हमेशा के लिए आपके साथ रह जाते हैं। प्रतियोगिता दर्पण के साथ उनका सफर भी ऐसा ही रहेगा।

प्रतियोगिता दर्पण से जुड़ने से पहले अतुल कपूर ने समकल्पा एंटरप्राइजेज (SAMKALPA ENTERPRISES) में मार्केटिंग हेड के रूप में काम किया था। वह फरवरी 1985 से फरवरी 1987 तक इस पद पर रहे। इससे पहले, जून 1983 से फरवरी 1985 तक वह एस्कॉर्ट्स लिमिटेड (Escorts Limited) में इंडस्ट्रियल इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे।

इसके अलावा, उन्होंने जून 2014 से जून 2022 तक ए क्यूब करियर सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (A CUBE CAREER SOLUTIONS PRIVATE LIMITED) में भी काम किया। अतुल कपूर ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की शिक्षा हासिल की। उनके करियर की शुरुआत इंजीनियरिंग के क्षेत्र से हुई, जिसके बाद उन्होंने मार्केटिंग और फिर प्रतियोगिता दर्पण में लंबी पेशेवर पारी खेली।

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Jio Platforms IPO: पहले दिन 3.22 गुना सब्सक्राइब, संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग

जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के आईपीओ (IPO) को पहले दिन निवेशकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। 21 अक्टूबर 2026 को बोली लगाने के पहले दिन यह आईपीओ कुल 3.22 गुना सब्सक्राइब हुआ।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के आईपीओ (IPO) को पहले दिन निवेशकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। 21 अक्टूबर 2026 को बोली लगाने के पहले दिन यह आईपीओ कुल 3.22 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसमें सबसे ज्यादा दिलचस्पी संस्थागत निवेशकों यानी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) की रही। इस श्रेणी में शेयरों के लिए 9.02 गुना बोलियां मिलीं। वहीं, खुदरा निवेशकों की ओर से पहले दिन उतनी मांग नहीं दिखी और यह श्रेणी 0.69 गुना सब्सक्राइब हुई।

दिन के दौरान आईपीओ को मिलने वाली बोलियों में लगातार बढ़ोतरी हुई। दोपहर 12:33 बजे तक कुल सब्सक्रिप्शन 1.51 गुना था, जो शाम 5:30 बजे तक बढ़कर 3.22 गुना हो गया। छोटे गैर-संस्थागत निवेशकों (sHNI) की श्रेणी 1.31 गुना और बड़े गैर-संस्थागत निवेशकों (bHNI) की श्रेणी 1.74 गुना सब्सक्राइब हुई। कंपनी के कर्मचारियों के लिए रखे गए हिस्से को भी 1.31 गुना बोलियां मिलीं।

किस श्रेणी में कितनी बोलियां मिलीं?

पहले दिन संस्थागत निवेशकों ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। QIB श्रेणी में उपलब्ध शेयरों के मुकाबले 9.02 गुना बोलियां मिलीं। बड़े गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी 1.74 गुना और छोटे गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी 1.31 गुना सब्सक्राइब हुई।

खुदरा निवेशकों की श्रेणी में सब्सक्रिप्शन 0.69 गुना रहा। इसका मतलब है कि पहले दिन इस श्रेणी में उपलब्ध शेयरों के मुकाबले पूरी बोलियां नहीं मिलीं। हालांकि, आईपीओ की बोली प्रक्रिया 23 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगी।

दिनभर में कैसे बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी?

आईपीओ को दिन के दूसरे हिस्से में तेजी से बोलियां मिलीं। दोपहर 12:33 बजे कुल सब्सक्रिप्शन 1.51 गुना था। दोपहर 2:30 बजे यह बढ़कर 2.36 गुना और शाम 4:30 बजे 3.18 गुना हो गया। कारोबार के अंत में यह आंकड़ा 3.22 गुना पहुंच गया।

इस दौरान QIB श्रेणी का सब्सक्रिप्शन 12:33 बजे के 4.13 गुना से बढ़कर शाम 5:30 बजे 9.02 गुना हो गया। इससे साफ है कि पहले दिन आईपीओ को मिली कुल मांग में संस्थागत निवेशकों की बड़ी भूमिका रही।

कितना है प्राइस बैंड और कब तक लगा सकते हैं बोली?

Jio Platforms के आईपीओ का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये प्रति शेयर रखा गया है। निवेशक कम से कम 12 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं। यह आईपीओ 21 अक्टूबर को खुला है और 23 अक्टूबर 2026 को बंद होगा।

क्या करती है Jio Platforms?

Jio Platforms भारत की एक टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो डिजिटल सेवाओं और देशभर में डिजिटल कनेक्टिविटी के कारोबार से जुड़ी है। इसकी प्रमुख सहायक कंपनी Reliance Jio Infocomm Limited (RJIL) के जरिए यह मोबाइल कनेक्टिविटी और अन्य डिजिटल सेवाएं देती है।

कंपनी के मुताबिक, 30 जून 2026 तक उसके 533.3 मिलियन यानी करीब 53.33 करोड़ ग्राहक थे। कंपनी का दावा है कि उसके पास ऐसा 5G स्टैंडअलोन टेक्नोलॉजी सिस्टम है, जिसे देशभर में बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। कंपनी ने 4G, 5G और 6G तकनीकों से जुड़े 7,220 पेटेंट आवेदन भी दाखिल किए हैं।

Jio Platforms की स्थापना 2019 में हुई थी। कंपनी का नेतृत्व मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश धीरूभाई अंबानी और सीईओ अनंत मुकेश अंबानी कर रहे हैं।

तीन साल में बढ़ी कंपनी की कमाई

कंपनी के वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 से वित्त वर्ष 2026 के बीच परिचालन से होने वाली आय और मुनाफे में बढ़ोतरी हुई है।

वित्त वर्ष 2024 में कंपनी की परिचालन आय 1,09,558.10 करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर 1,28,218.40 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026 में 1,46,885.30 करोड़ रुपये हो गई।

इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध मुनाफा यानी प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) वित्त वर्ष 2024 के 21,423.20 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 26,109 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2026 में 30,049.10 करोड़ रुपये हो गया।

वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का कुल राजस्व 1,49,759.10 करोड़ रुपये और कर से पहले मुनाफा 40,353.10 करोड़ रुपये रहा। इसी वित्त वर्ष में कंपनी का EBITDA मार्जिन 51.91% और नेट लीवरेज 0.36 गुना रहा।

आईपीओ से जुटाई रकम का कहां होगा इस्तेमाल?

आईपीओ से मिलने वाली शुद्ध रकम में से 27,500 करोड़ रुपये तक का इस्तेमाल कंपनी की महत्वपूर्ण सहायक इकाई RJIL के कुछ कर्जों को पूरा या आंशिक रूप से चुकाने के लिए प्रस्तावित है। इसमें बाहरी वाणिज्यिक कर्ज यानी ECB भी शामिल हैं।

कंपनी के मुताबिक, कर्ज चुकाने से उस पर कर्ज का बोझ और कर्ज से जुड़ी लागत घटाने में मदद मिल सकती है। इससे कंपनी को 5G, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड और कारोबार से जुड़ी डिजिटल सेवाओं में निवेश जारी रखने में भी मदद मिल सकती है।

आईपीओ से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें कारोबार बढ़ाने की योजनाएं, नए कारोबार में निवेश, पूंजीगत खर्च, कार्यशील पूंजी की जरूरतें, मार्केटिंग क्षमता मजबूत करना और दूसरी कारोबारी जरूरतें शामिल हैं।

निवेशकों के लिए क्या हैं प्रमुख जोखिम?

कंपनी के आईपीओ से जुड़े दस्तावेजों में कुछ जोखिमों का भी जिक्र किया गया है। इनमें सबसे प्रमुख जोखिम RJIL पर कंपनी की निर्भरता है। वित्त वर्ष 2026 में RJIL का योगदान कंपनी के समेकित परिचालन राजस्व में करीब 87.74%, EBITDA में 94.88% और शुद्ध मुनाफे में 93.76% था। यानी कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में RJIL की बड़ी भूमिका है।

इसके अलावा, कंपनी पर कर्ज का बोझ भी एक अहम पहलू है। 30 जून 2026 तक कंपनी के कुल फंड आधारित कर्ज 6,21,375 मिलियन रुपये थे। इनमें 2,99,171 मिलियन रुपये के बाहरी वाणिज्यिक कर्ज और 2,06,137 मिलियन रुपये के एक्सपोर्ट क्रेडिट एजेंसी लोन शामिल थे।

दस्तावेजों में टेलीकॉम लाइसेंस और स्पेक्ट्रम के नवीनीकरण से जुड़े खर्चों का भी उल्लेख है। RJIL का एकीकृत लाइसेंस अक्टूबर 2033 में नवीनीकरण के लिए देय है, जबकि उसके स्पेक्ट्रम का बड़ा हिस्सा 2041 से 2042 के बीच समाप्त होगा। इनके नवीनीकरण या नए स्पेक्ट्रम के लिए भविष्य में बड़ी रकम खर्च करनी पड़ सकती है।

कंपनी का कारोबार टेलीकॉम क्षेत्र के नियमों और नियामकीय निगरानी के अधीन भी है। इसके अलावा, प्रीपेड कनेक्टिविटी सेवाओं के वितरण के लिए Reliance Retail Limited पर निर्भरता भी एक जोखिम के रूप में बताई गई है।

कुल मिलाकर, Jio Platforms के आईपीओ के पहले दिन संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग देखने को मिली। हालांकि, खुदरा निवेशकों की श्रेणी में अभी पूरा सब्सक्रिप्शन नहीं हुआ है। आईपीओ के अंतिम नतीजे 23 अक्टूबर को बोली प्रक्रिया बंद होने के बाद स्पष्ट होंगे। 

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Tips Music का दमदार प्रदर्शन, चेयरमैन कुमार तौरानी ने बताया कंपनी के आगे का प्लान

म्यूजिक कंपनी Tips Music के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर कुमार तौरानी ने कहा है कि कंपनी का पूरा ध्यान नए गानों और अपने पुराने म्यूजिक कलेक्शन (कैटलॉग) को मजबूत बनाने पर है।

Last Modified:
Thursday, 22 October, 2026
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म्यूजिक कंपनी Tips Music के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर कुमार तौरानी ने कहा है कि कंपनी का पूरा ध्यान नए गानों और अपने पुराने म्यूजिक कलेक्शन (कैटलॉग) को मजबूत बनाने पर है। कंपनी भविष्य के कारोबार को ध्यान में रखकर नए कंटेंट में निवेश कर रही है और इसके लिए केवल तिमाही के मुनाफे पर ध्यान देने के बजाय लंबे समय की योजना पर काम कर रही है।

15 अक्टूबर 2026 को कंपनी की दूसरी तिमाही और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के नतीजों को लेकर हुई कॉन्फ्रेंस कॉल में कुमार तौरानी ने कारोबार की रणनीति, नए गानों की खरीद, YouTube Shorts से कमाई, OTT प्लेटफॉर्म, संगीत के बदलते बाजार और कंपनी की आगे की योजनाओं पर बात की। कंपनी ने 21 अक्टूबर को इस कॉन्फ्रेंस कॉल का ट्रांसक्रिप्ट शेयर बाजार में जमा कराया।

कुमार तौरानी ने कहा कि Tips Music संगीत कारोबार में नए अवसर तलाश रही है। उनके मुताबिक, आने वाले वर्षों में संगीत की कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं। कंपनी की योजना नए गानों के साथ अपने पुराने गानों को भी अलग-अलग मंचों पर बेहतर तरीके से पेश करने की है।

नए गानों में निवेश जारी रखेगी कंपनी

कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान निवेशकों ने सवाल किया कि कंपनी नए गानों में कितना निवेश करेगी और क्या वह पुराने गानों के रीमेक पर ज्यादा निर्भर है। इस पर कुमार तौरानी ने कहा कि कंपनी नए कंटेंट में भी निवेश कर रही है और उसका ध्यान भविष्य के कारोबार को सुरक्षित रखने पर है।

उन्होंने फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' का उदाहरण देते हुए बताया कि इस फिल्म के सभी गाने नए हैं और ए.आर. रहमान ने उन्हें तैयार किया है। कंपनी ने इस फिल्म के सभी गाने नहीं खरीदे हैं, बल्कि जहां उसके पुराने गानों को दोबारा इस्तेमाल किया गया है, वहां एक या अधिकतम दो गानों तक ही ऐसा किया गया है। बाकी गाने नए हैं।

उन्होंने पंजाबी फिल्म 'इश्कनामा' का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, इस फिल्म के सभी सात गाने नए हैं और बी प्राक तथा जानी जैसे कलाकार इससे जुड़े हैं। इस म्यूजिक को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

कुमार तौरानी ने कहा कि कंपनी जानती है कि उसे नए गानों पर ध्यान देना होगा, ताकि भविष्य में भी उसका कारोबार मजबूत बना रहे।

उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी नए म्यूजिक के लिए फिल्म निर्माताओं के साथ बातचीत कर रही है। कुछ निर्माताओं के साथ बातचीत आगे बढ़ने पर उनके ऑडियो राइट्स खरीदने के समझौते किए जा सकते हैं, जिनकी जानकारी कंपनी बाद में देगी।

कंटेंट पर पूरे साल 90-100 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना

कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) सुषांत दलमिया ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंटेंट पर 90 करोड़ से 100 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बरकरार है। पहली छमाही में इस मद में करीब 71 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पहली छमाही में कंटेंट पर खर्च ज्यादा रहा, जबकि दूसरी छमाही में यह कम रहने की उम्मीद है।

कुमार तौरानी ने समझाया कि कंपनी आम तौर पर अपने कुल राजस्व का करीब 20% कंटेंट में निवेश करने की योजना रखती है। हालांकि, अगर बाजार में अच्छा म्यूजिक खरीदने का अवसर मिलता है और इसके लिए खर्च 25% या 28% तक भी पहुंचता है, तो कंपनी उस पर विचार कर सकती है।

उन्होंने कहा कि कंपनी केवल खर्च को सीमित रखने के लिए अच्छा कंटेंट खरीदने का मौका नहीं छोड़ेगी। 'इश्कनामा' का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इसकी कीमत थोड़ी ज्यादा होने के बावजूद कंपनी ने इसे खरीदा, क्योंकि उसे इससे जुड़े लोगों और उनके काम पर भरोसा था।

कुमार तौरानी ने यह भी कहा कि Tips Music की एक खास बात यह है कि कंपनी कंटेंट की पूरी लागत को उसी वित्त वर्ष में खर्च के रूप में दर्ज करती है। इससे भविष्य में पुराने कंटेंट के कारण अचानक बड़े स्तर पर खर्च दर्ज करने का जोखिम कम रहता है।

उनके मुताबिक, कंपनी चाहती है कि नए कंटेंट में निवेश से कारोबार आगे बढ़े और आने वाले वर्षों में भी कमाई के अवसर बने रहें।

पुराने गानों से मिल रही है कंपनी को मजबूती

कुमार तौरानी ने कहा कि Tips Music का पुराना म्यूजिक कलेक्शन अब भी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। कंपनी पुराने गानों को नए अंदाज में पेश करने के अवसर भी तलाशती है। इसके लिए वह फिल्म निर्माताओं के साथ मिलकर काम करती है।

उन्होंने कहा कि कंपनी का मानना है कि आने वाले 15 से 20 साल तक भी संगीत कारोबार में अच्छे अवसर बने रह सकते हैं। हालांकि, इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), नए डिजिटल मंच, सदस्यता आधारित सेवाएं और छोटे वीडियो जैसे प्रारूप कारोबार का तरीका बदल सकते हैं।

कुमार तौरानी ने सार्वजनिक कार्यक्रमों और लाइव शो से जुड़ी कमाई की संभावनाओं पर भी बात की। उन्होंने प्रधानमंत्री की ओर से कार्यक्रमों के कारोबार को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने के लक्ष्य का जिक्र किया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर ऐसे कारोबार में संगीत की हिस्सेदारी 5% से 10% भी होती है, तो इससे करीब 2,500 करोड़ से 5,000 करोड़ रुपये तक का बाजार बन सकता है। यह कुमार तौरानी की ओर से संभावित बाजार का उदाहरण था, न कि Tips Music की कमाई का अनुमान।

उन्होंने Spotify की ओर से भारत में सदस्यता बाजार की संभावनाओं का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, अगर बड़ी संख्या में लोग संगीत सुनने के लिए भुगतान करने लगें, तो इससे उद्योग के लिए कमाई के नए अवसर बनेंगे।

कंपनी की ग्रोथ पर क्या बोले कुमार तौरानी?

कॉन्फ्रेंस कॉल में एक निवेशक ने कंपनी के भविष्य के विकास और उसके पुराने 30% ग्रोथ लक्ष्य को लेकर सवाल किया। इस पर कुमार तौरानी ने कहा कि कंपनी की योजना फिर से 30% की वृद्धि हासिल करने की है, लेकिन वह अपने अनुमानों को लेकर सावधानी बरतना चाहती है।

उन्होंने कहा कि कंपनी का प्रबंधन कम वादे करके बेहतर नतीजे देने में विश्वास रखता है। उनके मुताबिक, कंपनी का परिवार में करीब 64% हिस्सा है और प्रबंधन कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह काम कर रहा है।

उन्होंने बताया कि कंपनी की टीम रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 7-8 बजे तक काम करती है। उनका कहना था कि 20% का लक्ष्य तय करने का यह मतलब नहीं है कि कंपनी 20% तक ही सीमित रहना चाहती है। अगर कारोबार में इससे ज्यादा वृद्धि की गुंजाइश बनती है, तो कंपनी उसके लिए भी प्रयास करेगी।

वित्तीय नतीजों के बारे में CFO सुषांत दलमिया ने बताया कि दूसरी तिमाही में कंपनी का राजस्व 120 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के 89.2 करोड़ रुपये से 35% ज्यादा है। पहली छमाही में राजस्व 227 करोड़ रुपये रहा, जिसमें सालाना आधार पर 28% की वृद्धि हुई।

दूसरी तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग EBITDA 84.64 करोड़ रुपये और टैक्स के बाद मुनाफा 65.5 करोड़ रुपये रहा। पहली छमाही में टैक्स के बाद मुनाफा 109 करोड़ रुपये था।

कुमार तौरानी ने यह भी बताया कि कंपनी ने 44.44 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके अलावा, कंपनी के बोर्ड ने प्रति शेयर 6.5 रुपये के अंतरिम लाभांश की घोषणा की थी।

YouTube Shorts की डील पर क्या है अपडेट?

कॉन्फ्रेंस कॉल में YouTube Shorts से कमाई के लिए चल रही बातचीत पर भी सवाल पूछा गया। कुमार तौरानी ने कहा कि बातचीत में समय लग रहा है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि इसका ज्यादातर हिस्सा मौजूदा तिमाही में पूरा हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि समझौते के पूरा होने के बाद इससे होने वाली कमाई के योगदान का आकलन किया जा सकेगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इससे कंपनी की आय में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है।

कंपनी के CFO सुषांत दलमिया ने बताया कि पहली छमाही में कंपनी के कुल राजस्व में डिजिटल कारोबार की हिस्सेदारी करीब 73% रही। पूरे साल डिजिटल राजस्व की हिस्सेदारी 70% से 75% के दायरे में रहने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि कंपनी की वृद्धि नए गानों और पुराने म्यूजिक कलेक्शन, दोनों से आ रही है। राजस्व में बढ़ोतरी का मुख्य कारण म्यूजिक की खपत और स्ट्रीमिंग की संख्या बढ़ना है।

कुमार तौरानी ने YouTube पर प्रति स्ट्रीम मिलने वाली कमाई के बारे में कहा कि कंपनी को फिलहाल इसमें बड़ी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अगर प्रति स्ट्रीम 0.05 रुपये की दर मिलती है, तो ज्यादा स्ट्रीम होने पर कुल कमाई बढ़ सकती है, भले ही प्रति स्ट्रीम दर समान रहे।

उन्होंने कहा कि कंपनी का ध्यान अपने गानों की पहुंच बढ़ाने, नए म्यूजिक को बढ़ावा देने और पुराने गानों को बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करने पर है।

हालांकि, CFO ने यह भी बताया कि भुगतान वाली सदस्यता सेवाओं के बढ़ने से प्रति स्ट्रीम मिलने वाली कमाई को फायदा हो सकता है, क्योंकि ऐसे मॉडल में दरें ज्यादा हो सकती हैं।

OTT और छोटे शहरों में सदस्यता बढ़ने की उम्मीद

कुमार तौरानी ने कहा कि फिलहाल OTT और संगीत मंचों का ध्यान बड़े शहरों पर ज्यादा है, लेकिन कंपनी चाहती है कि ये सेवाएं छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों तक भी पहुंचें।

उन्होंने करीब 20 साल पहले मोबाइल कंपनियों की रिंगबैक टोन सेवा का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, उस समय इस सेवा से मोबाइल कंपनियों को सदस्यता के जरिए बड़ी कमाई होती थी। उन्होंने कहा कि संगीत की सदस्यता सेवाओं में भी ऐसे अवसर तलाशे जा सकते हैं।

उनका मानना है कि टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों में भुगतान करके संगीत सुनने की आदत बढ़ने से उद्योग को फायदा हो सकता है। कंपनी इस दिशा में OTT मंचों को प्रोत्साहित कर रही है।

CFO के मुताबिक, भुगतान वाली सदस्यता से आने वाला राजस्व कंपनी के डिजिटल कारोबार का करीब 10% से 15% है।

Warner Music के साथ साझेदारी और Instagram Reels

Instagram Reels और Warner Music के साथ साझेदारी को लेकर पूछे गए सवाल पर कुमार तौरानी ने बताया कि Tips Music, Warner Music के साथ साझेदारी के तहत काम करती है। Warner वैश्विक स्तर पर सौदों के लिए बातचीत करता है और मिलने वाली कमाई कंपनी तक पहुंचाता है।

CFO ने बताया कि Warner के साथ मौजूदा समझौते का नवीनीकरण वित्त वर्ष 2027-28 में होना है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के राजस्व में Warner की हिस्सेदारी करीब 25% से 30% के दायरे में है। पहली छमाही में इस साझेदारी से होने वाली कमाई में बढ़ोतरी हुई है।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि YouTube Shorts की बातचीत अभी पूरी नहीं हुई है। वहीं, Warner के साथ मौजूदा साझेदारी के तहत अन्य मंचों से होने वाली कमाई समझौते के अनुसार जारी है।

हर साल पांच से छह फिल्मों के म्यूजिक राइट्स खरीदने की योजना

कुमार तौरानी ने कहा कि कंपनी हर साल कम से कम पांच से छह फिल्मों के म्यूजिक राइट्स हासिल करने की योजना पर काम कर रही है। इनमें चार से पांच हिंदी फिल्में और दो से तीन अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्में शामिल करने का लक्ष्य उन्होंने बताया।

उन्होंने कहा कि कंपनी नए गानों की गुणवत्ता पर ध्यान देगी। उनके मुताबिक, संगीत के बारे में लंबे समय से कहा जाता रहा है कि लोगों की पसंद बदल रही है, लेकिन रोमांटिक, दुख भरे और पार्टी गाने आज भी लोकप्रिय हैं।

उन्होंने कहा कि अगर गाना अच्छा है, तो उसे जेनरेशन Z, मिलेनियल्स और वरिष्ठ नागरिकों समेत अलग-अलग उम्र के लोग पसंद कर सकते हैं। इसलिए कंपनी की प्राथमिकता अच्छी गुणवत्ता वाला म्यूजिक तैयार करना और खरीदना है।

नए CEO की तलाश अब भी जारी

कंपनी में नए CEO की नियुक्ति को लेकर पूछे गए सवाल पर कुमार तौरानी ने कहा कि प्रबंधन इस नियुक्ति को लेकर गंभीर है और तलाश जारी है। हालांकि, उन्हें अभी तक उद्योग में उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि सही व्यक्ति मिलने पर कंपनी जल्द नियुक्ति करेगी।

म्यूजिक कारोबार में आगे भी अवसर देख रही है कंपनी

कुमार तौरानी की बातों से स्पष्ट है कि Tips Music नए गानों में निवेश जारी रखते हुए अपने पुराने म्यूजिक कलेक्शन से भी कमाई बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी डिजिटल मंचों पर बढ़ती खपत, YouTube Shorts से संभावित कमाई, भुगतान वाली सदस्यता और छोटे शहरों में संगीत सेवाओं के विस्तार को भविष्य के अवसरों के तौर पर देख रही है।

हालांकि, प्रबंधन ने कंटेंट पर पूरे साल के खर्च को 90 करोड़ से 100 करोड़ रुपये के दायरे में रखने की बात दोहराई है और ग्रोथ के अनुमानों को लेकर सावधानी बरतने का संकेत दिया है। कंपनी के मुताबिक, उसका लक्ष्य मौजूदा कारोबार को मजबूत करने के साथ-साथ नए म्यूजिक और नए मंचों के जरिए भविष्य की कमाई के रास्ते तैयार करना है।

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टीवी चैनलों को सूचना-प्रसारण मंत्रालय की सख्त हिदायत, AI व अपराध की खबरों पर बरतें सावधानी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को कार्यक्रम संहिता (Programme Code) का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी है।

Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को कार्यक्रम संहिता (Programme Code) का सख्ती से पालन करने की हिदायत दी है। मंत्रालय ने अपराध की सनसनीखेज खबरें दिखाने, परेशान करने वाले दृश्यों को बार-बार प्रसारित करने, लाइव बहसों में भड़काऊ बयान और खबरों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है।

21 अक्टूबर 2026 को जारी सलाह में मंत्रालय ने कहा है कि टीवी चैनलों को केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करना होगा। नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित चैनलों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

मंत्रालय की यह सलाह इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) की टिप्पणियों के बाद आई है। इस समिति ने पाया कि कई टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाली सामग्री हमेशा कार्यक्रम संहिता की भावना के अनुरूप नहीं होती। समिति ने यह भी देखा कि एक जैसे विषयों पर कई चैनल मिलते-जुलते समाचार और दृश्य प्रसारित कर रहे हैं।

समिति ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को उनके कानूनी दायित्वों की याद दिलाने की सिफारिश की थी। साथ ही, उसने कहा कि टीवी प्रसारण के जरिए अनुचित व्यवहार और भाषा को सामान्य नहीं बनाया जाना चाहिए।

आतंकी अभियानों की लाइव कवरेज पर रोक

मंत्रालय ने साफ किया है कि सुरक्षा बलों की ओर से चलाए जा रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों की लाइव कवरेज पर रोक है। केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों के नियम 6(1)(p) के तहत ऐसे अभियानों के दौरान मीडिया कवरेज केवल अधिकृत अधिकारी की ओर से समय-समय पर दी जाने वाली जानकारी तक सीमित रहनी चाहिए। अभियान खत्म होने तक इस नियम का पालन करना होगा।

मंत्रालय ने चैनलों को यह भी सलाह दी है कि जरूरत पड़ने पर वीडियो और तस्वीरों पर तारीख व समय जरूर दिखाएं। इससे दर्शकों को पहले रिकॉर्ड किए गए दृश्यों को लाइव प्रसारण समझने की गलतफहमी नहीं होगी।

इस संबंध में मंत्रालय ने 12 जून 2024 और 26 अप्रैल 2025 को जारी अपनी पिछली सलाह का भी जिक्र किया है।

अपराध और हिंसा की खबरों में बरतें सावधानी

मंत्रालय ने टीवी चैनलों को हिंसक, डरावने और परेशान करने वाले दृश्य दिखाते समय सावधानी बरतने को कहा है। ऐसे कार्यक्रमों को नियम 6(1)(a) का पालन करना होगा, जिसके तहत ऐसी सामग्री से बचना जरूरी है जो अच्छे स्वाद और शालीनता के मानकों के खिलाफ हो या दर्शकों को अनावश्यक परेशानी पहुंचाए।

मंत्रालय के मुताबिक, अपराध और हिंसा से जुड़ी खबरें सत्यापित तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए और उन्हें संतुलित व जिम्मेदारी के साथ दिखाया जाना चाहिए। चैनलों को जानबूझकर गलत जानकारी, भ्रामक संकेत और आधे-अधूरे सच प्रसारित करने से बचने की हिदायत दी गई है। नियम 6(1)(d) के तहत इस तरह की सामग्री पर रोक है।

इसके अलावा, ऐसी सनसनीखेज खबरें दिखाने से भी बचने को कहा गया है, जिनसे गैरकानूनी या सामाजिक रूप से अनुचित व्यवहार को बढ़ावा मिलता हो या उसे सामान्य बताया जाता हो।

मंत्रालय ने परेशान करने वाले दृश्यों को बार-बार दिखाने या लगातार दोहराने से बचने को कहा है। जरूरत पड़ने पर तस्वीरों और वीडियो को धुंधला करने या उनके कुछ हिस्सों को छिपाने की सलाह भी दी गई है, ताकि दर्शकों की शालीनता और संवेदनशीलता का ध्यान रखा जा सके।

मंत्रालय ने 9 जनवरी 2023 को जारी अपनी पिछली सलाह का भी उल्लेख किया है। इसमें अपराध, दुर्घटना, हिंसा और मौत से जुड़ी घटनाओं की खबरों के प्रसारण में कार्यक्रम संहिता के अनुरूप व्यवस्था बनाने को कहा गया था।

महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े दृश्य दिखाते समय भी विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। ऐसे मामलों में नियम 6(1)(k) और 6(1)(l) का पालन करना जरूरी होगा।

आपदा की खबरों में पुराने दृश्य दिखाकर न फैलाएं डर

मंत्रालय ने प्राकृतिक आपदाओं, बड़ी दुर्घटनाओं और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की खबरों में जरूरत के मुताबिक वीडियो और तस्वीरों पर तारीख व समय दिखाने को कहा है। इसका उद्देश्य पुराने दृश्यों के कारण दर्शकों में अनावश्यक डर या घबराहट पैदा होने से रोकना है। ऐसी खबरें भी सत्यापित तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। इसके लिए नियम 6(1)(d) का पालन करना होगा।

मंत्रालय ने इस संबंध में 9 अगस्त 2024 और 18 नवंबर 2025 को जारी अपनी पिछली सलाह का भी हवाला दिया है। चैनलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि आपदाओं और दुर्घटनाओं के दृश्य दोबारा दिखाते समय उनकी सही पृष्ठभूमि और समय की जानकारी स्पष्ट हो।

लाइव बहसों में भड़काऊ बयानों पर नजर

मंत्रालय ने लाइव बहसों और पैनल चर्चाओं के दौरान चैनलों की संपादकीय जिम्मेदारी पर भी जोर दिया है।

नियम 6(1)(c) और 6(1)(e) के तहत कार्यक्रमों में सांप्रदायिक या राष्ट्र-विरोधी भावनाओं को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। मंत्रालय ने चैनलों से कहा है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनकी चर्चाओं के जरिए ऐसी भावनाएं न भड़कें और सामग्री पर पर्याप्त संपादकीय नियंत्रण बना रहे। इसके लिए डिबेट में शामिल होने वाले विशेषज्ञों और अन्य प्रतिभागियों का चयन सावधानी से करने और जरूरत पड़ने पर कार्यक्रम से पहले उन्हें जरूरी निर्देश देने की सलाह दी गई है।

अगर किसी लाइव कार्यक्रम में अपमानजनक, गाली-गलौज वाली या भड़काऊ सामग्री प्रसारित होने का खतरा हो, तो चैनलों को तुरंत जरूरी कदम उठाने होंगे। इनमें किसी प्रतिभागी की आवाज बंद करना, अस्वीकरण जारी करना, कार्यक्रम को बीच में रोकना या प्रसारण बंद करना शामिल है।

मंत्रालय ने 8 जून 2023 को जारी अपनी पिछली सूचना का भी उल्लेख किया है, जिसमें कार्यक्रम संहिता का पालन करने की बात कही गई थी।

भारत के सही नक्शे दिखाने और पीड़ितों की पहचान छिपाने के निर्देश

मंत्रालय ने निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को प्रसारण, ग्राफिक्स और डिजिटल प्रस्तुतियों में भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) की ओर से प्रकाशित भारत के प्रामाणिक नक्शों का ही इस्तेमाल करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश कार्यक्रम संहिता के नियम 6(1)(h) से जुड़ा है, जिसका संबंध देश की अखंडता बनाए रखने से है।

चैनलों को यौन अपराधों के पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करने की भी याद दिलाई गई है।

इसके तहत केवल नाम और तस्वीरें छिपाना ही पर्याप्त नहीं होगा। ऐसी कोई भी जानकारी प्रसारित नहीं की जानी चाहिए, जिससे पीड़ित की पहचान हो सके। इसमें परिवार का विवरण, इलाके की जानकारी, अन्य निजी तथ्य और पहचान उजागर करने वाले अप्रत्यक्ष संकेत भी शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि इस संबंध में 13 सितंबर 2024 को भी सलाह जारी की गई थी।

खबरों में AI का इस्तेमाल सहायक भूमिका तक सीमित रहे

टीवी न्यूजरूम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच मंत्रालय ने AI टूल्स के उपयोग में भी सावधानी बरतने को कहा है। इसमें जनरेटिव AI से तैयार ग्राफिक्स और वर्चुअल न्यूज प्रस्तुतियों जैसे इस्तेमाल शामिल हैं। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ये केवल कुछ उदाहरण हैं और निर्देश का दायरा इससे आगे भी है।

मंत्रालय के मुताबिक, AI टूल्स का इस्तेमाल सहायक भूमिका में किया जा सकता है, लेकिन इससे खबरों की सटीकता, प्रामाणिकता और संवेदनशीलता पर असर नहीं पड़ना चाहिए। साथ ही, चैनलों को कार्यक्रम संहिता का पालन भी सुनिश्चित करना होगा।

संपादकीय जांच और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर जोर

मंत्रालय ने चैनलों को खबर जुटाने से लेकर संपादन, निर्माण, प्रसारण और टीवी पर दिखाए जाने तक पूरी प्रक्रिया में संपादकीय जांच और सामग्री की समीक्षा की व्यवस्था मजबूत करने को कहा है। खबर जुटाने, संपादन, कार्यक्रम बनाने और प्रसारण से जुड़े कर्मचारियों को कार्यक्रम संहिता के नियमों की पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए।

इसके लिए मंत्रालय ने संपादकीय और प्रोडक्शन टीमों के लिए नियमित कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता सत्र आयोजित करने की सलाह दी है, ताकि नियमों का लगातार पालन सुनिश्चित किया जा सके।

मंत्रालय ने दोहराया है कि कानूनी दायित्वों का पालन करना जरूरी है। नियमों का उल्लंघन होने पर केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और इसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

इस सलाह के जरिए मंत्रालय ने खबरों की प्रस्तुति, लाइव कार्यक्रमों, वीडियो और तस्वीरों के इस्तेमाल, पीड़ितों की निजता और AI जैसी नई तकनीकों के उपयोग को लेकर अपनी अपेक्षाएं स्पष्ट की हैं। चैनलों से कहा गया है कि वे संपादकीय निगरानी, तथ्यों की जांच और कर्मचारियों के प्रशिक्षण के जरिए नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

 

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एचपी टेलीकॉम इंडिया की नई सीईओ बनीं डॉ. गरिमा मिश्रा

एचपी टेलीकॉम इंडिया ने डॉ. गरिमा मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। वह कंपनी की रणनीति, संचालन, विकास, बिक्री और ग्राहक अनुभव से जुड़े कार्यों का नेतृत्व करेंगी।

Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
dr.garima

एचपी टेलीकॉम इंडिया लिमिटेड (HP Telecom India Limited) ने डॉ. गरिमा मिश्रा को अपना मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ (CEO) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 21 अक्टूबर से प्रभावी हो गई है। नई भूमिका में वह कंपनी की रणनीति, संचालन और विकास से जुड़े कार्यों का नेतृत्व करेंगी।

डॉ. गरिमा मिश्रा के पास रक्षा, उपभोक्ता वस्तुओं और तकनीकी वितरण के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) में इंजीनियर के रूप में की थी। यहां उन्होंने करीब एक दशक तक तकनीकी और परिचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं।

इसके बाद उन्होंने कॉरपोरेट सेक्टर का रुख किया और डियाजियो (Diageo) तथा पर्नोड रिकार्ड (Pernod Ricard) में वरिष्ठ बिक्री और वाणिज्यिक भूमिकाओं पर काम किया। इसके बाद रेडिंगटन (Redington) में उन्होंने एप्पल (Apple) के कारोबार का नेतृत्व किया।

एचपी टेलीकॉम में डॉ. मिश्रा का मुख्य फोकस कंपनी की विकास गति को तेज करना होगा। इसके लिए वह कंपनी की पहुंच बढ़ाने के साथ ब्रांड साझेदारों, ग्राहकों और चैनल पार्टनर्स के साथ संबंधों को मजबूत करेंगी।

वह बेहतर प्रक्रियाओं, डेटा आधारित निर्णय लेने और ग्राहक अनुभव पर अधिक ध्यान देकर कंपनी की बिक्री और संचालन को मजबूत करने पर भी काम करेंगी। कंपनी के विस्तार के अगले चरण में उनकी भूमिका रणनीति और कारोबार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण होगी।

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गेमिंग पर पाबंदी के बाद विज्ञापन बाजार का नया खेल: अब कौन लगा रहा है दांव?

2025 में ऑनलाइन गेमिंग कानून के बाद रियल मनी गेमिंग पर रोक से विज्ञापन बाजार में खालीपन की आशंका थी, पर 2026 की रिपोर्टें बताती हैं कि गेमिंग विज्ञापन घटने के बजाय नए ब्रैंड्स के साथ आगे बढ़ रहा है।

Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2026
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2025 में ऑनलाइन गेमिंग कानून आने के बाद पैसे से खेले जाने वाले खेलों (रियल मनी गेमिंग, RMG) पर देश में रोक लग गई। जो कंपनियां आईपीएल से लेकर सोशल मीडिया तक सबसे बड़े विज्ञापनदाताओं में गिनी जाती थीं, वे लगभग गायब हो गईं। तब आशंका थी कि विज्ञापन बाजार में बड़ा खालीपन बनेगा। सितंबर–अक्टूबर 2026 की रिपोर्टें अलग तस्वीर दिखाती हैं: गेमिंग विज्ञापन सिकुड़ा नहीं है, बल्कि उसके खरीदार बदल गए हैं।

पाबंदी से पहले: RMG का दबदबा

जुलाई 2026 में आई MIXI Global Investments की रिपोर्ट 'इंडियाज स्टेट ऑफ प्ले 2026' के अनुसार, कानून से पहले RMG इंडस्ट्री का अनुमानित आकार 3.7 अरब डॉलर था। यह देश के गेमिंग राजस्व का लगभग 85% था, करीब दो लाख लोगों को रोजगार देता था और करीब 2.3 अरब डॉलर का कर राजस्व देता था।

पाबंदी से पहले विज्ञापन की दुनिया में RMG कंपनियों का बड़ा हाथ था। अगस्त 2025 में स्टोरीबोर्ड18 ने इंडस्ट्री के अधिकारियों के हवाले से लिखा कि अपने सबसे अच्छे दौर में RMG कंपनियां भारत के कुल डिजिटल विज्ञापन खर्च का करीब 10% देती थीं। यह लगभग ₹4,000 करोड़ हर साल बैठता है। उसी रिपोर्ट में एलारा सिक्योरिटीज ने अनुमान लगाया था कि पाबंदी से आईपीएल की विज्ञापन कमाई का करीब 25% हिस्सा खतरे में पड़ सकता है। वैसे यह भी बता दें कि ये सिर्फ अनुमान था, ऑडिट किए गए आंकड़े नहीं।

वहीं, एक्सचेंज4मीडिया (9 अक्टूबर 2026) के अनुसार इंडस्ट्री के अधिकारियों का अनुमान है कि 2025 में गेमिंग विज्ञापन करीब 12% बढ़ा। स्टेट ऑफ प्ले रिपोर्ट के मुताबिक गैर-RMG मोबाइल गेमिंग ने 2025 में लगभग 1.1 अरब डॉलर कमाए। इसमें विज्ञापन से करीब 30 करोड़ डॉलर और इन-ऐप खरीदारी से करीब 80 करोड़ डॉलर आए। भारत में 60 करोड़ से ज्यादा सक्रिय गेमर हैं और 2025 में 7.95 अरब मोबाइल गेम डाउनलोड हुए, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है।

नियामकीय बदलाव के बाद की रणनीति

स्टेट ऑफ प्ले रिपोर्ट के अनुसार कानून ने पैसे वाले ऑनलाइन खेलों पर रोक लगाई, चाहे वे कौशल के हों या किस्मत के। रिपोर्ट यह भी कहती है कि कानून अभी न्यायिक समीक्षा के अधीन है।

गेमिंग कंपनियों की रणनीति में तीन बदलाव दिखते हैं। पहला, फनसेल गेम्स के सीईओ अभिषेक मालपानी के अनुसार कुछ RMG कंपनियां अब फ्री-टू-प्ले और विज्ञापन-आधारित मॉडल की ओर जा रही हैं। दूसरा, खिलाड़ियों का रुख बदला है। स्टेट ऑफ प्ले रिपोर्ट के शुरुआती चार महीनों के डेटा के अनुसार पूर्व RMG खिलाड़ी स्ट्रैटेजी खेलों की ओर बढ़े हैं, जिनमें फैंटेसी स्पोर्ट्स, पोकर और रमी जैसी रणनीतिक सोच लगती है।

तीसरा बदलाव टैक्स विवादों में दिखा। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 को ऑनलाइन मनी गेमिंग पर GST वसूली को बरकरार रखा और बाद के आदेशों में टैक्स योग्य मूल्य की गणना सत्यापित जमा राशि के आधार पर की गई। एक्सचेंज4मीडिया (15 अक्टूबर 2026) के अनुसार इसके बाद ड्रीम11 की संचालक स्पोर्टा टेक्नोलॉजीज, गेमक्राफ्ट और प्ले गेम्स 24x7 की कुल मांग करीब ₹70,212.87 करोड़ से घटकर ₹17,297.62 करोड़ रह गई। यह ₹52,915 करोड़ (75.4%) की कटौती है। रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि कंपनियों पर अब भी ब्याज और जुर्माना लागू है।

विज्ञापनदाताओं की सोच भी बदली है। डेंट्सु इंडिया के रोहित पोतफोड़े के अनुसार गेमिंग को अब सोशल, वीडियो, इन्फ्लुएंसर, OTT और कॉमर्स के साथ मीडिया प्लान का नियमित हिस्सा माना जा रहा है। 2025 में गेमिंग अभियान अक्सर पायलट, छोटी अवधि और एंगेजमेंट-आधारित लक्ष्यों वाले थे, जबकि इस साल एजेंसियां बड़े और लंबे अभियान देख रही हैं। नए खरीदारों में FMCG, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, फिनटेक, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, टेक्नोलॉजी और मनोरंजन की कंपनियां गिनाई गई हैं।

2026: गेमिंग खर्च और त्योहारी निवेश

एक्सचेंज4मीडिया (9 अक्टूबर 2026) के अनुसार इंडस्ट्री अधिकारी इस त्योहारी सीजन में गेमिंग विज्ञापन खर्च 15–30% बढ़ने का अनुमान लगा रहे हैं। डेंट्सु इंडिया के अनुसार डिजिटल त्योहारी मिक्स में गेमिंग का सामान्य आवंटन पिछले साल से करीब 20–30% बढ़ा है। Gozoop क्रिएटिव के अमीन घड़ियाली त्योहारी गेमिंग खर्च में 15–20% सालाना बढ़त आंकते हैं, जबकि उनके अनुसार पूरे त्योहारी विज्ञापन खर्च की बढ़त करीब 10–12% है। जो ब्रैंड पहले से गेमिंग में हैं, उनके आवंटन में वे 15–25% बढ़ोतरी का अनुमान देते हैं।

बड़े बाजार का संदर्भ फरवरी 2026 की पिच मैडिसन रिपोर्ट से मिलता है, जो कई मीडिया रिपोर्ट्स में उद्धृत है। इसके विस्तारित पैमाने पर भारत का विज्ञापन बाजार 2025 में ₹1,55,105 करोड़ रहा और 2026 में ₹1,74,605 करोड़ (12–13% वृद्धि) तक पहुंचने का अनुमान है। इसी पैमाने पर डिजिटल विज्ञापन 2025 में ₹93,156 करोड़ रहा, जो 2024 के ₹76,261 करोड़ से 22% ज्यादा है। पुराने पैमाने पर 2025 का बाजार ₹1,15,291 करोड़ था, जिसमें डिजिटल की हिस्सेदारी 46% थी।

दीर्घकालिक अनुमान भी इसी दिशा में हैं। स्टेट ऑफ प्ले रिपोर्ट के अनुसार गैर-RMG मोबाइल गेमिंग 2025 के करीब 1.1 अरब डॉलर से 2026 में 1.5 अरब डॉलर (लगभग 35% वृद्धि) और 2029 तक 2.4 अरब डॉलर हो सकती है। एक्सचेंज4मीडिया खुद सवाल उठाता है कि 15–30% की यह बढ़त एक सीजन का उछाल है या गेमिंग के लिए नया, ऊंचा आधार।

माध्यमों पर असर

टेलीविजन: सबसे साफ असर आईपीएल 2026 में दिखा। इस साल जून में BARC इंडिया और TAM स्पोर्ट्स के आंकड़ों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में लिखा गया कि सीजन के पहले हिस्से में लीनियर टीवी पर विज्ञापन देने वाले ब्रैंड करीब 31% घटे, प्रति मैच औसत दर्शक 26% गिरकर करीब 1.06 करोड़ से 78 लाख रह गए और कुल टीवी रेटिंग 18.8% गिरी। शमबैंग की दीपशिखा भारद्वाज के अनुसार ड्रीम11, माय11सर्कल और एमपीएल काफी हद तक बाहर हो गए, फिर भी आईपीएल का कुल विज्ञापन राजस्व ₹4,900–5,200 करोड़ के दायरे में रहा। उनके अनुसार AI प्लेटफॉर्म, क्विक कॉमर्स, BFSI, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पेंट और ई-कॉमर्स सेवाएं बड़े विजेता रहे।

पिच मैडिसन के अनुसार, 2025 में लीनियर टीवी का विज्ञापन खर्च 5% गिरकर ₹32,855 करोड़ रहा और विज्ञापन वॉल्यूम 10% घटा। रिपोर्ट ने इसकी वजह FMCG की कटौती, छोटे विज्ञापनदाताओं के बाहर होने और जॉनर में बदलाव को बताया, गेमिंग को नहीं। 2026 में लीनियर टीवी के सपाट रहने का अनुमान है।

कनेक्टेड टीवी और डिजिटल वीडियो: उसी रिपोर्ट के अनुसार सीटीवी 2025 में दोगुना होकर करीब ₹6,000 करोड़ हुआ और 2026 में करीब ₹8,000 करोड़ तक जा सकता है। टीवी और सीटीवी मिलाकर 'लार्ज स्क्रीन' 2025 में ₹38,855 करोड़ (लगभग 4% वृद्धि) रही। आईपीएल में पिवटरूट्स के जिनित शाह के अनुसार सीटीवी की पहुंच 25% बढ़ी।

सोशल और डिजिटल: TAM AdEx (23 सितंबर 2026) के अनुसार जनवरी–जुलाई 2026 में डिजिटल विज्ञापन इंप्रेशन पिछले साल से 44% बढ़े। प्रोग्रामैटिक खरीद 96% इंप्रेशन में रही। रिपोर्ट में 1.68 लाख से ज्यादा विज्ञापनदाता डिजिटल पर दर्ज हुए, जिनमें 1.1 लाख से ज्यादा केवल डिजिटल पर थे, टीवी पर नहीं। कवर किए गए वेब प्रकाशकों में इंस्टाग्राम के पास 69% इंप्रेशन थे। इस रिपोर्ट के अंश में गेमिंग का अलग आंकड़ा नहीं है, इसलिए यह वृद्धि सिर्फ गेमिंग की नहीं मानी जा सकती।

गेमिंग ऐप्स: यहां विज्ञापन राजस्व करीब 30 करोड़ डॉलर (2025) माना गया है। एक्सचेंज4मीडिया के अनुसार GDAI के प्रवक्ता का कहना है कि ब्रैंड साझेदारी और इन-गेम विज्ञापन डेवलपरों के लिए नया राजस्व स्रोत बन सकते हैं, बशर्ते खिलाड़ी के अनुभव का सम्मान हो।

पाबंदी ने विज्ञापन बाजार से एक बड़ा खरीदार हटाया, जिसकी सबसे ज्यादा चोट आईपीएल के लीनियर टीवी पर दिखी। पर 2026 की उपलब्ध रिपोर्ट्स में गेमिंग विज्ञापन बढ़ता दिख रहा है और उसका खरीदार वर्ग पहले से ज्यादा विविध है। 

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