NDTV ने अपने ब्रैंडेड कंटेंट यूनिट को दिया नया नाम व रंग-रूप

एनडीटीवी ने अपने ब्रैंडेड कंटेंट यूनिट को नया नाम देकर एनडीटीवी ब्रैंड स्टूडियो के रूप में पुनः लॉन्च किया है और इसे नया रूप दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 27 November, 2024
Last Modified:
Wednesday, 27 November, 2024
NDTV


एनडीटीवी ने अपने ब्रैंडेड कंटेंट यूनिट को नया नाम देकर 'एनडीटीवी ब्रैंड स्टूडियो' के रूप में पुनः लॉन्च किया है और इसे नया रूप दिया है। यह इकाई ब्रैंड्स को उनके विभिन्न जरूरतों के लिए अनुकूलित और व्यापक कंटेंट समाधान प्रदान करेगी।

'एनडीटीवी ब्रैंड स्टूडियो' का उद्देश्य है वैल्यू चेन के हर पहलू को कवर करते हुए ब्रैंड्स के लिए कंटेंट की परिकल्पना, निर्माण और उसकी रीच बढ़ाने तक की सेवाएं प्रदान करना। इसके तहत, बाजार की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फोकस्ड और प्रभावशाली कंटेंट प्रोजेक्ट्स तैयार किए जाएंगे।

इस अवसर पर एनडीटीवी ब्रैंड स्टूडियो के रेवेन्यू हेड गौरव दिवानी ने कहा, "डिजिटल-फर्स्ट दुनिया में ब्रैंड्स को ऐसे पार्टनर की जरूरत होती है जो उनके लिए अनोखी और प्रभावशाली कहानियां तैयार कर सकें।  उन्होंने आगे कहा कि "एनडीटीवी ब्रैंड स्टूडियो के साथ, हम एक ऐसा रचनात्मक मंच (क्रिएटिव हब) प्रदान करने को लेकर उत्साहित हैं, जहां ब्रैंड्स एनडीटीवी की पत्रकारिता की उत्कृष्टता का उपयोग करके सटीक और प्रभावशाली संदेश तैयार कर सकते हैं और दर्शकों को गहराई तक जोड़ने वाले प्रभावशाली ब्रांडेड कंटेंट अनुभव प्रदान कर सकते हैं।"

स्टूडियो को ब्रैंडेड कंटेंट विशेषज्ञों और अनुभवी पत्रकारों की एक टीम द्वारा संचालित किया गया है, जिनकी एनडीटीवी की सामाजिक अभियानों और उच्च प्रभाव वाली पहलों की विरासत में गहरी जड़ें हैं।

 

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युवा पत्रकार सुरभि तिवारी की ‘Zee Media’ में वापसी

यहां उन्होंने बतौर एसोसिएट प्रड्यूसर और एंकर जॉइन किया है। सुरभि तिवारी ने कुछ दिनों पूर्व ही न्यूज़ इंडिया 24X7 (News India 24X7) में अपनी पारी को विराम दिया था।

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Published - Friday, 02 October, 2026
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Friday, 02 October, 2026
Surabhi Tiwari

पत्रकार और न्यूज एंकर सुरभि तिवारी करीब चार साल बाद फिर ‘जी मीडिया’ (Zee Media) की टीम में शामिल हो गई हैं। यहां उन्होंने जी (यूपी//यूके) में बतौर एसोसिएट प्रड्यूसर और एंकर जॉइन किया है। सुरभि तिवारी ने कुछ दिनों पूर्व ही न्यूज़ इंडिया 24X7 (News India 24X7) में अपनी पारी को विराम दिया था। वह यहां करीब ढाई साल से अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

बता दें कि सुरभि तिवारी पूर्व में ‘जी हिन्दुस्तान’ में बतौर एंकर अपनी भूमिका निभा चुकी हैं। इसके अलावा वह ‘भारत24’, ‘न्यूज नेशन’ और ‘इंडिया न्यूज’ की टीम में भी शामिल रही हैं।

मूल रूप से बलिया (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली और बचपन में ही पश्चिम बंगाल जा बसीं सुरभि ने पत्रकारिता की पढ़ाई करते हुए ही मीडिया में अपने कदम बढ़ा दिए थे। उन्होंने सिलीगुड़ी कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है।

पढ़ाई के दौरान ही सुरभि ने बंगाल के एक लोकल चैनल में बतौर न्यूज एंकर अपने करियर की शुरुआत कर दी थी। इसके बाद वह वर्ष 2018 में दिल्ली आ गईं और यहां ‘भारती विद्या भवन‘ से पत्रकारिता में एक साल का डिप्लोमा किया।

इसके बाद सुरभि तिवारी ने एक भक्ति चैनल (कात्यायनी) से यहां अपने नए सफर की शुरुआत की। फिर यहां से अलविदा कहकर उन्होंने ‘नेशनल वॉइस‘ और ‘न्यूज1 इंडिया‘ न्यूज चैनल्स में बतौर एंकर अपनी जिम्मेदारी संभाली।

‘न्यूज1 इंडिया‘ में काम करते हुए ही उन्हें ‘इंडिया न्यूज‘ जॉइन करने का मौका मिला। करीब एक वर्ष तक बतौर एंकर उन्होंने यहां काम किया। इसके बाद कुछ महीने पहले यहां से बाय बोलकर पहले ‘न्यूज नेशन’ फिर ‘जी हिन्दुस्तान’ और ‘भारत24’ होती हुईं न्यूज़ इंडिया 24X7 पहुंची थीं, जहां से अलग होकर अब वह फिर जी मीडिया से जुड़ गई हैं।

समाचार4मीडिया की ओर से सुरभि तिवारी को उनके नए सफर के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।   

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‘जी’ के 34 साल पूरे, डॉ. सुभाष चंद्रा ने साझा की इस सफर से जुड़ीं यादें

जी ग्रुप के फाउंडर डॉ. सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट में कहा, यह उपलब्धि सिर्फ मेरी नहीं, तकनीशियनों, कलाकारों, टीम के सदस्यों और दर्शकों की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 02 October, 2026
Last Modified:
Friday, 02 October, 2026
Dr Subhash Chandra

जी ग्रुप के फाउंडर डॉ. सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया पर ‘जी’ की 34 साल की यात्रा को याद करते हुए एक पोस्ट साझा की है। उन्होंने बताया कि 34 साल पहले जब इस सफर की शुरुआत हुई थी, तब एक कमरे में सिर्फ पांच लोग थे। चुनौतियां बड़ी थीं, लेकिन सपना स्पष्ट था- भारतीयों के लिए भारतीयों द्वारा तैयार किया गया मनोरंजन उपलब्ध कराना।

डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि 34 साल का यह सफर एक पूरी जिंदगी जैसा लगता है, फिर भी ऐसा महसूस होता है जैसे यह कल की ही बात हो। उन्होंने उस शुरुआत को याद किया, जब जी के सफर की शुरुआत सिर्फ पांच लोगों के साथ हुई थी।

उन्होंने कहा कि उस समय मुश्किलें बहुत थीं और परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन लक्ष्य साफ था। मकसद था कि भारत के लोगों के लिए भारतीयों द्वारा तैयार किया गया मनोरंजन सामने आए।

डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर यह महसूस होता है कि उस एक कदम ने पूरे ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव शुरू किया। उनके मुताबिक, इस सफर ने 3 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए अवसर, करियर और आजीविका के रास्ते खोलने में भूमिका निभाई।

उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय सिर्फ खुद को देने के बजाय उन सभी लोगों को दिया, जिन्होंने जी को इस मुकाम तक पहुंचाने में योगदान दिया। उन्होंने खास तौर पर तकनीशियनों, कलाकारों, टीम के सदस्यों और दर्शकों का जिक्र करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उन सभी की है, जिन्होंने जी को अपने परिवार का हिस्सा बनाया।

डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपनी पोस्ट के अंत में 34 साल के इस सफर के लिए सभी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों ने एक विरासत तैयार की है, लेकिन अब नजरें भविष्य पर हैं और भारतीय इनोवेशन के जरिए आने वाले कल को नए सिरे से आकार देने पर फोकस है।

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WOI India के CEO बने अमर दीक्षित, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने पर रहेगा फोकस

यह नियुक्ति उनकी कंपनी SwiftSeed Ventures के WOI India के साथ एकीकरण के बाद हुई है। दीक्षित ने SwiftSeed Ventures की स्थापना की थी।

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Published - Friday, 02 October, 2026
Last Modified:
Friday, 02 October, 2026
Amar Dixit

अमर दीक्षित को WOI India का चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति उनकी कंपनी SwiftSeed Ventures के WOI India के साथ एकीकरण के बाद हुई है। दीक्षित ने SwiftSeed Ventures की स्थापना की थी।

अपनी नई भूमिका में अमर दीक्षित का फोकस WOI India को ऐसे इकोसिस्टम के तौर पर विकसित करने पर रहेगा, जो उद्यमियों को पूंजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, ज्ञान, संस्थानों, कॉरपोरेट्स, सरकारों और ग्लोबल नेटवर्क से जोड़ सके।

WOI India फिलहाल Startup Park Bangalore का संचालन करता है। यह 2 लाख वर्ग फुट से अधिक का इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसे स्टार्टअप्स के लिए तैयार किया गया है। इसके इकोसिस्टम में पांच वेंचर स्टूडियो और आठ Centres of Excellence भी शामिल हैं।

कंपनी के पास 45 से ज्यादा निवेश वाला पोर्टफोलियो भी है। अमर दीक्षित के मुताबिक, नई भूमिका में उनका उद्देश्य इन मौजूदा पहलों से आगे बढ़कर ऐसा संस्थान तैयार करना है, जो भारतीय उद्यमिता की अगली पीढ़ी को सपोर्ट कर सके और स्टार्टअप्स को आगे बढ़ने के रास्ते उपलब्ध करा सके।

लिंक्डइन पर इस बदलाव की जानकारी साझा करते हुए दीक्षित ने SwiftSeed Ventures के साथ जुड़े फाउंडर्स, निवेशकों, पार्टनर्स और अन्य लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि WOI India का यह नया चरण वेंचर फर्म की यात्रा के दौरान बने रिश्तों और किए गए काम को आगे बढ़ाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले महीनों में मौजूदा पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने और नई साझेदारियों से जुड़े कई डेवलपमेंट सामने आ सकते हैं।

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बोधि ट्री मल्टीमीडिया की आम बैठक में कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने को मिली मंजूरी

बोधि ट्री मल्टीमीडिया लिमिटेड (Bodhi Tree Multimedia Limited) की 13वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में रखे गए सभी चार प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 02 October, 2026
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Friday, 02 October, 2026
BodhiTree541

बोधि ट्री मल्टीमीडिया लिमिटेड (Bodhi Tree Multimedia Limited) की 13वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में रखे गए सभी चार प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं। कंपनी ने 1 अक्टूबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी। कंपनी की एजीएम 30 सितंबर 2026 को हुई थी।

कंपनी के मुताबिक, एजीएम में वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दी गई। इसके अलावा रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे सुकैश देवदास मोटवानी को दोबारा निदेशक नियुक्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली।

कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने को मंजूरी

एजीएम में कंपनी की कुल उधारी यानी Borrowing Limits बढ़ाने से जुड़ा विशेष प्रस्ताव भी मंजूर किया गया। कंपनी ने बताया कि इस प्रस्ताव को जरूरी बहुमत मिला है। इसके अलावा कंपनी से जुड़े पक्षों के साथ होने वाले Material Related Party Transactions को मंजूरी देने का प्रस्ताव भी पारित हो गया।

99.99 फीसदी वोट प्रस्तावों के पक्ष में

वोटिंग के नतीजों के अनुसार, कुल 18,16,97,777 शेयरों में से 4,43,42,216 वोट डाले गए। यह कुल बकाया शेयरों का 24.4044 फीसदी है। इनमें से 4,43,39,124 वोट प्रस्तावों के पक्ष में और सिर्फ 3,092 वोट विरोध में पड़े। यानी कुल डाले गए वैध वोटों में 99.993 फीसदी वोट प्रस्तावों के पक्ष में रहे, जबकि 0.007 फीसदी वोट विरोध में थे।

कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 23 सितंबर 2026 की रिकॉर्ड डेट पर उसके कुल 21,510 शेयरधारक थे। एजीएम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप के 2 तथा पब्लिक के 38 शेयरधारकों ने हिस्सा लिया।

ये चार प्रस्ताव हुए मंजूर

  1. वित्तीय नतीजों को मंजूरी – वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरणों के साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट को मंजूरी दी गई।
  2. सुकैश देवदास मोटवानी की दोबारा नियुक्ति – रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे सुकैश देवदास मोटवानी को फिर से निदेशक नियुक्त करने का प्रस्ताव मंजूर हुआ।
  3. उधार की लिमिट बढ़ाना – कंपनी की कुल उधारी सीमा बढ़ाने का विशेष प्रस्ताव पास हुआ।
  4. संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन – संबंधित पक्षों के साथ होने वाले महत्वपूर्ण लेनदेन को मंजूरी देने का प्रस्ताव भी पारित हुआ।

इन सभी प्रस्तावों में प्रमोटर/प्रमोटर ग्रुप के हित जुड़े होने की बात नहीं बताई गई थी।

स्क्रूटिनाइजर ने दी रिपोर्ट

वोटिंग प्रक्रिया की जांच जयमिन मोदी एंड कंपनी के कंपनी सेक्रेटरी जयमिन मोदी ने स्क्रूटिनाइजर के तौर पर की। उनकी नियुक्ति 5 सितंबर 2026 को हुई थी और उन्होंने 1 अक्टूबर 2026 को अपनी रिपोर्ट कंपनी को सौंपी।

रिमोट ई-वोटिंग 26 सितंबर 2026 से 29 सितंबर 2026 तक चली। एजीएम के बाद 30 सितंबर को वोटों को दो गवाहों की मौजूदगी में खोला गया। स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के अनुसार, चारों प्रस्तावों पर कोई अमान्य वोट नहीं पाया गया।

  

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Filmcity Media में दो इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति, बदलेगा कंपनी का नाम

फिल्मसिटी मीडिया लिमिटेड (Filmcity Media Limited) ने कंपनी के बोर्ड में दो नए नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की नियुक्ति को मंजूरी दी है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 02 October, 2026
Last Modified:
Friday, 02 October, 2026
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फिल्मसिटी मीडिया लिमिटेड (Filmcity Media Limited) ने कंपनी के बोर्ड में दो नए नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की नियुक्ति को मंजूरी दी है। इसके साथ ही कंपनी का नाम बदलकर “Filmcity Media and Consultancy Limited” करने का प्रस्ताव भी शेयरधारकों ने मंजूर कर दिया है।

कंपनी ने 30 सितंबर 2026 को बीएसई को दी जानकारी में बताया कि 29 सितंबर को हुई 32वीं सालाना आम बैठक (AGM) में ये फैसले लिए गए।

पांच साल के लिए हुई नियुक्ति

शिवी जिंदल को कंपनी के नॉन-एग्जिक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति 12 अगस्त 2026 से प्रभावी है और उनका कार्यकाल 11 अगस्त 2031 तक पांच साल का होगा।

शिवी जिंदल के पास कॉमर्स और लॉ की पढ़ाई के साथ ह्यूमन रिसोर्स, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस, कंप्लायंस और बिजनेस एडवाइजरी से जुड़े काम का अनुभव है। उन्होंने एम.कॉम., बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (HR) में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और एलएल.बी. किया है।

इसी तरह, इति गोयल को भी नॉन-एग्जिक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल भी 12 अगस्त 2026 से 11 अगस्त 2031 तक पांच साल का होगा।

इति गोयल ने एम.कॉम. किया है और उन्हें अकाउंट्स एवं फाइनेंस, इंश्योरेंस, कंप्लायंस सपोर्ट और बिजनेस एडवाइजरी से जुड़े क्षेत्रों का अनुभव है।

कंपनी के मुताबिक, शिवी जिंदल और इति गोयल दोनों का कंपनी के किसी भी मौजूदा डायरेक्टर से कोई संबंध नहीं है। दोनों ने यह भी पुष्टि की है कि वे कंपनी के डायरेक्टर पद पर नियुक्ति के लिए अयोग्य नहीं हैं और किसी सेबी आदेश या अन्य प्राधिकरण के तहत डायरेक्टर पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं हैं।

कंपनी का बदलेगा नाम 

शेयरधारकों ने कंपनी का मौजूदा नाम “Filmcity Media Limited” बदलकर “Filmcity Media and Consultancy Limited” करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। यह प्रस्ताव 29 सितंबर 2026 को हुई AGM में स्पेशल रिजॉल्यूशन के जरिए पास हुआ।

कंपनी ने बताया कि पुराने नाम में उसका प्रिंटर, पब्लिशर, डिस्ट्रीब्यूटर, एडिटर और मैगजीन बनाने का पुराना कारोबार दिखाई देता है। समय के साथ कंपनी ने अपने कारोबार में बदलाव करते हुए मीडिया के साथ-साथ इन्वेस्टमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंसल्टेंसी गतिविधियों पर भी फोकस बढ़ाया है। इसी बदले हुए कारोबार और भविष्य की रणनीति को देखते हुए नया नाम प्रस्तावित किया गया है।

कंपनी के मुताबिक, नए नाम की उपलब्धता के लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) ने 3 सितंबर 2026 को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी किया था।

हालांकि, नाम बदलने से कंपनी की कानूनी स्थिति, कारोबार, अधिकार, जिम्मेदारियों या मौजूदा प्रतिबद्धताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नाम बदलने की प्रक्रिया ROC की ओर से नया सर्टिफिकेट ऑफ इनकॉरपोरेशन जारी होने के बाद प्रभावी होगी। 

कंपनी ने बताया कि नाम बदलने का प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ स्पेशल रिजॉल्यूशन के रूप में मंजूर हुआ है।

 

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OTT के दौर में पुराने पड़ रहे टीवी के नियम? इंडस्ट्री ने उठाई NTO की समीक्षा की मांग

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) को यह देखना चाहिए कि 2019 में लागू किया गया नया टैरिफ ऑर्डर (एनटीओ) अपने मकसद को कितना पूरा कर पाया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 02 October, 2026
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Friday, 02 October, 2026
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टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) को यह देखना चाहिए कि 2019 में लागू किया गया नया टैरिफ ऑर्डर (NTO) अपने मकसद को कितना पूरा कर पाया है। इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि तेजी से बदलते मीडिया मार्केट को देखते हुए अब ऐसे नियमों की जरूरत है जो हल्के, सिद्धांतों पर आधारित और सभी प्लेटफॉर्म व तकनीक के लिए एक जैसे हों।

फिक्की फ्रेम्स में बोलते हुए, एयरटेल के कॉरपोरेट अफेयर्स के डायरेक्टर और ग्रुप चीफ रेगुलेटरी ऑफिसर राहुल वत्स ने कहा कि रेगुलेटर को यह देखना शुरू करना होगा कि उसके बनाए नियमों का असल असर क्या हो रहा है और उनका मकसद क्या है।

2019 में लागू हुआ था NTO

NTO को 2018 में अधिसूचित किया गया था और 2019 में लागू किया गया। इसका मकसद टीवी दर्शकों को ज्यादा विकल्प और कीमतों में पारदर्शिता देना था। इसके तहत दर्शकों को वही चैनल चुनकर उनके लिए भुगतान करने की सुविधा दी गई, जिन्हें वे देखना चाहते हैं।

इस व्यवस्था में कंटेंट और उसे दर्शकों तक पहुंचाने की व्यवस्था को अलग किया गया। दर्शकों को डिस्ट्रीब्यूटर को नेटवर्क कैपेसिटी फीस देनी होती है, जबकि चैनलों या चैनलों के पैकेज की कीमत का भुगतान ब्रॉडकास्टर के तय एमआरपी के हिसाब से किया जाता है। हालांकि, इसके बाद मीडिया मार्केट में काफी बदलाव आया है। दर्शक तेजी से पारंपरिक टीवी से निकलकर ओटीटी और मोबाइल प्लेटफॉर्म की तरफ जा रहे हैं।

इंडस्ट्री के अधिकारियों का कहना है कि NTO से टीवी इंडस्ट्री की सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई में काफी सुधार हुआ, लेकिन इस व्यवस्था के तहत बढ़ी कीमतों और कंटेंट में सीमित नए प्रयोगों ने भी दर्शकों को पारंपरिक टीवी से डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर जाने में योगदान दिया है।

राहुल वत्स ने कहा कि पिछले सात-आठ वर्षों में स्थिति काफी बदल गई है। अब दर्शकों के सामने बहुत ज्यादा विकल्प हैं और प्रोडक्ट को किस तरह पैकेज किया जाए, इसे लेकर भी काफी नियम हैं।

नियमों का आकलन सिर्फ पालन के आधार पर न हो

राहुल वत्स के मुताबिक, किसी नियम का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कंपनियां उसका पालन कर रही हैं या नहीं। यह भी देखना चाहिए कि उससे उपभोक्ताओं को क्या फायदा मिल रहा है। 

उनका कहना है कि नियमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प देना, अलग-अलग तरह का कंटेंट उपलब्ध कराना और उसे उचित कीमत पर उपलब्ध कराना होना चाहिए।

उन्होंने कंपनियों को प्रोडक्ट, कीमत और डिस्ट्रीब्यूशन के अलग-अलग मॉडल आजमाने की ज्यादा आजादी देने की भी बात कही। उनका मानना है कि नियमों को इनोवेशन और ग्राहक अनुभव में रुकावट नहीं बनना चाहिए।

टीवी और इंटरनेट सेवाओं के नियमों में अंतर का मुद्दा

अनिल मल्होत्रा, हेड-पब्लिक एंड रेगुलेटरी अफेयर्स और सीआरओ, एफिलिएट सेल्स, जी एंटरटेनमेंट ने कहा कि अब नियम तकनीक और प्लेटफॉर्म के आधार पर अलग-अलग नहीं होने चाहिए। उनका कहना था कि आज दर्शक एक जैसा कंटेंट अलग-अलग प्लेटफॉर्म के जरिए देख सकते हैं। ऐसे में रेगुलेशन भी टेक्नोलॉजी और प्लेटफॉर्म के प्रति तटस्थ होना चाहिए।

मल्होत्रा ने कहा कि पहले रेगुलेटरी व्यवस्था इस सोच के साथ बनाई गई थी कि कंटेंट और डिस्ट्रीब्यूशन को अलग रखा जाए, ताकि किसी एक कंपनी के हाथ में बहुत ज्यादा नियंत्रण न आ जाए। लेकिन टेलीकॉम कंपनियों पर इस तरह की समान पाबंदियां नहीं हैं। उनके मुताबिक, इससे ऐसी स्थिति बन सकती है जहां एक ही कंपनी ग्राहक, कंटेंट और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर नियंत्रण रख सके।

उन्होंने पारंपरिक टीवी और इंटरनेट आधारित सेवाओं के बीच रेगुलेशन के अंतर का भी मुद्दा उठाया। उनके अनुसार, पारंपरिक मीडिया को अभी भी लाइसेंस और कई तरह की अनुपालन संबंधी जरूरतों का सामना करना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन सेवाओं पर इस तरह की कई पाबंदियां नहीं हैं।

बार-बार NTO बदलने के बजाय पूरी व्यवस्था पर विचार की जरूरत

अनिल मल्होत्रा ने कहा कि मीडिया मार्केट में बड़े बदलाव होने के बावजूद रेगुलेटर्स ने अब तक छोटे-छोटे बदलावों के जरिए व्यवस्था को आगे बढ़ाया है।

उनका कहना है कि बार-बार NTO का नया संस्करण लाने के बजाय मीडिया और कंटेंट के पूरे इकोसिस्टम में हुए बुनियादी बदलावों को समझकर रेगुलेटरी व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है।

इंडस्ट्री को भी एकजुट होकर बात करनी होगी

JioStar में साउथ क्लस्टर के एंटरटेनमेंट बिजनेस के हेड कृष्णन कुट्टी ने कहा कि इंडस्ट्री को भी पॉलिसी बनाने वालों और रेगुलेटर्स के सामने अपनी बात ज्यादा एकजुट तरीके से रखनी होगी। उन्होंने कहा कि ब्रॉडकास्टर्स और प्लेटफॉर्म कई बार एक-दूसरे से अलग दिशा में बात करते रहे हैं, खासकर व्यावसायिक समझौतों के मामलों में।

कुट्टी के मुताबिक, प्लेटफॉर्म और ब्रॉडकास्टर्स की ओर से रेगुलेटर या सरकार के सामने एक जैसी और स्पष्ट आवाज नहीं होने से इंडस्ट्री को काफी नुकसान हुआ है।

कीमत और बिजनेस मॉडल मार्केट पर छोड़ने की बात

कुट्टी ने कहा कि कीमत और बिजनेस मॉडल तय करने के लिए मार्केट रेगुलेटर्स की तुलना में ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर सकता है। उन्होंने ऐप इकोसिस्टम और ओटीटी प्लेटफॉर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां कंपनियां अलग-अलग मॉडल अपना रही हैं। इनमें सब्सक्रिप्शन, मुफ्त सेवाएं, ट्रांजैक्शन आधारित मॉडल और प्रीमियम कीमत जैसे विकल्प शामिल हैं।

उनके मुताबिक, सबसे बड़ी चिंता लगातार बदलते नियम और रेगुलेटरी अनिश्चितता है। इससे कंपनियों के लिए लंबे समय की योजना बनाना, निवेश करना और नए मॉडल तैयार करना मुश्किल होता है।

उन्होंने कहा कि अगर लंबे समय तक एक स्थिर रेगुलेटरी व्यवस्था बनी रहती है तो कंपनियां नए सर्विस और प्राइसिंग मॉडल को बेहतर तरीके से तैयार और टेस्ट कर सकती हैं।

व्यापक सुरक्षा उपायों पर जोर

राहुल वत्स ने कहा कि भविष्य में रेगुलेशन को कुछ व्यापक सुरक्षा उपायों पर केंद्रित किया जाना चाहिए। इनमें किसी के साथ भेदभाव न करना, गलत तरीके से मार्केट पर कब्जा करने वाले व्यवहार को रोकना और कंटेंट की उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है।

उन्होंने ‘मस्ट कैरी’ और ‘मस्ट प्रोवाइड’ जैसी व्यवस्थाओं के जरिए कंटेंट की पहुंच सुनिश्चित करने की बात कही। उनका कहना है कि रेगुलेटर को कंपनियों को यह तय करने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए कि वे अपने प्रोडक्ट को किस तरह पैकेज करें या उसकी कीमत कैसे तय करें।

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सहारा मीडिया की AGM में सभी प्रस्ताव मंजूर, निदेशक के पद पर श्री मधुकर की पुनर्नियुक्ति

सहारा वन मीडिया एंड एंटरटेनमेंट लिमिटेड की 45वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में रखे गए सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 02 October, 2026
Last Modified:
Friday, 02 October, 2026
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सहारा वन मीडिया एंड एंटरटेनमेंट लिमिटेड की 45वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में रखे गए सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ मंजूर हो गए हैं। कंपनी ने 30 सितंबर 2026 को हुई AGM के वोटिंग नतीजे और स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट बीएसई को सौंप दी है।

कंपनी की 45वीं AGM 30 सितंबर 2026 को दोपहर 1 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से हुई। बैठक करीब 35 मिनट चली। इसमें रिमोट ई-वोटिंग के साथ AGM के दौरान भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की सुविधा दी गई थी।

फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को मिली मंजूरी

AGM में कंपनी के 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के ऑडिटेड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा गया। इसके साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट भी शामिल थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में 10,14,837 वोट, यानी कुल वैध वोटों का 99.999% पड़े। विरोध में सिर्फ 10 वोट यानी 0.001% पड़े।

श्री मधुकर की फिर नियुक्ति को मंजूरी

AGM में श्री मधुकर को रोटेशन के आधार पर रिटायर होने वाले निदेशक के स्थान पर फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया था। यह प्रस्ताव भी 99.999% वोट के साथ मंजूर हो गया। इसके पक्ष में 10,14,837 वोट और विरोध में केवल 10 वोट पड़े।

बैंकिंग और वित्त क्षेत्र में करीब 40 साल का अनुभव

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, श्री मधुकर ने अर्थशास्त्र में मास्टर ऑफ आर्ट्स (एमए) और कानून में स्नातक (एलएलबी) की पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट (HRD) से जुड़े पाठ्यक्रम भी किए हैं। इनमें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कोलकाता और इंटरनेशनल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के पाठ्यक्रम शामिल हैं।

उन्हें बैंकिंग, वित्त, नीति, प्रशासन और गवर्नेंस के क्षेत्र में करीब चार दशक का व्यापक अनुभव है। उन्होंने सरकारी और निजी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।

श्री मधुकर यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने 2004 से 2006 तक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पूर्णकालिक सदस्य (Whole Time Member) के रूप में भी काम किया है।

उन्होंने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के बोर्ड में जुलाई 2006 से जुलाई 2009 तक और कृभको श्याम फर्टिलाइजर लिमिटेड के बोर्ड में सितंबर 2007 से नवंबर 2009 तक सेवाएं दीं। इसके अलावा वह राजस्थान इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी (RIDCO), जो राजस्थान सरकार की कंपनी है, के साथ भी 2008 से जुड़े रहे हैं और कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

स्क्रूटिनाइजर रिपोर्ट के मुताबिक, रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान हुई ई-वोटिंग के संयुक्त नतीजों के आधार पर 45वीं AGM के नोटिस में शामिल सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हो गए। 

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वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी ने NDTV में अपनी पारी को दिया विराम

समाचार4मीडिया से बातचीत में अनुराग द्वारी ने बताया कि फिलहाल वह कुछ समय का ब्रेक लेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद वह अपनी नई पारी शुरू करेंगे और तब इसके बारे में बताएंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 01 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
Anurag Dwary

वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी (Anurag Dwary) ने ‘एनडीटीवी’ (NDTV) से इस्तीफा दे दिया है। वह करीब दो दशक से इस संस्थान के साथ जुड़े हुए थे। समाचार4मीडिया से बातचीत में अनुराग द्वारी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले ही इस्तीफा दे दिया था और फिलहाल वह नोटिस पीरियड पर हैं।

अपनी अगली पारी के बारे में पूछे जाने पर अनुराग द्वारी ने बताया कि फिलहाल वह कुछ समय का ब्रेक लेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद वह अपनी नई पारी शुरू करेंगे और उस समय इसके बारे में बताएंगे।

मूल रूप से देवघर (झारखंड) के रहने वाले अनुराग द्वारी को मीडिया में काम करने का करीब ढाई दशक का अनुभव है। NDTV में वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के एग्जिक्यूटिव एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पिछले करीब 10 वर्षों से वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, शासन, सामाजिक मुद्दों और जमीनी बदलावों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग करते रहे हैं।

पत्रकारिता में उनके काम को रामनाथ गोयनका अवॉर्ड और रेड इंक अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी पहचान गहरी फील्ड रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मुद्दों की रिपोर्टिंग के लिए रही है।

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी संभालने से पहले अनुराग द्वारी ने करीब एक दशक महाराष्ट्र में रिपोर्टिंग की। इस दौरान उन्होंने चुनाव, आतंकी हमले, हाईकोर्ट, राजनीति और सामाजिक आंदोलनों को कवर किया। उन्होंने गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड समेत कई राज्यों के चुनावों की भी रिपोर्टिंग की है।

अनुराग द्वारी ने देश की कई बड़ी खबरों के साथ अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट भी कवर किए हैं। उन्होंने श्रीलंका में क्रिकेट वर्ल्ड कप की रिपोर्टिंग की। NDTV की ‘मॉनसून एक्सप्रेस’ जैसी सीरीज के दौरान उन्होंने करीब दो महीने तक नॉर्थ ईस्ट से पंजाब तक सड़क यात्रा की और देश के अलग-अलग हिस्सों से रिपोर्टिंग की। उन्होंने अमिताभ बच्चन और मनोज बाजपेयी जैसे अभिनेताओं पर NDTV के कई विशेष कार्यक्रमों की स्क्रिप्ट भी लिखी है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के AJK Mass Communication Research Centre से Development Communication में मास्टर डिग्री हासिल की है। पूर्व में वह PTI, Star News और BBC जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ भी काम कर चुके हैं।

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बिना इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क चलेगा लाइव टीवी : डी2एम रोलआउट की तैयारी

प्रसार भारती डायरेक्ट-टू-मोबाइल तकनीक के कमर्शियल रोलआउट के लिए अगले महीने आरएफपी जारी कर सकता है, जिससे बिना इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क लाइव टीवी और अन्य मल्टीमीडिया कंटेंट मोबाइल पर उपलब्ध होगा।

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Published - Thursday, 01 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
prasarbharti

जल्द ही मोबाइल फोन पर बिना इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क के लाइव टीवी देखा जा सकेगा। सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती (Prasar Bharati) डायरेक्ट-टू-मोबाइल (D2M) प्रसारण के कमर्शियल रोलआउट के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (Request for Proposal) जारी करने की तैयारी में है।

एक्सचेंज4मीडिया (Exchange4Media) की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रसार भारती अगले महीने आरएफपी जारी कर सकता है। इससे डी2एम तकनीक को ट्रायल से आगे ले जाकर बड़े स्तर पर लागू करने की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा। हालांकि, इसकी सटीक टाइमलाइन फिलहाल स्पष्ट नहीं है। टेक्नोलॉजी वैलिडेशन टेस्ट में तेजस नेटवर्क्स (Tejas Networks) द्वारा विकसित उपकरणों को सरकारी समीक्षा में मंजूरी मिलने के बाद योजना ने रफ्तार पकड़ी है।

डी2एम तकनीक के जरिए मोबाइल फोन पर बिना सेल्युलर कनेक्शन के लाइव टीवी, ऑडियो, न्यूज अपडेट और इमरजेंसी अलर्ट भेजे जा सकते हैं। यह कॉल या इंटरनेट के लिए इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर नहीं करती। इसकी कार्यप्रणाली कुछ हद तक स्मार्टफोन में एफएम रेडियो जैसी है, जहां रिसीवर रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करता है।

फिलहाल इस तकनीक का इस्तेमाल मुख्य रूप से नागरिकों तक इमरजेंसी अलर्ट पहुंचाने के लिए किया जाता है। कमर्शियल रोलआउट के बाद लाइव न्यूज, स्पोर्ट्स और अन्य मल्टीमीडिया कंटेंट भी मोबाइल पर उपलब्ध कराया जा सकता है। कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले इलाकों में डी2एम उपयोगी साबित हो सकती है।

डी2एम मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर नहीं है, इसलिए इसके लिए मोबाइल डेटा खर्च करने की जरूरत भी नहीं होगी। इससे मोबाइल डेटा नेटवर्क पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक निजी टेलीकॉम कंपनियों ने डी2एम को लेकर चिंता जताई है, क्योंकि इसका असर उनके कारोबार पर पड़ सकता है।

प्रसार भारती और आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) की ओर से किए गए अध्ययनों में पाया गया कि 470-582 मेगाहर्ट्ज बैंड में डी2एम प्रसारण से सेल्युलर नेटवर्क में हानिकारक हस्तक्षेप नहीं होता और न ही स्मार्टफोन में असामान्य गर्मी पैदा होती है।

प्रसार भारती, आईआईटी कानपुर और सांख्य लैब्स (Saankhya Labs), जो अब तेजस नेटवर्क्स का हिस्सा है, 19 से ज्यादा शहरों में डी2एम ट्रायल कर चुके हैं। दिल्ली और बेंगलुरु में शुरुआती प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट (Proof of Concept) प्रदर्शन में भी मल्टीमीडिया कंटेंट को सीधे मोबाइल डिवाइस तक पहुंचाने की क्षमता दिखाई गई थी। ईवाई (EY) की एक रिपोर्ट ने देशभर में डी2एम लागू करने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (Public-Private Partnership) मॉडल और लंबे समय के व्यावसायिक ढांचे की सिफारिश की है।

हालांकि, बड़े स्तर पर डी2एम रोलआउट के सामने हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चुनौतियां भी हैं। आईआईटी कानपुर के 2022 के रोडमैप के मुताबिक, मौजूदा ज्यादातर मोबाइल डिवाइस डी2एम को सपोर्ट नहीं करते, क्योंकि इसके लिए एटीएससी 3.0 (ATSC 3.0) मानक की जरूरत होती है। इसके लिए अलग बेसबैंड प्रोसेसिंग यूनिट के साथ एंटीना, लो-नॉइज एम्प्लीफायर, बेसबैंड फिल्टर और रिसीवर की जरूरत होगी। मौजूदा नेटवर्क ढांचा भी बड़े स्तर पर डी2एम प्रसारण के लिए तैयार नहीं है और इसके लिए ज्यादा संख्या में टेरेस्ट्रियल टावर लगाने पड़ सकते हैं।

सरकार डी2एम को देश में टीवी की पहुंच से जुड़ी कमी दूर करने के संभावित माध्यम के तौर पर भी देख रही है। आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, भारत के करीब 28 करोड़ परिवारों में से लगभग 19 करोड़ परिवारों के पास टीवी सेवाओं की पहुंच है, जबकि करीब 9 करोड़ परिवार इससे बाहर हैं। देश में मोबाइल डिवाइस की बड़ी संख्या को देखते हुए प्रस्तावित आरएफपी इस अंतर को कम करने की दिशा में मदद कर सकता है।

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CJ International Hotels के बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर बनीं सहर ज़मान

उनकी यह नियुक्ति एक अक्टूबर 2026 से प्रभावी है। बता दें कि CJ International Hotels Limited के पास लग्जरी होटल ली मेरिडियन नई दिल्ली का स्वामित्व है।

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Published - Thursday, 01 October, 2026
Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
Sahar Zaman ..

सीनियर मीडिया प्रोफेशनल सहर ज़मान (Sahar Zaman) CJ International Hotels Limited के बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के तौर पर शामिल हो गई हैं। उनकी यह नियुक्ति एक अक्टूबर 2026 से प्रभावी है। बता दें कि CJ International Hotels Limited के पास लग्जरी होटल ली मेरिडियन नई दिल्ली का स्वामित्व है।

दो दशक से ज्यादा समय से न्यूज मीडिया, संस्कृति और Orange Economy के क्षेत्र में सक्रिय सहर ज़मान पत्रकार, Hunar TV की फाउंडर डायरेक्टर और आर्ट्स क्यूरेटर हैं। माना जा रहा है कि अपनी इस भूमिका में मीडिया और संस्कृति के क्षेत्र में अपने लंबे अनुभव के साथ वह कॉरपोरेट गवर्नेंस में पब्लिक इंटरेस्ट और स्वतंत्र सोच का एक अलग नजरिया लेकर आएंगी।

उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब कॉरपोरेट बोर्ड्स भविष्य की ब्रैंड स्ट्रैटेजी और कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी लीडर्स को अपने साथ जोड़ रहे हैं।

राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में स्थित Le Méridien New Delhi दिल्ली के प्रमुख फाइव-स्टार हॉस्पिटैलिटी लैंडमार्क्स में शामिल है। सहर ज़मान की मार्केट ट्रेंड्स और भारत के तेजी से बढ़ते कल्चरल सेक्टर की व्यापक समझ से बोर्ड की ग्रोथ इनिशिएटिव्स और स्ट्रैटेजिक ओवरसाइट को मूल्य मिलने की उम्मीद है।

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