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दैनिक जागरण की सफलता में कौन से फैक्टर निभाते हैं खास रोल, पढ़ें यहां
सात करोड़ से ज्यादा पाठक संख्या के साथ ‘दैनिक जागरण’ ने प्रिंट मीडिया में अपनी खास जगह बनाई है
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
सात करोड़ से ज्यादा पाठक संख्या के साथ हिंदी के प्रमुख अखबार ‘दैनिक जागरण’ ने प्रिंट मीडिया में अपनी एक खास जगह बनाई है। 31 मार्च 2019 को समाप्त तिमाही के आंकड़ों की बात करें तो जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने टैक्स के बाद समेकित लाभ (consolidated profit after tax) 12.50 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 70.61 करोड़ रुपए होने की घोषणा की है। इसके अलावा ऐड रेवेन्यू में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। दैनिक जागरण की रीडरशिप लगातार बढ़ने का ही नतीजा है कि यह सबसे आगे बना हुआ है। इंडियन रीडरशिप सर्वे 2019 की पहली तिमाही (IRS Q1 2019) के डाटा देखें तो रीडरशिप के मामले में इसने अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया है।
आखिर दैनिक जागरण अपनी पाठक संख्या को लगातार बढ़ाने और टॉप पर बने रहने के लिए किस तरह की स्ट्रैटेजी बनाता है? इस बारे में जागरण ग्रुप के सीईओ संजय गुप्त का कहना है कि वह अपना फोकस अच्छी पत्रकारिता करने पर रखना चाहते हैं, ताकि दैनिक जागरण पाठकों की पहली पसंद बना रहे। उनका कहना है कि हमेशा से ही उनका प्रयास अच्छी पत्रकारिता करने पर रहा है।
हालांकि, डिजिटल मीडिया के आने के बाद इसकी आंधी ने प्रिंट मीडिया के बिजनेस पर विपरीत प्रभाव डाला है, लेकिन दैनिक जागरण के बिजनेस पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ा है। इस बारे में ‘जागरण प्रकाशन’ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (स्ट्रैटेजी, ब्रैंड और बिजनेस डेवलपमेंट) बसंत राठौड़ का कहना है, ‘यहां डिजिटल और प्रिंट के बीच की लड़ाई नहीं है। डिजिटल के बारे में हमारा मानना है कि यह प्रिंट का पूरक है। इसके अलावा डिजिटल न्यूज के आने से न्यूज के उपभोग (news consumption) में एक नया आयाम जुड़ गया है। पहले के मुकाबले अब ज्यादा लोग न्यूज का उपभोग कर रहे हैं और न्यूज पर ज्यादा समय भी दे रहे हैं। दिन में घटने वाली घटनाओं और अपडेट के लिए डिजिटल न्यूज का उपभोग ज्यादा बढ़ रहा है, वहीं सुबह-शाम प्रिंट और टीवी पर न्यूज का उपभोग ज्यादा होता है।’
डिजिटल और प्रिंट दोनों प्लेटफॉर्म्स पर अपने रीडर्स को जोड़े रखने के लिए कंटेंट का किस तरह विभाजन किया जाता है और इसके लिए किस तरह की प्राथमिकता रखी जाती है? इस बारे में राठौड़ का कहना है, ‘हमारे लिए एक मात्र प्राथमिकता डिजिटल और प्रिंट दोनों में उत्कृष्टता हासिल करना है। ‘इन्मा’ (International News Media Association) के ग्लोबल मीडिया अवॉर्ड्स से इसे समझा जा सकता है, जहां पर दैनिक जागरण ने प्रिंट की रीडरशिप को बढ़ाने में बेस्ट आयडिया के लिए पहला पुरस्कार हासिल किया, वहीं डिजिटल रीडरशिप को बढ़ाने में बेस्ट आयडिया के लिए जागरणडॉटकॉम ने भी पहला स्थान हासिल किया। मुझे लगता है कि शायद हम ही ऐसी इकलौती मीडिया कंपनी थे, जिसने इस ग्लोबल प्रतियोगिता में यह मुकाम हासिल किया। प्रिंट और डिजिटल मीडिया दोनों साथ मिलकर एक-दूसरे की ताकत का लाभ उठाते हुए दर्शकों के लिए शानदार अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में काम करते हैं। ’
आईआरएस 2019 की पहली तिमाही के डाटा पर नजर डालें तो 7,36,73,000 पाठक संख्या (कुल रीडरशिप) के साथ ‘दैनिक जागरण’ इस लिस्ट में टॉप पर है। ‘आईआरएस 2017’ में इस अखबार की कुल रीडरशिप 7,03,77,000 थी। दैनिक जागरण की एवरेज इश्यू रीडरशिप (AIR) वर्ष 2017 में जहां 20,241,000 थी, वह आईआरएस 2019 की पहली तिमाही में थोड़ी बढ़कर 20,258,000 हो गई। इस अखबार के 400 से ज्यादा एडिशंस और सब-एडिशंस हैं।
ज्यादा रीडरशिप हासिल करने के लिए ‘दैनिक भास्कर’ ने बॉलिवुड एक्टर सलमान खान को अपना ब्रैंड एंबेसडर बनाया है, ऐसे में रीडरशिप को बढ़ाने में मदद के लिए क्या जागरण भी इसी तरह की कुछ प्लानिंग कर रहा है? इस बारे में राठौड़ का कहना है, ‘इस तरह सेलेब्रिटी का इस्तेमाल कर रीडरशिप बढ़ाने का हमारा कोई इरादा नहीं है। हमने जनजागरण के लिए सात सरोकार बनाए हैं और हमारी कंटेंट फिलॉसफी इन पर आधारित होती है, जिससे हमारी ब्रैंड बिल्डिंग होती है।’ उन्होंने कहा कि हम न्यूज को ज्यादा से ज्यादा स्थानीय बनाने पर भी काफी ध्यान देते हैं औऱ हर 30-40 किलोमीटर पर अपने कंटेंट को स्थानीय भाषा के अनुसार तैयार करते हैं। ज्यादा से ज्यादा किसी क्षेत्र की खबरें मिलने से वहां रीडरशिप के साथ ही विज्ञापन पर भी काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मीडिया बॉयर्स का भी यही मानना है कि रीजनल के प्रति इस झुकाव ने भी जागरण को दूसरों पर बढ़त दिलाने में मदद की है।
डेंट्सू एजिस नेटवर्क के सीईओ (ग्रेटर साउथ) और चेयरमैन व सीईओ (इंडिया) आशीष भसीन का कहना है, ‘देश में अंग्रेजी के मुकाबले रीजनल रीडरशिप ज्यादा तेजी से बढ़ रही है और इसके तहत रीजनल में दमदार मौजूदगी वाले न्यूजपेपर्स और ज्यादा मजबूत हो रहे हैं। विदेश में जहां प्रिंट की रीडरशिप में कमी हो रही है, इसके विपरीत मुझे लगता है भारत में अगले तीन से पांच सालों तक इसकी रीडरशिप में वृद्धि जारी रहेगी। जागरण की बात करें तो यह अच्छा अखबार है और काफी मजबूत स्थिति में है। इसने अपने पाठकों के बीच मजबूत पकड़ बना रखी है।’ वहीं, ‘पीएचडी मीडिया’ (PHD Media) की सीईओ ज्योति बंसल का मानना है कि जागरण की दो बातें इसे सबसे आगे रखती हैं। ये हैं निष्पक्षता और अपने पाठकों के प्रति सच्चाई। अखबार विभिन्न माध्यमों से अपने पाठकों से जुड़ा रहता है और उनकी आवाज को उठाने में लगातार जुटा रहता है। इस वजह से भी यह पाठकों के बीच पहली पसंद बना हुआ है।
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