मीडिया की अंदरूनी कहानियों पर आधारित फिल्म ‘जेडी’ का पहला पोस्टर जारी कर दिया गया है...
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया की अंदरूनी कहानियों पर आधारित फिल्म ‘जेडी’ का पहला पोस्टर जारी कर दिया गया है, साथ ही इसकी रिलीज डेट भी आ गई है। फोटो जर्नलिस्ट से डायरेक्टर व प्रड्यूसर बने शैलेंद्र पांडे की यह डेब्यू फिल्म है और यह 22 सितंबर को देश के प्रमुख शहरों में रिलीज होगी। इसकी जानकारी फिल्म निर्माता शैलेंद्र ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए दी।
1st official poster of #JD #MediaकीBreakingNews #JDtheFilm is going to release on 22nd Sept, 2017 #JDthefilm #mediaStoryBehindDoors pic.twitter.com/qlJf0CRQgQ
— Shailendra Pandey (@shailfilm) July 9, 2017
हल पल दुनिया का हाल बताने वाले मीडिया की खबरें
आम लोगों तक नहीं पहुंचती और यह फिल्म मीडिया की चारदीवारी के भीतर की ‘ब्रेकिंग न्यूज’ है।
यह कहानी है जय द्विवेदी उर्फ जेडी की, जो एक ईमानदार पत्रकार है। जेडी ने
जर्नलिज्म की शुरुआत तो लखनऊ से की, लेकिन उसके सपनों की मंजिल दिल्ली थी। उसकी
कलम में सत्ता को हिलाने की ताकत थी। क्या वह मीडिया और सत्ता के आकाओं से टकराएगा
या हाथ मिला लेगा...?
फिल्म के निर्माता और निर्देशक शैलेंद्र पांडे तहलका पत्रिका में फोटो
एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं। फिल्म में वास्तविक जीवन के कई चर्चित नाम भी
नजर आएंगे। गोविंद नामदेव, अमन वर्मा, वेदिता प्रताप सिंह, अरविंद गौड़ मुख्य भूमिका में हैं। राजनेता अमर सिंह फिल्म में ईमानदार
नेता की भूमिका में दिखेंगे, तो वहीं मुंबई बम धमाकों में टाडा कोर्ट के जज रहे
पीडी कोडे न्यायाधीश की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म में इंडिया टीवी की पूर्व
एंकर तनु शर्मा भी अहम भूमिका में होंगी। फिल्म की पटकथा कुमार विजय और शैलेंद्र पांडे
ने लिखी है।
संगीत जान निसार लोन, गणेश पांडे और मॉन्टी शर्मा ने दिया है। फिल्म का संपादन आर घाड़ी ने किया है। लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘हिटलर दीदी’ से चर्चा में आई जसवीर कौर ने फिल्म में आइटम डॉन्स किया है। फिल्म में छह गाने हैं। गीत कुमार विजय और साहिल फतेहपुरी ने लिखे हैं।
यहां देखें फिल्म का टीजर-
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विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, वह यहां चैनल के फ्लैगशिप शो ‘न्यूज की पाठशाला’ (News Ki Pathshala) को होस्ट करेंगी। इसके अलावा भी उन्हें यहां प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।
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Samachar4media Bureau
‘नेटवर्क18’ (Network18) से इस्तीफा देने के बाद लोकप्रिय न्यूज एंकर रुबिका लियाकत जल्द ही ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) के साथ नई पारी की शुरुआत करने जा रही हैं। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, वह यहां चैनल के फ्लैगशिप शो ‘न्यूज की पाठशाला’ (News Ki Pathshala) को होस्ट करेंगी। इसके अलावा भी उन्हें यहां प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। हालांकि, चैनल की ओर से अभी तक इस बारे में किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
वहीं, न्यूज की पाठशाला को लेकर चैनल की ओर से हाल ही में एक प्रोमो भी जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है, ‘खबरें तो सब बताएंगे, लेकिन उन्हें समझाएगा कौन? इसीलिए... मैडम आ रही हैं! क्लास मिस मत कीजिएगा, यहां आपकी अटेंडेंस जरूरी है! ‘न्यूज की पाठशाला’ सिर्फ TIMES NOW नवभारत पर।’
प्रोमो में ‘मैडम’ और ‘न्यूज की पाठशाला’ का जिक्र सामने आते ही मीडिया गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है। इस प्रोमो को रुबिका लियाकत की संभावित एंट्री से जोड़कर देखा जा रहा है।
चैनल की ओर से न तो ‘मैडम’ की पहचान का खुलासा किया गया है और न ही शो के नए होस्ट को लेकर कोई औपचारिक घोषणा सामने आई है। ऐसे में फिलहाल दर्शकों और मीडिया जगत की निगाहें टाइम्स नाउ नवभारत की अगली घोषणा पर टिकी हैं।
बता दें कि रुबिका लियाकत ने हाल ही में ‘नेटवर्क18’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज18 इंडिया’ (News18 India) में कंसल्टिंग एडिटर के पद से इस्तीफा दे दिया था। इस चैनल पर उनका शाम पांच बजे प्रसारित होने वाला शो ‘गूंज’ दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा।
मीडिया इंडस्ट्री में रुबिका लियाकत को एक मजबूत और प्रभावशाली महिला एंकर के तौर पर देखा जाता है। अपनी तेज-तर्रार एंकरिंग, धारदार सवालों और बेबाक प्रस्तुति शैली की वजह से उन्होंने हिंदी टीवी पत्रकारिता में अलग पहचान बनाई है। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़, तथ्यों के साथ तैयारी और स्पष्ट सवाल पूछने की शैली उन्हें अन्य एंकर्स से अलग बनाती है। यही कारण है कि टीवी के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है।
रुबिका लियाकत का पत्रकारिता सफर भी काफी शानदार रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2007 में ‘लाइव इंडिया’ चैनल से की थी। इसके बाद वह ‘न्यूज24’ से जुड़ीं और फिर ‘जी न्यूज’ में रिपोर्टिंग और एंकरिंग के जरिए खास पहचान बनाई। ‘जी न्यूज’ के चर्चित शो ‘ताल ठोक के’ ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।
इसके बाद उन्होंने ‘एबीपी न्यूज’ में प्राइम टाइम शो ‘मास्टर स्ट्रोक’ के जरिए दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बनाई। साल 2022 में वह ‘भारत24’ से वाइस प्रेसिडेंट और एंकर के तौर पर जुड़ीं। जनवरी 2024 में उन्होंने ‘न्यूज18 इंडिया’ जॉइन किया था, जहां वह कंसल्टिंग एडिटर की भूमिका निभा रही थीं।
मूल रूप से राजस्थान के उदयपुर से ताल्लुक रखने वाली रुबिका हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा पर शानदार पकड़ रखती हैं। उनकी दमदार भाषा शैली, आत्मविश्वास और बेबाक राय उन्हें हिंदी न्यूज इंडस्ट्री के प्रमुख चेहरों में शामिल करती है।
अब टाइम्स नाउ नवभारत के साथ उनकी नई पारी को हिंदी न्यूज इंडस्ट्री में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। समाचार4मीडिया की ओर से रुबिका लियाकत को उनकी आगामी पारी के लिए अग्रिम रूप से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
बता दें कि तेजकरण सिंह पूर्व में भी ZEE5 में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
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‘ओवर द टॉप’ (OTT) इंडस्ट्री से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेजकरण सिंह बजाज ने ZEE5 में वापसी कर ली है। उन्होंने यहां आठ जून को जॉइन कर लिया है। वह इस प्लेटफॉर्म में बिजनेस हेड (AI और इनोवेशन) के पद पर अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। बता दें कि तेजकरण सिंह पूर्व में भी ZEE5 में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
गौरतलब है कि तेजकरण सिंह बजाज ने कुछ समय पूर्व ही ‘जियो स्टूडियोज’ (Jio Studios) में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और हेड (ओरिजिनल्स) के पद से इस्तीफा दिया था। इसके साथ ही Jio Studios में उनकी करीब साढ़े सात साल लंबी पारी समाप्त हो गई थी।
Jio Studios में अपने कार्यकाल के दौरान बजाज ने मल्टी-लैंग्वेज ओरिजिनल कंटेंट के विकास, प्रोडक्शन, पार्टनरशिप, लाइसेंसिंग और मोनेटाइजेशन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाली। उनके नेतृत्व में कंपनी ने स्ट्रीमिंग क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। इस दौरान उन्होंने कंपनी के प्रीमियम ओरिजिनल कंटेंट बिजनेस की क्रिएटिव, रणनीतिक और व्यावसायिक दिशा का नेतृत्व किया।
तेजकरण सिंह बजाज को कंटेंट, ऑडियंस स्ट्रैटेजी और बिजनेस ग्रोथ के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। वह इससे पहले ZEE5 में हेड (ओरिजिनल कंटेंट) के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने विभिन्न भाषाओं में कंटेंट स्ट्रैटेजी तैयार करने और कई प्रमुख ओरिजिनल प्रोजेक्ट्स को आकार देने में अहम भूमिका निभाई थी।
ZEE5 में उनकी संभावित वापसी को कंपनी की स्ट्रैटेजिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। OTT सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच प्लेटफॉर्म कंटेंट, दर्शकों की भागीदारी और नए बिजनेस अवसरों पर फोकस बढ़ा रहे हैं। ऐसे में तेजकरण सिंह बजाज जैसे अनुभवी प्रोफेशनल की एंट्री ZEE5 के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ZEE5 और Jio Studios से पहले बजाज Maxus के साथ भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह NDTV Metronation के लॉन्च से जुड़ी टीम का हिस्सा भी रहे हैं। डिजिटल कंटेंट और मीडिया बिजनेस में उनकी गिनती इंडस्ट्री के अनुभवी और प्रभावशाली प्रोफेशनल्स में होती है।
चर्चित टीवी न्यूज एंकर अंजना ओम कश्यप और टीवी टु़डे नेटवर्क ने मशहूर शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में 2 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
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चर्चित टीवी न्यूज एंकर अंजना ओम कश्यप और टीवी टु़डे नेटवर्क (TV Today Network) ने मशहूर शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में 2 करोड़ रुपये का मानहानि (Defamation) का मुकदमा दायर किया है। यह जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मुकदमा अंजना ओम कश्यप की ओर से “स्टार टीचर्स” और ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी उनकी कवरेज को लेकर खान सर द्वारा की गई कथित मानहानिकारक टिप्पणियों से संबंधित है।
बताया जा रहा है कि यह विवाद NEET परीक्षा प्रणाली पर आयोजित एक लाइव डिबेट के दौरान शुरू हुआ। इस बहस में अंजना ओम कश्यप ने कुछ ऑनलाइन शिक्षकों की आलोचना की थी। उन्होंने कथित तौर पर ऐसे शिक्षकों को “फ्रॉड” और “एक्सप्लेनर” बताया था, जो केवल व्यूज बटोरने पर ध्यान देते हैं।
इसके बाद खान सर की ओर से की गई कुछ टिप्पणियों को अंजना ओम कश्यप और टीवी टु़डे नेटवर्क ने मानहानिकारक बताया है। इसी को आधार बनाते हुए दोनों पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि कथित मानहानिकारक सामग्री को सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से हटाने का निर्देश दिया जाए।
इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ में जस्टिस नीना बंसल कृष्णा के समक्ष होने वाली है।
भारतीय ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में कुछ ही ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपनी छाप उतनी गहराई से छोड़ी है, जितनी आशीष सहगल ने छोड़ी है।
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भारतीय ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में कुछ ही ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपनी छाप उतनी गहराई से छोड़ी है, जितनी आशीष सहगल ने छोड़ी है। तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने खुद को सिर्फ एक रेवेन्यू लीडर के रूप में नहीं, बल्कि मीडिया कारोबार के सबसे प्रभावशाली ग्रोथ आर्किटेक्ट्स में से एक के रूप में स्थापित किया है।
टेलीविजन इंडस्ट्री के सबसे प्रतिस्पर्धी दौर में उसके व्यावसायिक विकास को नई दिशा देने से लेकर देश की बड़ी मीडिया कंपनियों को बदलाव के दौर में आगे बढ़ाने तक, आशीष सहगल का सफर आधुनिक भारतीय ब्रॉडकास्टिंग की कहानी को भी बयां करता है।
वर्तमान में आशीष सहगल 'टाइम्स टीवी नेटवर्क' (Times TV Network) के सीईओ और Times Media & Entertainment के चीफ ग्रोथ ऑफिसर हैं। इस भूमिका में वह देश के सबसे प्रभावशाली मीडिया समूहों में से एक के विकास, नवाचार और रणनीतिक विस्तार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य में कंपनी की ग्रोथ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का दायित्व उनके कंधों पर है।
इस पद पर आने से पहले सहगल ने करीब दो दशक तक Zee Entertainment में काम किया, जहां उन्होंने खुद को इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित बिजनेस लीडर्स में शामिल किया। इस दौरान उन्होंने ब्रॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंपनी के कई महत्वपूर्ण रेवेन्यू और ग्रोथ विभागों का नेतृत्व किया। बिखरते और लगातार बदलते मीडिया बाजार में उन्होंने कारोबार को बड़े स्तर पर विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई।
आशीष सहगल की सबसे बड़ी खासियत हमेशा बदलाव को पहले से भांप लेने की रही है। चाहे निचे टेलीविजन चैनलों का बढ़ता दौर हो, डिजिटल वीडियो का उभार, इंटीग्रेटेड एडवरटाइजिंग सॉल्यूशंस का विकास या फिर दर्शकों की भागीदारी की बढ़ती अहमियत- उन्होंने हर बदलाव को समय रहते समझा और उसके अनुसार रणनीति बनाई। उनकी व्यावसायिक समझ और उपभोक्ताओं के व्यवहार की गहरी जानकारी ने उन्हें हमेशा दूसरों से अलग बनाया।
इंडस्ट्री के सहयोगी और साथी उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो बड़े विजन को मजबूत क्रियान्वयन के साथ जोड़ते हैं। उनकी नेतृत्व शैली की पहचान हमेशा से बेहतरीन टीमों का निर्माण, नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना और ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करना रही है, जो ग्रोथ, जवाबदेही और नवाचार पर आधारित हो।
Times Network में भी आशीष सहगल ने एक नई ग्रोथ स्टोरी लिखनी शुरू कर दी है। उनका फोकस बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन, दर्शकों से मजबूत जुड़ाव और भविष्य के लिए तैयार मीडिया रणनीतियों पर है। उनका मानना है कि मीडिया का भविष्य उन्हीं संगठनों का होगा जो कंटेंट, टेक्नोलॉजी, डिस्ट्रीब्यूशन और मोनेटाइजेशन को सहज रूप से एक साथ जोड़ पाएंगे।
अपने जीवन का एक और वर्ष पूरा करने के साथ ही आशीष सहगल सिर्फ अपनी उपलब्धियों का जश्न नहीं मना रहे हैं, बल्कि पूरी मीडिया इंडस्ट्री ऐसे नेता का सम्मान कर रही है, जिसका प्रभाव बैलेंस शीट और रेटिंग्स से कहीं आगे तक जाता है। उनकी असली विरासत लगातार नए तरीके से ग्रोथ को परिभाषित करने, टीमों को प्रेरित करने और भारतीय मीडिया के भविष्य को आकार देने की उनकी क्षमता में छिपी है।
जानी मानी टीवी न्यूज एंकर शिवांगी ठाकुर (Shivangi Thakur) ने ‘जी न्यूज’ (Zee News) से इस्तीफा दे दिया है। वह चैनल में असिसटेंट एडिटर के पद पर कार्यरत थीं और जल्द ही अपना कार्यकाल पूरा करेंगी।
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जानी मानी टीवी न्यूज एंकर शिवांगी ठाकुर (Shivangi Thakur) ने ‘जी न्यूज’ (Zee News) से इस्तीफा दे दिया है। वह चैनल में असिसटेंट एडिटर के पद पर कार्यरत थीं। सूत्रों के अनुसार, वह जल्द ही चैनल में अपना कार्यकाल समाप्त करेंगी। शिवांगी ठाकुर ‘जी न्यूज’ (Zee News) के प्रमुख संपादकीय चेहरों में शामिल रही हैं। उन्होंने न्यूज बुलेटिन और प्राइम टाइम प्रोग्रामिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अपनी प्रभावशाली एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए पहचान बनाने वाली शिवांगी पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। ‘जी न्यूज’ (Zee News) से पहले वह ‘आजतक’ (Aaj Tak), ‘इंडिया टुडे’ (India Today), ‘टीवी9’ (TV9) और ‘न्यूज18 इंडिया’ (News18 India) जैसे प्रमुख हिंदी न्यूज नेटवर्क्स के साथ काम कर चुकी हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने राजनीति, अपराध, प्राकृतिक आपदाओं और राष्ट्रीय महत्व की कई बड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग की है।
शिवांगी ठाकुर संघर्ष क्षेत्रों से की गई अपनी रिपोर्टिंग के लिए भी जानी जाती हैं। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और हमास-इजराइल संघर्ष सहित तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों की कवरेज की है। चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों से उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग को व्यापक सराहना मिली है।
अपने पूरे करियर में उन्होंने स्टूडियो एंकरिंग और फील्ड रिपोर्टिंग के बीच संतुलन बनाए रखते हुए कई महत्वपूर्ण घटनाओं को कवर किया। फिलहाल शिवांगी ठाकुर के अगले कदम को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
‘महाराष्ट्र सरकार’ और ‘प्रसार भारती’ मुंबई के मलाड इलाके में करीब 150 एकड़ में एकीकृत मीडिया हब विकसित करेंगे। इसमें स्टूडियो, प्रशिक्षण संस्थान, पर्यटन और तकनीकी सुविधाएं शामिल होंगी।
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मुंबई को वैश्विक मीडिया और एंटरटेनमेंट केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। ‘महाराष्ट्र सरकार’ और ‘प्रसार भारती’ ने मलाड में करीब 150 एकड़ क्षेत्र में एक एकीकृत फिल्म और टेलीविज़न मीडिया हब विकसित करने की योजना का ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने इस परियोजना के लिए राज्य सरकार और ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) के बीच एक विशेष उद्देश्य वाहन (SPV) के गठन को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना ‘दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी’ (Dadasaheb Phalke Chitranagari) यानी फिल्म सिटी के पास विकसित की जाएगी।
प्रस्तावित हब को केवल फिल्म निर्माण केंद्र तक सीमित नहीं रखा जाएगा। यहां अत्याधुनिक स्टूडियो, साउंड स्टेज, होटल और हॉस्पिटैलिटी सुविधाएं, पर्यटन परियोजनाएं, IT और ITES सुविधाएं तथा फिल्म, टेलीविज़न और संगीत शिक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थान स्थापित करने की योजना है।
इस परियोजना की नींव अप्रैल 2025 में ‘महाराष्ट्र सरकार’, ‘महाराष्ट्र फिल्म, स्टेज एंड कल्चरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन’ (MFSCDC) और ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) से पड़ी थी।
बुधवार को हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार (Ashish Shelar), ‘प्रसार भारती’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी (Gaurav Dwivedi) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सरकार ने परियोजना के लिए प्री-फिजिबिलिटी स्टडी, इंफ्रास्ट्रक्चर रोडमैप और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को जून के अंत तक परियोजना का विस्तृत खाका पेश करने को भी कहा गया है।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर किसी जज ने खुली अदालत में कोई आदेश सुना दिया है, तो उसकी खबर प्रकाशित करना अदालत की अवमानना नहीं माना जा सकता
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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर किसी जज ने खुली अदालत में कोई आदेश सुना दिया है, तो उसकी खबर प्रकाशित करना अदालत की अवमानना नहीं माना जा सकता, भले ही उस आदेश पर अभी जज के हस्ताक्षर न हुए हों।
जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह और जस्टिस अमरजोत भट्टी की खंडपीठ ने The Tribune, Hindustan Times और Times of India के खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्रवाई को खत्म करते हुए यह फैसला सुनाया।
अदालत ने कहा कि अगर किसी न्यायिक कार्यवाही की खबर सही और निष्पक्ष तरीके से प्रकाशित की गई है, तो उसे अवमानना नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि जैसे ही कोई फैसला अदालत में सुनाया जाता है, वह प्रभावी हो जाता है।`मामला 9 अप्रैल का है, जब जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने पंजाब पुलिस के कुछ पूर्व अधिकारियों से जुड़े एक केस की सुनवाई को फरीदकोट से चंडीगढ़ स्थानांतरित करने का आदेश खुली अदालत में सुनाया था।
अगले दिन The Tribune, Hindustan Times और Times of India ने इस फैसले से जुड़ी खबरें प्रकाशित कर दीं। हालांकि उस समय तक आदेश पर जज के हस्ताक्षर नहीं हुए थे।
इसके बाद 11 अप्रैल को जस्टिस दहिया ने कहा था कि इस तरह की रिपोर्टिंग अदालत की प्रक्रिया में दखल देने जैसी लगती है। इसी आधार पर The Tribune की एडिटर-इन-चीफ ज्योति मल्होत्रा समेत अन्य लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की गई थी।
बाद में इस मामले की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने पाया कि फैसला वास्तव में खुली अदालत में सुनाया गया था और अखबारों ने उसकी सही रिपोर्टिंग की थी। अदालत ने कहा कि प्रकाशित खबरों में कोई गलत या भ्रामक जानकारी नहीं थी।
इसी आधार पर कोर्ट ने अवमानना की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में आगे किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है।
ौवैसे इस फैसले को मीडिया की न्यायिक रिपोर्टिंग और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘The Limits of AI in the Media’ विषय पर आयोजित सत्र में इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जिक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी समेत कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जिस तेजी से मीडिया और पत्रकारिता समेत कई क्षेत्रों को बदल रहा है, उसी के साथ एक बड़ा सवाल भी सामने आ रहा है- AI के फायदों का इस्तेमाल कैसे किया जाए, बिना इंसानी रचनात्मकता और समझ को कमजोर किए? इसी मुद्दे पर रूस में आयोजित सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) 2026 में विस्तार से चर्चा हुई।
‘The Limits of AI in the Media’ विषय पर आयोजित सत्र में इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जिक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी समेत कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि AI और इंसानी हस्तक्षेप के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
कली पुरी ने कहा कि पत्रकारिता में नैतिकता, फैक्ट-चेकिंग और इंसानी निर्णय क्षमता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, न्यूजरूम और एल्गोरिदम के बीच सबसे बड़ा अंतर यही है कि न्यूजरूम में खबरों का संतुलन और मॉडरेशन किया जाता है, जबकि एल्गोरिदम ऐसा नहीं करते।
उन्होंने कहा, “न्यूजरूम मॉडरेशन और कैलिब्रेशन करते हैं, लेकिन एल्गोरिदम ऐसा नहीं करते, क्योंकि वे मुख्य रूप से मुनाफे और एंगेजमेंट पर आधारित होते हैं।”
‘Handcrafted by Editors’ पहल की शुरुआत
कली पुरी ने बताया कि मौलिक रिपोर्टिंग और इंसानी सोच को बचाए रखने के लिए इंडिया टुडे ग्रुप ने ‘Handcrafted by Editors’ नाम से एक विशेष पहल शुरू की है।
उन्होंने कहा, “हमने एडिटर्स और रिपोर्टर्स द्वारा तैयार की गई खबरों के लिए एक अलग सेक्शन बनाया है, जहां इस बात पर फोकस किया जाता है कि पत्रकार ने क्या देखा, क्या सुना और क्या अनुभव किया। यह सामान्य रिपोर्टिंग से अलग है।”
उनके मुताबिक, इस तरह की रिपोर्टिंग खबरों को अधिक गंभीरता देती है और पाठकों के साथ बेहतर जुड़ाव भी बनाती है।
क्या है ‘AI Sandwich’ मॉडल?
कली पुरी ने कहा कि भविष्य में AI और इंसानी रचनात्मकता साथ-साथ काम करेंगे। इसी सोच के तहत इंडिया टुडे ग्रुप के न्यूजरूम में ‘AI Sandwich’ मॉडल अपनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस मॉडल में संपादकीय प्रक्रिया की शुरुआत इंसान करता है, बीच में AI का इस्तेमाल दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया जाता है और आखिर में अंतिम फैसला फिर इंसान ही लेता है।
उन्होंने कहा, “हमारे न्यूजरूम में AI Sandwich मॉडल काम करता है। शुरुआत इंसान से होती है, बीच में AI काम को तेज और बेहतर बनाता है, लेकिन अंत में अंतिम मंजूरी इंसान ही देता है। अंतिम निर्णय हमेशा इंसानी हाथों में रहता है।”
कली पुरी ने यह भी कहा कि भारत केवल AI का बड़ा उपभोक्ता ही नहीं है, बल्कि बड़ी टेक कंपनियों द्वारा विकसित AI मॉडल्स के आधार पर नए और उपयोगी समाधान विकसित करने की भी मजबूत स्थिति में है।
‘AI के पास अंतरात्मा नहीं होती’
रूस के विदेश मंत्रालय के प्रेस विभाग की निदेशक मारिया जाखारोवा ने भी कली पुरी की बातों से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि AI को इंसानों की मदद करने वाले उपकरण के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि इंसानों की जगह लेने वाले विकल्प के रूप में। AI पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता के खतरों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि AI के पास अंतरात्मा नहीं होती।
उन्होंने कहा, “AI के पास अंतरात्मा नहीं है। अगर इंसानी विकास में अंतरात्मा और मानवीय मूल्यों का महत्व कम हो गया, तो इसके बहुत गंभीर परिणाम हो सकते हैं।”
डेटा सुरक्षा भी बड़ी चुनौती
इस सत्र में चाइना मीडिया ग्रुप के यूरेशियन ब्यूरो के निदेशक वांग बिन ने AI से जुड़ी डेटा सुरक्षा चिंताओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि कई AI टूल्स को काम करने के लिए सिस्टम तक व्यापक पहुंच की जरूरत होती है, जिससे साइबर सुरक्षा की चुनौतियां बढ़ जाती हैं।
वांग बिन के अनुसार, “दक्षता और साइबर सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना आज एक बड़ी चुनौती है।” उन्होंने बताया कि चीन मीडिया क्षेत्र के लिए विशेष AI मॉडल विकसित करने पर काम कर रहा है और राष्ट्रीय AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
इंसानी निगरानी अभी भी जरूरी
SPIEF 2026 की इस चर्चा से एक बात साफ निकलकर सामने आई कि AI अब हमारे जीवन और कामकाज का स्थायी हिस्सा बन चुका है। हालांकि, तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, पत्रकारिता और मीडिया जैसे क्षेत्रों में इंसानी समझ, नैतिकता, विवेक और अंतिम निर्णय की भूमिका अभी भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है।
यहां देखें वीडियो:
फीफा वर्ल्ड कप 2026 को दुनिया के सबसे प्रभावशाली खेल आयोजनों में गिना जाता है। यह टूर्नामेंट वैश्विक स्तर पर करोड़ों दर्शकों को एक साथ जोड़ता है और ब्रांड्स को उच्च स्तर की सहभागिता प्रदान करता है।
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Samachar4media Bureau
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के शुरू होने में अब केवल कुछ ही दिन शेष हैं और इसी के साथ ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ज़ी) को विज्ञापनदाताओं से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित खेल आयोजनों में से एक माने जाने वाले इस टूर्नामेंट को लेकर विभिन्न श्रेणियों के ब्रांड्स ज़ी के साथ जुड़ने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।
48 टीमों, 104 मुकाबलों और 39 दिनों तक चलने वाले इस मेगा फुटबॉल टूर्नामेंट को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए कई प्रमुख ब्रांड्स ज़ी के लीनियर और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रीमियम स्पॉन्सरशिप अवसरों को सुरक्षित करने के लिए आगे आ रहे हैं। कंपनी द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए समर्पित स्पोर्ट्स नेटवर्क- यूनाइट8 स्पोर्ट्स 1, यूनाइट8 स्पोर्ट्स 1 एचडी, यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2 और यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2 एचडी ने भी विज्ञापनदाताओं के बीच खासा आकर्षण पैदा किया है।
कंपनी के अनुसार, यह कदम उसकी दीर्घकालिक खेल रणनीति को और मजबूत करता है तथा ब्रांड्स को व्यापक पहुंच और बेहतर दर्शक सहभागिता प्रदान करने में मदद करेगा। सिर्फ टेलीविज़न ही नहीं, बल्कि कंपनी के डिजिटल एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म ज़ी5 पर भी विज्ञापनदाताओं की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। ज़ी5 की बढ़ती पहुंच और लक्षित एवं प्रभावशाली विज्ञापन समाधान उपलब्ध कराने की क्षमता इसे ब्रांड्स के लिए एक आकर्षक मंच बना रही है।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 को दुनिया के सबसे प्रभावशाली खेल आयोजनों में गिना जाता है। यह टूर्नामेंट वैश्विक स्तर पर करोड़ों दर्शकों को एक साथ जोड़ता है और ब्रांड्स को उच्च स्तर की दृश्यता एवं सहभागिता का अवसर प्रदान करता है। टूर्नामेंट के नजदीक आते ही कंपनियां शुरुआती भागीदारी के महत्व को समझते हुए प्रीमियम विज्ञापन इन्वेंट्री और कस्टमाइज्ड पार्टनरशिप पैकेज बुक करने में जुट गई हैं।
ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (एडवर्टाइजमेंट रेवेन्यू) संदीप मेहरोत्रा ने कहा कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 को लेकर विज्ञापनदाताओं की प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है। उन्होंने बताया कि कई प्रमुख ब्रांड्स पहले ही उन्नत स्तर की बातचीत में हैं और टूर्नामेंट से काफी पहले महत्वपूर्ण अवसरों को सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि ज़ी का ओम्नीचैनल दृष्टिकोण इस बार की सबसे बड़ी ताकत है। टेलीविज़न, डिजिटल, ओटीटी, सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर्स और ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशंस को एकीकृत कर ब्रांड्स को एक समग्र मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे अपनी पहुंच, सहभागिता और प्रभाव को अधिकतम कर सकें।
ज़ी का मानना है कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 ब्रांड्स को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा और कंपनी अपने बहु-प्लेटफॉर्म इकोसिस्टम के जरिए प्रभावशाली विज्ञापन समाधान उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।
‘पीआईबी फैक्ट चेक’ (PIB Fact Check) ने RBI द्वारा 12 अरब डॉलर का सोना बेचने के दावे को फर्जी बताया है। RBI के अनुसार भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है।
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‘ब्लूमबर्ग’ (Bloomberg) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ‘भारतीय रिजर्व बैंक’ (RBI) ने करीब 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचा है। अब इस दावे को ‘पीआईबी फैक्ट चेक’ (PIB Fact Check) ने पूरी तरह फर्जी बताया है। ‘पीआईबी’ (PIB) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि RBI के सोना बेचने का दावा गलत और भ्रामक है।
‘भारतीय रिजर्व बैंक’ (RBI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। सितंबर 2025 के अंत तक यह हिस्सेदारी 13.92% थी, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70% हो गई। वहीं 22 मई 2026 तक यह आंकड़ा 16.85% पहुंच गया।
‘पीआईबी फैक्ट चेक’ (PIB Fact Check) ने यह भी कहा कि RBI अपने Monthly Bulletin में फिजिकल गोल्ड स्टॉक की जानकारी सार्वजनिक करता है और इसमें किसी बदलाव की पुष्टि नहीं हुई है। सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि भारत के गोल्ड रिजर्व में किसी बड़ी बिक्री जैसी स्थिति नहीं है। ऐसे में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में किया जा रहा दावा पूरी तरह गलत है।
A news report published by @Bloomberg states that RBI may have sold gold amounting to approximately USD 12 billion.#PIBFactCheck
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) June 3, 2026
❌ This claim is FAKE
✔️ According to @RBI, the share of gold in India's foreign exchange reserves rose from 13.92% at end-September 2025 to 16.70%… pic.twitter.com/eVjxPxEv1i