प्रिंट और डिजिटल मीडिया में FDI को लेकर सूचना प्रसारण मंत्रालय के सचिव ने कही ये बात

सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कोविड-19 से प्रभावित फिल्म्स और टीवी के लिए सरकार जल्द करेगी प्रोत्साहन की घोषणा

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2020
Amit Khare

सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) के सेक्रेट्री अमित खरे ने कहा कि सरकार विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए अधिक स्वतंत्रता लाने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा प्रत्यक्ष विदेश निवेश (FDI) के मामले में सरकार प्रिंट और डिजिटल मीडिया के लिए एक समान व्यवस्था (level playing field) के बारे में भी सोच रही है। खरे का कहना है, ’प्रिंट मीडिया के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी 26 प्रतिशत एफडीआई लागू होना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया पर लागू एफडीआई के नियम न्यूज एग्रीगेटर्स (news aggregators) पर भी लागू होने चाहिए। बता दें कि एग्रीगेटर्स इनशॉर्ट्स और डेलीहंट जैसे ऐप्स या वेबसाइट्स हैं जो अन्य पब्लिशर्स से उनके कंटेंट को क्यूरेट करती हैं और पाठकों के लिए कंटेंट को पर्सनलाइज करने के लिए एल्गोरिदम (algorithms) का इस्तेमाल करती हैं। साधारण शब्दों में कहें तो कहीं और से कंटेंट लेकर उसे अपने यहां इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं यहां इसकी घोषणा नहीं करना चाहूंगा, क्योंकि यह मेरी भूमिका नहीं है, लेकिन इस बात को लेकर काफी गंभीरता से विचार चल रहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और प्रिंट मीडिया के बीच एक समान व्यवस्था होनी चाहिए। इस बारे में सरकार द्वारा अंतिम निर्णय लेने के बाद ही किसी तरह की घोषणा की जाएगी।’

बता दें कि पिछले साल केंद्रीय कैबिनेट ने डिजिटल मीडिया में 26 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी प्रदान की थी। इससे पहले केवल प्रिंट मीडिया के लिए ही यह मंजूरी थी। न्यूज चैनल्स के लिए 49 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी मिली हुई है। फिक्की फ्रेम्स 2020 के 21वें एडिशन (ऑनलाइन) में ‘Shaping the Future of M&E in Today’s Digitalised and Information Driven Economy’ सेशन के दौरान खरे ने कहा कि लेवल प्लेयिंग फील्ड का मतलब मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारी रेगुलेटरी स्ट्रक्चर के अधीन लाना नहीं है। खरे ने कहा, ‘सरकार द्वारा पिछले छह सालों के दौरान बिजनेस को आसान करने और कम लेकिन प्रभावी रेगुलेशन पर फोकस किया गया है। अब कुछ और नए रेगुलेशंस लाने का विचार है, इन्हें लागू करना आसान होगा और इससे अपेक्षित परिणाम मिलेंगे।’   

बता दें कि सूचना-प्रसारण मंत्रालय इन दिनों अपने तमाम नियमों और अधिनियमों में संशोधन कर रहा है। जैसे- सैटेलाइट टीवी चैनल्स के लिए अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग गाइडलाइंस और प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स (PRB) अधिनियम आदि। खरे का कहना था कि विभिन्न मीडिया के लिए अलग-अलग नियामक संस्थाएं हैं, जैसे-प्रिंट मीडिया के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और फिल्मों के लिए केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड हैं। उन्होंने कहा कि  नेटफ्लिक्स और डिज्नी+हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान व्यवस्था (लेवल प्लेयिंग फील्ड) तैयार किया जाना है, जो अभी तक किसी भी नियामक दायरे में नहीं आते हैं। उन्होंने कहा कि कम रेगुलेशन के लिए अलग-अलग रेगुलेटरी स्ट्रक्चर को सिंक (sync) किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के दायरे में आते हैं, अब सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इस तरह के कंटेंट को भी अपने दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा है।

खरे के पास मानव संसाधन विकास मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव का प्रभार भी है। इस मंत्रालय ने महामारी के मद्देनजर छात्रों की शिक्षा के लिए डिजिटल पहल को बढ़ावा दिया है। खरे ने कहा कि महामारी के बाद शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की भूमिका बढ़ गई है। मानव संसाधन विकास को मीडिया और मनोरंजन के साथ जोड़ने की भी आवश्यकता है, क्योंकि महामारी के बाद ऑनलाइन लर्निंग पर कई वीडियो आ गए हैं। उनका कहना था कि सूचना प्रसारण मंत्रालय मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को ज्यादा स्वंतत्रता उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा है और यह एक नियामक (रेगुलेटर) से अधिक एक सूत्रधार और एजुकेटर के रूप में काम करता है।

कार्यक्रम के दौरान एक वीडियो मैसेज के जरिये सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित फिल्म और टीवी प्रॉडक्शन के लिए सरकार जल्द ही प्रोत्साहन का ऐलान करेगी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार फिल्म और टीवी शूट्स के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) लेकर आएगी।

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Zee5 में कुछ यूं निवेश करेंगे ZEEL के MD पुनीत गोयनका

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) से एक बड़ी खबर सामने आई है।

Last Modified:
Monday, 03 August, 2020
Punit Goenka

'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) से एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 'जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ पुनीत गोयनका ‘ZEEL’ के ऑपरेटिंग प्रॉफिट का सात प्रतिशत देश के पॉपुलर स्ट्रीमिंग सर्विस प्रोवाइडर ‘Zee5’ में निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं।  

पुनीत गोयनका ने कथित तौर पर कहा है कि उन्हें प्रमुख चैनल्स के बंद होने की चिंता नहीं है, क्योंकि दर्शक अब स्ट्रीमिंग सेवाओं की ओर रुख कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में गोयनका के हवाले से यह भी कहा गया है कि कंपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रमुख कंटेंट हासिल करने की दिशा में कदम उठाएगी। गोयनका ने हाल ही में एक ओपन लेटर जारी कर कंपनी के नए वर्जन ‘ZEE 4.0’  के लिए अपने स्ट्रैटेजिक विजन के बारे में बताया था।  

इस दौरान गोयनका ने कंपनी को एक प्रमुख मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी के रूप में प्रचारित करने के लिए भविष्य का एक रोडमैप रखा था। उन्होंने कहा था कि ‘ZEE 4.0’ नया और मजबूत वर्जन है, जो 5जी फॉर्मूले पर काम करेगा। इसके तहत – Governance, Granularity, Growth, Goodwill और Gusto पर फोकस किया जाएगा जो कंपनी के एक नए चरण को परिभाषित करेगा।

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पाकिस्तान का न्यूज चैनल हुआ हैक, इस संदेश के साथ लगाया भारतीय तिरंगा

पाकिस्तान के प्रमुख टीवी चैनल ‘डॉन’ पर रविवार को अचानक भारतीय तिरंगा लहराने से लोग अचंभित हो गए

Last Modified:
Monday, 03 August, 2020
channel-dawn

पाकिस्तान के प्रमुख टीवी चैनल ‘डॉन’ पर रविवार को अचानक भारतीय तिरंगा लहराने से लोग अचंभित हो गए। बताया जा रहा है कि इस न्यूज चैनल को हैक कर लिया गया था, जिसके बाद चैनल की स्क्रीन पर भारतीय झंडा लहराता रहा। इस घटना का फोटो और विडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।                                                                                 

बता दें कि रविवार दोपहर 3.30 बजे जिस समय चैनल को हैक किया गया, उस समय चैनल की स्क्रीन पर एक विज्ञापन चल रहा था, कि तभी टेलिविजन की स्क्रीन पर अचानक भारतीय झंडा लहराने लगा, जिस पर भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं वाला मैसेज भी लिखा हुआ था। हालांकि अभी तक यह नहीं बताया जा सका है कि चैनल पर यह विडियो कितने समय तक प्रसारित होता रहा।

वहीं, डॉन टीवी ने मामले की तत्काल जांच के आदेश दे दिए हैं। इस बीच घटना के कई वीडियो और स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, 'चैनल हमेशा की तरह प्रसारित हो रहा था, तभी अचानक भारतीय ध्वज और हैप्पी इंडिपेंडेंस डे का लेख स्क्रीन पर चल रहे कॉमर्शियल पर दिखाई दिया और कुछ समय तक वहां रहा और फिर गायब हो गया। हम इसकी जांच कर रहे हैं।'

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नहीं रहे वरिष्‍ठ फोटो जर्नलिस्ट राजीव केतन

वरिष्‍ठ फोटो जर्नलिस्ट राजीव केतन का रविवार को निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे

Last Modified:
Monday, 03 August, 2020
rajeev

वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट राजीव केतन का रविवार को निधन हो गया। करीब 50 वर्षीय राजीव केतन कुछ समय से बीमार चल रहे थे और इन दिनों संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआई), लखनऊ में भर्ती थे। 

बताया जाता है कि तबीयत खराब होने पर पहले उन्हें गोरखपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन हालत में सुधार न होने पर लखनऊ रेफर कर दिया गया था, जहां पर रविवार की शाम उन्होंने अंतिम सांस ली।

राजीव केतन पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। उनके परिवार में पत्नी, पुत्र व पुत्री हैं। वे ललित कला अकादमी के नामित सदस्य थे। इसके अलावा वह संस्कार भारती के महानगर अध्यक्ष भी थे। पिछले तीन दशक से भी ज्‍यादा समय से वे फोटो पत्रकारिता से जुड़े थे। उन्‍होंने कई प्रतिष्ठित संस्‍थानों में काम किया।

उन्‍हें एक प्रतिभाशाली फोटो जर्नलिस्‍ट के तौर पर जाना जाता था। गोरखपुर प्रेस क्‍लब के गठन के समय भी वह काफी सक्रिय रहे। प्रेस क्‍लब की पहली स्‍मारिका का आवरण चित्र उन्‍होंने ही डिजाइन किया था। वह अकसर युवा फोटोग्राफरों को फोटोग्राफी की बारीकियों से परिचित कराते नजर आते थे। उन्‍होंने फोटोग्रॉफी के क्षेत्र में पीएचडी की थी। उनके निधन से कला, साहित्‍य और पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है।

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जानिए, क्यों लाखों में बिका इस मैगजीन का कवर

वैसे तो यह मैगजीन अपने कंटेंट और कवर पेज को लेकर लोकप्रसिद्ध है, लेकिन 1989 में प्रकाशित  मैगजीन की कवर को एक खास व्यक्ति के ऑटोग्राफ ने बेशकीमती बना दिया है

Last Modified:
Monday, 03 August, 2020
Magazine

दुनियाभर में कई ऐसी मैगजीन छपती हैं, जो काफी लोकप्रिय होती हैं, इन्हीं में से एक है फॉर्च्यून मैगजीन (Fortune Magazine)। वैसे तो यह मैगजीन अपने कंटेंट और कवर पेज को लेकर लोकप्रसिद्ध है, लेकिन 1989 में प्रकाशित  मैगजीन की कवर को एक खास व्यक्ति के ऑटोग्राफ ने बेशकीमती बना दिया है, जिसकी बिक्री लाखों रुपए में हुई है।

बता दें कि इस कवर पेज को एक शख्स ने 12 लाख में खरीदा है। इस कवर पेज में स्टीव जॉब्स का ऑटोग्राफ था, जिससे यह इतनी खास हो गई।

मूल कीमत से 5000 गुना अधिक की कीमत में बिकने वाले इस कवर में स्टीव जॉब्स को फीचर किया गया था और इसपर उनका ऑटोग्राफ भी मौजूद था। कवर पर लिखा था- 'To Terry, Steve Jobs'। एपल इंसाइडर की रिपोर्ट के अनुसार,  उस वक्त वे NeXT सॉफ्टवेयर नामक कंप्यूटर कंपनी में थे।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1980 के दशक में टेरी (Terry) स्टीव जॉब्स के लिमुसिन (limousine) के लिए ड्राइवर थे। जब टेरी ने ऑटोग्राफ मांगा, तो तुरंत एपल के फाउंटर  स्टीव जॉब्स ने अपने पास पड़ी मैगजीन के कवर पर लिखकर दे दिया था। कवर की नीलामी वाले पत्र पर टेरी ने लिखा, 'मैं जॉब्स के पास कई सालों तक काम करने वाले ड्राइवरों में से एक था। हालांकि जॉब्स ने मेरी ऑटोग्राफ मांगने वाली बात को लेकर लिमुसिन (limousine) कंपनी के पास शिकायत भी की थी।'  

1985 में जॉब्स ने एपल कंपनी को छोड़ दिया और  NeXT नाम के कंप्यूटर कंपनी के साथ काम करने लगे। 400 मिलियन डॉलर की कीमत में एपल ने NeXT सॉफ्टवेयर का अधिग्रहण कर लिया। डील के अनुसार, जॉब्स आई फोन निर्माता कंपनी एपल से वापस जुड़ गए और तत्कालीन सीइओ डॉक्टर गिल एमेलियो (CEO Dr Gil Amelio) को रिपोर्ट करने लगे इसके बाद यहां उन्हें CEO की पदवी मिल गई। कवर की नीलामी नेट डी सैंडर्स ऑक्सन्स द्वारा की गई। इसपर केवल तीन लोगों ने बोली लगाई थी। इससे पहले जॉब्स की हस्ताक्षर वाली पिक्सर एनिमेशन स्टूडियोज 1995  की फिल्म टॉय स्टोरी की पोस्टर 31,250 डॉलर में बिकी थी। पोस्टर की साइज 24 इंच  गुना 36 इंच है और इसपर 1995 के बाद हस्ताक्षर किया गया था। 

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सेना पर वेब सीरीज और फिल्म की रिलीज से पहले लेनी होगी रक्षा मंत्रालय से मंजूरी

सेना पर तमाम बनीं फिल्में, डॉक्यूमेंट्री और वेब सीरीज में सशस्त्र बलों के जवानों के चित्रण पर रक्षा मंत्रालय ने आपत्ति जताई है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 August, 2020
Last Modified:
Saturday, 01 August, 2020
army

इन दिनों सेना पर तमाम फिल्में, डॉक्यूमेंट्री और वेब सीरीज बन रही हैं, जिसमें सशस्त्र बलों के जवानों के चित्रण पर रक्षा मंत्रालय ने आपत्ति जताई है। साथ ही पत्र लिखकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को सलाह दी है कि सेना से जुड़े किसी कंटेंट के प्रसारण से पहले रक्षा मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने की सलाह देने पर विचार करे। हालांकि अभी इसको लेकर कोई लिखित आदेश जारी होने की बात सामने नहीं आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय को भारतीय सेना के जवानों और सैन्य वर्दी (  के अपमानजनक तरीके से फिल्म और वेब सीरीज में चित्रित करने के बारे में कुछ शिकायतें मिलीं है। इस शिकायत के बाद रक्षा मंत्रालय ने औपचारिक रूप से केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC), MEITY) और सूचना-प्रसारण मंत्रालय से कहा है कि भारतीय सेना पर बनाई गई फिल्म/डॉक्यूमेंट्री/वेब सीरीज के प्रसारण से पहले प्रॉडक्शन हाउस से कहे कि वो रक्षा मंत्रालय से NOC प्राप्त करें। बिना NOC के भारतीय सेना पर बनाई गई फिल्मों और उसके सीन का प्रसारण नहीं होगा।

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और सूचना-प्रसारण मंत्रालय को रक्षा मंत्रालय की ओर से यह भी कहा गया है कि यह सब उन घटनाओं को रोकने के लिए किया जा रहा है जो रक्षा बलों की छवि को बिगाड़ते हैं और रक्षा कर्मियों और दिग्गजों की भावनाओं को आहत करते हैं।

गौरतलब है कि एकता कपूर की वेब सीरीज ‘XXX: अनसेंसर्ड 2’ (XXX: Uncensored 2) में कथित रूप से सेना के अपमान और अश्लीलता फैलाने के आरोप लगे थे। इस पर विवाद होने के बाद एकता कपूर ने बयान में कहा था कि किसी की भी भावना आहत न हो, इसलिए आपत्तिजनक कंटेंट को हटा दिया गया है। उन्होंने बयान में कहा था, ‘स्थिति की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए हम मानते हैं कि सीरीज में आपत्तिजनक दृश्य दिखाया गया जो हमारी तरफ से चूक थी।   

आलोचनाओं का सामना कर रहीं एकता कपूर ने भारतीय सेना से माफी मांगते हुए कहा था कि उनका ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘ऑल्ट बालाजी’ (ALT Balaji) सैनिकों का बेहद सम्मान करता है। उन्होंने कहा, ‘वे हमारी सुरक्षा के लिए सीमा पर न केवल अपनी जिदंगी को खतरे में डालते हैं, बल्कि देश में एक बेहद अनुशासित और सम्मानीय संगठन हैं।'

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मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक के बेटे जेम्स मर्डोक ने इंडस्ट्री में उठाया ये बड़ा कदम

मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक (Rupert Murdoch) के बेटे जेम्स मर्डोक ने ‘न्यूज कॉर्प’ (News Corp) के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 August, 2020
Last Modified:
Saturday, 01 August, 2020
James Murdoch

मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक (Rupert Murdoch) के बेटे जेम्स मर्डोक ने जानी मानी मीडिया कंपनी ‘न्यूज कॉर्प’ (News Corp) के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने एडिटोरियल कंटेंट को लेकर वैचारिक मतभेद का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है।  

बता दें कि इससे पहले मर्डोक ने परिवार के स्वामित्व वाले ‘फॉक्स न्यूज’ (Fox News) से इस्तीफा दे दिया था, जहां पर उनके भाई लाचलान मर्डोक (Lachlan Murdoch) सीईओ के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले उन्होंने जलवायु परिवर्तन की न्यूज को लेकर ‘वॉल स्ट्रीज जर्नल’ (Wall Street Journal) की कवरेज की आलोचना भी की थी।   

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ समय से जेम्स मर्डोक और रूपर्ट मर्डोक के बीच राजनीतिक विचारधारा को लेकर टकराव चल रहा है। रूपर्ट मर्डोक जहां रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन कर रहे हैं, वहीं जेम्स मर्डोक उनकी प्रतिद्वंद्वी और डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बिडेन (Joe Biden) का समर्थन कर रहे हैं।

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फेसबुक ने अपने प्लेटफॉर्म पर लॉन्च की ये सुविधा

सोशल मीडिया वेबसाइट ‘फेसबुक’ ने अब अपने प्लेटफॉर्म पर ऑफिशियल म्यूजिक वीडियो लॉन्च कर दिया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 August, 2020
Last Modified:
Saturday, 01 August, 2020
facebook

सोशल मीडिया वेबसाइट ‘फेसबुक’ अब अपने प्लेटफॉर्म पर ऑफिशियल म्यूजिक वीडियो लॉन्च कर दिया है। यह भारत में 'फेसबुक वॉच' के नाम से शुरू किया गया है।

बताया जा रहा है कि फेसबुक इस सुविधा के जरिए यूट्यूब को टक्कर मिलेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेसबुक ने म्यूजिक वीडियो के लिए कुछ कलाकारों और म्यूजिक कंपनियों से डील कर ली है। वह पिछले एक साल से इस पर काम कर रहा था।  

फेसबुक वीडियो बनाने में आने वाले खर्च का भी भुगतान करने को तैयार है। वे व्युरशिप बढ़ाने के लिए वीडियो को अपने प्लेटफॉर्म पर प्रमोट भी करेंगे। ताकि ज्यादा से ज्यादा यूजर अपने फेवरेट आर्टिस्ट के वीडियो देख पाएंगे और उन्हें फॉलो कर सकेंगे।

बाकि पोस्ट की तरह इन वीडियोज पर रिएक्ट किया जा सकेगा फेसबुक वॉच पर डेडिकेटिट म्यूजिक वीडियो आर्टिस्ट या जोनर के नाम से देखे जा सकते हैं अपने मूड के अनुसार सर्च कर मनपसंद म्यूजिक वीडियो देखे जा सकते हैं।

फेसबुक भारत और थाइलैंड में भी इस प्लेटफॉर्म को लाने पर काम कर रहा है उम्मीद की जा रही है भारत में भी ये प्लेफॉर्म जल्द ही देखने को मिल सकता है।  

आर्टिस्ट पेज की सेटिंग में ऐड म्यूजिक ऑप्शन में जाकर अपने म्यूजिक वीडियो को ऐड कर सकेंगे। फेसबुक ऑटोमेटिकली तरीके से आर्टिस्ट के पेज को तैयार कर देगी। ऐसे में आर्टिस्ट को मैन्युअली तौर पर वीडियो अपडेट फिर लिंक पेस्ट करने की जरूरत नहीं होगी।

फेसबुक की तरफ से ‘फेसबुक वॉच’ के जरिए आर्टिस्ट के पेज को कंट्रोल किया जाएगा। इस तरह आर्टिस्ट फेसबुक म्यूजिक वीडियो प्लेटफॉर्म पर खुद से म्यूजिक वीडियो पोस्ट करने की इजाजत दे देगा। इसके बाद एक बार वीडियो इनेबल्ड होने पर आर्टिस्ट के पास वीडियो को एडिट या रिमूव करन का ऑप्शन मिल जाएगा।

इतना ही नहीं फेसबुक के म्यूजिक वीडियो में पोस्ट के ऑटो जनरेट करने का ऑप्शन होगा। मतलब वीडियो के टाइटल, डिस्क्रिप्शन, टैग और Thumbnails ऑटो मोड में क्रिएट हो जाएंगे।

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Volvo Cars से इस्तीफा देकर सुदीप नारायण ने नई दिशा में बढ़ाए कदम

नारायण ने वर्ष 2008 में Volvo Cars को जॉइन किया था और देश में वॉल्वो को एक लग्जरी कार ब्रैंड के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 August, 2020
Last Modified:
Saturday, 01 August, 2020
Sudeep Narayan

‘Volvo Cars’ के पहले इंडियन डायरेक्टर सुदीप नारायण ने यहां से बाय बोल दिया है। वह करीब 12 साल से इस कंपनी से जुड़े हुए थे। उन्होंने अब ‘brandhalō’ के नाम से ब्रैंड एडवाइजरी फर्म शुरू की है। ‘brandhalō’ एक सलाहकार फर्म है जो बिजनेस परफॉर्मेंस के लिए मार्केटिंग कम्युनिकेशंस (Marcomm) और इंटीग्रेटेड ई-कॉमर्स सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है।

सुदीप नारायण ने वर्ष 2008 में Volvo Cars को जॉइन किया था और विभिन्न मार्केटिंग और कम्युनिकेशन पहल के द्वारा देश में वॉल्वो को एक लग्जरी कार ब्रैंड के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। उनके कैंपेन ने मार्केटिंग और कॉरपोरेट कम्युनिकेशन के क्षेत्र में खास पहचान दिलाई व Top100 Influential Game Changers of the Year 2019 (Exchange4Media), 50 Most Influential Brand Leaders of India 2013 (CMO Asia) अवॉर्ड्स जीते और ‘Marketer of the Year’ at the International Advertising Association (India Chapter, 2013) के लिए नॉमिनेट किए गए।

मुंबई के ‘Narsee Monjee Institute of management Studies’ से पोस्ट ग्रेजुएट सुदीप नारायण को एडवर्टाइजिंग और ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में काम करने का 24 साल से ज्यादा का अनुभव है।

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गूगल-फेसबुक को न्यूज कंटेंट के लिए करना पड़ सकता है भुगतान

न्यूज कंटेंट के लिए ऑस्ट्रेलिया में गूगल और फेसबुक को भुगतान करना पड़ सकता है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 August, 2020
Last Modified:
Saturday, 01 August, 2020
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न्यूज कंटेंट के लिए ऑस्ट्रेलिया में गूगल और फेसबुक को भुगतान करना पड़ सकता है। शुक्रवार को ऑस्ट्रेलिया सरकार ने इस बात के संकेत दिए हैं। दरअसल, यहां की सरकार चाहती है कि गूगल और फेसबुक मीडिया कंपनियों के साथ बातचीत करे और इसके लिए वह तीन महीने का समय देने पर विचार कर रही हैं। ऐसा इसलिए ताकि न्यूज कंटेंट के लिए उचित भुगतान तय किया जा सके।

सरकार ने एक अनिवार्य आचार संहिता का मसौदा जारी किया है, जिससे वैश्विक डिजिटल कंपनियों को व्यावसायिक मीडिया कंपनियों से लिए गए न्यूज कंटेंट के लिए भुगतान करना होगा। दुनिया के अन्य देश इस तरह की कोई संहिता बनाने में विफल रहे हैं।

वित्त मंत्री जोश फ्रायडेनबर्ग ने कहा कि प्रस्तावित कानून के तहत गूगल और फेसबुक को सबसे पहले लक्ष्य किया गया है। इसके बाद अन्य डिजिटल मंचों से भी भुगतान के लिए कहा जाएगा। फ्रायडेनबर्ग ने कहा, ‘यह ऑस्ट्रेलिया की मीडिया कंपनियों की दृष्टि स उचित है। इससे प्रतिस्पर्धा, उपभोक्ता सुरक्षा बढ़ेगी और मीडिया क्षेत्र में स्थिरता आएगी।’

मसौदे में कहा गया है कि यदि अमेरिका के डिजिटल मंचों की ऑस्ट्रेलिया की मीडिया कंपनियों के साथ तीन महीने बाद भी सहमति नहीं बन पाती है, तो पंचाट की नियुक्ति की जाएगी, जिसका फैसला बाध्यकारी होगा। फ्रायडेनबर्ग ने कहा कि इस मसौदे पर 28 अगस्त तक चर्चा होगी। उसके बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा।

वहीं, ऑस्ट्रेलिया सरकार ने फेसबुक और गूगल को न्यूज कंटेंट से होने वाले रेवन्यू को साझा करने का भी आदेश दिया है। आदेश में कहा गया है कि यह विश्व में उठाया गया पहला कदम है जो इन डिजिटल दिग्गजों के खिलाफ नियामक और राजनीतिक रूप से मोर्चा खोल रहा है।

फ्रायडेनबर्ग ने यह भी कहा कि दोनों कंपनियों को पारंपरिक मीडिया से विश्वास के साथ रेवन्यू को लेकर बातचीत भी करनी होगी और यदि कोई समझौता नहीं होता है तो एक बाध्यकारी मध्यस्थता प्रक्रिया होगी, जिसे तोड़ने पर 70 लाख डॉलर जुर्माना लगाया जाएगा। 

फ्रायडेनबर्ग ने कहा कि ये कदम ऑस्ट्रेलियाई मीडिया कंपनियों को भी कमाने की जगह देने के लिए उठाया गया है। 

बता दें कि पारंपरिक मीडिया फर्म्स लंबे समय से इस तरह की शिकायत कर रहीं हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म बिना उचित मुआवजा दिए उनके कंटेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं और उनका शोषण कर रहे हैं।  समाचार पत्रों और प्रसारकों ने नौकरियों में भी कटौती की है। उनकी इन शिकायतों को अब राजनीतिक समर्थन मिल गया है।

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वरिष्ठ पत्रकार एम गुनासेकरन ने दिया इस्तीफा, साथियों को लिखा ये विदाई संदेश

अपने साथियों को लिखे विदाई संदेश में गुनासेकरन ने कहा कि उनके नेतृत्व में चैनल कभी भी राजनीतिक पूर्वाग्रहों से ग्रस्त नहीं रहा

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 August, 2020
Last Modified:
Saturday, 01 August, 2020
M Gunasekaran

वरिष्ठ पत्रकार एम. गुनासेकरन (M. Gunasekaran) ने न्यूज18 तमिलनाडु में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह यहां न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूट्यूबर मरिधास (Maridhas) द्वारा लगाए गए राजनीतिक पूर्वाग्रहों के आरोपों के बाद गुनासेकरन ने यह कदम उठाया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में गुनासेकरन ने अपने साथियों को एक लेटर भी लिखा है। इस लेटर में गुनासेकरन का कहना है कि उनके नेतृत्व में चैनल ने कभी किसी राजनीतिक दल का पक्ष नहीं लिया और दर्शक व राजनीतिक दलों के नेताओं को भी इस बात की जानकारी थी।

गुनासेकरन का यह भी कहना है कि न्यूज18 के साथ उनका संबंध भावनात्मक था और केवल एक एम्पलॉयी और संस्थान का नहीं था। उन्होंने कहा, ‘किसी भी न्यूज संस्थान के लिए लोगों का विश्वास हासिल करना आसान नहीं है। अपने समर्पण, कड़ी मेहनत और बिना किसी भय के लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व कर हमने लोगों का भरोसा हासिल किया। हम यह भी नहीं भूल सकते कि कई मामलों में हम सेंशरशिप से भी बंधे हुए थे।’

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