वरिष्ठ पत्रकार ने लगाई फांसी, इस वजह से दी जान

वरिष्ठ पत्रकार ने अपने घर में कथित रूप से फांसी का फंदा लगाकर जान दे दी

Last Modified:
Monday, 15 April, 2019
SUICIDE

वरिष्ठ पत्रकार ने अपने घर में कथित रूप से फांसी का फंदा लगाकर जान दे दी। मामला महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले का है। बताया जाता है कि 56 वर्षीय पत्रकार सुंदर विलास लतपते रविवार की दोपहर पुंडलिक नगर में अपने घर में लटके मिले। लतपते को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन भर्ती कराये जाने से पहले ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस को लतपते द्वारा लिखा एक कथित सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें कहा गया है कि पत्नी उनके साथ नहीं रह रही हैं, इसलिये वह अपनी जिंदगी खत्म कर रहे हैं। पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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शराब पीकर टीवी एंकर कर रही थी यह काम, गले पड़ गई मुसीबत

पुलिस ने विभिन्न आरोपों में तेलुगू टीवी एंकर समेत छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है

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Tuesday, 23 April, 2019
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पुलिस ने विभिन्न आरोपों में तेलुगू टीवी एंकर समेत छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामला हैदराबाद का है। आरोपियों पर उप्पल स्थित राजीव गांधी क्रिकेट स्टेडियम में शनिवार को हुए आईपीएल मैच के दौरान शराब पीकर हंगामा करने और धमकी देने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, इस मामले में उन्हें ‘भारत फाइनेंस’ (Bharath Finance) के वाइस प्रेजिडेंट संतोष उपाध्याय की ओर से एक शिकायत मिली थी। कोमपल्ली के रहने वाले संतोष (41) ने आरोप लगाया था कि छह लोगों ने उप्पल क्रिकेट स्टेडियम के कॉरपोरेट बॉक्स नंबर एस 22 में शराब का सेवन किया और हंगामा कर उन्हें मैच नहीं देखने दिया। इस बात का विरोध करने पर सभी आरोपियों ने उनके साथ गाली-गलौज कर धमकी भी दी।

संतोष उपाध्याय की शिकायत के आधार पर पुलिस ने स्टूडेंट के. पूर्णिमा (27), के. प्रिया (23), प्राइवेट नौकरी करने वाले वी. श्रीकांत रेड्डी (48), एल. सुरेश (28), जी. वेणु गोपाल (38) और 32 वर्षीय टीवी एंकर प्रशांती (Ch Prashanthi) के खिलाफ विभिन्न् धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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टीवी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के इस सवाल से फंस गईं प्रज्ञा ठाकुर

‘टीवी9 भारतवर्ष’ पर नज़र आना प्रज्ञा ठाकुर के लिए दुर्भाग्यशाली साबित हुआ

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Tuesday, 23 April, 2019
Pragya

‘टीवी9 भारतवर्ष’ पर नज़र आना प्रज्ञा ठाकुर के लिए दुर्भाग्यशाली साबित हुआ। चुनाव आयोग ने बाबरी मस्जिद को लेकर दिए बयान के लिए प्रज्ञा ठाकुर पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। आयोग का यह आदेश साध्वी प्रज्ञा और भाजपा के लिए जहां झटका है, वहीं ‘टीवी9 भारतवर्ष’ और पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के लिए इसे अच्छी खबर कहा जा सकता है। हर तरफ दोनों की चर्चा हो रही है। अभिषेक ने ही प्रज्ञा ठाकुर का वो एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किया था, जिसमें उन्होंने बाबरी मस्जिद गिराने में अपनी भूमिका स्वीकारी। अब यही स्वीकारोक्ति उनके गले की फांस बन गई है।

‘इंडिया टीवी’ से अलग होकर ‘टीवी9 भारतवर्ष’ का हिस्सा बने अभिषेक अपनी कमाल की रिपोर्टिंग के लिए पहचाने जाते हैं। वो उन पत्रकारों में शुमार हैं, जो जल्दबाजी में अर्थ का अनर्थ करने के बजाय सोच-समझकर सवाल दागने में विश्वास रखते हैं। अभिषेक के पास मीडिया में लंबा अनुभव है और उनकी ख़बरों में यह झलकता भी है। अभिषेक ने जब शनिवार को भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर से बातचीत की, उस वक़्त वो कहीं जाने की तैयारी में थीं। लिहाजा, ऐसी स्थिति में ज्यादा सवाल मुमकिन नहीं थे, इसलिए अभिषेक ने कुछ चुनिंदा सवाल दागे और उनमें से ही एक के जवाब ने पूरे देश में हंगामा खड़ा कर दिया। इंटरव्यू में प्रज्ञा कुछ ख़ास कहने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहीं थीं, क्योंकि हेमंत करकरे पर बयान को लेकर पहले से ही उनकी किरकरी हो रही थी। लेकिन अभिषेक उपाध्याय ने जब राममंदिर पर सवाल पूछा, तो वह इतना जोश में आ गईं कि बाबरी मस्जिद गिराने में अपनी भूमिका बयां कर बैठीं।  

अभिषेक ने साध्वी से पूछा था कि राम मंदिर पर आप कुछ नहीं बोल रहीं हैं। जिस पर उन्होंने कहा, ‘राम मंदिर जरूर बनेगा। एक भव्य मंदिर बनेगा।' जब उनसे पूछा गया कि क्या वह एक समयसीमा बता सकती हैं तो उन्होंने कहा, 'हम मंदिर वहीं बनाएंगे। आखिरकार, हम ढांचे को ध्वस्त करने के लिए गए थे। मैंने ढांचे पर चढ़कर उसे तोड़ा था। मुझे काफी गर्व है कि भगवान ने मुझे यह मौका और ऐसा करने के लिए शक्ति दी, और मैंने उसे कर दिया। मैंने देश का कलंक मिटाया था। अब हम वहीं राम मंदिर बनाएंगे।' साध्वी का यह बयान सामने आते ही पूरे देश में हंगामा मच गया। अभिषेक की स्टोरी को न केवल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, बल्कि सभी अख़बारों ने भी प्रकाशित किया। इसके कुछ ही घंटों बाद हरकत में आते हुए चुनाव आयोग ने प्रज्ञा को दूसरा नोटिस थमा दिया और अब उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। 

‘टीवी9 भारतवर्ष’ से जुड़ने से पहले अभिषेक ‘इंडिया टीवी’ में एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) के पद पर कार्यरत थे। वैसे ‘टीवी9’ में ये उनकी दूसरी पारी है। साल 2010 में वह मुंबई ब्यूरो चीफ रह चुके हैं। अभिषेक ने ‘इंडिया टीवी’ फरवरी, 2013 में जॉइन किया था और इस दौरान उन्होंने कई स्पेशल व इनवेस्टिगेटिव स्टोरीज की, राष्ट्रीय एवं अंतरराट्रीय घटनाओं को भी कवर किया। प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका अवॉर्ड से सम्मानित अभिषेक ने ‘इंडिया टीवी’ में रहने के दौरान कई बड़ी खबरें भी ब्रेक की थीं, जिनमें आजम खान से जुड़ा वक्फ घोटाला भी शामिल है। ‘इंडिया टीवी’से पहले अभिषेक ने ‘दैनिक भास्कर’ ग्रुप के साथ काम किया। यहां भी वे एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) के पद पर कार्यरत थे। अभिषेक ‘आईबीएन7’में भी पांच सालों तक काम कर चुके हैं। वे 2005 से 2010 तक यहां रहे और सीनियर स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट की भूमिका निभाई। अभिषेक ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट से की थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे 2003 में हिंदी दैनिक ‘अमर उजाला’ से बतौर ट्रेनी रिपोर्टर व सब एडिटर के तौर पर जुड़े थे। 

प्रज्ञा ठाकुर की बात करें तो ‘टीवी9 भारतवर्ष’ से उनकी दूसरी मुलाकात भी अच्छी नहीं रही थी। चैनल के कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम के तीखे सवालों ने प्रज्ञा ठाकुर को इस कदर परेशान कर दिया था कि वो शो बीच में छोड़कर ही चली गईं थीं। इन दोनों ख़बरों को देखने के बाद संभव है कि प्रज्ञा ‘टीवी9 भारतवर्ष’ से तौबा कर लें या फिर खास तैयारी के साथ चैनल पर अपना चेहरा दिखाएं। फ़िलहाल तो अभिषेक उपाध्याय को उनकी खबर के इतने ज़बरदस्त इम्पैक्ट के लिए बधाई मिलनी चाहिए।

प्रज्ञा ठाकुर का इंटरव्यू आप यहां देख सकते हैं-

 

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महिला पत्रकार के खतरनाक मंसूबों पर कुछ यूं फिर गया पानी

महिला पत्रकार के मंसूबों पर पुलिस की टीम ने पानी फेर दिया

Last Modified:
Tuesday, 23 April, 2019
Journalist

एक महिला पत्रकार के मंसूबों पर उस समय पानी फिर गया, जब पुलिस ने उसे गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया। दरअसल, 22 वर्षीय नीशू नामक यह पत्रकार गौतमबुद्धनगर के सांसद और केंद्रीय मंत्री डॉक्टर महेश शर्मा को ब्लैकमेल कर रुपए लेने के लिए सोमवार को नोएडा स्थित उनके कैलाश अस्पताल पहुंची थी। खुद को बंद हो चुके एक तथाकथित न्यूज चैनल का पत्रकार बताते हुए महिला का कहना है कि वह अपने सीनियर के कहने पर पैसे लेने के लिए आई थी। जांच में नीशू के पास से स्टिंग में इस्तेमाल होने वाला कैमरा मिला है।

एसएसपी वैभव कृष्ण के अनुसार स्टिंग विडियो का डर दिखाकर एक व्यक्ति केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा से ढाई करोड़ रुपए की मांग कर रहा था। पैसे न देनें पर विडियो को मीडिया में देने की धमकी दी जा रही थी। धमकी देने वाले व्यक्ति के गैंग की ही सदस्य  महिला 45 लाख रुपये लेने के लिए सोमवार को कैलाश अस्पताल पहुंची थी। इस महिला के पास लोकल न्यूज चैनल प्रतिनिधि टीवी के एडिटर-इन-चीफ आलोक कुमार का एक पत्र था, जिसमें 45 लाख रुपए तुरंत और दो करोड़ रुपए तीन दिन बाद दिए जाने की बात लिखी हुई थी। डॉक्टर ने इस ब्लैकमेलिंग के बारे में पहले ही पुलिस को बता दिया था। इसी आधार पर जब महिला रकम लेने के लिए कैलाश अस्पताल पहुंची तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की पड़ताल में यह बात भी सामने आ चुकी है कि यह पूरा गैंग पहले भी कई हाई प्रोफाइल लोगो को ब्लैकमेल कर चुका है।

एसएसपी ने यह भी बताया कि गैंग एक ऐसे न्यूज चैनल से ताल्लुक रखता है, जो नोटबंदी के दौरान बंद हो चुका है। पुलिस ने विख्यात कवि राम धारी सिंह दिनकर की रिश्तेदार और खुद को सामाजसेवी बताने वाली ऊषा ठाकुर को भी इसी मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि जब स्टिंग किया गया था तो ऊषा ठाकुर ही स्टिंग करने वाले टीम को डॉक्टर महेश शर्मा से मिलवाने के लिए अपने साथ लेकर आई थी। एसएसपी ने यह भी साफ किया कि जिस स्टिंग के आधार पर ब्लैकमेल करने का प्रयास किया जा रहा था, 20 मिनट के उस विडियो में भी कोई आपत्तिजनक बात नहीं है।

एसएसपी ने बताया कि नोटबंदी के बाद पैसों की कमी के चलते लोकल न्यूज चैनल प्रतिनिधि टीवी बंद हो गया था। ऐसे में आलोक कुमार व उसके साथी ब्लैकमेलिंग में शामिल रहे हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। एसएसपी ने बताया कि चैनल को आर्थिक मदद की जरूरत थी, जिसके लिए इससे जुड़े लोग कई नेताओं को टारगेट बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करते हुए रंगदारी मांग रहे थे।

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पत्रकारों का सवाल, जब राहुल ने मांगी ही नहीं माफ़ी तो माफ़ी की खबर कैसे बनी?

चौकीदार चोर है’ अपने हर भाषण में इस वाक्य का प्रयोग करने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट में सफाई पेश करनी पड़ी है।

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Tuesday, 23 April, 2019
Rahul

‘चौकीदार चोर है’ अपने हर भाषण में इस वाक्य का प्रयोग करने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट में सफाई पेश करनी पड़ी है। उन्होंने बाकायदा अदालत में एफिडेविट दाखिल करके खेद भी जताया, लेकिन उनके इस ‘खेद’ को कुछ मीडिया संस्थानों ने ‘माफ़ी’ की शक्ल दे दी। यह बताया गया कि राहुल गांधी ने ‘चौकीदार चोर है’ कहने के लिए कोर्ट से माफ़ी मांगी है। अब इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है।

कुछ पत्रकारों ने सवाल उठाया है कि जब राहुल ने माफ़ी मांगी ही नहीं  तो फिर मीडिया उसे माफ़ी कैसे कह सकता है? इंडिया टुडे की पत्रकार सुप्रिया भारद्वाज ने मीडिया के रुख पर आश्चर्य जताते हुए अपने ट्वीट में कहा ‘कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा दाखिल किये गए 22 पेजों के हलफनामे में माफ़ी शब्द का जिक्र नहीं किया है, तो ये माफ़ी की खबर आई कहाँ से? क्या यह मानहानि या गलत रिपोर्टिंग का विषय नहीं है’? इसी तरह वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला ने भी ‘माफ़ी’ इस्तेमाल करने वाले मीडिया संस्थानों को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा ‘कौन से मीडिया संस्थानों ने किस आधार पर माफ़ी की खबर दिखाई, यह किसके हित में काम कर रहे हैं?

वहीं, रिपब्लिक टीवी की पत्रकार ने लिखा है, ‘राहुल ने अपने हलफनामे में ‘regret’ शब्द का जिक्र किया है ‘apology’ नहीं। इसी तरह पत्रकार रोहिणी सिंह ने भाजपा नेत्री मीनाक्षी लेखी के वकील का हवाला देते हुए लिखा है, ‘यदि लेखी के वकील खुद कह रहे हैं कि माफ़ी नहीं मांगी गई तो मीडिया यह स्टोरी कैसे चला सकता है कि माफ़ी मांगी गई?'

इस मुद्दे पर एबीपी न्यूज़ की वरिष्ठ पत्रकार रूबिका लियाकत को भी निशाना बनाया जा रहा है। दरअसल, रूबिका ने राहुल के हलफनामे की खबर ट्वीट की थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी ने अपने बयान के लिए खेद प्रकट किया है। इसी को आधार बनाते हुए सिड नामक एक यूजर ने लिखा है, ‘भाजपा की वालंटियर रूबिका लियाकत एक बार फिर फर्जी खबर फैला रहीं हैं कि राहुल गांधी ने ‘चौकीदार चोर है’ पर माफ़ी मांगी है। रूबिका ने ही स्मृति ईरानी की डिग्री के बारे में झूठ बोला था।’ जिसके जवाब में रूबिका ने कहा प्रिय सिड आपको अंग्रेज़ी की बुरी आदत लग गई है, फौरन हिंदी tuition की व्यवस्था करवानी पड़ेगी। आज का पाठ मैं दे देती हूं, मुंह ज़बानी याद कीजिए- खेद मतलब regret होता है apology नहीं। हिंदी में apology को क्षमा कहते है। ख़ुश रहिए और आबाद भी।’

 

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देश में प्रेस की आजादी पर सवालिया निशान है ये रिपोर्ट, जानें कैसे

भारत में प्रेस की आजादी पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गए हैं

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Tuesday, 23 April, 2019
Media

भारत में प्रेस की आजादी पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गए हैं। दुनियाभर की मीडिया पर नजर रखने वाली संस्था ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (Reporters Without Borders) ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, प्रेस की आजादी के मामले में भारत दो पायदान खिसक गया है। इस सूची में 180 देश शामिल हैं, जिनमें अपना देश 140वें स्थान पर है। दक्षिण एशिया से प्रेस की आजादी के मामले में पाकिस्तान तीन पायदान लुढ़कर 142वें स्थान पर है, जबकि बांग्लादेश चार पायदान लुढ़कर 150वें स्थान पर है। नॉर्वे लगातार तीसरे साल पहले पायदान पर है जबकि फिनलैंड दूसरे स्थान पर है।

इस रिपोर्ट में देश में चल रहा लोकसभा चुनाव प्रचार का यह दौर पत्रकारों के लिए खासतौर पर सबसे ख़तरनाक वक्त के तौर पर चिह्नित किया गया है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2019 यानी ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2019’ में बताया गया है कि दुनियाभर के पत्रकारों के प्रति दुश्मनी की भावना बढ़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में प्रेस स्वतंत्रता की मौजूदा स्थिति में से एक पत्रकारों के खिलाफ हिंसा है, जिसमें पुलिस की हिंसा, नक्सलियों के हमले, अपराधी समूहों या भ्रष्ट राजनीतिज्ञों का प्रतिशोध शामिल है।

पिछले साल अपने काम की वजह से भारत में कम से कम छह पत्रकारों की जान गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये हत्याएं बताती हैं कि भारतीय पत्रकार कई खतरों का सामना करते हैं, खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में गैर अंग्रेजी भाषी मीडिया के लिए काम करने वाले पत्रकार ज्यादा चुनौतियों का सामना करते हैं। इसके अलावा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 2019 के आम चुनाव के दौरान सत्तारूढ़ भाजपा के समर्थकों द्वारा पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं। रिपोर्ट में भारत के संदर्भ में हिंदुत्व को नाराज करने वाले विषयों पर बोलने या लिखने वाले पत्रकारों के खिलाफ सोशल मीडिया पर घृणित अभियानों पर चिंता जताई गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन क्षेत्रों को प्रशासन संवेदनशील मानता है, वहां रिपोर्टिंग करना बहुत मुश्किल है-जैसे कश्मीर आदि। गौरतलब है कि पेरिस स्थित रिपोर्टर्स सैन्स फ्रंटियर्स (आरएसएफ) या रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स एक गैर लाभकारी संगठन है जो दुनियाभर के पत्रकारों पर हमलों का दस्तावेजीकरण करता है।

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इस प्रतिष्ठित अवॉर्ड से नवाजे गए वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी

वरिष्ठ पत्रकार और ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) के एंकर सुमित अवस्थी को प्रतिष्ठित अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है

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Tuesday, 23 April, 2019
SUMIT AWASTHI

मुंबई में शनिवार को 'दादा साहब फाल्के एक्सीलेंस अवॉर्ड 2019' का आयोजन किया गया। समारोह में वरिष्ठ पत्रकार और ‘एबीपी न्यूज’ (ABP News) के एंकर सुमित अवस्थी को ‘जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड से नवाजा गया। दादा साहब फाल्के की 150वीं जयंती पर मुंबई में शनिवार को जुहू के मुकेश पटेल ऑडिटोरियम में आयोजित इस अवॉर्ड समारोह में बॉलिवुड, टीवी और संगीत की दुनिया के कई मशहूर सितारों ने शिरकत की। समारोह में वर्ष 2018 में खास उपलब्धियां हासिल करने वालीं बेहतरीन प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।

'जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर' अवार्ड जीतने पर सुमित अवस्थी ने कहा, 'इस प्रतिष्ठित अवॉर्ड को पाकर मैं बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं। मुझे अपना करियर शुरू किए 22 साल हो चुके हैं। मुझे खुशी है कि मेरे प्रयासों के अच्छे परिणाम मिले हैं।' बता दें कि देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके सुमित अवस्थी फिलहाल एबीपी न्यूज़ के वरिष्ठ एंकर हैं और रात 9.30 बजे प्रसारित होने वाले शो ‘सुमित अवस्थी टूनाइट’ को होस्ट करते हैं।

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देश के चीफ जस्टिस बोले, ‘आप टीवी पर डिबेट शो में जाते ही क्यों हैं?

मर्यादाओं की तिलांजलि का ऐसा ही एक मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा हुआ है

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
Debate

डिबेट शो आजकल न्यूज़ चैनलों पर आने वाले कार्यक्रमों में सबसे ख़ास माने जाते हैं। ख़ास इस लिहाज से की इनकी टीआरपी अन्य प्रोग्रामों के मुकाबले अच्छी रहती है। चैनल चाहे छोटा हो या बड़ा डिबेट शो उसका अभिन्न अंग है, लेकिन पिछले कुछ समय से यह अंग सड़ा-गला नज़र आने लगा है। हालांकि, इसकी वजह न्यूज़ चैनल नहीं बल्कि शो में शिरकत करने वाले अधिकांश अतिथि हैं। पहले बहस में शाब्दिक गहमागहमी होती थी, लेकिन अब मर्यादाओं के सारे बंधन तोड़ दिए गए हैं। कभी कोई एंकर नेता पर हाथ उठा देता है, तो कभी नेता ही आपस में उलझ पड़ते हैं।

मर्यादाओं की तिलांजलि का ऐसा ही एक मामला सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा हुआ है। यह मामला करीब सात साल पुराना है और स्मृति ईरानी एवं कांग्रेस नेता संजय निरुपम से जुड़ा हुआ है। शीर्ष अदालत ने निरुपम की याचिका पर ईरानी को नोटिस भेजा है। स्मृति ईरानी द्वारा दर्ज कराये गए केस के आधार पर पटियाला हाउस कोर्ट ने संजय निरुपम को समन भेजा था, जिसे रद्द करवाने वो हाईकोर्ट पहुंचे लेकिन राहत न मिलने पर अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

पूरे मामले को लेकर सर्वोच्च अदालत का रुख क्या होगा, ये तो आने वाले वक़्त में ही पता चलेगा, लेकिन चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने इसे लेकर जो टिप्पणी की है, उस पर वाकई नेताओं को विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा है ‘आप टीवी डिबेट में जाते ही क्यों हैं, जब लड़ाई के बाद कोर्ट जाना पड़ता है’।

‘न्यूज़24’ के विशेष संवाददाता प्रभाकर मिश्रा ने अपने ट्वीट में चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया की टिप्पणी का उल्लेख किया है। मिश्रा ने अपने ट्वीट में बताया कि ‘स्मृति ईरानी ने निरुपम के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है जिसपर कोर्ट ने सम्मन जारी किया है। HC ने सम्मन रद्द करने से मना कर दिया था उसके बाद निरूपम ने SC का दरवाजा खटखटाया है। #CJI की टिप्पणी - आप टीवी डिबेट में जाते ही क्यों हैं, जब लड़ाई के बाद कोर्ट जाना पड़ता है’।


आपको बता दें कि पिछले साल दिसंबर में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राहत देते हुए संजय निरुपम द्वारा उन पर दर्ज कराए गए मानहानि के केस को खत्म कर दिया था। कोर्ट ने माना था कि निरुपम ने लाइव टीवी डिबेट के दौरान जिस तरह से स्मृति ईरानी पर व्यक्तिगत हमले करते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल किया उससे उनके ऊपर मानहानि का केस बनता है। अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी जिस पर हाईकोर्ट ने फैसला स्मृति ईरानी के पक्ष में सुनाया। इससे पहले हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को समझौता करने का मौका दिया था लेकिन इसके लिए ना तो स्मृति ईरानी तैयार थीं और ना ही संजय निरुपम। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।

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पत्रकारों के ट्वीट के बाद ‘एयर विस्तारा’ ने उठाया ये कदम, हो रही खूब आलोचना

‘सर्फ एक्सेल’ के खिलाफ चले अभियान के बाद अब सोशल मीडिया पर ‘एयर विस्तारा’ के बहिष्कार को लेकर अभियान छिड़ा हुआ है

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
Vistara

‘सर्फ एक्सेल’ के खिलाफ चले अभियान के बाद अब सोशल मीडिया पर ‘एयर विस्तारा’ के बहिष्कार को लेकर अभियान छिड़ा हुआ है। हालांकि, इस बार सोशल मीडिया के अधिकांश यूजर के गुस्से को पूरी तरह से गलत करार नहीं दिया जा सकता। दरअसल, इस बहिष्कार की वजह खुद एयरलाइन्स द्वारा उत्पन्न की गई है। विमानन कंपनी एयर विस्तारा ने रविवार को टि्वटर पर एक फोटो पोस्ट की जिसमें मेजर जनरल (रिटा.) जीडी बख्शी के साथ कंपनी के क्रू मेंबर खड़े थे। इसके साथ ही कंपनी ने मेजर जनरल बख्शी की तारीफ में लिखा, ‘कारगिल युद्ध के हीरो जीडी बख्शी को अपने साथ पाकर हम सम्मानित महसूस कर रहे हैं।’ इस पोस्ट के सामने आते ही कुछ लोगों ने एयर विस्तारा को ट्रोल करना शुरू कर दिया और इसमें पत्रकारों की संख्या भी कम नहीं थी।

वरिष्ठ पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी, रोहिणी सिंह और रिफत जावेद आदि ने मेजर जनरल (रिटा.) जीडी बख्शी की तारीफ के लिए विस्तारा की निंदा की। इसके अलावा अन्य कई लोगों ने भी कंपनी के पोस्ट पर सवाल खड़े किये। इस अचानक हुए हमले से घबराई ‘विस्तारा’ ने तुरंत अपना ट्वीट डिलीट कर दिया और यहीं से उसकी मुश्किलें और बढ़ गईं। जीडी बख्शी समर्थकों ने एयरलाइन्स ने इस कदम के लिए उसकी कड़ी भत्सर्ना की। जिसके बाद कंपनी को बयान जारी करना पड़ा। हालांकि, इसका कोई असर होता नज़र नहीं आ रहा है। सोशल मीडिया पर ‘विस्तारा’ के बहिष्कार का अभियान चलाया जा रहा है। कंपनी ने अपनी सफाई में कहा कि ‘यह पोस्ट हटाया जा रहा है क्योंकि उनका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म न तो किसी का अनादर करना चाहता है और न ही किसी को नुकसान पहुंचाना चाहता है।’

इसके बाद भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ट्वीट किया, 'एंटी आर्मी गैंग के दबाव में एयर विस्तारा ने आदरणीय मेजर जनरल जीडी बख्शी की तस्वीर हटाई। अब मैं एयर विस्तारा में तब तक सफर नहीं करूंगा, जब तक कंपनी दोबारा उनकी फोटो नहीं लगाती और इस कृत्य के लिए माफी नहीं मांगती।’ भाजपा नेता तरुण विजय ने भी इस प्रकरण पर रोष जताया और लिखा 'जीडी बख्शी हमारे हीरो हैं न कि एयर विस्तारा। कंपनी का विरोध करना काफी हल्का संकेत है। हम जीडी बख्शी और अपनी सेना के साथ खड़े हैं न कि किसी कायर एयरलाइन्स के साथ।' इसी तरह मशहूर लोक कलाकार मालिनी अवस्थी ने भी ट्वीट किया, 'सबसे बड़ा ढकोसला यही है कि ये तथाकथित ‘लिबरल’ ही सबसे बड़े असहिष्णु हैं!! इन्हें हर उस बात से आपत्ति है जो भारतीयता से जुड़ी है,फौजी के सम्मान पर किसी को कैसी आपत्ति हो सकती है। यह दुःखद है कि विस्तारा पर दबाव बनाने का सामूहिक षडयंत्र हुआ और वो दबाव में आ गई।’


इससे पहले जीडी बख्शी की तारीफ का विरोध करने वाले पत्रकारों में शामिल स्वाति चतुर्वेदी ने एयर विस्तारा को लिखा, ‘तुम्हें वास्तव में लगता है कि तुम अपने ब्रैंड की मदद कर रहे हो। अधिकांश समझदार लोग अब इंडिगो से यात्रा करेंगे’। ऐसे ही रोहिणी सिंह ने ट्वीट किया ‘प्रिय विस्तारा चेतावनी के लिए धन्यवाद। मैं अब आपके बजाय इंडिगो से यात्रा करना पसंद करुँगी।’ वहीं रिफत जावेद ने लिखा ‘मुझे विस्तारा से यात्रा करना पसंद है, लेकिन एक कट्टर व्यक्ति के प्रति कंपनी के प्रेम को देखते हुए ऐसा लगता है कि या तो कंपनी बख्शी के मुस्लिम विरोधी रवैये से अनजान है या फिर इसकी अनदेखी कर रही है। क्या वो अब साध्वी प्रज्ञा का सम्मान करेगी? विस्तारा से अब और यात्रा नहीं।’

 

 

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अजीत अंजुम के सवालों की तपिश नहीं झेल पा रहे नेता

अंजुम शाम सात बजे प्रसारित होने वाले शो ‘राष्ट्रीय बहस’ होस्ट करते हैं। इस शो में वो अतिथियों से तीखे सवाल पूछते हैं

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
Ajit Anjum

टीवी चैनलों पर होने वाली बहस में शरीक होने के लिए नेता सहर्ष तैयार हो जाते हैं। क्योंकि इसके दो फायदे हैं, एक तो उन्हें अपने विचारों से लोगों को रूबरू कराने का मौका मिल जाता है और दूसरा पार्टी को भी यह संदेश पहुँच जाता है कि मीडिया में उनकी पूछपरख कायम है। लेकिन जब हॉट सीट पर बैठकर उनका सामना सुलगते सवालों से होता है, तो कुछ मर्यादाओं को तार-तार कर बैठते हैं और कुछ बीच में ही उठकर चले जाते हैं। ऐसा ही कुछ भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के साथ भी हुआ। प्रज्ञा से ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ के कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने ऐसे सवाल पूछे कि उन्हें बहस अधूरी छोड़कर जाने के अलावा कुछ नहीं सूझा। हाल ही में लॉन्च हुए टीवी9 समूह के हिंदी न्यूज़ चैनल ‘भारतवर्ष’ ने अच्छी शुरुआत की है। चैनल ने बीते दिनों अपने एक स्टिंग ऑपरेशन से भी सबको हिला दिया था और अब उसके संपादक अजीत अंजुम अपने सवालों से राजनेताओं को हिलाने में लगे हैं।

अंजुम शाम सात बजे प्रसारित होने वाले शो ‘राष्ट्रीय बहस’ होस्ट करते हैं। इस शो में वो अतिथियों से तीखे सवाल पूछते हैं, कई बखूबी उनका जवाब दे जाते हैं, जबकि कई बीच में जाना ही बेहतर समझते हैं। प्रज्ञा ठाकुर ने मुंबई हमले के दौरान शहीद हुए मुंबई एटीएस चीफ हेमंत करकरे पर आपत्तिजनक बयान दिया था। जिसके बाद से उनकी आलोचना हो रही है। जब प्रज्ञा ‘राष्ट्रीय बहस’ का हिस्सा बनीं, तो अजीत अंजुम ने इसी विषय पर उनसे प्रश्न किए। प्रश्न के साथ ही साध्वी के हावभाव बदलना शुरू हो गए थे और एक मोड़ पर आकर उन्होंने माइक निकालकर किनारे रखा और शो बीच में छोड़कर चली गईं। दरअसल, अजीत अंजुम ने प्रज्ञा ठाकुर ने तीन सवाल किये। पहले दो सवाल का तो जवाब प्रज्ञा ने दिया लेकिन तीसरे सवाल पर वो वहां से चली गईं। पहला सवाल था “हेमंत करकरे को पूरा देश शहीद के तौर पर जानता है। उन्हें अशोक चक्र मिला, उन हेमंत करकरे के लिए आपने जिस तरह के शब्द का इस्तेमाल किया, ये सब एक शहीद के लिए कहना लगता नहीं कि शर्मिंदगी वाला बयान है?” इस पर साध्वी ने कहा, “ऐसा है कि किसी को भी द्विपक्षीय बातें नहीं करनी चाहिए। मैं एक ही बात कहूंगी कि जिस व्यक्ति को मैंने प्रत्यक्ष झेला है, उसके बारे यदि मैंने कहा है, तो उसकी सत्यता पता करनी चाहिए. दूसरी बात मेरा ये कहना है कि जो भी देशभक्ति का दमन करेगा, आतंकवाद से मरेगा।”

दूसरा सवाल था  “वो देशभक्त थे। उन्होंने देश के लिए गोलियां खायीं। जिस शख्स को देश ने एक जांबाज के तौर पर देखा, उसे आप देशद्रोही कहती हैं, उन्हें हिंदू विरोधी कहती हैं और साथ में खुद को देशभक्त कहती हैं। आपने ऐसा क्या किया कि आप देशभक्त हो गईं और जो देश के लिए शहीद हुआ, वो हिंदू विरोधी हो गया? देशद्रोही हो गया और उसका सर्वनाश हो गया?” जिस पर भाजपा उम्मीदवार ने कहा “आप मुझसे ये प्रश्न न करें। मैंने जो कहा है, वह मैंने झेला है। जो व्यक्ति झेलता है, उससे अच्छा कोई नहीं जानता है। कानून के अंतर्गत गैरकानूनी काम करने वाला वो था, ये मैंने स्वंय झेला है। इससे ज्यादा मैं और क्या कहूं। इतनी गंदी गालियां देता था वो मुझे, मैं कैमरे के सामने नहीं बोल सकती। क्या कहोगे आप इसको? ये क्या कानून था कि मुझे 13 दिनों तक गैरकानूनी तरीके से रखा गया। ये कानून का रक्षक है क्या? किस प्रकार की बात करते हैं? हमारी संवेदना, संवेदना नहीं होती? कौन सी संवेदना, संवेदना होती है? ऑम्ले जब शहीद हुआ तो क्यों उसे पुरस्कार नहीं दिया गया? अगर ऑम्ले नहीं नहीं होता तो कसाब पकड़ा नहीं गया होता और दिग्विजय सिंह जैसे लोग हमें आतंकी सिद्ध कर देते। इसलिए प्रश्न समाज से करिए। प्रश्न कांग्रेसियों से करिए। ये समाज, ये देश उनको उत्तर देगा।”

इसके बाद अंजुम ने तीसरा सवाल दागा, उन्होंने पूछा ‘यदि आपके साथ टार्चर हुआ तो आपको अदालत में जाना चाहिए था। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र सरकार आपकी शुभचिंतक है, आप इन तमाम दरवाज़ों को खटखटातीं, लेकिन आज चुनाव के वक़्त यदि आप ऐसी कहानियां सुना रही हैं और करकरे को देशद्रोही कह रहीं हैं। आपको यदि कांग्रेस से शिकायत थी तो आप कहिये, आपको हक़ है। लेकिन इसके आधार पर आप यदि हेमंत करकरे के लिए कुछ कह रहीं हैं तो आपको सोचना चाहिए। आप अपने चुनावी फायदे के लिए देश की जनता की भावनाओं का भी इस्तेमाल कर रही हैं।’ इतना सुनते ही प्रज्ञा ठाकुर ने अपना माइक निकाला और उठकर वहां से चली गईं।


वैसे ये कोई पहला मौका नहीं है जब अजित अंजुम के तीखे सवालों ने किसी नेता को विचलित किया है, कुछ वक़्त पहले केन्द्रीय मंत्री रविशंकर भी ऐसे ही बीच में उठकर चले गए थे। दरअसल, भाजपा के घोषणापत्र को लेकर अजीत अंजुम ने रविशंकर प्रसाद से एक सवाल पूछा था, जिससे वो इतने नाराज़ हुए कि उठकर चले गए। जाने से पहले उन्होंने कहा था ‘हमारे इतने बड़े घोषणापत्र से अब तक आपने भारत की बुनियाद का एक सवाल भी नहीं पूछा। मैं आपके कार्यक्रम में आया हूँ और खाली आप एक बात पर ही अड़े हुए हैं। मैं क्यों रहूँ आपके कार्यक्रम में, नहीं रहूँगा।’ केन्द्रीय मंत्री इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा ‘यदि आप मुझसे तरीके से सवाल करेंगे, तो मैं सभी का जवाब दूंगा। आप सीनियर संपादक हैं तो मैं भी देश का सीनियर नेता हूँ। आप हल्की बात करेंगे तो मुझे आपसे नमस्ते करना पड़ेगा। धन्यवाद’। इतना कहते ही रविशंकर प्रसाद कुर्सी से उठे और शो बीच में छोड़कर चले गए। अजीत अंजुम ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने उसे अनदेखा कर दिया।

आप ये शो नीचे विडियो पर क्लिक कर भी देख सकते हैं...

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टीवी शो के कॉमेडियन को मिली देश की कमान, चुने गए राष्ट्रपति

टीवी शो में बड़ा किरदार निभाने वाले कॉमेडियन की अब उसी पद पर ताजपोशी हो सकती है

Last Modified:
Monday, 22 April, 2019
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कॉमेडियन का किरदार निभाते-निभाते एक टीवी शो में गलती से राष्ट्रपति बन जाने वाले एक्टर ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वे सचमुच में राष्ट्रपति चुने जा सकते हैं। हालांकि, शो का किरदार तो गलती से राष्ट्रपति चुना जाता है, लेकिन कॉमेडियन ने बाकायदा इसके लिए चुनाव लड़ा है और एग्जिट पोल के नतीजों में उन्हें जीत मिलती दिखाई दे रही है।

दरअसल, यूक्रेन में राष्ट्रपति पद के लिए 31 मार्च और 21 अप्रैल को हुए चुनाव में कॉमेडियन वोलोदीमीर ज़ेलिंस्की को भारी जीत मिलती दिख रही है। इन एक्जिट पोल के अनुसार नए-नए राजनीति में उतरे ज़ेलिंस्की को देश के 70 प्रतिशत से ज्यादा लोगों का समर्थन मिला है। ज़ेलिंस्की के सामने चुनौती के तौर पर निवर्तमान राष्ट्रपति पेत्रो पोरोशेंको थे, जिन्होंने अपनी हार मान ली है। हालांकि आधिकारिक तौर पर ज़ेलिंस्की अभी राष्ट्रपति नहीं बने हैं, लेकिन इस बात की बहुत ज्यादा संभावना दिखाई दे रही है।

वोलोदीमीर यूक्रेन में लंबे वक्त तक चली एक व्यंग्यात्मक टीवी सीरीज 'सर्वेंट ऑफ द पीपल' में प्रमुख किरदार निभाने वाले एक्टर थे। इस टीवी सीरीज में उनका किरदार गलती से राष्ट्रपति बन जाता है। गलती से राष्ट्रपति बनने से पहले ज़ेलिंस्की का किरदार एक टीचर होता है और उसे राष्ट्रपति इसलिए चुन लिया जाता है, क्योंकि भ्रष्टाचार पर बनाया गया उसका एक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाता है। बाद में ज़ेलिंस्की ने यूक्रेन की एक राजनीतिक पार्टी जॉइन कर ली थी। हालांकि ज़ेलिंस्की के पास पहले से कोई राजनीतिक अनुभव नहीं था। इसके बावजूद पहले दौर के चुनाव में उन्हें 30 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले थे, जो उनके प्रतिद्वंद्वी पोरोशेंको को मिले 15.9 प्रतिशत वोटों के मुकाबले बिल्कुल दोगुने थे।

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