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क्या ‘आत्मनिर्भर’ हुआ शेयर बाज़ार, पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

शेयर बाज़ार FII के लौटने का इंतज़ार पिछले कुछ महीनों से कर रहा है। अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि वो लौट सकते हैं। अप्रैल में उन्होंने 4000 करोड़ रुपये की ख़रीदारी की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 9 months ago

मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।

2008 के अक्टूबर महीने में अमेरिकी आर्थिक संकट के चलते FII ( Foreign Institutional Investors) ने 16 हज़ार करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए थे तो बाज़ार 25% नीचे चला गया था। इस साल जनवरी में FII ने 87 हज़ार करोड़ रुपये की बिकवाली की तो बाज़ार 2-3 % नीचे गया। इसका बड़ा कारण है आपकी SIP, हिसाब किताब करेंगे कि कैसे म्यूचुअल फंड जैसे DII ( Domestic Institutional Investors) FII से ज़्यादा शेयरों के मालिक बन गए हैं?

इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक़ National Stock Exchange ( NSE) पर लिस्ट शेयरों में से 17.6% DII के पास है जबकि FII के पास 17.2%. यह आँकड़े मार्च 2025 तक के है। म्यूचुअल फंड में SIP से आने वाले पैसे ने खेल पलट दिया है। 2010 में DII 11% थे जबकि FII 14%., इस साल अप्रैल तक FII 1.12 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं फिर भी Nifty 2% ऊपर हैं।

इसका मतलब यह नहीं है कि हमें FII की ज़रूरत नहीं है। FII आने से शेयरों की माँग बढ़ती है और भाव ऊपर जाते है। पिछले साल अक्टूबर से FII की लगातार बिकवाली भी बाज़ार के नीचे जाने का कारण रहा है लेकिन यह सोचिए कि DII नहीं होते तो बाज़ार हाल कितना बुरा होता। शेयर बाज़ार FII के लौटने का इंतज़ार पिछले कुछ महीनों से कर रहा है।

अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि वो लौट सकते हैं। अप्रैल में उन्होंने 4000 करोड़ रुपये की ख़रीदारी की है। अप्रैल के पहले 15 दिनों में तो उन्होंने बिकवाली की थी पर आख़िरी 15 दिनों में जमकर ख़रीदारी की है। उन्हें भी समझ में आ रहा है कि दुनिया जब ट्रेड वॉर में फँसी हुई है तब भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर है। भारत की अर्थव्यवस्था वैसे भी घरेलू खपत से चलती है और अब शेयर बाज़ार में भी यही बात लागू हो रही है कि SIP से आने वाले पैसे ने बाज़ार को सँभाल कर रहा है।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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