न्यूज18 को बाय बोल पत्रकार विशाल राज मिश्रा ने शुरू की नई पारी

लगभग 13 साल के करियर में विशाल कई मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 26 November, 2019
Last Modified:
Tuesday, 26 November, 2019
Vishal Raj Mishra

पत्रकार विशाल राज मिश्रा ने ‘न्यूज18’( news18) को अलविदा कह दिया है। उन्होंने अपनी नई पारी की शुरुआत ‘इंडिया टीवी’ (India TV) के साथ की है। ‘न्यूज18’ में विशाल सीनियर विडियो एडिटर की पोस्ट पर कार्यरत थे। इससे पूर्व वे रायपुर से संचालित ‘INH news’ में भी अपनी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

लगभग 13 साल के अपने करियर में विशाल कई मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले विशाल ने सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी से मीडिया और एंटरटेनमेंट में एमबीए की पढ़ाई की है। उन्हें बेस्ट VT editor के अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।

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पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई पर NBA ने जताई नाराजगी, मीडिया को लेकर कही ये बात

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA) ने मुंबई में हाल के दिनों में हुए घटनाक्रम पर चिंता जताई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 24 October, 2020
NBA

निजी टेलिविजन न्यूज चैनल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह ‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन’ (NBA)  ने मुंबई में हाल के दिनों में हुए घटनाक्रम पर चिंता जताई है। ‘एनबीए’ का मानना है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) और मुंबई पुलिस के बीच टकराव से मीडिया और पुलिस, दोनों प्रमुख संस्थानों की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। ‘एनबीए’ इस बात को लेकर भी चिंतित है कि टीवी न्यूजरूम में काम करने वाले पत्रकारों को अब इस टकराव में निशाना बनाया गया है।

‘एनबीए’ की ओर से जारी एक स्टेटमेंट में कहा गया है, ‘रिपब्लिक टीवी जिस तरह की पत्रकारिता करता है, एनबीए उस का समर्थन नहीं करता, हालांकि रिपब्लिक टीवी, एनबीए का सदस्य नहीं है और हमारी आचार संहिता का पालन नहीं करता, तो भी इसके एडिटोरियल स्टाफ के खिलाफ केस दायर करने की कार्यवाही पर हमें सख्त एतराज है। हम भारत के संविधान में मीडिया को दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं, लेकिन इसके साथ ही हम पत्रकारिता में नैतिकता के मानदंडों और रिपोर्टिंग में निष्पक्षता और संतुलन बनाए रखने के हिमायती भी हैं।’

स्टेटमेंट के अनुसार,‘एनबीए न्यूजरूम में काम करने वाले पत्रकारों को निशाना बनाए जाने के किसी भी प्रयास की निंदा करता है, लेकिन साथ ही मीडिया की तरफ से बदले की भावना से की गई रिपोर्टिंग का भी विरोध करता है। हम ऐसी आधारहीन खबरें दिखाए जाने की निंदा करते हैं जो नियम कानून को लागू करवाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के काम में बाधा डालती है।’

एनबीए ने मुंबई पुलिस से अपील की है कि वह किसी भी पत्रकार को इस टकराव में निशाना न बनने दें। एनबीए के अनुसार,‘हम रिपब्लिक टीवी में काम करने वाले सभी पत्रकारों से भी अपील करते हैं कि वे पत्रकारिता की लक्ष्मण रेखा को न लांघें, जैसा बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा उन के केस में कॉमेंट किया गया है। एनबीए इस बात को दोहराना चाहता है कि वह पत्रकारिता में नफरत पैदा करने वाली खबरों और अनैतिक आचरण के सख्त खिलाफ है।‘

इसके साथ ही एनबीए का यह भी कहना है, ‘न्यूज चैनल्स रिटायर्ड जस्टिस अर्जुन सीकरी की अध्यक्षता वाली नियामक संस्था ‘न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी’ (एनबीएसए) के आदेशों का सख्ती से पालन करते हैं। पिछले कई सालों से एनबीएसए न्यूज चैनलों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों पर कड़ी निगरानी रखता आया है। इसने देश के बड़े बड़े न्यूज चैनलों और क्षेत्रीय चैनलों के खिलाफ करवाई की है। बहुत से मामलों में, जुर्माना लगाने से लेकर माफी मंगवाने और चेतावनी देने के अनेक आदेश दिए हैं, जिनमें सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े मामले भी शामिल हैं। हमारी अपील है कि जो न्यूज चैनल एनबीए के सदस्य नहीं हैं, उनसे भी एनबीएसए की आचार संहिता और दिशानिर्देशों का पालन करने को कहा जाए।’

स्टेटमेंट में यह भी कहा गया है, ‘एनबीए उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कथित टीआरपी हेराफेरी के मामले में मीडिया के खिलाफ खुली एफआईआर दायर करने की कार्रवाई पर भी गहरी चिंता व्यक्त करता है। जिस तत्परता के साथ इस केस को रातोंरात सीबीआई को ट्रांसफर किया गया, उससे इरादों को लेकर शंका पैदा होती है। एक व्यक्ति, जिसका इस मामले से कोई सरोकार नहीं है, कई अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एक शिकायत दायर करता है, और इसके कारण मीडिया, एडवर्टाइजर्स और एडवर्टाइजिंग एजेंसियों के खिलाफ अंधाधुंध कार्रवाई वाली स्थिति पैदा होने की आशंका पैदा हो गई है। सरकार से हमारी अपील है कि वह सीबीआई को भेजे गए इस मामले को तत्काल वापस ले।’

एनबीए का कहना है, ‘टीआरपी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए BARC  ने पहले ही एक मैकनिज्म बना रखा है।रिटायर्ड जस्टिस मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता वाली एक इंटर्नल कॉमपिटेंट अथॉरिटी को टीआरपी में हेराफेरी जैसे मामलों की जांच के लिए अधिकृत किया गया है। टीआरपी में हेराफेरी के सारे आरोप इस अथॉरिटी को सौंप दिया जाना चाहिए।’

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NDTV में मनोरंजन भारती का कद बढ़ा, अब मिली नई जिम्मेदारी

‘एनडीटीवी इंडिया’ (NDTV India) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 24 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 24 October, 2020
Manoranjan Bharti

‘एनडीटीवी इंडिया’ (NDTV India) से एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। खबर है कि वरिष्ठ पत्रकार मनोरंजन भारती को चैनल में प्रमोशन देकर मैनेजिंग एडिटर नियुक्त किया गया है। मनोरंजन भारती ‘एनडीटीवी इंडिया’ के साथ करीब 24 साल से जुड़े हुए हैं।

इससे पहले वह यहां पर सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। मूल रूप से खगड़िया (बिहार) के रहने वाले मनोरंजन भारती को पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का करीब 26 साल का अनुभव है। उन्होंने पटना के साइंस कॉलेज से एमएससी (जूलॉजी) की पढ़ाई की है।

समाचार4मीडिया के साथ बातचीत में मनोरंजन भारती ने बताया कि उन्होंने दिल्ली स्थिति ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन’ (IIMC) से पढ़ाई करने के बाद वर्ष 1994 में ‘दूरदर्शन’ पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘परख’ में वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के साथ अपनी शुरुआत की। यहां करीब दो साल तक अपनी भूमिका निभाने के बाद एक जुलाई 1996 को ‘एनडीटीवी’ के साथ अपना सफर शुरू किया और तब से यहां अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

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मुंबई पुलिस के इस कदम पर न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन ने जताई चिंता, कही ये बात

मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी की एडिटोरियल टीम के खिलाफ दर्ज एफआईआर में मुंबई पुलिस के कर्मियों के बीच वैमनस्यता फैलाने का आरोप लगाया है।

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Published - Saturday, 24 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 24 October, 2020
NBF

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation)  ने ग्रेटर मुंबई पुलिस द्वारा ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) की संपादकीय टीम के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर अपनी चिंता जताई है। इस बारे में ‘एनबीएफ’ की ओर से एक स्टेटमेंट भी जारी किया गया है।

इस स्टेटमेंट में ‘एनबीएफ’ का कहना है, ‘इस तरह कठोर और गंभीर धाराओं में मुकदमा मीडिया और आम नागरिकों दोनों के खिलाफ काफी कठोर और हताश करने वाला कदम है। पत्रकार कानून के दायरे में रहकर अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं। वे लोकसेवकों को जवाबदेह ठहराते हुए सार्वजनिक हित में सच्चाई को उजागर कर रहे हैं। उन्हें इस तरह के प्रयासों से हतोत्साहित नहीं करना चाहिए, यह लोकतंत्र के लिए खतरा है।’

स्टेटमेंट में यह भी कहा गया है, ‘पत्रकारिता की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि यह देश के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत किसी भी लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का आधार है। हमें कानून और न्यायपालिका द्वारा स्थापित प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है...न्याय होगा।’

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस ने चैनल की एडिटोरियल टीम के खिलाफ दर्ज एफआईआर में मुंबई पुलिस के कर्मियों के बीच वैमनस्यता फैलाने का आरोप लगाया है।

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विज्ञापनों को लेकर नेपाल ने विदेशी टीवी चैनल्स के लिए दिए ये आदेश

नेपाल सरकार की ओर से इस तरह का नियम न मानने वालों को कानूनी कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।

Last Modified:
Friday, 23 October, 2020
TV Channels

नेपाल सरकार ने विदेशी टीवी चैनल्स (foreign television channels) के डिस्ट्रीब्यूटर्स को 23 अक्टूबर से राज्य में विज्ञापन के बिना चैनल्स ब्रॉडकास्ट करने के आदेश दिए हैं। ऐसा करने में विफल रहने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की चेतावनी दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बारे में जारी एक बयान में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने विदेशी टीवी चैनल्स के डिस्ट्रीब्यूटर्स से कहा है कि एडवर्टाइजिंग (रेगुलेशन) एक्ट 2019 के तहत 23 अक्टूबर से विदेशी टीवी चैनल्स को राज्य में विज्ञापन के बिना चैनल प्रसारित करने का प्रावधान किया गया है और इस संबंध में आवश्यक तैयारियां करने के लिए कानून की ओर से पहले ही एक साल का समय दिया जा चुका है। मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘संबंधित एजेंसियों से अनुरोध किया जाता है कि वे कानून की भावना के अनुसार विज्ञापनों के बिना विदेशी टेलीविजन कंटेंट को प्रसारित कराएं।’

बता दें कि केबल टीवी ऑपरेटर्स नेपाली टेलिवजन सेट्स पर पे चैनल्स (pay channels) और फ्री टू एयर (free-to-air) चैनल्स दिखाते हैं। हालांकि फ्री टू एयर चैनल्स भले ही विज्ञापन चलाते हैं, वे व्युअर्स को बिना किसी शुल्क के दिखाए जाते हैं। विदेशी पे चैनल्स विभिन्न मल्टीनेशनल ब्रैंड्स के विज्ञापन चलाते हैं। हालांकि, व्युअर्स पर कुछ शुल्क लगाने के बाद पे चैनलों को भी विज्ञापनों के बिना प्रसारित किया जा सकता है।

इस तरह के प्रावधान को सरकार द्वारा क्लीन फीड (विज्ञापन मुक्त) के रूप में स्वीकार किया जाता है। कानून के अनुसार, क्लीन फीड नीति का उल्लंघन करने वालों को जुर्माने के रूप में 500,000 रुपये तक का भुगतान करना होता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मंत्रालय ने यह भी कहा है कि इंडियन ब्रॉडकास्टर्स फोरम, डिस्कवरी नेटवर्क्स और बीबीसी न्यूज ने सरकार से इस नीति को लागू करने की तारीख स्थगित करने का अनुरोध किया था। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कानून की ओर से इसके लिए पर्याप्त समय दिया जा चुका है।

वहीं, विज्ञापन एजेंसियों ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे नेपाल के एडवर्टाइजिंग मार्केट को बढ़ाने के साथ ही नेपाली कलाकारों, खिलाड़ियों और अन्य सार्वजनिक हस्तियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने में मदद मिलेगी।

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हंसा रिसर्च ने रिपब्लिक टीवी के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा, बताई ये वजह

हंसा रिसर्च की ओर से कहा गया है कि मामला अब न्यायालय के अधीन है और नवंबर में इस पर सुनवाई होगी

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Thursday, 22 October, 2020
Last Modified:
Thursday, 22 October, 2020
Hansa Research

‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) द्वारा देश में टीवी दर्शकों की संख्या मापने के लिए घरेलू पैनल के प्रबंधन का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी ‘हंसा रिसर्च’ (Hansa Research) ने 'रिपब्लिक टीवी' के खिलाफ मुंबई की सिटी सिविल कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया है। 

इस संबंध में हंसा की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘10 अक्टूबर से रिपब्लिक टीवी ने अपने चैनल पर एक दस्तावेज को ‘हंसा रिपोर्ट’ बताते हुए कहा था कि इस रिपोर्ट में रिपब्लिक टीवी का उल्लेख कहीं नहीं है। रिपब्लिक टीवी ने इस दस्तावेज की सत्यता के बारे में हंसा रिसर्च के साथ जांच नहीं की और न ही उसने हंसा से उसके किसी भी दस्तावेज के सार्वजनिक प्रसारण के इस्तेमाल की अनुमति ली।‘

हंसा के नाम और इसकी कथित रिपोर्ट को बिना अनुमति के सार्वजनिक रूप से बार-बार इस्तेमाल किए जाने की बात कहते हुए हंसा ने 16 अक्टूबर को मुंबई के सिटी सिविल कोर्ट में एक मुकदमा दर्ज कराया। इस मुकदमे में हंसा ने रिपब्लिक टीवी द्वारा उसके नाम का इस्तेमाल किए जाने पर रोक लगाने की मांग की। हंसा टीवी की याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने इस मामले में औपचारिक सुनवाई के लिए 25 नवंबर 2020 की तारीख तय कर दी।  

इस बारे में हंसा रिसर्च के सीईओ प्रवीण निझारा का कहना है, ‘हमने औपचारिक रूप से 12 अक्टूबर 2020 को रिपब्लिक टीवी को एक नोटिस भेजा था, जिसमें उनसे अनुरोध किया गया था कि वे हमारे नाम का उपयोग न करें। इसके बावजूद रिपब्लिक टीवी ने टीवी पर हंसा के नाम का इस्तेमाल करना जारी रखा। ऐसे में हमारे पास कोई विकल्प न रहने पर हमने सिटी सिविल कोर्ट में वाद दायर कर रिपब्लिक टीवी द्वारा हंसा के नाम का इस्तेमाल किए जाने पर रोक लगाने की मांग की थी। यह मामला अब न्यायालय के अधीन है और इस पर नवंबर में सुनवाई होगी।’

हंसा की ओर से जारी विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है, ‘टीवी रेटिंग के डाटा को तैयार करने और उसका प्रसार करने का प्रबंधन ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) द्वारा किया जाता है। इसमें हंसा की भूमिका बार्क की ओर से कुछ निश्चित पैनल घरों में सेटअप और प्रबंधन तक सीमित है। इन पैनल होम से हंसा न तो व्युअरशिप इंफॉर्मेशन प्राप्त करती है और न ही उनकी समीक्षा करती है। व्युअरशिप के डाटा सीधे बार्क के पास जाते हैं।’

हंसा की ओर से छह अक्टूबर को एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। बार्क की विजिलेंस टीम की सहायता से दर्ज कराई गई इस एफआईआर में हंसा के पूर्व एम्प्लॉयी के खिलाफ गलत व्यवहार करने और लोगों के घरों में लगे मीटरों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था। इस बारे में हंसा का कहना है, 'इस एफआईआर की जांच मुंबई पुलिस द्वारा की जा रही है, जिसने इसे टीआरपी घोटाला करार दिया है। मुंबई पुलिस ने आठ अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि रिपब्लिक टीवी इसमें शामिल चैनल्स में से एक था।'  

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बिहार की राजनैतिक स्थिति के व्यंग्यात्मक पहलुओं पर नजर डालेगा ABP न्यूज का ये शो  

बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान यहां की राजनीति के बारे में हर दिलचस्प जानकारी अपने दर्शकों तक पहुंचाने के लिए एबीपी न्यूज ने एक बार फिर अपना व्यंग्यात्मक शो शुरू किया है

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Wednesday, 21 October, 2020
Last Modified:
Wednesday, 21 October, 2020
ABP News

बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां अपने पूरे जोरों-शोरों पर है। ऐसे में राजनीति के बारे में हर दिलचस्प जानकारी अपने दर्शकों तक पहुंचाने के लिए एबीपी न्यूज ने एक बार फिर अपना व्यंग्यात्मक शो ‘पोल खोल’ शुरू किया है, जो कि देश के राजनैतिक मामलों की मौजूदा स्थिति पर व्यंग्य करता है। 

नए सीजन में शेखर सुमन अपने तरीके से कथित ‘गंभीर राजनैतिक स्थिति’ के व्यंग्यात्मक पहलुओं पर रोशनी डालेंगे। बिहार से उनके जुड़ाव को देखते हुए एबीपी न्यूज ने इस जाने-माने भारतीय फिल्म अभिनेता को शो में मुख्य भूमिका दी है, ताकि अपनी बुद्धिमता और हास्य-रस के साथ इस नए सीजन को और भी रोचक बना सकें। शेखर सुमन, जोकि 2004 में शो की शुरुआत से ही इसकी मेजबानी कर रहे हैं, इस साल बिहार राज्य के प्रमुख मुद्दों पर रोशनी डालेंगे। 

‘पोल खोल’ एबीपी न्यूज की व्यापक चुनाव प्रोग्रामिंग का एक और महत्वपूर्ण संस्करण है जो न केवल दर्शकों को चुनाव से जुड़े हर पहलू की जानकारी देता है, बल्कि अनूठे कंटेंट के साथ बेजोड़ अनुभव भी प्रदान करता है।

बता दें कि यह शो 19 अक्टूबर से शुरू हो चुका है, जोकि सोमवार से शुक्रवार रात 10:30 से 11 बजे से प्रसारित किया जा रहा है।

इस मौके पर एबीपी नेटवर्क के सीईओ अविनाश पाण्डेय ने कहा, ‘एबीपी न्यूज हमेशा से स्वदेशी दृष्टिकोण के साथ व्यापक कंटेंट पेश करता रहा है। बिहार का राजनैतिक संघर्ष नजदीक आ रहा है, ऐसे में हम दर्शकों को उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करना चाहते हैं। हमें विश्वास है कि इस साल भी पोल खोल, दर्शकों को टीवी स्क्रीन से जोड़े रखने में कामयाब होगा।’    

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महिला सांसद ने चैनल पर लगाए गंभीर आरोप, लोकसभा स्पीकर तक पहुंचा मामला

क्योंझर (ओडिशा) से बीजू जनता दल की सांसद चंद्राणी मुर्मू ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखकर स्थानीय टीवी चैनल ‘ओटीवी’ (OTV) के खिलाफ शिकायत की है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 20 October, 2020
Last Modified:
Tuesday, 20 October, 2020
Channel

क्योंझर (ओडिशा) से बीजू जनता दल की सांसद चंद्राणी मुर्मू ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखकर स्थानीय टीवी चैनल ‘ओटीवी’ (OTV) के खिलाफ शिकायत की है। इस पत्र में देश की सबसे युवा सांसद ने चैनल के रिपोर्टर्स पर उनके आपत्तिजनक व मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ कर तैयार) वीडियो वायरल करने का आरोप लगाया है।

मुर्मू ने लोकसभा स्पीकर से ‘ओटीवी’ (OTV) के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्यवाही की मांग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ओटीवी मामले के आरोपितों को बचाने का प्रयास कर रहा है और 15 अक्टूबर से कई फेक न्यूज कार्यक्रमों का प्रसारण कर रहा है।

गौरतलब है कि इस मामले में 15 अक्टूबर को पुलिस ने चैनल के पत्रकार रमेश रथ को हिरासत में लिया था। हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया था और उनसे 21 अक्टूबर को पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया था।

यह भी पढ़ें: पुलिस ने रीजनल चैनल के पत्रकार को हिरासत में लिया, बताई ये वजह

इस मामले में पुलिस का कहना था कि रमेश रथ को वर्ष 2019 में लोकसभा चुनावों के दौरान सामने आई एक अश्लील क्लिप के कारण पकड़ा गया। पुलिस का कहना था कि पड़ताल में रथ का नाम सामने आया था। रथ पर आरोप है कि उन्होंने ही वीडियो की डिटेल्स मुहैया करवाई।

इस मामले में चैनल का कहना था कि ओडिशा की बीजेडी सरकार को बेनकाब करने के लिए पत्रकार के काम की वजह से उन्हें निशाना बनाने के लिए साजिश रची गई है। चैनल का कहना है कि उसे राज्य की नवीन पटनायक सरकार के कुप्रबंधन और बाढ़ के हालात की खबरें दिखाए जाने को लेकर निशाना साधा जा रहा है।

वहीं, पुलिस द्वारा 16 अक्टूबर को चैनल परिसर की तलाशी लेने के लिए पहुंचने की खबर भी सामने आई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस एक महिला सांसद के अश्लील वीडियो क्लिप के मामले में चैनल के कार्यालय की तलाशी लेना चाहती थी, जो 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान प्रसारित किया गया था।

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TRP घोटाला: मुंबई हाई कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में मांगा जांच का ब्योरा

रिपब्लिक टीवी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने हाई कोर्ट में कहा कि मुंबई पुलिस की एफआईआर में रिपब्लिक टीवी का आरोपित के रूप में उल्लेख नहीं किया गया है।

Last Modified:
Monday, 19 October, 2020
Mumbai High Court

टीआरपी घोटाले में मुंबई पुलिस की एफआईआर के खिलाफ ‘रिपब्लिक टीवी’ (Republic TV) की ओर से दायर याचिका पर मुंबई हाई कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान चैनल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने अदालत से कहा कि मुंबई पुलिस की एफआईआर में अभी तक रिपब्लिक टीवी का आरोपित के रूप में उल्लेख नहीं किया गया है।

इसके साथ ही साल्वे ने यह भी कहा कि यदि समन जारी किया जाता है तो ‘रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी अधिकारियों के सामने पेश होंगे और जांच में सहयोग करेंगे।

अदालत ने कहा कि वह इस मामले में पांच नवंबर को अपराह्न तीन बजे सुनवाई करेगी। इस मामले में संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह में की गई अपनी जांच का ब्योरा सीलबंद लिफाफे में चार नवंबर को जमा कराने के लिए कहा गया है।

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15 दिसंबर के बाद दिखाई नही देंगे ये दो मूवी चैनल्स

भारत में युवाओं के बीच लोकप्रिय लीनियर मूवी चैनल्स HBO और WB अब आने वाले समय में नहीं दिखाई देंगे

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 October, 2020
Last Modified:
Saturday, 17 October, 2020
Channels

भारत में युवाओं के बीच लोकप्रिय लीनियर मूवी चैनल्स HBO और WB अब आने वाले समय में नहीं दिखाई देंगे। वार्नर मीडिया ने घोषणा की है कि वह भारत और पाकिस्तान में HBO SD और HBO HD चैनल को बंद कर देगा। इस फैसले की घोषणा वार्नर मीडिया ने गुरुवार को की। वहीं इसके अलावा वॉर्नर मीडिया WB चैनल को भारत, पाकिस्तान, मालदीव और बांग्लादेश में 15 दिसंबर से बंद कर रहा है।

फिलहाल, किड्स चैनल ‘कार्टून नेटवर्क’ (Cartoon Network) और ‘पोगो’ (Pogo) को बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि इस क्षेत्र में स्थानीय एनीमेशन उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

वॉर्नर मीडिया के लिए साउथ एशिया में एंटरटेनमेंट नेटवर्क के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर सिद्धार्थ जैन ने कहा कि साउथ एशिया में HBO लीनियर मूवी चैनल के लिए 20 साल और WB लीनियर मूवी चैनल के लिए 10 साल सफल रहने के बाद अब इसे आगे चला पाना कठिन है। पे-टीवी इंडस्ट्री की पृष्ठभूमि और मार्केट की गतिशीलता में नाटकीय बदलाव आएं है। साथ ही कोविड-19 महामारी ने तेजी से बदलाव की जरूरतों पर बल दिया है।

उन्होंने कहा कि हम अपने सभी पार्टनर्स और फैन्स का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने उन सभी एम्प्लॉयीज का भी आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने इस चहेते ब्रैंड्स के लिए इतनी लगन से काम किया है।

बता दें कि वॉर्नरमीडिया के पास अपने किड्स चैनल्स के संचालन के लिए, उसके सेल्स व मार्केटिंग को मैनेज करने के लिए साथ ही सीएनएन इंटरनेशनल के डिस्ट्रीब्यूशन के लिए मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरू में कर्मचारी हैं।

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BARC India के फैसले के खिलाफ न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन, बताई ये वजह

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ ने न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप रेटिंग 12 सप्ताह तक न जारी करने के ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया के फैसले का विरोध किया है।

Last Modified:
Friday, 16 October, 2020
NBF

‘न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन’ (News Broadcasters Federation) ने न्यूज चैनल्स की व्युअरशिप रेटिंग 12 सप्ताह तक न जारी करने के ‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल’ (BARC) इंडिया के फैसले का विरोध किया है। ‘एनबीएफ’ का कहना है कि इस तरह का बड़ा फैसले लेने से पूर्व ‘एनबीएफ’ से सलाह नहीं ली गई।

इसके अलावा ‘एनबीएफ’ का यह भी कहना है कि बार्क के मीटर अपने ऑडियंस मीजरमेंट सिस्टम में अकेले न्यूज जॉनर को नहीं दिखाते हैं। यदि बार्क ईमानदारी से अपनी प्रणाली की समीक्षा करना और उसमें कुछ बदलाव करना चाहता है तो उसे जनरल एंटरटेनमेंट चैनल्स (GEC), स्पोर्ट्स, इन्फोटेनमेंट, मूवीज, म्यूजिक, किड्स, यूथ और लाइफस्टाइल सहित सभी जॉनर के लिए रेटिंग रोकनी चाहिए।

‘एनबीएफ’ के अनुसार, ‘हाल ही में एक ऐसे चैनल के बारे में जानकारी सामने आई है, जिसे टीआरपी में हेरफेर का दोषी पाया गया है और बार्क की अनुशासनात्मक समिति द्वारा उस पर जुर्माना लगाया गया है। एनबीएफ हैरान है कि उसी चैनल के एक सदस्य को बार्क के बोर्ड में शामिल किया गया है। अब यह मामला जनता के सामने है। बार्क के बोर्ड को स्वेच्छा से कम से कम एक वर्ष के लिए इस व्यक्ति को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में एग्जिक्यूटिव के पद से हटा देना चाहिए।’

‘एनबीएफ’ के जनरल सेक्रेट्री आर. जय कृष्णा का कहना है, ‘बार्क का यह फैसला एकतरफा, अलोकतांत्रिक है जो पूरे ब्रॉडकास्टिंग परिदृश्य में सिर्फ एक ही जॉनर को लक्षित और प्रभावित कर रहा है।’कृष्णा का कहना है, ‘इस फैसले से न्यूज ब्रॉडकास्टर्स पर काफी गंभीर प्रभाव पड़ेगा, जिन्होंने कमजोर अर्थव्यवस्था के बावजूद रेटिंग में काफी उछाल देखा है। कोविड-19 का संक्रमण रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन के कारण भी उनका रेवेन्यू काफी प्रभावित हुआ है।’  

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