न्यूज चैनल में हुई छंटनी, कई पर गिरी गाज

लोकसभा चुनावों के बाद जैसा कि अंदेशा था कि कुछ न्यूज चैनलों पर मंदी की मार दिखाई देगी

Last Modified:
Tuesday, 02 July, 2019
news channel

लोकसभा चुनावों के बाद जैसा कि अंदेशा था कि कुछ न्यूज चैनलों पर मंदी की मार दिखाई देगी, ऐसे में खबर मिली है कि अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘तिरंगा टीवी’ ने अपने यहां छंटनी शुरू कर दी है। बता दें कि इस चैनल के प्रबंधन में कपिल सिब्बल की पत्नी है। पत्रकारिता के बड़े चेहरों में शुमार बरखा दत्त और करण थापर भी इस चैनल के साथ जुड़े हुए हैं। 

मिली जानकारी के मुताबिक चैनल प्रबंधन टुकड़ो में एम्पलॉइज की छंटनी कर रहा है। एडिटोरियल, गाफिक्स, असाइनमेंट समेत कई डिपार्टमेंट्स के एम्पलॉइज पर गाज गिरी है। बताया गया है कि प्रबंधन सिर्फ एक महीने की सैलरी देकर एम्पलॉइज को विदाई पत्र थमा रहा है। 

चैनल में हो रही इस छंटाई को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा हो रही है। Fired Employee Tiranga TV नामक ट्विटर हैंडल से ट्वीट भी किया गया है कि एम्पलॉइज को कंपनी छोड़कर जाने को कहा गया है। और ऐसे में तीन महीने की सैलरी के स्थान पर सिर्फ एक महीने की सैलरी एम्पलॉइज को दी जा रही है। ट्वीट में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल को टैग करके कहा गया है कि उनके दो साल की नौकरी के आश्वासन पर भी एम्पलॉइज यहां जाइन किया था पर अब चैनल मानक के अनुसार तीन महीने की सैलरी देने से भी मुकर गया है।

ट्विटर पर इसे लेकर किए गए ट्वीट्स आप नीचे पढ़ सकते हैं.. 
 

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सरकार के इस फैसले से सूचना सलाहकारों की हुई बल्ले-बल्ले

शलभमणि त्रिपाठी और रहीस सिंह को हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने बनाया है सूचना सलाहकार

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 20 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 20 November, 2019
Rahees Singh Shalabhmani Tripathi

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सूचना सलाहकारों के वेतन और भत्ते में बढ़ोतरी पर अपनी मुहर लगा दी है। सूचना सलाहकारों के वेतन-भत्तों में दोगुनी से ज्यादा बढ़ोतरी की गई है। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई थी। इस बैठक में अन्य फैसलों के साथ सूचना सलाहकारों के वेतन और भत्ते में बढ़ोतरी किए जाने पर भी मुहर लगा दी गई। पहले सूचना सलाहकार का वेतन जहां 40 हजार रुपए और आवास भत्ता दस हजार रुपए था, वहीं अब इसे बढ़ाकर एक लाख रुपए वेतन और 25 हजार रुपए आवास भत्ता कर दिया गया है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी और लखनऊ के पत्रकार रहीस सिंह को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पिछले महीने ही सूचना विभाग में सलाहकार के पद पर नियुक्त किया था। शलभमणि त्रिपाठी के पास इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का जिम्मा है, वहीं रहीस सिंह को प्रिंट मीडिया की जिम्मेदारी दी गई है।

शलभमणि त्रिपाठी ने वर्ष 2016 में पत्रकारिता छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली थी। इससे पहले वे देश के बड़े न्यूज चैनल आईबीएन7 के लखनऊ ब्यूरो चीफ रह चुके हैं। बीजेपी जॉइन करने के बाद उन्हें पार्टी में प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी थी। वहीं रहीस सिंह लखनऊ की पत्रकारिता का जाना-माना नाम हैं। वह लेखन के क्षेत्र में भी काफी सक्रिय हैं। हाल ही में वे कर्मयोगी संन्यासी योगी आदित्यनाथ के नाम से एक किताब लिखकर भी चर्चा में आए थे।

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भारतीय मार्केट में पैठ बढ़ाने का BBC ने बनाया ये 'मेगा प्लान'

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में बताई रूपरेखा, अगला आयोजन मुंबई में किया जाएगा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Wednesday, 20 November, 2019
Last Modified:
Wednesday, 20 November, 2019
BBC EVENT

‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ (BBC Global News) अगले साल ‘बीबीसी डॉट कॉम’ (BBC.com) पर दो नए प्रीमियम कलेक्शंस लॉन्च करने जा रही है। ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ की ओर से दिल्ली में मंगलवार को पहली बार ‘Upfront’ इवेंट आयोजित किया गया, वहीं मुंबई इवेंट गुरुवार को किया जाएगा। बता दें कि ‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज’ (BBC World News) और ‘बीबीसी डॉट कॉम’ का स्वामित्व ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ के पास है और यही इनका संचालन करती है।   

इस इवेंट की थीम ‘The Power of an Authentic Voice’ रखी गई और इसका उद्देश्य भारतीय मीडिया और एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्रीज को एक मंच पर लाना है। इसमें ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ की ओर से अपने आगामी कंटेंट के साथ ही पार्टनरशिप और आगामी योजनाओं के बारे में चर्चा की जा रही है।

‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ द्वारा जिन दो नए प्रीमियम कलेक्शंस की लॉन्चिंग की बात हो रही है, उनके नाम ‘बीबीसी फ्यूचर यू’ (BBC Future You) और ‘बीबीसी फ्यूचर प्लैनेट’ (BBC Future Planet) हैं। ‘बीबीसी फ्यूचर यू’ जहां लोगों के स्वास्थ्य (wellness) पर केंद्रित होगी, वहीं ‘बीबीसी फ्यूचर प्लैनेट’ में स्थायित्व (sustainability) पर फोकस किया जाएगा। दोनों का उद्देश्य अपने ऑडियंस तक ब्रैंड्स की पहुंच को सुगम बनाना है।

 ‘Upfronts’ के द्वारा कार्यक्रम में मौजूद लोगों को ‘Audio: Activated’ - BBC Global News’ के बारे में जानने-समझने का मौका मिला। यह एक नई रिसर्च है कि लोग किस तरह से ब्रैंडेंड ‘पोडकास्ट’ (ऑन डिमांड टॉक रेडियो) से जुडते हैं और भारतीय मार्केट में यह कैसे लागू होती है। इस रिसर्च से पता चला है कि ब्रैंडेड पोडकास्ट विज्ञापन का एक प्रभावी माध्यम है।

इस पहल के तहत ‘बीबीसी वर्ल्ड न्यूज’ और ‘बीबीसी डॉट कॉम’ के आगामी कंटेंट पर भी प्रकाश डाला जाएगा। इसमें अभिनेता शाहरुख खान के साथ टॉकिंग मूवी ‘बॉलिवुड स्पेशल’ से लेकर ‘इंडियन स्पोर्ट्स वुमैन ऑफ द ईयर’ के साथ ही तीन पार्ट्स में भारतीय संगीत के सांस्कृतिक इतिहास से जुड़ी श्रंखला भी शामिल होगी।

इस बारे में ‘बीबीसी ग्लोबल न्यूज’ के सेल्स डायरेक्टर (दक्षिण एशिया) विशाल भटनागर का कहना है, ‘इन पहल के साथ बीबीसी का नाम जुड़ा हुआ है, जो दुनियाभर का जाना-माना नाम है, ऐसे में आप प्रामाणिक आवाज के मामले में इन पर भरोसा कर सकते हैं। ऑडियो के क्षेत्र में हम करीब सौ सालों से सबसे आगे हैं और ये प्रोजेक्ट भारत के प्रति हमारी लगातार प्रतिबद्धता के साथ ही ऑडियंस और बिजनेस पार्टनर्स के मामले में दुनिया का सर्वश्रेष्ठ न्यूज संस्थान बनने की हमारी महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं।

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देश में मीडिया की आजादी को किस तरह लग रहा पलीता, सामने आई ये रिपोर्ट

‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया’ और ‘द विजन फाउंडेशन’ द्वारा तीन नवंबर से 14 नवंबर के बीच कराया गया सर्वे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 18 November, 2019
Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
Press

पत्रकारों को अपना काम करने के दौरान तमाम तरह की मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। पिछले दिनों गैर लाभकारी संगठन ‘द विजन फाउंडेशन’ और देश में पत्रकारों के प्रमुख संगठन ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स-इंडिया (एनयूजे-आई)’  द्वारा कराए गए सर्वे में भी इसी तरह की बातें सामने आई हैं।

पत्रकारों की सुरक्षा और मीडिया समूहों के लिए सुरक्षा प्रावधानों पर देशभर के पत्रकारों के बीच तीन नवंबर से 14 नवंबर के बीच यह सर्वे किया गया। इस सर्वे का उद्देश्य पत्रकारों पर हमलों अथवा प्रताड़ना के मामलों को समझना और इस बारे में समय रहते प्रभावी कार्ययोजना बनाना है।

सर्वे के दौरान यह बात सामने आई कि देश में करीब 61 प्रतिशत पत्रकारों को अपनी खबरों के कारण कभी-न-कभी धमकी अथवा अन्य प्रकार के दबाव का सामना करना पड़ता है। सर्वे के अनुसार, पत्रकारों पर हमले की बढ़ती घटनाओं के कारण अभिव्यक्ति की आजादी का खतरा भी बढ़ रहा है। इस सर्वे में देशभर के करीब 823 पत्रकारों ने भाग लिया, जिनमें 21 प्रतिशत महिला पत्रकार शामिल रहीं। सर्वे में 266 पत्रकार प्रिंट मीडिया के, 263 पत्रकार ऑनलाइन मीडिया के और 98 पत्रकार टेलिविजन से संबद्ध रहे।

सर्वे में यह भी सामने आया है कि इस साल अपने काम के कारण अब तक चार पत्रकारों की हत्या हो चुकी है, जबकि पिछले साल देश में पांच पत्रकारों की हत्या हुई थी। सर्वे में शामिल 46 प्रतिशत पत्रकारों ने माना कि उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे- ट्विटर और फेसबुक पर धमकी मिली, जबकि 17 प्रतिशत का मानना था कि उन्हें वॉट्सऐप अथवा प्राइवेट मैसेज के माध्यम से धमकी दी गई।

सर्वे में शामिल करीब 74 प्रतिशत पत्रकारों का मानना था कि उनके संस्थान में तथ्यों की सटीकता पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता था जबकि 13 प्रतिशत का मानना था कि उनका संस्थान हमेशा विशेष प्रकार के समाचारों को प्राथमिकता देता है। करीब 33 प्रतिशत पत्रकारों ने 21वीं सदी में पत्रकारिता के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ते हमले को माना, जबकि करीब 21 प्रतिशत पत्रकारों का मानना था कि आने वाले समय में फर्जी और पेड समाचार सबसे बड़ी चुनौती बनेंगे।

करीब 18 प्रतिशत पत्रकारों का कहना था कि इन दिनों न्यूज वेबसाइट की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में अखबार और पारंपरिक मीडिया के उपेक्षा बढ़ने के साथ ही लोगों की समाचारों के प्रति विश्वसनीयता घटी है। यह सबसे बड़ा संकट है।

इस सर्वे में यह भी सामने आया कि करीब 44 प्रतिशत पत्रकारों ने उन्हें मिली धमकी अथवा प्रताड़ना की शिकायत अपने संस्थान से की जबकि इस तरह के मामलों में महज 12 प्रतिशत पत्रकारों ने ही पुलिस अथवा अन्य कानूनी एजेंसियों को इससे अवगत कराया। जिन पत्रकारों को सर्वे में शामिल किया गया, उनमें से करीब 61 प्रतिशत पत्रकारों ने अपने काम की वजह से कभी न कभी हमले अथवा धमकी की बात स्वीकारी, जबकि 76 प्रतिशत पत्रकारों ने माना कि उनके मीडिया संस्थानों में सुरक्षा संबंधी किसी तरह का प्रावधान नहीं हैं। इन पत्रकारों का यह भी मानना था कि उन्हें किसी भी प्रकार के सुरक्षा प्रशिक्षण नहीं दिया गया है और न ही कोई सुरक्षा प्रोटोकाल है।

सर्वे में यह भी सामने आया है कि क्षेत्रीय अथवा गैर अंग्रेजी पत्रकारों पर होने वाले हमलों की खबर को भी राष्ट्रीय स्तर पर तवज्जो नहीं मिल पाती है। सर्वे में शामिल कई पत्रकारों का मानना है कि इस तरह की स्थिति दूर होनी चाहिए और सरकार को तुरंत एक प्रभावी नियामक बनाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

इस रिपोर्ट को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं। 

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अब पत्रकारों के सम्मान व सुरक्षा का यूं ध्यान रखेगी पुलिस

उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दखल के बाद आईजी ने अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों को जारी किए दिशा निर्देश

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 18 November, 2019
Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
Police

पत्रकारों से जुड़े मामलों को लेकर पुलिस की भूमिका पर आए दिन सवाल उठते रहते हैं। कहीं पुलिस पर पत्रकारों के उत्पीड़न के आरोप लगते हैं तो कहीं ये आरोप लगता है कि पुलिस शिकायत लेकर पहुंचने वाले पत्रकारों की सुनवाई नहीं करती है। इसके अलावा पत्रकारों व उनके परिजनों को झूठे मामलों में फंसाने के मामले भी गाहे-बगाहे सामने आते रहते हैं।  

इस तरह के मामले संज्ञान में आने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने अधीनस्थ अधिकारियों को पत्रकारों के हितों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आईजी (कानून-व्यवस्था) प्रवीण कुमार की ओर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों/पुलिस अधीक्षकों को जारी किए गए इन निर्देशों में कहा गया है कि पुलिस के पास यदि कोई पत्रकार पहुंचता है तो उसे समुचित सम्मान दिया जाए। पत्रकारों तथा उनके परिजनों को बेवजह झूठे केसों में न फंसाया जाए।

आईजी का कहना है कि यदि किसी पत्रकार अथवा उसके परिजनों के खिलाफ कोई मामला सामने आता है तो पहले उस मामले की किसी राजपत्रित अधिकारी से जांच करवाई जाए और इसके बाद ही कोई कार्यवाही की जाए। खबरें जुटाने में पत्रकारों को किसी तरह की परेशानी आड़े न आए, इसके लिए पुलिस अधिकारियों को पूरा सहयोग करने के निर्देश भी दिए गए हैं। पत्रकारों की समस्याओं का निस्तारण जनपद स्तर पर ही हो सके, इसके लिए आईजी ने सक्षम अधिकारी नामित करने के निर्देश भी दिए हैं।

बता दें कि आईजी ने यह दिशा-निर्देश भारतीय पत्रकार वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिवाकर सिंह की पहल पर दिए हैं। पत्रकारों के खिलाफ उत्पीड़न के बढ़ते मामलों को लेकर दिवाकर सिंह ने पिछले दिनों एक प्रतिनिधिमंडल के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डीजीपी ओपी सिंह से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताई थीं। उन्होंने इस तरह के मामलों को संज्ञान में लाकर आवश्यक कदम उठाए जाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने दिवाकर सिंह की बात को गंभीरता से लेते हुए इस बारे में सभी पुलिस अधीक्षकों को कड़े आदेश जारी करने के निर्देश दिए थे।

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दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ पर 1500 रुपये लूटने का मुकदमा!

दस महीने पहले की शिकायत के आधार पर पुलिस ने उठाया कदम, पत्रकार ने कार्रवाई को मीडिया की आवाज दबाने की कोशिश बताया

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 18 November, 2019
Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
Jagran

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में 'दैनिक जागरण' के ब्यूरो चीफ धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ नगर कोतवाली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। धर्मेंद्र मिश्र पर तहसील के अमीन धर्मेंद्र कुमार शुक्ल से लूट व मारपीट करने का आरोप है। मामले की जांच शहर कोतवाल केबी सिंह ने घण्टाघर चौकी प्रभारी अमरेंद्र सिंह को सौंपी है। खास बात यह है कि इस मामले में धर्मेंद्र कुमार शुक्ल ने करीब दस महीने कोतवाली में लिखित शिकायत दी थी, जिस पर अब जाकर पुलिस चेती है और राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर शनिवार को एफआईआर दर्ज की है।

बता दें कि सितंबर 2018 में 'दैनिक जागरण' ने अमेठी जिले के निवासी धर्मेंद्र मिश्र को सुल्तानपुर में ब्यूरो चीफ के पद पर तैनात किया था। दिसंबर 2018 में अमेठी से सुल्तानपुर आते समय उनका सरकारी बस में अपने गांव के पड़ोसी और अमीन धर्मेंद्र कुमार शुक्ल से झगड़ा हो गया था। सुल्तानपुर जिला मुख्यालय पर बस से उतरते वक्त नगर कोतवाली के सामने मारपीट भी हुई थी। इसके बाद धर्मेंद्र कुमार शुक्ल ने धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ ही कार्रवाई की मांग की थी। अपनी शिकायत में उन्होंने धर्मेंद्र मिश्र व उनके साथियों पर मारपीट के साथ ही पैसे छीनने के आरोप भी लगाए थे।

बताया जाता है कि सुल्तानपुर के तत्कालीन एसपी अनुराग वत्स ने किसी तरह मामला रफा-दफा करवा दिया था। लेकिन पुलिस के रवैये से असंतुष्ट धर्मेंद्र कुमार शुक्ल लगातार उच्चाधिकारियों से मामले में कार्रवाई की फरियाद करते रहे। अब अनुराग वत्स का तबादला होने पर यहां एसपी के पद पर हिमांशु कुमार ने जॉइन किया है। इसके बाद पुलिस ने अब धर्मेंद्र मिश्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

अपने खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद धर्मेंद्र मिश्र ने सोशल मीडिया पर इस मामले को उठाते हुए पुलिस पर कई आरोप लगाए हैं। अपने ट्वीट में धर्मेंद्र मिश्र का कहना है कि सुल्तानपुर एसपी ने सच्चाई की आवाज दबाने के लिए उनके ऊपर लूट का फर्जी मुकदमा दर्ज किया है। धर्मेंद्र मिश्र ने मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है। बता दें कि हिमांशु के खिलाफ धर्मेंद्र मिश्र ने अपने अखबार व सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल रखा है।

धर्मेंद्र मिश्र के इन आरोपों के बाद यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। 'इंडिया न्यूज' के सीनियर एडिटर/न्यूज एंकर यतेन्द्र शर्मा ने धर्मेंद्र मिश्र के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए कई सवाल उठाए हैं। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा है कि क्या ये बात हजम हो सकती है कि प्रतिष्ठित अखबार का ब्यूरो चीफ भी किसी से मात्र 1500 रुपए छीनकर भाग सकता है। क्या ऐसे रामराज आयेगा? उन्होंने अपने ट्वीट में मुख्यमंत्री कार्यालय, गृहमंत्री अमित शाह और डीजीपी को भी टैग किया है।

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वरिष्ठ टीवी पत्रकार रजत शर्मा के इस्तीफे को लेकर लोकपाल ने दिया ये आदेश

दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ के लोकपाल अवकाश प्राप्त न्यायाधीश बीडी अहमद ने निलंबित महासचिव विनोद तिहारा को बहाल किये जाने पर रोक लगा दी है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Monday, 18 November, 2019
Last Modified:
Monday, 18 November, 2019
Rajat Sharrma

‘दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ’ (डीडीसीए) के लोकपाल अवकाश प्राप्त न्यायाधीश बीडी अहमद ने वरिष्ठ पत्रकार व ‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा को डीडीसीए के अध्यक्ष पद पर बने रहने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने निलंबित महासचिव विनोद तिहारा को दोबारा पद पर बहाल किये जाने पर रोक लगा दी है।

अपने निर्देश में न्यायाधीश बीडी अहमद ने कहा है कि अध्यक्ष की शक्तियां वापस लेने के लिए पारित प्रस्ताव में प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने तिहारा के निलंबन के बारे में कहा है कि यह मामला लोकपाल के पास लंबित है, इसलिए निलंबन वापस नहीं हो सकता है।

गौरतलब है कि रजत शर्मा ने शनिवार को ‘डीडीसीए’ के प्रेजिडेंट पद से इस्तीफा दे दिया था। रजत शर्मा का कहना था, ‘ऐसा लगता है कि ईमानदारी और पारदर्शिता के मेरे उसूलों के साथ ‘डीडीसीए’ में आगे जाना संभव नहीं है। मैं अपने उसूलों के साथ समझौता करने को तैयार नहीं हूं।‘ रजत शर्मा ने सोशल मीडिया पर इस मामले को शेयर करते हुए ‘डीडीसीए’ के सदस्यों के नाम एक लेटर लिखकर सहयोग के लिए धन्यवाद भी अदा किया था।

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राजनैतिक दलों के अखबारों पर VP की बड़ी टिप्पणी

राष्ट्रीय प्रेस दिवस के मौके पर उपराष्ट्रपति ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में मीडिया को लेकर रखे अपने विचार

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
Venkaiah Naidu

‘राष्ट्रीय प्रेस दिवस’ (National Press Day) के मौके पर शनिवार को उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायूड ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में मीडिया को लेकर अपने विचार रखे। उनका कहना था कि आज के दौर में सनसनीखेज खबरों को ज्यादा तवज्जो दी जाती है, लेकिन इन खबरों में संवेदनाएं नहीं होती हैं। उप राष्ट्रपति का यह भी कहना था कि आजकल कुछ बिजनेस समूहों, राजनीतिक दलों अथवा कुछ लोगों द्वारा अपने हितों के लिए चैनल व अखबार स्थापित किए जा रहे हैं। ऐसे में पत्रकारिका के मूल मूल्य नष्ट हो रहे हैं।  

उपराष्ट्रपति के अनुसार, पहले के दौर में खबर का मतलब सिर्फ खबर होता था। इनमें किसी तरह की मिलावट अथवा गलत व्याख्या नहीं होती थी। अब न्यूज और व्यूज आपस में मिलाए जा रहे हैं, यह सबसे बड़ी समस्या हो गई है। उपराष्ट्रपति का यह भी कहना था, ‘यदि आप मुझसे पूछें कि क्या राजनैतिक दलों को अपना अखबार शुरू करने का अधिकार नहीं है, मेरा मानना है कि उन्हें बिल्कुल यह अधिकार है, लेकिन यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि इस अखबार को किस राजनैतिक दल द्वारा संचालित किया जा रहा है।’

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जल्द इस सरकारी पद पर जॉइन करेंगे पत्रकार नीरज भट्ट

उत्तराखंड में चंपावत के रहने वाले नीरज भट्ट कई मीडिया संस्थानों में निभा चुके हैं अपनी जिम्मेदारी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
Neeraj Bhatt

पत्रकार नीरज भट्ट ने ‘इंडिया टुडे’ समूह की हिंदी वेबसाइट ‘लल्लनटॉप’ (lallantop) से इस्तीफा दे दिया है। यहां वह करीब दो साल से जुड़े हुए थे और बतौर असिस्टेंट एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। नीरज भट्ट ने बताया कि उनका भारतीय सूचना सेवा (Indian Information Service) में चयन हो गया है और वे अलीगढ़ में फील्ड पब्लिसिटी ऑफिसर के पद पर जॉइन करने जा रहे हैं।

नीरज भट्ट ‘लल्लनटॉप’ को जॉइन करने से पहले ‘जी हिन्दुस्तान’ (Zee Hindustan) से बतौर प्रड्यूसर जुड़े हुए थे। यहां वह ‘एबीपी न्यूज’ से आए थे। नीरज भट्ट 'एबीपी न्यूज' से करीब पांच सालों तक जुड़े रहे हैं और असोसिएट प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत थे।

उत्तराखंड में चंपावत के मूल निवासी नीरज ने कुमाऊं यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘आईआईएमसी’ (IIMC) से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है और यहीं से बतौर ट्रेनी उनका ‘एबीपी न्यूज’ में कैंपस प्लेसमेंट हुआ था।

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वरिष्ठ टीवी पत्रकार रजत शर्मा ने उठाया चौंकाने वाला कदम

‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने अपने फैसले की जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Saturday, 16 November, 2019
Last Modified:
Saturday, 16 November, 2019
Rajat Sharm

‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने ‘दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ’ (DDCA) के प्रेजिडेंट पद से इस्तीफा दे दिया है। रजत शर्मा का कहना है, ‘ऐसा लगता है कि ईमानदारी और पारदर्शिता के मेरे उसूलों के साथ ‘DDCA’ में आगे जाना संभव नहीं है। मैं अपने उसूलों के साथ समझौता करने को तैयार नहीं हूं।

रजत शर्मा ने अपने इस्तीफे की जानकारी अपने ट्विटर हैंडल पर भी शेयर की है। इस ट्वीट में रजत शर्मा ने  लिखा है,‘यहां काम करना आसान नहीं था, लेकिन आपके विश्वास ने मुझे ताकत दी। आज मैंने डीडीसीए का अध्यक्ष पद छोड़ने का फैसला किया है और अपना इस्तीफा एपेक्स काउंसिल को भेज दिया है। आपने जो प्यार और सम्मान मुझे दिया है उसके लिए आपका आभार।

उन्होंने ट्वीट में यह भी लिखा है, ‘जब से आपने मुझे ‘DDCA’ का अध्यक्ष चुना है, मैं समय-समय पर आपको अपने काम के बारे में जानकारी देता रहा हूं। मैने ‘DDCA’ को बेहतर बनाने के लिए, प्रोफेशनल और पारदर्शी बनाने के लिए जो कदम उठाये, उसके बारे में आपको बताया। आपसे किए गए वादों के पूरा होने की जानकारी दी।’

बता दें कि रजत शर्मा जुलाई 2018 में दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष बने थे। उन्होंने इसके लिए हुए चुनाव में पूर्व क्रिकेटर मदन लाल को हराया था। रजत शर्मा को 1521 वोट मिले थे, वहीं मदन लाल को 1004 वोट हासिल हुए थे।

रजत शर्मा ने ‘DDCA’ के सदस्यों के लिए एक लेटर भी लिखा है। अंग्रेजी में लिखे इस लेटर को आप यहां हूबहू पढ़ सकते हैं।

Dear Members,
 
I take this opportunity to thank you all to have reposed faith in me during my tenure as the President of DDCA. In my short stint I have made every effort to discharge my obligations in the best interest of the Association with honesty and sincerity. The sole agenda was welfare of the Association and transparency in each and every aspect. In my endeavour though I faced many road blocks, opposition and oppressions, just to keep me from discharging my duties in fair and transparent manner, however, somehow I kept moving with only one agenda that all promises made to the members must be fulfilled while keeping the interest and welfare of Cricket paramount at all times. 
 
​​However, cricket administration here is full of pulls and pressures all the time. I feel that vested interests are always actively working against the interest of cricket. It seems that it may not be possible to carry on in DDCA with my principles of integrity, honesty and transparency, which I am not willing to compromise at any cost. That’s why I have decided to call it a day and hereby tender my resignation to the Apex Council from the post of President, DDCA with immediate effect.
 
I would like to add that when I took over as President, coffers of DDCA were empty and now we have a corpus of around Rs.25 Crores, I urge upon you that this money be spent only for promoting cricket and helping cricketers. 

I thank you all for the overwhelming support, respect and affection you have given me throughout my tenure. Whatever I have contributed here would have not been possible without your support.

Best wishes to you all.
 
Sincerely,

RAJAT SHARMA
President
DELHI & DISTRICT CRICKET ASSOCIATION

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लंबी फेहरिस्त है ऐसे खबरनवीसों की, 'कारनामे' सुनकर आप भी रह जाएंगे दंग

एक साल में 16 हुए गिरफ्तार, कई पत्रकारों के खिलाफ अभी भी चल रही है जांच

समाचार4मीडिया ब्यूरो by समाचार4मीडिया ब्यूरो
Published - Friday, 15 November, 2019
Last Modified:
Friday, 15 November, 2019
Journalist

कर्नाटक में पिछले एक साल में 16 पत्रकारों को गिरफ्तार किया गया है। गौर करने वाली बात ये है कि इन पत्रकारों पर जबरन वसूली और ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप हैं। सबसे ताजा मामला पांच मई का है, जब केंद्रीय अपराध शाखा पुलिस द्वारा ‘फोकस टीवी’ के प्रबंध निदेशक हेमंत कम्मर को जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोपों के मुताबिक, कम्मर ने कथित तौर पर महादेवपुर के भाजपा विधायक अरविंद लिंबावली को फर्जी विडियो क्लिप का हवाला देकर 50 लाख रुपये कि मांग की थी।

इस संबंध में शिकायत विधायक के सहयोगी गिरीश द्वारा दर्ज कराई गई थी। गिरीश ने पुलिस को बताया कि कम्मर ने पैसा न मिलने की सूरत में क्लिप वायरल करने के लिए फेसबुक और वॉट्सऐप पर फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाए थे। पुलिस को आशंका है कि हेमंत कम्मर ने विधायक की तरह और भी कई लोगों को ब्लैकमेल किया होगा। फिलहाल मामले की जांच चल रही है।

थोड़ा पीछे चलें तो 24 अप्रैल को नेलमंगला पुलिस ने पूर्व टीवी पत्रकार किरण शानबाग को गिरफ्तार किया था। शानबाग प्रसिद्ध कन्नड़ न्यूज चैनल ‘TV9’ में काम कर चुके हैं। आरोप है कि शानबाग ने आयुर्वेदिक कॉलेज और अस्पताल चलाने वाले नेलमंगला के एक डॉक्टर से 25 लाख की मांग की थी। पुलिस के मुताबिक, शानबाग और उसका सहयोगी जगन्नाथ गौड़ा कथित रूप से डॉक्टर को धमका रहे थे। आरोपितों ने डॉक्टर से कहा था कि उनके पास पीड़ित की आपत्तिजनक सामग्री है, यदि पैसे नहीं मिले तो वो उसे वायरल कर देंगे। बदनामी के डर से डॉक्टर ने आरोपितों को भुगतान भी किया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने फिर पैसे की मांग करना शुरू कर दिया। इसके बाद डॉक्टर ने पुलिस में शिकायत की और आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया।   

इसी तरह, 27 अप्रैल को बेंगलुरु पुलिस ने पत्रकार, एस.ए हेमंत कुमार को गिरफ्तार किया था। कुमार पर वीरशैव लिंगायत धर्म को लेकर गृहमंत्री एमबी पाटिल की ओर से कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी को लिखे फर्जी पत्र को सोशल मीडिया पर वायरल करने का आरोप है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गृहमंत्री ने 13 अप्रैल को स्वयं विजयपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। साइबर सेल के महानिरीक्षक हेमंत निंबालकर ने बताया कि कुमार की गिरफ्तारी सबूतों और अन्य आरोपितों के बयान के आधार पर की गई थी। गौरतलब है कि पाटिल ने पत्र को 'फर्जी' करार देते हुए इसे प्रतिद्वंद्वियों द्वारा उन्हें बदनाम करने की साजिश करार दिया था। जबकि भाजपा ने कुमार की गिरफ्तारी की निंदा की थी, बाद में कुमार को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

27 मार्च को भी कुछ पत्रकारों पर उगाही के आरोप में विजयापुर पुलिस ने कार्रवाई की थी। आरोपितों में कन्नड़ न्यूज चैनल ‘सुवर्णा न्यूज’ के जिला संवाददाता प्रसन्ना देशपांडे, उनके कैमरामैन संगमेश काम्बर और कन्नड़ साप्ताहिक ‘संग्राम’ के रवि बिसनलारा शामिल हैं। विजयपुरा पुलिस के मुताबिक, आरोपितों ने लिंग परिक्षण करने वाले एक डॉक्टर का विडियो बनाया था। इसके एवज में 50 लाख की मांग की गई थी, जिसे बाद में घटाकर 10 लाख कर दिया गया। इतना ही नहीं, तीनों ने पैसे देते हुए डॉक्टर को इस तरह कैमरे में कैद किया, जैसे वह उन्हें रिश्वत की पेशकश कर रहा है।

इसी तरह कन्नड़ न्यूज चैनल ‘पब्लिक टीवी’ से जुड़े पत्रकार हेमंत कश्यप पर भी उगाही का आरोप है। उन्हें बेंगलुरु की सदाशिवनगर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तार किया था। कश्यप ‘समया टीवी’ चैनल के अपने पत्रकार साथी के साथ मिलकर प्रसिद्ध चिकित्सक और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. रमन राव को ब्लैकमेल कर रहा था। पुलिस ने बताया कि आरोपितों ने कथित तौर पर पीड़ित के अवैध संबंधों को उजागर करने वाली एक विडियो क्लिप तैयार की, जिसके ऐवज में 50 लाख रुपए की मांग की जा रही थी। आरोपी धमकाने के लिए कई बार पीड़ित की क्लिनिक भी गए थे।

मामला सामने आने के बाद ‘पब्लिक टीवी’ के प्रमुख एच.आर. रंगनाथ को एक विडियो संदेश जारी करके अपना रुख स्पष्ट करना पड़ा। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। हालांकि, कश्यप को बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया।

फेक न्यूज फैलाने में कई पत्रकार भी पीछे नहीं हैं। ऐसा ही एक मामला पिछले साल मार्च में सामने आया, जब पुलिस ने ‘पोस्टकार्ड न्यूज’ के संस्थापक महेश विक्रम हेगड़े को गिरफ्तार किया। महेश ने जैन मुनि पर मुस्लिमों के हमले की फर्जी खबर फैलाई थी। वैसे ये कोई पहला मौका नहीं था। इससे पूर्व उन पर जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख यासीन मलिक को गिरफ्तार किए जाने के सम्बन्ध में भड़काऊ ट्वीट को लेकर मामला दर्ज किया गया था। साथ ही उन पर सोनिया गांधी को लिखे फर्जी पत्र को वायरल करने का भी आरोप था, पुलिस ने महेश को गिरफ्तार किया था, लेकिन सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया गया।

कलम के सिपाहियों द्वारा अपराधियों जैसे कारनामों की फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। न्यूज चैनल ‘जनश्री’ के सीईओ लक्ष्मीप्रसाद वाजपेयी पर भी व्यवसायी को कथित तौर पर धमकाने और 10 करोड़ की मांग करने के आरोप लगे थे। इसी तरह जब कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त जस्टिस भास्कर राव के बेटे अश्विन को जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, तो उनके साथ दो पत्रकारों को भी गिरफ्तार किया गया था।

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