तेजी से बदलते दौर में वर्तमान मीडिया परिदृश्य को लेकर क्या है आपका मानना?

क्या आप मानते हैं कि वर्तमान मीडिया स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से अपना काम कर रही है? 12.58%
क्या आपको लगता है कि मीडिया खबरों को सनसनीखेज बनाकर प्रस्तुत कर रही है? 23.9%
क्या आपको लगता है कि फेक न्यूज के बढ़ते प्रसार को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं? 5.35%
आपकी नजर में डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रेगुलेशन की आवश्यकता है या नहीं? 57.55%

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पत्रकारों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा ‘स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) की तैयारी को लेकर क्या है आपका मानना?

सरकार को इस दिशा में काफी पहले ही कदम उठा लेने चाहिए थे 55%
देर आयद, दुरुस्त आयद, सरकार का यह फैसला बिल्कुल सही है 35.71%
अलग से इस तरह के कदम उठाए जाने का कोई औचित्य नहीं है 9.29%

चैनलों की कीमतों को लेकर ब्रॉडकास्टर्स और केबल ऑपरेटर्स के बीच विवाद पर क्या है आपकी राय?

केबल ऑपरेटर्स को ब्रॉडकास्टर्स की बात माननी चाहिए, क्योंकि दर्शक चैनल नहीं देख पा रहे हैं 4.76%
नहीं, केबल ऑपरेटर्स दर्शकों के हित में सोच रहे हैं, उन्हें अपनी लड़ाई जारी रखनी चाहिए 28.57%
केबल ऑपरेटर्स की बात सही है, ब्रॉडकास्टर्स चैनल की कीमतें बढ़ाकर अपना हित सोच रह हैं 61.9%
मामला कोर्ट में है, इसलिए फिलहाल इस पर कुछ कहना सही नहीं होगा 4.76%

नए साल पर मीडिया इंडस्ट्री की ग्रोथ को लेकर क्या है आपका मानना?

पिछले कुछ वर्षों में मीडिया में आई मंदी की मार अब दूर होगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। 20.83%
मीडिया इस साल भी अपने वर्तमान स्वरूप में ही रहेगा, कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं होने वाला है। 50%
अपनी विश्वसनीयता में आई कमी को मीडिया को दूर करना होगा, तभी ग्रोथ संभव है 29.17%

फेक न्यूज पर लगाम लगाने के लिए पीएम मोदी के ‘मूलमंत्र’ को कितना कारगर मानते हैं आप?

फेक न्यूज पर पूरी तरह रोकथाम असंभव है, इस पर काफी हद तक काबू अवश्य पाया जा सकता है। 30.77%
पीएम मोदी ने बहुत ही अच्छा ‘मूलमंत्र’ दिया है, इससे अवश्य फेक न्यूज पर लगाम लगेगी। 38.46%
फैक्ट चेक के अलावा फेक न्यूज की रोकथाम के लिए सरकार को कोई ठोस मैकेनिज्म भी तैयार करना होगा। 30.77%

सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीवी न्यूज एंकर्स को लेकर की गई तल्ख टिप्पणी पर क्या है आपका मानना?

विशेषज्ञों और निष्पक्ष बुद्धिजीवियों की जगह तमाम चैनल्स पार्टी-प्रवक्ताओं को बुलाकर अपनी स्वार्थ सिद्धि में लगे रहते हैं। 21.57%
डिबेट शो में उन्हीं को बुलाएं, जो विषय के जानकार और निष्पक्ष हों। पार्टी-प्रवक्ताओं के ‘दंगलों’ से बाज आएं 35.29%
सर्वोच्च न्यायालय की यह चिंता और सलाह ध्यान देने योग्य है, लेकिन उस पर ठीक ढंग से अमल होना लगभग असंभव है 19.61%
कोई कानून बने तो अच्छा ही है लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी यह है कि टीवी चैनल खुद ही आत्म-संयम का परिचय दें 23.53%

सांप्रदायिक मुद्दों पर मीडिया कवरेज को लेकर क्या है आपका मानना

जिस तरह की कवरेज से तनाव उत्पन्न होने की आशंका हो, उससे बचना चाहिए। 43.8%
जो घटना जिस रूप में है, उसे वैसे ही दिखाना चाहिए, ताकि मीडिया पर कोई आरोप न लगे 42.15%
कवरेज में सभी पक्षों को उचित प्रतिनिधित्व देना चाहिए, ताकि संतुलन बना रहे। 12.4%
कवरेज में ज्यादा से ज्यादा डिबेट कार्यक्रम शामिल करने चाहिए, ताकि सभी पक्षों की राय सामने आए। 1.65%

विवादित बयानों पर बीजेपी ने अपने दो प्रवक्ताओं को निलंबित कर दिया है, इस बारे में क्या है आपका मानना?

इस बयान को लेकर बीजेपी की काफी आलोचना हो रही थी, जिस वजह से पार्टी ने इस तरह का निर्णय लिया है। 59.38%
इस कार्यवाही से अन्य पार्टी प्रवक्ताओं को सीख मिलेगी और वह इस तरह का विवादित बयान नहीं देंगे। 25%
प्रवक्ताओं को अपने नहीं बल्कि पार्टी की नीतियों और विचारधाराओं के अनुरूप ही बयान देने चाहिए। 15.63%

क्या टीवी-प्रिंट पर डिजिटल हावी हो रहा है?

हां, टीवी अब डिजिटल पर शिफ्ट हो रहा है, प्रिंट का सर्कुलेशन बहुत कम हो गया है 62.87%
नहीं, आज भी लोग टीवी देखना और अखबार पढ़ना ही ज्यादा पसंद करते हैं 17.37%
दोनों तरह के दर्शक और पाठक हैं, जो टीवी-प्रिंट के साथ डिजिटल पर भी रहते हैं 19.76%

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की मीडिया कवरेज को लेकर क्या है आपका मानना?

मीडिया को इस मामले की इतनी कवरेज न कर अपने देश के मुद्दों पर ज्यादा फोकस करना चाहिए। 46.67%
मीडिया अपना काम पूरी मेहनत और ईमानदारी से कर रही है और इसमें दखल नहीं देना चाहिए। 20%
एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में ही मीडिया इस मामले की इतनी कवरेज कर रही है। 33.33%

न्यूज रेटिंग्स दोबारा जारी होने पर चैनल्स के बीच क्या फिर मचेगा ‘घमासान’?

हां, न्यूज चैनल्स के बीच पहले की तरह ही एक-दूसरे से आगे निकलने की दौड़ शुरू हो जाएगी। 100%
नहीं, रेटिंग एजेंसी ने तमाम प्रबंध किए हैं, जिससे किसी तरह के विवाद/फर्जीवाड़े की गुंजाइश नहीं है। 0%