जानें, क्यों न्यूज चैनल्स पर मेहरबान हो रहे हैं एडवरटाइजर्स

एफएमसीजी सेक्टर की ओर से न्यूज चैनल्स पर दिए जाने वाले विज्ञापनों में आई है काफी बढ़ोतरी

Last Modified:
Friday, 17 May, 2019
News Channel

न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप में इस साल काफी उछाल देखने को मिला है, फिर चाहे वो हिंदी चैनल हों, अंग्रेजी हों अथवा रीजनल चैनल ही क्यों न हों। दरअसल, इस साल कई ऐसी बड़ी घटनाएं हुई हैं, जिनकी वजह से न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप में यह इजाफा हुआ है। इनमें हम पुलवामा में हुए आतंकी हमले, पाकिस्तान पर भारत की ओर से की गई एयर स्ट्राइक और अब लोकसभा चुनाव का उदाहरण ले सकते हैं। न्यूज चैनल्स ने इन सभी घटनाओं को काफी बड़े स्तर पर कवर किया है और व्युअरशिप बढ़ने से एडवर्टाइजर्स ने भी इस जॉनर में काफी रुचि दिखाई है। यही कारण है कि न्यूज चैनल्स पर ‘फास्ट मूविंग कंज्यूमर्स गुड्स’ (FMCG) ब्रैंड्स के विज्ञापनों में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। यानी कह सकते हैं कि इसके पीछे सिर्फ चुनाव ही कारण नहीं है, बल्कि अन्य बड़ी घटनाओं के चलते भी ऐसा हुआ है।  

इस बारे में हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने इंडस्ट्री से जुड़े कुछ दिग्गजों से बात की, जिनका कहना है कि फ्रीडिश प्लेटफॉर्म से कुछ जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स (GECs) के हटने के कारण भी एफएमसीजी ब्रैंड्स की ओर से न्यूज चैनल्स को दिए जाने वाले विज्ञापन में बढ़ोतरी हुई है।

इस ट्रेंड के बारे में ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) के सीईओ विकास खनचंदानी का कहना है, ‘न्यूज चैनल्स को बड़ी संख्या में एफएमसीजी ब्रैंड्स के विज्ञापन सिर्फ चुनाव की वजह से नहीं मिल रहे हैं, बल्कि इसके पीछे तमाम कारण है। ऐसा इसलिए हो रहा है कि हिंदी न्यूज खासकर ‘फ्री टू एयर’ (FTA) चैनल्स की पहुंच आज के दिनों में बहुत ज्यादा है। सबसे खास बात यह है कि बड़ी संख्या में ग्रामीण ऑडियंस भी इन चैनल्स से जुड़ रहे हैं, क्योंकि बड़े एंटरटेनमेंट चैनल्स फ्रीडिश प्लेटफॉर्म पर मौजूद नहीं हैं। हिंदी न्यूज चैनल्स पर एफएमसीजी ब्रैंड्स की मौजूदगी इसलिए भी बढ़ी है कि उनके पास ऑडियंस के लिए चुनिंदा प्लेटफॉर्म ही उपलब्ध हैं। फ्रीडिश पर चुनिंदा मूवीज, न्यूज और म्यूजिक चैनल ही उपलब्ध हैं, ऐसे में इन ब्रैंड्स की व्युअरशिप इस तरह के चैनल्स पर कम है और यही कारण है कि न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप ज्यादा होने से ये ब्रैंड्स इस तरफ का रुख कर रहे हैं।’

एक रिपोर्ट्स के अनुसार, कई बड़े ब्रॉडकास्टर्स ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के नए टैरिफ ऑर्डर लागू होने के बाद अपने हिंदी एंटरटेनमेंट चैनल्स को डीडी फ्रीडिश प्लेटफॉर्म से हटा लिया है। इनमें ‘कलर्स रिश्ते’ (Colors Rishtey) और ‘जी अनमोल’ (Zee Anmol) जैसे कई चैनल्स शामिल हैं।

इस बारे में ‘एबीपी न्यूज नेटवर्क’ (ABP News Network) के सीईओ अविनाश पांडे ने जोर देकर कहा, ‘एफएमसीजी ब्रैंड्स के लिए न्यूज जॉनर हमेशा से काफी फायदे का सौदा रहा है। जैसे- पतंजलि, इमामी, डाबर आदि न्यूज जॉनर पर काफी खर्च करने वालों में शामिल हैं। यहां तक कि कोलगेट ने भी पिछली साल और उससे भी पिछली साल न्यूज जॉनर में विज्ञापन पर काफी खर्च किया था।‘

हालांकि उन्होंने यह भी माना कि टियर-टू (Tier-II) शहरों में जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की गैरमौजूदगी ने न्यूज चैनल्स के आगे बढ़ने में काफी मदद की है। अविनाश पांडे ने कहा, ‘यदि आप आजकल की टीवी की दुनिया को देखें तो डीडी फ्रीडिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूज देखने वालों की संख्या में बहुत ज्यादा वृद्धि हुई है। यदि हम डीडी फ्रीडिश के पैटर्न को देखें तो सबसे पहले इस पर न्यूज जॉनर ही आया था, ऐसे में उसी का विस्तार हुआ है। आखिर, कोई भी सर्विस प्रोवाइडर तभी अपना विस्तार करेगा, जब उसके पास कंटेंट होगा। इसके बाद टियर-टू (Tier-II) शहरों में इस प्लेटफॉर्म पर जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स शामिल हुए, जिन्हें अब हटा लिया गया है। यही कारण है कि इन जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की पहुंच काफी घट गई है।’  

अविनाश पांडे का कहना है, ‘इन दिनों लोकसभा चुनाव की कवरेज के कारण न्यूज जॉनर में लगभग दोगुना इजाफा हुआ है, ऐसे में डीडी फ्रीडिश पर कुछ जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की कमी के कारण एफएमसीजी समेत प्रॉडक्ट निर्माताओं के लिए हिंदी न्यूज काफी बेहतरीन माध्यम बन गया है। यही नहीं, जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स के मुकाबले न्यूज चैनल्स पर इन कंपनियों का खर्च भी कम आ रहा है। जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स पर किए जाने वाले खर्च के लगभग आधे में ही इन ब्रैंड्स की पहुंच 90 मिलियन से 100 मिलियन लोगों तक हो रही है। एडवर्टाइजर्स को यह समझना चाहिए कि यह काफी प्रभावी मॉडल है और निश्चित रूप में टियर टू (Tier-II) शहरों में जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स की गैरमौजूदगी ने न्यूज चैनल का शेयर बढ़ाने में काफी मदद की है।’

इस बारे में ‘इमामी लिमिटेड’ (Emami Ltd) के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (मीडिया) बशाब सरकार (Bashab Sarkar) ने बताया कि कैसे उनकी कंपनी के लिए यह एक वरदान की तरह रहा है। उन्होंने कहा, ‘यह बात सही है कि फरवरी के मध्य में हुई डीडी फ्रीडिश की नीलामी में कई बड़े चैनल नेटवर्क्स ने हिस्सा नहीं लिया, जिसका प्रभाव मार्च से उनके फ्री टू एयर जनरल एंटरटेमेंट चैनल की रेटिंग पर पड़ा। ऐसे में फ्रीडिश पर बचे चैनलों को फायदा हुआ। यह इमामी जैसे उन एडवर्टाइजर्स के लिए एक तरह से वरदान साबित हुआ, जो ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस करते हैं। दरअसल चुनाव और अन्य बड़ी घटनाओं के कारण इन क्षेत्रों में हिंदी न्यूज चैनल्स देखने वालों की संख्या काफी बढ़ने से उनके एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में भी काफी इजाफा है।’

वहीं, ‘डाबर इंडिया लिमिटेड’ (Dabur India Ltd) के हेड (मीडिया) राजीब दुबे ने भी इस बात से सहमति जताई है कि डीडी फ्रीडिश से जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स के हटने का असर दिखा है। उन्होंने कहा, हम न्यूज जॉनर में निवेश करना जारी रखेंगे, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इसे देखते हैं। इससे बड़ी संख्या में व्युअरशिप मिलती है।

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Disney India में अरवामुधन. के का कद बढ़ा, अब मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

इस प्रमोशन से पहले वह स्टार इंडिया में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (रेगुलेटरी) की जिम्मेदारी निभा रहे थे, जो अब वॉल्ट डिज्नी का हिस्सा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 15 January, 2022
Last Modified:
Saturday, 15 January, 2022
Aravamudhan K

‘द वॉल्ट डिज्नी कंपनी’ (The Walt Disney Company) इंडिया ने अरवामुधन. के (Aravamudhan K) को एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर (गवर्नमेंट रिलेशंस) के पद पर प्रमोट किया है। इस प्रमोशन से पहले वह ‘स्टार इंडिया’ (Star India) में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (रेगुलेटरी) की जिम्मेदारी निभा रहे थे, जो अब वॉल्ट डिज्नी का हिस्सा है।

बता दें कि अरवामुधन स्टार और डिज्नी इंडिया की नियामक टीम का अहम हिस्सा रहे हैं। ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में अपने करीब डेढ़ दशक लंबे करियर में उन्होंने डिजिटल एड्रेसेबल सिस्टम (DAS), न्यू टैरिफ ऑर्डर (NTO) और ओवर द टॉप (OTT) कंटेंट रेगुलेशन सहित बड़े रेगुलेटरी बदलाव किए हैं।

अपनी लिंक्डइन पोस्ट में अरवामुधन ने लिखा है, ‘स्टार इंडिया में आज मेरे 15 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस दौरान मैंने प्रसारण क्षेत्र और कंपनी में कई बदलाव देखे। मेरे सलाहकारों, सहयोगियों, दोस्तों, परिवार और हितधारकों को धन्यवाद, जिन्होंने पेशेवर के रूप में मेरे विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई है।’

अरवामुधन ने कॉरपोरेट सेक्टर में अपने करियर की शुरुआत ‘मीडिया कंटेंट एंड कम्युनिकेशंस सर्विसेज’ (MCCS) इंडिया में बतौर मैनेजर की थी, जिसे अब ‘एबीपी नेटवर्क‘ (ABP Network) के नाम से जाना जाता है। इसके बाद उन्होंने ‘स्टार इंडिया’ में मैनेजर (कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस) के पद पर जॉइन कर लिया था।  

वह ‘स्टार इंडिया’ की गवर्नमेंट रिलेशंस और रेगुलेटरी अफेयर्स टीम में बतौर मैनेजर काम कर चुके हैं। इसके बाद उन्हें एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट के पद पर प्रमोट कर दिया गया था। इसके अलावा अरवामुधन ने भारत सरकार के साथ उद्योग मंत्रालय में भी पांच साल काम किया है। वह प्रोडक्शन हाउस-वीडियो मैगज़ीन (Eyewitness), दूरदर्शन, और होम टीवी (जनरल एंटरटेनमेंट चैनल) के साथ वर्ष 1993 से टेलीविजन इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं।

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ओपिनियन पोल में India News ने जाना, इन राज्यों में अबकी बार किसकी बनेगी सरकार!

पांच राज्यों में होने जा रहे आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर ‘इंडिया न्यूज-जन की बात’ ने मणिपुर को छोड़कर बाकी चार राज्यों के ओपिनियन पोल के परिणाम जारी किए हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 15 January, 2022
Last Modified:
Saturday, 15 January, 2022
Opinion Poll

पांच राज्यों में होने जा रहे आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर ‘इंडिया न्यूज-जन की बात’ ने मणिपुर को छोड़कर बाकी चार राज्यों के ओपिनियन पोल के परिणाम जारी किए हैं। इस ओपिनियन पोल में अनुमान लगाया गया है कि बीजेपी एक बार फिर यूपी में अपनी वापसी करेगी, वहीं पंजाब के वोटर इस बार आम आदमी पार्टी पर भरोसा कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश- सर्वे में बीजेपी+को 226-246, SP+ को 144-160, BSP को 8-12, कांग्रेस को एक और अन्य को चार सीटें मिलती दिख रही हैं। वोट शेयर में बीजेपी+ को 39-40%, SP+ को 34.5-36%, BSP को 13-13.5%, कांग्रेस को 4-6% और अन्य को 6.5-7.5% मिलता हुआ दिख रहा है। पसंदीदा मुख्यमंत्री में योगी ही पहली पसंद बने हुए हैं। योगी आदित्यनाथ पर 56%, अखिलेश यादव पर 32%, मायावती पर 9% और प्रियंका गांधी पर 2% लोगों ने भरोसा जताया है।

ओपिनियन पोल में यूपी में लोग किस आधार पर वोट देंगे? के सवाल पर 25% लोगों ने जाति/धर्म, 20% लोगों ने विकास, 20% लोगों ने कानून व्यवस्था, 5% लोगों ने महंगाई, 10% लोगों ने बेरोजगारी और 18% लोगों ने योजनाओं का लाभ को वोट देने का आधार बताया।

उत्तराखंड- इस पहाड़ी राज्य में बीजेपी की दोबारा सत्ता में वापसी होती दिख रही है। बीजेपी को टक्कर देती हुई कांग्रेस दूसरे नंबर पर रह सकती है। ओपिनियन पोल के मुताबिक आम आदमी पार्टी का उत्तराखंड में खाता खुल सकता है।

ओपिनियन पोल में बीजेपी को 34-38, कांग्रेस को 24-33, आम आदमी पार्टी को 2-6 और अन्य को 1-2 सीटें मिल सकती हैं। वोट शेयर में बीजेपी को 38%, कांग्रेस को 36%, आप को 13%, BSP को 2% और अन्य को 11% वोट मिलते दिख रहे हैं।

सर्वे में उत्तराखंड के पसंदीदा मुख्यमंत्री के सवाल पर 42% लोगों ने पुष्कर सिंह धामी, 24% लोगों ने हरीश रावत, 4% लोगों ने गणेश गोदियाल, 18% लोगों ने अनिल बलूनी, 10% लोगों ने अजय कोठियाल का नाम लिया।

मुख्य चुनावी मुद्दे के सवाल पर 40% लोगों ने पलायन, 25% लोगों ने विकास, 15% लोगों ने स्वास्थ्य और 10% लोगों ने शिक्षा को मुख्य मुद्दा बताया। मौजूदा सरकार को 40% लोगों ने अच्छा, 35% लोगों ने औसत और 25% लोगों ने खराब बताया।

गोवा- ‘इंडिया न्यूज-जन की बात‘ के ओपिनियन पोल में गोवा में बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है। गोवा में ‘आप‘ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है, टीएमसी का खाता खुल सकता है और कांग्रेस को नुकसान होता दिख रहा है।

बीजेपी को 18-22, आम आदमी पार्टी को 7-9, कांग्रेस को 5-6, टीएमसी को 1-2 और अन्य को 4-6 सीटें मिलती दिख रही हैं। वोट शेयर में बीजेपी बाकी पार्टियों से काफी आगे है। वोट शेयर में बीजेपी को 37-40%, आम आदमी पार्टी को 23-24%, कांग्रेस+ को 19-20%, टीएमसी को 3-5% और अन्य को 11-18% मिले हैं।

‘इंडिया न्यूज-जन की बात‘ में गोवा के लोगों से जब ये पूछा गया कि मौजूदा सरकार के प्रति आपकी राय क्या है तो जवाब में 33% लोगों ने अच्छा, 33% लोगों ने खराब, 32% लोगों ने औसत कहा। गोवा के सबसे अच्छे सीएम के सवाल पर लोगों ने मनोहर पर्रिकर को 56%, प्रमोद सावंत को 20%, प्रताप सिंह राणे को 16% लोगों ने बेहतर बताया।

75% लोगों ने बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा बताया, वहीं 12% ने खनन और 10% ने विकास को बड़ा मुद्दा कहा। गोवा के लिए सबसे बड़ा सवाल है दल बदलने वाले नेता, 90% लोगों ने कहा कि वो दल बदलुओं से परेशान हैं।

पंजाब- ओपिनियन पोल में पंजाब में ‘आम आदमी पार्टी‘ की सरकार बनती दिख रही है, जबकि सर्वे में कांग्रेस की मौजूदा सरकार को पंजाब की जनता ने नकार दिया है। सर्वे में आम आदमी पार्टी को 58-65, कांग्रेस को 32-42, शिरोमणि अकाली दल  को 15-18, बीजेपी+ को 1-2 और अन्य को 0-1 सीट मिलती दिख रही है।

वोट शेयर में आम आदमी पार्टी को 38-39%, कांग्रेस को 34.5- 35%, शिरोमणि अकाली दल को 19- 20%, बीजेपी+ को 5- 6% और अन्य को 1-2.5% वोट मिलते दिख रहे हैं। सर्वे में पंजाब के लोगों से जब ये पूछा गया कि चुनाव में मुख्य मुद्दा क्या है, तो 23.4% लोगों ने महंगाई, 16% लोगों ने विकास, 20.8% लोगों ने बेरोजगारी, 8.9% लोगों ने ड्रग्स, 10.2% लोगों ने शिक्षा को मुख्य मुद्दा बताया।

कृषि कानून क्या चुनावी मुद्दा बनेगा? के सवाल पर 70% लोगों ने हां जबकि 20% लोगों ने नहीं कहा। क्या पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक का मतदाताओं पर असर होगा? के सवाल पर 60% लोगों ने हां और 40% लोगों ने नहीं कहा।

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जानें, न्यूज की रेटिंग्स फिर से शुरू करने को लेकर क्या बोले प्रसार भारती के CEO

‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ ने देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया से न्यूज जॉनर की रेटिंग्स को तुरंत प्रभाव से जारी करने के लिए कहा है।

Last Modified:
Friday, 14 January, 2022
Shashi Shekhar Vempati

नेशनल पब्लिक ब्रॉडकास्टर ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) के सीईओ शशि शेखर वेम्पती ने कहा है कि देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया को न्यूज जॉनर की रेटिंग्स को जल्द से जल्द फिर शुरू कर देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि न्यूज रेटिंग्स को फिर से शुरू करने में और देरी करने का कोई कारण नहीं है। बता दें कि वेम्पती प्रसार भारती के प्रतिनिधि के रूप में BARC इंडिया के बोर्ड में भी शामिल हैं।

पत्रकार विक्की नानजप्पा (Vicky Nanjappa) द्वारा किए गए एक ट्वीट के जवाब में वेम्पती ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि न्यूज जॉनर के लिए रेटिंग्स जल्द से जल्द फिर से शुरू कर दी जाएगी। मुझे इस मामले में और देरी करने के लिए BAR इंडिया के पास कोई कारण नहीं दिखता है।’

नानजप्पा ने एक ट्वीट में शशि शेखर वेम्पती को टैग करते हुए सवाल उठाया था कि न्यूज रेटिंग्स कब आएगी। उनका कहना था, ‘शशि सर, अब जबकि टीआरपी कमेटी की रिपोर्ट आ चुकी है और मंत्रालय ने BARC से न्यूज रेटिंग्स मापन शुरू करने के लिए कहा है तो पहली न्यूज रेटिंग कब आएगी। 

बता दें कि ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने बुधवार को BARC से न्यूज जॉनर की रेटिंग्स को तुरंत प्रभाव से जारी करने के लिए कहा था। इसके साथ ही मासिक प्रारूप (monthly format) में इस जॉनर के लिए पिछले तीन महीने का डाटा भी जारी करने के लिए कहा गया है। मंत्रालय का कहना है कि संशोधित सिस्टम के अनुसार, न्यूज और प्रमुख जॉनर्स (Genres) की रिपोर्टिंग चार हफ्ते के औसत की अवधारणा (four week rolling average concept) पर आधारित होगी।  

हालांकि, BARC इंडिया ने न्यूज व्युअरशिप डाटा जारी करने को लेकर अभी औपचारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि न्यूज रेटिंग्स दोबारा से जारी होने में कुछ हफ्तों की देरी हो सकती है।

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Disney+ Hotstar में नमिता वेद को मिली नई जिम्मेदारी

‘डिज्नी+ हॉटस्टार’ (Disney+ Hotstar) में नमिता वेद को कस्टमर मार्केटिंग का हेड बनाया गया है।

Last Modified:
Friday, 14 January, 2022
namitaved5454

‘डिज्नी+ हॉटस्टार’ (Disney+ Hotstar) में नमिता वेद को कस्टमर मार्केटिंग का हेड बनाया गया है। वह अगस्त 2021 में इस स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ीं हुईं हैं।

 ‘डिज्नी+ हॉटस्टार’ से पहले, उन्होंने मोबाइल मार्केटिंग एसोसिएशन (MMA) APAC के साथ मार्केटिंग, बिजनेस डेवलपमेंट एंड स्ट्रैटेजिक एलायंस, इंडिया की हेड के तौर पर काम किया था।

उन्हें एक दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। वेद ने WAT Media, Networkplay.in, Vserv और AdColony जैसी कंपनियों के साथ काम किया है।

उन्होंने पीआर और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। उन्हें डिजिटल मीडिया, बिजनेस डेवलपमेंट और इवेंट्स में 8 साल का और मार्केटिंग मिलाकर कुल 11 साल का अनुभव है।

MMA से पहले, वह 'FreakOut' की मार्केटिंग कंसलटेंट थीं, जोकि एक जापानी ऐड नेटवर्क कंपनी थी, जहां उन्होंने कंपनी की APAC मार्केटिंग गतिविधियों को संभाला।

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NBF ने BARC से की मांग, बिना किसी देरी के जारी करे न्यूज रेटिंग

न्यूज जॉनर की टीवी रेटिंग्स रोके जाने को लेकर ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ ने देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ के समक्ष क्षोभ जाहिर किया है। 

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 January, 2022
Last Modified:
Thursday, 13 January, 2022
NBF BARC

न्यूज जॉनर की टीवी रेटिंग्स रोके जाने को लेकर ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation) ने देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) के समक्ष क्षोभ जाहिर किया है। 

न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दे सुलझाने और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के हितों की रक्षा के लिए गठित ‘एनबीएफ’ ने इस बारे में एक स्टेटमेंट जारी किया है। इस स्टेटमेंट में ‘एनबीएफ’ का कहना है, ‘दर्शकों की संख्या का डेटा BARC के पास है और मंत्रालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इसे रोकना आवश्यक नहीं है। BARC को मंत्रालय के आदेशों का अनुपालन करते हुए बिना किसी और देरी के न्यूज चैनल्स की रेटिंग्स को जारी करना चाहिए। जो न्यूज चैनल्स रेटिंग्स नहीं चाहते हैं तो उन्हें स्वेच्छा से छूट दी जा सकती है अर्थात उन्हें इससे अलग रखा जा सकता है।’ 

इसके साथ ही ‘एनबीएफ’ ने BARC से बिना किसी देरी के न्यूज जॉनर की रेटिंग्स जारी करने का आह्वान किया है ताकि इस जॉनर के सामने आने वाली गंभीर चुनौती को समाप्त किया जा सके क्योंकि किसी भी रेटिंग्स के अभाव में विज्ञापन पर काफी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।  

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अरनब गोस्वामी बोले, NBF के लिए बड़ी जीत है न्यूज रेटिंग्स की वापसी

सूचना प्रसारण मंत्रालय ने बुधवार को जारी एक आदेश में BARC से न्यूज जॉनर की रेटिंग्स को तत्काल प्रभाव से जारी करने के लिए कहा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 12 January, 2022
Last Modified:
Wednesday, 12 January, 2022
Arnab Goswami

‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने देश में टेलिविजन दर्शकों की संख्या मापने वाली संस्था ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया से न्यूज जॉनर की रेटिंग्स को तुरंत प्रभाव से जारी करने के लिए कहा है। इसके साथ ही मासिक प्रारूप (monthly format) में इस जॉनर के लिए पिछले तीन महीने का डाटा भी जारी करने के लिए कहा गया है।

सूचना प्रसारण मंत्रालय के इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी ने इसे ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (NBF) के लिए बड़ी जीत बताया है।

उन्होंने कहा है, ‘यह न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन के लिए बड़ी जीत है। मुझे खुशी है कि एनबीएफ के सदस्य इस मांग को पूरा कराने के लिए चट्टान की तरह एक साथ खड़े रहे। मुझे एनबीएफ पर बहुत गर्व है, जिसका नेतृत्व करने और सेवा करने का मुझे सौभाग्य मिला है।’

बता दें कि अरनब गोस्वामी न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दे सुलझाने और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स के हितों की रक्षा के लिए गठित ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation) के गवर्निंग बोर्ड के प्रेजिडेंट हैं।

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अडानी ग्रुप के साथ डील की खबरों को Zee Media ने बताया महज अफवाह, कही ये बात

जी मीडिया के अनुसार, सोशल मीडिया पर चल रही इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। दोनों के बीच इस तरह की कोई डील नहीं हुई है और यह खबरें महज अफवाह हैं।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 12 January, 2022
Last Modified:
Wednesday, 12 January, 2022
Zee Media

‘जी मीडिया’ (Zee Media) और ‘अडानी’ (Adani) ग्रुप के बीच सौदेबाजी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। दोनों के बीच इस तरह की कोई डील नहीं हुई है और यह खबरें महज अफवाह हैं।

बता दें कि हाल ही में सोशल मीडिया पर इस तरह की खबरें चल रही थीं, जिनमें दावा किया जा रहा था कि अडानी समूह ने ‘जी मीडिया’ में हिस्सेदारी खरीदी है और यह डील कैश में की गई है।

इस तरह की खबरों में यह भी उल्लेख किया गया कि गौतम अडानी और एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ सुभाष चंद्रा के बीच एक विशेष समझौता हुआ है। हालांकि, जी मीडिया कंपनी के प्रबंधन ने इस तरह के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

जी मीडिया कंपनी प्रबंधन के प्रवक्ता रौनक जटवाला (Ronak Jatwala) का इस बारे में कहना है, ‘कुछ पत्रकारों द्वारा डॉ. सुभाष चंद्रा और गौतम अडानी के बारे में जी मीडिया से संबंधित बातचीत को लेकर फैलाई जा रही खबरों का हम पूरी तरह खंडन करते हैं। इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और यह महज अफवाह हैं।’ जी मीडिया प्रबंधन का यह भी कहना है कि दोनों समूहों के बीच इस तरह की कोई डील या बातचीत नहीं हुई है। ऐसी किसी भी अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए।  

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पत्रकारिता छोड़ न्यूज एंकर निदा अहमद ने थामा कांग्रेस का दामन, इस सीट से लड़ेंगी चुनाव

हिंदी नेशनल न्यूज चैनल 'न्यूज इंडिया' में सीनियर प्रड्यूसर कम एंकर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहीं निदा अहमद ने यहां से बाय बोलकर अब राजनीति की ‘पिच’ पर कदम रखा है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 12 January, 2022
Last Modified:
Wednesday, 12 January, 2022
Nida Ahmad

हिंदी नेशनल न्यूज चैनल 'न्यूज इंडिया'  (NEWS INDIA) में सीनियर प्रड्यूसर कम एंकर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहीं निदा अहमद ने यहां से बाय बोलकर अब राजनीति की ‘पिच’ पर कदम रखा है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया है। कांग्रेस मीडिया सेल के प्रमुख नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता जॉइन कराई। पार्टी ने उन्हें संभल सीट से अपना उम्मीदवार भी तय कर दिया है। 

निदा अहमद (Nida Ahmed) ने कांग्रेस में शामिल होने के बाद अपने फेसबुक पेज पर लिखा है, ‘मैं तहे दिल से पार्टी का शुक्रिया अदा करते हुए पार्टी को विश्वास दिलाना चाहूंगी कि जो भरोसा पार्टी ने मुझ पर जताया है, मैं उसको अपनी पूरी ईमानदारी और सामर्थ्य से इस विश्वास पर खरा उतरने की हर सम्भव कोशिश करूंगी। इस बार कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में हमने आधी आबादी की जंग लड़ने की ठानी है, हमारी जंग आगे ऐसे ही जारी रहेगी। लड़की वह होती है जो अपने हौसले से तकदीर को बदल देती है। मैं समाज में महिलाओं को अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए जागरूक करूंगी।’

बता दें कि निदा अहमद ने ‘इंडिया न्यूज’ को अलविदा कहकर कुछ महीने पहले 'न्यूज इंडिया'  से अपनी पारी की नई शुरुआत की थी। ‘इंडिया न्यूज‘ से पहले निदा अहमद ‘जी यूपी-उत्तराखंड’ में एंकर कम प्रड्यूसर की जिम्मेदारी निभा रही थीं। वहीं, ‘जी यूपी-उत्तराखंड’ में शामिल होने से पहले निदा अहमद अक्टूबर 2018 से 2020 तक इंडिया टुडे ग्रुप के ‘तेज’ न्यूज चैनल की टीम हिस्सा थीं। ‘तेज’ में वह सीनियर एसोसिएट प्रड्यूसर के साथ-साथ एंकरिंग की भी जिम्मेदारी संभाल रहीं थीं। यूपी-उत्तराखंड के रीजनल न्यूज चैनल ‘न्यूज 1 इंडिया’ से निदा यहां पहुंची थीं। इससे पहले निदा अहमद ने ‘समाचार प्लस’ में बतौर एंकर करीब दो साल काम किया।

निदा अहमद ने अपने करियर की शुरुआत क्राइम रिपोर्टर के रूप में की थी। 'इंडिया न्यूज' 'जी यूपी उत्तराखंड, 'जी सलाम' 'तेज', 'समाचार प्लस', के अतिरिक्त निदा 'ईटीवी नेटवर्क' NETWORK18 और 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' में भी काम कर चुकी हैं। निदा ने 'न्यूज वर्ल्ड इंडिया' से अपने करियर की शुरुआत बतौर असिसटेंट प्रड्यूसर की थी, जहां से ही उन्होंने एंकरिंग की बारीकियों को सीखा और क्राइम रिपोर्टर की भूमिका निभाई।

निदा अहमद का जन्म उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हुआ था। उनके दादा लगातार 25 साल तक संभल के चेयरमैन रहे। उनके पिता टीचर और मां हाउस वाइफ हैं। यहां तक आने का सबसे बड़ा श्रेय अगर वो किसी को देना चाहती हैं तो वो खुद बोलती हैं कि मैं जिसकी वजह से यहां हूं वो हैं उनके पति रजा अहमद, जो कि उनके लिए हमेशा एक अच्छे दोस्त की तरह खड़े रहे, क्योंकि निदा आगे पढ़ना चाहती थीं लेकिन बारहवीं के बाद ही शादी हो जाने के कारण पढ़ाई बीच में छूट गई। लेकिन निदा अहमद ने हार नहीं मानी। शादी के बाद वो दिल्ली आ गईं और एक बेटे को जन्म देने के बाद निदा ने अपने पति के सामने आगे पढ़ायी करने और जीवन में कुछ बनने की इच्छा जाहिर की और उस दिन से लेकर आज तक उनके पति का सपोर्ट हमेशा उनके साथ रहता है। शादी के बाद अपनी आगे की पढ़ाई करके और साथ ही अपने घर की भी सारी जिम्मेदारियां उठाते हुए निदा आज इस मुकाम पर पहुंची हैं। निदा अहमद को मीडिया इंडस्ट्री में भी काफी पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

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महिला पत्रकारों के ऑनलाइन उत्पीड़न पर एडिटर्स गिल्ड नाराज, की ये मांग

पिछले कुछ दिनों से विभिन्न ऐप्स के जरिए महिला पत्रकारों समेत अन्य धर्म की महिलाओं को निशाना बनाने की बात सामने आ रही है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 12 January, 2022
Last Modified:
Wednesday, 12 January, 2022
Editors Guild of India

पिछले कुछ दिनों से विभिन्न ऐप्स के जरिए महिला पत्रकारों समेत अन्य धर्म की महिलाओं को निशाना बनाने की बात सामने आ रही है। इन महिलाओं के खिलाफ ऑनलाइन उत्पीड़न, ट्रोलिंग और यौन शोषण की धमकी के बढ़ते मामले के बीच एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने कड़ी आलोचना व्यक्त करते हुए नाराजगी जाहिर की है। गिल्ड ने सरकार और सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।

गिल्ड ने कहा है कि सरकार को ऐसी आपराधिक सोच रखने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, जिससे पत्रकार अपनी जिम्मेदारी निभा सकें। 

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया की अध्यक्ष सीमा मुस्तफा के द्वारा मंगलवार को जारी एक संदेश में कहा गया है कि हाल ही में यह देखने में आ रहा है कि जो भी पत्रकार सरकार की आलोचना करते हैं, उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाता है। महिला पत्रकारों को गाली दी जाती है और विभिन्न ऐप्स पर उनसे अभद्र बर्ताव किया जाता है। गिल्ड ने कहा है कि सरकार को इस तरह की सोच रखने वालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जिससे लोकतंत्र में पत्रकार अपनी जिम्मेदारी निभा सकें। 

हाल ही में सुल्ली डील्स और बुल्ली बाई ऐप के जरिए मुस्लिम महिलाओं की ऑनलाइन नीलामी के मामले पर भी एडिटर्स गिल्ड ने कार्रवाई की अपील की है। एडिटर्स गिल्ड ने कहा कि गिटहब प्लेटफॉर्म के जरिए सरकार की आलोचना करने वाली पत्रकारों की निलामी की बात हुई है। हालांकि सरकारी एजेंसियों ने इन ऐप्स के पीछे के लोगों को गिरफ्तार किया है, फिर भी इस मामले में जांच की आवश्यकता है।

बयान के आखिर में कहा गया है, ‘एडिटर्स गिल्ड की मांग है कि सरकार इस गलत और अपमानजनक डिजिटल इको-सिस्टम को तोड़ने और खत्म करने के लिए तत्काल कदम उठाए। साथ ही टेक फॉग ऐप मामले में सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ अहम लोगों पर आरोप है, ऐसे में गिल्ड की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट मामले का संज्ञान ले और इसके जांच का आदेश दें।’

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सवाल पर असहज दिखे यूपी के डिप्टी CM केशव मौर्य, बीच में रोका इंटरव्यू

पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है। इस बीच बीबीसी ने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का एक इंटरव्यू जारी किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 12 January, 2022
Last Modified:
Wednesday, 12 January, 2022
KeshavPrasad446

पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है। इस बीच बीबीसी ने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का एक इंटरव्यू जारी किया है, जिसमें पूछे गए प्रश्नों से वे काफी असहज नजर आए और इंटरव्यू को बीच में छोड़कर जाते हुए दिखाई दिए।   

बीबीसी के मुताबिक, बीजेपी नेता केशव प्रसाद मौर्य हरिद्वार की धर्म संसद में हेट स्‍पीच को लेकर पूछे गए प्रश्‍नों से इतने नाराज हो गए कि उन्‍होंने इंटरव्‍यू बीच में ही रोक दिया, रिपोर्टर का मास्‍क छीन लिया और क्रू को फुटेज हटाने के लिए मजबूर किया।'  उत्तर प्रदेश चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद बीबीसी के रिपोर्टर अनंत झणाणे ने उप-मुख्यमंत्री से कई मुद्दों पर बात की।

बीबीसी का कहना है कि मौर्य ने अपने सुरक्षाकर्मी को बुलाकर इंटरव्यू की फुटेज डिलीट करा दी थी, जिसे बाद में किसी तरह रिकवर किया गया। बीबीसी के मुताबिक यूपी के उप मुख्‍यमंत्री मौर्य ने बाद में इसे 'दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना' करार दिया। 

बीबीसी के वीडियो में इंटरव्‍यू करने वाले में मौर्य से धर्म संसद और इसमें दिए गए हेट स्‍पीच को लेकर सीएम योगी आदित्‍यनाथ सहित बीजेपी के शीर्ष नेताओं की चुप्‍पी को लेकर सवाल किया गया था। यह पूछने पर कि क्‍या नेताओं को इस तरह के ऐलान के खिलाफ बोलकर जनता को आश्‍वस्‍त नहीं करना चाहिए, मौर्य ने कहा, 'हमें कुछ भी साबित करने की जरूरत नहीं है, हम 'सबका साथ, सबका विकास' में विश्‍वास करते हैं। धार्मिक नेताओं को अपनी बात को अभिव्‍यक्‍त करने का अधिकार है। उन्‍होंने यह सवाल किया कि केवल बीजेपी धार्मिक नेताओं को ही सुर्खियों में क्‍यों रखा जाता है।

उन्‍होंने कहा, 'आप केवल हिंदू नेताओं के बारे में ही क्‍यों कह रहे हैं? अन्‍य धार्मिक नेताओं के कमेंट्स के बारे में क्‍या? आर्टिकल 370 को खत्‍म किए जाने के पहले कितने लोगों को जम्‍मू-कश्‍मीर छोड़ना पड़ा, आप इस बारे में बात क्‍यों नहीं करते? जब आप सवाल करते हैं तो यह केवल एक समूह  (ग्रुप) के लिए नहीं होने चाहिए। धर्म संसद बीजेपी का कार्यक्रम नहीं है, यह धार्मिक नेताओं का है।'

मौर्य ने कहा, 'संत वह बात कहते हैं जिस पर वे विश्‍वास करते हैं। यह राजनीति से संबंधित नहीं है और मुस्लिम व ईसाई नेता भी है, उनसे भी बात करिए।' इस पर इंटरव्‍यू करने वाले रिपोर्टर ने कहा कि इसका राजनीति से संबंध नहीं है क्‍योंकि ऐसे भाषणों से चुनाव के पहले माहौल खराब होता है। उसने भारत-पाकिस्‍तान मैच को लेकर नारे लगाने वालों पर राष्‍ट्रद्रोह के चार्ज के बारे में भी सवाल किया।

इस पर मौर्य ने कहा, 'राष्‍ट्रद्रोह अलग मुद्दा है लेकिन यह धर्म संसद है। ऐसे में हम कह सकते हैं कि इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को सूर्य नमस्‍कार का विरोध करने को अधिकार नहीं है।' जब विवादित धर्म संसद में किए गए नरसंहार के आह्वान के बारे में पूछा गया तो उन्‍होंने कहा, 'मैं नहीं जानता कि आप किस वीडियो की बात कर रहे हैं। आप क्‍या चुनाव के बारे में पूछ रहे हैं? आप किसी पत्रकार की तरह बात नहीं कर रहे, आप किसी समूह विशेष के एजेंट की तरह बात कर रहे हैं। मैं आपसे बात नहीं करूंगा।' इसके बाद उप मुख्‍यमंत्री मौर्य ने अपना माइक निकाल दिया और वीडियो एकदम से खत्‍म हो गया।

   

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