अयोध्या से जुड़ी कोई भी जानकारी हो बस एक फोन पर आपसे मिल जाती थी। ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दें और परिवार वालों को ये दुख सहने की शक्ति दे।
अयोध्या/फैजाबाद में ‘आजतक’ के वरिष्ठ संवाददाता बलबीर सिंह का निधन हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बलबीर सिंह सुबह अपने बिस्तर पर गिरे हुए मिले। आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
उनके निधन पर पत्रकार और एंकर चित्रा त्रिपाठी ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स हैंडल पर लिखा, मेरे पुराने चैनल के साथी, अयोध्या के रिपोर्टर बनवीर सिंह नहीं रहे। पता चला है कि रात को आराम से सोने गए और सुबह जगे ही नहीं। अयोध्या से जुड़ी कोई भी जानकारी हो बस एक फोन पर आपसे मिल जाती थी। ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दें और परिवार वालों को ये दुख सहने की शक्ति दे।
आपको बता दें, बलबीर सिंह के निधन पर सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा हुआ है। तमाम जानने वालों और शुभचिंतकों ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और उनके परिवार को यह दुख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।
मेरे पुराने चैनल के साथी, अयोध्या के रिपोर्टर बनवीर सिंह नहीं रहे. पता चला है कि रात को आराम से सोने गए और सुबह जगे ही नहीं.
— Chitra Tripathi (@chitraaum) January 7, 2025
अयोध्या से जुड़ी कोई भी जानकारी हो बस एक फोन पर आपसे मिल जाती थी.
ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दें और परिवार वालों को ये दुख सहने की शक्ति ??
ॐ शांति ?? pic.twitter.com/aHH6bpyYFJ
हैवल्स ने आउटडोर और डिजिटल, दोनों माध्यमों का मेल कर यह दिखाया है कि वह त्योहारों में सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए भी प्रतिबद्ध है।
इलेक्ट्रिकल ब्रांड हैवल्स ने गणेश चतुर्थी के मौके पर एक अनोखा 360-डिग्री फेस्टिव कैंपेन लॉन्च किया है, जिसमें परंपरा, क्रिएटिविटी और टेक्नॉलॉजी का अनोखा मेल देखने को मिल रहा है। कैंपेन का मुख्य आकर्षण एक अनोखी गणेश प्रतिमा है, जिसे पूरी तरह हैवल्स के स्विच और अप्लायंसेज़ से तैयार किया गया है।
इस प्रतिमा को मुंबई के प्रमुख स्थानों जैसे प्रभादेवी सिद्धिविनायक मंदिर, वर्ली नाका जंक्शन और ठाणे माजीवाड़ा फ्लाईओवर जंक्शन पर स्थापित किया गया है। यह न सिर्फ ब्रांड की इनोवेटिव सोच को दर्शाता है बल्कि त्योहार की सांस्कृतिक अहमियत को भी सलाम करता है।
आउटडोर इंस्टॉलेशन के साथ-साथ हैवल्स ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी कई पहल की हैं। इसमें शामिल है एक 'AI-पावर्ड फेस्टिव फिल्म' जो गणेश चतुर्थी की भावनाओं को आधुनिक तकनीक के जरिए नए अंदाज में पेश करती है। इसके अलावा, इन्फ्लुएंसर-लीड वीडियो सीरीज़ भी लॉन्च की गई है, जो हैवल्स के स्टाइल में त्योहार की झलक दिखाती है।
इस कैंपेन को और मज़बूती देने के लिए कंपनी ने सोशल मीडिया एक्टिवेशन और टार्गेटेड डिजिटल प्रमोशन भी शुरू किए हैं। कुल मिलाकर, हैवल्स ने आउटडोर और डिजिटल, दोनों माध्यमों का मेल कर यह दिखाया है कि वह त्योहारों में सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव और रचनात्मकता के लिए भी प्रतिबद्ध है।
विद्यार्थियों को अपने अतीत के बारे में भी जानना चाहिए। ब्रिटिशों ने भारत पर अपनी शिक्षा प्रणाली थोप दी है और इससे भारतीय शिक्षा प्रणाली लुप्त हो गई।
'संघ की 100 वर्ष की यात्रा: नए क्षितिज' विषय पर आयोजित कार्यक्रम के तीसरे और अंतिम दिन अपने संबोधन में सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारत की शिक्षा प्रणाली का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का मतलब सिर्फ सभी जानकारियों को रटना नहीं है, विद्यार्थियों को अपने अतीत के बारे में भी जानना चाहिए।
ब्रिटिशों ने भारत पर अपनी शिक्षा प्रणाली थोप दी है और इससे भारतीय शिक्षा प्रणाली लुप्त हो गई। इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार राजीव सचान ने भी सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट कर अपनी राय दी। उन्होंने लिखा, आरएसएस प्रमुख से शिक्षा पर कई सवाल किए गए-शायद इसलिए कि आम धारणा है कि शिक्षा के मामलों को संघ देखता है।
सच जो भी हो, पिछले 11 वर्षों में शिक्षा के मोर्चे पर अपेक्षा से कहीं कम काम हुआ है। पाठ्यक्रम परिवर्तन अभी प्रारंभिक अवस्था में है, स्कूली इतिहास में मामूली तब्दीली हुई है और अनेक कुलपतियों की नियुक्तियां विवाद का विषय बनी हैं।
आपको बता दें, संघ प्रमुख ने अपने अतीत को याद करते हुए कहा कि जब मैं आठवीं क्लास में था, तो मेरे पिता ने मुझे ओलिवर ट्विस्ट को पढ़ने के लिए कहा था। लेकिन ओलिवर ट्विस्ट को पढ़ना और प्रेमचंद को पीछे छोड़ देना भी सही नहीं है।
आरएसएस प्रमुख से शिक्षा पर कई सवाल किए गए-शायद इसलिए कि आम धारणा है कि शिक्षा के मामलों को संघ देखता है। सच जो भी हो, पिछले 11 वर्षों में शिक्षा के मोर्चे पर अपेक्षा से कहीं कम काम हुआ है। पाठ्यक्रम परिवर्तन अभी प्रारंभिक अवस्था में है, स्कूली इतिहास में मामूली तब्दीली हुई है और…
— Rajeev Sachan (@RajeevKSachan) August 28, 2025
इंडिया टुडे ने सी-वोटर के साथ 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे किया है। देश के सभी राज्यों और लोकसभा क्षेत्रों में 1 जुलाई से 14 अगस्त 2025 के बीच ये सर्वे किया गया।
देश में अगर आज आम चुनाव हो जाएं तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए की सीटें बढ़कर 324 हो जाएंगी। यही नहीं, बीजेपी की सीटें भी 240 से बढ़कर 260 हो जाएंगी। हालांकि पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े 272 से नीचे ही रहेगी। इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे में ये नतीजे निकलकर आए हैं।
ये सर्वे देश के सभी राज्यों और लोकसभा क्षेत्रों में 1 जुलाई से 14 अगस्त 2025 के बीच हुआ। हर आयु वर्ग जाति, धर्म, लिंग वाले 54 हजार 788 लोग इसमें शामिल हुए। इसके अलावा पिछले 24 हफ्तों में 1 लाख 52 हजार 38 लोगों से भी राय ली गई थी। उसका विश्लेषण भी इसमें शामिल किया गया।
इस तरह कुल 2 लाख 6 हजार 826 लोगों की राय से तैयार हुए मूड ऑफ द नेशन के नतीजे। हालांकि इन आंकड़ों में भी मोटे तौर पर 3 प्रतिशत और बारीक स्तर पर 5 प्रतिशत का मार्जिन एरर हो सकता है। सर्वे में सामने आया कि NDA को 324 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि INDIA ब्लॉक को 208 सीटें मिल सकती हैं, जबकि अन्य के खाते में 11 सीटें जा सकती हैं।
ऋचा अनिरुद्ध की छवि एक गंभीर और जनोन्मुखी पत्रकार व एंकर की है। पूर्व में ऋचा लंबे समय तक ‘आईबीएन7’ (अब न्यूज18 इंडिया) के साथ जुड़ी रहीं।
वरिष्ठ टीवी पत्रकार और जानी-मानी न्यूज एंकर ऋचा अनिरुद्ध ने मीडिया में अपनी नई पारी की शुरूआत कर दी हैं। ऋचा अनिरुद्ध अब ‘नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड’ (Network18 Media & Investments Limited) की टीम में शामिल हो गई है और इस नेटवर्क के तेजी से उभरते डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘कड़क’ में बतौर कंसल्टेंट जॉइन कर चुकी है।
अब यहां उनके नए शो 'अनकही' के नाम का ऐलान भी हो गया है। इस शो का प्रसारण सोमवार से शनिवार रात्रि 9 बजे किया जाएगा। आपको बता दें, ऋचा अनिरुद्ध, भारतीय मीडिया का एक प्रतिष्ठित और जाना-पहचाना नाम है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है और अपनी प्रतिभा के दम पर बहुत ही कम समय में खास मुकाम हासिल किया है।
ऋचा अनिरुद्ध की छवि एक गंभीर और जनोन्मुखी पत्रकार व एंकर की है। पूर्व में ऋचा लंबे समय तक ‘आईबीएन7’ (अब न्यूज18 इंडिया) के साथ जुड़ी रहीं, जहां वे चैनल के मशहूर शो 'जिंदगी लाइव' को होस्ट करती थीं।
हर बड़ी खबर का अनकहा सच बताने आ रहीं हैं आपकी Richa Anirudh#ankahi #comingsoon #kadak@richaanirudh @ShamsherSLive pic.twitter.com/ylHHJNtZk0
— Kadak (@itskadak) August 29, 2025
अमेरिकी सरकार ने भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्कों को लागू ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने नए शुल्कों की एक अधिसूचना अपलोड की।
अमेरिकी सरकार ने भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्कों को लागू ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने नए शुल्कों की एक अधिसूचना अपलोड की। वहीं, भारत सरकार अर्थव्यवस्था की निर्यात पर निर्भरता कम करने के लिए 'स्वदेशी' मंत्र पर जोर दे रही है।
इस बीच वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट की और अपनी राय दी। उन्होंने लिखा, कूटनीति , विदेश नीति , ग्लोबल वर्ल्ड ऑर्डर, इन सब को छोड़िये। 150 करोड़ जनों का यह देश अगर अपने दैनिक जीवन में विदेश में बनी चीजों के प्रयोग को निषिद्ध कर दे तो देश का स्वाभिमान और देश की आर्थिक स्थिति दोनों पर्वताकार हो जायेगे। तब सारे टैरिफ-वैरिफ स्वयं निरर्थक हो जाएंगे और तमाम बड़े देशों का सत्य से साक्षात्कार हो जाएगा।
आपको बता दें, अमेरिकी टैरिफ के कारण भारतीय निर्यातक अमेरिका के साथ अपने व्यापार में भारी गिरावट के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, 47 अरब डॉलर से ज्यादा मूल्य के उत्पादों पर 50% टैरिफ दर लागू होगी। इसमें 7 अगस्त से भारतीय आयातों पर लगाया गया 25% टैरिफ और रूस से भारत द्वारा तेल आयात पर दंड के रूप में लगाया गया 25% अतिरिक्त टैरिफ शामिल है।
कूटनीति , विदेश नीति , ग्लोबल वर्ल्ड ऑर्डर---इन सब को छोड़िये -- 150 करोड़ जनों का यह देश अगर अपने दैनिक जीवन में विदेश में बनी चीजों के प्रयोग को निषिद्ध करदे तो देश का स्वाभिमान और देश की आर्थिक स्थिति दोनों पर्वताकार हो जायेगे --- तब सारे टैरिफ -वैरिफ स्वयं निरर्थक हो जाएंगे…
— Amitabh Agnihotri (@Aamitabh2) August 26, 2025
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा आज जिनके खिलाफ पूरा वातावरण नफरती बनाने का प्रयास किया जा रहा है, अगर उस दौर में देखें तो भारत की अर्थव्यवस्था डूब गई होती।
रिपब्लिक भारत के कार्यक्रम नए भारत का शंखनाद 'संवाद' के मंच पर बीजेपी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी ने अपने विचार प्रकट किये। उन्होंने कहा, दुनिया में टैरिफ को लेकर संघर्ष का दौर चल रहा है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता है। समस्याएं क्या हैं और उनसे बाहर कैसे निकला जाए, इसे लेकर चिंताएं हैं। भारत में भी बदलाव का दौर है और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है।
मई 1998 का पोखरण परीक्षण, जिसके बाद भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगे। उस समय जितने भी सो-कॉल्ड इंटेलेक्चुअल थे, उन्होंने कहा कि इस सरकार ने भारत को बर्बादी की कगार पर ला दिया है।क्यों? क्योंकि उस जमाने में न हमारे पास फिजिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर था, न हमारे पास फाइनेंशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर था और न ही कोई भारत में एक डॉलर निवेश करने को तैयार था।
दो साल से भी कम समय में, मार्च 2000 में अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन 5 दिन की भारत यात्रा पर आए, आखिर ऐसा क्या बदला था उस दो साल के समय में?जब उस दौर में हम उस स्थिति से निकलकर यह स्थान स्थापित कर सके, तो आज तो हमारी स्थिति में बहुत बड़ा अंतर है।
क्योंकि हर चुनौती एक छुपी हुई नई संभावना भी लेकर आती है, और आपदा को अवसर में बदलने की कला तो हमारे प्रधानमंत्री श्री मोदी जी को आती है, और मैंने प्रमाण सहित बताया कि पहले भी हम यह दिखा चुके हैं। अब आज के विश्व के परिदृश्य और उसमें भारत की संभावनाओं को जरा ध्यान से देखिए।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा आज जिनके खिलाफ पूरा वातावरण नफरती बनाने का प्रयास किया जा रहा है, अगर उस दौर में देखें तो भारत की अर्थव्यवस्था डूब गई होती मगर सभी ने मिलकर काम किया। उसके बाद सरकार ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर काम किया क्योंकि अब पैसे आ रहे थे।
दुनिया में टैरिफ को लेकर संघर्ष का दौर चल रहा है और भविष्य को लेकर अनिश्चितता है। समस्याएं क्या हैं और उनसे बाहर कैसे निकला जाए, इसे लेकर चिंताएं हैं। भारत में भी बदलाव का दौर है और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। मई 1998 का पोखरण परीक्षण, जिसके बाद भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगे। उस… pic.twitter.com/7WTLYDDFy6
— Dr. Sudhanshu Trivedi (@SudhanshuTrived) August 22, 2025
इस कदम से भारत को उच्च तकनीक तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे भविष्य में लड़ाकू विमानों का डिज़ाइन, उत्पादन और रखरखाव देश में ही संभव होगा।
भारत अपने स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि अब भारत इन विमानों के इंजन भी देश में ही बनाएगा। इसके लिए भारत ने फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी सफरान के साथ साझेदारी की है। इस जानकारी के सामने आने के बाद वरिष्ठ रक्षा पत्रकार गौरव सावंत ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट की और सरकार के इस निर्णय की तारीफ़ की।
उन्होंने लिखा, 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए सफ़रान इंजन का चयन करना एक बेहद सराहनीय निर्णय है, क्योंकि यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बड़ी मजबूती देगा। फ्रांस ऐतिहासिक रूप से भारत का विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार रहा है। यहां तक कि 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद भी जब अमेरिका समेत पश्चिमी देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए, तब फ्रांस ने कोई प्रतिबंध नहीं लगाया।
यही नहीं, मिराज लड़ाकू विमानों ने भारतीय वायुसेना की क्षमता को लंबे समय तक मजबूती प्रदान की। इसके विपरीत, उस दौर में प्रतिबंधों के चलते भारतीय नौसेना के सी हैरियर फाइटर जेट और सी किंग हेलीकॉप्टर पूरी तरह ग्राउंड हो गए थे, जबकि एलसीए (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के लिए जीई-404 इंजन की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई थी।
आज भी जीई-404 इंजन की सप्लाई उतनी सुचारु नहीं है, ऐसे में फ्रांस के साथ सफ़रान इंजन पर सहयोग भारत की रक्षा क्षमताओं के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। आपको बता दें, इस कदम से भारत को उच्च तकनीक तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे भविष्य में लड़ाकू विमानों का डिज़ाइन, उत्पादन और रखरखाव देश में ही संभव होगा। साथ ही, यह साझेदारी भारत और फ्रांस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक और रक्षा सहयोग को और मज़बूती देगी।
Good decision to go with Safaran engine for 5th Generation Fighter Jets.
— GAURAV C SAWANT (@gauravcsawant) August 22, 2025
* Big push for Atmanirbhar Bharat in Defence.
* France has historically been a reliable strategic partner.
* Even after Pokhran nuclear tests, France imposed no `sanctions' on India
* Mirages served IAF well https://t.co/TaLr42jvRz
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल ऑनलाइन जुए पर लगाम लगाएगा बल्कि युवाओं को प्रतिस्पर्धात्मक ई-स्पोर्ट्स और सांस्कृतिक खेलों की ओर भी आकर्षित करेगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 अब कानून बन गया है। इस नए कानून के तहत देश में ऑनलाइन मनी गेमिंग (Real Money Games) पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। सरकार का उद्देश्य इस कानून के जरिए ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को बढ़ावा देना है, ताकि ऑनलाइन गेमिंग का स्वरूप मनोरंजन और खेल तक ही सीमित रहे, न कि जुए या सट्टेबाजी तक।
कानून लागू होने से पहले ही प्रमुख ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने अपनी मनी गेमिंग सेवाएं बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। देश में करीब 25 करोड़ से अधिक यूजर्स वाली कंपनी विन्जो (WinZO) ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए 22 अगस्त से अपनी मनी गेमिंग सेवाएं बंद करने की घोषणा की है।
वहीं, ड्रीम-11, रमी सर्कस जैसी बड़ी कंपनियां भी अपने प्लेटफॉर्म से मनी गेम्स हटाने में जुट गई हैं। भारत का ऑनलाइन गेमिंग बाजार एशिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है। ऐसे में कंपनियां पूरी तरह से पीछे हटने के बजाय नए कानून के अनुरूप खुद को ढालने की तैयारी कर रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में गेमिंग कंपनियां भारतीय पारंपरिक खेलों और सोशल इंटरएक्टिव गेम्स को प्लेटफॉर्म पर शामिल करने पर जोर देंगी। नए कानून के तहत ई-स्पोर्ट्स को औपचारिक मान्यता और प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जिससे भारत में गेमिंग इंडस्ट्री को एक नया और स्वस्थ स्वरूप मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल ऑनलाइन जुए पर लगाम लगाएगा बल्कि युवाओं को प्रतिस्पर्धात्मक ई-स्पोर्ट्स और सांस्कृतिक खेलों की ओर भी आकर्षित करेगा।
हम भारतीय सामान को अपने बाजार में और स्वागत करेंगे। भारत की आईटी, सॉफ्टवेयर और बायोमेडिसिन में ताकत है, जबकि चीन इलेक्ट्रॉनिक्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर और नई ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ रहा है।
चीन के राजदूत शू फीहोंग ने भारत के साथ मजबूत दोस्ती और सहयोग की वकालत करते हुए अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ को 'गुंडागर्दी' करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारत पर 50% तक का टैरिफ लगाया और और भी बढ़ाने की धमकी दी है, जिसका चीन पुरजोर विरोध करता है। इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शर्मा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक पोस्ट की और अपनी राय दी।
उन्होंने लिखा, कूटनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता न मित्र और न ही शत्रु। अगर कुछ स्थायी है तो वह है केवल अपना हित। वह चीन जो गलवान संघर्ष के बाद शत्रु की भूमिका में आ गया था, अब उससे रिश्ते सामान्य हो रहे हैं। वह अमेरिका जो चीन से संघर्ष के समय मित्र दिख रहा था, अब उससे रिश्ते कड़वे हो गए।
आपको बता दें, फीहोंग ने भारतीय सामान को चीनी बाजार में और जगह देने का वादा किया। उन्होंने कहा, हम भारतीय सामान को अपने बाजार में और स्वागत करेंगे। भारत की आईटी, सॉफ्टवेयर और बायोमेडिसिन में ताकत है, जबकि चीन इलेक्ट्रॉनिक्स, इन्फ्रास्ट्रक्चर और नई ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है।
कूटनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता न मित्र और न ही शत्रु। अगर कुछ स्थायी है तो वह है केवल अपना हित। वह चीन जो गलवान संघर्ष के बाद शत्रु की भूमिका में आ गया था, अब उससे रिश्ते सामान्य हो रहे हैं। वह अमेरिका जो चीन से संघर्ष के समय मित्र दिख रहा था, अब उससे रिश्ते कड़वे हो गए।
— Akhilesh Sharma (@akhileshsharma1) August 22, 2025
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस पर 'डिकोड' उन महान आत्माओं को नमन करता है जिन्होंने हमें इस दुनिया में लाया, हमारे जीवन को सँवारा और हमें आज वह बनाया जो हम हैं।
विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस हर साल 21 अगस्त को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य समाज में बुज़ुर्गों के योगदान को सम्मान देना और उनकी समस्याओं पर जागरूकता फैलाना है। यह दिवस पहली बार 1988 में अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की पहल पर शुरू हुआ था। इस बीच वरिष्ठ पत्रकार और प्राइम टाइम एंकर सुधीर चौधरी ने भी अपने शो 'डिकोड' में इस पर चर्चा की।
उन्होंने एक संदेश देते हुए कहा, विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस पर 'डिकोड' उन महान आत्माओं को नमन करता है जिन्होंने हमें इस दुनिया में लाया, हमारे जीवन को सँवारा और हमें आज वह बनाया जो हम हैं। लेकिन क्या हम उन्हें उतना लौटा पाए हैं, जितना उन्होंने हमें दिया? दुर्भाग्य से जवाब ‘नहीं’ है।
आज हमारे बुज़ुर्ग उपेक्षा, अकेलेपन और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं, खासकर इस तेजी से डिजिटल होती दुनिया में। 'Decode 4 Dada Dadi' केवल हमारे बड़ों को श्रद्धांजलि ही नहीं, बल्कि समाज के लिए एक आईना है जो हमें याद दिलाता है कि हमें उनके प्रति अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभानी होंगी।
इस अवसर पर आप भी अपने दादा-दादी या परिवार के बुज़ुर्गों के लिए एक छोटा-सा वीडियो बनाकर हमें भेजें, जिसे हम रीपोस्ट करेंगे। आइए, इस विशेष दिन पर अपने दादा-दादी के साथ खड़े हों, क्योंकि वही हमारी असली जड़ और हमारी सबसे बड़ी ताक़त हैं।
DECODE STANDS WITH DADA DADI
— Sudhir Chaudhary (@sudhirchaudhary) August 21, 2025
On World Senior Citizens Day, #Decode salutes those who led us into this world and made us what we are today. But have we been able to give them back what they gave us? No. Sadly, senior citizens today face neglect, loneliness, insecurity and… pic.twitter.com/W8lXtt4eKo