मोदी की पहली प्रेस कांफ्रेंस को इससे बेहतर कोई बयां नहीं कर सकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को अमित शाह के साथ मीडिया से हुए रूबरू

Last Modified:
Saturday, 18 May, 2019
coverage

पत्रकारों और विपक्ष की शिकायत रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रेस कांफ्रेंस नहीं करते। लिहाजा शुक्रवार को जब पीएम मीडिया से रूबरू हुए तो सभी उत्साहित थे। पत्रकारों ने भी उनके लिए कुछ ख़ास सवाल तैयार किये, जिन्हें वह पांच सालों से अपने ज़हन में दबाये बैठे थे। लेकिन जब प्रेस कांफ्रेंस शुरू हुई तो उत्साह पल भर में काफूर हो गया। क्योंकि पीएम मोदी वहां होकर भी नहीं थे। उन्होंने एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया, उनकी तरफ से अमित शाह ही बोलते रहे। ये भी अपने आप में एक बड़ी घटना थी, लिहाजा मीडिया में इस चुप्पी ने भी सुर्खियाँ बंटोरीं। चुनावी ख़बरों के बीच शनिवार के अख़बारों में पीएम की ख़ामोशी छाई रही, मगर इस ख़ामोशी को सबसे अच्छे या कहें कि अलग और मारक अंदाज़ में ‘द टेलीग्राफ’ ही बयां कर पाया।

अख़बार का फ्रंट पेज हर बार की तरह देखने लायक है। पीएम की पहली प्रेस कांफ्रेंस को फोटो के साथ जिस तरह से पेश किया गया है, वो केवल ‘द टेलीग्राफ’ ही कर सकता है। कहने को तो यह खबर लीड है, लेकिन इसकी कोई हेडलाइन नहीं है। इसके बजाय ‘नो हॉर्न’ का एक सिंबल चस्पा किया गया है, जो अपने आप में ही काफी कुछ बयां करता है। इसके नीचे बोल्ड शब्दों में लिखा है, ‘1817 दिनों के इंतजार के बाद वह प्रेस कांफ्रेंस जिसने देश को स्पीचलेस कर दिया। नीचे शुक्रवार को हुई उस प्रेस कांफ्रेंस की मुख्य बातें हैं, जिसमें 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने के बाद नरेंद्र मोदी शामिल हुए।’

इसके बाद टाइम स्टैम्प के साथ नरेंद्र मोदी की अलग-अलग मुद्रा वालीं सात छोटी-छोटी तस्वीरें हैं और कैप्शन में उनके बारे में बताया गया है। मसलन, पहली तस्वीर में लिखा है ’36वां मिनट: मोदी और अमित शाह के बयानों के बाद यह सवालों का समय है।’ दूसरी तस्वीर: 37वां मिनट–शाह ने जवाब दिए, मोदी कमरा निहारते रहे। तीसरी तस्वीर: 41वां मिनट-मोदी से सवाल पूछा गया, लेकिन उन्होंने अमित शाह की तरफ इशारा करते हुए कहा कि मैं अनुशासित सैनिक हूं, पार्टी अध्यक्ष ही मेरे लिए सबकुछ हैं। चौथी तस्वीर: 44वां मिनट-शाह ने जवाब दिया, मोदी यहां-वहां देखते रहे। पांचवी तस्वीर: 45वां मिनट-फिर शाह बोले, मोदी देखते रहे। छठी तस्वीर: 47वां मिनट-शाह ने सवालों के जवाब दिए, मोदी सोच में डूबे रहे। सातवीं तस्वीर: 51वां मिनट-शाह ने जवाब दिए, मोदी गहरी सोच में डूबे रहे।

इसके ठीक नीचे लिखा है ‘52वां मिनट, 48 सेकंड: शाह ने कहा ‘चलिए धन्यवाद। सबका बहुत-बहुत धन्यवाद और मोदी और शाह उठकर चले गए।’ अख़बार की क्रिएटिविटी यहीं ख़त्म नहीं होती, इसके बाद एक बड़ा सा खाली स्पेस छोड़ा गया है। इसके नीचे छोटे अक्षरों में लिखा है, ‘द टेलीग्राफ इस स्पेस को आरक्षित रख रहा है, इसे तब भरा जाएगा जब प्रधानमंत्री किसी प्रेस कांफ्रेंस में सवालों के जवाब देंगे। इस स्पेस को देखें।’

कुल मिलाकर कहा जाए, तो अख़बार की संपादकीय टीम ने मोदी की पहली प्रेस कांफ्रेंस और उससे देश को हुई निराशा को बड़ी ही खूबसूरती के साथ बयां किया है। वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है, जब ‘द टेलीग्राफ’ अपनी रचनात्मकता के लिए तालियाँ बंटोर रहा है। अख़बार के फ्रंट पेज पर लगभग हर रोज़ इस तरह के प्रयोग देखने को मिल जाया करते हैं और यही ‘द टेलीग्राफ’ को दूसरों से अलग बनाते हैं।

‘द टेलीग्राफ’ की स्टोरी को आप यहां क्लिक कर देख सकते हैं-

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नेटवर्क18: दो बड़े पदों पर आसीन प्रफेशनल्स ने कहा 'अलविदा'

दोनों ने पिछले साल मार्च में ‘एनडीटीवी’ को छोड़कर इस मीडिया नेटवर्क के साथ की थी अपनी शुरुआत

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 14 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 14 November, 2019
network18

‘फोर्ब्स इंडिया’ की सीईओ और ‘नेटवर्क18’ की प्रेजिडेंट (मार्केटिंग) प्रियंका कौल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही ‘नेटवर्क18’ की एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) अदिति सिंह ने भी यहां से बाय बोल दिया है। दोनों ने पिछले साल मार्च में ‘नेटवर्क18’ में अपनी नई शुरुआत की थी। इससे पहले दोनों ‘एनडीटीवी’ में अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं। प्रियंका कौल को यहां ‘फोर्ब्स’ के सीईओ के साथ ही ब्रॉडकास्ट फोकस व ब्रैंडेड कंटेंट के हेड की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी।  

‘एनडीटीवी’ में अपनी पारी के दौरान प्रियंका कौल चीफ रेवेन्यू और मार्केटिंग ऑफिसर के पद पर जुड़ी हुई थीं। यहां उनके पास घरेलू के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मार्केट के रेवेन्यू की जिम्मेदारी थी। ‘एनडीटीवी’ में अपनी 20 साल की पारी के दौरान कौल ने टीवी के विभिन्न पहलुओं जैसे प्रॉडक्शन, कंटेंट क्रिएशन व एंकरिंग के साथ ही सेल्स और मार्केटिंग में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रियंका कौल ने मुंबई के सोफिया कॉलेज से इकनॉमिक्स की डिग्री ली है। इसके अलावा उन्होंने बोस्टन के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से मैनेजमेंट की पढ़ाई की है।

वहीं, अदिति सिंह को टेलिविजन इंडस्ट्री में काम करने का करीब 22 साल का अनुभव है। ‘नेटवर्क18’ को जॉइन करने से पहले वह ‘एनडीटीवी’ में सीओओ के साथ ही स्पेशल प्रोजेक्ट्स और इवेंट डिवीजन में बतौर हेड अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं। इससे पहले वह ‘एनडीटीवी24x7’ में चैनल प्रड्यूसर के तौर पर प्रॉडक्शन से जुड़े कामों को देखती थीं। अदिति सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से इकनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है। बता दें कि हाल ही में‘नेटवर्क18’ के डिजिटल बिजनेस की मार्केटिंग हेड संगीता अय्यर (Sangeetha Aiyer) ने भी इस्तीफा दे दिया था। यहां वह करीब दस साल से जुड़ी हुई थीं।

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TRAI: नए टैरिफ ऑर्डर में किए जा सकते हैं ये बदलाव

ट्राई के सचिव ने कहा, नए टैरिफ ऑर्डर में सिर्फ मामूली फेरबदल और आवश्यक संशोधन ही किए जाएंगे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 14 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 14 November, 2019
TRAI

‘भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण’ (TRAI)  के सचिव एसके गुप्ता ने नए टैरिफ ऑर्डर (NTO) में होने वाले बदलाव की खबरों के बीच स्पष्ट किया है कि इसमें खास कुछ भी नहीं बदलने वाला है। बस इसमें थोड़े बदलाव और आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

एसके गुप्ता का कहना है कि इसमें सिर्फ न्यू टैरिफ ऑर्डर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा, ‘ट्राई चैनल्स के बुके (bouquet) यानी कई चैनल्स के पैक का विरोधी नहीं है। नए टैरिफ ऑर्डर को लेकर बनाई गई पॉलिसी में थोड़ा यह बदलाव हो सकता है कि जो कंज्युमर ‘À la carte’ (अलग-अलग) आधार पर चैनल लेना चाहते हैं, उन पर बुके यानी पैक के लिए दबाव नहीं डाला जाए।’

गौरतलब है कि ट्राई ने नए टैरिफ नियम लागू किए हैं। इन नियमों में कंज्यूमर को अपने पसंद के चैनल चुनने का अधिकार दिया गया है और जिन चैनलों को वे देखना चाहेंगे, उन्हीं के लिए भुगतान करना होगा।

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काली कमाई के फेर में लगे थे पांच 'पत्रकार', इस तरह फूटा भांडा

जयपुर समेत देश के कई शहरों में घटनाओं को दे चुके हैं अंजाम, फर्जी पहचान पत्र और चैनलों की माइक आईडी बरामद

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 14 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 14 November, 2019
Fake Journalist

खुद को पत्रकार बताकर लोगों को धमकी देकर उगाही करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। मध्य प्रदेश में ग्वालियर की महाराजपुरा पुलिस ने इस गिरोह में शामिल पांच पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपित ग्वालियर के व्यवसायी को धमका रहे थे और 50 हजार रुपयों की मांग कर रहे थे। इनके कब्जे से फर्जी प्रेस कार्ड और कई चैनलों के माइक आईडी बरामद हुए हैं।

पुलिस के अनुसार, पकड़े गए सुभाष शुक्ला, भगवान बसंत, विजय सिरोलिया और हुकुम सिंह इंदौर के रहने वाले हैं, जबकि दीपक तिवारी ग्वालियर के डबरा का रहने वाला है। पूछताछ में आरोपितों ने पुलिस को बताया कि वह जयपुर सहित कई शहरों में इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं।

बताया जाता है कि ग्वालियर स्थित मुरार निवासी सूरज कौशल शेयरों की खरीद-फरोख्त का काम करता है। उसने डीडी नगर में अपना ऑफिस बनाया हुआ है। मंगलवार को पांच लोग सूरज के पास पहुंचे और खुद को पत्रकार बताते हुए उस पर फर्जी कंपनी बनाने का आरोप लगाने लगे। इन लोगों ने सूरज को इस बारे में खबर चलाने की धमकी भी दी और फिर वहां से चले गए।  

कुछ देर बाद ही इनमें से दीपक तिवारी नामक व्यक्ति वापस सूरज के पास आया और मामला निपटाने के नाम पर 50 हजार रुपए की मांग की। सूरज ने शाम को रुपए देने का वायदा किया और उन लोगों को महाराजपुरा गेट 2 पर आने को कहा। इसके बाद सूरज ने पुलिस को पूरे मामले से अवगत कराया। सूरज की शिकायत पर महाराजपुरा पुलिस ने पांचों फर्जी पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया।

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TV9 में होगी अब वरिष्ठ पत्रकार की 'ग्रुप एडिटर' के तौर पर एंट्री

30 साल से ज्यादा के करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में निभा चुके हैं बड़ी जिम्मेदारी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Thursday, 14 November, 2019
Last Modified:
Thursday, 14 November, 2019
TV9

प्रतिष्ठित मीडिया समूह ‘नेटवर्क18’ (Network18) की वेबसाइट ‘Firstpost.com’ के एडिटर बी.वी राव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, अब वह ‘टीवी9’ (TV9) समूह के साथ अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। हालांकि ऑफिशियल तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है, पर विश्वस्त सूत्र बता रहे है कि टीवी9 समूह को एक समूह संपादक की तलाश थी, जो शायद अब पूरी हो गई है।  बी.वी राव ने वर्ष 2015 में नेटवर्क18 जॉइन किया था।

बता दें कि अपने 30 साल से ज्यादा के करियर में राव ‘टाइम्स ग्रुप’,‘एक्सप्रेस ग्रुप’,‘जी न्यूज’ और ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

बी.वी राव ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1989 में ‘मिड-डे’ दिल्ली के साथ की थी। यहां उन्होंने वर्ष 1991 तक काम किया और फिर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ बेंगलुरु में बतौर न्यूज एडिटर अपनी नई पारी शुरू की। एक्सप्रेस समूह के साथ उन्होंने मुंबई व अहमदाबाद में भी काम किया।

वर्ष 1994 में बी.वी राव ने ‘फ्री प्रेस जर्नल’ का दामन थाम लिया। उन्हें एग्जिक्यूटिव एडिटर की जिम्मेदारी सौंपी गई और यहां उन्होंने करीब दो साल तक काम किया। राव करीब एक साल तक ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में डिप्टी रेजिडेंट एडिटर भी रहे हैं। इसके अलावा करीब तीन साल तक ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ में काम करने के अलावा वह ‘डीएनए’ मुंबई में करीब एक साल तक एसोसिएट एडिटर भी रह चुके हैं।

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'जागरण प्रकाशन' को मिली एडिशनल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर

13 नवंबर 2019 से प्रभावी होगा कार्यकाल। पांच साल के लिए की गई है नियुक्ति

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 13 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 13 November, 2019
Jagran Prakashan

‘जागरण प्रकाशन लिमिटेड’ (Jagran Prakashan Limited) ने दिव्या रूपचंद करणी (Divya Rupchand Karani) को कंपनी की अतिरिक्त महिला स्वतंत्र निदेशक (additional woman independent director) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 13 नवंबर 2019 से प्रभावी होगी और पांच साल के लिए होगी। 27 सितंबर 2019 को कंपनी की 43वीं सालाना आम बैठक में अनीता नैय्यर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद करणी को यह पद दिया गया है। बताया जाता है कि करणी ने पदभार ग्रहण कर लिया है।  

बता दें कि करणी को साउथ ईस्ट एशिया, लदंन और एशिया पैसिफिक में विभिन्न एजेंसियों, मार्केटर्स और मीडिया संस्थानों के साथ काम करने का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। इस दौरान वह ‘Trikaya Grey’, ‘O&M’, ‘MediaCom’, ‘Bates Asia’, Media Edge(TME) और MEC(Singapore) जैसी एजेंसियों के साथ काम कर चुकी हैं।

एक मार्केटर के रुप में उन्होंने चेयरमैन ऑफिस के मीडिया एडवाइजर के तौर पर ‘रिलायंस एडीए ग्रुप’ में जॉइन किया था और वहां से वर्ष 2009 में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ में बिजनेस हेड (वेस्ट) की जिम्मेदारी संभाली थी। ‘डेट्सू इंडिया’ को जॉइन करने से पहले वह स्वतंत्र सलाहकार के रूप में मीडिया एजेंसियों और मीडिया बिजनेस से जुड़े दिग्गजों को परामर्श देने का काम कर रही थीं।

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नेटवर्क18 में इस बड़े पद से संगीता अय्यर का इस्तीफा

19 साल से ज्यादा के करियर में वह रेडियो, रिटेल और एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 13 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 13 November, 2019
Sangeetha Aiyer

देश के बड़े मीडिया समूहों में शामिल ‘नेटवर्क18’ (Network18) से संगीता अय्यर (Sangeetha Aiyer) ने इस्तीफा दे दिया है। यहां वह करीब दस साल से जुड़ी हुई थीं। इन दिनों वह ‘नेटवर्क18’ के डिजिटल बिजनेस की मार्केटिंग हेड के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं। ‘नेटवर्क18’ के डिजिटल ब्रैंड जैसे-‘फर्स्टपोस्ट’, ‘मनीकंट्रोल’, ‘सीएनबीसीटीवी18’ आदि की मार्केटिंग से जुड़े सभी कामों की कमान उन्हीं के पास थी।

संगीता अय्यर के अगले कदम के बारे में फिलहाल जानकारी नहीं मिल सकी है। बता दें कि संगीता को 19 साल से ज्यादा का अनुभव है। इस दौरान वह रेडियो, रिटेल और एडवर्टाइजिंग के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा चुकी हैं। पूर्व में वह ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’, ‘रिलायंस मीडिया नेटवर्क’ और ‘स्टार नेटवर्क’ जैसे संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं।

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सर्वे में सामने आई पत्रकारों की सेक्स लाइफ से जुड़ी ये ‘सच्चाई’

अच्छी सेक्स लाइफ के लिए साफ हवा, स्वच्छ भोजन और अच्छे स्वास्थ्य के साथ-साथ खेतीबाड़ी भी अच्छा विकल्प हो सकता है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 13 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 13 November, 2019
Sex Life

लंदन में पिछले दिनों हुए एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि यदि आप अच्छी सेक्स लाइफ को एंजॉय करना चाहते हैं तो उसके लिए साफ हवा, स्वच्छ भोजन और अच्छे स्वास्थ्य के अलावा खेतीबाड़ी भी अच्छा विकल्प हो सकता है। सर्वे में यह भी खुलासा हुआ है कि किसी अन्य प्रोफेशन से जुड़े लोगों की तुलना में किसान अपनी सेक्स लाइफ को ज्यादा बेहतर तरीके से एंजॉय करते हैं।

दूसरी ओर पत्रकारिता से जुड़े लोग इस मामले में सबसे पीछे हैं। इस सर्वे के अनुसार, अधिकांश पत्रकारों का कहना था कि वे महीने में सिर्फ एक बार सेक्स लाइफ को एंजॉय करते हैं। सर्वे में शामिल वकीलों ने भी अपनी बेडरूम लाइफ को ज्यादा बेहतर नहीं बताया, लेकिन वे इस लिस्ट में पत्रकारों से आगे हैं।

 ‘Mirror.co.uk’ की रिपोर्ट के अनुसार, लाइफ स्टाइल कंपनी ‘Lelo UK’ द्वारा 2000 महिला-पुरुषों के बीच कराए गए इस सर्वे में खुलासा हुआ कि किसानों ने सबसे ज्यादा सेक्स लाइफ को एंजॉय किया है। 33 प्रतिशत से ज्यादा किसानों ने दिन में कम से कम एक बार सेक्स लाइफ एंजॉय करने का दावा किया।

सबसे ज्यादा सेक्स लाइफ को एंजॉय करने वालों की लिस्ट में जहां किसान सबसे आगे थे, वहीं 21 प्रतिशत आर्किटेक्ट और 17 प्रतिशत हेयर ड्रेसर्स ने भी रोजाना सेक्स लाइफ एंजॉय करने का दावा किया। पत्रकारों की बात करें तो उन्होंने सबसे कम सेक्स लाइफ एंजॉय करने की बात कही।

‘Lelo UK’ से जुड़ीं एक्सपर्ट केट मोयले (Kate Moyle) का कहना है, ‘हमारी नौकरी किस तरह की है और काम करने के घंटे कैसे हैं, कार्यस्थल का माहौल कैसा है, इसका प्रभाव न सिर्फ हमारी सेक्स लाइफ बल्कि हमारे पूरे जीवन पर पड़ता है। हमारी दिनचर्या कैसी है, इसका प्रभाव भी हमारी फिटनेस और एनर्जी पर पड़ता है।’

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550वें प्रकाश पर्व पर दर्शकों को पीटीसी नेटवर्क का बड़ा तोहफा

‘जियो टीवी’ और ‘पीटीसी प्ले एप’ पर इस सुविधा के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 12 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 12 November, 2019
PTC Network

गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर ‘पीटीसी नेटवर्क’ (PTC Network) ने दर्शकों को बड़ा तोहफा दिया है। दरअसल, सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब से सुबह-शाम गुरबाणी का सीधा प्रसारण दिखा रहे नेटवर्क ने 'वर्चुअल रिएलटी 360 डिग्री लाइव टेलिकास्ट’ की शुरुआत की है। शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लोंगोवाल और पीटीसी नेटवर्क के मैनेजिंग डायरेक्टर रबिन्दर नारायण ने इसका शुभारंभ सुल्तानपुर लोधी में किया।

रबिन्द्र नारायण ने बताया कि यह दुनिया का पहला रोजाना ‘वर्चुअल रिएलटी 360 डिग्री लाइव टेलिकास्ट’ है। इस तकनीक का फायदा यह है कि श्री दरबार साहिब से गुरबाणी का लाइव प्रसारण देखने वालों को ऐसा लगेगा कि वह वास्तव में श्री दरबार साहिब के अंदर बैठकर गुरबाणी का आनंद ले रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ‘जियो टीवी’ और ‘पीटीसी प्ले एप’ पर इस सुविधा के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। इस तकनीक का लाभ लेने के लिए दर्शकों को अपनी आंखों पर ‘वीआर गेअर’ नामक उपकरण पहनने के बाद मोबाइल पर यह सर्विस शुरू करनी पड़ेगी। इसके बाद ऐसा लगेगा कि सच में ही मौके पर मौजूद रहकर गुरबाणी सुन रहे हैं।

रबिन्द्र नारायण का कहना था कि हालांकि दर्शक कई दशकों से पीटीसी नेटवर्क के माध्यम से दरबार साहिब से गुरबाणी के लाइव टेलिकास्ट का आनंद लेते आ रहे हैं, लेकिन इस तकनीक के माध्यम से उन्हें ऐसा लगेगा कि वह कहीं दूर नहीं हैं, बल्कि वहीं बैठे हैं।

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उदय शंकर ने बताई वजह, क्यों करनी पड़ी पहले से आधी सैलरी पर नौकरी

‘स्टार’ और ‘डिज्नी इंडिया’ के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ के प्रेजिडेंट उदय शंकर ने ‘एएएआई-सुभाष घोषाल मेमोरियल लेक्चर’ में बताईं अपने जीवन से जुड़ी कई घटनाएं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 12 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 12 November, 2019
Uday Shankar

‘स्टार’ (Star) और ‘डिज्नी इंडिया’ (Disney India) के चेयरमैन और ‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी, एशिया पैसिफिक’ (The Walt Disney Company, Asia Pacific) के प्रेजिडेंट उदय शंकर ने मुंबई में 11 नवंबर को ‘एएएआई-सुभाष घोषाल मेमोरियल लेक्‍चर’ (AAAI-Subhas Ghosal Memorial Lecture) 2019 को संबोधित किया।  

कार्यक्रम का आयोजन ‘एडवर्टाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (AAAI)  और सुभाष घोषाल फाउंडेशन ने मिलकर किया था। मीडिया, एडवर्टाइजिंग और मार्केटिंग की दुनिया की जानी-मानी हस्तियों के बीच उदय शंकर ने मीडिया इंडस्ट्री में अपने करियर के साथ ही बिजनेस चलाने के दौरान सामने आईं चुनौतियों का भी जिक्र किया।

उदय शंकर का कहना था, ‘करीब तीन दशक पहले जब मैंने एक अखबार में बतौर पत्रकार अपना करियर शुरू किया था, तो उस समय मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि किसी दिन मुझे इस मंच पर इतने प्रतिष्ठित लोगों को संबोधित करने का मौका मिलेगा। तब मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि मैं आजीविका के लिए सिर्फ यह शुरुआत नहीं कर रहा हूं, बल्कि मैं ऐसे भारत की तलाश शुरू करने जा रहा हूं, जिससे मुझे इस देश को एक नए रूप में जानने का मौका मिलेगा, जो शायद किसी और प्रोफेशन में संभव नहीं होता। करियर के शुरुआती दौर में बतौर पत्रकार और बाद में एक मीडिया प्रोफेशनल के रूप में सक्रिय उदय शंकर ने बताया कि कैसे उन्हें इस देश को गहराई से जानने-समझने का मौका मिला।

इस दौरान उदय शंकर ने यहां तक के सफर में अपने जीवन में घटी कुछ घटनाओं के बारे में भी बताया। एक घटना का जिक्र करते हुए उदय शंकर ने बताया कि यह उन दिनों की बात है, जब उन्हें ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को जॉइन किए मुश्किल से कुछ हफ्ते ही हुए थे। एक दिन संपादक ने उनसे सरकार द्वारा चलाई जा रही टीकाकरण योजना का रिव्यू करने के लिए कहा। लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लोगों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था।  उदय शंकर को इस बात की पड़ताल करनी थी कि सरकार की इस टीकाकरण योजना का आम लोगों की जीवन पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।     

उदय शंकर के अनुसार, ‘उस समय मैंने सोचा था कि पत्रकारिता में करियर के दौरान मुझे बड़े-बड़े लोगों से जुड़ने का मौका मिलेगा, लेकिन यहां तो मेरे संपादक के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।’ शंकर ने बताया कि टीकाकरण अभियान की वास्तविकता जानने के लिए उन्हें बिहार के पूर्णिया में भेजा गया, जहां उन्होंने अत्यधिक गरीबी में रह रहे लोगों के बीच एक हफ्ता गुजारा और वहां उन्होंने जो देखा, उससे दुनिया को देखने का उनका नजरिया हमेशा के लिए बदल गया।

उन्होंने कहा, ‘वहां मैंने देखा कि दिल्ली में मैंने एक रेस्टोरेंट में खाने के लिए जितना भुगतान किया, उससे कम कीमत में कैसे एक वैक्सीन किसी बच्चे अथवा किसी परिवार का भविष्य बचा सकती है। वहां के लोग बहुत गरीब थे और ऐसे एक-दो परिवार नहीं थे, बल्कि मैंने ऐसे कई गांव देखे। मैंने देखा कि उन ग्रामीणों तक वैक्सीन पहुंचाना कितना मुश्किल था, जिससे किसी की जिंदगी बदल सकती थी। यहां मुझे ऐसे कुछ समर्पित स्वास्थ्य कर्मी भी दिखे, जो निस्वार्थ भाव से काम कर रहे थे। जेएनयू में पढ़ने वाले मेरे जैसे फायरब्रैंड स्टूडेंट और एक्टिविस्ट के लिए यहां के हालात बिल्कुल नई बात थी।’ उदय शंकर ने बताया कि इस अनुभव ने देश को देखने का उनका नजिरया ही बदल दिया।

एक और घटना का जिक्र करते हुए उदय शंकर ने बताया कि यह बात करीब 20 साल पुरानी है, जब वह ‘आजतक’ में थे। उदय शंकर के अनुसार, ‘हमने नोएडा में एक स्कूल बस के एक्सीडेंट के बारे में न्यूज ब्रेक की थी। यह जानकारी थोड़ी सही थी। दरअसल, एक्सीडेंट की बात तो सही थी, लेकिन हमने जिस स्कूल का जिक्र किया था, उसकी कई ब्रांच थीं और हमने गलत ब्रांच का जिक्र कर दिया था। हमने अपनी गलती पकड़ भी ली और इसे 20-30 मिनट में ठीक कर दिया। इस पूरे दिन मुझे एक महिला के फोन आते रहे। मेरी सहायक ने मुझे बताया कि वह महिला मुझसे बात करने के लिए काफी इच्छुक थी। कई घंटे बाद मैंने उस महिला की कॉल का जवाब दिया। उसने मुझे धन्यवाद दिया और काफी अच्छे से बात की।

उदय शंकर के अनुसार, ‘उस महिला ने मुझे जो बात बताई, वह मुझे अभी भी परेशान करती है। वह महिला एक सैनिक की विधवा थी, जिसके दोनों बच्चे उसी स्कूल में पढ़ते थे, जिसकी बस के एक्सीडेंट के बारे में हमसे गलती हुई थी। वह एक्सीडेंट उस महिला के घर के पास ही हुआ था। महिला ने मुझे बताया कि कारगिल में पति की शहादत के बाद से उसे हमेशा कहीं न कहीं कुछ ऐसा घटित होने का डर लगा रहता था, जिससे उसकी बची हुई दुनिया छिन सकती थी। उसने बताया कि वह अपने घर पर हमेशा ‘आजतक’ चैनल को चलाकर रखती थी, क्योंकि उसका मानना था कि कहीं भी कुछ होने पर  चैनल के माध्यम से उसे हमेशा जानकारी मिलती रहेगी।’

उदय शंकर का कहना था, ‘महिला ने मुझे बताया कि एक पल के लिए उसे लगा कि आजतक ने उसकी दुनिया उजाड़ दी है। कुछ मिनट के लिए उसे लगा कि इस दुनिया में जिस चैनल पर वह सबसे ज्यादा भरोसा करती है, उसी ने उसकी दुनिया को खराब कर दिया। महिला का यह भी कहना था कि उसे लगा था कि यह चैनल हमेशा भरोसेमंद और सही जानकारी देने वाला है, लेकिन इस गलती से हमने उसका यह भरोसा तोड़ दिया और वह दोबारा हम पर कभी भरोसा नहीं कर सकेगी। थोड़ी देर के लिए तो मुझे लगा कि वह महिला ओवररिएक्ट कर रही है, आखिर हम भी तो इंसान हैं, हमसे भी तो गलती हो सकती है, लेकिन फिर मेरी समझ में आ गया कि आखिर उसके कहने का क्या मतलब था।‘

‘उस महिला ने मुझे अपने बिजनेस में विश्वास और क्रेडिबिलिटी के बारे में एक बहुमूल्य सबक दे दिया था। हालांकि, वह न्यूज के बारे में बात कर रही थी, लेकिन एंटरटेनमेंट और एडवर्टाइजिंग के साथ-साथ हमारे बिजनेस का कोई अन्य पार्ट भी इससे अलग नहीं है। पिछले बीस सालों से उसके शब्द आज भी मेरे कानों में गूंज रहे हैं और आज भी उसकी आवाज मुझे सतर्क करती रहती है। मुझे लगता है कि क्या मैं अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने अथवा अपने निजी हित के लिए किसी के भरोसे को तोड़ रहा हूं। मुझे उम्मीद है कि मैं उसे दोबारा निराश नहीं करूंगा।‘   

यही नहीं, इस कार्यक्रम के दौरान उदय शंकर ने उस घटना के बारे में भी बताया, जिसने उनकी जिंदगी ही बदलकर रख दी। उदय शंकर ने बताया, ‘अखबार में रिपोर्टर होने के बाद भी मैं टीवी में काम करने के लिए इच्छुक था। वर्ष 1991 में CNN पर खाड़ी युद्ध का प्रसारण किया जा रहा था। मैं भी टीवी न्यूज के लिए काम करना चाहता था। एक दिन मेरी पत्नी ने कहा कि इस बारे में अवसर मिलने के बारे में सोचने के बजाय मैं इसके लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाता हूं। मैं उस समय अच्छी तरह से सैटल्ड हो चुका था और ‘Down To Earth’  नामक एक पब्लिकेशन में सीनियर एडिटर था, लेकिन मेरी पत्नी के शब्दों ने मुझ पर ऐसा प्रभाव डाला कि अगले दिन मैंने नौकरी छोड़ दी।’

उदय शंकर का यह भी कहना था कि छह महीने तक उन्हें कहीं से रेगुलर इनकम नहीं हुई और पत्नी की कमाई से किसी तरह घर का खर्च चला। काफी भटकने के बाद उन्हें ‘जी’ (Zee)  द्वारा लॉन्च किए जा रहे एक न्यूज बुलेटिन में नौकरी मिली, लेकिन वहां एक अलग तरह की समस्या हो गई। पहले के मुकाबले उनकी सैलरी में आधी से ज्यादा कमी हो गई थी। उदय शंकर के अनुसार, ‘एक पत्रकार की सैलरी वैसे भी ज्यादा नहीं थी, लेकिन पचास प्रतिशत की कटौती तो बेहद कम थी। लेकिन मैंने वहां पर काम किया। इसके बाद करीब पांच साल तक तमाम आर्थिक चुनौतियों से जूझना पड़ा। इसके बाद ‘आजतक’ आया और स्थिति में भी काफी सुधार हुआ।

उदय शंकर का कहना था, ‘संघर्ष के इस दौर में मुझे पर्सनल और प्रोफेशनल तौर पर काफी कुछ सीखने को मिला। हालांकि, मैंने जो सबसे अच्छा सबक सीखा, वह है कि हमेशा अपने अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए, अपने दिल की माननी चाहिए और परिणामों के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए, जब आपको पता हो कि आप सही कर रहे हैं। मैंने तब से हमेशा इन सबक का पालन किया है और यह मेरे लिए काफी अच्छा भी रहा है।’

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कुछ यूं वरिष्ठ पत्रकारों के चेहरे पर मुस्कान लाएगा जर्नलिस्ट वेलफेयर बोर्ड

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारिता की पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को भी किया जाएगा सम्मानित

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Tuesday, 12 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 12 November, 2019
Journalist

‘नेशनल जर्नलिस्ट वेलफेयर बोर्ड’ (National Journalist Welfare Board) इस साल 28 वरिष्ठ पत्रकारों को पेंशन देगा। 16 नवंबर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर इन पत्रकारों को पेंशन दी जाएगी। इस मौके पर ओडिशा में भुवनेश्वर स्थित जयदेव भवन में ‘दूरदर्शन’, ‘ऑल इंडिया रेडियो’, ‘प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो’ और ‘डीएवीपी’ के सहयोग से बोर्ड के तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

‘नेशनल जर्नलिस्ट वेलफेयर बोर्ड’ के प्रेजिडेंट प्रदोष पटनायक के अनुसार, इस मौके पर राज्य के एक वरिष्ठ पत्रकार को ‘उत्कल संवादिका रत्न’ (Utkal Sambadika Ratna) और राष्ट्रीय स्तर पर सात अखबारों के संपादकों को ‘राष्ट्रीय संवादिका गौरव’ (Rashtriya Sambadika Gourav) अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।

यही नहीं, पत्रकारिता की पढ़ाई में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने के लिए ‘उत्कल यूनिवर्सिटी’ की एमजे की छात्रा पद्मावती कुंडू को ‘रबि नारायण मोहंती मेमोरियल अवॉर्ड’ (Rabi Naryan Mohanty Memorial Award) प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा ‘‘संस्कृति यूनिवर्सिटी’ की छात्रा कबिता कुमारी दास को ‘गोपाल मिश्रा मेमोरियल अवॉर्ड’ (Gopal Mishra Memorial Award), ‘बरहामपुर यूनिवर्सिटी’ की छात्रा सोहिनी बिस्वाल को ‘बारेंद्र ढल मेमोरियल अवॉर्ड’ (Barendra Dhal Memorial Award), आईआईएमसी (ढेंकानाल) के छात्र आलोक चंद्र बारिक को ‘दिलीप सत्पथी मेमोरियल अवॉर्ड’ (Dilip Satapathy Memorial Award), रावेनशॉ यूनिवर्सिटी की छात्रा बिदुषी रॉय को ‘रामहरी मिश्रा मेमोरियल अवॉर्ड’ (Ramahari Mishra Memorial Award) से सम्मानित किया जाएगा।

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